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अंतरिक्ष में किसान बने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, मेथी और मूंग के बीजों को कर रहे अंकुरीत

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के 12 दिन पूरे कर चुके हैं। इन 10 दिनों में उन्होंने कई प्रयोग किए। प्रयोगों के क्रम में उन्होंने किसान की भी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने साथ ले गए मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण किया। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में स्प्राउट्स प्रोजेक्ट को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अंकुरण और पौधों के शुरुआती विकास और उन पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है।   बता दें कि पृथ्वी पर स्प्राउट्स प्रोजेक्ट का नेतृत्व कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के रविकुमार होसामणि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के सुधीर सिद्धपुरेड्डी कर रहे हैं।  एक्सिओम स्पेस की ओर से इस शोध को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि पृथ्वी पर वापस आने के बाद इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा। जिससे कि उनके आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्र और पोषण प्रोफाइल में होने वाले परिवर्तनों की जांच की जा सके। 'भारतीय वैज्ञानिकों के लिए खुलेंगे नए रास्ते' अपने प्रयोगों को लेकर शुभांशु ने एक्सिओम स्पेस की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. लूसी लोव से बात की। इस बातचीत में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने उनके द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी और बोले की वे बेहद व्यस्त हैं। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि 'जब से हम यहां आए हैं, तब से ही काफी व्यस्त हैं। हम अंतरिक्ष स्टेशन पर बहुत सारे प्रयोग कर रहे हैं, जिन्हें लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। इस मिशन से माइक्रोग्रैविटी के लिए रास्ते खुलेंगे और इससे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए नई राह खुलेगी। मुझे बेहद गर्व है कि इसरो दुनियाभर के संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।' कई और वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे शुभांशु शुभांशु ने बताया कि वह कई वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें स्टेम सेल का अध्ययन, माइक्रोग्रैविटी में बीजों का विकास, अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाला असर आदि प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने कहा कि वे स्टेम सेल के अध्ययन वाले प्रयोग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के बीच पुल बनना मेरे लिए गर्व की बात है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के क्रू का हिस्सा हैं। जिसने 25 जून को नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से उड़ान भरी थी। एक्सिओम-4 मिशन 14 दिन का है। अपने अंतरिक्ष प्रवास को खत्म कर 10 जुलाई के बाद मौसम की स्थिति के आधार पर किसी भी दिन पृथ्वी पर वापसी कर सकते हैं। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। हालांकि नासा ने अभी तक एक्सिओम-4 मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन से अलग करने की तारीख की घोषणा नहीं की है।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एकजुट होंगे सत्ता और विपक्ष? मॉनसून सत्र में सरकार लयेगी महाभियोग प्रस्ताव

