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भारतीय वायुसेना का गौरव मिग-21 हो रहा रिटायर, छह दशक की सेवा को सलाम

नई दिल्ली  हिंदुस्तान के आसमान में 60 और 70 के दशक में अपनी बादशाहत कायम रखने वाला फाइटर जेट मिग-21 सिंतबर में रिटायर हो रहा है। पैंथर्स के नाम से मशहूर 23 स्क्वाड्रन ने भारत के हर छोटे-बड़े युद्ध में हिस्सा लिया। 60 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहने के बाद इसे अब 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस पर एक समारोह में विदाई दे दी जाएगी। जानते हैं 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद कैसा रहा मिग-21 का सफर… मिग-21 लड़ाकू विमान का इतिहास मिला-जुला रहा। इस फाइटर जेट को भारत ने सोवियत संघ से खरीदा था। इसके बाद इसे 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसके कई विमान भारत में बनाए। 1960 और 70 के दशक में मिग-21 स्क्वाड्रन की आकाश में मौजूदगी से उस समय भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त मिली। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध, 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति, 1999 में कारगिल युद्ध और 2019 में बालाकोट स्ट्राइक में मिग-21 का अहम योगदान रहा। अभी चल रहे ऑपरेशन सिंदूर में भी मिग-21 स्क्वाड्रन अलर्ट मोड में है। हादसों के बाद दिया गया 'उड़ता ताबूत' नाम जहां एक तरफ 60-70 के दशक में आकाश में अपनी मौजूदगी से भारतीय वायुसेना को मिग-21 ने सशक्त किया। वहीं दूसरी ओर समय के साथ इसकी टेक्नोलॉजी कमजोर पड़ने लगी। कई हादसों के कारण इसे 'उड़ता ताबूत' भी नाम दिया गया। आप के दौर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के विमानों के सामने मिग-21 कुछ खास नहीं रह गया। हालांकि 60-70 के दशक में इसकी गिनती बेहतरीन फाइटर जेटों में होती थी। इसकी पुरानी तकनीक और हादसों के बाद उठ रहे सवाल को लेकर अब इसे 62 वर्षों बाद 19 सितंबर को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं पैंथर्स स्क्वाड्रन की विदाई के बाद भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 हो जाएगी। जो कि 1960 के दशक के बाद सबसे कम है। यहां तक की 1965 में 32 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या थी। हर युद्ध में मिग-21 ने किया कमाल एविएशन एक्सपर्ट अंगद सिंह ने कहा, 'कोई और फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के साथ इतने लंबे समय तक नहीं जुड़ा रहा। वायुसेना के 93 साल के इतिहास में दो-तिहाई समय तक यह जेट रहा है। इसने 1965 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर मोर्चे पर अपना अहम योगदान दिया है। आज हर भारतीय फाइटर पायलट के करियर में इसका योगदान है। इसमें कोई शक नहीं कि यह भारतीय आसमान के एक महान विमान को भावुक विदाई होगी।' सूत्रों के अनुसार, मिग-21 के विदाई समारोह में वायुसेना के बड़े अधिकारी और पुराने सैनिक शामिल होंगे। इस मौके पर फ्लाईपास्ट और विमानों की प्रदर्शनी भी होगी। मिग-21 ने सबसे लंबे समय तक वायुसेना में सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। भारत ने मिग-21 के 850 से अधिक विमान खरीदे थे, जिनमें ट्रेनर विमान भी शामिल थे। लगभग 600 विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में बनाए थे। स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी दुनियाभर में इन विमानों का इस्तेमाल अब खत्म हो चुका है, लेकिन वायुसेना इनकी समय सीमा बढ़ाती रही है। क्योंकि इनकी जगह लेने के लिए आधुनिक लड़ाकू विमान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। पहले यह तय हुआ था कि मिग-21 स्क्वाड्रन की जगह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लेंगे, लेकिन इन स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी हो गई है।  

कुलपति या कारोबारी? ED ने 20.28 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर किया चौंकाने वाला खुलासा

