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जेब में वोटर स्लिप, ID भी मौजूद! ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों की पाकिस्तान से पुष्टि

श्रीनगर  पिछले महीने 28 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के दाचीगाम में महादेव की पहाड़ियों में जंगलों के बीच 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मारे गए तीनों आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे। इस बात की पुष्टि उनके पास से बरामद सरकारी पहचान पत्र और बायोमेट्रिक डेटा से हुई है। ये तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और तीनों ही पहलगाम में हुई आतंकी हमले में शामिल थे। सुरक्षा बलों द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं। प्राप्त साक्ष्यों के मुताबिक, ये आतंकवादी पहलगाम में हमले को अंजाम देने के बाद से ही दाचीगाम-हरवान वन क्षेत्र में छिपे हुए थे। सुरक्षा बलों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के मुताबिक, पहलगाम में पर्यटकों पर की गई गोलीबारी में कोई भी स्थानीय कश्मीरी शामिल नहीं था। बता दें कि 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में तीन आतंकवादी – सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट, अबू हमजा उर्फ 'अफगान' और यासिर उर्फ 'जिब्रान' को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया था।साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला है कि A++ लश्कर कमांडर सुलेमान शाह, पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर था, जबकि हमजा और यासिर ए-ग्रेड लश्कर कमांडर थे। गोलीबारी के दौरान हमजा दूसरा बंदूकधारी था, जबकि यासिर तीसरा बंदूकधारी था जिसके पास हमले के दौरान बाकी दोनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। मतदाता पहचान पत्र और स्मार्ट आईडी चिप से खुलासा रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आतंकियों के शवों से मतदाता पहचान पत्र और स्मार्ट आईडी चिप सहित पाकिस्तानी सरकारी दस्तावेज भी बरामद किए गए, जिससे उनके पड़ोसी देश से संबंध होने की पुष्टि होती है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि सुलेमान शाह और अबू हमजा की जेबों से पाकिस्तान चुनाव आयोग द्वारा जारी दो मतदाता पर्चियाँ मिलीं। पर्चियों पर मतदाता क्रमांक क्रमशः लाहौर (एनए-125) और गुजरांवाला (एनए-79) की मतदाता सूचियों से मेल खाते हैं। सैटेलाइट फोन से एक मेमोरी कार्ड भी बरामद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के क्षतिग्रस्त सैटेलाइट फोन से एक मेमोरी कार्ड भी बरामद किया है, जिसमें तीनों व्यक्तियों के NADRA (राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण) बायोमेट्रिक रिकॉर्ड थे। इन रिकॉर्डों में उनके फिंगरप्रिंट, चेहरे के नमूने और वंशावली की जानकारी है, जो उनकी पाकिस्तानी नागरिकता और चांगा मंगा (कसूर ज़िला) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में रावलकोट के पास कोइयाँ गाँव में उनके पते की पुष्टि करती है।

मुंबई में पक्षियों को दाना खिलाना अपराध! 51 कबूतरखाने बंद, 100 लोग चालान के शिकंजे में

