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जॉर्जिया मेलोनी ने व्हाइट हाउस में किया ‘नमस्ते’, बना चर्चा का विषय

 वाशिंगटन वाइट हाउस में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक से पहले एक रोचक पल देखने को मिला, जब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सहायक का स्वागत 'नमस्ते' कहकर किया। यह क्षण भले ही कुछ सेकंड का था, लेकिन वहां मौजूद लोगों के लिए यह अप्रत्याशित और आकर्षक था। जहां अन्य नेता पारंपरिक हैंडशेक और औपचारिक अभिवादन कर रहे थे, वहीं मेलोनी का 'नमस्ते' कहना सबके लिए आश्चर्यजनक रहा। मेलोनी के 'नमस्ते' ने जीता दिल जॉर्जिया मेलोनी का भारतीय शैली में 'नमस्ते' कहना उनकी विनम्रता और वैश्विक संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे एक सम्मानजनक और वैकल्पिक अभिवादन का उदाहरण बता रहे हैं, जो कोरोना महामारी के दौरान भी लोकप्रिय हुआ था। बदले-बदले नजर आए जेलेंस्की यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, जो आमतौर पर सैन्य यूनिफॉर्म या कैजुअल जैकेट में दिखते हैं, इस बार बिना टाई के ब्लैक सूट-स्टाइल जैकेट और शर्ट में नजर आए। यह लुक उन्होंने जून में द हेग (The Hague) में हुए NATO शिखर सम्मेलन में भी अपनाया था। बता दें कि जेलेंस्की सोमवार को यूरोपीय नेताओं के साथ वाइट हाउस पहुंचे थे, जहां डोनाल्ड ट्रंप ने उनका स्वागत किया। शांति समझौते पर चर्चा यूरोपीय नेताओं ने रूस के साथ संभावित शांति समझौते पर गहरे मतभेदों को दूर करने के लिए ट्रंप के साथ बातचीत की। पिछले सप्ताह अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को क्रीमिया और अपनी NATO महत्वाकांक्षाओं को त्यागना होगा, जो मॉस्को की दो प्रमुख मांगें हैं।

लगातार बारिश से बेहाल मुंबई, ट्रैफिक और ट्रैवल सेवाओं में भारी गड़बड़ी

मुंबई कई राज्यों में बारिश का कहर जारी है लेकिन इन दिनों महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहा है. जहां अब तक सात लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग मौसमी तबाही में फंसे हुए हैं. मायानगरी मुंबई की रफ्तार भी बारिश से थम सी गई है, जिसके चलते नगर निगम को स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी. देश की आर्थिक राजधानी के कई हिस्सों में जमकर बरसात हो रही है. मुंबई की सड़कों पर सैलाब कभी न थमने वाले शहर की रफ्तार पानी ने रोक दी है, स्थिति ये है कि मुंबई की सड़कों पर सैलाब है, इतना पानी भरा हुआ है कि गाड़ियां जहां-तहां फंस गई है, अपनी चमक धमक पर इतराने वाला शहर पानी की मार से बिलख रहा है और ये पहली बार नहीं है, मुंबई में हर साल बारिश होती है और हर साल मुंबई इसी परेशानी से जूझती है. मुंबई के अंधेरी सबवे में तेज़ बारिश के बाद पानी भर गया है, जिसके चलते अंधेरी सबवे को बंद कर दिया गया है. मुंबई में लगातार बारिश के कारण जलभराव से प्रभावित चेंबूर के एक अस्पताल में भर्ती होने वालों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कई लोगों को अपने बीमार परिजनों को पीठ पर लादकर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा संचालित माँ जनरल अस्पताल तक पहुँचने के लिए जाते देखा गया. कई उड़ानें प्रभावित मुंबई में खराब मौसम के कारण कई उड़ानें भी प्रभावित रहीं. एयरपोर्ट तक जाने वाले कई रास्तों पर अब भी जलभराव है, जिससे यातायात धीमा पड़ गया है. इंडिगो के मुताबिक, बारिश के चलते अराइवल और डिपार्चर दोनों में देरी हो रही है.  इंडिगो ने यात्रा करने वाले लोगों को थोड़ा पहले निकलने और ऐप या वेबसाइट के माध्यम से अपनी उड़ान की स्थिति पर नज़र रखने की सलाह दी है. 18 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 19 अगस्त, सुबह 5:30 बजे तक मुंबई में कितनी बारिश     विक्रोली-194.5 mm     सांताक्रूज़-185.0 mm     जुहू-173.5 mm     बाइकुला-167.0 mm     बांद्रा-157.0 mm     कोलाबा-79.8 mm     महालक्ष्मी-71.9 mm स्कूल-कॉलेज बंद सोमवार को मुंबई में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे यातायात जाम हो गया. बीएमसी ने शहर में दूसरी पाली (दोपहर 12 बजे के बाद) में संचालित होने वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है. बाद में, नगर निकाय ने भारी बारिश के पूर्वानुमान के बीच आज यानी मंगलवार को महानगर के सभी स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश की घोषणा की. इसके साथ ही आज यहां बहुत भारी से बेहद भारी बारिश की संभावना है. साथ ही कभी-कभी 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएँ चलने की भी संभावना है. मौसम विभाग ने हाई टाइड का भी अलर्ट जारी किया है. अधिकारियों ने बताया कि ठाणे जिले में कल्याण के पहाड़ी इलाके में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ जिससे चार घर क्षतिग्रस्त हो गए हालांकि कोई घायल नहीं हुआ. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा ठाणे और पालघर जिलों में 18-19 अगस्त के लिए रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद अधिकारियों ने मंगलवार को स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है.  वहीं मुंबई में मौसम विभाग ने 17-21 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी दी है और पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. नांदेड़ जिले में लगातार बारिश के कारण 200 से अधिक लोग बाढ़ में फंस गए, जिसके कारण अधिकारियों को बचाव और राहत कार्यों के लिए सेना को बुलाना पड़ा.