 नई दिल्ली घर में नकदी बरामद होने के आरोप में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने को लेकर सरकार प्रस्ताव ला सकती है. जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए सरकार संसद के मॉनसून सत्र में प्रस्ताव ला सकती है. लोकसभा में प्रस्ताव के लिए कम से कम सौ सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी है. विपक्षी दलों ने सरकार को समर्थन का भरोसा दिया है. प्रस्ताव पर सांसदों के हस्ताक्षर कराे शुरू कर दिए हैं. विपक्ष के सांसद भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे. प्रस्ताव आने के बाद जांच समिति गठित की जाएगी.  बता दें कि इस साल मार्च में जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ नकदी बरामद हुई थी. सुप्रीम कोर्ट की इंटरनल इन्क्वायरी कमेटी ने उन्हें दोषी माना था. जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से मना कर दिया है. संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है. अगर महाभियोग प्रस्ताव पास होता है तो संसद के नए भवन में महाभियोग की यह पहली कार्यवाही होगी. जस्टिस वर्मा के खिलाफ एकजुट होंगे सत्ता और विपक्ष? सत्तापक्ष संसद के आगामी मॉनसून सत्र में इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश बरामदगी मामले में महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। इसको लेकर कांग्रेस ने भी सोमवार को अपनी आंतरिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा में कांग्रेस के सदन नेताओं को निर्देश दिया है कि वे उन सांसदों की पहचान करें जो इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। नियमों के अनुसार, लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जबकि राज्यसभा में यह संख्या 50 है। प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष की जांच के बाद जजेज (इंक्वायरी) एक्ट के तहत समिति के पास भेजा जाता है। एक साथ आ सकते हैं सत्तापक्ष और विपक्ष इकॉनोमिक टाइम्स ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से लिखा कि एआईसीसी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में कांग्रेस के सदन नेताओं को पत्र भेजा है। यह पत्र ऐसे समय में भेजा गया है जब सत्तापक्ष बीजेपी और विपक्ष दोनों के सांसदों को प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे लाने की योजना बना रहा है। उधर, विपक्ष का एक धड़ा राज्यसभा में पहले से लंबित महाभियोग प्रस्ताव पर भी तेजी से कार्रवाई की मांग कर रहा है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के खिलाफ कथित रूप से दिए गए 'नफरती भाषण' को लेकर दायर किया गया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाने की तैयारी में है। सूत्रों का यह भी कहना है कि हाल ही में कुछ कांग्रेस नेताओं ने न्यायमूर्ति वर्मा से अनुरोध किया था कि वे महाभियोग प्रस्ताव लाने से पहले खुद ही इस्तीफा दे दें। हालांकि, अभी तक न्यायपालिका की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संसद के आगामी मॉनसून सत्र में यह मुद्दा विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है। धनखड़ ने न्यायाधीश के आवास से नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू करने की उम्मीद जतायी इससे पहले सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाएगी। धनखड़ ने इस घटना की तुलना शेक्सपीयर के नाटक जूलियस सीजर के एक संदर्भ ‘‘इडस ऑफ मार्च’’ से की, जिसे आने वाले संकट का प्रतीक माना जाता है। रोमन कलैंडर में इडस का अर्थ होता है, किसी महीने की बीच की तारीख। मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर में इडस 15 तारीख को पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुद्दा यह है कि यदि नकदी बरामद हुई थी तो शासन व्यवस्था को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी और पहली प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि इससे आपराधिक कृत्य के रूप में निपटा जाता, दोषी लोगों का पता लगाया जाता और उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाता।  महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में कांग्रेस, सांसदों को दिए खास निर्देश कांग्रेस पार्टी, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही। पार्टी ने अपने सांसदों से इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने को कहा है। साथ ही, कांग्रेस राज्यसभा के सभापति से जस्टिस यादव के मामले में भी आगे बढ़ने का आग्रह कर रही है। यह सब तब हो रहा है जब बीजेपी और अन्य विपक्षी दल मिलकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने लोकसभा में पार्टी के फ्लोर मैनेजरों को उन सांसदों की लिस्ट बनाने की सलाह दी है जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करेंगे। जस्टिस शेखर यादव को लेकर भी की बड़ी डिमांड सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल राज्यसभा में जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ लंबित नोटिस पर भी जल्द कार्रवाई की मांग कर सकता है। जस्टिस यादव पर कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने का आरोप है। पार्टी लोकसभा में भी ऐसे नोटिस की मांग कर सकती है। कांग्रेस का प्लान क्या है कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि AICC महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल का यह निर्देश ऐसे समय पर आया है जब बीजेपी और विपक्षी दल मिलकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ नोटिस लाने की तैयारी कर रहे हैं। नियमों के अनुसार, लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए (राज्यसभा में 50)। इसके बाद स्पीकर इसकी जांच करेंगे और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के अनुसार एक समिति द्वारा जांच की जाएगी। जस्टिस वर्मा की बढ़ेंगी मुश्किलें कुछ समय पहले, कुछ कांग्रेस नेताओं ने जस्टिस वर्मा से महाभियोग प्रस्ताव पेश होने से पहले इस्तीफा देने का आग्रह किया था। विपक्ष का एक वर्ग राज्यसभा के सभापति से जस्टिस यादव के खिलाफ लंबित महाभियोग प्रस्ताव पर भी आगे बढ़ने की मांग कर रहा है। महाभियोग प्रक्रिया के लिए क्या हैं नियम महाभियोग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए हाईकोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उनके पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया … Read more

धामी की कैबिनेट का बड़ा निर्णय—जियो थर्मल ऊर्जा नीति पास, सरकारी योजनाओं का पुनरावलोकन

देहरादून  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कुल छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले शामिल हैं। बैठक में सबसे अहम निर्णय राज्य की जियो थर्मल ऊर्जा नीति को लेकर लिया गया, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह नीति प्रदेश में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास को बढ़ावा देगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इसके अलावा राज्य में पुलों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के गठन को भी मंजूरी दी गई है। इससे प्रदेश में निर्माणाधीन और प्रस्तावित पुलों के निर्माण कार्यों की निगरानी और प्रबंधन में तेजी आएगी। बैठक में प्रशासनिक ढांचे में भी सुधार को लेकर अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट बैठक के महत्वपूर्ण प्रस्ताव: सतर्कता विभाग के संशोधित ढांचे को मिली मंजूरी 20 और पद बढ़ाए जाने पर मिली मंजूरी जीएसटी विभाग के ढांचे में किया गया संशोधन प्रदेश में मौजूद पुलों को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को मिली मंजूरी दो विभागों में बढ़े पद प्रदेश सरकार ने विभागीय कामकाज को बेहतर बनाने के लिए दो प्रमुख विभागों में पदों की संख्या में वृद्धि का निर्णय लिया है। धामी सरकार ने सतर्कता विभाग में 20 नए पद सृजित किए गए हैं, जिससे विभाग में पदों की संख्या 132 से बढ़कर 156 हो गई है। वहीं, जीएसटी (GST) विभाग में भी पदों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। इससे कर संग्रहण और निगरानी की प्रक्रिया और मजबूत की जा सके। खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास को ध्यान में रखते हुए, नए खनिजों के लिए जिला और राज्य स्तर पर खनन न्यास (Mining Trust) के गठन को भी कैबिनेट की हरी झंडी मिली है। पेंशन योजना में अहम बदलाव धामी सरकार ने बुजुर्गों के लिए पेंशन योजना में अहम बदलाव किए हैं। कैबिनेट ने वृद्धावस्था पेंशन योजना में भी अहम संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब अगर लाभार्थी का पुत्र 18 वर्ष का हो जाता है तो भी पेंशन बंद नहीं होगी। इससे प्रदेश के हजारों पेंशनधारी वृद्धजनों को राहत मिलेगी।  

