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EPF में गड़बड़ी से परेशान? ये है सरकारी समाधान पोर्टल और शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली क्या आपकी सैलरी से कट रहा पीएफ अमाउंट पासबुक में दिखाई नहीं दे रहा? या फिर आप अपनी पिछली जॉब में कटा पीएफ का पैसा अपने अकाउंट में नहीं देख पा रहे? तो जान लें कि अब सिर्फ एक सरकारी पोर्ट्ल पर आपको पीएफ से जुड़ी हर समस्या का समाधान मिल जाएगा। आपको अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। दरअसल सरकार ने इसके लिए पोर्टल लॉन्च किया है जहां आप पीएस खाते से जुड़ी किसी भी शिकायत को दर्ज करा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर रिमाइंडर भी भेज सकते हैं। चलिए इस पूरे तरीके को समझते हैं और जानते हैं कि आखिर कैसे आप अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या को दूर कर सकते हैं। EPFiGMS क्या है? EPFiGMS का मतलब है Employees’ Provident Fund Grievance Management System। यह एक ऑनलाइन सरकारी पोर्टल है जिसे की PF से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है। इस पोर्टल पर PF से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान आसानी से मिल सकता है। अब भले आपके PF ट्रांसफर में देरी हो, क्लेम अटका हो, अकाउंट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो या ऑफिस से जवाब न मिल रहा हो, आप इस पोर्टल की मदद से कम से कम समय में अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं। इस पोर्टल की खासियत यह है कि आप इस पर शिकायत के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी सबमिट कर सकते हैं और जल्द से जल्द अपनी शिकायत का निवारण पा सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको अपनी शिकायत का जवाब मिलने में समय लगता है, तो आप रिमाइंडर भी भेज सकते हैं, ताकि आपकी समस्या पर तेजी से काम किया जा सके। कैसे करें शिकायत? PF से जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत करने के लिए आपको: स्टेप 1: सबसे पहले गूगल पर EPFiGMS सर्च करें। स्टेप 2: सबसे पहले लिंक पर क्लिक करें और वहां Register Grievance पर क्लिक करें। स्टेप 3: इसके बाद अपना स्टेटस चुनें जैसे कि PF Member। स्टेप 4: अगर आपकी शिकायत किसी क्लेम से जुड़ी है, तो क्लेम आईडी डाल कर क्लेम की डिटेल्स दें। या फिर आप Claim ID के दिए NO को सलेक्ट कर सकते हैं। स्टेप 5: अपना UAN नंबर दर्ज करें और कैपचा डालकर Get Details पर क्लिक करें। इसके बाद आपको अपने फोन नंबर और ईमेल आईडी पर एक OTP मिलेगा जिसे दर्ज करके आप आगे बढ़ सकते हैं। स्टेप 6: इसके बाद आपको अपनी बेसिक डिटेल्स दर्ज करनी होंगी जैसे कि पता। स्टेप 7: अब पीएफ नंबर चुनकर अपनी शिकायत डिटेल में बता दें। साथ में समस्या से जुड़े डॉक्युमेंट्स अटैच करना न भूलें। स्टेप 8: इसके बाद अपनी शिकायत को सबमिट कर दें। दो फीचर हैं कमाल इस पोर्ट्ल पर आपको दो ऐसे फीचर मिलते हैं जिनसे आपके काम बहुत तेजी से पूरे हो जाएंगे। दरअसल आप इस पोर्ट्ल पर एक बार शिकायत करने के बार हर 7 दिन में एक रिमाइंडर भेज सकते हैं ताकि आपकी समस्या का जल्द समाधान मिल सके। इसके अलावा आप अगर मिलने वाले समाधान से संतुष्ट न हों तो आप अपना फीडबैक भी इस पोर्टल पर सब्मिट कर सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए दो बातों का खास तौर पर ध्यान रखें कि अपनी शिकायत से संबंधित सभी ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स जरूर उपलब्ध कराएं। इससे आपकी समस्या का समाधान जल्द हो सकेगा। इसके अलावा शिकायत दर्ज करने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को ध्यान से रखें ताकि अपनी शिकायत का स्टेटस बाद में चेक कर सकें।

