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नरेंद्र मोदी: जीएसटी सुधारों के सूत्रधार और आधुनिक भारत के चाणक्य

जीएसटी सुधार- वर्तमान भारत के चाणक्य नरेंद्र मोदी  वस्तु एवं सेवा कर,जीएसटी,भारत के भूतो न भविष्यति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सुधार है। वर्ष 2000 में भी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने जीएसटी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। तब कांग्रेस ने विरोध किया।10 साल तक कांग्रेस की मनमोहन सरकार भी राज्यों को कर हानि, राजस्व हानि के विरुद्ध गारंटी नहीं दे सकी।राज्यों को एकीकृत कर प्रणाली हेतु आश्वस्त करने में विफल रही। मोदी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने सभी राज्यों को आर्थिक गारंटी दी।फलस्वरूप राज्य सहमत हुए और 1 जुलाई 2017 से संपूर्ण देश में एक समान वस्तु एवं सेवा कर लागू हुआ।एक देश एक कर व्यवस्था आरम्भ हुई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से 15 अगस्त 2025 को भारत की जनता को संबोधित करते हुए जीएसटी में नई पीढ़ी के सुधारों एवं 22 सितंबर 2025 से नवरात्रि के पुण्यकाल से देश में लागू करने की घोषणा की गई थी।इस संकल्पना में मोदी सरकार का अगली पीढ़ी का सुधार एवं नागरिक देवो भव: के मंत्र का पालन स्पष्ट रूप से झलकता है।जीएसटी टैक्स स्लैब में 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को हटा दिया गया है। प्रमुख रूप से भारत की जनता जनार्दन की दैनिक आवश्यकता की लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर, शून्य या 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत कर दिया गया है।सोना,चाँदी आदि मूल्यवान धातुओं पर पूर्व की भाँति 3 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।विलासिता एवं सिन आइटम पर 40 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।अनेक खाद्य पदार्थ,जीवन बीमा, मेडिकल स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य सेवा पर जीएसटी शून्य होने से अत्यधिक लाभ होगा।औषधियों पर टैक्स 12 से कम कर 5 प्रतिशत कर दिया है।कृषि उपकरणों पर 18 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत करने से किसानों को भी लाभ होगा।निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट पर टैक्स 28 से कम होकर 18 प्रतिशत हो गया है ।आवास भी सस्ते होंगे ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एस्पिरेशनल इंडिया का उल्लेख जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कार बाजार में देखने को मिल रहा है। मारुति सुजुकी ने कार बुकिंग का पिछले 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हुंडई  के शोरूम में भी 5 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है। जीएसटी दरों में कटौती के पहले दिन मारुति ने 25,000 कारों की डिलीवरी की। मारुति के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा है कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक क्षण है, पिछले 35 वर्षों में ऐसा पहली बार देखा गया है कि पहले ही दिन 80,000 पूछताछ दर्ज हुईं और 25,000 से अधिक कारें डिलीवर कर दी गई। उन्होंने बताया कि डिलीवरी शीघ्र ही 30,000 तक पहुंच जाएगी। कंपनी को पहले ही दिन 75,000 से 85,000 बुकिंग  प्राप्त हुईं हैं।पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का बाजार असाधारण रूप से मजबूत है और जीएसटी सुधार का प्रभाव भी अभूतपूर्व रूप से हुआ है।  नए सुधारों को लागू करवाने में,सभी राज्यों को सहमत करने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का योगदान भी अतुलनीय है।पूर्व में वर्ष 2025-26 के बजट में मोदी सरकार ने आयकर की सीमा को 12 लाख कर दिया है।इससे भी जनता को धनलाभ हो रहा है।दोनों एतिहासिक कर सुधारों से जनता जनार्दन को प्रति वर्ष 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ होगा।अर्थ व्यवस्था में खपत बढ़ेगी।अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खपत बढ़ेगी।जनता जनार्दन की क्रय शक्ति बढ़ेगी।भारत भी अर्थव्यवस्था के पथ पर तीव्र गति से कुलांचे भरेगा,दौड़ेगा।वर्तमान में भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था है।विश्व में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।द्रुत गति से निकट भविष्य में पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य अर्जित कर लेगा।विश्व की तीसरी सर्वाधिक अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।  वर्ष 2014 में मनमोहन सरकार ने अगले 30 वर्षों में 2045 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को अर्जित करने का अनुमान संसद में बजट सत्र के समय बताया था।मोदी सरकार इस लक्ष्य को लगभग 20 साल पहले ही अर्जित करने जा रही है।  भारतीय स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 35 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान अनेक आर्थिक रेटिंग एजेन्सी लगा रहीं हैं।सैकड़ों आर्थिक सुधारों को लागू करने से, मोदी सरकार ने अर्थ तंत्र को अविश्वसनीय, अद्वितीय, अकल्पनीय गति प्रदान कर सशक्त और समृद्ध बनाया है। भाजपा की अनेक राज्यों की सरकार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को कंधे से कंधा मिला कर पूर्ण कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पुरूषार्थी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,भाजपा के संगठन निष्ठ,तपस्वी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल,अनुशासन प्रिय प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और नेता, जनता जनार्दन से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों को स्वदेशी वस्तुओं के विक्रय एवं जनता को स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करने का आग्रह कर रहे हैं। जिससे भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। भारत का निर्माण क्षेत्र भी तीव्र गति से समुन्नत हो ,वृद्धि करे।  महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के मंत्र-तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् ।अर्थस्य मूलमुत्थानम, अनर्थस्य विपर्ययः । इस मंत्र का पालन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को समुन्नत कर रहे हैं, समृद्ध बना रहे हैं।जनता जनार्दन को आर्थिक लाभ प्रदान कर रहे हैं।अतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधुनिक भारत के चाणक्य हैं, कौटिल्य हैं, विष्णु गुप्त हैं। इति श्री। लेखक- सत्येंद्र जैन  