अमित शाह बोले – रिटायरमेंट के बाद अध्यात्म और प्राकृतिक जीवन को दूंगा प्राथमिकता

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार को कहा कि सार्वजनिक जीवन से रिटायर होने के बाद, मैं खुद को पूरी तरह से वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित करने की योजना बना रहे हैं. अमित शाह ने गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारी समितियों से जुड़ी महिलाओं के साथ 'सहकार-संवाद' में बोलते हुए ये बातें कहीं. अमित शाह ने कहा, "मैंने फैसला किया है कि रिटायरमेंट के बाद, मैं अपनी बची जिंदगी वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती को समर्पित करूंगा. रासायनिक उर्वरकों से उगाया गया गेहूं अक्सर कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बनता है. प्राकृतिक खेती न केवल शरीर को रोगमुक्त बनाने में मदद करती है, बल्कि एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी भी बढ़ाती है." 'जब मैं देश का गृह मंत्री बना…' केंद्रीय गृह मंत्री ने एक मंत्री के रूप में अपने सफ़र के बारे में भी बात की और कहा कि सहकारिता मंत्रालय उनके लिए कितना ख़ास है. अमित शाह ने कहा, "जब मैं देश का गृह मंत्री बना, तो सबने मुझसे कहा कि मुझे बहुत अहम विभाग दिया गया है, लेकिन जिस दिन मुझे सहकारिता मंत्री बनाया गया, मुझे लगा कि मुझे गृह मंत्रालय से भी बड़ा विभाग मिला है, जो देश के किसानों, गरीबों, गांवों और पशुओं के लिए काम करता है." 'सहकार-संवाद' कार्यक्रम के दौरान, अमित शाह ने स्वर्गीय त्रिभुवन काका के नाम पर त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी. उन्होंने भारत के सहकारिता आंदोलन की सच्ची नींव रखने का श्रेय त्रिभुवन काका को दिया. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "ऐसा इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि मैं देश भर में जहां भी मैं जाता हूं, देखता हूं कि कैसे छोटे परिवारों की महिलाओं ने अपने बच्चों को एजुकेट किया है और उनकी जिंदगी में बदलाव लाया है."  अमित शाह ने आगे कहा, "आज, जहां भी सहकारी समितियां स्थापित हैं, वहां लोग ₹1 करोड़ तक कमा रहे हैं, यह सब त्रिभुवन काका के दूरदर्शी विचारों की वजह से ही मुमकि हुआ है. फिर भी, उन्होंने कभी भी अपना नाम बनाने के लिए कुछ नहीं किया."