उत्तराखंड में प्राकृतिक कहर: धराली गांव में बादल फटा, कई घर सैलाब में बहे

 उत्तरकाशी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से बड़ा हादसा हुआ है. गंगोत्री धाम और मुखवा के पास स्थित धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से एक नाला उफान पर आ गया. नाले का पानी बहुत तेज़ी से पहाड़ी से निचले इलाकों की तरफ बहकर आया, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं. यह घटना बेहद गंभीर है और इसने स्थानीय लोगों को चिंता में डाल दिया है. नाले के पानी के साथ मलबा भी आया है, जिसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. गंगोत्री धाम के पास है प्रभावित इलाका बादल फटने के बाद नाले में पानी के उफान से पूरे इलाके में दहशत फैल गई, अब इलाके में राहत और बचाव का काम चल रहा है. जिला आपदा प्रबंधन ने हादसे की पुष्टि की है और कहा कि हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भेजा जा रहा है, साथ ही जिला प्रशासन भी रेस्क्यू में लगा हुआ है. हालात इतने विकट हैं कि सेना भी राहत और बचाव कार्य के लिए रवाना हुई है. भटवाड़ी से एसडीआरएफ की टीम भी धराली की ओर रवाना हो गई है. आज सुबह ही उत्तरकाशी जिले की बड़कोट तहसील क्षेत्र के बनाल पट्टी में भारी अतिवृष्टि हुई है. बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली में खीर गंगा नदी में बादल फटने से तबाही आई है। यहां पर विनाशकारी बाढ़ की वजह से करीब 20 होटल और होमस्टे को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानीय लोग और मजदूरों के दबे होने की आशंका भी है। गंगोत्री विधायक सुरेश सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया- धराली में खीर गाढ़ के ऊपर बादल फटने से पलय का मंजर है। सूचना पर तत्काल मुख्यमंत्री को सूचना दे दी गई है। जिलाधिकारी को सूचना के साथ ही सेना, पुलिस, एसडीआरएफ की टीम पहुंच गई है। यह बहुत बड़ी दुघटना है। मैं भी देहरादून से घटनास्थल के लिए निकल चुका हूं। भगवान से पाथना है कि इस आपदा की घड़ी से सबको सुरक्षित बचाएं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है। प्रभावित गांव गंगोत्री धाम और गंगाजी के शीतकालीन प्रवास मुखवा के बहुत करीब है. इस इलाके में बादल फटने से लोग घबराए हुए हैं. प्रशासन की तरफ से सभी लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि कोई अनहोनी न हो. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इन हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है. UP के 17 जिलों में बाढ़, 300+ मकान ढहे, 16 मौतें UP-बिहार में मानसून की बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं। बिहार के मुंगेर, बक्सर, पूर्णिया, भोजपुर, पटना समेत कई जिलों में सैकड़ों गांव डूब गए हैं। बिहार के पूर्णिया में 38 साल बाद रिकॉर्ड बारिश हुई। यहां रविवार से सोमवार तक 270.6mm बारिश हुई। इससे पहले 1987 में 294.9mm बारिश हुई थी। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, वाराणसी समेत 17 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 343 मकान बारिश के चलते ढह चुके हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़-बारिश से जुड़े हादसों में 16 लोगों की मौत हो गई है। जौनपुर, चंदौली, सुल्तानपुर, कानपुर, पीलीभीत और सोनभद्र में 5 अगस्त, वाराणसी, हमीरपुर और लखीमपुर में 6 अगस्त तक, जबकि प्रयागराज और मिर्जापुर में 7 अगस्त तक स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी गई है। हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश से 310 सड़कें बंद हैं। शिमला में सोमवार को बारिश के बाद 3 घरों पर लैंडस्लाइड हो गया। लोगों ने एक दिन पहले ही घर छोड़ा था। कल रात में तेज बारिश के बाद चंडीगढ़-मनाली फोरलेन भी बंद है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में नदी में बहने से 3 लोगों की मौत हो गई। केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट मौसम विभाग ने मंगलवार को केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट और हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब समेत 19 राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दुनिया को कहा अलविदा, दिल्ली के अस्पताल में हुआ निधन

