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मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: इस बार 2023 की तुलना में भारी नुकसान

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को जिला चम्बा के भरमौर, मणिमहेश और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ कांगड़ा जिले में पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ प्रभावित फतेहपुर और इंदौरा के मंड क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से भरमौर के लिए रवाना हुए, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर वहां उतर नहीं सका। चम्बा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण जन जीवन की हानि वर्ष 2023 की तुलना में कम हुई है, लेकिन इस बार विनाश का पैमाना कहीं अधिक है। सड़क, बिजली, पानी आपूर्ति और संचार सेवाएं 2023 की तुलना में अधिक प्रभावित हुई हैं। राज्य सरकार के समक्ष लोगों के पुनर्वास की एक बड़ी चुनौती है, जिसे हम प्रदेशवासियों के सहयोग से पार करेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित प्रत्येक परिवार के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार विशेष राहत पैकेज प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सरकार आपदा प्रभावितों को हर संभव राहत पहुंचाने और चंबा भरमौर मार्ग में संपर्क सुविधा बाधित होने के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी चम्बा से पैदल ही भरमौर के लिए रवाना हुए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संवेदनशीलता के साथ इस संकट का सामना कर रही है। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सड़क संपर्क बहाल करने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके लिए पोकलेन, जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी तैनात की गई है। जिला प्रशासन को यथाशीघ्र सड़क संपर्क बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि खराब मौसम राहत और पुनर्स्थापन कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है। भरमौर क्षेत्र में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के लिए प्रदेश सरकार ने हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं जो मौसम की अनुकूल परिस्थिति होने पर लोगों को एयरलिफ्ट करेंगे। भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रभावित लोगों की मदद करने के बजाय अफवाहें फैला रहे हैं। भाजपा विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित करने की मांग कर रही है, जबकि 2023 में यही पार्टी विधानसभा सत्र बढ़ाने की मांग कर रही थी। मणिमहेश यात्रा स्थगित करने का निर्णय मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, लेकिन कुछ लोग इस पर भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। हमें अपनी देव यात्राओं और मणिमहेश यात्रा पर पूर्ण आस्था है, लेकिन भाजपा नेताओं का इस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और राहत एवं बचाव कार्यों को गति दे रही है। उन्होंने राज्य में बार-बार हो रही बादल फटने की घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया है। वैश्विक ऊष्मीकरण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती बन रहे हैं और व्यापक तबाही मचा रहे हैं, इसलिए इस समस्या का गहन समाधान तलाशना जरूरी है ताकि अनमोल जीवन को बचाया जा सके। सुक्खू ने चम्बा के करियां स्थित एनएचपीसी भवन में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने फंसे हुए लोगों के लिए भोजन, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए कहा। साथ ही जिला प्रशासन को क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता पर खोलने, विशेषकर चम्बादृभरमौर एनएच-154ए को बहाल करने और बिजली व पेयजल आपूर्ति योजनाओं को अस्थायी तौर पर बहाल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कलसुंई क्षेत्र का दौरा भी किया और श्रद्धालुओं से बातचीत की। कलसुंई से श्रद्धालुओं को नूरपुर और पठानकोट भेजने के लिए बसों की व्यवस्था की गई हैं। शुक्रवार को लगभग 5000 श्रद्धालुओं को कलसुंई से नूरपुर और पठानकोट पहुंचाया गया। जम्मूदृकश्मीर की ओर से आए श्रद्धालुओं को सलूणी से आगे छोड़ने के लिए छोटे वाहनों की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने सलूणी-खुंडिमरल सड़क को शीघ्र बहाल करने के भी निर्देश दिए ताकि किश्तवाड़ और डोडा जिलों से आए श्रद्धालु अपने घर सुरक्षित लौट सकें। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए एचआरटीसी और निजी संचालकों की अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई है।  