शिलॉन्ग केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पैसे लेकर फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में शिलांग में एक यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति यानी चांसलर और उनके परिवार के सदस्यों की करीब 20.28 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी तौर पर कुर्क की है। ईडी की ओर से जारी विज्ञप्ति में एक अधिकारी ने बताया कि इन संपत्तियों में नई दिल्ली में 19.28 करोड़ रुपये मूल्य की चार अचल संपत्तियां और बैंक बैलेंस के रूप में एक करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है, जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क किया गया है। इससे पहले शिलांग में ईडी उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन जुलाई को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था, जिसमें पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत सीएमजे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चंद्रमोहन झा और उनके परिवार के सदस्यों की 20.28 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने की बात कही गयी थी। ईडी ने बयान में कहा है कि ये अचल संपत्तियां 2013 और 2022 के बीच खरीदी गईं, जबकि बैंक बैलेंस को छिपाने के प्रयास में 16 दिसंबर, 2024 को धोखाधड़ी से उनके परिवार के एक सदस्य को हस्तांतरित कर दिया गया। IAS अधिकारी ने दर्ज कराई थी शिकायत ईडी ने मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स शिलांग जिले के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) पुलिस थाने में सीएमजे विश्वविद्यालय के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर जाँच शुरू की थी। यह शिकायत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी एमएस राव ने राज्य के तत्कालीन राज्यपाल आरएस मूशाहरी के निर्देश पर दर्ज की थी, जो सीएमजे विश्वविद्यालय के अतिथि (विजिटर) थे। ईडी ने कहा, “सीआईडी द्वारा मामले की जांच में विश्वविद्यालय से संबंधित कई अनियमितताओं का पता चला, जिनमें डिग्रियां बेचना भी शामिल था। लेकिन मामला सिर्फ इतना ही नहीं था जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय के हितधारकों ने अनुमानित 83 करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की थी।” दिसंबर 2024 में तीन दिनों तक चली थी तलाशी इससे पहले 31 मार्च 2017, 30 नवंबर 2021 और 11 जुलाई 2024 को अनंतिम कुर्की आदेश पारित किए गए और कुलाधिपति झा और उनके परिवार के सदस्यों के कब्जे में क्रमशः 27.66 करोड़ रुपये, 13.54 करोड़ रुपये और 7.56 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी थी। कुलाधिपति झा के विभिन्न परिसरों में अवैध आय के स्रोत का पता लगाने के लिए दिसंबर 2024 में तीन दिनों तक की गई तलाशी के बाद 1.15 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस भी ज़ब्त किया गया था। SC ने यूनिवर्सिटी कर दी थी भंग इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने सीएमजे विश्वविद्यालय को उसके ‘कुप्रबंधन, कुप्रशासन, अनुशासनहीनता और धोखाधड़ी के इरादे’ के कारण भंग करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद मेघालय सरकार ने शिक्षा संयुक्त सचिव डी. लिंगदोह को सीएमजे विश्वविद्यालय का प्रशासक नियुक्त किया ताकि राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित तरीके से विश्वविद्यालय को बंद किया जा सके। सीएमजे विश्वविद्यालय ने 2010 से 2013 के बीच करीब 20570 फर्जी डिग्रियां प्रदान की थी।  