सीईसी का संरक्षण: क्यों नहीं आसानी से हटा सकते विपक्षी दल

नई दिल्ली  कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष और भारत के चुनाव आयोग के बीच बढ़ते तनाव के बीच जानकारी सामने आई है कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पद से हटाने का नोटिस लाने पर विचार कर रहा है. यह चौंकाने वाला कदम विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से चुनाव आयोग के कामकाज में बड़े पैमाने पर खामियों और 'वोट चोरी' के आरोपों के बाद उठाया जा सकता है. बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद तनातनी ज्यादा बढ़ गई है.  CEC को हटाने के क्या प्रावधान? सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद एक बड़ी संवैधानिक अथॉरिटी है जिस पर भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की अहम ज़िम्मेदारी है. इस पद की स्वतंत्रता और स्वायत्तता की रक्षा भारतीय लोकतंत्र के लिए जरूरी है, और इसीलिए भारत के संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए काफी जटिल प्रावधान हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के जज को पद से हटाने की तरह हैं.  मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324(5) में दिए गए हैं. संविधान के अनुच्छेद 324(5) में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से उसी तरह और उसी आधार पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को पद से हटाया जाता है. अनुच्छेद का यह क्लॉज मुख्य चुनाव आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट के जज के बीच एक तरह से समानता स्थापित करता है, और यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का 'तरीका' और 'आधार' संविधान में सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए निर्धारित नियमों की तरह होने चाहिए. नतीजन, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया को समझने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय के जज को हटाने के संवैधानिक और वैधानिक ढांचे को समझना जरूरी है.  SC के जजों को कैसे हटाया जाता है? सर्वोच्च न्यायालय के जज को हटाने की प्रक्रिया, जो सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त पर लागू होती है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(4) में दर्ज है और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत आती है. संविधान के अनुच्छेद 124(4) में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज को उनके पद से तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक कि राष्ट्रपति का कोई आदेश न हो. यह आदेश तभी पारित हो सकता है, जब संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) एक ही सत्र में जज को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पास करें. यह प्रस्ताव 'सिद्ध दुर्व्यवहार' या 'अक्षमता' के आधार पर पारित होना चाहिए. इसे पास करने के लिए दोनों सदनों में 'विशेष बहुमत' की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और साथ ही उस सदन में उपस्थित और वोट डालने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत होना चाहिए. यह अनुच्छेद किसी जज को हटाने के लिए जरूरी आधारों और उच्च संसदीय सीमा को तय करता है. संविधान में दर्ज दो आधार 'सिद्ध कदाचार' (Proved misbehaviour) या 'अक्षमता' (Incapacity) हैं. यहां, सिद्ध शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका मतलब है कि किसी भी संसदीय मतदान से पहले जांच और पुष्टि होना जरूरी है. इसके अलावा, अनुच्छेद 124(4) लोकसभा और राज्यसभा दोनों में 'विशेष बहुमत' का प्रावधान करता है. इसका मतलब है कि सिर्फ उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से काम नहीं चलेगा, बल्कि सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत होना भी ज़रूरी है. इस प्रक्रिया के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सिर्फ सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ही शुरू की जा सकती है. पद से हटाने के किसी भी प्रस्ताव को अंतिम आदेश के लिए राष्ट्रपति के सामने पेश करने से पहले संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत हासिल करना होगा. दुर्व्यवहार या अक्षमता कैसे साबित होती है? किसी जज पर लगे 'सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता' के आरोपों की जांच और उन्हें साबित करने की प्रक्रिया सिर्फ संसद के सदस्यों की मर्जी पर नहीं छोड़ी गई है, बल्कि इसके लिए न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 बनाया गया है. चूंकि CEC को भी जज की तरह ही हटाया जाता है, इसलिए यह कानून बाकी पहलुओं को भी नियंत्रित करता है. संविधान में 'सिद्ध दुर्व्यवहार' कोई परिभाषा नहीं दी गई है, लेकिन इसमें जानबूझकर किया गया गलत काम, भ्रष्टाचार, नैतिक पतन से जुड़े अपराध या पद का दुरुपयोग शामिल हो सकता है. यह सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि बार-बार की गई लापरवाही या लापरवाही से भरा व्यवहार हो सकता है जो एक पैटर्न को दिखाता हो. इसी तरह 'अक्षमता' का मतलब शारीरिक या मानसिक रूप से इस हालत में होना कि व्यक्ति अपने सरकारी काम को ठीक से न कर पाए. इसे एक मेडिकल कंडीशन के तौर पर देखा जाता है. कैसे आता है पद से हटाने का प्रस्ताव सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए, सबसे पहले संसद के किसी भी सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पेश किया जाना चाहिए. प्रस्ताव की सूचना पर लोकसभा के कम से कम 100 सदस्यों या राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए.  

