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किताबों पर बैन से भड़के लेखक और राजनीतिक दल, जम्मू-कश्मीर में बढ़ा विवाद

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में 25 किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का विरोध करते हुए नागरिक समाज, लेखक, और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। प्रशासन का दावा है कि ये किताबें झूठे नैरेटिव और अलगाववादी विचारधाराओं को बढ़ावा देती हैं। इसके बाद पुलिस ने कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में छापेमारी कर इन किताबों को जब्त करना शुरू कर दिया। यह कदम जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चिंताएं पैदा कर रहा है। किताबों पर बैन के बाद विवाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा 25 किताबों पर प्रतिबंध लगाने के बाद राज्य में विवाद गहरा गया है। इस फैसले का विरोध देशभर के नागरिक समाज कार्यकर्ताओं, लेखक समुदाय और विभिन्न राजनीतिक दलों ने किया है। इनका कहना है कि इस कदम से राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़ा हमला हुआ है। प्रतिबंधित पुस्तकों में भारतीय संवैधानिक विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों द्वारा लिखी गई किताबें शामिल हैं। इन किताबों को प्रतिबंधित करने के प्रशासनिक कदम को कुछ लोगों ने ‘तानाशाही’ और ‘लोकतांत्रिक आवाज़ों का गला घोंटना’ करार दिया है। प्रशासन का दावा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि यह कदम विध्वंसकारी और राष्ट्र-विरोधी सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है। पुलिस का दावा है कि ये किताबें भारत की संप्रभुता और एकता के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं। श्रीनगर पुलिस ने छापेमारी कर इन किताबों को जब्त किया। हालांकि, इस कदम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन किताबों पर बैन लगाकर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रहा है। लेखकों और राजनीतिक दलों का विरोध इस प्रतिबंध का विरोध करते हुए प्रमुख लेखक और राजनीतिक दलों ने इसे लोकतंत्र और संस्कृति के खिलाफ करार दिया है। डेविड देवदास, जिनकी पुस्तक ‘इन सर्च ऑफ ए फ्यूचर– द स्टोरी ऑफ कश्मीर’ इस सूची में शामिल है, ने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाना हमारी संस्कृति और लोकतंत्र की अवधारणा के खिलाफ है। उनका कहना था कि यह कदम कश्मीर की वास्तविकता और संघर्ष को दबाने का प्रयास है। राजनीतिक दलों का रुख भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी इस कदम का विरोध किया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कदम भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन का हिस्सा है। किताबों पर प्रतिबंध का इतिहास इतिहास में कई बार किताबों को प्रतिबंधित किया गया है, जिनका उद्देश्य विचारों को दबाना था। लेखक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इस कदम को लोकतंत्र और विचारों की स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं। यह चिंता बढ़ाने वाली बात है कि कैसे एक राज्य सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण लगाने की कोशिश कर रही है। किताबों पर प्रतिबंध कदम सही था? इस किताबों पर प्रतिबंध का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को ऐसा कदम उठाने का अधिकार था? क्या यह कदम सही था या यह संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? राज्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया या फिर यह किसी राजनीतिक कारणवश किया गया? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है। ब्लैक स्पॉट और लोकतंत्र पर असर जब जम्मू-कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदला गया था, तब से लगातार लोगों के अधिकारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस फैसले के बाद फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स जैसे नागरिक अधिकार समूहों ने चिंता व्यक्त की है कि यह कदम लोकतंत्र और स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख का बयान, S-400 से पाकिस्तानी विमानों का सफाया