नई दिल्ली पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। उनका लंबे समय दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले सत्यपाल मलिक समाजवादी विचारधारा से निकले नेता थे। एक सांसद से लेकर गवर्नर तक का सफर तय करने वाले सत्यपाल मलिक आखिरी कुछ सालों में भाजपा से जुड़े थे और कई राज्यों में गवर्नर के तौर पर सेवाएं दीं। हालांकि बीते कुछ सालों से वह सरकार के खिलाफ मुखर थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था। सत्यपाल मलिक के एक्स अकाउंट से भी उनकी मौत की जानकारी दी गई। इसी एक्स अकाउंट पर आखिरी बार उनके निजी सहायक ने 9 जुलाई को बताया था कि उनकी हालत गंभीर है। खुद को चौधरी चरण सिंह का शिष्य बताने वाले सत्यपाल मलिक किसान आंदोलन के समर्थन में मुखर हुए थे और सरकार की तीखी निंदा की थी। यही नहीं उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में कई राज्यों में दौरे किए थे और सरकार से अपील की थी कि वह तीन विवादित बिलों को वापस ले ले। पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलने के कारण भी वह काफी चर्चा में थे। पांच साल में कुल 5 राज्यों के गवर्नर रहे थे सत्यपाल मलिक वह 2017 से 2022 के दौरान बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर और मेघालय तक कुल 5 राज्यों में गवर्नर रहे। 1970 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 1974 में बागपत से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से उतरे थे और जीत हासिल की थी। उन्हें जम्मू-कश्मीर में गवर्नर के कार्यकाल के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ही दौर में राज्य से आर्टिकल 370 हटा था और सूबे का पुनर्गठन करके लद्दाख को अलग एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। हालांकि इसी कार्यकाल को लेकर वह विवादों में भी रहे। खुद पर चार्जशीट दाखिल होने पर जताई थी हैरानी उन्होंने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर करप्शन का आरोप लगाया था और फिर इसी केस में उनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट पर अस्पताल से ही सत्यपाल मलिक ने ऐतराज जताया था और कहा था कि आखिर यह क्या हो रहा है। जिस शख्स ने करप्शन का आरोप लगाया था, उसके ही खिलाफ जांच शुरू कर दी गई और अब चार्जशीट दाखिल की गई है। सत्यपाल मलिक ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी सरकार का मुखर विरोध किया था और विपक्ष के समर्थन में वोट देने की अपील की थी।  

भारत ने ट्रंप की टैरिफ धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया, अमेरिका और ईयू के डबल स्टैंडर्ड को उजागर किया

नई दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मंच पर एक नया तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी की धमकी दी है। उनका दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। लेकिन यह कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई देती है। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक बयान फिर से वायरल हो रहा है जिससे इस कहानी में अमेरिका का पाखंड साफ दिख रहा है। गार्सेटी ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। तो फिर अब यह पलटवार और धमकियां क्यों? क्या यह अमेरिका का पाखंड है या ट्रंप का कूटनीतिक दोगलापन? आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं। अमेरिका का दोहरा चेहरा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, उसने इस अवसर का लाभ उठाया। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में भी योगदान दिया। उस समय अमेरिका ने भारत के इस कदम को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया। भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने स्पष्ट कहा था कि भारत का रूस से तेल खरीदना वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है। पिछले साल 2024 में 'कॉन्फ्रेंस ऑन डायवर्सिटी इन इंटरनेशनल अफेयर्स' में बोलते हुए गार्सेटी ने कहा, "भारत ने रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल को मूल्य सीमा (प्राइस कैप) पर खरीदे। यह कोई उल्लंघन नहीं था, बल्कि यह नीति का हिस्सा था, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इसे पूरा किया।" लेकिन अब वही अमेरिका भारत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी की कोई परवाह नहीं।" यह बयान न केवल भारत की ऊर्जा नीति को गलत ठहराता है, बल्कि यह भी भूल जाता है कि भारत का यह कदम अमेरिका की सहमति से ही उठाया गया था। भारत की ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। 2022 के बाद से भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35-40% रूस से आता है। यह सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रूस के अलावा भी तेल आपूर्ति के विकल्प हैं, जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई और ब्राजील। लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर अंकुश लगता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की मजबूरियों पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अनुचित है, खासकर तब जब ये देश स्वयं रूस से व्यापार कर रहे हैं।" भारत ने आंकड़ों के साथ दिखाया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का व्यापार हुआ, जो भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है। यह सवाल उठता है कि जब यूरोप और अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ट्रंप का दोगलापन: भारत बनाम चीन ट्रंप की धमकियों में एक और विरोधाभास साफ दिखता है। वह भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ और पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन चीन के मामले में उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम है। चीन रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस के कुल तेल निर्यात का 47% खरीदता है। फिर भी, ट्रंप ने चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी भारत के खिलाफ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के लिए चीन एक बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और ट्रंप शायद चीन के साथ व्यापार युद्ध को और तीव्र नहीं करना चाहते। दूसरी ओर, भारत को एक आसान निशाना माना जा रहा है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों में मित्रता का तत्व मजबूत है। अपने मुनाफे के लिए भारत पर निशाना अमेरिका ने यूक्रेन के साथ हाल ही में एक रेयर अर्थ मिनरल्स डील की है, जिसके तहत वह यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों, जैसे लिथियम, टाइटेनियम और रेयर अर्थ तत्वों, का दोहन करना चाहता है। यह डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज हाई-टेक उद्योगों, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते इन संसाधनों का खनन मुश्किल हो रहा है, इसलिए वह युद्ध को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस डील के जरिए अमेरिका न केवल अपनी खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता को भी कम करना चाहता है, जो इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, जब अमेरिका रूस को सीधे तौर पर प्रभावित करने में असमर्थ रहा, तो उसने रणनीति बदलकर रूस के करीबी सहयोगियों, जैसे भारत, को निशाना बनाना शुरू किया। टैरिफ का भारत पर असर ट्रंप की धमकी अगर हकीकत बनती है, तो भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को 83 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं … Read more