भारत की नई Pralay मिसाइल, हवा से लॉन्च होगी और 7473 km/hr की गति से निशाना साधेगी

नईदिल्ली  डीआरडीओ (DRDO) ने प्रलय मिसाइल के एयर लॉन्च्ड वर्जन पर काम शुरू किया है, जो भारत की रणनीतिक हमले की क्षमता को बढ़ा सकता है. प्रलय एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 6.1 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है. यानी 7473 किलोमीटर प्रतिघंटा. एक बार ये मिसाइल बन गई तो दुश्मन कुछ सेकेंड में खत्म.  हालांकि इसे फाइटर जेट से लॉन्च करना आसान नहीं है. आइए समझते हैं कि यह तकनीक कितनी जटिल है. भारत इस क्षेत्र में कैसे आगे बढ़ रहा है. प्रलय मिसाइल क्या है? प्रलय एक शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल (SRSSM) है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. यह 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को नष्ट कर सकती है. यह हाइपरसोनिक मिसाइल है. वर्तमान में यह 5 टन वजनी है. ट्रक से लॉन्च की जाती है. इसके पास एडवांस गाइडेंस सिस्टम है, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करता है. हवाई लॉन्च संस्करण क्यों जरूरी है? हवाई लॉन्च संस्करण से भारत को कई फायदे मिल सकते हैं…     हमले में लचीलापन: हवाई जहाज से लॉन्च करने पर मिसाइल को कहीं भी तेजी से तैनात किया जा सकता है, भले ही जमीन पर रास्ता मुश्किल हो.     रणनीतिक बढ़त: दुश्मन के इलाके में गहरे टारगेट तक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी.     हैरान करने वाली बात: हवाई लॉन्च से दुश्मन को पहले से पता नहीं चलेगा, जिससे बचाव मुश्किल होगा. लेकिन यह तकनीक बहुत चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइल को हवा से लॉन्च करना क्रूज मिसाइल (जैसे ब्रह्मोस-ए) से ज्यादा जटिल है.  तकनीकी चुनौतियां क्या हैं? वजन कम करना: प्रलय मिसाइल का वजन 5 टन है, जो फाइटर जेट के लिए बहुत भारी है. इसे हल्का करना होगा. करीब 2-3 टन तक. इसके लिए हल्के मटीरियल जैसे कार्बन फाइबर या टाइटेनियम का इस्तेमाल होगा. डिजाइन में बदलाव: मिसाइल के पंखों और आकार को फिर से डिजाइन करना होगा ताकि हवा में अलग होने और स्थिर रहने में मदद मिले. भारी केंद्र (CoG): मिसाइल के वजन केंद्र को संतुलित करना होगा ताकि हवाई जहाज से छोड़े जाने के बाद यह सुरक्षित रहे. प्रोप्ल्शन सिस्टन: हवा में सुरक्षित ज्वलन (इग्निशन) के लिए नया तंत्र बनाना होगा, जो जोखिम भरा है.  स्थिरता और उड़ान: ब्रह्मोस-ए सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो हल्की और स्थिर होती है. लेकिन प्रलय हाइपरसोनिक और प्रति मीटर भारी है, जिससे इसे हवा से छोड़ने और प्रोप्लशन शुरू करने में दिक्कत होगी. हवा में मिसाइल का संतुलन बनाए रखना और सही दिशा में उड़ान भरना मुश्किल होगा. उड़ान परीक्षण और समयसीमा     डीआरडीओ 2028-2029 के बीच प्रलय के हवाई लॉन्च संस्करण के उड़ान परीक्षण करेगा.     ड्रॉप सेपरेशन: मिसाइल को फाइटर प्लेन से सुरक्षित तरीके से अलग करना.     ट्रैजेक्टरी वैलिडेशन: उड़ान पथ की सटीकता जांचना.     मिड-एयर इग्निशन: हवा में ज्वलन शुरू करना.     ये परीक्षण मिसाइल की सफलता तय करेंगे. भारत के लिए यह कदम क्यों खास है?     नई तकनीक: हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा से लॉन्च करने की तकनीक पर सिर्फ कुछ देशों (जैसे अमेरिका और रूस) ने काम किया है. भारत इस क्षेत्र में नया कदम रख रहा है.     