उपायों की अनदेखी बड़ी समस्या है: ‘विश्व और भारतीयता’ पर मोहन भागवत के विचार

नई दिल्ली नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) और अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास की ओर से आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 10वें अणुव्रत न्यास निधि व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस मौके पर RSS सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने 'विश्व की समस्याएं और भारतीयता' पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समस्याओं पर तो चर्चा होती है, लेकिन उपायों पर कम चर्चा होती है। विश्व समस्याओं से घिरा है। हम आधुनिक युग में बैठे हैं। हमें जितना इतिहास पढ़ाया गया है, वह पश्चिम की ओर से पढ़ाया जाता है। विश्व में भारत को लेकर विचार नहीं मिलते भागवत ने कहा कि भारत के बारे में सामान्यतः विचार नहीं मिलते हैं, भले ही नक्शे पर भारत हो, पर विचारधारा में नहीं। जिन समस्याओं पर हजारों वर्षों से विचार होता रहा, उन पर प्रयास भी हुए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहीं। समस्याओं की वैश्विक सूची 2000 वर्ष पुरानी है। घर, परिवार, राष्ट्र, व्यक्ति आदि इनमें कोई भी समस्या हो, पहली समस्या 'दुख' है। कहा कि दुख दूर करने के प्रयास होते रहे, कुछ दुख दूर भी हुए। सुख-सुविधा बढ़ी, लेकिन दुख वहीं हैं सौ साल पहले भाषण देते तो लाउडस्पीकर नहीं था। अब भाषण देना आसान है, इसलिए भाषण भी लंबा हो गया है। पहले जोर-जोर से बोलना होता था तो 10 मिनट में ही बात खत्म करनी पड़ती थी। पहले इधर-उधर जाने में पदयात्रा करनी पड़ती थी, अब अमेरिका जाना भी आसान है। विज्ञान से सुख-सुविधा बढ़ी, लेकिन दुख वहीं हैं। कौन दुखी नहीं है? रास्ते से भीख मांगने वाला हो या करोड़पति, सब अपने-अपने दुख गिनाएंगे। जितना सुख बढ़ाया, दुख वही का वही है। हर साल कहीं न कहीं युद्ध चलता रहता है भागवत ने कहा कि आज भी कलह है। 1950 में मेरा जन्म हुआ, तब से देखता आ रहा हूं कि हर साल कहीं न कहीं युद्ध चलता रहता है। कलह से हानि, रक्तपात और जीव की हानि होती है, लेकिन फिर भी बार-बार वही अनुभव दोहराया जाता है। पहले महायुद्ध के बाद शांति की किताबें लिखीं, लीग ऑफ नेशन बना, लेकिन दूसरा महायुद्ध भी हुआ और फिर यूएनओ बना। अब सोच रहे हैं कि क्या तीसरा महायुद्ध होगा? शांति आई क्या? ज्ञान तो बढ़ा है, लेकिन अज्ञानी भी बढ़े हैं उन्होंने कहा कि अज्ञानता भी एक समस्या है। क्या वह दूर हुआ? अज्ञान ने तो अपना रूप बदल लिया है। आज चंद्रमा, मंगल, क्रोमोसोम की बातें होती हैं, मनुष्य क्या नहीं कर सकता। बस एक जीव का निर्माण बाकी है, ज्ञान बढ़ा है, साथ ही अज्ञानी लोगों की संख्या भी बढ़ी है। सुशिक्षित कितने हैं, पता नहीं।

चारधाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, रिकॉर्ड 39 लाख तीर्थयात्री पहुंचे दर्शन को

देहरादून उत्तराखंड में चारधाम यात्रा जारी है। इस बार गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा में अब तक 39 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस उपलब्धि के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने कहा, "चारधाम यात्रा के लिए गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम के लिए कुल 47 लाख 27 हजार 619 श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। साथ ही हेमकुंड साहिब के लिए 2 लाख, 16 हजार, 960 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। चारधाम यात्रा के लिए अब तक 49 लाख, 41 हजार, 527 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराए हैं।" उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि अब तक यमुनोत्री धाम में 5 लाख, 73 हजार, 812, गंगोत्री धाम में 6 लाख, 47 हजार, 571, केदारनाथ धाम में 13 लाख, 91 हजार, 348, बदरीनाथ धाम में 11 लाख, 63 हजार, 867, और हेमकुंड साहिब में 2 लाख, 16 हजार, 305 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। कुल मिलाकर, सभी धामों में 39 लाख, 92 हजार, 903 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। मंत्री सतपाल महाराज ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा, "इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की योजना है, जिससे उत्तराखंड का नाम इतिहास में दर्ज हो।" पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाए जाने को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने से इसे लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों से जोड़ा जा सकेगा। इससे विशेष रूप से भारतीय मूल के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के लिए आसानी से हरिद्वार पहुंच सकेंगे। मंत्री ने बताया कि हरिद्वार चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार है, और यहां हवाई अड्डा बनने से तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी। इसके लिए दो स्थानों को चिन्हित किया गया है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

सियासी सरगर्मी तेज: हरिवंश ने राष्ट्रपति से की भेंट, धनखड़ के इस्तीफे पर अटकलें तेज