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के निर्देश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने दादर कबूतरखाना में कबूतरों को दाना डालने पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. बीएमसी ने 2 अगस्त को दादर कबूतरखाना के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे प्लास्टिक की बड़ी तिरपालों से ढक दिया. यह प्रतिबंध गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के कारण लागू किया गया है, क्योंकि कबूतरों की बीट (मल) से सांस संबंधी बीमारियां और संक्रमण होने की संभावना होती है, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में. बीएमसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए दादर कबूतरखाना में बने अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया और कबूतरों को खिलाने के लिए रखे गए अनाज को जब्त कर लिया गया. कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लागू होने के बाद से बीएमसी ने दादर कबूतरखाना में 100 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया है. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बीएमसी को प्रतिबंध का उल्लंघन कर कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा बार-बार आदेश का उल्लंघन पर संभावित गिरफ्तारी भी शामिल है. बीएमसी को इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस का भी सहयोग मिला है और उन जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जहां लोग कबूतरों को दाना डालते हैं. कबूतरों को दाना डालने के पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक आधारों का हवाला देकर स्थानीय लोग बीएमसी के एक्शन का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, बीएमसी का कहना है कि वह हाई कोर्ट के आदेश पर जन स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता दे रही है.  दादर निवासी नीलेश त्रेवाडिया ने कहा कि बीएमसी को इस तरह के प्रतिबंध के परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए. यह प्रतिबंध दादर सहित मुंबई के सभी प्रमुख कबूतरखानों पर लागू है और हाई कोर्ट ने बीएमसी से इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है. मुंबई में 51 कबूतरखाने हैं, जिनमें दादर कबूतरखाना जैसे प्रतिष्ठित स्थल भी शामिल हैं. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुंबई के म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पक्षी प्रेमियों, जैन साधुओं और नागरिकों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं को ध्यान में रखा जाए. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए उन्होंने बीएमसी से कोई बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया है. मुंबई में पिजन फीडिंग की सदियों पुरानी प्रथा मुंबई में लोगों द्वारा कबूतरों को दाना डालना सदियों से चली आ रही एक प्रथा है, जो कई बार विवादों का कारण भी बना है. भारतीय संस्कृति में कबूतरों को दाना डालना पुण्य का कार्य माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि कबूतरों को भोजन कराने से मृत पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और पितृ-पीड़ा से मुक्ति मिलती है. विशेष रूप से अमावस्या के दिन कबूतरों को दाना डालना शुभ माना जाता है. कुछ संस्कृतियों में यह भी मान्यता है कि कबूतरों को सांसारिकता और आध्यात्म के बीच संदेशवाहक के रूप में देखा जाता है, उन्हें भोजन कराने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के साथ बेहतर संबंध बनता है. जैन धर्म में, कबूतरों को दाना डालना जीव दया या जीवों के प्रति करुणा का एक रूप है, जो जैन परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है. जैन मंदिर और ट्रस्ट कबूतरखाना संचालित करते हैं. जैन धर्म के अनुयायी इन स्थानों पर नियमित रूप से कबूतरों को दाना डालने जाते हैं. दादर कबूतरखाना को भी एक जैन मंदिर द्वारा स्थापित किया गया था. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने का इतिहास मुंबई में गुजराती और जैन व्यापारियों की बड़ी संख्या के कारण शहरभर में कबूतरखाने मिल जाते हैं. इस कारण मुंबई में कड़ी संख्या में कबूतर देखे जा सकते हैं. एडवर्ड हैमिल्टन ऐटकेन ने 1909 में अपनी किताब 'द कॉमन बर्ड्स ऑफ बॉम्बे' में शहर में कबूतरों की बड़ी आबादी के कारणों पर विस्तार से बताते हुए लिखा, 'वे दो चीजों से बंबई की ओर आकर्षित होते हैं: उनके रहने के लिए यहां इमारतों की कोई कमी नहीं है और हिंदू अनाज व्यापारियों की उदारता के कारण उन्हें भोजन की कमी नहीं होती.' बॉम्बे नगरपालिका ने 1944 में दादर स्थित जैन मंदिर को एक पत्र लिखकर पक्षियों के भोजन के लिए एक ट्रैफिक आइलैंड के निर्माण की अनुमति दी. यह पत्र जैन मंदिर द्वारा भेजे गए उस पत्र के जवाब में जारी किया गया था जिसमें मंदिर के पास झुंड में रहने वाले और कारों से कुचले जाने के खतरे में रहने वाले कबूतरों की सुरक्षा के लिए एक बाड़ा बनाने की अनुमति मांगी गई थी. ट्रैफिक आइलैंड सड़क पर एक उठा हुआ या चिह्नित क्षेत्र होता है जिसका उपयोग यातायात को नियंत्रित करने, पैदल यात्रियों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए किया जाता है. ऐसे स्ट्रक्चर चौराहों पर या सड़कों के बीच में बनाए जाते हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सके और पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके.  मुंबई में कबूतरों की बीट से स्वास्थ्य जोखिम तत्कालीन बॉम्बे में कबूतरों को दाना डालना व्यापक रूप से स्वीकार्य था. लेकिन 90 के दशक के मध्य में इस पर चिंताएं उभरने लगीं, जब मेडिकल स्टडीज में कबूतरों की बीट को सांस संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया. इसके बाद, मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से संबंधित शिकायतें बढ़ने लगीं, नागरिकों ने कबूतरों की अधिक संख्या के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायत की. 2013 में, 30 जून को ग्रांट रोड पर कबूतरखाना के पास एक कबूतर के अचानक सामने आने से बीएमसी के एक इंजीनियर की मोटरसाइकिल से गिरकर मौत हो गई थी. घटना के बाद स्थानीय पार्षद ने दाना बेचने वालों को सड़क से हटा दिया. दो दिन बाद, तत्कालीन बीएमसी लॉ कमिटी के चेयरमैन मकरंद नार्वेकर ने कबूतरखानों को कम भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा. हालांकि, इस प्रस्ताव … Read more