सुरक्षा: यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के खिलाफ भारत की रक्षा को मजबूत करेगी.     आत्मनिर्भरता: अगर यह सफल होता है, तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी ताकत बन सकता है. चुनौतियां और उम्मीदें यह प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से बहुत मुश्किल है. वजन कम करने और स्थिरता सुनिश्चित करने में समय लगेगा. साथ ही, परीक्षणों में असफलता का जोखिम भी है. लेकिन डीआरडीओ की टीम पहले भी ब्रह्मोस और अग्नि मिसाइलों में सफलता हासिल कर चुकी है, जो आशा जगाती है. अगर 2028-2029 तक यह तकनीक कामयाब होती है, तो भारत की सैन्य ताकत में क्रांतिकारी बदलाव आएगा.

रेलवे ने लगाई नई मिसाल, पटरियों के बीच सोलर पैनल से होगी बिजली की बचत

नई दिल्ली भारतीय रेलवे (Indian Railway) न केवल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगातार कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी नए तरीके अपना रही है. इसी क्रम में रेलवे को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. रेलवे मिनिस्ट्री (Ministry Of Railway) की ओर से एक सोशल मीडिया (Social Media) पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया गया है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेल की पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम (Solar Panal System On Track) स्थापित किया है.  70 मीटर ट्रैक पर 28 सोलर पैनल  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले Twitter) पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में बताया गया है. पोस्ट में जानकारी दी गई है कि वाराणसी के बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेलवे ट्रैक पर पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम स्थापित कर लिया है. इसमें 28 Sola Panal लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 15 किलोवाट पीक है.  बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण रेल मंत्रालय की ओर से Indian Railway के इस कदम को हरित और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया गया है. इस संबंध में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे की यह पहल न केवल बिजली की बचत करेगी और एनर्जी लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगी.  सबसे खास बात ये है कि रेल की पटरियों के बीच में लागए गए इन सोलर पैनल्स को आसानी से हटाया और फिर से दोबारा लगाया भी जा सकता है. दरअसल, रेलवे ट्रैक पर अक्सर मेंटिनेंस काम चलता रहता है, ऐसे में इन रिमूवेबल Solar Panal को वहां काम करने वाले कर्मचारी आसानी से बाहर निकाल सकते हैं और काम खत्म होने के बाद ट्रैक पर वापस लगा सकते हैं.  रेल मंत्रालय ने शेयर कीं तस्वीरें रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से ट्रैक पर सोलर पैनल सिस्टम स्थापित करने की जानकारी शेयर किए जाने के साथ ही इसकी तमाम तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिनमें देखने को मिल रहा है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने किस तक रेल की पटरियों की बीच पत्थरों के ऊपर सोलर पैनल लगाए हैं. एक अन्य तस्वीर में इनके ऊपर से ट्रेन का इंजन गुजरता हुआ भी नजर आ रहा है. निश्चित तौर पर रेलवे का ये कदम अन्य सेक्टर्स को भी ग्रीन और क्लीन एनर्जी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरणादायक है. 