NDA ने ऑपरेशन सिंदूर-महादेव को बताया अहम कदम, पीएम मोदी को किया गया सम्मानित

नईदिल्ली  भाजपा नीत राजग संसदीय दल (NDA Parliamentary Party Meeting) की बैठक संसद भवन में शुरू हो गई है. इस बैठक का आयोजन संसद भवन के ऑडिटोरियम में हो रहा है. पीएम मोदी जब इस बैठक में शामिल होने पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए पीएम मोदी को एनडीए सांसदों द्वारा सम्मानित किया गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माला पहनाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. एनडीए संसदीय दल की बैठक में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता पर प्रस्ताव पारित हुआ. एनडीए की महिला सांसद अग्रिम पंक्ति में बैठीं. पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई. नए सांसदों का प्रधानमंत्री से परिचय कराया गया. एनडीए संसदीय दल की बैठक से जुड़े अपडेट पढ़ें… – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया अमेरिका द्वारा पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करना, तथा पहलगाम हमले की निंदा करते हुए ब्रिक्स समिट में जॉइंट डिक्लेरेशन जारी होना, पाकिस्तान द्वारा अपनी धरती पर फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक रुख की जीत को दर्शाता है.  – प्रस्ताव में कहा गया कि एनडीए संसदीय दल इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रदर्शित असाधारण नेतृत्व की सराहना करता है. उनके अटूट संकल्प, दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने न केवल राष्ट्र को उद्देश्यपूर्ण दिशा दी है, बल्कि सभी भारतीयों के हृदय में एकता और गौरव की नई भावना भी जगाई है. – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, 'हमारे सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अटूट प्रतिबद्धता को एनडीए संसदीय दल सलाम करता है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया. उनका साहस हमारे राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है. हम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.' राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की यह बैठक काफी समय के बाद हो रही है और संसद के चालू सत्र में चल रहे गतिरोध के बीच पहली बैठक है. पीएम मोदी के अपने संबोधन में तिरंगा यात्रा और विपक्ष के खिलाफ रणनीति पर भी चर्चा कर सकते हैं. एनडीए की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को अपने उम्मीदवार की घोषणा 21 अगस्त तक करनी होगी, जो नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है और संसद का मानसून सत्र भी इसी दिन समाप्त हो रहा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं, और इसकी वर्तमान संख्या 782 है. यदि विपक्ष अपना उम्मीदवार घोषित करता है, तो 9 सितंबर को चुनाव होना तय है. यह बैठक संसद के एक ऐसे सत्र (मानसून सेशन) के मध्य में हो रही है, जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिवसीय चर्चा के अलावा अब तक कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है. विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है.