शहबाज शरीफ भड़के: इजरायली मंत्री ने अल अक्सा मस्जिद में की पूजा, कहा– बर्दाश्त नहीं करेंगे

 यरूशलम  इजरायल के दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिविर (Itamar Ben Gvir) ने  यरूशलम की अल-अक्सा मस्जिद में पूजा की. अल-अक्सा मंदिर में उनका पूजा करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को नागवार गुजरा और उन्होंने खुलकर अपना गुस्सा जाहिर किया.  बेन गिविर के अल-अक्सा मस्जिद के दौरे से तनाव बढ़ गया है. उनके इस दौरे के मुस्लिम जगत के लिए उकसावे वाला बताया जा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गिविर के अल-अक्सा मस्जिद में पूजा करने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हम इजरायली मंत्रियों द्वारा हाल ही में अल-अक्सा मस्जिद में घुसने की निंदा करते हैं.  शहबाज शरीफ ने कहा कि इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक का अपमान ना केवल दुनियाभर के एक अरब से अधिक मुसलमानों की धार्मिक आस्था का घोर अपमान है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवता की सामूहिक अंतरात्मा पर भी सीधा हमला है. इस तरह के योजनाबद्ध उकसावे और क्षेत्र को हड़पने की गैरजिम्मेदाराना मांगें शांति की संभावनाओं को गंभीर रूप से खतरे में डाल रही हैं. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इजरायल की ये निंदनीय और शर्मनाक कार्रवाइयां न केवल फिलिस्तीन बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को जानबूझकर भड़का रही हैं, जिससे यह क्षेत्र और अधिक अस्थिरता और संघर्ष की ओर धकेला जा रहा है. पाकिस्तान एक बार फिर जोर देकर अपील करता है कि तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए, आक्रामकता की सभी कार्रवाइयां रोकी जाएं और एक विश्वसनीय शांति प्रक्रिया को बहाल किया जाए, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप हो. बता दें कि अल-अक्सा मस्जिद को यहूदी टेंपल माउंट कहते हैं और इसे अपना पवित्र स्थल मानते हैं. अल-अक्सा मस्जिद में लंबे समय से नमाज पढ़ी जाती हैं. यहां यहूदी पूजा नहीं करते बल्कि तय समय पर ही यहूदी यहां प्रवेश कर सकते हैं. वहीं, इस्लाम में अल-अक्सा मस्जिद मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल है. मुसलमान, यहूदी और ईसाई धर्मों के अल-अक्सा को लेकर किए जाने वाले दावों को लेकर यह परिसर अशांत बना हुआ है. बता दें कि गिविर 2021 में भी अल-अक्सा मस्जिद गए थे. उस समय भी उनके इस दौरे का विरोध हुआ था. 

AI आंगनबाड़ी की शुरुआत: टेक्नोलॉजी और सुविधा में प्राइवेट स्कूलों को दे रही टक्कर