रूस ने यूक्रेन पर किया बहुत बड़ा हमला, एक रात में दागे 728 ड्रोन; मचा दी तबाही

मॉस्को  यूक्रेन की वायु सेना ने बुधवार को बताया कि रूस ने बीती रात यूक्रेन पर रिकॉर्ड 728 शाहेद ड्रोन और डमी ड्रोन दागे. रूस की तरफ से ड्रोन्स की बौछार के साथ-साथ 13 मिसाइलें भी दागी गईं. रूस ने यूक्रेन पर ये हमला ऐसे वक्त में किया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म करने को लेकर रूसी राष्ट्रपति से हुई अनबन के बीच यूक्रेन को मिसाइल देने का वादा किया है. अमेरिका ने पहले साफ कर दिया था कि वो यूक्रेन को हथियार नहीं देगा लेकिन फिर ट्रंप ने कह दिया है कि अमेरिका यूक्रेन को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार मुहैया कराएगा. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बात की और कहा कि वो यूक्रेन को जल्द ही 10 पेट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर्स भेजेंगे. मिसाइल इंटरसेप्टर एक तरह का डिफेंसिव मिसाइल होता है जो बैलेस्टिक मिसाइलों के हमले को रोकता है. यह खबर सामने आने के बाद रूस-अमेरिका में तनाव बढ़ता दिखा है और इसी बीच खबर आ रही है कि रूस ने यूक्रेन पर रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन बरसाए हैं. यूक्रेन की वायु सेना ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम ने 296 ड्रोन और सात मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 415 से अधिक ड्रोन रडार से गायब हो गए या जाम हो गए. इसमें कहा गया है कि हमले में मुख्य रूप से यूक्रेन के पश्चिमी वोलिन क्षेत्र और वोलिन क्षेत्र की राजधानी लुत्स्क को निशाना बनाया गया, जो यूक्रेन के उत्तर-पश्चिम में स्थित है. यह क्षेत्र पोलैंड और बेलारूस की सीमा से लगा हुआ है. कतर के सरकारी ब्रॉडकास्टर अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी कुर्स्क शहर के कार्यवाहक क्षेत्रीय गवर्नर अलेक्जेंडर खिनश्टाइन ने बताया कि शहर के एक समुद्र तट पर यूक्रेनी हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए, जिनमें एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है. रूस की समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, मृतकों में एक रूसी नेशनल गार्ड का अधिकारी भी शामिल है. रूसी एजेंसी ने बताया कि कुर्स्क क्षेत्र के रिल्स्क में यूक्रेनी ड्रोन हमले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, एक एम्बुलेंस बिल्डिंग और एक प्रशासनिक भवन को भी निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए. कुर्स्क के कार्यवाहक मेयर सर्गेई कोटलारोव ने कहा कि गिराए गए यूक्रेनी ड्रोन के मलबे से जेलेज्नोडोरोजनी जिले में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए. यूक्रेन के दोनेत्स्क में मारे गए तीन लोग यूक्रेन के दोनेत्सक के गवर्नर वादिम फिलाशकिन ने कहा कि रूस के हमलों में क्षेत्र में तीन लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए. क्षेत्रीय प्रशासन ने कहा कि यूक्रेन के सुमी क्षेत्र पर रूसी हमलों में चार लोग मारे गए और चार अन्य घायल हो गए. यूक्रेन के अखबार कीव इंडिपेंडेंट ने बताया कि यूक्रेन की वायुसेना ने पूरे देश के लिए मिसाइल अलर्ट जारी किया था जिसके बाद बुधवार को लगभग आधी रात को कीव में विस्फोटों की आवाज सुनी गई. रूस-यूक्रेन में संघर्षविराम की ट्रंप की कोशिशें हो रही नाकाम रूस और यूक्रेन का युद्ध 24 फरवरी 2022 से जारी है जिसमें दोनों पक्षों को काफी नुकसान हुआ है, खासकर यूक्रेन को. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति बनने से पहले अपने चुनावी कैंपेन में कहा था कि वो राष्ट्रपति बनते ही रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवा देंगे. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम की कोशिशें भी की हैं जो नाकाम रही हैं. इससे बौखलाए ट्रंप ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सीधा हमला बोला है. ट्रंप ने कहा है कि वो पुतिन से खुश नहीं हैं क्योंकि वो बहुत से लोगों की जान ले रहे हैं. ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने और हिंसा बढ़ने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है क्योंकि इससे वैश्विक सुरक्षा पर असर हो रहा है. ट्रंप ने पुतिन से नाराजगी जताते हुए कहा, 'हमें पुतिन की तरफ से बहुत बकवास सुनने की मिलती है. वो जो दोस्ती दिखाते हैं, वो बेकार है.' 

पीएम नरेंद्र मोदी अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंचे, पारंपरिक नृत्य के साथ हुआ स्वागत

नामीबिया पांच देशों के विदेश यात्रा के अंतिम पड़ाव में पीएम नरेंद्र मोदी अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी आज सुबह 11 बजे (भारतीय समयानुसार) दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंचे। राजधानी विंडहोक के एयरपोर्ट पर लैंड होने के बाद पीएम मोदी का पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने खुद कलाकारों के साथ नामीबियाई पारंपरिक ढोलक भी बजाया। मोदी राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के निमंत्रण पर नामीबिया की यात्रा पर पहुंचे हैं। नामीबियाई राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली नामीबिया यात्रा है। साथ ही 27 सालों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नामीबिया दौरा है। वहीं भारत से किसी प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा है। PM मोदी से पहले 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नामीबिया गए थे। इससे पहले 1990 में उस वक्त PM रहे वीपी सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित कई हाई रैंक लीडर नामीबिया के स्वतंत्रता दिवस पर वहां गए थे। प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री नामीबिया के संस्थापक जनक एवं प्रथम राष्ट्रपति दिवंगत डॉ. सैम नुजोमा को भी श्रद्धांजलि देंगे। साथ ही नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, शिक्षा, रक्षा, व्यापार, और वन्यजीव संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है. भारत, नामीबिया में तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें स्वास्थ्य और औषधि निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। मोदी यहां राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा से मिलेंगे। दोनों देशों के बीच डायमंड बिजनेस, जरूरी खनिजों और यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा की संभावना है। इसके अलावा मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। मोदी का नामीबिया दौरा 2 जुलाई से 10 जुलाई तक 5 देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। नामीबिया हीरा, यूरेनियम, तांबा, फॉस्फेट और अन्य खनिजों से समृद्ध देश है। नामीबिया में क्या है खास? नामीबिया में यूरेनियम, लिथियम और डिसप्रोशियम जैसे दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं। ये खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं. भारत यूरेनियम आयात को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है। नामीबिया डायमंड प्रोसेसिंग का हब भी है। यह देश हीरे, सोना, और अन्य खनिजों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. यहां का नामीब रेगिस्तान दुनिया के सबसे खूबसूरत और प्राचीन रेगिस्तानों में से एक है। यह अपनी सुंदरता और लाल रेत के टीलों के लिए प्रसिद्ध है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नामीब सैंड सी का हिस्सा है। यहां के एटोशा नेशनल पार्क, स्वाकॉपमुंड और स्केलेटन कोस्ट जैसे क्षेत्र वन्यजीव और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं।