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। बीते दिन ही धनखड़ ने राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र भेजकर पद से इस्तीफे की बात कही थी। उन्होंने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। उनके इस्तीफे के बाद मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन उपसभापति हरिवंश ने किया।  राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐस समय हो रही है, जब सोमवार शाम को जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन ने एक्स पर बैठक की एक तस्वीर भी साझा की। जिसमें लिखा गया है, राज्यसभा के उपसभापति  हरिवंश ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।   बता दें कि सोमवार को जगदीप धनखड़ ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन अचानक इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद हरिवंश ने मंगलवार को राज्यसभा में सुबह के सत्र की कार्यवाही की अध्यक्षता की। हालांकि की राज्यसभा की कार्यवाही को कुछ समय बाद कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।  सभापति का पद स्वत: रिक्त हुआ उपराष्ट्रपति के पद छोड़ने के साथ ही राज्यसभा के सभापति पद भी स्वत: रिक्त हो गया। उपराष्ट्रपति उच्च सदन के पदेन सभापति होते हैं। ऐसे में अब जब इस्तीफा मंजूर हो गया है तो मानसून सत्र में राज्यसभा की पूरी कार्यवाही उपसभापति हरिवंश चलाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति की ओर से अधिकृत सदस्य को भी यह जिम्मेदारी दी सकती है।  सोमवार को पूरे दिन राज्यसभा में सक्रिय थे धनखड़ इससे पहले सोमवार को धनखड़ पूरे दिन राज्यसभा में सक्रिय थे। सुबह उन्होंने विपक्ष को संसद को संवाद एवं चर्चा का सकारात्मक मंच बनाने की नसीहत दी और दोपहर बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करते हुए पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया। जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ पेश महाभियोग के नोटिस में एक सांसद के दोहरे दस्तखत पर जांच बैठाने की भी घोषणा की थी। पिछले सप्ताह भी बिगड़ी थी धनखड़ की तबियत उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा था कि वह स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और  चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं। हालांकि वे हाल के महीनों में राज्यसभा में काफी सक्रिय और ऊर्जावान नजर आए, लेकिन उनकी तबीयत लगातार ठीक नहीं चल रही थी। मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी से बाहर की यात्राओं से परहेज की सलाह दी थी। इके बाद जून में उत्तराखंड के नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान वे मंच पर बेहोश हो गए थे। अधिकारियों ने बताया था कि उस दिन बहुत गर्मी थी और कार्यक्रम स्थल बेहद घुटन भरा था। इस महीने की शुरुआत में केरल यात्रा के दौरान भी उनकी तबीयत गड़बड़ा गई थी और उन्हें उनकी पत्नी सुदेश और एक सहयोगी ने सहारा दिया था।  वहीं, 17 जुलाई को दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना द्वारा विकसित वटिका के दौरे के समय भी धनखड़ अस्वस्थ महसूस करने लगे और कुछ देर के लिए उन्हें बैठकर आराम करना पड़ा था। उनकी पत्नी ने उन्हें पानी पिलाया था। जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था। 

जनता का पैसा हंगामे की भेंट चढ़ा रहे विपक्षी: किरेन रिजिजू

नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने विपक्ष पर "टैक्स का पैसा बर्बाद करने" और मौजूदा सत्र के दौरान जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। किरेन रिजिजू ने लोकसभा में मंगलवार को कहा कि बैठक में ये तय किया गया कि सबसे पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा होगी। इसके लिए समय भी तय किया गया है। एक साथ सारे मुद्दे पर चर्चा संभव कैसे है? फिर भी, सहयोग करने के बजाय, वे तख्तियां लेकर आए और सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला। ये हर समय नियम के विरुद्ध तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते हैं, यह निंदनीय है। जबकि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में यह तय हुआ था कि पोस्टर, बैनर लेकर सदन में नहीं आएंगे। उन्होंने आगे कहा, "पोस्टर-बैनर लेकर सदन को बाधित करना आपत्तिजनक है, वह (विपक्ष) चर्चा की मांग कर रहे हैं और हम इसके लिए तैयार हैं। फिर वह सदन क्यों नहीं चलने दे रहे? यह दोहरा मापदंड गलत है। अगर आप चर्चा चाहते हैं, तो ये हंगामा नहीं करें। सरकार ने बार-बार कहा है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। लेकिन ये हंगामा क्यों कर रहे हैं, इसकी कौन जिम्मेदारी लेगा। देश की टैक्स मनी को आप हंगामा करके बर्बाद कर रहे हैं। इसका जवाब देना पड़ेगा। आप लोग सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और उनके कुछ साथी दो दिन से हंगामा कर रहे हैं। मैं इसका खंडन करना चाहता हूं।" संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष की ओर से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), पहलगाम हमले और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा की मांग की गई और जमकर नारेबाजी हुई। जिसके बाद हंगामे की वजह से सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