नई दिल्ली भारत के ग्रामीण इलाकों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री हो चुकी है। बचपन से ही बच्चे AI का इस्तेमाल और महत्व समझें, इसके लिए AI की एंट्री आंगनबाड़ी के जरिए हुई है। महाराष्ट्र के नागपूर जिले की हिंगना तहसील के वडधामना गांव में AI पावर्ड आंगनबाड़ी केंद्र की शुरुआत की गई है। यह नागपूर से करीब 18 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन किया था। इसमें ऐसी-ऐसी सुविधाएं हैं जो प्राइवेट स्कूलों भी टक्कर दे सकती हैं। AI आंगनबाड़ी में ये सुविधाएं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस AI आंगनबाड़ी को नागपुर जिला परिषद की 'मिशन बाल भरारी' पहल के तहत शुरू किया गया है। यहां के बच्चे पहले बाकी आंगनबाड़ियों की तरह ही स्लेट और चॉक से पढ़ा करते थे, लेकिन अब डिजिटल क्लासरूम आ चुका है। यहां पर वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, AI से लैस स्मार्टबोर्ड, टैबलेट और इंटरैक्टिव डिवाइस से बच्चे पढ़ेंगे, उनकी क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी। पहले यहां पर बच्चों की संख्या 10 के आसपास होती थी, लेकिन अब बच्चे डबल हो गए हैं, संख्या 25 तक भी पहुंच गई है। बच्चों की परफॉर्मेंस डिजिटल डिवाइसेज में रिकॉर्ड होगी बच्चों के लिए ये बिल्कुल नया एक्सपीरियंस है। स्मार्ट क्लासरूम में बैठकर पढ़ना उन्हें बोर नहीं करता है। हर क्लास में स्लो और फास्ट लर्नर्स होते हैं, उनके हिसाब से ही यहां पर लेसन पढ़ाए जा थे हैं। यहां पर बच्चे ड्रॉइंग भी स्मार्ट डिवाइस पर करते हैं। उनका परफॉर्मेंस भी डिजिटल डिवाइसेज में रिकॉर्ड होता है। इससे बच्चों की इमेजिनेशन बढ़ेगी, वे क्रिएटिव होंगे और पढ़ाई में उनका मन लगने लगेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग मिली वडधामना गांव की इस आंगनबाड़ी में Wi-Fi और CCTV कैमरा भी लगे हैं। यहां पर लगे डिवाइसेज की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कैमरा लगे हैं और Wi-Fi इसलिए लगा है, ताकि डिवाइस इंटरनेट से कनेक्टेड रहें। आंगनबाड़ी में काम रहे कार्यकर्ताओं को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है, ताकि वे स्मार्ट डिवाइस और AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकें। बच्चों की हेल्थ भी ट्रैक करेगा AI यहां AI और स्मार्ट डिवाइसेज की मदद से केवल पढ़ाई ही नहीं हो रही, बल्कि बच्चों के पोषण और विकास को भी मॉनिटर किया जा रहा है। सरकार के 'पोषण ट्रैकर' प्लेटफॉर्म को जोड़ा गया है, इससे बच्चों के खाने और फिजिकल हेल्थ का रियल टाइम डेटा मिल सकेगा। नतीजतन, बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। यहां पर शिक्षा और स्वास्थ्य, दोनों के लिए AI मददगार होगा।

बांके बिहारी प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: फंड जेब में क्यों चाहिए?