PM मोदी को ब्राजील का सर्वोच्च सम्मान, ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ सदर्न क्रॉस’ मिला

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा में एक और तमगा जुड़ गया है। मंगलवार को ब्राजील ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस से सम्मानित किया है। उन्हें ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया है। ब्राजील ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक प्लेटफार्मों पर भारत-ब्राजील सहयोग को बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि मई 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी को यह 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। पीएम मोदी ने अपने भव्य स्वागत और सर्वोच्च सम्मान देने के लिए ब्राजील की सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। पीएम ने कहा है कि यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है। पीएम मोदी ने कहा, “आज राष्ट्रपति जी द्वारा मुझे ब्राजील के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया जाना, मेरे लिए ही नहीं, 140 करोड़ भारतीयों के लिए अत्यंत गर्व और भावुकता का पल है। इसके लिए ब्राजील की सरकार और लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।” प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत इससे पहले ब्राजील में राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया। यहां प्रधानमंत्री मोदी के औपचारिक स्वागत कार्यक्रम में 114 घुड़सवारों का दस्ता मौजूद था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उनके स्वागत की झलकियां साझा करते हुए कहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गति मिलेगी। उन्होंने पोस्ट में कहा,“ ब्रासीलिया में औपचारिक स्वागत की झलकियां। ब्राजील की यह राजकीय यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गति प्रदान करेगी।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 57 वर्षों में ब्राजील की राजकीय यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में ब्राजील पहुंचे हैं, जहां उन्होंने सोमवार को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लिया था। PM का हुआ भव्य स्वागत जब पीएम ब्रासीलिया पहुंचे तो वहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने उन कलाकारों की सराहना की जिन्होंने उनके स्वागत में पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे नृत्य पेश किया. साथ ही इस दौरान पीएम मोदी के सम्मान में भारतीय संस्कृति को भी पेश किया गया. दरअसल, पीएम मोदी 6-7 जुलाई को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद ब्रासीलिया पहुंचे. इस यात्रा के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा ने पीएम मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक मंचों पर भारत-ब्राजील सहयोग बढ़ाने में योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया. कई मुद्दों पर हुई द्विपक्षीय वार्ता विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित आपसी हित के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर द्विपक्षीय चर्चा की. PM ब्रिक्स समिट में हुए शामिल इसी के साथ पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट को प्रोडक्टिव बताया. पीएम ने कहा कि उन्होंने और बाकी देश के नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यापक विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें विभिन्न देशों के साथ भारत की दोस्ती को बढ़ावा देंगी. पीएम मोदी अर्जेंटीना की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार (स्थानीय समय) को ब्राजील पहुंचे. ब्राजील के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 9 जुलाई को नामीबिया पहुंचे हैं. पीएम वहां की संसद को भी संबोधित करेंगे. उन्होंने बुधवार को घाना से पांच देशों की अपनी यात्रा शुरू की थी. घाना से प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो गए और फिर अर्जेंटीना और ब्राजील का दौरा किया.

‘INS निस्तर’ समंदर में दुश्मन को ढूंढने वाला योद्धा, अब नए रूप में मारी एंट्री, समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन होंगे और मजबूत