UAE के बाद अब कुवैत भी करेगा बड़ा बदलाव, विदेशी जजों की छुट्टी 2030 तक

नई दिल्ली मध्य-पूर्व का इस्लामिक देश कुवैत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राह पर चल पड़ा है. जिस तरीके से यूएई हर क्षेत्र में अमीरातीकरण (नौकरियों में अपने नागरिकों की संख्या बढ़ाना) को बढ़ावा दे रहा है, कुवैत ने भी ऐसी ही पहल शुरू की है. कुवैत के न्याय मंत्री, काउंसलर नासिर अल-सुमैत ने कहा है कि देश की न्यापालिका 2030 तक पूरी तरह से 'Kuwaitized' हो जाएगी. इसका मतलब है कि 2030 तक सभी न्यायिक पदों पर कुवैती लोग होंगे, विदेशियों को जज और सभी न्यायिक पदों से हटा दिया जाएगा.कुवैत की सरकार ने यह फैसला स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने, देश के पेशेवरों को मजबूती देने और कानूनी क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए किया है.  कुवैत अपने न्याय विभागों में बदलाव कर रहा है जिसके तहत ये फैसला लिया गया है. इसके साथ ही स्वतंत्रता और दक्षता को बढ़ावा देने के लिए विधायी सुधार भी किए जा रहे हैं. मध्य-पूर्वी देश के प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर, विशेष रूप से तेल और तकनीकी क्षेत्र से कहा जा रहा है कि वो देश के नागरिकों को अधिक से अधिक संख्या में नौकरी दें. पीपुल्स मैटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अल-सुमैत ने कहा कि सभी न्यायिक विभागों के कुवैतीकरण की प्रक्रिया चल रही है जहां विदेशियों की जगह योग्य और कुशल कुवैती प्रोफेशनल्स की भर्ती की जा रही है. उन्होंने कहा, 'हम इस मामले में फैसला ले चुके हैं और 2030 तक 100% कुवैतीकरण का हमारा टार्गेट है.' कुवैत का न्याय मंत्रालय यह सुनिश्चित करने की भी पूरी कोशिश में है कि विदेशियों की जगह होने वाली सभी नियुक्तियां और प्रमोशन कुवैती उम्मीदवारों के बीच गुणवत्ता, प्रशिक्षण और काम को लेकर उनकी तत्परता को प्राथमिकता दें. कुवैत के इन सेक्टरों का पहले ही हो चुका है कुवैतीकरण कुवैत के कई सेक्टर्स में कुवैतीकरण बहुत पहले से होता आ रहा है. कुवैत के ऑयल सेक्टर के सभी प्रमुख इंजिनियरिंग और टेक्निकल भूमिकाओं में नागरिकों को जगह दी गई है. 2002 में शुरू हुए Manpower Contractors Kuwaitization Initiative के तहत तेल क्षेत्र में कुवैती नागरिकों को उचित वेतन, लाभ और स्थिर रोजगार दिया जाता है. 2024 तक, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (केपीसी) और उसकी सहायक कंपनियों ने कथित तौर पर शीर्ष पदों पर 100% राष्ट्रीय स्टाफिंग हासिल कर ली है यानी सभी शीर्ष पदों पर कुवैत के योग्य नागरिकों को रखा गया है. इन कंपनियों ने कुवैतियों के लिए मुश्किलों को दूर करने, स्थायी नौकरी सुनिश्चित करने और विदेशी स्टाफ पर निर्भरता को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए अपने 100% टार्गेट को हासिल कर लिया है. कुवैत में विदेशियों को नौकरियां मिलनी हुई मुश्किल कुवैत में विदेशियों को नौकरियां मिलनी अब मुश्किल होती जा रही हैं. जनशक्ति के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण ने चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून, शिक्षा, अकाउंट्स और फाइनेंस जैसे तकनीकी पदों पर विदेशियों की भर्ती काफी सख्त कर दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन नौकरियों में कुवैत के नागरिकों को प्राथमिकता दी जा रही है. पहले जहां इन क्षेत्रों में विदेशियों के लिए नौकरी हासिल करना आसान था, वहीं, अब विदेशी उम्मीदवारों को इन नौकरियों के लिए एक ऑनलाइन पेशेवर दक्षता परीक्षा पास करनी पड़ती है. इसके बाद भी आधिकारिक निकायों और विदेश स्थित कुवैती दूतावासों के जरिए, आमतौर पर तीन से पांच सालों के लिए गहन शैक्षणिक और वर्क एक्सपीरिएंस वेरिफिकेशन से गुजरना होता है. भारतीयों पर क्या होगा कुवैतीकरण का असर? गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक कुवैत में लगभग 10 लाख 7 हजार भारतीय नागरिक रह रहे थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 20% है. 2025 के हालिया आंकड़े बताते हैं कि कुवैत की 5,098,000 की आबादी में 70% लोग प्रवासी हैं, जिनमें से लगभग 29% प्रवासी भारतीय हैं. साल 2025 की पहली तिमाही की लेबर रिपोर्ट में बताया गया है कि कुवैत में लगभग 884,000 भारतीय कार्यरत हैं. बाकी के भारतीय कुवैत में काम करने वालों के परिवार, आश्रित लोग या फिर छात्र हैं. कुवैत में इतनी बड़ी भारतीय आबादी को देखते हुए कुवैतीकरण का सबसे बड़ा असर भारत पर ही होने वाला है. इससे कुवैत में कुशल और गैर-कुशल भारतीयों को नौकनी मिलने में कठिनाई बढ़ेगी. 