5 अगस्त से पहले कश्मीर में सियासी सरगर्मी, बड़ा फैसला आने की अटकलें

नई दिल्ली क्या जम्मू-कश्मीर को 6 साल बाद एक बार फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने वाला है? 5 अगस्त से पहले कुछ बड़ा होने की चर्चाओं के बीच ऐसे कयास लग रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और फिर होम मिनिस्टर अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इसके अलावा मंगलवार सुबह ही एनडीए के संसदीय दल की भी मीटिंग होने वाली है। इन घटनाक्रमों के चलते ही चर्चा तेज है कि क्या 5 अगस्त को फिर से मोदी सरकार बड़ा फैसला लेगी। इससे पहले राम मंदिर का शिलान्यास और फिर जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने एवं राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला भी 5 अगस्त की तारीख को ही हुआ था। तब साल 2019 था। तब से ही मांग उठती रही है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। इसके जवाब में पीएम मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह लगातार कहते रहे हैं कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। सरकार ने कभी राज्य का दर्जा देने से इनकार नहीं किया है, बस सही समय की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि क्या वह सही समय अब आ गया है। कुछ बड़ा होने के कयास लग ही रहे हैं और सबसे ज्यादा चर्चा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की ही है। फारूक अब्दुल्ला के बयान से भी ऐसे कयास तेज हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि सरकार बताए कि आखिर जम्मू-कश्मीर को कब पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। उन्होंने आर्टिकल 370 हटाने की छठी बरसी से एक दिन पहले यह मांग दोहराई है। उन्होंने इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव कराने की मांग की है। अब्दुल्ला ने कहा, 'वो राज्य का दर्जा कब वापस करने जा रहे हैं? उन्होंने कहा था कि चुनाव होने और सरकार बनने के बाद दर्जा लौटा दिया जाएगा। अब उस वादे का क्या हुआ? अब उनका कहना है कि विधानसभा की दो खाली सीटों पर चुनाव कराएंगे, लेकिन राज्यसभा की 4 सीटों पर चुनाव कब होंगे? आखिर वे सदन में लोगों की आवाज उठाने के अधिकार को क्यों रोक रहे हैं।' क्‍यों चर्चा है जम्‍मू और कश्‍मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा देने की? जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की चर्चा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद से चल रही है. जब से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाकर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया. तब से लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग स्थानीय नेताओं, दलों द्वारा की जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में संसद में वादा किया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. उसके बाद भारत सरकार भी कई बार बोल चुकी है कि वह समय आने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2023 में राज्य का दर्जा बहाली का आदेश दिया था.    दरअसल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में, जम्मू-कश्मीर की सरकार के पास सीमित शक्तियां हैं. पुलिस, कानून-व्यवस्था, और अखिल भारतीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उपराज्यपाल और केंद्र सरकार का नियंत्रण है. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), और कांग्रेस जैसे दल लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करते रहे हैं. NC के नेता उमर अब्दुल्ला ने इसे अपनी सरकार का प्रमुख एजेंडा बनाकर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में 42 सीटें जीत ली. पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंतिम स्वीकृति चाहिए होगी. उनकी मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा. रविवार को राष्ट्रपति की पीएम और गृहमंत्री से अलग अलग मुलाकात से यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं ये मुलाकात जम्मू कश्मीर के लिए तो नहीं है. बहुत संभावना है कि कल अनुच्छेद 370 के रद्द होने के छठें साल पर सरकार जम्मू कश्मीर की जनता को राज्य दर्जे की बहाली का ऐलान करे.  जम्‍मू और कश्‍मीर को अलग अलग राज्‍य बनाने की अफवाह भी जम्मू क्षेत्र हिंदू बहुल होने और कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल होने के चलते अक्सर इस बात पर चर्चा होती रही है कि क्या दोनों को अलग राज्य का दर्जा देना संभव है.जम्मू के लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि कश्मीरी नेतृत्व ने उनके क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज किया और उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया. इस संदर्भ में, जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग को कुछ लोग क्षेत्रीय सशक्तिकरण के रूप में देखते हैं.  जो लोग जम्मू को अलग राज्य का दर्जा देने के पक्ष में हैं, उनका तर्क है कि इससे क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं और पहचान को बेहतर संबोधित किया जा सकेगा. जम्मू हिंदुओं को एक सम्मानजनक पहचान और विकास के अवसर देगा, जो कश्मीर के साथ एकजुटता में संभव नहीं है. कश्मीरी मूल की पत्रकार  @AartiTikoo एक्स पर लिखती हैं कि…  जम्मू और कश्मीर में इन दिनों यह अफ़वाह ज़ोरों पर है कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 के हटाए जाने की छठी वर्षगांठ, यानी कल, इस केंद्र शासित प्रदेश को फिर से राज्य का दर्जा दे सकती है. और जो बात इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली है — वह यह कि अफ़वाहों के बाज़ार में कहा जा रहा है कि कश्मीर और जम्मू को अलग करके दो स्वतंत्र राज्य बना दिया जाएगा. अगर इनमें से कोई भी बात सही निकली, तो यह बेहद विनाशकारी कदम होगा. यह मूलतः डिक्सन प्लान को अमल में लाने जैसा होगा — यानी जम्मू-कश्मीर का धार्मिक आधार पर विभाजन, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के हवाले कर दिया जाएगा. भारत की सीमाओं से लगे किसी भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र को पाकिस्तान की सेना और उसके जिहादी आतंकियों से अप्रभावित रखना संभव नहीं है. अगर यह तर्क दिया जाए कि हिंदू बहुल जम्मू, अपनी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक शक्ति से वंचित रहा है, और मुस्लिम बहुल कश्मीरी नेतृत्व ने उसके साथ भेदभाव किया है — तो यह साफ़ … Read more