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल (ACM) एपी सिंह ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि भारत के S-400 मिसाइल सिस्टम ने हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 5 पाकिस्तानी वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों को मार गिराया है. इसके अलावा, एक एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल/इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (AEW&C/ELINT) विमान को भी 300 किलोमीटर की दूरी से नष्ट किया गया. साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि जेकबाबाद में खड़े कुछ F-16 विमानों और भोलारी एयर बेस पर एक AEW&C को विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर नष्ट किया गया. ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की ताकत ACM एपी सिंह के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपनी हवाई रक्षा को मजबूत करने के लिए S-400 का इस्तेमाल किया. यह रूस से खरीदा गया एक उन्नत सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जो 400 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है. इस ऑपरेशन में S-400 ने शानदार प्रदर्शन किया और 5 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक AEW&C/ELINT विमान को 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया गया, जो इस सिस्टम की रेंज और सटीकता को दर्शाता है. AEW&C विमान दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होता है. इसलिए इसका नष्ट होना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका हो सकता है. जेकबाबाद और भोलारी पर हमले IAF प्रमुख ने यह भी दावा किया कि जेकबाबाद एयर बेस पर खड़े कुछ F-16 लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया गया. ये विमान पार्किंग में थे, लेकिन सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना ने उन पर हमला किया. इसी तरह, भोलारी एयर बेस पर एक और AEW&C विमान को निशाना बनाया गया. ये हमले दिखाते हैं कि भारत के पास दुश्मन की गतिविधियों की सटीक जानकारी थी. उसका इस्तेमाल सही समय पर किया गया. ऑपरेशन सिंदूर क्या था? ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई एक छोटी लेकिन तीव्र सैन्य मुठभेड़ का हिस्सा था. इस दौरान भारत ने अपनी हवाई श्रेष्ठता साबित करने के लिए कई कदम उठाए. S-400 और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे हथियारों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह ऑपरेशन भारत की हवाई रक्षा और सटीक हमले की क्षमता को दुनिया के सामने लाया है. S-400 की भूमिका और भविष्य S-400 को भारत ने रूस से 5.4 बिलियन डॉलर के सौदे में खरीदा था. यह सिस्टम भारत की हवाई सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. यह मिसाइल सिस्टम 80 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और निशाना बना सकता है, जो इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता ने भारत को क्षेत्र में हवाई वर्चस्व बनाए रखने में मदद की है. अब चर्चा है कि भारत और S-400 यूनिट्स खरीद सकता है. साथ ही अगली पीढ़ी का S-500 सिस्टम भी लेने की योजना बना रहा है, जो 600 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को मार सकता है. पाकिस्तान पर असर पाकिस्तानी वायु सेना के लिए यह नुकसान गहरा हो सकता है. F-16 और AEW&C जैसे कीमती संसाधनों का नष्ट होना उनकी हवाई ताकत को कमजोर करेगा. खासकर AEW&C विमान, जो उनकी निगरानी और रणनीति का हिस्सा थे, का खोना बड़ा झटका है. इससे पाकिस्तान को अपनी हवाई रक्षा पर फिर से सोचना पड़ सकता है. क्या कहना है? ACM ए पी सिंह का यह बयान भारत की सैन्य ताकत और रणनीति का प्रदर्शन है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन अगर यह सच है, तो यह भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. दूसरी ओर, पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका भी है, क्योंकि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकते हैं.

महाराष्ट्र को मिली लंबी दूरी की वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात, जानें कहां-कहां से गुजरेगी

मुंबई  महाराष्ट्र के लिए खुशखबरी है। राज्य को जल्द ही अपनी 12वीं वंदे भारत एक्सप्रेस मिलने जा रही है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को करेंगे। यह नई सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन अजनी (नागपुर) से पुणे के बीच चलाई जाएगी और इसका संचालन व रखरखाव सेंट्रल रेलवे (CR) जोन द्वारा किया जाएगा। अजनी (नागपुर)–पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे लंबी चलने वाली वंदे भारत ट्रेन होगी, जो कि 881 किमी की दूरी तय करेगी। यह नागपुर से पुणे के बीच की सबसे तेज ट्रेन होगी, जिसकी औसत रफ्तार 73 किमी प्रति घंटा होगी। ट्रेन में 10 इंटरमीडिएट स्टॉप होंगे और यह वार्धा-अकोला-शेगांव-भुसावल-जलगांव-मनमाड़ होते हुए पुंटांबा-डौंड के मार्ग से गुजरेगी। यह नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 26101/26102 के रूप में चलेगी। पुणे से नियमित सेवा 11 अगस्त से और अजनी से 12 अगस्त से शुरू होगी। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी। यह सेवा दोनों शहरों और बीच के कस्बों में काम, व्यापार, पढ़ाई और पर्यटन के लिए यात्रियों को बड़ी सुविधा देगी। व्यापारी, छात्र, कर्मचारी और पर्यटक सभी को तेज़ और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापार और वाणिज्य के नए अवसर भी खुलेंगे। महाराष्ट्र में चल रही वंदे भारत ट्रेनों की सूची 1. नागपुर–सिकंदराबाद 2. हुब्बल्ली–पुणे 3. कोल्हापुर–पुणे 4. जालना–छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस 5. बिलासपुर–नागपुर 6. मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर 7. इंदौर–नागपुर 8. CSMT–साईंनगर शिर्डी 9. CSMT–सोलापुर 10. CSMT–मडगांव 11. मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद 12. अजनी (नागपुर)–पुणे (नई सेवा)

