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नोबेल मेरे लिए बनता है – US राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को बताया रोकथाम का कारण

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को व्यापार के माध्यम से सुलझाने का एक बार फिर दावा किया और कहा कि उन्हें ‘‘सात युद्धों को समाप्त कराने'' के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। ट्रंप ने कहा, ‘‘वैश्विक मंच पर हम एक बार फिर ऐसे काम कर रहे हैं जिससे हमें उस स्तर का सम्मान मिल रहा है जो पहले कभी नहीं मिला।'' ट्रंप ने शनिवार को ‘अमेरिकन कॉर्नरस्टोन इंस्टिट्यूट फाउंडर्स डिनर' के वार्षिक कार्यक्रम में कहा, ‘‘हम शांति समझौते करा रहे हैं और युद्ध रोक रहे हैं। तो हमने भारत-पाकिस्तान और थाईलैंड-कंबोडिया के बीच युद्ध को रोका है।'' उन्होंने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बारे में सोचिए, आप जानते हैं कि मैंने इसे कैसे रोका – व्यापार के जरिए। वे व्यापार करना चाहते हैं और मैं दोनों नेताओं का बहुत सम्मान करता हूं।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया, ‘‘जरा देखिए भारत-पाकिस्तान, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, कोसोवो-सर्बिया, इजराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, रवांडा-कांगो- हमने इन देशों के बीच के संघर्ष को रोक दिया और इनमें से 60 प्रतिशत को व्यापार के कारण ही रोका जा सका।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैंने भारत से कहा था कि देखिए आप दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। यदि आप युद्ध की शुरुआत करते हैं तो हम आपके साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे। मेरे इतना कहने पर वे रुक गए।'' ट्रंप ने कहा, जैसा कि उन्हें बताया गया था कि यदि वह रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को रोकने में सफल रहते है तो उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कहा, अच्छा, बाकी सातों का क्या? मुझे हर एक के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए तो उन्होंने कहा, अगर आप रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष रुकवा दें तो आपको नोबेल मिल जाना चाहिए। मैंने कहा कि मैंने सात युद्ध रोके हैं।''

भूकंप की आफत: पड़ोसी देश में आए झटके, मेघालय में भी हिली ज़मीन

ढाका  भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया, जिससे देश के मेघालय राज्य तक धरती हिल गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। बांग्लादेश में रविवार को चार तीव्रता का भूकंप का झटका आया है। बांग्लादेश में भूकंप आने के बाद इसके झटके मेघालय में भी महसूस किए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश से लगती मेघालय की सीमा के पास भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न 11.49 बजे भूकंप महसूस किया गया। उन्होंने कहा कि मेघालय में किसी भी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। वहीं, गुजरात के कच्छ में भी रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया। यहां 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। आईएसआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भूकंप दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर आया और इसका केंद्र भचाऊ से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। सुबह लगभग छह बजकर 41 मिनट पर भी कच्छ में 2.6 तीव्रता का भूकंप आया था। सुबह आए भूकंप का केंद्र धोलावीरा से 24 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि इसमें जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। कच्छ जिला ‘अत्यधिक जोखिम’ वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जहां कम तीव्रता के भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं। कच्छ में वर्ष 2001 में आया भूकंप पिछली दो शताब्दियों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप था। साल 2001 में आए भूकंप में लगभग 13,800 लोगों की मौत हो गई थी और 1.67 लाख लोग घायल हुए थे।  