Vande Bharat Sleeper जल्द ट्रैक पर! जानिए कब से शुरू होगी पहली सेवा

 नईदिल्ली  देश में इस समय 50 से ज्यादा Vande Bharat ट्रेनें चल रही हैं, और अब जल्दी ही इसका स्लीपर वर्जन भी लोगों को मिलने वाला है। इसके अलावा भारत की पहली बुलेट ट्रेन पर भी तेजी से काम चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेल मंत्री Ashwini Vaishnav ने बताया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अगले महीने यानी सितंबर में लॉन्च किया जा सकता है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह ट्रेन बहुत जल्द शुरू की जाएगी। रेल मंत्री ने हाल ही में राज्यसभा में जानकारी दी थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला मॉडल तैयार हो गया है। लंबी यात्रा में आरामदायक यह ट्रेन नई तकनीक से बनी है और इसे बहुत आरामदायक बनाया गया है, ताकि लोग लंबी दूरी की यात्रा में थकान महसूस न करें। यह ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से भी बेहतर और तेज मानी जा रही है। इसका सफर समय पर और बिना रुकावट के होगा। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है जो रातभर का या लंबा सफर करते हैं। इसमें आरामदायक सीटें और आधुनिक सुविधाएं होंगी, जिससे यात्री को अच्छा अनुभव मिलेगा।

डिफेंस डील में नया मोड़: भारत ने टेका भरोसा कोरियन KF-21 फाइटर जेट पर?