किसानों के लिए PM मोदी का मजबूत रुख, ट्रंप की चुप्पी में छुपी असमंजस की कहानी

नई दिल्ली डराने-धमकाने और धौंस दिखाने वाले दबंग से निपटने के लिए उससे उलझने के बजाय उसके खेल से अलग रहना चाहिए, फिर चाहे वह टकराव के लिए उकसा ही क्यों न रहा हो. इसके बजाय अपने लोगों को यह भरोसा दें कि आप उनके साथ खड़े हैं और दोस्‍तों का साथ दें. उन तक अपनी बात पहुंचाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए ठीक यही रणनीति अपनाते दिख रहे हैं.  डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इसके बाद मोदी ने उन्हें फोन करने के बजाय गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की. चर्चा इस बात पर हुई कि कैसे अमेरिका ने दोनों देशों पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं और इन हालात में उन्हें एकजुट होकर कदम उठाना चाहिए. गुरुवार सुबह एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि वे भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, भले इसके लिए उन्हें भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े. यह ट्रंप की दबाव वाली रणनीति के जवाब में उनका साफ संदेश था. ट्रंप का दबाव, भारत की ड‍िप्‍लोमेसी रूस के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों से नाराज ट्रंप ने बुधवार को अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दिया. इसके बावजूद पीएम मोदी के करीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उसी दिन रूस पहुंचे. गुरुवार को मॉस्को में डोभाल ने एलान किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख लगभग तय हो चुकी हैं. इस महीने के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस जाएंगे. 1 सितंबर को मोदी बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है. दबाव में झुकने को तैयार नहीं… ये घटनाक्रम डोनाल्‍ड ट्रंप को और भड़का सकते हैं. गुरुवार रात राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक रूसी तेल खरीद का मसला हल नहीं हो जाता. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ऐसे दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, खासकर तब जब अमेरिका भारत से कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में असीमित पहुंच की मांग कर रहा है. इन मांगों को ठुकराकर मोदी किसानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे उनके असली मसीहा हैं. साल 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने वे कानून वापस ले लिए थे. साथ ही उनकी सरकार पीएम-किसान निधि योजना के तहत हर साल किसानों को 6,000 रुपये की सहायता और फसल बीमा भी देती है. अब अमेरिका के खिलाफ किसानों के हित में खड़े होकर प्रधानमंत्री उनसे अपना जुड़ाव और मजबूत कर रहे हैं. फोन पर बात…दो टूक जवाब पिछले 100 दिनों में मोदी और ट्रंप की फोन पर केवल दो बार बात हुई है. एक बार 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद और दूसरी बार जून में जब ट्रंप ने कनाडा में मौजूद मोदी को फोन किया. उस समय मोदी ने साफ तौर पर ट्रंप के इस झूठे दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया. संसद में भी मोदी ने कहा था कि किसी भी विश्व नेता ने भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए राजी नहीं किया. फिलहाल पीएम मोदी संयम बरतते हुए अपने मित्र देशों को अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. भारत ने अमेरिकी कदमों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित, अनुचित और अव्यवहारिक बताया है, जो दशकों में वॉशिंगटन के खिलाफ भारत की सबसे कड़ी भाषा है. ट्रंप अचानक ले सकते हैं यू-टर्न भारत जानता है कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं और अचानक यू-टर्न ले सकते हैं, इसलिए इंतजार करना सबसे बेहतर कूटनीतिक विकल्प है. अगर जल्द ही ट्रंप-पुतिन की मुलाकात होती है और रूस-यूक्रेन युद्ध सुलझ जाता है, तो ट्रंप का भारत विरोध भी खत्म हो सकता है. आखिरकार रूस से तेल खरीदने के लिए पहले अमेरिका ने ही भारत को प्रोत्साहित किया था और खुद भी रूस से यूरेनियम जैसी चीजें आयात करता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तभी होगा जब वह राष्ट्रीय हित में होगा और भारतीय किसानों से कोई समझौता नहीं होगा. तब तक मोदी अपने काम में लगे रहेंगे और अपने तरीके से संदेश देते रहेंगे. जैसे कि गुरुवार को संसद में तमिलनाडु के किसानों के एक दल से मुलाकात.