नई दिल्ली वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और उसके रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। शीर्ष न्यायालय ने मंदिर के प्रबंधन और उसके आस-पास के क्षेत्र के विकास पर निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का संकेत दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी प्रबंधन कमेटी से तीखे सवाल भी पूछे और सख्त टिप्पणी कीा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भगवान सबके हैं, आप क्यों चाहते हैं सारा फंड आपकी पॉकेट में जाए? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि 15 मई को उत्तर प्रदेश सरकार को कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल करने की दी गई अनुमति के आदेश को वापस लिया जा सकता है। सुनवाई मंगलवार, 5 अगस्त की सुबह 10:30 तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मंदिर मैनेजमेंट कमेटी ने मंदिर के प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार के अध्यादेश का विरोध करते हुए याचिका दाखिल की है। कमेटी ने 15 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी विरोध किया है जिसमें राज्य सरकार को बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने मंदिर कमेटी से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा, ‘मंदिर निजी हो सकता है, लेकिन देवता सबके हैं. वहां लाखों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर का फंड श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े विकास में क्यों नहीं इस्तेमाल हो सकता? आप क्यों चाहते हैं कि सारा फंड आपके पॉकेट में ही जाए?’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के कानून को हाई कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए। 15 मई का आदेश वापस ले सकता है सुप्रीम कोर्ट? लगभग 50 मिनट चली सुनवाई के बाद जजों ने इस बात का संकेत दिया कि 15 मई के आदेश को वापस लिया जा सकता है। फिलहाल मंदिर के प्रबंधन के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जा सकती है। इसमें जिलाधिकारी को भी रखा जाएगा। क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की भी उसके आस-पास के विकास में मदद ली जाएगी। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए उचित सुविधाओं का विकास जरूरी है। 15 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट के सख्त सवालों के जवाब में दीवान ने कहा, ‘असल बात यह है कि हमें सुने बिना ऐसा आदेश सुप्रीम कोर्ट से कैसे आया? मामला कुछ और था, उसमें अचानक आदेश आ गया कि मंदिर का फंड कॉरिडोर बनाने के लिए लिया जाए। इससे सहमति जताते हुए कहा कि किसी जगह का विकास सरकार की जिम्मेदारी है। अगर उसे भूमि अधिग्रहण करना या तो वह ऐसा अपने पैसों से कर सकती है। मंदिर में धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर दो गुटों में विवाद याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी मंदिर है। उसमें धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर 2 गुटों में विवाद था। राज्य सरकार ने बिना अधिकार उसमें दखल दिया. वह मामले को सुप्रीम कोर्ट ले आई और कॉरिडोर के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल का आदेश ले लिया। इसके बाद जल्दी-जल्दी एक अध्यादेश भी जारी कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि मंदिर की स्थापना करने वाले और सदियों से उसे संभाल रहे गोस्वामी प्रबंधन से बाहर हो गए।

सिम्बेक्स अभ्यास ने बनाया रिकॉर्ड, SCS में भारत-सिंगापुर की रणनीतिक साझेदारी मजबूत

नई दिल्ली  भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (RSN) ने 28 जुलाई से एक अगस्त तक वार्षिक सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिमबेक्स) किया। रक्षा मंत्रालय ने यहां बताया कि अभ्यास के तहत इस वर्ष पहले आरएसएस सिंगापुर-चांगी नौसैनिक अड्डे पर तटीय चरण और उसके बाद दक्षिण चीन सागर (SCS) के दक्षिणी छोर पर समुद्री चरण का आयोजन किया गया। उसने बताया कि समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं के पोत और सिंगापुर गणराज्य वायु सेना (RSAF) के विमान शामिल हुए। आरएसएन ने ‘फोर्मिडेबल' (दुर्जेय) श्रेणी के फ्रिगेट ‘RSS सुप्रीम' और ‘विक्ट्री' (विजयी) श्रेणी के मिसाइल युद्धपोत ‘आरएसएस विजिलेंस' (MV मेंटर) को तैनात किया। भारतीय नौसेना ने शिवालिक श्रेणी के फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा के साथ अभ्यास में भाग लिया। आरएसएएफ के एक एस70बी नौसैनिक हेलीकॉप्टर, दो फोकर-50 समुद्री गश्ती विमान और दो एफ-15एसजी लड़ाकू विमान भी इस अभ्यास में शामिल हुए। सिम्बेक्स 2025 का सफल आयोजन भारतीय नौसेना और आरएसएन के बीच स्थायी साझेदारी को रेखांकित करता है। आरएसएस के कमांडिंग ऑफिसर सुप्रीम लेफ्टिनेंट कर्नल आरोन कोह ने कहा, ‘‘सिम्बेक्स सिंगापुर गणराज्य की नौसेना और भारतीय नौसेना के बीच दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण है। यह अभ्यास अभियानगत दक्षताओं को निखारने, आपसी समझ बढ़ाने और लोगों के बीच स्थायी संबंध बनाने की दिशा में नौसैन्य कर्मियों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में वर्षों से कार्य करता रहा है।'' सिम्बेक्स का पहली बार 1994 में आयोजन किया गया था। इस साल यह इस अभ्यास का 32वां संस्करण था। यह आरएसएन के सबसे लंबे समय से जारी द्विपक्षीय समुद्री अभ्यासों में से एक है और भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ किया जाने वाला सबसे लंबा निरंतर द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।    

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आई रफ्तार, मुंबई-अहमदाबाद यात्रा होगी महज 2 घंटे की

