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राशन कार्ड संकट गहराया: नियम सख्त, लाखों को खतरे का अलर्ट

नई दिल्ली  भारत में करोड़ों लोग सरकार की खाद्य सुरक्षा योजनाओं के तहत हर महीने सस्ते या मुफ्त राशन का लाभ उठाते हैं। यह लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उन्हीं लोगों को मिलता है जिनके पास वैध राशन कार्ड होता है। लेकिन अब सरकार ने राशन कार्डधारकों के लिए एक सख्त फैसला लिया है-अगर आपने समय पर ई-केवाईसी नहीं करवाई, तो आपका नाम राशन कार्ड सूची से हटाया जा सकता है। क्यों जरूरी है ई-केवाईसी? सरकार ने यह कदम फर्जी राशन कार्ड और अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने से रोकने के लिए उठाया है। ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिर्फ सही और पात्र लाभार्थियों को ही राशन मिले। नई गाइडलाइन के मुताबिक: जिन राशन कार्डधारकों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं करवाई है, उनका नाम कार्ड से हटा दिया जाएगा। बिना ई-केवाईसी के राशन वितरण में पारदर्शिता और नियंत्रण संभव नहीं है। क्या करें जिससे नाम ना कटे? अगर आप भी इस स्कीम के लाभार्थी हैं और आपका नाम सूची में बना रहे, तो तुरंत नीचे दिए गए तरीकों से ई-केवाईसी करवा लें:   ई-केवाईसी कैसे कराएं? ऑफलाइन तरीका: अपने नजदीकी राशन डीलर या लोक सेवा केंद्र (CSC) पर जाएं। आधार कार्ड ले जाएं और वहां बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) के जरिए पहचान सत्यापित करवाएं। ऑनलाइन तरीका (अगर राज्य की वेबसाइट पर सुविधा उपलब्ध है): अपने राज्य के राशन पोर्टल पर लॉगइन करें। आधार नंबर डालें, फिर मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) के जरिए ई-केवाईसी पूरी करें।  अगर ई-केवाईसी में परेशानी हो रही है? जिन लोगों को ऑनलाइन फिंगरप्रिंट या ओटीपी वेरिफिकेशन में दिक्कत आ रही है, वे सीधे निकटतम सेंटर जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। कब तक करवा लें? सरकार ने ई-केवाईसी के लिए अंतिम तारीख भी तय कर दी है (जो राज्यवार अलग-अलग हो सकती है)। यदि आप तय समयसीमा से पहले ई-केवाईसी नहीं कराते हैं, तो राशन वितरण बंद हो सकता है और आपका नाम सूची से हटाया जा सकता है।  

सर्वे से साफ़ तस्वीर: बिहार, बंगाल समेत 5 राज्यों में किस पार्टी की सरकार बनती दिख रही है?