झारसुगुड़ा दौरे पर पीएम मोदी, 27 सितंबर को युवाओं से करेंगे संवाद

झारसुगुड़ा (ओडिशा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को ओडिशा के झारसुगुड़ा दौरे पर आएंगे। इस दौरान वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने पीएम मोदी के दौरे के बारे में जानकारी दी। दरअसल, पीएम मोदी का यह दौरा मूल रूप से ब्रह्मपुर में होना था, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश की संभावना के कारण इस कार्यक्रम को झारसुगुड़ा में स्थानांतरित कर दिया गया। कार्यक्रम का नया स्थान झारसुगुड़ा का अमलीपल्ली मैदान होगा। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 27 सितंबर को झारसुगुड़ा में एक भव्य आयोजन किया जाएगा। हमें जानकारी मिली है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल होंगे और वे युवाओं को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा, “ये कार्यक्रम झारसुगुड़ा के अमलीपल्ली मैदान में आयोजित होगा। पीएम मोदी इस अवसर पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। हमें परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित सूचना के जल्द मिलने की उम्मीद है, जिसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री बड़ी संख्या में युवाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरे के दौरान वे रेलवे पर विशेष जोर देते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,700 करोड़ रुपए से अधिक है, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित हैं। यह दौरा देशव्यापी ‘सेवा पर्व’ पहल का हिस्सा है। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस उच्च स्तरीय आयोजन के लिए जोरदार तैयारियां शुरू कर चुकी हैं।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी, अहमदाबाद से कानपुर तक शुरू हुई दीपावली स्पेशल