 विशाखापट्टनम   विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘निस्तार’ सौंपा. यह जहाज भारत में ही डिजाइन और बनाया गया है. यह गहरे समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन की क्षमता को बढ़ाएगा.  ‘निस्तार’ क्या है और क्यों खास है? ‘निस्तार’ एक ऐसा युद्धपोत है, जो गहरे समुद्र में गोताखोरी और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बनाया गया है. इसका नाम संस्कृत शब्द ‘निस्तार’ से आया है, जिसका मतलब है मुक्ति, बचाव या उद्धार. यह दुनिया के कुछ चुनिंदा नौसेनाओं के पास मौजूद खास तकनीक वाला जहाज है.     आकार और वजन: यह जहाज 118 मीटर लंबा है और इसका वजन करीब 10,000 टन है.     खास उपकरण: इसमें आधुनिक डाइविंग उपकरण हैं, जो 300 मीटर गहराई तक सैचुरेशन डाइविंग (लंबे समय तक गहरे पानी में रहना) और 75 मीटर तक साइड डाइविंग ऑपरेशन कर सकते हैं.     रेस्क्यू की क्षमता: यह जहाज डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) के लिए ‘मदर शिप’ का काम करता है. अगर किसी पनडुब्बी में आपातकालीन स्थिति हो, तो यह लोगों को बचाने में मदद करता है.     गहरे समुद्र में काम: इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) हैं, जो 1000 मीटर गहराई तक गोताखोरों की निगरानी और सैल्वेज ऑपरेशन (समुद्र से चीजें निकालना) कर सकते हैं. स्वदेशी तकनीक का कमाल ‘निस्तार’ को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है. इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के नियमों के अनुसार डिजाइन किया गया है. इस जहाज में 75% से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी है. यह भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का शानदार उदाहरण है. ‘निस्तार’ का महत्व     नौसेना की ताकत बढ़ी: ‘निस्तार’ भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन करने की नई ताकत देगा। यह खासकर पनडुब्बी आपातकाल में बहुत जरूरी है.      दुर्लभ क्षमता: दुनिया में बहुत कम नौसेनाओं के पास ऐसी तकनीक है. यह जहाज भारत को समुद्री रक्षा में और मजबूत बनाता है.     स्वदेशी गर्व: इस जहाज का निर्माण भारत में हुआ है, जो हमारी तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है. कैसे काम करता है ‘निस्तार’? ‘निस्तार’ का मुख्य काम गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव कार्य करना है. अगर कोई पनडुब्बी समुद्र में फंस जाए या उसमें कोई खराबी हो, तो यह जहाज तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर सकता है. इसके ROVs समुद्र की गहराई में जाकर स्थिति का जायजा लेते हैं. जरूरी सामान या लोगों को बचाने में मदद करते हैं. इसके अलावा, यह जहाज समुद्र में डूबी चीजों को निकालने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है. भारत के लिए गर्व की बात ‘निस्तार’ का भारतीय नौसेना में शामिल होना एक बड़ा कदम है. यह न सिर्फ हमारी नौसेना को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अब ऐसी उन्नत तकनीक अपने दम पर बना सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत ने इस सपने को हकीकत में बदला है. INS निस्तर’ समंदर में दुश्मन को ढूंढने वाला योद्धा भारतीय नौसेना अपनी ताकत को और मजबूत करने जा रही है. 18 जुलाई को भारतीय नौसेना के बेड़े में एक बेहद खास जहाज शामिल होने जा रहा है “INS निस्तर”. यह सिर्फ एक सपोर्ट शिप नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में दुश्मन की किसी भी चाल को नाकाम करने वाला साइलेंट किलर है. INS निस्तर का नाम सुनते ही 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग की याद ताजा हो जाती है. उस जंग में पाकिस्तान ने अपनी सबसे घातक पनडुब्बी PNS गाजी को INS विक्रांत को निशाना बनाने भेजा था. लेकिन भारतीय नौसेना की चतुराई से गाजी को विशाखापत्तनम के पास समंदर की गहराई में ही खत्म कर दिया गया. उस ऑपरेशन में जो डाइविंग टेंडर इस्तेमाल हुआ था, उसी का नाम था INS निस्तर. अब उसी विरासत को नया जीवन देकर भारत ने INS निस्तर को और आधुनिक रूप में तैयार किया है. INS निस्तर क्यों है खास?     INS निस्तर भारतीय नौसेना का पहला डेडिकेटेड डायविंग सपोर्ट वेसल (DSV) होगा, जिसे आपात स्थिति में किसी भी पनडुब्बी को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.     यह जहाज करीब 80 फीसदी स्वदेशी तकनीक और सामग्री से बना है.     इसका वजन 9350 टन है और यह 120 मीटर लंबा है.     INS निस्तर में 200 से ज्यादा नौसैनिक तैनात रह सकते हैं और यह बिना बंदरगाह लौटे 60 दिन तक समंदर में ऑपरेशन कर सकता है.     इसमें डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हेकिल (DSRV) लगी है, जो समंदर में 650 मीटर गहराई तक जाकर किसी भी फंसी पनडुब्बी के सैनिकों को बचा सकती है.     इसमें हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की सुविधा भी है, जिससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सकेगा.     अब तक भारतीय नौसेना को पनडुब्बी हादसों या रेस्क्यू मिशन में ONGC या निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन INS निस्तर और इसके जुड़वां जहाज INS निपुण के आने से भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा.     INS निस्तर को पूर्वी तट यानी ईस्ट कोस्ट पर तैनात किया जाएगा, जबकि INS निपुण पश्चिमी तट यानी वेस्ट कोस्ट पर रहेगा. इससे किसी भी कोने में पनडुब्बी हादसे की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सकेगी. पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब पाकिस्तान के पास फिलहाल 5 ऑपरेशनल पनडुब्बियां हैं, लेकिन उसने चीन से 8 नई पनडुब्बियों का ऑर्डर दिया है. इनमें से चार कराची में और चार चीन में बन रही हैं. अनुमान है कि 2027 तक ये सब पाकिस्तानी नेवी में शामिल हो जाएंगी. वहीं, चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों की मौजूदगी बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत के लिए सिर्फ अटैक क्षमता ही नहीं, बल्कि मजबूत रेस्क्यू और सपोर्ट सिस्टम भी जरूरी था. INS निस्तर और निपुण इस रणनीति को पूरा करेंगे. स्वदेशी निर्माण से आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम INS निस्तर का 80 फीसदी हिस्सा देश में ही तैयार हुआ है. यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की ताकत दिखाता है. यह जहाज न सिर्फ भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर मित्र देशों की पनडुब्बियों को भी बचा सकेगा. आज जब भारत की अंडरवॉटर ताकत तेजी से बढ़ रही है 17 … Read more