नई दिल्ली  भारत के पांच बड़े राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले जो ताज़ा सर्वे सामने आए हैं उनसे यह साफ हो गया है कि राजनीतिक माहौल में बदलाव की बयार बह रही है। वोट वाइब और इंक इनसाइट्स जैसे सर्वेक्षणों में जनता के रुझान ने कई पुराने आंकड़ों को उलट दिया है। इन राज्यों में केरल, तमिलनाडु, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। आइए जानते हैं क्या कहता है ताज़ा जनमत और किसकी बन सकती है सरकार। केरल: कांग्रेस गठबंधन UDF को जनता का भरोसा केरल में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। वोट वाइब के सर्वे के मुताबिक राज्य में यूडीएफ (UDF) को 38.9% लोगों का समर्थन मिला है। यह गठबंधन कांग्रेस और कुछ अन्य सहयोगी दलों का है। वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला एलडीएफ (LDF) 27.8% समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) भी पीछे नहीं है। उसे 23.1% वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि केरल में भाजपा को अब तक बड़ी सफलता नहीं मिली है लेकिन इस आंकड़े से संकेत मिलता है कि पार्टी की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। बाकी अन्य दलों को 4.2% समर्थन मिला है। तमिलनाडु: डीएमके को बढ़त लेकिन जनता में नाराज़गी भी तमिलनाडु में डीएमके (DMK) को 37% समर्थन मिला है जो इसे राज्य की सबसे लोकप्रिय पार्टी बना रहा है। हालांकि AIADMK को भी 33% वोट मिल सकते हैं और यह आंकड़ा उसे कड़ी टक्कर देने वाला बनाता है। अभिनेता कमल हासन की पार्टी टीवीके (TVK) को 12% समर्थन मिला है जो एक नई राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ 41% लोग एंटी इनकंबेंसी यानी सरकार से नाराज हैं। वहीं 31% लोग सरकार के समर्थन में हैं। यानी स्टालिन सरकार की राह आसान नहीं लेकिन बढ़त उनके पक्ष में है। असम: बीजेपी की मजबूत स्थिति, सीएम की दौड़ में कड़ी टक्कर असम में भाजपा को फिर से सत्ता में लौटने की संभावना दिख रही है। सर्वे के मुताबिक भाजपा को 50% लोगों का समर्थन है जबकि कांग्रेस को 39% समर्थन मिल सकता है। मुख्यमंत्री पद के लिए हेमंत बिस्वा शर्मा को 46% लोग पसंद कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के गौरव गोगोई को 45% समर्थन मिला है। यह मुकाबला बेहद नजदीकी है और अंतिम परिणामों में उलटफेर भी संभव है। बिहार: NDA को बढ़त लेकिन तेजस्वी यादव सबसे पसंदीदा चेहरा बिहार में एनडीए (NDA) को 48.9% समर्थन मिल सकता है जबकि महागठबंधन को 35.8% का समर्थन मिला है। यानी भाजपा और जदयू का गठबंधन चुनावी मैदान में आगे दिख रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय चेहरा तेजस्वी यादव बनकर उभरे हैं जिन्हें 38% लोगों ने पसंद किया है। वहीं नीतीश कुमार को 36% और चिराग पासवान को 5% समर्थन मिला है। सम्राट चौधरी को सिर्फ 2% लोगों का समर्थन मिला। यह दर्शाता है कि भाजपा गठबंधन भले ही चुनावी आंकड़ों में आगे हो लेकिन नेतृत्व की पसंद के मामले में मतदाता तेजस्वी यादव को अधिक पसंद कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी फिर सबसे बड़ी पसंद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लोकप्रियता बरकरार है। वोट वाइब के अनुसार 41.7% लोग उन्हें सीएम फेस के रूप में देखना चाहते हैं। भाजपा के शुभेंदु अधिकारी को 20.4%, सुकांत मजूमदार को 9.7% और तृणमूल के अभिषेक बनर्जी को 5.3% समर्थन मिला है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ममता बनर्जी की पकड़ अब भी मजबूत है लेकिन भाजपा के पास भी एक बड़ा जनाधार मौजूद है। आने वाले दिनों में प्रचार और रणनीति इन आंकड़ों को बदल सकते हैं।  

कहां है आतंकी सरगना मसूद अजहर? खुफिया रिपोर्ट से हुआ बड़ा पर्दाफाश

नई दिल्ली  भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ी खुफिया जानकारी सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में छिपा हुआ देखा गया है। उसे उसके गढ़ बहावलपुर से कई किलोमीटर दूर इस क्षेत्र में देखा गया है। स्कर्दू के सदपारा रोड इलाके में देखा गया खुफिया जानकारी से पता चला है कि मसूद अजहर को हाल ही में स्कर्दू में विशेष रूप से सदपारा रोड इलाके में देखा गया था। यह इलाका महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दो मस्जिदें और कई निजी व सरकारी गेस्ट हाउस मौजूद हैं। यह जानकारी मसूद अजहर के नए ठिकाने की ओर इशारा कर रही है। पाकिस्तान में अन्य आतंकियों को भी पनाह मसूद अजहर का पारंपरिक गढ़ पाकिस्तान का बहावलपुर माना जाता है। बहावलपुर में उसके दो मुख्य ठिकाने हैं। गौरतलब है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर और मदरसे को निशाना बनाकर हमला किया था। अजहर अकेला ऐसा आतंकी नहीं है जिसे पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली है। एक अन्य आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ सैयद सलाहुद्दीन भी इस्लामाबाद से ही ऑपरेट करता है जो पाकिस्तान में आतंकियों की मौजूदगी पर सवाल खड़े करता है। बिलावल भुट्टो ने कहा था 'अफगानिस्तान में हो सकता है' हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में हो सकता है। बिलावल ने अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में यहां तक कहा था कि "अगर मसूद अजहर पाकिस्तान की सरजमीं पर पाया गया तो उसे हम उसे भारत को सौंप देंगे। जब भी भारत सरकार हमसे जानकारी शेयर करेगी कि मसूद अजहर को पाकिस्तानी सरजमीं पर देखा गया तो हम उसे अरेस्ट कर भारत को सौंपकर खुश होंगे।" हालांकि नई खुफिया जानकारी बिलावल के इस दावे के विपरीत है और अजहर के पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में होने की पुष्टि करती है।   भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड बता दें कि मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। इनमें 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। भारत लंबे समय से मसूद अजहर को सौंपने की मांग करता रहा है। इस नई खुफिया जानकारी के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान पर मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने की संभावना है।  