कोटा,  दिवाली पर अतिरिक्त यात्रीभार को देखते कानपुर से अहमदाबाद के असारवा स्टेशन के बीच विशेष रेलगाड़ी चलाई जा रही है। कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बुधवार को बताया कि यह रेलगाड़ी राजस्थान में कोटा मंडल के बूंदी और केशोरायपाटन स्टेशन सहित छह स्टेशनों से गुजरेगी और उदयपुर, हिम्मतनगर, ईदगाह आगरा, टुंडला और इटावा सहित 20 स्टेशन पर रुकेगी। उन्होंने बताया कि गाड़ी नंबर 01905 कानपुर सेंट्रल से असारवा तीन नवम्बर तक चलेगी। गाड़ी नंबर 01905 असारवा कानपुर सेंट्रल चार नवंबर तक चलेगी। यह गाड़ी 01905 कानपुर से सोमवार सुबह सवा आठ बजे रवाना होकर उसी दिन अपराह्न तीन बजकर 35 मिनट पर बयाना, चार बजकर 40 मिनट पर गंगापुर सिटी, शाम पांच बजकर 24 मिट पर सवाई माधोपुर, छह बजकर 33 मिनट पर केशोरायपाटन, सात बजकर आठ मिनट पर बूंदी और सात बजकर 58 मिनट पर मांडलगढ़ पहुंचेगी। यह रात 11 बजकर 40 मिनट पर उदयपुर और अगले दिन सुबह पौने छह बजे असारवा पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 01906 असारवा से मंगलवार सुबह सवा नौ बजे रवाना होकर उदयपुर, मांडलगढ़, बूंदी, केशोरायपाटन, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी होते हुए रात 12 बजकर 46 मिनट पर बयाना पहुंचेगी। अगले दिन बुधवार को सुबह सात बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। श्री जैन ने बताया कि इसमें सामान्य के आठ, स्लीपर के आठ, थर्ड एसी का एक और सेकंड एसी के एक डिब्बे सहित 21 डिब्बे होंगे। यह रेलगाड़ी वापसी में इटावा, फिरोजाबाद, टुंडला, इदगाह आगरा, फतेहपुर सीकरी, रूपबास, बयाना, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, केशोरायपाटन, बूंदी, मांडलगढ़, चंदेरिया, मावली, उदयपुर सिटी, जावर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर रूकेगी।  

पुतिन की नीति ने पलटा खेल, रूस को हुआ आर्थिक लाभ – ट्रंप रह गए पीछे

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के दबाव में अमेरिका और यूरोप लगातार रूस पर नए-नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो यहां तक कह चुके हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीदना बंद करे. लेकिन उनकी ये चाल कामयाब नहीं हो पाई. इसके उलट, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा खेल रचा कि देश का खजाना कच्चे तेल की कमाई से भर गया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का समुद्री कच्चा तेल निर्यात 21 सितंबर तक के 28 दिनों में औसतन 36.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यह मई 2024 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यानी पश्चिमी देशों की सख्ती और लगातार हमलों के बावजूद रूस ने तेल बेचने का नया रिकॉर्ड बना डाला. यूक्रेन की तरफ से किए गए ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया. इसके कारण उत्पादन घटकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे कम स्तर है. जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी के अनुमान के अनुसार, अगस्त और सितंबर में रूस सामान्य रूप से 54 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रोसेस करता था. यूक्रेनी ड्रोन हमलों का शोर ज्‍यादा, असर कम यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और अन्‍य रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले में बड़े नुकसान के दावे किए गए हैं. लेकिन, असल में उतनी हानि हुई नहीं है. रूस ने पिछले हफ्ते बाल्टिक पोर्ट प्रिमोर्स्क से रिकॉर्ड 12 टैंकर कच्चा तेल लेकर निकले. यह दिखाता है कि पंपिंग स्टेशनों पर हमलों के बावजूद रूस की सप्लाई लाइन मजबूत बनी हुई है. बंदरगाहों पर मौजूद स्टोरेज टैंकों ने भी काम आसान कर दिया. पंप स्टेशनों की मरम्मत होने तक इन टैंकों से तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रही. रूस ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया. रिफाइनिंग कम होने के बाद भी रूस ने कच्चे तेल को घरेलू खपत में लगाने के बजाय सीधे निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया. इससे विदेशों में कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ गई और रूस की जेब भी भर गई. यूरोपीय संघ की दुविधा यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर नए प्रतिबंधों की संभावना अभी दूर दिखती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि आगे कोई नया कदम तभी उठाया जाएगा जब यूरोपीय संघ पूरी तरह रूसी तेल की खरीद बंद करे. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दबाव बना रहे हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीद बंद करे. लेकिन ऐसा होना अभी मुश्किल है. हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश रूस के तेल पर निर्भर हैं और वे इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. इसी कारण यूरोपीय संघ प्रतिबंध लगाने के बजाय अब टैरिफ जैसे व्यापारिक उपायों पर विचार कर रहा है. यह भी पुतिन के लिए राहत की बात है क्योंकि इसका असर सीमित होगा.