खतरे में मिडिल क्लास! अर्थव्यवस्था में गहराते संकट की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली क्या मिडिल क्साल (Middle Class) कम खर्च कर रहा है? क्या उनके पास पैसा खत्म हो रहा है? ये हम नहीं कह रहे, बल्कि एक्सपर्ट कुछ ऐसी ही चेतावनी दे रहे हैं. मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सौरभ मुखर्जी ने एक लंबे चौड़े ब्लॉग में बताया कि भारतीय कॉर्पोरेट मुनाफा लड़खड़ा रहा है और इस संकट में अहम रोल मध्यम वर्ग निभा रहा है. उन्होंने कहा कि दिवाली (Diwali) 2023 के बाद से ही भारतीय कंपनियों की इनकम ग्रोथ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका बड़ा कारण खपत में आई कमी है और इसकी वजह यह है कि मध्यम वर्ग के भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं.  भारत का कॉर्पोरेट मुनाफ़ा लड़खड़ा रहा है और इस संकट की जड़ में मध्यम वर्ग हो सकता है।मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के ने एक ब्लॉग में चेतावनी दी है कि सफेदपोश रोज़गार सृजन में गिरावट, वास्तविक मज़दूरी में कमी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उदय, उस मध्यम वर्ग के इंजन को कमज़ोर कर रहे हैं जिसने लंबे समय से भारत की विकास गाथा को गति दी है।  दिवाली 2023 के बाद से, भारतीय कंपनियों की आय वृद्धि में भारी गिरावट आई है, जिसकी वजह खपत में गिरावट है। इसकी वजह यह है कि मध्यम वर्ग के भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी के हिस्से के रूप में घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर आ गई है, जो आखिरी बार 1977 में देखा गया था। वे लिखते हैं, "होली 2024 तक, मध्यम वर्ग की ऊर्जा खत्म हो चुकी होगी।" मंदी हर जगह दिखाई दे रही है। खपत, जो सकल घरेलू उत्पाद का 60% हिस्सा है, 2021-23 के "बदला लेने वाले खर्च" के दौर के खत्म होने के बाद से कम हो गई है। एसयूवी, आवास और यात्रा में कभी उछाल आया था; अब मांग कम हो रही है। कॉर्पोरेट आय भी इसी राह पर चल रही है — निफ्टी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में सबसे तेज़ गिरावट दर्ज की है। नौकरियाँ एक और भी भयावह कहानी बयां करती हैं। 2020 से पहले एक दशक तक, सफेदपोश नौकरियाँ हर छह साल में दोगुनी होती थीं। वित्त वर्ष 2020 से, यह वृद्धि दर घटकर केवल 3% वार्षिक रह गई है – यानी अब नौकरियों को दोगुना होने में 24 साल लगेंगे। मध्यम वर्ग के रोज़गार की रीढ़, आईटी, सॉफ्टवेयर और रिटेल, स्थिर हो गए हैं। स्वचालन इस गिरावट को और तेज़ कर रहा है। मुखर्जी बताते हैं कि कैसे भारतीय आईटी दिग्गज खुलेआम कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रहे हैं। टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने कहा कि जुलाई 2025 में एआई के विस्तार के साथ कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में 2% (लगभग 12,000 नौकरियाँ) की कटौती करेगी। एचसीएल टेक के सी. विजयकुमार ने आगे कहा कि लक्ष्य "आधे कार्यबल के साथ राजस्व को दोगुना करना" है। आय में कमी भी उतनी ही चिंताजनक है। निफ्टी 50 कंपनियों पर मार्सेलस के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले आठ सालों में, कर्मचारियों का औसत वेतन मुद्रास्फीति के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा है। 