वडोदरा : महिसागर नदी पर बना पुल टूटा, दो की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 वडोदरा  गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया जब वडोदरा और आणंद को जोड़ने वाला गम्भीरा पुल भरभराकर गिर गया. इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. पुल के गिरते ही पांच वाहन सीधे नदी में जा गिरे, जिनमें एक ट्रक और एक पिकअप वाहन अब भी नदी में फंसे हुए हैं. यह हादसा पादरा क्षेत्र में हुआ जहां महिसागर नदी पर गम्भीरा पुल 43 साल पहले बना था. घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा और रेसक्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. पुल गिरने के स्थान पर नदी में पानी जमा है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अधिकारियों को खासा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा जिले में पुल ढहने की घटना पर दुख जाहिर किया. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और कई घायल भी हुए हैं. पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है. वहीं घायलों को भी आर्थिक मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री ने घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना भी की है. पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा, ''गुजरात के वडोदरा जिले में पुल के ढहने की वजह से हुई जनहानि बेहद दुखद है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएँ. घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की कामना करता हूँ. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएँगे.'' मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश दरअसल वडोदरा जिले की महिसागर नदी पर बना एक पुल ढह गया, जिसकी वजह से 9 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए हैं. पुल ढहने की वजह से 5 गाड़ियां भी नीचे गिर गईं. एक ट्रक बमुश्किल पुल पर अटका हुआ दिखाई दिया. जानकारी के मुताबिक पुल को 1985 में बनाया गया था. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जांच के आदेश दिए हैं. भूपेंद्र पटेल ने बताया हादसे का कारण गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी दुख जाहिर किया. उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए पुल ढहने का कारण भी बताया. मुख्यमंत्री ने लिखा, "आणंद और वडोदरा को जोड़ने वाले गंभीरा पुल के 23 गर्डरों में से एक गर्डर के टूटने से हुई दुर्घटना दुखद है. मैं इस दुर्घटना में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं." नदी में पानी कम, कीचड़ में रेस्क्यू टीम को हो रही मुश्किल रेस्क्यू टीम नाव की मदद से घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन नदी में पानी कम होने और कीचड़ के जमा होने की वजह से वे मौके तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. पानी में गिरे वाहनों को निकालने की जद्दोजहद में अधिकारी लगे हैं, और पुलिस टीम भी कीचड़ से वाहनों को निकालने की कोशिश कर रही है. पानी में जा गिरे ट्रक को रस्सी से बांधकर निकालने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए यहां क्रेन भी लाया गया है, ताकि रस्सी से बांधकर ट्रक को ऊपर लाया जा सके. इसमें रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना सुबह 8.30 बजे के आसपास की है. वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया कि अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 6 लोग घायल हुए हैं. घायलों में से दो को बेहतर इलाज के लिए वडोदरा के एसएसजी अस्पताल रेफर किया गया है. रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है और मौके पर NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौजूद हैं.  कलेक्टर ने बताया कि नदी में अब भी एक ट्रक और एक पिकअप फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है. हादसे के पीछे की वजह पुल का अचानक टूटना बताया जा रहा है. हालांकि, पुल में किसी तरह का क्रैक था, या यह पुल कैसे गिरा इसकी जांच अभी बाकी है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और तुरंत पुल डिजाइन टीम, मुख्य इंजीनियर और विशेषज्ञों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने हादसे की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है. बताया जा रहा है कि यह पुल पिछले साल ही मरम्मत किया गया था. पुल पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन महीने पहले 212 करोड़ की लागत से एक नए पुल को मंजूरी दी थी. इस नए पुल के डिजाइन और टेंडरिंग की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार तड़के एक जर्जर पुल के ढह जाने से कई वाहन महिसागर नदी में गिर गए, जिससे कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य को बचा लिया गया। वडोदरा के ज़िला कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया , “हमने 5 लोगों को बचाया है जिन्हें मामूली चोटें आई हैं और दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव अभियान जारी है। हमें पता चला है कि पुल का एक हिस्सा अचानक टूट जाने से दो ट्रक, एक ईको वैन, एक पिकअप वैन और एक ऑटो-रिक्शा नदी में गिर गए।” घायलों को वडोदरा जिले के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। धमेलिया ने बताया कि बचाए गए 5 लोगों में से 4 को मामूली चोटें आयीं हैं। गुजरात के वडोदरा में मध्य गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना 45 साल पुराना ब्रिज मंगलवार सुबह अचानक टूट गया। इस हादसे में ब्रिज से गुजर रहे दो ट्रक, एक बोलेरो समेत 4 वाहन नदी में गिर गए। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, 3 लोगों को स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर बचा लिया। हादसे वाली जगह पर फायर ब्रिगेड की तीन टीमें भेजी गई हैं।ब्रिज के टूटने से दक्षिण गुजरात के पर्यटन और परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। यह पुल भरूच, सूरत, नवसारी, तापी और वलसाड को सौराष्ट्र से जोड़ता था। अब ब्रिज टूटने के बाद दक्षिण गुजरात के लोगों को सौराष्ट्र पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एक ट्रक, एक वैन और एक कार पुल पार कर रहे थे तभी पुल टूट … Read more