ट्रंप की आलोचना में उतरे पूर्व US मंत्री, मोदी को लेकर कही बड़ी बात

नई दिल्ली अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। कैंपबेल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को गंभीर खतरे में डाल रहा है, जो 21वीं सदी में अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी कि वे ट्रंप के दबाव में नहीं झुकें। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा। कैंपबेल की चेतावनी: भारत रूस से संबंध नहीं तोड़ेगा सीएनबीसी इंटरनेशनल को दिए एक इंटरव्यू में कैंपबेल ने कहा, "21वीं सदी में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता भारत के साथ है, और यह अब खतरे में है। जिस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के बारे में बात की है, उसने भारतीय सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।" उन्होंने भारत को सलाह दी कि वह ट्रंप के दबाव में नहीं झुके। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए।" कैंपबेल ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका भारत पर दबाव डालता है कि वह रूस से संबंध तोड़ दे, तो भारतीय रणनीतिकार ठीक इसके उलट करेंगे। उन्होंने कहा, "भारत को रूस के साथ संबंध तोड़ने के लिए कहना उलटा पड़ सकता है।" अमेरिका में द्विपक्षीय चिंता ट्रंप के इस फैसले ने अमेरिका में भी द्विपक्षीय चिंता को जन्म दिया है। पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है। उन्होंने मुक्त व्यापार की वकालत की और कहा, "अमेरिकी कंपनियां और उपभोक्ता ही टैरिफ की कीमत चुकाते हैं।" इसके अलावा, डेमोक्रेट सीनेटर ग्रेगरी मीक्स ने भी चेतावनी दी कि ट्रंप का यह "टैरिफ तंत्र" भारत-अमेरिका साझेदारी को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत की स्थिति और पीएम मोदी का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हमारे लिए किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मुझे पता है कि इसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत तैयार है।" यह बयान ट्रंप के टैरिफ के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें भारत ने साफ कर दिया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

पाकिस्तान की पुरानी जिद कायम, बोला– कश्मीर पर बाहरी दखल मंजूर

कराची  पाकिस्तान ने  कहा कि वह कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका या किसी भी अन्य देश की मदद का स्वागत करेगा. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में यह बात कही. खान से जब कश्मीर मुद्दे में अमेरिका की रुचि के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हम न केवल अमेरिका से, बल्कि किसी भी ऐसे देश से मदद का स्वागत करते हैं जो स्थिति को स्थिर करने और कश्मीर विवाद को हल करने में मदद कर सके." उन्होंने आगे कहा कि यह विवाद दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के मुद्दों के केंद्र में है. दूसरी ओर, भारत लगातार यह कहता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत में किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी नहीं चाहता है. 1972 के शिमला समझौते में भी दोनों देशों के बीच किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार किया गया था. अमेरिका की रुचि का स्वागत- पाकिस्तान मई में दोनों देशों के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष के बाद से पाकिस्तान और भारत के बीच किसी भी संपर्क के सवाल पर खान ने कहा कि ऐसा कोई संपर्क नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि "हम इस मुद्दे के समाधान के लिए दोनों पक्षों के साथ काम करने में अमेरिका की रुचि का स्वागत करते हैं." खान ने कहा कि पाकिस्तान की समग्र राजनयिक स्थिति जगजाहिर है. उन्होंने कहा, "हम कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहते हैं, लेकिन भारत को अपना मन बनाना होगा. फिलहाल, हमारे दोनों पक्षों के बीच नियमित राजनयिक संपर्क के अलावा कोई बातचीत नहीं हुई है." भारत का स्टैंड क्लियर भारत ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान के साथ केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की वापसी और आतंकवाद के मुद्दे पर ही बातचीत करेगा. पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकवाद के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से फैल रहे आतंकवाद के मुद्दे को कई बार उठाया है. उन्होंने यह भी खारिज किया कि खनिजों को निकालने के लिए अमेरिका के साथ कोई गुप्त समझौता हुआ है. उन्होंने यूक्रेन संघर्ष में पाकिस्तानी नागरिकों की संलिप्तता के आरोपों को भी "बेबुनियाद" बताया और कहा कि यूक्रेन के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान से औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया है.