मुंबई  देश में पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train In India) चलाने की तैयारियां जोरों पर हैं और इससे जुड़े तमाम काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं. मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस पहली बुलेट ट्रेन (Mumbai Ahmedabad Bullet Train) को लेकर अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है. जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने रविवार को कहा कि, 'भारत की पहली बुलेट ट्रेन सेवा बहुत जल्द शुरू होगी और इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब दो घंटेरह जाएगा.'  जल्द शुरू होने वाली है बुलेट ट्रेन केंद्रीय रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने रविवार को गुजरात के भावनगर टर्मिनस से अयोध्या एक्सप्रेस, रीवा-पुणे एक्सप्रेस और जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई और इस कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए Bullet Train को लेकर ये बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन से मुंबई से अहमदाबाद के बीच की दूरी महज 2 घंटे और 7 मिनट में पूरी होगी. इस बीच इसकी शुरुआत को लेकर टाइमलाइन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत जल्दी चालू होने वाली है और इसे लेकर तेजी के साथ काम चल रहा है. बता दें कि रेलवे मिनिस्ट्री (Ministry Of Railway) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर लगातार Bullet Train Project को लेकर युद्धस्तर पर जारी काम के बारे में अपडेट शेयर किया जाता रहता है. बीते दिनों ही एक पोस्ट में रेलवे की ओर से बताया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR Corridor) पर एक बड़े निरंतर सुरंग खंड का काम सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो उस 21 किलोमीटर की सुरंग का एक हिस्सा है, जिससे होकर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन गुजरेगी.  अमृत भारत में  Vande Bharat के फीचर कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत ट्रेन (Amrit Bharat Train) नई चालू हुई है और अभी करीब 8 गाड़ियां ऐसी चलाई जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अमृत भारत गाड़ी में वंदे भारत जैसे फीचर हैं, लेकिन ये एकदम कम किराये की गाड़ी, एकदम कम टिकट वाली ट्रेन है. उनके मुताबिक, पोरबंदर-राजकोट नई डेली ट्रेन जल्दी चालू होगी. राणावाव स्टेशन पर नई कोच मेंटिनेंस फैसिलिटी, सरदिया-वासजालिया नई लाइन, फिर भद्रकाली गेट, पोरबंदर शहर में नया फ्लाईओवर, भावनगर में 2 नए गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल और एक नया पोर्ट बनने वाला है.  वंदे भारत स्लीपर भी जल्द  इसके साथ ही अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे का सेफ्टी पर बहुत फोकस है, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान है. उन्होंने कहा कि Indian Railway का हर तरीके से विकास हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का ऐसा प्रयास है. इसके साथ ही एक और बड़ा अपडेट जारी करते हुए उन्होंने बताया कि बहुत जल्द ही वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper Train) भी आने वाली है.  11 साल में रेलवे में बड़ा परिवर्तन रेल मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय रेलवे में हुए बदलावों के बारे में बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का रेलवे के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है. उनका ध्यान हमेशा इस बात पर रहता है कि रेलवे को कैसे विकसित करें, कैसे नई टेक्नोलॉजी लाएं और इसका कैसे विस्तार करें. अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, बीते 11 वर्षों में रेलवे में बहुत नए काम चालू किए गए हैं और बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है. फिलहाल, 1300 स्टेशनों का नवनिर्माण किया जा रहा है, जो आज की तारीख में दुनिया में स्टेशन के नवनिर्माण का सबसे बड़ा काम है. इसके अलावा 11 वर्षों में 34000 किमी नए रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं, डेली करीब 12 किमी नए ट्रैक बनते हैं, जोकि इतिहास में कभी नहीं हुआ.