H-1B वीजा शुल्क पर ट्रंप का नया नियम प्रभावी, जानें अब तक की पूरी कहानी

वॉशिंगटन अमेरिका आज से एच-1बी वीजा के लिए नए आवेदकों से एक लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपए) शुल्क वसूलेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस में इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। नए नियम आज (अमेरिकी समयानुसार) यानि 21 सिंतबर से लागू हो रहे हैं। ट्रंप सरकार के इस फैसले से प्रवासियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि व्हाइट हाउस ने नए नियमों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने शनिवार को स्पष्ट किया कि हाल ही में घोषित एक लाख डॉलर का एच-1बी वीजा शुल्क केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा और यह वार्षिक शुल्क नहीं है। वहीं, अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने भी स्पष्ट किया कि नया नियम केवल नए आवदेकों पर ही लागू होगा। यह स्पष्टीकरण राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वीजा फीस बढ़ाने के आदेश पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद आया है। व्हाइट हाउस ने दूर की भ्रम की स्थिति     यह कोई वार्षिक शुल्क नहीं है। यह एकमुश्त शुल्क है जो केवल नये एच-1बी आवेदन पर लागू होगा।     जिन लोगों के पास पहले से ही एच-1बी वीजा है और जो इस समय देश से बाहर हैं, उनसे पुनः प्रवेश के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क नहीं लिया जाएगा।     एच-1बी वीजा धारक देश से बाहर जा सकते हैं और पुनः प्रवेश कर सकते हैं। कल की घोषणा से उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।     यह केवल नए वीजा पर लागू होता है। नवीनीकरण पर नहीं और न ही वर्तमान वीजा धारकों पर।      यह प्रावधान सबसे पहले आगामी एच-1बी लॉटरी चक्र से लागू होगा। यूएससीआईएस ने भी नियमों को लेकर बनी अस्पष्टता को लेकर साफ की स्थिति यूएससीआईएस भी इस संबंध में एक्स पर पोस्ट कर नई जानकारी दी है। यूएससीआईएस ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के नए एच-1बी वीजा नियम केवल नए, संभावित आवेदनों पर लागू होते हैं, जो अभी तक दायर नहीं किए गए हैं। 21 सितंबर, 2025 से पहले प्रस्तुत आवेदन प्रभावित नहीं होंगे।' भारतीय दूतावास ने मदद के लिए जारी किया मोबाइल नंबर इस बीच, अमेरिका में भारतीय दूतावास आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए मोबाइल नंबर जारी किया है। दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिक मोबाइल नंबर +1-202-550-9931 (और व्हाट्सएप) पर कॉल कर सकते हैं। इस नंबर का उपयोग केवल तत्काल आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिकों द्वारा किया जाना चाहिए, न कि नियमित वाणिज्य दूतावास संबंधी पूछताछ के लिए।' नैस्कॉम ने सदस्य कंपनियों से किया एच-1बी धारकों को अमेरिका वापस लाने का आग्रह नैस्कॉम के उपाध्यक्ष शिवेंद्र सिंह ने कहा कि शीर्ष उद्योग निकाय ने अपनी सदस्य कंपनियों से आग्रह किया है कि उनके जो एच-1बी धारक इस वक्त अमेरिका से बाहर हैं, उनको तत्काल अमेरिका वापस लाएं। यह अपील खासतौर से एक दिन की समय सीमा के मद्देनजर की गई है। सिंह ने एच-1बी वीजा को अमेरिकी और भारतीय दोनों कंपनियों के संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। सिंह ने कहा, यह विशेष कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तकनीक इतनी तेजी से विकसित हो रही है। एआई और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें अमेरिका को नंबर एक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए जगह बना रही हैं। अमेरिकी नवाचार नेतृत्व को बनाए रखने की आवश्यकता है। यह कुछ ऐसा है जो कुछ समय के लिए व्यवस्था को बाधित करेगा, क्योंकि पर्याप्त संक्रमण समय नहीं दिया गया था। पेशेवरों के लौटने के लिए एक दिन की समय सीमा है। सिंह ने कहा, हमने अपनी सदस्य कंपनियों को सलाह दी है कि वे अमेरिका से बाहर रह रहे अपने कर्मचारियों को 21 सितंबर से पहले वापस लाने का प्रयास करें। नैसकॉम का मानना है कि इस तरह का महत्वपूर्ण कदम उठाने से पहले उद्योग के साथ और अधिक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। भारतीय एच-1बी धारकों ने दिवाली-शादियों के लिए स्वदेश यात्राएं की रद्द एच-1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी वाले आदेश के बाद अमेरिका में बसे भारतीयों में व्यापक दहशत, भ्रम और चिंता है। कई लोगों ने दिवाली और शादियों के लिए भारत यात्रा की अपनी योजना रद्द कर दी है। जहां कई लोगों ने भारत की उड़ान भरने से पहले अंतिम समय में अपनी यात्रा रद्द कर दी, वहीं भारत में पहले से मौजूद कई लोग स्पष्टता के अभाव में वापस लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक व्यक्ति अपनी शादी के लिए भारत आने वाला था और उसने इस घोषणा के बाद अनिश्चितता के बीच अपनी योजना रद्द कर दी है।   अमेजन के बाद एच-1बी वीजा का दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी टीसीएस: यूएससीआईएस अमेरिका के संघीय आंकड़ों के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 2025 तक 5,000 से अधिक स्वीकृत एच-1बी वीजा के साथ इस कार्यक्रम की दूसरी सबसे बड़ी लाभार्थी है। इस लिहाज से पहले स्थान पर अमेजन है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) के अनुसार, जून 2025 तक अमेजन के 10,044 कर्मचारी एच-1बी वीजा का इस्तेमाल कर रहे थे। दूसरे स्थान पर 5,505 स्वीकृत एच-1बी वीजा के साथ टीसीएस रही। इनके अलावा शीर्ष लाभार्थियों में माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प (5,189), मेटा (5,123), एपल (4,202), गूगल (4,181), कॉग्निजेंट (2,493), जेपी मॉर्गन चेज (2,440), वॉलमार्ट (2,390) और डेलॉइट कंसल्टिंग (2,353) हैं। शीर्ष 20 की सूची में इंफोसिस (2,004), एलटीआईमाइंडट्री (1,807), एचसीएल अमेरिका (1,728), विप्रो (1523) और टेक महिंद्रा अमेरिकाज (951) शामिल हैं। वीजा शुल्क का यह झटका ऐसे समय में आया है जब 283 अरब डॉलर का भारतीय आईटी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े आउटसोर्सिंग बाजार में अशांत कारोबारी माहौल से पहले ही जूझ रहा है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से अमेरिका में भारतीय आईटी और पेशेवर कर्मचारी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। जुलाई में, यूएससीआईएस ने कहा था कि उसे वित्तीय वर्ष 2026 के लिए कांग्रेस की ओर से निर्धारित 65,000 एच-1बी वीजा नियमित सीमा और 20,000 एच-1बी वीजा यूएस उन्नत डिग्री छूट तक पहुंचने के लिए पर्याप्त याचिकाएं प्राप्त हुई हैं।

