samacharsecretary.com

धरती का कहर! सूडान में भूस्खलन से गांव तबाह, 1000 लोगों की जान गई

  खारर्तूम  पश्चिमी सूडान के Marra Mountains इलाके में भीषण भूस्खलन ने एक पूरे गांव को तबाह कर दिया. इस हादसे में कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है. यह जानकारी सोमवार को सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी ने एक बयान में दी है. सूडानी मूवमेंट ने का नेतृत्व अब्दुलवाहिद मोहम्मद नूर कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि कि यह हादसा 31 अगस्त को हुआ. क्षेत्र में लगातार कई दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिसके बाद यह भूस्खलन आया. मूवमेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि गांव अब पूरी तरह से जमीनदोज हो चुका है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे मृतकों के शवों को निकालने और प्रभावित परिवारों को सहायता देने के लिए तुरंत कदम उठाएं. संगठन ने यह भी कहा कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. वैश्विक समुदाय से मदद की अपील दारफुर क्षेत्र में स्थित इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले इस आंदोलन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से पीड़ितों के शवों को बरामद करने में मदद की अपील की है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। उत्तरी दारफुर राज्य में सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच चल रहे युद्ध से भागकर निवासियों ने मार्रा पर्वतीय क्षेत्र में शरण ली है। यहां भोजन और दवाइयां ना होने से लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सूडान में बीते दो साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी के संकट से जूझ रही है। इसके चलते लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। उत्तरी दारफुर राज्य की राजधानी अल-फशीर पर भी लगातार गोलाबारी हो रही है। सूडान में दो साल से जारी है गृहयुद्ध यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब सूडान पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सूडानी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच पिछले दो साल से जारी गृहयुद्ध ने देश की स्थिति और बिगाड़ दी है. गृहयुद्ध से बचने के लिए उत्तर दारफुर राज्य से बड़ी संख्या में लोग Marra Mountains में शरण लेने पहुंचे थे. हालांकि, यहां खाद्य सामग्री और दवाइयों की भारी कमी है. सूडान में आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में गृहयुद्ध ने सूडान की आबादी पर गहरा असर डाला है. आधे से ज्यादा लोग भुखमरी के संकट का सामना कर रहे हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. उत्तर दारफुर की राजधानी अल-फाशिर भी लगातार हमलों की चपेट में है. SLM/A ने कहा कि भूस्खलन की यह त्रासदी देश की मौजूदा मानवीय स्थिति को और भयावह बना रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.

बेंगलुरु के रेंटल रेट्स पर हंगामा, 70,000 किराया-5 लाख डिपॉजिट से भड़की बहस

बेंगलुरु बेंगलुरु में घरों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने एक बार फिर बहस छेड़ दी है. हाल ही में, शहर के एक इलाके में एक अपार्टमेंट की लिस्टिंग ने Reddit पर खूब हलचल मचाई. पूर्वी बेंगलुरु के Panathur इलाके में एक 2BHK फ्लैट का मासिक किराया 70,000 और 5 लाख का डिपॉजिट मांगा गया है. Reddit पर शेयर की गई इस पोस्ट पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि पहले से ही आवास संकट से जूझ रहे टेक हब में इतना महंगा किराया कौन दे पाएगा.  लोग यूरोप से कर रहे हैं तुलना लोग इस फ्लैट की तुलना यूरोपीय शहरों से कर रहे हैं. वे मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि मकान मालिक को लगता है कि महंगा फर्नीचर लगा देने से किराया दोगुना करना जायज है. कुछ लोगों का मानना है कि अब 'बेंगलुरु और मुंबई में कोई फर्क नहीं रह गया है. यह मामला तब सामने आया जब एक Reddit यूजर ने 'इंडियन रियल एस्टेट' कम्युनिटी में इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया. लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि यह फ्लैट ऐसे इलाके में है, जो अपने ट्रैफिक जाम और बाढ़ की समस्या के लिए बदनाम है, फिर भी इसका किराया इतना ज्यादा है. इस लिस्टिंग ने बेंगलुरु में रहने की बढ़ती लागत और मकान मालिकों की मनमानी पर एक नई बहस को जन्म दिया है.  जिस Reddit यूजर ने यह पोस्ट किया था, उसने लिखा, "₹70,000 का किराया? यह तो कई यूरोपीय अपार्टमेंट से भी ज्यादा है." उसने Panathur को "सोमालियाई भारत की परिभाषा" बताया और इस किराए को "पूरी तरह से बेतुका" कहा. इस पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने इस कीमत का मजाक उड़ाया और इसकी वजह पर सवाल उठाए. एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, "लोग अपनी ऑफिस के पास होने के कारण इस छोटे से घर के लिए इतना ज्यादा पैसा देते हैं, लेकिन रेलवे अंडरपास पर फंस जाते हैं." इस इलाके में अक्सर लगा रहता है जाम एक और व्यक्ति ने लिखा, "एक ऐसे इलाके के लिए ₹70,000 का किराया, जहां हमेशा ट्रैफिक जाम रहता है… वाह! मालिक को सलाम". कुछ स्थानीय लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी. एक यूजर ने बताया, "मैं SDA में रहता हूं और 41,000 किराया देता हूं. मुझे नहीं लगता कि कोई यहां 70,000 किराया देगा." उसने यह भी अनुमान लगाया कि जल्द ही इस कीमत को कम करना पड़ेगा. Panathur में इसी तरह के अपार्टमेंट का किराया आमतौर पर 40,000 से 45,000 के बीच रहता है, जिससे 70,000 का किराया और इतना ज्यादा डिपॉजिट काफी अजीब लगता है. इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर से बेंगलुरु में घर ढूंढने की समस्या को उजागर किया है, खासकर उन इलाकों में जो टेक कंपनियों के पास हैं. इन जगहों पर मांग तो बहुत है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है और किराए की कीमतें भी मनमानी हैं.