SPG की विशेष टीम में शामिल हुईं अदासो कपेसा, अब संभालेंगी देश के पीएम की सुरक्षा

नई दिल्ली हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है, जिसमें उनके सुरक्षा घेरे में पहली बार एक महिला अफसर को देखा गया है। यह महिला अफसर हैं अदासो कपेसा (Adaso Kapesa), जो अब स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की उस टीम का हिस्सा हैं, जो देश के प्रधानमंत्री की सबसे करीबी सुरक्षा करती है। मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर एसपीजी जैसी प्रतिष्ठित इकाई में जगह बनाना, उनके अदम्य साहस और कड़ी मेहनत का प्रतीक है। आइए जानते हैं उनके बारें में विस्तार से। मणिपुर के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर अदासो कपेसा मणिपुर के सेनापति ज़िले के कैबी गांव की रहने वाली हैं। एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी आंखों से ओझल नहीं होने दिया। परिवार और समाज के सहयोग से उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने सपनों को आकार दिया। इससे पहले पिथौरागढ़ में थी तैनात एसपीजी में शामिल होने से पहले अदासो कपेसा सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 55वीं बटालियन में पिथौरागढ़ में इंस्पेक्टर (जनरल ड्यूटी) के पद पर कार्यरत थीं। वहाँ भी उन्होंने अपने कार्य से उच्च स्तर की प्रतिबद्धता और अनुशासन का परिचय दिया, जिससे उनकी पहचान एक सशक्त महिला अधिकारी के रूप में बनी। कैसे हुआ एसपीजी में सिलेक्शन  एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप में चयन भारत के सबसे कठिन चयन प्रोसेस में से एक है। अदासो को डेप्युटेशन पर एसपीजी में भेजा गया, जहाँ उन्होंने अत्यंत कठोर कमांडो प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा टीम में नियुक्त किया गया—एक ऐतिहासिक उपलब्धि। महिलाओं के लिए प्रेरणा अदासो कपेसा अब प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात होने वाली पहली महिला अफसर बन गई हैं। यह उपलब्धि केवल मणिपुर या उनके गांव की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि लगन, साहस और मेहनत से किसी भी ऊँचाई को छूना संभव है।  

US में नई सॉलिसिटर जनरल मथुरा श्रीधरन को बिंदी लगाने पर ट्रोल किया गया, भारतीय समुदाय ने किया समर्थन

वाशिंगटन अमेरिका में बढ़ता गन कल्चर पहले ही चिंता का विषय बना हुआ है और अब वहां नफरती सोच भी पनप रही है. भारतीय मूल की महिला मथुरा श्रीधरन को अमेरिका में सिर्फ इस वजह से ट्रोल किया जा रहा है कि बिंदी लगाती हैं और उन्हें ओहियो स्टेट का सॉलिसिटर जनरल चुना गया है. ओहियो के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने बीती 31 जुलाई को श्रीधरन की नियुक्ति की थी.  ओहियो की सॉलिसिटर जनरल चुनी गईं इसके बाद से मथुरा श्रीधरन के खिलाफ नस्लवादी और अपमानजनक टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है. ट्रोल सवाल कर रहे हैं कि यह पद किसी अमेरिकी को क्यों नहीं मिला. ओहियो के अटॉर्नी योस्ट ने कहा कि मथुरा श्रीधरन 12वीं सॉलिसिटर जनरल के लिए उनकी पसंद हैं. एक्स पर उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह बहुत प्रतिभाशाली हैं और बेतहर ढंग से राज्य की सेवा करेंगी. डेव योस्ट ने लिखा, 'मथुरा बहुत प्रतिभाशाली हैं. उन्होंने पिछले साल SCOTUS में अपनी बहस जीती थी. जिन दोनों SGs (फ्लावर्स और गेसर) के अधीन उन्होंने काम किया था, उन्होंने उनकी सिफ़ारिश की थी. जब मैंने उन्हें पहली बार नियुक्त किया था, तब मैंने उनसे कहा था कि मुझे उनसे बहस करने की ज़रूरत है. उन्हें प्रमोट करने को लेकर उत्साहित हूं. वह ओहायो की अच्छी सेवा करेंगी.' बिंदी लगाने को लेकर ट्रोलिंग  रिपोर्ट के मुताबिक सॉलिसिटर जनरल के पद पर पहुंचने के बावजूद भी श्रीधरन को भारतीय होने और बिंदी लगाने के कारण नस्लवादी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. एक रिप्लाई में ट्रोल ने लिखा, 'आप किसी ऐसे व्यक्ति को क्यों चुनेंगे जो अमेरिकी नहीं है, इतने अहम रोल के लिए?' कुछ लोग उनके बिंदी के लाल रंग पर भी सवाल उठा रहे हैं तो कुछ ट्रोल उनकी योग्यता को लेकर भी बयानबाजी कर रहे हैं. इस ट्रोलिंग के बाद ओहायो के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने ट्रोल्स को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने साफ किया है कि कुछ लोगों को गलतफहमी है कि मथुरा अमेरिकी नहीं हैं, लेकिन वह पूरी तरह से अमेरिकी नागरिक हैं. उनकी शादी भी एक अमेरिकी नागरिक से हुई है. योस्ट ने आगे लिखा, 'अगर उनका नाम या रंग से आपको दिक्कत है, तो समस्या उनसे या उनकी नियुक्ति से नहीं बल्कि आपके सोच में है.  कौन हैं मथुरा श्रीधरन? मथुरा श्रीधरन एक भारतीय मूल के अमेरिकी वकील हैं जो वर्तमान में ओहियो के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में डिप्टी सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें राज्य के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने 12वें सॉलिसिटर जनरल के रूप में प्रमोट किया है. इससे पहले, श्रीधरन दो साल से राज्य के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में ओहियो के दसवें कमांडमेंट सेंटर की डायरेक्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं. फेडरल सोसायटी की वेबसाइट के मुताबिक ओहियो सॉलिसिटर कार्यालय में शामिल होने से पहले, श्रीधरन ने सेकंड सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के जज स्टीवन जे मेनाशी और न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिकी जिला न्यायालय के जज डेबोरा ए बैट्स के लिए क्लर्क के तौर पर काम किया था. श्रीधरन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में साइंस ग्रेजुएट किया है और प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से स्नातक की उपाधि हासिल की और 2008 में इकोनॉमिक्स का भी पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने एमआईटी से इन्हीं विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की. साल 2015 में, श्रीधरन ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई की और 2018 में ग्रेजुएशन की है.