H-1B वीजा विवाद: अमेरिका में 40,000 से ज्यादा नौकरीछूटने वाले कर्मचारियों की चिंता

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एच-1बी वीजा के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क नए आवेदकों के लिए है और उन्हें इस शुल्क का एकमुश्त भुगतान करना होगा। वाइट हाउस ने अपने इस फैसले की वजह बताते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों ने ही बड़े पैमाने पर अमेरिका के लोगों की छंटनी कर दी और उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को दे दी। वाइट हाउस ने कहा कि एक कंपनी को 5189 एच-1बी वीजा मिल गए तो उसने 16000 अमेरिकियों की छंटनी कर दी। एक अन्य कंपनी को 1698 एच-1बी वीजा मिले तो 2400 लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया। वाइट हाउस ने कहा कि एक अन्य कंपनी 2022 से 27000 अमेरिकियों की नौकरी छीन चुकी है। चौथी कंपनी ने 1000 लोगों को नौकरी से निकाला और उनकी जगह विदेशियों को भर्ती कर लिया। वाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंपनियां एच-1बी वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग कर रही थीं ऐसे में इसपर लगाम लगाना जरूरी है जिससे देश की सुरक्षा को खतरा ना पैदा हो। वहीं पुराने वीजा धारकों पर शुल्क लागू ना होना अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की बात है जो इस नए नियम से प्रभावित होने को लेकर चिंतित हैं, इनमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं । अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का नया एच-1बी वीज़ा शुल्क केवल नये आवेदकों पर लागू होगा। ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर की प्रभावी घोषणातिथि से पहले जमा किया गया एच1 बी वीजा आवेदन इससे प्रभावित नहीं होगा। इसके अलावा वर्तमान में अमेरिका से बाहर रहने वाले वीज़ा धारकों को भी देश में दोबारा प्रवेश के लिए शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। वाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बताया, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने का वादा किया था और यह समझदारी भरा कदम उसी का परिणाम है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उन अमेरिकी व्यवसायों को भी निश्चितता प्रदान करता है जो वास्तव में हमारे महान देश में बेहद कुशल कामगारों को लाना चाहते हैं, लेकिन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण उन्हें आगे नहीं आने दिया जा रहा है।’’ यूएससीआईएस निदेशक जोसेफ एडलो ने एक ज्ञापन में कहा कि ट्रंप की ओर से शुक्रवार को जारी की गई घोषणा केवल उन पर लागू होगी जो अब आवेदन करेंगे। यह घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो "उद्घोषणा की प्रभावी तिथि से पहले दायर किए गए आवेदनों के लाभार्थी हैं, वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों के लाभार्थी हैं, या जिनके पास वैध रूप से जारी एच-1बी गैर-आप्रवासी वीज़ा हैं।’’  