ट्रंप को आई अक्ल? PM मोदी के कदम और US एंबेसी की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली चीन में SCO शिखर सम्मेलन के बैनर तले जब दुनिया की तीन महाशक्तियां मिल रही हैं तो इसका प्रभाव अमेरिका तक देखने को मिल रहा है. भारत, चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्षों पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात के बीच भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से एक बेहद अहम पोस्ट किया गया है. इस ट्वीट की टाइमिंग और इसका कंटेट भारत-अमेरिका संबंधों के लिए निर्णायक है.  भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से किए गए इस पोस्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है, जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है.  इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का एक बयान भी है. इसमें उन्होंने कहा है कि भारत और अमेरिका के लोगों के बीच गहरी दोस्ती हमारे संबंधों का आधार है.  भारत में अमेरिकी दूतावास का ये ट्वीट तब आया है जब सोमवार सुबह ही चीन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई है. ये मुलाकात तब हो रही है जब ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का हैवी टैरिफ लगाया है और ट्रंप के सलाहकार और रणनीतिकार भारत के खिलाफ सख्त बयान दे रहे हैं.  चीन के तियानजिन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात की चर्चा दुनिया की राजनीति और कूटनीति को प्रभावित करने वाले हर देश की राजधानियों में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 सितंबर 2025) सुबह को SCO के संबोधन में कहा कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आउटडेटेड फ्रेमवर्क्स में कैद रखना भावी पीढ़ियों के प्रति घोर अन्याय है. उन्हें दुनिया को बदलाव को स्वीकार करने का संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के बहुरंगी सपनों को हम पुराने जमाने की ब्लैक-एंड व्हाइट स्क्रीन पर नहीं दिखा सकते. इसके लिए स्क्रीन बदलनी होगी.  प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में रिफॉर्म्स का आह्वान करते हुए कहा कि इसकी 80वीं वर्षगांठ पर हम इसकी शुरुआत कर सकते हैं.  SCO में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी गर्मजोशी भरी मुलाकात की. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में बैठकर मीटिंग वैन्यू तक पहुंचे. इसके बाद अमेरिकी दूतावास से ये ट्ववीट आया है. अमेरिकी दूतावास ने इस ट्वीट में भारत के साथ व्यापारिक साझीदारी की दुहाई दी है. इस पोस्ट में भारत में अमेरिकी दूतावास ने लिखा है, "संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है — जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. इस महीने हम उन लोगों, प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं जो हमें आगे बढ़ा रहे हैं. नवाचार और उद्यमिता से लेकर रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों तक, यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है." आगे इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान है. इस बयान में रुबियो ने कहा है कि, 'दोनों देशों के लोगों के बीच स्थायी मैत्री हमारे सहयोग का आधार है और यह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, क्योंकि हम अपने आर्थिक संबंधों की अपार संभावनाओं को साकार करते हैं.' चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO के संबोधन में अमेरिका का नाम लिए बिना 'चौधराहट''शीत युद्ध मानसिकता' और 'धमकाने वाली प्रथाओं' का विरोध करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा, "हमें विश्व के एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय स्वरूप, तथा सभी के लिए लाभकारी और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करनी चाहिए और वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और समतापूर्ण बनाना चाहिए." शी जिनपिंग की भावनाओं से सहमति जताते हुए रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने SCO से यूरोप और एशिया में सुरक्षा की एक "नई प्रणाली" बनाने का आह्वान किया. उन्होंने इसे पश्चिमी नेतृत्व वाले गठबंधनों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका वे लंबे समय से विरोध करते रहे हैं. 