एक हफ्ते धूप ही धूप, हिमाचल से मानसून अलविदा – 454 मौतों का दर्दनाक आंकड़ा

शिमला,  हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्द ही विदा होने वाला है। मौसम विभाग ने बताया कि राज्य से मॉनसून की विदाई के लिए परिस्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल हो गई हैं और अगले 24 घंटों में मानसून हिमाचल से विदा हो जाएगा। विभाग ने अनुमान जताया है कि राज्य भर में 30 सितम्बर तक मौसम पूरी तरह साफ रहेगा और लोगों को अगले एक हफ्ते तक गुनगुनी धूप का आनंद मिलेगा। बीते 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई है और आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। इस तरह सितंबर के अंत तक राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इधर, बीते दिनों हुई भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में बंद पड़ी सड़कों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार फिलहाल प्रदेश में 2 नेशनल हाइवे और 320 सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं। ऊना और कुल्लू जिले में एक-एक नेशनल हाइवे बंद है, जबकि मंडी में 105, कुल्लू में 100, कांगड़ा में 40 और शिमला में 21 सड़कें बंद पड़ी हैं। इसके अलावा 46 बिजली ट्रांसफार्मर और 69 पेयजल योजनाएं भी ठप पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मानसून सीजन ने हिमाचल को गहरे जख्म दिए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 454 लोगों की मौत हुई है और 50 लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में सर्वाधिक 68 लोग चंबा जिले में मारे गए हैं, जबकि मंडी में 67, कांगड़ा में 57, कुल्लू में 49, शिमला में 48, सोलन में 32, किन्नौर में 30, ऊना में 29, बिलासपुर में 24, सिरमौर में 23, हमीरपुर में 17 और लाहौल-स्पीति में 10 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लापता लोगों में 30 मंडी से हैं, जबकि चंबा से 5, सिरमौर से 4, शिमला और किन्नौर से 3-3, कुल्लू और कांगड़ा से 2-2 तथा लाहौल-स्पीति से एक व्यक्ति लापता है। इस दौरान 498 लोग घायल भी हुए हैं। प्राकृतिक आपदाओं ने न केवल इंसानों की जान ली बल्कि हजारों परिवारों को बेघर भी किया है। अब तक 1,736 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं जबकि 7,494 मकानों को आंशिक क्षति पहुँची है। इसके अलावा 496 दुकानें और 7,399 गौशालाएं भी ध्वस्त हुई हैं। पशुधन में 2,519 मवेशियों और 26 हजार से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत दर्ज की गई है। सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक कुल 4,881 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इनमें सबसे अधिक क्षति लोक निर्माण विभाग को हुई है, जहां सड़कों और पुलों को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा है। जलशक्ति विभाग को 1,476 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 1,394 करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई है। प्राकृतिक आपदाओं के रूप में इस मानसून ने 148 बार भूस्खलन, 98 बार फ्लैश फ्लड और 47 बार बादल फटने की घटनाएं दीं। लाहौल-स्पीति में सबसे ज्यादा 30 बार भूस्खलन हुआ, जबकि शिमला में 29 बार। फ्लैश फ्लड की सबसे अधिक 57 घटनाएं भी लाहौल-स्पीति में दर्ज की गईं। बादल फटने की घटनाएं मंडी जिले में सबसे ज्यादा 19 बार हुईं, जबकि कुल्लू में 12 और चंबा में 6 बार बादल फटे। गौरतलब है कि इस साल मानसून 20 जून को हिमाचल पहुँचा था और सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश से मानसून की सामान्य विदाई तिथि 25 सितम्बर मानी जाती है, लेकिन बीते दस वर्षों में केवल तीन बार ही यह सितम्बर में विदा हुआ है, जबकि सात बार अक्टूबर में विदाई हुई। वर्ष 2024 में मानसून 2 अक्टूबर, 2023 में 6 अक्टूबर और 2022 में 3 अक्टूबर को विदा हुआ था। इस बार इसके समय से पहले लौटने की संभावना है।    

हिमाचल प्रदेश के नैना देवी में भक्तों का सैलाब, हरियाणा डिप्टी स्पीकर ने भी टेका माथा