गुजराती महिला की हत्या का राज़ खुला, अमेरिका में पुलिस ने पकड़ा आरोपी

कैरोलीना  अमेरिका के साउथ कैरोलीना में गुजराती महिला किरन पटेल की हत्या के मामले में एक 21 साल के संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी का नाम जायेदान मैक हिल बताया गया है। बता दें कि 16 सितंबर को किरन पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ओरोपी ने एक ही दिन में दो लोगों पर गोली चलाई थी। पुलिस ने बताया कि 16 सितंबर को ही साउथ माउंटेन स्ट्रीट में एक शख्स पर गोली चलाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक उसी दिन आरोपी ने किरन पटेल पर भी हमला किया। वह एक फूड मार्ट की पार्किंग में थीं। जानकारी के मुताबिक वह गैस स्टेशन की मैनेजर थीं और उस वक्त कैश गिन रही थीं। आरोपी कैश रजिस्टर पर चढ़ गया और किरन पटेल को गोली मार दी। वह कैश लूटने के इरादे से आया था। किरन पटेल ने उसपर प्लास्टिक की कोई चीज मारी और भागने की कोशिश की। किरन पार्टिंग लॉट की तरफ भागीं। तभी आरोपी ने उन्हें गोली मार दी। वह वहीं पर गिर गईं और मौत हो गई। लुटेरा पहले वहां से भागने लगा लेकिन फिर वापस लौटा और जमीन पर पड़ी किरन पर एक बार फिर फायर किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो आसानी से हिल की पहचान कर ली गई। इसके बाद पुलिस साउथ चर्च स्ट्रीट स्थिति उसके घर पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हत्या के आरोप में उसे जेल भेज दिया गया है। बता दें कि अमेरिका में भारतीयों की हत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते दिनों एक भारतीय होटल मैनेजर का सिर काटकर हत्या कर दी गई थी। वहीं अमेरिका में ही एक भारतीय इंजीनयर की पुलिस की गोली से मौत हो गई।  

PM मोदी आज देंगे देश को तोहफ़ा, शाम 5 बजे करेंगे खास घोषणा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फिर एकबार देश को संबोधित करने जा रहे हैं। पीएम मोदी आज शाम पांच बजे राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं। कल नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। इसके बाद लोगों की जरूरत कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। पीएम मोदी के संबोधन के विषय को लेकर जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इस बात की संभावना है कि वह इस मौके पर वह देशवासियों के लिए कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से उन्होंने कहा था कि यह दिवाली लोंगों के लिए डबल गिफ्ट वाली होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने नोटबंदी और कोरोना काल में लॉकडाउन की घोषणा अपने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के माध्यम से की थी। पीएम मोदी ने कब-कब किया है राष्ट्र को संबोधित 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सेना की वीरता पर गर्व व्यक्त किया और देशवासियों को एकजुट रहने का आह्वान किया। 8 नवंबर 2016 को उन्होंने अचानक राष्ट्र को संबोधित कर 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की। यह उनके सबसे ऐतिहासिक और चर्चित संबोधनों में से एक माना जाता है। कोरोना महामारी के दौरान कई बार राष्ट्र को संबोधित किया। 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। बाद में ताली-थाली बजाने और दीया जलाने की अपील की, जिससे जनता को मनोबल और सामूहिक एकजुटता का संदेश मिला। वैक्सीन अभियान शुरू होने पर उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बताया। आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा 12 मई 2020 को राष्ट्र के नाम संबोधन में की गई। स्टार्टअप्स, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को भी कई बार संबोधनों के माध्यम से जनता तक पहुंचाया।  