मौसम की मार: पाकिस्तान में मूसलधार बारिश से 221 लोगों की मौत

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में जून के अंत से भारी मानसूनी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और बारिश से हुई अन्य घटनाओं में कम से कम 221 लोगों की मौत और 592 अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी पाकिस्तान के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दी है। ताजा स्थिति रिपोर्ट में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कहा कि हताहतों की संख्या 26 जून से 21 जुलाई के बीच दर्ज की गई, जिसमें पिछले 24 घंटों में पांच नई मौतें और 10 घायल होने की सूचना है। पूर्वी पंजाब प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 135 लोगों की मौत हुई और 470 घायल हुए। उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में 46 लोगों की जान चली गई और 69 अन्य घायल हुए। दक्षिणी सिंध प्रांत में 22 लोगों की मौत और 40 घायल होने की सूचना है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में 16 लोगों की मौत और चार घायल होने की सूचना है। एनडीएमए ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में एक बच्चा घायल हुआ है। अधिकारियों ने बाढ़ की चेतावनी जारी की है। वे लगातार हो रही बारिश के बीच राहत अभियान चलाने और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए प्रांतीय सरकारों के साथ समन्वय कर रहे हैं। क्योंकि पाकिस्तान में लगातार मानसून का प्रकोप जारी है, इसलिए अधिकारियों ने कई अलर्ट जारी किए हैं। इनमें मध्यम से भारी बारिश, नदियों का जलस्तर बढ़ने और संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की चेतावनी दी गई है। पाकिस्तान के एनडीएमए और पंजाब के प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने निवासियों से सतर्क रहने और निचले व जलमग्न इलाकों से दूर रहने का आग्रह किया है। बता दें कि अरब सागर से आ रही नमी से तीव्र मानसूनी गतिविधि पूरे पंजाब में सक्रिय बनी हुई है, जहां लाहौर में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने आर्द्रता के स्तर को बढ़ा दिया है।

बिहार चुनाव डेटा लीक विवाद पर संसद में जोरदार हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित

नई दिल्ली  मंगलवार को संसद के दोनों सदनों राज्यसभा व लोकसभा में विपक्ष ने अपनी मांग को लेकर नारेबाजी की। विपक्षी सांसद, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मामले पर चर्चा चाहते थे। लेकिन इसकी अनुमति न मिलने बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। यही हाल लोकसभा का भी रहा। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर भी यह हंगामा जारी रहा। इसके बाद लोकसभा व राज्यसभा दोनों सदनों को बुधवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दरअसल मंगलवार सुबह राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची में हो रहे गहन रिव्यू का मुद्दा उठाया। बिहार वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामले पर विपक्षी सांसद सदन में विस्तृत चर्चा चाहते थे। वहीं विपक्ष की तरफ से उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर चर्चा की मांग भी सदन में रखी गई। लेकिन इन सभी मांगों को आसन द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। जिसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही प्रारंभ होने के महज 4 मिनट बाद ही राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। बिहार मतदाता सूची में हो रहे गहन रिव्यू के मामले पर कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी व तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने चर्चा के लिए उप सभापति को नोटिस दिया था। यह नोटिस नियम 267 के अंतर्गत दिए गए थे। उप सभापति ने यह नोटिस अस्वीकार कर दिए। इसके बाद विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए अपने स्थानों से खड़े होकर आगे गए। सदन में बढ़ते इस हंगामे को देखते हुए सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। इससे पहले उप सभापति ने सदन को बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत चर्चा के लिए कुल 12 नोटिस मिले हैं। इन सभी नोटिसों को अस्वीकार कर दिया गया। बिहार मतदाता सूची रिव्यू मामले में विपक्षी सांसदों सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, रंजीत रंजन, नीरज डांगी, अशोक सिंह, मनोज कुमार झा और रामजीलाल सुमन आदि ने चर्चा के लिए नोटिस दिए थे। वही विपक्ष के सांसद संतोष कुमार पी. ने उप राष्ट्रपति व राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ के अचानक हुए इस्तीफे पर चर्चा की मांग को लेकर नोटिस दिया था। आसन पर आसीन उप सभापति हरिवंश ने नियम 267 को लेकर पुराने निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इन सभी नोटिसों को अस्वीकार कर दिया गया है। इसके बाद विपक्षी सांसद नाराज होकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आप आम आदमी पार्टी व राष्ट्रीय जनता दल समेत विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद नारेबाजी करते हुए अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए। ये सांसद राज्यसभा उप सभापति से बिहार मतदाता सूची मामले पर तुरंत चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे थे। अपनी मांग को लेकर नाराज सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे। हंगामा बढ़ता देख उप सभापति को सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। 12 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने भी हंगामा बना रहा और कुछ ही देर में सदन की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। 2 बजे भी यही स्थिति रही जिसके चलते सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि सोमवार रात राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के उपरांत अब राज्यसभा की कार्यवाही उप सभापति संभाल रहे हैं। 

भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।