यूक्रेन संकट में भारत बना सहारा, डीजल सप्लाई में सबसे आगे

कीव  भारत जुलाई 2025 में यूक्रेन का सबसे बड़ा डीजल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो देश के कुल डीजल आयात का 15.5% हिस्सा प्रदान कर रहा है। यह उपलब्धि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, विशेष रूप से उस समय जब भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका से 50% के भारी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन के तेल बाजार विश्लेषण फर्म नाफ्टोरिनोक के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत से यूक्रेन को प्रतिदिन औसतन 2,700 टन डीजल की सप्लाई की गई, जो इस साल भारत के सबसे अधिक मासिक निर्यात आंकड़ों में से एक है। यह आंकड़ा जुलाई 2024 की तुलना में काफी अधिक है, जब भारत का यूक्रेन के डीजल आयात में हिस्सा केवल 1.9% था। जनवरी से जुलाई 2025 तक, भारत का यूक्रेन के डीजल आपूर्ति में हिस्सा 10.2% तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पांच गुना अधिक है। आपूर्ति के रास्ते और भू-राजनीतिक चुनौतियां भारतीय डीजल मुख्य रूप से रोमानिया से डेन्यूब नदी के माध्यम से टैंकरों द्वारा और तुर्की के मारमारा एरेग्लिसी बंदरगाह में ओपेट टर्मिनल के जरिए यूक्रेन पहुंच रहा है। हालांकि इस चैनल पर आंशिक प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद, भारत ने अन्य यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं जैसे स्लोवाकिया (15%), ग्रीस (13.5%), तुर्की (12.4%), और लिथुआनिया (11.4%) को पीछे छोड़ते हुए जुलाई में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि, भारत का निर्यात वॉल्यूम अभी भी ग्रीस और तुर्की से पीछे है, लेकिन अनुपात के मामले में भारत ने सभी प्रतिस्पर्धियों को मात दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय डीजल का एक हिस्सा रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिका ने भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% टैरिफ लगाया है। अमेरिका का दावा है कि रूसी तेल खरीदकर भारत उसकी यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है। लेकिन हालात यह हैं कि खुद भारत द्वारा सप्लाई किया गया डीजल यूक्रेन की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान कर रहा है। जुलाई में यूक्रेन के डीजल आयात में अन्य देशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्लोवाकिया ने ग्रीस और तुर्की की तुलना में अधिक मात्रा में डीजल की आपूर्ति की, जबकि पोलैंड और लिथुआनिया के ओरलेन ग्रुप ने मिलकर लगभग 20% आयात में योगदान दिया। स्वीडन के प्रीम सुविधाओं से डीजल निर्यात ने भी रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से रिकॉर्ड स्तर हासिल किया, जो जुलाई में कुल आयात का 4% था। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति यह उपलब्धि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को भी दर्शाती है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 6.5% थी। कृषि क्षेत्र में 3.7% की वृद्धि हुई, जो पिछले साल की 1.5% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।  

‘दहेज प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद’, सुप्रीम कोर्ट ने बहू की सास को दी राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर दहेज के लिए बहू के साथ क्रूरता करने के 24 साल पुराने केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दी गई एक सास को बरी कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों द्वारा बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित की बातें हवा से भी अधिक तेज फैलती हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें महिला की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा बरकरार रखी गई थी। आरोपी सास को आईपीसी की धारा 498ए के तहत इस आधार पर दोषी ठहराया गया था कि उसकी मृत बहू ने अपने मायके वालों को दहेज उत्पीड़न होने की बातें बताई थीं।आईपीसी की धारा 498-ए, विवाहित महिला के प्रति उसके पति या उसके ससुरालवालों द्वारा की गई क्रूरता के अपराध से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसन की गवाही को माना अहम सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने इस बात पर गौर किया कि केस में गवाह के तौर पर पेश हुई आरोपी महिला की पड़ोसी ने दावा किया कि बहू से कभी दहेज की मांग नहीं की गई थी। बेंच ने कहा, ‘‘सास के साक्ष्य को निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य पेश नहीं कर सकी थी, क्योंकि यह चारदीवारी के भीतर होता है, जो एक गलत निष्कर्ष है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जब सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बातें हवा से भी तेज फैलती हैं।" जून 2001 में दर्ज कराई गई थी शिकायत मृतक बहू के पिता ने जून 2001 में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी बेटी ससुराल में मृत पाई गई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि मौत के समय उनकी बेटी गर्भवती थी और वह अक्सर मायकेवालों को बताती थी कि उसकी सास दहेज के लिए उसे ताने ताने मारती है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि घटना के वक्त उसका दामाद शहर में नहीं था। मृतका के सास-ससुर और देवर को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, निचली अदालत ने ससुर और देवर को बरी कर दिया, लेकिन यह माना कि सास के उत्पीड़न के कारण बहू ने जान दी थी। दोषी करार दी गई सास ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जिसने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी रूप में दहेज की मांग अपने आप में आईपीसी की धारा 498ए के तहत केस दर्ज करने के लिए काफी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इसी प्रकार, किसी विवाहित महिला को या उसके रिश्तेदार को किसी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से परेशान करना भी 'क्रूरता' की श्रेणी में आएगा।'' बेंच ने आरोपी महिला की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और उसे बरी कर दिया।  