H-1B Visa Update: सालाना नहीं, सिर्फ नए आवेदकों से लिया जाएगा एकमुश्त शुल्क

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने के बाद से वीजा धारकों में असमंजस की स्थिति थी। ऐसे में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को स्पष्ट किया कि वीजा पर एक लाख डॉलर फीस सिर्फ नए आवेदकों पर ही लागू होगी। यह स्पष्टीकरण राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वीजा फीस बढ़ाने के आदेश पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद आया है। एच-1बी वीजा का इस्तेमाल कंपनियां विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में नौकरी देने के लिए करती हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की होती है। व्हाइट हाउस के अधिकारी के अनुसार, 'एच-1बी फीस को लेकर कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं। लेकिन अगर यह लागू रही, तो कंपनियों को हर एच-1बी कर्मचारी के लिए एक लाख डॉलर तक चुकाने होंगे।' हालांकि अधिकारी ने साफ किया कि यह फीस सिर्फ नए आवेदकों से ली जाएगी। 21 सितंबर से पहले प्रस्तुत आवेदन नहीं होंगे प्रभावित वहीं, अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) भी इस संबंध में एक्स पर पोस्ट कर नई जानकारी दी है। यूएससीआईएस ने पोस्ट में कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप की नई एच-1बी वीजा आवश्यकता केवल नए, संभावित आवेदनों पर लागू होती है, जो अभी तक दायर नहीं किए गए हैं। 21 सितंबर, 2025 से पहले प्रस्तुत आवेदन प्रभावित नहीं होंगे।' केरोलिन लेविट ने भी साफ की स्थिति     यह 1 लाख डॉलर शुल्क वार्षिक नहीं है, बल्कि एकमुश्त (one-time) शुल्क है, जो केवल नये H-1B आवेदन पर लागू होगा।     जो लोग पहले से H-1B वीजा धारक हैं और फिलहाल देश से बाहर हैं, उन्हें दोबारा अमेरिका लौटने के लिए यह शुल्क नहीं देना होगा।     मौजूदा H-1B वीजा धारक सामान्य रूप से अमेरिका आ-जा सकते हैं, इस नई घोषणा से उनकी री एंट्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा।     यह नियम केवल नए वीज़ा पर लागू होगा,  नवीनीकरण या मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं।     यह प्रावधान सबसे पहले आगामी H-1B लॉटरी चक्र से लागू होगा। 21 सितंबर की रात से लागू होगा ट्रंप का आदेश ट्रंप के इस अचानक फैसले का अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर बहुत गहरा असर पड़ेगा। राष्ट्रपति का यह आदेश 21 सितंबर की रात 12:01 बजे (स्थानीय समयानुसार) से लागू होगा। जैसे ही यह घोषणा हुई, वीजा धारकों और कंपनियों में अफरा-तफरी मच गई। आव्रजन वकीलों और नियोक्ताओं ने सलाह दी कि जो एच-1बी वीजा धारक या उनके परिवारजन काम या छुट्टी के सिलसिले में अमेरिका से बाहर हैं, वे तुरंत अगले 24 घंटे में लौट आएं, वरना उन्हें अमेरिका में प्रवेश से रोका जा सकता है। ट्रंप की घोषणा के बाद भारतीयों ने भारत यात्रा की रद्द ट्रंप की इस घोषणा के बाद, अमेरिका में एच-1बी वीजा धारक कई भारतीयों ने भारत आने की अपनी यात्रा रद्द कर दी। कुछ लोग तो हवाई अड्डे पर उड़ान पकड़ने से पहले ही लौट गए, जबकि जो पहले से भारत में हैं, वे जल्द से जल्द वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं। दीपावली और साल के अंत की छुट्टियों से पहले आए इस आदेश ने परिवारों की योजनाएं बिगाड़ दी हैं। एच-1बी वीजा धारकों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस समय उनके बीच 'बेहद घबराहट' और 'चिंता' का माहौल है। तीन साल के लिए दिया जाता है एच-1बी वीजा फिलहाल, कंपनियां एच-1बी वीजा के लिए प्रायोजक बनने पर लगभग 2,000 से 5,000 डॉलर तक चुकाती हैं, जो कंपनी के आकार और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। एच-1बी वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए दिया जाता है और इसे तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह भारतीय तकनीकी पेशेवरों के बीच बेहद लोकप्रिय है। भारतीय दूतावास ने मदद के लिए जारी किया मोबाइल नंबर इस बीच, अमेरिका में भारतीय दूतावास आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिकों की मदद के लिए मोबाइल नंबर जारी किया है। दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिक मोबाइल नंबर +1-202-550-9931 (और व्हाट्सएप) पर कॉल कर सकते हैं। इस नंबर का उपयोग केवल तत्काल आपातकालीन सहायता चाहने वाले भारतीय नागरिकों द्वारा किया जाना चाहिए, न कि नियमित वाणिज्य दूतावास संबंधी पूछताछ के लिए।'  