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा- तमिलनाडु दिवस तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि 1967 में आज ही के दिन तमिलनाडु को अपनी पहचान मिली थी और यह तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन है। स्टालिन ने राज्य का नाम रखने में द्रविड़ द्रमुक कषगम (द्रमुक) सरकार के प्रयासों को याद करते हुए कहा, ‘‘18 जुलाई 1967 को द्रमुक के सत्ता में आने के बाद इस भूमि की पहचान बदल गई।'' उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ''तमिलनाडु दिवस – तमिल समुदाय के इतिहास में एक अनोखा दिन ! वह दिन जब हमें आधिकारिक तौर पर अपना असली नाम तमिलनाडु मिला, एक सपना जो हम वर्षों से अपने दिलों में संजोए हुए थे, एक सपना सच हुआ।'' द्रमुक अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि यही वह दिन था जब महान नेता (पूर्व मुख्यमंत्री) सी एन अन्नादुरई ने राज्य का नामकरण किया और राज्य विधानसभा में तीन बार ‘तमिलनाडु’ नाम दोहराया, फिर चारों ओर यह आवाज गूंजी।  

57 मुस्लिम देशों के सामने पाकिस्तान ने उठाया सिंधु मुद्दा, पानी को बताया अस्तित्व का संकट

इस्लामाबाद भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को रोके जाने का दुख़ा पाकिस्तान ने मुस्लिम देशों के संगठन OIC में भी सुनाया है। पाकिस्तान 57 मुसलमान देशों की संस्था इस्लामिक सहयोग संगठन की मीटिंग में यह बात रखी और कहा कि भारत ने एकतरफा तौर पर यह फैसला लिया है। जेद्दा में आयोजित OIC के ह्यूमन राइट्स कमिशन के 25वें सत्र में पाकिस्तान ने कहा कि हमारे अधिकारों का भारत की ओर से हनन किया जा रहा है। पाकिस्तान ने 'राइट टू वार' नाम से आयोजित सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला मनमाना है। टीवी के मुताबिक सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि सैयद फवाद शेर ने कहा भारत ने एकतरफा तौर पर यह निर्णय लिया है और इससे वर्ल्ड बैंक की ओर से तय शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी तो हमारे लिए मूल अधिकार की तरह है, लेकिन भारत उसे भी हमसे छीनने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि हम तो पहले ही पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि भारत से आने वाली नदियों में पानी की कमी हुई तो हमारे आगे मुश्किल हालात होंगे। उन्होंने कहा कि इससे हमारे इलाके में जलवायु का संकट पैदा हो सकता है। पानी की किल्लत होगी और खेती से लेकर तमाम जरूरी चीजों पर खतरा पैदा होगा। सैयद फवाद शेर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह बड़ी परेशानी है। हालांकि पाकिस्तान के इस रुख के बाद भी मुस्लिम देशों के संगठन ने अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें इस मसले का कोई जिक्र हो। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इसके अलावा सिंधु समेत सभी नदियों पर बांध आदि परियोजनाओं पर तेजी लाई जा रही है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की ओर से जाने वाले पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।  