बैंक मैनेजर के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का अनोखा विरोध, कैंटीन में खाया बीफ

तिरुवनंतपुरम केरल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कोच्चि के एक बैंक में मैनेजर ने कैंटीन में बीफ पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में बैंक कर्मचारियों ने बीफ पार्टी का आयोजन कर डाला। जानकारी के मुताबिक बैंक के रीजनल मैनेजर मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी हाल ही में केरल के कोच्चि स्थित बैंक की शाखा में नियुक्ति हुई है। बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) के सदस्यों ने अधिकारियों के कथित मानसिक उत्पीड़न को लेकर मैनेजर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। लेकिन बीफ पर प्रतिबंध लगने के बाद विरोध को नई दिशा मिल गई। नहीं चलने देंगे संघ का एजेंडा प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस के बाहर बीफ और परोटा (एक तरह की ब्रेड) परोसी। इस प्रदर्शन को केरल के कुछ नेताओं ने भी समर्थन दिया। लेफ्ट समर्थित निर्दलीय विधायक केटी जलील इस प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि केरल में संघ परिवार के किसी भी एजेंडा को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘क्या पहना जाए, क्या खाया जाए, क्या सोचा जाए इसे वरिष्ठ लोग तय नहीं करेंगे। हमारी जमीन लाल है। इस जमीन का दिल लाल है। जहां तक लाल झंडा फहरा रहा है, आप बिना किसी डर के फासीवाद के खिलाफ बोल सकते हैं। कोई भी आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगा।’ पसंदीदा खाना सबका अधिकार बैंक फेडरेशन के एक नेता एसएस अनिल ने कहा कि यहां पर एक छोटी कैंटीन चलती है। चुनिंदा दिनों पर बीफ परोसा जाता है। मैनेजर ने कैंटीन स्टाफ से कहा कि अब बीफ नहीं परोसा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बैंक संविधान के अनुसार चलता है। खाना निजी पसंद का विषय है। भारत में हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह क्या खाएगा। हम किसी को बीफ खाने पर बाध्य नहीं कर रहे हैं। यह हमारा विरोध का तरीका है।  

ट्रंप टैरिफ पर बोले राजनाथ सिंह- रिश्तों में स्थायित्व नहीं, हालात तय करते हैं रुख

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि डिफेंस सेक्टर में भारत के लिए आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए देश किसी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर नहीं रह सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल हित स्थायी होते हैं। वैश्विक स्तर पर अभी व्यापार के लिए युद्ध जैसी स्थिति है।' उन्होंने कहा कि विकसित देश तेजी से संरक्षणवादी हो रहे हैं, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार हवाई सुरक्षा प्रणाली सुदर्शन चक्र के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर के सभी अहम स्थलों को पूरी तरह हवाई सुरक्षा मुहैया कराने की योजना बना रही है। एनडीटीवी डिफेंस समिट में अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जो दुश्मन के किसी भी हमले से बचाव करने और उसका जवाब देने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, 'जैसा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा आज की लड़ाइयों में हवाई सुरक्षा की अहमियत बहुत बढ़ गई है। ऐसे में सुदर्शन चक्र मिशन एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा।' एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। यह ऐलान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ओर से भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में सीमा पर भारतीय संपत्तियों को निशाना बनाने के संकेतों के कुछ दिन बाद हुई थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात ने यह साफ कर दिया है कि अब रक्षा क्षेत्र में बाहरी देशों पर निर्भर रहना कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, 'आज की स्थिति में आत्मनिर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।' आर्थिक ढांचे की सुरक्षा पर भी बयान रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज रक्षा क्षेत्र केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उसके भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रमुख आधार भी बन गया है।' उन्होंने कहा कि यह केवल लोगों की सुरक्षा, जमीन की हिफाजत या सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे आर्थिक ढांचे की सुरक्षा और स्थिरता की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को संरक्षणवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का संबंध संरक्षणवाद से नहीं है, बल्कि यह हमारी संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वायत्तता और आत्मविश्वास का मुद्दा है।'  