पर्यटकों और स्थानीयों को राहत: जम्मू-कश्मीर में बनेंगी दो नई फोरलेन सड़कें

जम्मू जम्मू-कश्मीर के लोगों और पर्यटकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य में दो नई फोरलेन सड़कों को मंजूरी दे दी है। इन सड़कों के बन जाने से ना सिर्फ सफर आसान और तेज़ होगा, बल्कि पर्यटन और सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। सांबा से उधमपुर तक फोरलेन सड़क पहली परियोजना सांबा से उधमपुर तक 43 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की है। इस पर करीब 7418 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस सड़क के बनने से पठानकोट से उधमपुर का सफर आधा हो जाएगा। फिलहाल इस रास्ते में 4-5 घंटे लगते हैं, लेकिन नई सड़क से यह दूरी महज 2 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे श्रीनगर की ओर जाने वालों को जम्मू की ओर घूमकर जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह सड़क भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जा रही है। कठुआ से डोडा तक फोरलेन सड़क दूसरी बड़ी परियोजना कठुआ से डोडा तक फोरलेन सड़क बनाने की है। यह सड़क कठुआ-बसोहली-बनी-भद्रवाह होते हुए डोडा पहुंचेगी। कुल खर्च लगभग 28,679 करोड़ रुपये आएगा। यह सड़क लखनपुर से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ेगी। अभी यह सड़क राज्य हाईवे के तौर पर काम कर रही है, लेकिन फोरलेन बनने से इसकी हालत और सुविधा बेहतर होगी। भद्रवाह से चंबा तक डबललेन सड़क इसके अलावा, भद्रवाह से हिमाचल प्रदेश के चंबा तक 130 किलोमीटर लंबी डबललेन सड़क भी बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट की लागत 6913 करोड़ रुपये है और इसे एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) बनाएगा। काम जल्द होगा शुरू एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, इन सभी सड़कों की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बन चुकी है और बजट को मंजूरी भी मिल चुकी है। प्रदेश सरकार ने निर्माण में कोई आपत्ति नहीं जताई है, जिससे जल्द ही इन परियोजनाओं पर काम शुरू होने की उम्मीद है। इन सड़कों के बन जाने से जम्मू-कश्मीर में लोगों का सफर तेज़, सुरक्षित और आरामदायक होगा। साथ ही, सेना और सुरक्षा बलों की मूवमेंट भी आसान होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।