नई जीवन तकनीक: तीन लोगों के DNA से बच्चा पैदा करने में ब्रिटेन को मिली कामयाबी

नई दिल्ली  मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए मेडीकल जगत में नित नए प्रयोग होते रहते हैं। इसी क्रम में ब्रिटेन ने भी आज से दस साल पहले माइटोकॉन्ड्रियल दान को वैध बना दिया था। इस नियम के बनने के सालों बाद इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। इस उच्च स्तरीय तकनीक के जरिए मानवीय डीएनए में आई खराबी को आगे बढ़ने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी। अब डॉक्टरों ने इस शोध के नतीजे प्रकाशित किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तीन माता-पिता वाले शिशु की इस तकनीक से अभी तक आठ बच्चे पैदा किए जा चुके हैं, खुशी की बात यह है कि यह आठों ही अभी स्वस्थ हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रजनन उपचार पर प्रकाशित दो शोध पत्रों के मुताबिक सरकार से अनुमति मिलने के बाद इसका प्रयोग 22 महिलाओं के डीएनए के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह वह महिलाएं थी जिनका जीन परेशानी खड़ा करने वाला था। यानी इनके जीन को लेकर अगर बच्चा पैदा होता तो वह गंभीर अनुवांशिक विकार यार जन्मजात विकलांगता के साथ पैदा होता। इन महिलाओं के जीन में लेह सिंड्रोम भी उपस्थित था। रिपोर्ट के मुताबिक न्यूकैसल टीम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक में तीन लोगों के डीएनए का उपयोग करके एक भ्रूण का निर्माण किया गया है। इसमें होने वाले माता पिता के न्यूक्लियर डीएनए को लिया गया और डोनर एक से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को लिया गया। आपको बता दें कि एक बच्चे के माइटोकॉन्ड्रिया के निर्माण के लिए उसकी माता ही जिम्मेदार होती है। ऐसे में अगर माता किसी बीमारी से ग्रसित है तो बच्चा भी उसी परेशानी के साथ पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में यहां पर किसी दूसरी महिला के अंड़े से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए लिया गया। इसके बाद इन तीनों को निषेचित करके भ्रूण का निर्माण किया गया। 2015 में जब ब्रिटेन की संसद से इस माइटोकॉन्ड्रियल दान के बारे में बहस की जा रही थी। तब इसकी प्रक्रिया और प्रभावशीलता के बारे में कई सवाल उठे थे। हालांकि बाद में संसद से इसे मंजूरी मिल गई थी। हालांकि अब जबकि रिपोर्ट सामने आ गई है तो इसके बाद भी ब्रिटिश मीडिया में इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह तकनीक सफल हो गई थी तो अभी तक इसके बारे में सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं बताया गया, जबकि इसमें बहुत बड़ा वित्तीय निवेश किया गया था। मीडिया के मुताबिक आखिर कार इस तकनीक को अभी तक दुनिया से क्यों छिपाया गया। अगर इसमें पारदर्शिता दिखाई जाती तो यह कई शोध टीमों के लिए महत्वपूर्ण साबित होती।  

कर्ज़ की दलदल में पाकिस्तान: कितने अरब डॉलर और कैसी है बचाव की उम्मीद?

इस्लामाबाद पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान से आई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। अब पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की उम्मीद है। पाकिस्तान एक जुलाई से 30 जून तक के वित्त वर्ष का अनुसरण करता है। पाकिस्तान की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, इस साल मार्च के अंत में पाकिस्तान पर कुल 76010 अरब रुपए का कर्ज था। इसमें 51520 अरब रुपए (करीब 180 अरब अमेरिकी डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24490 अरब रुपए (87.4 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज शामिल है। पांच मित्र देशों पर नजर पाकिस्तान पर जो 87.4 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है, उसके दो हिस्से हैं। एक तो सरकारी विदेशी कर्ज है। वहीं, दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला कर्ज शामिल है। खबर के अनुसार, 2025-26 में कुल 23 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि ‘मित्र देशों’ द्वारा रखी गई अस्थायी जमा के रूप में है। उम्मीद की जा रही है कि ये मित्र देश इस 12 अरब डॉलर की राशि की वापसी की तारीख को आगे बढ़ा देंगे। इस अस्थायी जमा राशि में सऊदी अरब से पांच अरब डॉलर, चीन से चार अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात से दो अरब डॉलर और कतर से करीब एक अरब डॉलर शामिल हैं। कर्ज भुगतान के लिए बजट वहीं, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय ऋणदाताओं, अंतरराष्ट्रीय बान्डधारकों और वाणिज्यिक उधारदाताओं को करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर का बाह्य ऋण चुकाना होगा। कर्ज का भुगतान वर्तमान में वार्षिक बजट का सबसे बड़ा व्यय है। पाकिस्तान ने 2025-26 में घरेलू एवं और बाह्य ऋण को चुकाने के लिए 8200 अरब रुपए आवंटित किए हैं। यह 17573 अरब रुपए के कुल संघीय बजट का 46.7 प्रतिशत है।  

कर्ज़ की दलदल में पाकिस्तान: कितने अरब डॉलर और कैसी है बचाव की उम्मीद?