बिलासपुर,  हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी में नवरात्रि के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। भक्त माता के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु नैना देवी मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर के बाहर श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में खड़े होकर मां नैना देवी के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। मंदिर न्यास ने हिमाचल प्रदेश सरकार के दिशानिर्देशों के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा की व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा। हरियाणा सरकार के डिप्टी स्पीकर कृष्ण लाल ने भी शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। पुजारी हरीश शर्मा ने बताया कि मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सरकार के आदेशानुसार सारे कार्य किए जा रहे हैं। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश और भूस्खलन की वजह से जो रास्ते बंद हो गए थे, उन्हें खोल दिया गया है और अन्य रास्तों को सही कराया जा रहा है। मैं सभी भक्तों से अनुरोध करता हूं कि इन शुभ नवरात्रि के दिनों में आकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करें। श्रद्धालुओं ने बताया, “आज का दर्शन बहुत शुभ था, यह एक बहुत ही सकारात्मक और संतोषजनक अनुभव था। आज के दिन ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। माता भक्तों की मनोकामना जल्दी पूरी करती है।” श्रद्धालुओं ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देशों पर जिला प्रशासन एवं मंदिर ट्रस्ट द्वारा सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर और रास्तों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। श्रद्धालु लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।  

लेह में हिंसक हुआ प्रदर्शन, BJP कार्यालय और CRPF वाहन जलाए; सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से क्यों सुलग रहा लद्दाख?

 लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में छात्रों और पुलिस के बीच बुधवार को झड़प हो गई. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर पर्यावरणविद सोनम वांगुचक भूख हड़ताल पर हैं. सोनम वांगचुक के समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई. पुलिस पर पथराव किया गया. सीआरपीएफ की गाड़ी भी फूंक दी गई. इस दौरान प्रदर्शनकारी बीजेपी के दफ्तर के बाहर भी प्रदर्शन कर रही है. बीजेपी के दफ्तर में आग लगा दी गई. प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी. साथ ही अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी फूंक डाला. पुलिस एक तरफ भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दाग रही है और लाठीचार्ज कर रही है जबकि प्रदर्शनकारी पुलिस पर पथराव कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. गुस्साई भीड़ ने CRPF की गाड़ी, पुलिस वैन और कई अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया. इतना ही नहीं, भीड़ ने लेह स्थित बीजेपी दफ्तर को भी निशाना बनाया और वहां आगजनी की. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कार्यालय से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया. आंदोलन की वजह क्या है? यह विरोध लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर तेज हुआ है. आंदोलन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी कर रही है. LAB की युवा इकाई ने प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया, खासकर तब जब मंगलवार शाम 35 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे 15 लोगों में से दो की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. सोनम वांगचुक का समर्थन इस आंदोलन की सबसे बड़ी आवाज़ बनकर सामने आए हैं पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक, जिनका अनशन 15वें दिन में पहुंच चुका है. वांगचुक का कहना है कि बीजेपीने वादा किया था कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाएगा, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी वादा अधूरा है. उनका कहना है, ‘हमारी मांगें पांच साल से लंबित हैं. संविधान दो साल में बन गया था लेकिन हमारी बात पर अब तक चर्चा पूरी नहीं हुई. लोगों का सब्र टूट रहा है. हम नहीं चाहते कि कुछ ऐसा हो जिससे भारत की छवि को धक्का लगे.ट केंद्र से बातचीत की तैयारी लगातार बढ़ते गुस्से के बीच गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि 6 अक्टूबर को लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल के साथ अगला दौर की बातचीत होगी. लेकिन LAB ने साफ कर दिया है कि जब तक राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा. उधर लद्दाख के लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध से अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ, और अब वे जल्द से जल्द ठोस समाधान चाहते हैं. यही वजह है कि लेह में गुस्से की आग सड़कों तक फैल गई और हालात हिंसा में बदल गए. वांगचुक की अगुवाई में लद्दाख की एपेक्स बॉडी लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रही है. सोनम वांगचुक 15 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. आज लद्दाख बंद के बीच बड़ी संख्या में लोग लेह में इकट्ठा हुए. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है. वांगचुक की अगुवाई में छात्रों की चार मांगें हैं. इस दौरान रैली भी निकाली गई. दरअसल पांच अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना जबकि लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्रशासित प्रदेश बना था. अब इसी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही है.  कौन सी हैं चार मांगें:- 1) लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए. 2) लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए. 3) लद्दाख में दो लोकसभा सीटों की मांग की गई है. 4) लद्दाख की जनजातियों को आदिवासी का दर्जा.

गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से दहली जेल, इक्वाडोर में 14 कैदियों की गई जान

क्विटो दक्षिण-पश्चिमी इक्वाडोर की एक जेल में हुए दंगों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 14 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी इक्वाडोर की राष्ट्रीय पुलिस ने दी। उन्होंने बताया कि एल ओरो प्रांत की राजधानी मचाला शहर स्थित जेल में सोमवार तड़के दंगों के बीच गोलीबारी एवं विस्फोट की सूचना मिली। एल ओरो के पुलिस प्रमुख विलियम कैले ने स्थानीय टीवी नेटवकर् इक्वाविसा को बताया कि घटना में 13 कैदियों और एक गार्ड की मौत हो गई तथा 14 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती किया गया। कैले ने कहा कि मारे गए अधिकतर लोग इक्वाडोर के सबसे हिंसक समूहों में से एक लॉस चोनेरोस से संबंधित थे। उन्होंने बताया कि झड़पों के दौरान कई कैदी भाग निकले। जेल अधिकारी फरार कैदियों की सही संख्या का पता लगाने का काम कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इक्वाडोर में फरवरी 2021 से अब तक गिरोह-संबंधी दंगों में लगभग 600 कैदी मारे गए हैं। 

EC का नया ई-साइन सिस्टम बनाएगा वोटर नाम हटाने की प्रक्रिया सख्त और पारदर्शी

नई दिल्ली वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने को लेकर उठते विवादों और कथित फर्जीवाड़ों को देखते हुए चुनाव आयोग ने एक अहम तकनीकी पहल की है. अब मतदाता पहचान से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई-साइन (e-Sign) सुविधा को लागू किया गया है. इस नई व्यवस्था से न केवल फर्जी फॉर्म की संख्या घटेगी, बल्कि असली मतदाताओं के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे. चुनाव आयोग ने अपनी ईसीआईनेट (ECInet) वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ‘ई-साइन’ नाम का नया फीचर जोड़ा है.  इसके ज़रिए अब कोई भी शख्स वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, हटवाने या उसमें बदलाव करवाने के लिए आवेदन करता है, तो उसे अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर से OTP वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा. इस बदलाव की पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हालिया आरोप है, जिसमें उन्होंने बताया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में करीब 6,000 मतदाताओं के नाम बिना उनकी जानकारी के हटवाने की कोशिश की गई. इस तरह के मामलों में फर्जी पहचान, गलत मोबाइल नंबर और बिना सहमति के फॉर्म भरने जैसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं. कैसे काम करेगा नया सिस्टम? नया सिस्टम शुरू होने के बाद, जब कोई शख्स ईसीआईनेट पोर्टल पर फॉर्म 6 (नए रजिस्ट्रेशन के लिए), फॉर्म 7 (नाम हटाने के लिए), या फॉर्म 8 (सुधार के लिए) भरता है, तो उसे 'ई-साइन' की जरूरत पूरी करनी होगी. पोर्टल आवेदक को यह सुनिश्चित करने के लिए सचेत करता है कि मतदाता कार्ड और आधार कार्ड पर नाम समान हो और आधार व मोबाइल नंबर आपस में जुड़े हों. इसके बाद, आवेदक को एक बाहरी ई-साइन पोर्टल पर निर्देशित किया जाता है, जहां उसे अपना आधार नंबर दर्ज करना होता है. ओटीपी के जरिए वेरिफिकेशन आधार नंबर दर्ज करने के बाद, एक 'आधार ओटीपी' उस फोन नंबर पर भेजा जाता है, जो आधार से जुड़ा हुआ है. ओटीपी दर्ज करने और सहमति देने के बाद ही वेरिफिकेशन पूरा होता है, जिसके बाद आवेदक को फॉर्म जमा करने के लिए वापस ईसीआईनेट पोर्टल पर भेजा जाता है. यह प्रक्रिया फर्जी आवेदनों को रोकने में मदद करेगी. क्यों जरूरी था यह बदलाव? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 सितंबर को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि आलंद में किसी ने ऑनलाइन आवेदन के जरिए करीब 6 हजार वोटर्स के नाम हटवाने की कोशिश की थी. ज्यादातर मामलों में, आवेदन पत्र जमा करने के लिए असली मतदाताओं की पहचान का दुरुपयोग किया गया था. फॉर्म जमा करने के लिए इस्तेमाल किए गए फोन नंबर भी उन मतदाताओं के नहीं थे, जिनके नाम पर फॉर्म दाखिल किए गए थे. कैसे काम करेगा नया सिस्टम? ई-साइन प्रक्रिया को लेकर आयोग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और यूज़र-फ्रेंडली बनाया है: 1. आवेदन के लिए फॉर्म चुनें     नया वोटर रजिस्ट्रेशन – फॉर्म 6     नाम हटवाने के लिए – फॉर्म 7     सुधार या बदलाव के लिए – फॉर्म 8 2. ई-साइन की प्रक्रिया     आवेदक को अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर का उपयोग करते हुए ई-साइन पोर्टल पर भेजा जाएगा.     यहां आवेदक को अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा.     उसके बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाएगा.     OTP दर्ज करके सहमति देने के बाद वेरिफिकेशन पूरा होगा.     फिर आवेदक दोबारा ECInet पोर्टल पर वापस आकर फॉर्म को सबमिट कर सकता है. क्या होगा फायदा?     फर्जी पहचान और गलत मोबाइल नंबर से आवेदन अब लगभग नामुमकिन हो जाएंगे.     मतदाता की सहमति और पहचान की पुष्टि सुनिश्चित होगी.     डेटा की शुद्धता बढ़ेगी और चुनाव आयोग को गलत डिलीट या एडिट की गई एंट्री को ट्रैक करने में आसानी होगी.     फॉर्म भरने वाले और असली मतदाता के बीच पारदर्शिता बनी रहेगी.  