2016 से पहले के दौर के विपरीत, जब वेतन कम से कम बढ़ती लागत के बराबर होता था, आज के सफेदपोश कर्मचारी वास्तविक रूप से गरीब हैं। भारत के 4 करोड़ सफेदपोश कमाई करने वालों के लिए — जो अपने खर्च से लगभग 20 करोड़ नौकरियों का सृजन करते हैं — यह एक ख़तरे की घंटी है। मुखर्जी चेतावनी देते हैं कि जब तक वेतन और रोज़गार सृजन में सुधार नहीं होता, भारत में मध्यम वर्ग की लंबे समय तक तंगी बनी रहेगी, जिससे उसकी आर्थिक गति पर असर पड़ सकता है। मिडिल क्लास के इंजन को रोक रहे 3 कारण सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, इस संकट के पीछे तीन बड़े कारणों को बताया है और कहा है कि सफेदपोश रोजगार के अवसरों में गिरावट, वास्तविक मजदूरी में कमी और एआई का बढ़ता दायरा, मध्यम वर्ग के इंजन को कमजोर करने में अहम रोल निभा रहे हैं, जिससे लॉन्गटर्म से भारत के डेवलपमेंट को तेजी मिली है. उन्होंने अपने ब्लॉग में कहा कि कंपनियों की खपत घट रही है, क्योंकि मिडिल क्लास भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं.  घरेलू बचत 5 दशक में सबसे कम मुखर्जी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी (GDP) के हिस्से के रूप में घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर आ गई है, जो आखिरी बार 1977 में देखने को मिली थी. उन्होंने आगे कहा कि मंदी (Recession) हर जगह दिखाई दे रही है. खपत, जो जीडीपी का 60% हिस्सा है, 2021-23 के के बाद से कम हो गई है. बात SUV की हो या फिर घर या ट्रैवल की, जिनमें कभी तेज उछाल दिख रहा था, इनकी डिमांड अब कम हो रही है. कॉर्पोरेट इनकम भी इसी ट्रैक पर चल रही है और निफ्टी पर लिस्टेड कंपनियों ने FY25 में सबसे तेज गिरावट दर्ज की है. नौकरियों में कमी से बढ़ी मुसीबत अगला कारण विस्तार से बताते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि नौकरियां एक और भी भयावह कहानी बयां करती हैं. आंकड़े देखें, तो साल 2020 से पहले एक दशक तक, सफेदपोश नौकरियां हर छह साल में दोगुनी होती थीं, लेकिन FY20 से ही यह ग्रोथ रेट कम होकर सालाना सिर्फ तीन फीसदी रह गया. इसका मतलब है कि अब नौकरियों को दोगुना होने में 24 साल लगेंगे. मिडिल क्लास की रीढ़ माने जाने रोजगार आईटी, सॉफ्टवेयर और रिटेल स्थिर से नजर आ रहे हैं. उन्होंने ऑटोमेशन को इस गिरावट में तेजी का बड़ा कारण बताया है. AI के विस्तार के साइड इफेक्ट को बताने के लिए उन्होंने टाटा ग्रुप की कंपनी टीसीएस का उदाहरण दिया और बताया कि TCS CEO के. कृतिवासन ने जुलाई 2025 में एआई ग्रोथ के साथ कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में 2% (लगभग 12,000 नौकरियों) की कटौती की बात कही है.  कंपनियों की कमाई घटना चिंताजनक कंपनियों की इनकम में कमी को भी मुखर्जी उतना ही चिंताजनक करार दे रहे हैं, जितना कि बाकी कारण हैं. उन्होंने कहा कि Nifty-50 कंपनियों … Read more