नई दिल्ली दक्षिण कोरिया का KF-21 Boramae मेटियोर मिसाइल के साथ एक शक्तिशाली जेट बनकर उभर रहा है. भारत इसके लिए रुचि दिखाकर सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है, खासकर जब चीन और पाकिस्तान जैसे खतरे बढ़ रहे हैं. यह जेट न सिर्फ हवा में ताकत देगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा. हालांकि, डील को फाइनल करने में समय और बातचीत लगेगी, लेकिन यह भविष्य की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है. KF-21 Boramae क्या है? KF-21 Boramae दक्षिण कोरिया का एक नया मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीस ने बनाया है. इसे पहली बार 2021 में दुनिया के सामने पेश किया गया था. अभी इसके ट्रायल चल रहे हैं. इसे 2026 में दक्षिण कोरिया की वायुसेना में शामिल करने की योजना है. यह जेट हल्का और स्टील्थ फीचर्स वाला है, यानी यह दुश्मन की रडार से बच सकता है. इसका मकसद पुराने जेट्स को बदलना और हवा में ताकत बढ़ाना है. KF-21 की खूबियां यह जेट कई लाजवाब खूबियों से लैस है…     गति और दूरी: 2200 किमी/घंटा की रफ्तार से 1000 किमी तक उड़ सकता है.     आकार: 55.5 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा और टेकऑफ वजन 25,600 किलोग्राम.     पायलट: इसे 1 या 2 पायलट चला सकते हैं- 1 लड़ाई के लिए, 2 ट्रेनिंग के लिए.     तोप: 20 मिमी की वल्कन तोप, जो एक मिनट में 480 गोलियां दाग सकती है.     हथियार: 10 जगहें (हार्ड प्वाइंट्स) हैं, जहां 5 एयर-टू-एयर (मेटियोर, साइडविंडर) और 5 एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, एंटी-शिप मिसाइलें या बम लगाए जा सकते हैं. भारत क्यों दिलचस्पी ले रहा है? भारत की वायुसेना को नए जेट्स की सख्त जरूरत है, क्योंकि पुराने MiG-21 और जगुआर अब पुराने पड़ गए हैं. MRFA डील के तहत भारत 100 से ज्यादा नए जेट्स लेना चाहता है. अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 जेट्स महंगे हैं. इन पर निर्भरता बढ़ रही है. वहीं, KF-21 सस्ता (लगभग 87-110 मिलियन डॉलर प्रति जेट) और आधुनिक है.     मेक इन इंडिया: भारत इसे अपने यहां बनाना चाहता है, जिसमें अपनी तकनीक (जैसे रडार) जोड़ सकता है.     चीन का खतरा: भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए यह जेट रणनीति में मददगार होगा.     कम खर्च: यह राफेल या F-35 से सस्ता है, जो भारत के बजट के लिए अच्छा है. क्या दिक्कतें हो सकती हैं?     ट्रायल: KF-21 अभी टेस्टिंग में है. 2026 तक तैयार नहीं होगा.     तकनीक: दक्षिण कोरिया को भारत के साथ तकनीक शेयर करनी होगी.     दुश्मन की नाराजगी: चीन और उत्तर कोरिया इस डील को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान सकते हैं.  