हूती विद्रोहियों का लाल सागर में आतंक जारी, हूती के हमले में ग्रीस का जहाज डूबा

सना  यमन के हूती चरमपंथियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर एक बार फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। सोमवार को हूती चरमपंथियों के हमले में लाइबेरिया के झंडे वाले यूनानी कंपनी के जहाज इटरनिटी सी के चालक दल के चार सदस्य मारे गए। यूरोपीय संघ के एक नौसैनिक बल ने मंगलवार को जहाज पर नाविकों की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा समूह ने एक और जहाज पर कब्जा करने और उसे डुबोने का दावा किया है और उसका वीडियो भी शेयर किया है। इस साल जहाज पर हमले में किसी चालक दल के सदस्य की मौत का पहला मामला है। इसके पहले जहाज पर हमले में आखिरी बार जून 2024 में मौते हुई थीं। जहाज पर बम और ड्रोन से बोला गया हमला यह हमले संभावित रूप से लाल सागर के जलमार्ग को निशाना बनाने के एक नये अभियान का शुरुआती संकेत है, जिससे हाल के हफ्तों में अधिक जहाजों का गुजरना शुरू हो गया था। सोमवार रात को जब यह जहाज़ उत्तर दिशा में स्वेज नहर की ओर बढ़ रहा था, तभी छोटी नावों में सवार लोगों और बम से लैस ड्रोन से उस पर हमला किया गया। जहाज पर मौजूद सुरक्षा गार्ड ने भी अपने हथियारों से जवाबी हमला किया। यूरोपीय संघ के ऑपरेशन एस्पाइड्स और निजी सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने इन विवरणों की जानकारी दी। हूतियों विद्रोहियों को हमले के लिए बताया जिम्मेदार हालांकि हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन यमन की निर्वासित सरकार और यूरोपीय संघ के बल ने हमले के लिए विद्रोहियों को दोषी ठहराया है। यूरोपीय संघ के बल ने हताहतों की जानकारी देते हुए कहा कि हमले में घायल चालक दल के एक सदस्य को अपना पैर गंवाना पड़ा है। चालक दल के सदस्य जहाज पर ही फंसे हुए हैं, जो अब लाल सागर में बिना नियंत्रण के बह रहा है। हूतियों ने डुबोया जहाज हूतियों ने रविवार को लाइबेरियाई झंडे वाले, यूनान स्वामित्व वाले बल्क कैरियर ‘मैजिक सीज’ पर ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट-चालित ग्रेनेड और छोटे हथियारों से हमला किया था। इस हमले की वजह से इसके चालक दल के 22 सदस्यों को जहाज़ छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विद्रोहियों ने बाद में कहा कि यह जहाज़ लाल सागर में डूब गया। एक वीडियो में हथियारबंद लोगों को जहाज पर चढ़ते और बाद में विस्फोट के बाद जहाज को डूबते दिखा गया है। दोनों हमलों और सोमवार को विद्रोहियों को निशाना बनाकर किए गए इजराइली हवाई हमले की वजह से जहाजों को हूती विद्रोहियों द्वारा निशाना बनाने का अभियान फिर से शुरू होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। इससे अमेरिकी और पश्चिमी देशों की सेनाएं फिर से क्षेत्र में आ सकती हैं। खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बड़े हवाई हमले में विद्रोहियों को निशाना बनाया है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब इजराइल-हमास युद्ध, ईरान-इजराइल युद्ध और ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिका के हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है।