इस्लामाबाद पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान से आई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। अब पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की उम्मीद है। पाकिस्तान एक जुलाई से 30 जून तक के वित्त वर्ष का अनुसरण करता है। पाकिस्तान की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, इस साल मार्च के अंत में पाकिस्तान पर कुल 76010 अरब रुपए का कर्ज था। इसमें 51520 अरब रुपए (करीब 180 अरब अमेरिकी डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24490 अरब रुपए (87.4 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज शामिल है। पांच मित्र देशों पर नजर पाकिस्तान पर जो 87.4 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है, उसके दो हिस्से हैं। एक तो सरकारी विदेशी कर्ज है। वहीं, दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला कर्ज शामिल है। खबर के अनुसार, 2025-26 में कुल 23 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि ‘मित्र देशों’ द्वारा रखी गई अस्थायी जमा के रूप में है। उम्मीद की जा रही है कि ये मित्र देश इस 12 अरब डॉलर की राशि की वापसी की तारीख को आगे बढ़ा देंगे। इस अस्थायी जमा राशि में सऊदी अरब से पांच अरब डॉलर, चीन से चार अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात से दो अरब डॉलर और कतर से करीब एक अरब डॉलर शामिल हैं। कर्ज भुगतान के लिए बजट वहीं, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय ऋणदाताओं, अंतरराष्ट्रीय बान्डधारकों और वाणिज्यिक उधारदाताओं को करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर का बाह्य ऋण चुकाना होगा। कर्ज का भुगतान वर्तमान में वार्षिक बजट का सबसे बड़ा व्यय है। पाकिस्तान ने 2025-26 में घरेलू एवं और बाह्य ऋण को चुकाने के लिए 8200 अरब रुपए आवंटित किए हैं। यह 17573 अरब रुपए के कुल संघीय बजट का 46.7 प्रतिशत है।  

न्यायपालिका पर उठते सवाल: CJI पर एक्शन की सीमाएं और जस्टिस वर्मा की 6 आपत्तियाँ

नई दिल्ली केंद्र सरकार की ओर से महाभियोग की तैयारी के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 14 मार्च को उनके दिल्ली स्थित आवास पर बड़े पैमाने पर कैश पाए जाने की खबर मिली थी। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जांच समिति ने दोषी पाया था। उस रिपोर्ट के बाद उनका इलाहाबाद ट्रांसफर किया गया और राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी गई थी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर ही महाभियोग चलाने की तैयारी है, लेकिन जस्टिस वर्मा ने रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इसके खिलाफ 6 अहम दलीलें दी हैं। 'मेरा मीडिया ट्रायल हुआ, छवि ही खराब हो गई' जस्टिस यशवंत वर्मा ने सबसे बड़ा आरोप मीडिया ट्रायल का लगाया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया गया और इसके चलते मेरा मीडिया ट्रायल हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे मेरी छवि खराब हुई है और मेरे करियर पर भी असर पड़ा है। जस्टिस वर्मा ने दलील दी है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की ओर से तय नियमों का भी इस तरह जानकारी सार्वजनिक करके उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कमेटी की फाइनल रिपोर्ट छपी है और इस तरह गोपनीयत का उल्लंघन किया गया। इन हाउस जांच पर उठाए सवाल, बोले- कमजोर होती है संसद जस्टिस वर्मा ने एक तर्क यह भी दिया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1999 में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए अपनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया अनुचित रूप से आत्म-नियमन के निर्धारित दायरे से परे चली जाती है। याचिका में कहा गया है कि इससे एक समानांतर और असंवैधानिक तंत्र तैयार होता है। यह संविधान के अनुच्छेद 124 और 218 के तहत निर्धारित अनिवार्य ढांचे को कमजोर करती है, जिनके अनुसार न्यायाधीशों को हटाने का विशेष अधिकार केवल संसद को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से संसद का अधिकार कमजोर होता है। चीफ जस्टिस की पावर पर भी उठा दिए सवाल जस्टिस वर्मा ने अपनी अर्जी में चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट की पावर तक पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी सुप्रीम कोर्ट या चीफ जस्टिस को यह ताकत नहीं दी गई कि वह अपने जजों या फिर हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ ऐक्शन ले। गवाहों के बयानों की रिकॉर्डिंग नहीं कराई, फुटेज पर भी सवाल उन्होंने एक दलील यह भी दी है कि मेरे खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। कुछ अप्रमाणित आरोपों के आधार पर ही मेरे खिलाफ जांच शुरू की गई। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि जांच समिति ने उन्हें पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा गवाहों के बयानों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इन गवाहों के बयानों के एक हिस्से को ही बताया गया, जबकि उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करानी चाहिए थी। इसके अलावा जांच समिति की ओर से सीसीटीवी फुटेज आदि न जुटाने पर भी जस्टिस वर्मा ने सवाल उठाए हैं। 'मेरे घर से कैश मिला तो कितना था और किसका था, यह नहीं बताया गया' जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा कि जब इस मामले का मुख्य आधार यही है कि मेरे घर से कैश पाया गया तो यह भी पता लगाना चाहिए था कि यह कितना था और कहां से आया था। उन्होंने कहा कि जांच समिति यह बताने में नाकाम रही है कि यह कैश कहां से आया था और कितना था। 'पहले मेरा पक्ष सुनते, फिर करनी थी महाभियोग की सिफारिश' उनकी एक दलील यह भी है कि फाइनल रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए मुझे वक्त नहीं मिला। जस्टिस वर्मा का कहना है कि मुझे हटाने की सिफारिश से पहले जवाब लेना चाहिए था। इसके लिए मुझे कोई वक्त ही नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे चीफ जस्टिस या फिर वरिष्ठ जज के आगे पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए था। उसके बाद ही महाभियोग जैसी सिफारिश होनी चाहिए।  