नोबेल पुरस्कार को लेकर ट्रंप-मोदी के बीच हुई तीखी बातचीत, रिपोर्ट से खुला राज

वॉशिंगटन  अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में खटास आ गई है। टैरिफ तो एक वजह है ही साथ ही, दूसरी वजह ट्रंप का बार-बार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का दावा करना भी माना जा रहा। 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन कॉल हुई थी, जिसमें ट्रंप चाहते थे कि मोदी उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करें। इस पर पीएम मोदी भड़क गए थे। दोनों नेताओं के बीच 35 मिनट तक फोन पर बात हुई थी। अमेरिकी अखबार ने खुलासा किया है कि 17 जून को ट्रंप ने मोदी से फोन कॉल पर फिर भारत-पाकिस्तान सीजफायर का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें सैन्य तनाव खत्म करवाने पर कितना गर्व है। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें (ट्रंप) नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है। इसका मतलब यह था कि पीएम मोदी भी ट्रंप को नॉमिनेट करें। भारतीय नेता (पीएम मोदी) भड़क गए और दो टूक कहा कि भारत-पाक सीजफायर में ट्रंप का कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत-पाक के बीच ही तय हुआ था। पीएम मोदी की टिप्पणियों को ट्रंप ने नजरअंदाज कर दिया, लेकिन सीजफायर पर असहमति और मोदी द्वारा नोबेल पुरस्कार पर बात करने से इनकार करने की वजह से दोनों नेताओं के बीच संबंध में खटास आ गई। जून में हुई इस फोन कॉल के कुछ समय बाद ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का फैसला किया। उन्होंने हवाला दिया कि भारत रूस से लगातार तेल आयात कर रहा है, जिसकी वजह से अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा। भारत पर अमेरिका द्वारा कुल 50 फीसदी टैरिफ वसूला जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप से परिचित लोगों के अनुसार, अब ट्रंप के शरद ऋतु में भारत आने की कोई योजना नहीं है, जबकि पहले उन्होंने पीएम मोदी को बताया था कि वे इस साल के आखिरी में क्वाड शिखर सम्मेलन में भारत आएंगे। 17 जून को हुई बातचीत के बाद से अब तक दोनों नेताओं में कोई भी वार्ता नहीं हुई है, जिससे दोनों के बीच खराब होते संबंधों का पता चलता है। एनवाईटी ने अमेरिका और भारत में एक दर्जन से भी अधिक लोगों के साथ बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। ज्यादातर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त रखी थी। उल्लेखनीय है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी और उनके बीच काफी अच्छे रिश्ते थे। पीएम मोदी के अमेरिका में भव्य कार्यक्रम हुए थे, जबकि ट्रंप जब 2020 में भारत आए तब गुजरात में नमस्ते ट्रंप आयोजित किया गया था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में अब दोनों नेताओं के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं।  

उजड़े घर-परिवार, कटड़ा हादसे में अपनों के शव देखकर फूट-फूटकर रोए परिजन

जम्मू  कटड़ा त्रासदी में सभी 34 मृतकों की पहचान हो चुकी है, जिनमें कई परिवारों के कई सदस्य शामिल थे, शव देख परिजन रो पड़े। श्राइन बोर्ड ने शवों को ले जाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा और मृतकों का सामान परिजनों को सौंपने की व्यवस्था की है। कटड़ा त्रासदी के सभी 34 मृतकों की पहचान हो गई है। शुक्रवार को 19 शवों की पहचान की गई। वीरवार को 15 शवों की पहचान हुई थी। अपनों के शव देखकर परिजन फफक उठे। शव लेने के लिए परिजन सुबह से ही जम्मू जीएमसी पहुंचने लगे थे। हर तरफ बेबसी के आंसू थे। दिल पर पत्थर रख उन्होंने शव देख अपने प्रियजनों को पहचाना।शव लेने के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, दिल्ली के बुराड़ी, गाजियाबाद, पंजाब के अमृतसर से परिजन पहुंचे थे। परिजनों की चीखों से पोस्टमार्टम हाउस का हर कोना कराह उठा। हर आंख नम थी। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने शवों को ले जाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था की है। पत्नी व बेटी के शव को रो पड़े मुज्जफरनगर के इंद्रपालमुज्जफरनगर के गांव रामपुरी निवासी इंद्रपाल पर दुखों का पहाड़ टूटा है। पत्नी रामवीरी व बेटी आकांक्षा के शव को देख वह कराह उठे। इंद्रपाल ने बताया कि क्या पता था कि जीवनसंगिनी व बेटी का साथ इस तरह छूटेगा। कैसे आगे की जिंदगी कटेगी। रुंधे गले से कहा कि जब मौसम खराब था तो प्रशासन को चाहिए था कि यात्रा रोक देता। उन्होंने बताया कि त्रासदी में भाई रविंद्र की पत्नी ममता, भतीजी अंजलि, भाई अजय घायल हुए हैं जबकि अज्य के बेटे दीपेश की भी मौत हो गई है। परिवार के छह शवों देखकर फफक उठे परिजन दिल्ली के बुराड़ी के एक परिवार ने छह लोगों को खोया है। अभिषेक ने बताया कि उनकी भतीजी दीपांशी, बहन पिंकी, भाई राजा व अजय की मौत हो गई है। रिश्तेदारों में तान्या व पुकार निवासी खेड़ा धर्मपुरा (गाजियाबाद) की भी जान गई है। अभिषेक की मां रामकुमारी शवों को देखकर दहाड़ मारकर रो पड़ीं। बेटे अभिषेक व मनोहर ने उनको संभाला।  श्राइन बोर्ड बरामद सामान भी कर रहा सुपुर्दश्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को शवों के पास से बरामद सामान भी सुपुर्द किया। बोर्ड के डिप्टी सीईओ पवन कुमार ने बताया कि बरामद सामान में नगदी व आभूषण शामिल हैं। शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस की निशुल्क व्यवस्था की है। 