कुलगाम में खूनी भिड़ंत: 2 वीर जवान शहीद, एक दहशतगर्द ढेर

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम के अखाल इलाके में आतंकियों के साथ मुठभेड़ का आज नौवां दिन है. बीती रात भर इलाके में जोरदार धमाकों और गोलीबारी की आवाजें गूंजती रहीं. इस दौरान सेना के दो जवान शहीद हो गए, जबकि पिछली रात की गोलीबारी में दो अन्य जवान घायल हुए हैं.  अब तक 10 जवान घायल अब तक मुठभेड़ में एक आतंकी का शव बरामद हुआ है, जबकि कुल मिलाकर दो जवान शहीद और दस जवान घायल हो चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, घने जंगल और प्राकृतिक गुफा जैसे ठिकानों का फायदा उठाकर कम से कम तीन या उससे ज्यादा आतंकी अब भी छिपे हुए हैं. यह मुठभेड़ पिछले कई दशकों में सबसे लंबा चला रहा आतंक विरोधी अभियान बन गया है. 1 अगस्त को सुरक्षाबलों ने शुरू किया था ऑपरेशन भारतीय सुरक्षाबलों ने 1 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों की तलाश में 'ऑपरेशन अखल' शुरू किया था. यह कार्रवाई इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू हुई थी. माना जा रहा है कि यहां 2 से 3 आतंकी छिपे हो सकते हैं. भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स के अनुसार, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने दक्षिण कश्मीर के जंगल क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट के आधार पर घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया.

यात्रियों के लिए खुशखबरी: रेलवे ने शुरू किया रिटर्न टिकट पर 20% छूट ऑफर

 नई दिल्ली रेलवे ने यात्रियों के लिए राउंड ट्रिप पैकेज स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत रिटर्न जर्नी पर 20% की छूट मिलेगी. यह योजना फिलहाल एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर लागू की जाएगी, ताकि इसके असर और यात्रियों की प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके. रेलवे ने त्योहारों के सीजन में भीड़ को मैनेज करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए 'राउंड ट्रिप पैकेज' स्कीम की घोषणा की है. इस स्कीम के तहत जो यात्री अपनी रिटर्न जर्नी तय समय सीमा के भीतर बुक करेंगे, उन्हें रिटर्न टिकट के बेस किराए पर 20% की छूट मिलेगी. ‘कनेक्टिंग जर्नी फीचर’ के जरिए बुक होगा टिकट यह योजना 14 अगस्त 2025 से शुरू होगी. इसके तहत पहले यात्रा (Onward Journey) का टिकट 13 अक्टूबर 2025 से 26 अक्टूबर 2025 के बीच की तारीख के लिए बुक करना होगा. इसके बाद वापसी (Return Journey) का टिकट 17 नवंबर 2025 से 1 दिसंबर 2025 के बीच की तारीख के लिए ‘कनेक्टिंग जर्नी फीचर’ के जरिए बुक किया जा सकेगा. बेस किराए पर मिलेगी छूट इस स्कीम में छूट तभी मिलेगी जब दोनों तरफ का टिकट एक ही यात्रियों के नाम से और कन्फर्म हो. रिटर्न टिकट की बुकिंग के लिए एडवांस रिजर्वेशन पीरियड लागू नहीं होगा. छूट केवल रिटर्न जर्नी के बेस किराए पर दी जाएगी. रेलवे ने बताया कि यह योजना फिलहाल एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर लागू की गई है, ताकि त्योहारों के समय ट्रेनों का दोनों तरफ से बेहतर इस्तेमाल हो सके.