नौगाम सेक्टर में गोलाबारी, LoC पर पाकिस्तान ने तोड़ा युद्धविराम

जम्मू – कश्मीर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर इस हफ्के की शुरुआत में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब पाकिस्तानी सैनिकों ने छोटे हथियारों से गोलीबारी की। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कई राउंड फायर किए। हालांकि किसी तरह की हताहत की सूचना नहीं है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी चौकियों से कुपवाड़ा जिले के नौगाम सेक्टर में चार राउंड फायरिंग की गई। इसके बाद भारतीय जवानों ने करीब बीस राउंड फायर कर जवाब दिया। सेना के सूत्रों का कहना है कि इस घटना को औपचारिक रूप से सीजफायर उल्लंघन नहीं माना जा रहा है। अभी तक सेना की ओर से इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश को भारतीय सेना ने नाकाम किया था। उस दौरान भी दोनों ओर से छोटे हथियारों से भारी गोलीबारी हुई थी। सेना ने बयान जारी कर बताया था कि 1 सितंबर को सुबह लगभग 5:30 बजे व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी। सतर्क जवानों ने तुरंत फायरिंग की जिससे घुसपैठ की कोशिश विफल हो गई। इसके बाद इलाके में निगरानी और गश्त को और मज़बूत किया गया है ताकि किसी भी नए प्रयास को समय रहते रोका जा सके। सेना का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर लगातार चौकसी बढ़ाई जा रही है। सभी चौकियों को डोमिनेशन मोड में रखा गया है, यानी हर गतिविधि पर नजर रखने और किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौते को फिर से लागू करने पर सहमति बनी थी। उस समय से सीमा पर अपेक्षाकृत शांति बनी रही थी, लेकिन हाल के महीनों में घुसपैठ और फायरिंग की घटनाओं ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। इस बात की संभावना है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी और पाकिस्तान के भीतर आतंकियों की हरकतों के बाद नियंत्रण रेखा पर इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।  