मोदी-पुतिन टेलीफोन वार्ता: दोनों नेताओं ने उठाए महत्वपूर्ण विषय

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष, भारत-रूस द्विपक्षीय एजेंडा, और दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपनी बैठक के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने इस मुलाकात के प्रमुख बिंदुओं और अपने आकलन को प्रधानमंत्री मोदी के साथ विस्तार से चर्चा की। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सुसंगत रुख को दोहराते हुए यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीति और संवाद के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस दिशा में सभी प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को फिर व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया, ताकि आपसी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया जा सके। दोनों ने भविष्य में निकट संपर्क बनाए रखने और नियमित संवाद जारी रखने पर भी सहमति जताई। राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा है कि मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन को फोन कॉल और अलास्का में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक की जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद। भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए लगातार आह्वान किया है और इस दिशा में सभी प्रयासों का समर्थन करता है। मैं आने वाले दिनों में हमारे निरंतर संवाद की आशा करता हूं। गौरतलब है कि 15 अगस्त को अलास्का में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यूक्रेन युद्ध सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इस वार्ता में युद्ध के संबंध में कोई ठोस या निर्णायक फैसला नहीं हो सका। दूसरी ओर आज (सोमवार ) रात डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच भी बातचीत होने वाली है, और सबकी नजर व्हाइट हाउस पर है।  

ममता सरकार का बड़ा कदम: रोजगार न मिलने तक प्रवासियों को मिलेगी मासिक सहायता

कोलकाता प्रवासी श्रमिकों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा तोहफा दिया है। सीएम ने प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास के लिए योजना शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि नई योजना के तहत प्रवासी श्रमिकों को एक वर्ष तक या जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता, तब तक हर महीने पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। कई राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों को निशाना बनाए जाने सीएम ममता बनर्जी केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि खासकर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों पर हमला पूर्व नियोजित है। भाजपा शासित राज्यों में लगभग 22 लाख प्रवासी श्रमिक और उनके परिवार परेशान हैं। मंत्रिमंडल ने वापस लौटने और अपना जीवन नए सिरे से शुरू करने के इच्छुक प्रवासी श्रमिकों के पुनर्वास में मदद के लिए इस योजना को मंजूरी दे दी है। बंगाली को भाषा के चलते किया जाता है परेशान: सीएम इससे पहले सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया था कि बंगाली बोलने वाले भारतीयों को बांग्लादेशी कहकर जबरन बाहर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल के प्रवासी मजदूरों को दूसरी जगहों पर सिर्फ उनकी भाषा की वजह से परेशान किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वह इसका विरोध करती हैं, तो कुछ लोग उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाने की मांग करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) लाने की कोशिश की जा रही है, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के नाम पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बंगाली भाषी मजदूरों को यह कहकर बांग्लादेश भेजा जा रहा है कि वे भारत के नागरिक नहीं हैं। मैं अपनी आखिरी सांस तक लोगों के बोलने, चलने और उनके मूल अधिकारों को छीने जाने के खिलाफ लड़ती रहूंगी। उन्होंने भाजपा पर देशभर में विभाजन फैलाने का भी आरोप लगाया। 

ट्रंप का ऐलान: वोटिंग मशीन पर रोक, जल्द जारी हो सकता आदेश

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में वोटिंग मशीन से मतदान खत्म करने जा रहे हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह बात लिखी है। इसके अलावा उन्होंने ई-मेल से होने वाले मतदान पर भी रोक लगाने की बात कही है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि वह एक एग्जीक्यूटिव आदेश देने वाले हैं। इसके बाद 2026 के मध्यावधि चुनाव में वोटिंग मशीन और ई-मेल से मतदान पर रोक लग जाएगी। ट्रंप काफी अरसे से मशीन और मेल मतपत्रों का विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वोटिंग मशीन से चुनावी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है। गड़बड़ी की जताई है आशंका डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह पोस्ट लिखी। उन्होंने मशीन से वोटिंग पर चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताई है। हालांकि अभी तक अमेरिकी चुनाव में ऐसी गड़बड़ी कभी देखने को नहीं मिली है। बता दें कि डेमोक्रेट्स मेल मतपत्रों से वोटिंग का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से उन लोगों को मतदान में भाग लेने का मौका मिल जाता है, जो सामान्य तौर पर वोट डालने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे लोगों में बुजुर्ग, दिव्यांग आदि शामिल हैं।