135 सीटर सुपर लग्जरी बस लॉन्च, नागपुर में मिलेगी सबसे पहले फ्लाइट लेवल सुविधा

 नई दिल्ली देश के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मोदी सरकार 135 सीटर लग्जरी बस शुरू करेगी। इस बस में फ्लाइट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले इसे महाराष्ट्र के नागपुर में शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे दिल्ली-मुंबई समेत देश के अन्य शहरों में भी चलाया जाएगा। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दी है। नितिन गडकरी ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मेट्रो अहम रोल निभा रही है, लेकिन अब सरकार की तैयारी 135 सीटर बसें चलाने की है। ये फ्लैश चार्जिंग बस होंगी, जो कॉस्ट के मामले में मेट्रो से सस्ती होगी और लग्जरी सुविधाओं से लैस होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन बसों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले महाराष्ट्र के नागपुर में शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे दिल्ली-मुंबई समेत देश के अन्य शहरों में भी चलाया जाएगा। डीजल बस से 30% कम होगा किराया मेट्रो की कॉस्ट प्रति किलोमीटर 450 करोड़ है।र इस बस की कॉस्ट 2 करोड़ है. तो इसका टिकट डीजल बस की तुलना में 30 फीसदी कम होगा। एयरकंडीशन बस होगी, एग्जिक्युटिव चेयर्स होंगी और हवाई जहाज की तरह इसमें खाने-पीने का सामान भी मिलेगा। दिल्ली से जयपुर, दिल्ली से देहरादून और चेन्नई से बेंगलुरु में भी शुरू करेंगे। 360 रोपवे केबल कार बनाने पर काम भी जारी नितिन गडकरी ने पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन में एक और बड़े बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि हम 360 रोपवे केबल कार बनाने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमने हाइड्रोडन प्यूल को लेकर 10 प्रोजेक्ट शुरू किए हैं और इसके तहत टाटा ने एक हाइड्रोजन फ्यूल पर चलने वाला ट्रक भी बनाया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन बनाने से लेकर इससे चलने वाले वाहनों का निर्माण हमारे प्रमुख कामों में शामिल है। इसका सीधा असर आने वाले समय में आपको ट्रासपोर्टेशन के ऊपर देखने को मिलेगा। हर दिन 100 किलोमीटर रोड बनाने का लक्ष्य केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा कि हम ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में 40 हजार करोड़ के नए काम कर रहे हैं। हमने कई टारगेट सामने रखे हैं और इनमें एक खास ये है कि हम रोड बनाने की अपनी कैपेसिटी को बढ़ाने वाले हैं और आगे जाकर 100 किलोमीटर रोड प्रति दिन बनाएंगे। इस साल साल 2.5 लाख करोड़ रुपये के काम किए हैं, 10 लाख करोड़ रुपये के काम अभी करना है। उन्होंने कहा कि अगर 1 रुपये का खर्च रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है, तो उससे 3 रुपये आते हैं। इस साल दिसंबर तक अच्छे रोड बनने के कारण ये 9 फीसदी पर पहुंच सकती है। इससे अच्छी सड़कों से जहां एक्सपोर्ट आसान होगा, तो  इकोनॉमी की ग्रोथ में भी इससे मदद मिलेगी। 

अल-अक्सा के मुफ्ती पर इजरायल का बैन, गाजा संबंधित वक्तव्य बनी वजह

तेल अवीव इजरायल ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन की एंट्री पर ही पाबंदी लगा दी है। वे मस्जिद परिसर में नहीं घुस सकते। गाजा को लेकर उन्होंने एक तकरीर दी थी, जिसमें इजरायल की नीतियों की आलोचना की थी। इसी के चलते इजरायल ने उनके ऊपर पाबंदी लगाई है। शेख हुसैन के वकील का कहना है कि पहले 8 दिन की पाबंदी उन पर लगाई गई थी। इसके बाद मुफ्ती पर पाबंदी की मियाद 6 महीनों के लिए और बढ़ा दी गई है। जुलाई के आखिरी में जुमे के मौके पर नमाज अदा किए जाने के बाद शेख मोहम्मद हुसैन ने एक तकरीर की थी। इसमें उन्होंने इजरायल की उस नीति का विरोध किया था, जिसके तहत गाजा में जरूरी चीजों, भोजन और दवा की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। इसके चलते 20 लाख फिलिस्तीनियों के आगे भुखमरी तक का संकट पैदा हो गया था। अब इसी मामले में Wafa न्यूज एजेंसी के अनुसार इजरायल ने ऐक्शन लिया है। इजरायली अथॉरिटीज ने मुफ्ती को 27 जुलाई को समन जारी किया था। उन्हें कहा गया था कि वे अगले 8 दिनों तक यहां ना आएं। इस दौरान मस्जिद में कुछ काम भी हो सकता है। बुधवार को 8 दिन की लिमिट खत्म हुई तो अब इसे 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। फिलिस्तीन ने इजरायल सरकार के इस फैसले की निंदा की है। फिलिस्तीन का कहना है कि इजरायल की तरफ से लगाया गया यह बैन अल-अक्सा मस्जिद पर नियंत्रण का प्रयास है। फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने कहा कि इस तरह से अल-अक्सा मस्जिद से जुड़ी मजहबी अथॉरिटीज को किनारे लगाने की तैयारी हो रही है, जो इजरायल की नीतियों का विरोध करती रहती है। बता दें अल-अक्सा मस्जिद को लेकर सदियों से विवाद रहा है। इसके एक हिस्से पर इस्लाम के लोगों का दावा है तो वहीं यहूदी भी इसे पवित्र स्थल मानते हैं और एक हिस्से माउंट टेंपल कहते हैं।