दो दिन बाद आ सकती है बड़ी खुशखबरी, रेपो रेट घटाने पर विचार कर सकता है RBI

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो चुकी है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं. पिछली तीन बैठकों में रिजर्व बैंक पहले ही रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है, जिससे फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करेगा या उन्हें स्थिर रखेगा. बैठक के नतीजे 6 अगस्त को घोषित किए जाएंगे. रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती का मजबूत कारण है. अमेरिका के टैरिफ के चलते भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है और इससे समग्र आर्थिक गतिविधियों में मंदी आ सकती है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई अगस्त की बैठक में 25 बीपीएस की कटौती कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम त्योहारी सीजन से पहले ऋण प्रवाह को तेज कर सकता है और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है. अब तक हो चुकी है तीन बार कटौती, क्या फिर घटेगा ब्याज? RBI ने पहले ही लगातार तीन बार रेपो रेट में कटौती की है, जिससे कुल 100 बेसिस प्वाइंट यानी 1% की कमी हो चुकी है. फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है. यही वो दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. इसी के आधार पर लोन और EMI पर ब्याज तय होता है. कुछ जानकारों का मानना है कि RBI अब रुक सकता है और इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है. उनका कहना है कि जून में महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन 2.1% रही, जो काफी कम है. ऐसे में RBI पहले की गई कटौतियों का असर देखने के लिए कुछ समय ले सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स को है और कटौती की उम्मीद हालांकि कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में RBI एक और 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की कटौती कर सकता है. ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिले. Crisil के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का भी यही मानना है कि ग्रोथ पर खतरा फिलहाल महंगाई से बड़ा है, इसलिए RBI 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है. SBI की रिपोर्ट में भी  रेपो रेट घटने की उम्मीद SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर RBI अब कटौती करता है, तो इसका फायदा सीधे फेस्टिव सीजन में मिलेगा. बैंक का मानना है कि पहले ही त्योहारों का सीजन आ रहा है और अगर रेपो रेट घटती है, तो क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन की डिमांड बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि RBI को देर नहीं करनी चाहिए, वरना सही समय निकल सकता है. CareEdge Ratings का कहना है कि RBI पहले ही रेपो रेट में कटौती कर चुका है और अब कुछ समय तक उसका असर देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब तक ग्रोथ में कोई बड़ी गिरावट न दिखे, तब तक और कटौती नहीं होगी. Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जून की महंगाई दर या अमेरिका की टैरिफ नीति से अब पॉलिसी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. RBI पहले ही इस डेटा को ध्यान में रख चुका है. इसलिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन टोन यानी बयान में सतर्कता रहेगी. महंगाई पर काबू, तेल की कीमत और टैरिफ से चिंता रिजर्व बैंक को सरकार ने 4% महंगाई का टारगेट दिया है जिसमें 2% ऊपर-नीचे की छूट है. जून में महंगाई 2.1% रही है जो इस दायरे में बहुत कम है. लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी चिंता का कारण हैं. EMI घटेगी या नहीं? RBI की MPC मीटिंग काफी अहम है. कुछ एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि एक और छोटी कटौती होगी, जिससे होम लोन सस्ता हो सकता है. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि फिलहाल RBI इंतजार करेगा. अब देखना यह है कि 6 अगस्त को RBI कौन सा रास्ता अपनाता है . अगर आप भी होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से EMI भर रहे हैं, तो RBI की इस मीटिंग पर नजर जरूर रखें. समय पर नीतिगत कदम की जरूरत रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी त्योहारी सीजन जल्दी आता है और उससे पहले ब्याज दरों में कटौती होती है, तो क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) में तेज़ उछाल देखने को मिला है. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि केंद्रीय बैंक को सही समय पर कदम उठाना चाहिए, ताकि नीतिगत खिड़की का लाभ उठाया जा सके. मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में बदलाव संभव CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे जा सकती है. इसके चलते आरबीआई इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को नीचे कर सकता है. जीडीपी अनुमान बरकरार, बाहरी दबावों पर नजर CareEdge ने कहा है कि वे वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर के पूर्वानुमान पर कायम हैं, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले बाहरी दबावों की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है.

ट्रंप की जुबान फिर फिसली! 27 वर्षीय सेक्रेटरी पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट की तारीफ करते हुए ऐसे शब्द कहे जिन पर अब देश-विदेश में बहस छिड़ गई है। न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने लेविट को “अब तक की सबसे बेहतरीन प्रेस सचिव” बताया, लेकिन तारीफ के दौरान उनके शब्दों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। ट्रंप ने कहा, “वो एक स्टार बन चुकी हैं। वो चेहरा, वो दिमाग, वो होंठ… जिस तरह वो हिलते हैं, जैसे मशीन गन हो। वो वाकई एक शानदार इंसान हैं।” कौन हैं कौरोलिन 27 वर्षीय कैरोलिन लेविट ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली प्रेस सचिव हैं और अब तक कुल मिलाकर उनकी पांचवीं प्रेस सचिव हैं। एक दिन पहले वाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की तारीफ करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि ट्रंप ने पिछले छह महीनों में लगभग “हर महीने एक शांति समझौता या संघर्षविराम” कराया है। लेकिन ट्रंप की व्यक्तिगत शैली में की गई यह प्रशंसा कई लोगों को अजीब और असहज लगी। सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों को “अप्रोफेशनल”, “क्रिंजी” और “परेशान करने वाली” बताया गया। सोशल मीडिया पर कमेंट एक यूज़र ने लिखा, “अगर किसी आम ऑफिस में कोई पुरुष किसी महिला सहयोगी के लिए ऐसी बात कहे, तो उसे फौरन नौकरी से निकाल दिया जाए और कंपनी पर केस कर दिया जाए।” कई यूज़र्स ने मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कहा, “क्या कोई मेनस्ट्रीम मीडिया इन बेतुकी और अजीब बातों पर ट्रंप या वाइट हाउस से सवाल पूछेगा? शायद नहीं।” इस बयान ने ट्रंप की पहले से ही विवादों में घिरी छवि को और बिगाड़ दिया है, खासकर महिलाओं के साथ उनके बर्ताव को लेकर लोग पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।