गायक जुबिन गर्ग के मैनेजर के खिलाफ मामला दर्ज, पत्नी बोलीं– भाई जैसा था रिश्ता

गुवाहाटी दिवंगत गायक जुबिन गर्ग का पार्थिव शरीर सिंगापुर से गुवाहाटी लाया गया है। उनके घर से लेकर एयरपोर्ट तक श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा खुद उनके पार्थिव शरीर को लेने दिल्ली गए थे। वहीं सीएम ने कहा है कि जुबिन की मौत की जांच की जाएगी। इस सिलसिले में जुबने के मैनेजर समेत दो लोगों के खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज की गई है। वहीं जुबिन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके भावुक अपील की है। उन्होंने जुबिन के फैन्स के प्रति आभार जताते हुए कहा, आप सबने उन्हें बहुत आशीर्वाद दिया। मुझे आशा है कि उनका अंतिम संस्कार भी शांतिपूर्ण ढंग से होगा। प्रशासन की पूरी मदद मिल रही है। जुबिन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर गरिमा ने कहा, सिद्धार्थ जुबिन के भाई जैसे हैं। आप सबको याद होगा कि 2020 में जब जुबिन की सर्जरी हुई थी और उन्हें इलाज के लिए मुंबई ले जाना पड़ा था। लॉकडाउन के वक्त सब बंद था तब सिद्धार्थ ने ही हमारी मदद की। यहां तक कि वही बस से जुबिन को मुंबई से वापस लाए। उन्होंने कहा, जुबिन हमेशा सिद्धार्थ के साथ खड़े रहते थे। मैं यही चाहती हूं कि सिद्धार्थ जुबिन की अंतिम यात्रा में शामिल हों और आप लोग भी उनके प्रति किसी तरह के नकारात्मक विचार ना रखें। मुझे भी सिद्धार्थ के सपोर्ट की जरूरत है और उनके बिना यह सब हैंडल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि जुबिन को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर से लेकर एयरपोर्ट तक जन सैलाब उमड़ पड़ा।असम के पुलिस महानिदेशक हरमीत सिंह और गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त पार्थसारथी महंत एंबुलेंस के आगे-आगे चलते हुए वाहन के लिए रास्ता बनाते देखे गए। जुबिन ने 40 भाषाओं में 38 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। उनका पार्थिव शरीर भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रखा गया है। असम सरकार उनके अंतिम संस्कार को लेकर फैसला लेगी। असम सरकार ने उनकी मौत पर राज्य में तीन दिन का शोक घोषित किया है। असम के सीएमओ की तरफ से कहा गया है कि तीन दिन कोई भी आधिकारिक मनोरंजन, समारोह या फिर उत्सव नहीं होगा।  

अगर बगराम एयरबेस नहीं लौटा तो अंजाम बुरा होगा: डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बगराम सैन्य अड्डे को अमेरिका को सौंपने से इनकार करने पर तालिबान को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को 'खराब बातें ' करने की धमकी दी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा, "अगर अफ़ग़ानिस्तान बगराम एयरबेस को इसे बनाने वालों, यानी अमेरिका को वापस नहीं करता, तो बहुत बुरा होने वाला है!!" दो दिन पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि बगराम एयरबेस को छोड़ देना जो बाइडेन प्रशासन की बड़ी गलती थी और इसे सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा था कि बगराम एयरबेस चीन के करीब है और अमेरिका के लिए बेहद जरूरी है इसलिए अमेरिकी फौज की अफगानिस्तान में वापसी होगी। ट्रंप के इस बयान के बाद अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने युद्ध के बाद देश में बगराम एयरबेस पर पुनः कब्जा करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान की आलोचना की और कहा कि हम अफगान अपने देश में विदेशी सैन्य उपस्थिति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। शुक्रवार को अफगानिस्तान के सरकारी रेडियो और टेलीविजन (आरटीए) ने इसकी जानकारी दी थी। तालिबानी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ राजनयिक जलाली के हवाले से कहा कि अपने पूरे इतिहास में अफगानों ने कभी भी अपनी धरती पर विदेशी सैन्य की उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया है। अफगानिस्तान और अमेरिका को द्विपक्षीय सम्मान एवं साझा हितों के मद्देनजर आर्थिक और राजनीतिक संबंधों पर सहयोग करने की जरूरत है। बता दें कि काबुल से 50 किलोमीटर उत्तर बगराम एयरबेस पर अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन बल 20 साल से यहां काबिज थे। इस एयरबेस ने अमेरिकी सैनिकों के लिए मुख्य सैन्य अड्डे के रूप में अगस्त 2021 तक कार्य किया। अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना के हटने के बाद अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार के पास अब इसका नियंत्रण है। अमेरिका के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अगर बगराम एयरबेस पर दोबारा कब्जा किया जाता है तो इसके लिए करीब 10 हजार सैनिकों की जरूरत होगी। ट्रंप ने कहा था कि उनकी बगराम एयरबेस को लेकर अफगानिस्तान से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा था कि अगर अफगानिस्तान नहीं मानता है तो वह अपने ढंग से रास्ता निकालेंगे।