मुंबई में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ीं: Ola-Uber ड्राइवरों की ये हैं प्रमुख मांगें

मुंबई मुंबई में ओला  और उबर ड्राइवरों की हड़ताल आज लगातार चौथे दिन भी जारी रही, जिससे शहर के लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र गिग वर्क्स मंच के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के कारण लगभग 90% ऐप-आधारित कैब सड़कों से नदारद हैं। इस हड़ताल से जूझ रहे ड्राइवर आज शुक्रवार, 18 जुलाई को सुबह 10 बजे मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में धरना प्रदर्शन करने वाले हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर यात्रियों की सबसे ज़्यादा मुश्किल इस हड़ताल का सबसे बुरा असर मुंबई एयरपोर्ट पर देखने को मिल रहा है। यहां यात्रियों को अपनी फ्लाइट पकड़ने या घर पहुंचने के लिए लंबे इंतज़ार और बहुत ज़्यादा किराए का सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर एक यात्रा सलाह (Travel Advisory) जारी की है। इसमें यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें और परिवहन के लिए कोई दूसरा इंतज़ाम करें। हड़ताल के कारण शहर भर में बसों, ऑटो-रिक्शा और मेट्रो सेवाओं में भीड़ बढ़ गई है। ओला-उबर ड्राइवर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? जानें उनकी मुख्य मांगें मुंबई और महाराष्ट्र में ओला-उबर ड्राइवर उचित वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें ये हैं: ➤ किराए में बराबरी: ड्राइवर चाहते हैं कि उनका किराया पारंपरिक काली-पीली टैक्सियों के बराबर हो। ➤ बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध: वे बाइक टैक्सी सेवाओं (जैसे रैपिडो) पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। ➤ परमिट की सीमा: ऑटो और टैक्सी परमिट की संख्या सीमित की जाए। ➤ कम कमीशन: कैब एग्रीगेटर (ओला-उबर) उनसे जो कमीशन लेते हैं, उसे कम किया जाए। ➤ कल्याण बोर्ड और एक्ट: वे ऐप-आधारित ड्राइवरों के लिए एक कल्याण बोर्ड बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 'महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट' लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। सरकार से बातचीत विफल, हड़ताल जारी रहने के आसार राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ हाल ही में हुई बैठक के बावजूद, अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। टाइम्स नाउ न्यूज के अनुसार, सरनाईक ने कहा, "हमने सब कुछ समझाया, लेकिन विरोध अभी भी जारी है। यह सही नहीं है।"