ऐतिहासिक चीन यात्रा पर PM मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में रखेंगे भारत का पक्ष

तियानजिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक यात्रा पर चीन पहुंच चुके हैं। वे 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद उनकी पहली चीन यात्रा है और इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दौरा 1 सितंबर तक चलेगा और इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। यात्रा का महत्व है बेहद खास प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन यात्रा पर पहुंचे हैं। 2018 में उन्होंने उनकी आखिरी बार चीन की यात्रा की थी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन, 2020 के गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के बाद तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की नींव रखी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात भी होगी। SCO शिखर सम्मेलन का एजेंडा SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और इसके 10 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। इस साल का शिखर सम्मेलन तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित हो रहा है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा SCO सम्मेलन माना जा रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना है। भारत ने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने कहा कि SCO का उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद, और अलगाववाद से लड़ना है, और भारत चाहता है कि सभी सदस्य देश इस मुद्दे पर एक साझा बयान जारी करें। अमेरिकी टैरिफ का असर यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल और हथियारों की खरीद के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर भी निशाना साधा है, जिनमें भारत और चीन दोनों शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में SCO समिट को वैश्विक मंच पर अमेरिकी नीतियों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत, चीन, और रूस को एकजुट होकर वैश्विक दक्षिण के हितों को बढ़ावा देने का अवसर देगा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन पीएम मोदी का इस सम्मेलन में स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि यह समिट दोस्ती, एकता, और सहयोग की मिसाल बनेगा।  

रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर! 47 ट्रेनें रद्द, टिकट बुकिंग भी बंद

जम्मू  भारतीय रेलवे ने जम्मू की रेल लाइन में समस्या आने के कारण 47 ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, इसके अलावा 4 ट्रेनों के शॉर्ड टर्मनेट किया गया है। रेल यात्रियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए रेलवे ने वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं। बताते चलें कि इसी प्रक्रिया के चलते रेलवे द्वारा अंबाला छावनी स्टेशन पर 300 से ज्यादा यात्रियों को करीब अढ़ाई लाख रुपए वापस किए हैं। ऐसा फैसला जम्मू रेल लाइन में पुल टूटने की वजह से लिया गया है जैसे ही मुरम्मत का काम पूरा हो जाएगा ट्रेनों का संचालन दोबारा से शुरू किया जाएगा।  Cancel हुई ट्रेनों का विवरण इस प्रकार है : ट्रेन नंबर 12425, 14661, 14803, 12413, 12355, 19223, 03309, 19027, 13151, 11077, 12331, 74909, 74907, 22401, 22431, 22439, 26405, 22477, 22461, 12588, 11078, 74906, 74910, 22478, 26406, 12920, 12472, 22440, 14610, 14504, 12446,16032, 22462, 12473, 14691 को पूर्ण तौर पर रद रखा गया। जबकि ट्रेन 12237 को अंबाला कैंट स्टेशन पर और 18309 अमृतसर स्टेशन पर रद रखा गया। जबकि ट्रेन नंबर 12238 बेगमपुरा का संचालन अंबाला 14609, 12445, 20433, 19803, छावनी से और 18102 जम्मूतवी- टाटा नगर का संचालन अमृतसर से किया गया। Jammu की टिकटें नहीं मिल रही  रेल यात्रियों को बता दें कि फिलहाल छावनी रेलवे स्टेशन पर जम्मू व कटरा के लिए टिकट बुकिंग को बंद कर दिया गया है। जल्द ट्रेनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद अंबाला डिवीजन के वरिष्ठ ने बताया है कि जम्मू रेल लाइन में पुल टूटने की वजह से 47 ट्रेनों को पूरी से तरह रद्द हैं। उन्होंने बताया है कि 2 ट्रेनों को अंबाला सहित अमृतसर में रद्द किया गया और दो ट्रेनों को इन्हीं दो रेलवे स्टेशनों से संचालित किया गया है। उन्होंने कहा कि पुल मुरम्मत के बाद ट्रेनें फिर से शुरू की  जाएंगी। 