अमेरिका में जयशंकर-गोयल की वार्ता से आई अच्छी खबर, मोदी-ट्रंप बैठक करीब

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान से भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों पर शुभ संकेत आते दिख रहे हैं. दरअसल मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को फिक्स के लिए तैयार हैं. रुबियो ने कहा कि ये टैरिफ भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाए गए थे. वहीं अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर नए प्रतिबंधों पर भी विचार कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारत-अमेरिका के बीच संबंधों का समीकरण बदलने लगा था. इसके बाद रूस-यूक्रेन के मुद्दे पर दोनों देशों को बीच तनाव और बढ़ा. परिस्थितियां ऐसी आ गईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिर्फ भारत के खिलाफ 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया बल्कि ऐसे बयान भी आए कि इस वक्त के सबसे बड़े युद्ध का जिम्मेदार भारत ही है. भारत और अमेरिका के रिश्ते ही नहीं व्यापार भी प्रभावित हुआ. हालांकि दोनों देशों के बीच बर्फ थोड़ी पिघलती दिख रही है. भारत-अमेरिका के बीच नरमी के संकेत मार्को रुबियो ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की. दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. यह बैठक उन तनावों के बाद पहली बार हुई है जो भारत पर अमेरिकी टैरिफ और रूस से भारत के ऊर्जा आयात को लेकर बढ़े थे. एस. जयशंकर से यूएनजीसी में मुलाकात के बाद रुबियो ने कहा है – ‘भारत, अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है, खासतौर पर व्यापार, ऊर्जा, फार्मा और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में.’ उन्होंने भारत के राजदूत के तौर पर नामित सर्गियो गोर से भी मुलाकात की. मिल सकते हैं पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप! जब से भारत और अमेरिका से संबंधों में तनाव आया है, तब से पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सिर्फ सोशल मीडिया पर ही संपर्क हुआ है. जिसमें पीएम मोदी के जन्मदिन पर दी गई ट्रंप की बधाई खासी चर्चा में रही. माना जा रहा था कि यूएनजीसी की मीटिंग में दोनों के बीच मुलाकात हो सकती है लेकिन जब इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जाने का ऐलान हुआ, तो ये उम्मीद भी खत्म हो गई. ऐसे में जब चीज़ें सामान्य होती दिख रही हैं, तो दोनों देशों की ओर से कोशिश की जा रही है कि पीएम मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप के बीच जल्द ही मुलाकात हो और बातचीत आगे बढ़े. भारत पर क्या कहा मार्को रुबियो ने? भारत को लेकर रुबियो ने कहा- ‘हमने भारत के खिलाफ कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि इसे सुधारा जा सकता है. राष्ट्रपति के पास और विकल्प हैं और वे आगे और कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं.’ मार्को रुबियो का ये बयान दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा के साथ ही ये बयान आया है, जो मौजूदा हालात में बेहद अहम है. आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50 फीसदी तक पहुँच गया है. यह दुनिया में सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक है.