मौसम विभाग का अलर्ट: सितंबर में भारी बारिश, इन फसलों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली अगस्त का पूरा महीना देश के विभिन्न राज्यों के लिए मॉनसूनी बारिश से भीगा रहा तो वहीं कई राज्यों में बाढ़ के प्रकोप ने रिकॉर्ड तोड़े हैं. अब सितंबर में भारत के किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा? देश में बारिश की क्या  स्थिति होगी? इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जारी किए हैं.  सितंबर में कैसा रहेगा मौसम? IMD का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है. लेकिन, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों समेत दक्षिण भारत के कुछ दूरदराज के इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर 2025 में पूरे देश में मासिक औसत वर्षा दीर्घावधि औसत 109% (सामान्य से अधिक) रहने की संभावना है. साल 1971 से 2020 के बीच भारत में सितंबर महीने में बारिश का औसत आंकड़ा 167.9 मिमी रहा है. इन फसलों के लिए किसानों को रहना होगा सतर्क सामान्य से अधिक बारिश कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. भारत में ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को नुकसान हो सकता है. दरअसल, इन फसलों की कटाई आमतौर पर मध्य सितंबर से की जाती है. कितना रहेगा तापमान? तापमान के मामले में, सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. जबकि पूर्व-मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों और पश्चिमी तटीय इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. औसत न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश हिस्सों में यह सामान्य से अधिक या सामान्य के करीब रहने की संभावना है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से कम रह सकता है. किसानों के लिए राहत की खबर सामान्य से अधिक बारिश खरीफ की फसलों के लिए अच्छी है और इससे बंपर पैदावार की उम्मीद बढ़ सकती है.सितंबर का यह मौसम पूर्वानुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खरीफ फसलों के सीजन का चरम समय है. सामान्य से अधिक बारिश उन फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जिन्हें अधिक पानी की जरूरत होती है. हालांकि, कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी बना रह सकता है. वहीं, पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी भारत में कम बारिश का खेती पर असर भी पड़ सकता है.  

ड्रम फटने से सूरत की मिल में लगी आग, 2 की मौत, 22 घायल

गुजरात  सूरत के पलसाना इलाके के जोलवा गांव में सोमवार को एक कपड़ा मिल में भीषण हादसा हो गया। मिल में काम के दौरान अचानक एक ड्रम फट गया, जिससे जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि मिल की दीवारें तक हिल गईं और अंदर काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। धमाके के तुरंत बाद मिल के अंदर आग लग गई। आग की लपटें और घना धुआं देखकर मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। लेकिन इस भयावह हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि करीब 22 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन लपटें बार-बार भड़कती रहीं। आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। धमाके से मची भगदड़ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के वक्त का मंजर बेहद भयावह था। आग और धुएं के कारण मिल के अंदर भगदड़ मच गई। धुएं का गुबार इतना घना था कि दूर-दूर तक दिखाई देना मुश्किल हो गया। पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। फिलहाल धमाके की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। प्रशासन और फायर डिपार्टमेंट की टीम मामले की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि ड्रम में कोई रासायनिक पदार्थ हो सकता है, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। 

पीएम मोदी के हर एक्शन ने भेजा संदेश: SCO समिट में हाथ मिलाना और पुतिन से गले मिलना चर्चा में