जापान दौरे के बाद पीएम मोदी चीन रवाना, SCO शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

टोक्यो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को चीन रवाना हो गए। मोदी की यात्रा के दौरान, भारत और जापान ने 13 प्रमुख समझौतों एवं घोषणाओं को अंतिम रूप दिया तथा कई परिवर्तनकारी पहलों की शुरुआत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘जापान की यह यात्रा उन उपयोगी परिणामों के लिए याद रखी जाएगी जिनसे हमारे देश के लोगों को लाभ होगा। मैं (जापान के) प्रधानमंत्री (शिगेरू) इशिबा, जापानी जनता और सरकार को उनकी गर्मजोशी के लिए धन्यवाद देता हूं।'' चीन रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को जापान में मियागी प्रांत के सेंडाई स्थित सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे एक दिन पहले भारत एवं जापान ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने का संकल्प लिया था। मोदी अपने जापानी समकक्ष इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन से सेंडाई पहुंचे। सेंडाई तोक्यो से 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है। प्रधानमंत्री इशिबा ने सेंडाई में मोदी के सम्मान में दोपहर भोज की मेजबानी की जिसमें मियागी प्रांत के गवर्नर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। एक भारतीय विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की सेंडाई स्थित ‘तोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड' (TEL मियागी) की यात्रा ने भारत के विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और इस क्षेत्र में जापान की ताकत के बीच पूरकता को उजागर किया। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी जापानी कंपनी टीईएल मियागी भारत के साथ सहयोग की योजनाओं पर काम कर रही है। मोदी को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में टीईएल की भूमिका, उसकी उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और भारत के साथ उसके जारी एवं नियोजित सहयोग की जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय (NEA) ने एक बयान में कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के नेताओं को सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, निर्माण और परीक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच मौजूद अवसरों की व्यावहारिक समझ मिली।   मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने, जापान-भारत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी पर सहयोग ज्ञापन के साथ-साथ भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता साझेदारी एवं आर्थिक सुरक्षा संवाद के अंतर्गत साझेदारियों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।'' इसमें कहा गया कि मोदी और इशिबा के इस संयंत्र के संयुक्त दौरे ने मजबूत, लचीली और विश्वसनीय सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के भारत और जापान के साझा दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने उनके साथ (संयंत्र का) दौरा करने के लिए जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और इस रणनीतिक क्षेत्र में जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की तत्परता की पुष्टि की।'' मोदी और इशिबा ने शुक्रवार को व्यापक चर्चा की, जिसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। मोदी शुक्रवार को दो दिवसीय यात्रा पर तोक्यो पहुंचे थे। जापान ने शुक्रवार को भारत में एक दशक में 10 हजार अरब येन (करीब 60,000 करोड़ रुपए) के निवेश का लक्ष्य रखा और दोनों पक्षों ने कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें रक्षा संबंधों के लिए एक रूपरेखा और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए 10-वर्षीय खाका शामिल है। यह निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों के कारण पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल के बीच लिया गया। भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के विस्तार की घोषणाएं प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद की गईं। दोनों पक्षों ने 13 प्रमुख समझौतों और दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया तथा कई परिवर्तनकारी पहल की शुरुआत की घोषणा की, जिनमें सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिजों और नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए एक आर्थिक सुरक्षा ढांचा शामिल है।