नई दिल्ली चीन के तियानजन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज अलग ही दिखा, जिसमे साफ संदेश छिपा था कि कौन भारत का करीबी दोस्त है और कौन नहीं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से गले मिलना, चीनी राष्ट्रपति शि चिनफिंग से हाथ मिलाना, तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआम की पीठ थपथपाना और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर देखना तक नहीं, ये सब इशारे अपने आप में काफी कुछ कह गए। 45 मिनट तक कार में साथ थे पीएम मोदी-पुतिन समिट में पीएम मोदी और पुतिन की नजदीकी सबसे अलग दिखी। दोनों नेता एक ही गाड़ी में साथ पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, पुतिन करीब 10 मिनट तक पीएम मोदी का इंतजार करते रहे और फिर दोनों 45 मिनट तक कार में बैठकर बातचीत करते रहे। बाद में उनकी द्विपक्षीय बैठक भी एक घंटे से ज्यादा चली। इसके अलावा, कई मौकों पर पीएम मोदी और पुतिन हंसी-मजाक भी करते नजर आए। इसी दौरान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ किनारे खड़े नजर आए और वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पीएम मोदी और पुतिन गहरी बातचीत में डूबे हुए आगे बढ़ गए, जबकि शरीफ सिर्फ देखते रह गए। पाकिस्तानी पीएम को किया नजरअंदाज समिट में पीएम मोदी का शरीफ को नजरअंदाज करना ही काफी नहीं था, बल्कि अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला सिर्फ भारत की आत्मा पर हमला नहीं था, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए चुनौती है। पीएम मोदी ने SCO देशों से अपील की है कि वे आतंकवाद के खिलाफ डबल स्टैंडर्ड छोड़े और एकजुट होकर काम करें। यह बयान शरीफ की मौजूदगी में दिया गया, जिससे संदेश और भी तीखा हो गया। तुर्किये के राष्ट्रपति की थपथपाई पीठ तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन से भी पीएम मोदी ने गर्मजोशी दिखाई। उन्होंने उनसे हाथ मिलाया और पीठ थपथपाई। यह सीन काफी खास था क्योंकि तुर्किये अक्सर पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होता है और भारत के साथ मतभेद रखता है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ भी पीएम मोदी की बातचीत हंसी-मजाक भरी रही। अमेरिका की भारी टैरिफ नीति के बीच इन मुलाकातों ने यह संदेश दिया कि भारत बड़े खिलाड़ियों के साथ रिश्ते मजबूत करने में आगे हैं। भारत की बातों को मिली अहमियत समिट के अंत में जारी तियानजन घोषणा में भी भारत की बातों को अहमियत मिली। इसमें 22 अप्रैल को पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की गई और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई गई।  

भारत बना संकट में सहारा, अफगानिस्तान को भेजी राहत सामग्री और तंबू

नई दिल्ली  अफगानिस्तान में रविवार देर रात आए भीषण भूकंप ने पूर्वी इलाकों में जमकर तबाही मचाई है। रिक्टर स्केल पर 6.0 तीव्रता वाले इस भूकंप ने नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर और कुनार प्रांत के कई कस्बों को प्रभावित किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई गांवों में भारी तबाही हुई है। इस विनाशकारी आपदा के बाद भारत ने तत्परता से राहत सहायता भेजी है। भारत सरकार की ओर से 1,000 फैमिली टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री काबुल पहुंचाई गई है। इसके अलावा, आने वाले दिनों में और अधिक राहत सामग्री भेजी जाएगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया, "आज अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी से बात की। भूकंप में हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। भारत ने आज काबुल में 1000 परिवारों के लिए तंबू पहुंचाए हैं। भारतीय मिशन द्वारा काबुल से कुनार तक 15 टन खाद्य सामग्री भी तुरंत पहुंचाई जा रही है। कल से भारत से और राहत सामग्री भेजी जाएगी। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस कठिन समय में भारत अफगानिस्तान के साथ है।" प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "अफगानिस्तान में आए भूकंप में हुई जानमाल की हानि से गहरा दुख हुआ है। इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं, और हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। भारत प्रभावित लोगों को हर संभव मानवीय सहायता और राहत प्रदान करने के लिए तैयार है।" तालिबान सरकार का बयान तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार, भूकंप ने पूर्वी अफगानिस्तान के कई हिस्सों में तबाही मचाई है। सैकड़ों मकान ढह गए हैं और राहत एवं बचाव कार्य जारी है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके जलालाबाद और कुनार प्रांत के कस्बे बताए जा रहे हैं।  

पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पांच सैनिक शहीद

इस्लामाबाद  पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के दीमर जिले में सोमवार को पाकिस्तानी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी पांचों क्रू सदस्य मारे गए। स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। पाकिस्तानी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह हेलीकॉप्टर दीमर जिले के चिलास कस्बे में एक नवनिर्मित प्रस्तावित हेलिपैड पर परीक्षण लैंडिंग कर रहा था, तभी हादसा हो गया। दीमर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अब्दुल हामिद ने कहा, “रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है। पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत कार्य जारी है।” हादसे के तुरंत बाद एफसीएनए कमांडर, डीजी जीबी स्काउट्स, दीमर के कमिश्नर और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू दल जलते हुए मलबे को बुझाने में जुटे रहे। अधिकारियों ने बताया कि हादसे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन प्राथमिक रूप से “तकनीकी खराबी” को कारण माना जा रहा है। सूचना अधिकारी फराक ने इस दुर्घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं, स्थानीय नेता हाजी गुलबर खान ने भी पुष्टि की कि “हादर क्षेत्र में सेना का एविएशन हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ।” उन्होंने चिलास अस्पताल में आपातकाल लगाने और सभी चिकित्सा कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात रहने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही सप्ताह पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में एक और सेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें दो पायलट और तीन क्रू सदस्य मारे गए थे। वह हेलीकॉप्टर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री लेकर गया था। साल 2024 में भी खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान में एक पेट्रोलियम कंपनी का हेलीकॉप्टर श्वा ऑयल फील्ड के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत और आठ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

अमित शाह पहुंचे बाढ़ग्रस्त इलाके, पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में बारिश और भूस्खलन के चलते हालात बेहद खराब हो गए हैं. लगातार हो रही बारिश से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच सोमवार (1 सितंबर) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू का दौरा किया बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की. मंत्री ने उन्हें राहत एवं पुनर्वास मुहैया कराए जाने का आश्वासन भी दिया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री के साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा भी मौजूद थे. जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात की जानकारी दी. बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों का जायदा लेने शाह रविवार रात जम्मू पहुंचे थे.   शाह ने की बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात अमित शाह ने जम्मू संभाग में बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने चक मांगू गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की साथ ही तवी पुल, शिव मंदिर और जम्मू में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए घरों का भी निरीक्षण किया. अधिकारियों ने बताया कि मंत्री ने ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें उचित राहत एवं पुनर्वास मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया. गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक की गई जिसमें ताजा स्थिति की समीक्षा की गई. मंत्री ने आदेश दिया कि मौसम विभाग और NDMA डेटा एनालिटिक्स और AI के उपयोग से बादल फटने के कारणों का अध्ययन करें. शाह ने GLOF Early Warning System के क्रिटिकल रिव्यू करने की जरूरत पर जोर दिया.   गृह मंत्रालय की सर्वेक्षण टीमें लेंगी नुकसान का जायजा अमित शाह ने हाल की प्राकृतिक आपदा की घटनाओं में हुई जनहानि पर दुख व्यक्त किया. साथ ही कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है और सुरक्षा, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण को सुगम बनाने के लिए त्वरित राहत, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है. शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय की सर्वेक्षण टीमें जल्द ही यहां नुकसान का जायजा लेने आएंगी और उसके बाद त्वरित सहायता प्रदान की जाएगी. शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सभी एजेंसियों ने मिलकर संभावित नुकसान को बहुत कम किया है और समन्वित प्रयासों के साथ हम कई जानें बचाने में सफल हुए हैं, लेकिन व्यवस्था को और भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. 130 से ज्यादा लोगों की मौत, 33 लापता बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ में 14 अगस्त से किश्तवाड़, कठुआ, रियासी और रामबन जिलों में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है वहीं 33 लोग लापता हैं. मृतकों में 34 तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो 26 अगस्त को माता वैष्णो देवी मंदिर जाते समय भूस्खलन की चपेट में आ गए थे. जम्मू और अन्य निचले इलाकों में बीते 26-27 अगस्त को मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी जिससे भारी नुकसान पहुंचा है.  

किसानों की शिकायतों, सुझाव व अन्य मदद के लिए एक समर्पित पोर्टल रहेगा : शिवराज सिंह चौहान

किसानों के हित में सभी अधिकारी पूरी पारदर्शिता, विश्वसनीयता व संवेदनशीलता से करें काम: शिवराज सिंह चौहान नकली या घटिया खाद-बीज, कीटनाशक संबंधी शिकायतों का प्राथमिकता से हो समाधान: शिवराज सिंह चौहान किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सिर्फ प्रमाणित बायोस्टियुमिलेंट ही बिकें –  शिवराज सिंह चौहान   नई दिल्ली  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक कर, किसानों से कॉल सेंटर एवं अन्य पोर्टल्स के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों के समाधान के संबंध में समीक्षा की। बैठक में श्री शिवराज सिंह ने अलग-अलग पोर्टल की जगह किसानों की सुविधा के लिए उनकी शिकायतों, सुझाव तथा अन्य सहायता के लिए एक ही समर्पित पोर्टल बनाने और समस्याओं का जल्द से जल्द समुचित निराकरण करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं नियमित रूप से किसानों से मिली शिकायतों की समीक्षा करेंगे, ताकि उन्हें त्वरित राहत प्रदान की जा सकें।   किसानों से प्राप्त शिकायतों व हेल्पलाइन नंबर पर आ रही कॉल्स को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने गंभीरता दिखाते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के हित में सभी अधिकारी पूरी पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं संवेदनशीलता से काम करते हुए व्यवस्था को और सुदृढ करें। व्यवस्था ऐसी होना चाहिए, जिससे कि किसानों की शिकायतों का रीयल टाइम में उचित समाधान हो सकें। हम सभी की कोशिश यहीं होनी चाहिए कि किसान हर हाल में खुशहाल रहें और खेती समृद्ध हो। बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों से, किसानों से मिलने वाली शिकायतों की जानकारी ली, जिसमें अनेक शिकायतें नकली या घटिया खाद-बीज एवं कीटनाशक के संबंध में हैं। श्री  शिवराज सिंह ने इन शिकायतों का समाधान प्राथमिकता से करने का निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें राज्यों में प्रवास के दौरान भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं, किसानों को हमें लुटने से बचाना चाहिए और इसके लिए अमानक खाद-बीज, कीटनाशक की बिक्री पर सख्ती से रोक लगानी होगी। केंद्र के अधिकारी अपने स्तर पर कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकारों के साथ मिलकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि हमारे किसान भाई-बहनों को राहत मिल सकें। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों की इन समस्याओं को हल करने में राज्यों की सहभागिता आवश्यक हो। वे स्वयं इस संबंध में मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं, आगे वर्चुअल माध्यम से भी राज्यों से चर्चा करेंगे, ताकि किसानों को पूरी तरह से राहत मिल सकें। अवैध बायोस्टियुमिलेंट (जैव उत्तेजक) की पूर्व में हुई बिक्री को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बायोस्टियुमिलेंट की बिक्री केवल नोटिफाइड प्रोडक्ट्स की ही हो, ये सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया और अब तक नोटिफाइड 146 बायोस्टियुमिलेंट के अलावा अन्य बिना अनुमति प्राप्त बायोस्टियुमिलेंट की बिक्री नहीं हो, सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अधिसूचित बायोस्टियुमिलेंट के बारे में किसानों को जागरूक करने व प्रमाणित बायोस्टियुमिलेंट की सूची सोशल मीडिया द्वारा किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि मिलने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम आदि के संबंध में मिली शिकायतों की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये दोनों महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, जिनके संबंध में किसानों की हर शिकायत का निराकरण कर किसानों से संपर्क करके अधिकारी उनका फीडबैक भी लें। हर हाल में हमारे किसान पूर्णतः संतुष्ट होने चाहिए, यही हमारा उद्देश्य है। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी भी मौजूद थे, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री चौहान को अपने सुझाव दिए। स्वदेशी अपनाने का संकल्प- बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "स्वदेशी अपनाओ" के आह्वान व इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री  शिवराज सिंह की अपील पर यथासंभव स्वदेशी वस्तुएं अपनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के साथ ही कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी सहित सभी अधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे जीवन में यथासंभव स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे।