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ब्रह्मपुत्र पर चीन का मेगा प्रोजेक्ट, भारत पर क्या होगा असर? सीमा के करीब बन रहा विशाल बांध

नई दिल्ली  चीन हमेशा से भारत के खिलाफ नई-नई साजिश रचते रहता है. एक बार फिर चीन ने बॉर्डर के पास बड़ी साजिश रचने की कोशिश में है. दरअसल तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण चीन ने शुरू कर दिया है. इस निर्माण ने एक बार फिर भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह मेगा प्रोजेक्ट भारतीय सीमा से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर बनाया जा रहा है. ब्रह्मपुत्र जैसी जीवनदायिनी नदी पर चीन का यह प्रोजेक्ट है. चिंता इस बात की है कि यदि चीन भविष्य में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की स्थिति में पहुंचता है तो इसका असर करोड़ों लोगों की जिंदगी, खेती और पर्यावरण पर पड़ सकता है. यही वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सतर्क नजर बनाए हुए है।  तिब्बत से निकलने वाली यारलुंग त्सांगपो नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग और फिर ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है. यह नदी अरुणाचल प्रदेश और असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. लाखों किसान इसकी जलधारा पर निर्भर हैं. ऐसे में नदी के ऊपरी हिस्से में चीन का विशाल बांध बनाना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि भू-राजनीतिक चुनौती भी माना जा रहा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भारत को आशंका है कि बांध के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है, इससे कभी अचानक बाढ़ और कभी पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हाल के सैटेलाइट चित्रों और खुफिया रिपोर्टों ने यह संकेत दिया है कि चीन इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे नई दिल्ली की चिंताएं और बढ़ गई हैं।  सीमा के करीब चीन का मेगा डैम, क्यों बढ़ी चिंता?     चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के निचले हिस्से पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांध के निर्माण की आधिकारिक शुरुआत कर दी है. यह स्थान अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगभग 50 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है. भारत लंबे समय से इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है. भारत का मानना है कि सीमा पार बहने वाली नदियों पर किसी भी बड़े निर्माण से पहले संबंधित देशों के बीच पारदर्शिता और समन्वय जरूरी है. हालांकि चीन ने अब तक अपने प्रोजेक्ट को केवल बिजली उत्पादन से जुड़ा कदम बताया है।      यारलुंग त्सांगपो नदी हिमालयी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है. यह तिब्बत से निकलकर भारत में सियांग के रूप में प्रवेश करती है और आगे असम में ब्रह्मपुत्र बन जाती है. इसी कारण नदी के ऊपरी हिस्से में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को प्रभावित कर सकता है. बड़े पैमाने पर जल संग्रहण और प्रवाह नियंत्रण से नदी की प्राकृतिक व्यवस्था बदल सकती है।      इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि वह ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन से जुड़ी हर गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है. सरकार के अनुसार चीन की हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और बांध निर्माण से जुड़े सभी घटनाक्रमों का अध्ययन किया जा रहा है. इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को भी मजबूत किया जा रहा है।  कृषि और पर्यावरण पर पड़ सकता है असर सबसे बड़ी चिंता नदी के प्रवाह में संभावित बदलाव को लेकर है. यदि किसी कारण से पानी का बहाव कम या अधिक होता है तो अरुणाचल प्रदेश और असम की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. ब्रह्मपुत्र घाटी की लाखों हेक्टेयर खेती इस नदी के पानी पर निर्भर करती है. पानी की कमी होने पर फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा, जबकि अचानक अधिक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट संवेदनशील मानी जा रही है. नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव से जलीय जीवों, वनस्पतियों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र पहले ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में इतने बड़े बांध का प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।  भारत की जवाबी रणनीति क्या है?     भारत केवल चिंता जताने तक सीमित नहीं है. सरकार ने चीन के सामने कई बार सीमा पार नदी प्रोजेक्टओं में पारदर्शिता और डेटा साझा करने की मांग रखी है. भारत चाहता है कि चीन किसी भी बड़े जल प्रोजेक्ट से पहले निचले प्रवाह वाले देशों को जानकारी दे और नियमित रूप से जल स्तर का डेटा उपलब्ध कराए।      इसके अलावा भारत पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्था, नदियों की निगरानी और आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत कर रहा है. आधुनिक तकनीक के जरिए नदी के जलस्तर और प्रवाह की निगरानी बढ़ाई जा रही है. इससे किसी भी संभावित आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।  क्या पानी बन सकता है रणनीतिक हथियार? अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पानी को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. भविष्य में जल संसाधन भू-राजनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं. चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से में बड़े बांधों का निर्माण इसी बहस को और मजबूत करता है. हालांकि चीन बार-बार कहता रहा है कि उसका उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन है. लेकिन भारत सहित कई देशों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ब्रह्मपुत्र नदी का प्राकृतिक प्रवाह और पूर्वोत्तर राज्यों की जल सुरक्षा प्रभावित न हो. यही कारण है कि नई दिल्ली इस प्रोजेक्ट पर लगातार निगरानी रख रही है और कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय बनी हुई है। 

युद्ध पर G7 की बड़ी पहल, एक सुर में बोले सदस्य देश- तुरंत लागू हो युद्धविराम

पेरिस  फ्रांस में G7 समिट के आखिरी दिन सुबह यानी बुधवार को मीटिंग हुई. इस मीटिंग में संयुक्त बयान सभी देशों की तरफ से जारी किया गया. इसमें G7 के देशों ने लेबनान में तुरंत युद्ध विराम की मांग की।  द गार्जियन के मुताबिक, ज्वाइंट स्टेटमेंट में जारी बयान में कहा गया कि हम लेबनान में तुरंत और मजबूत सीजफायर की मांग करते हैं. साथ ही इसके जरिए लेबनान की लीडरशिप की उन कोशिशों का समर्थन करते हैं, जिनका मकसद हिज्बुल्लाह को वेपन फ्री, हथियारों पर सरकार की मॉनोपोली और इंटरनेशनल सिक्योरिटी की गारंटी के साथ अपने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करना है।  इस बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रहे. डील के बाद भी इजरायल ने कल साउथ लेबनान पर हमला किया. इस हमले में चार लोगों की मौत की पुष्टी हुई है. यह हमला ऐसे वक्त हुआ, जब जी7 के लिए प्रमुख देश फ्रांस में इकट्ठा हुए हैं. इससे पहले पीएम मोदी ने युद्ध का स्थायी समाधान करने की मांग की है. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात ने भी इस बैठक में सुर्खियां बटौरी हैं।  कनाडा के पीएम ने डील को बताया गेमचेंजर इधर, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने मिडिल ईस्ट में तनाव खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच डील को गेमचेंजर बताया. फ्रांस समिट में आखिरी दिन बात करते हुए, सीएनएन से उन्होंने कहा कि सिर्फ इस स्थिति के लिए नहीं, बल्कि यह हमें. और बैठक में यही हुआ. हमने यूक्रेन को लेकर अभी नए नजरिए से बात की है।  NATO ने किया ईरान और यूएस डील का स्वागत  इधर, NATO के सचिव जनरल मार्क रुटे ने मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म करने के लिए ईरान और यूएस डील का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि हॉर्मुज को फिर से खोलने की योजना बहुत बड़ा कदम होगी. प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि फ्रांस और यूके के नेतृत्व वाली पहल के जरिए कई सहयोगी देश सपोर्ट में हैं। 

साइबर क्राइम पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, CJI सूर्यकांत बोले- समाज को नुकसान पहुंचाते हैं ऐसे अपराधी

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधी “परजीवी” की तरह होते हैं, जो लोगों की मेहनत की कमाई ठगकर समाज को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. CJI ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और समाज के हित में इन्हें जेल में रखना ही बेहतर है।  साइबर अपराध का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ :  CJI सूर्यकांत उन्होंने यह भी कहा कि साइबर अपराध का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है. आरोपी एक राज्य में ठगी करते हैं और फिर दूसरे राज्यों में जाकर अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं, जिससे इन अपराधों पर नियंत्रण पाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे संगठित अपराध से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने जरूरी हैं।  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों का स्वतः संज्ञान लिया था. यह कदम अंबाला के एक बुजुर्ग दंपत्ति द्वारा लिखे गए पत्र के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई ठगी की घटना का हवाला दिया था. इस घटना में उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी चली गई थी।  इससे पहले शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी CBI को देशभर में डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करने की खुली छूट दी थी और केंद्र व राज्य सरकारों को ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। 

मौसम विभाग की चेतावनी! 21 राज्यों में तेज आंधी-तूफान का अलर्ट, 80KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

नईदिल्ली  कई राज्यों में मानसून ने दस्तक दे दी है और कई राज्यों में मानसून जल्द पहुंचने वाला है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटे को बेहद अहम बताया है. कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी, बिजली गिरने और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और उत्तर भारत में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का एक साथ का असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई देगा. ऐसे में कई जगहों पर खतरनाक अंधड़, पेड़ गिरने, बिजली बाधित होने और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला मौसम बन रहा है. खासकर किसानों, यात्रियों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।  दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. वहीं दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून पहले से सक्रिय है और लगातार बारिश का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 72 घंटे के दौरान कई राज्यों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं. कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है. राहत की बात यह है कि बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से कुछ राहत मिलेगी. लेकिन तेज हवाएं और तूफानी मौसम जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए IMD ने लोगों से मौसम अपडेट पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।      दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय दक्षिण भारत में मजबूत स्थिति में बना हुआ है. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है. दूसरी तरफ पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम बिगड़ने के संकेत हैं. उत्तर भारत में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज आंधी और बारिश की संभावना बढ़ गई है।      मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की रफ्तार और तेज हो सकती है. महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बादल जमकर बरस सकते हैं. ऐसे में देश के बड़े हिस्से में मौसम का असर एक साथ दिखाई देगा।  दिल्ली-NCR में आंधी और बारिश का डबल अटैक दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से बादलों की आवाजाही बनी हुई है. मौसम विभाग के अनुसार 17 जून को राजधानी में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं. नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है लेकिन बारिश के बाद गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।  यूपी में 80KM की रफ्तार से चलेगा अंधड़ उत्तर प्रदेश में मौसम का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य हिस्सों में देखने को मिल सकता है. मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, कानपुर, झांसी, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई जिलों में बारिश और तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. किसानों को फसल और पशुधन की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।  बिहार में बारिश और बिजली गिरने का खतरा बिहार में 17 से 19 जून के बीच मौसम बेहद सक्रिय रहेगा. पटना, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश और आंधी की संभावना है. तेज हवाओं की गति 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है।  झारखंड में गरजेंगे बादल, बरसेंगे पानी रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, दुमका और बोकारो समेत कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है. तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।  राजस्थान में धूलभरी आंधी के साथ बारिश राजस्थान के जयपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर और अलवर समेत कई जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. मरुस्थलीय इलाकों में धूलभरी आंधी भी देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग ने वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।  मध्य प्रदेश में बदलने वाला है मौसम का मिजाज भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सतना और कटनी समेत कई जिलों में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है. मानसून की आगे बढ़ती गतिविधियों के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे. कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।  पंजाब-हरियाणा में तूफानी हवाओं का खतरा     पंजाब के जालंधर, अमृतसर, पटियाला, बठिंडा और गुरदासपुर में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना है. मौसम विभाग ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।      हरियाणा के अंबाला, करनाल, हिसार, रोहतक और पंचकूला समेत कई जिलों में भी मौसम खराब रह सकता है. गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है. किसानों को खेतों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।  पहाड़ों पर बारिश और भूस्खलन का खतरा     उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका भी बनी हुई है।      हिमाचल प्रदेश में शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और किन्नौर में मध्यम बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है. 60 से 70 किलोमीटर प्रति … Read more

रेड रोड बंदी पर बढ़ा विवाद! योग दिवस की तैयारियों के बीच हाईकोर्ट पहुंचा मामला

कलकत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल योग दिवस के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर 7 दिनों तक वाहनों की आवाजाही रोकने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है. एडवोकेट शमीम अहमद ने जस्टिस सौगत भट्टाचार्य (कोर्ट-5) के सामने ये मामला उठाया है।  रेड रोड पर PM मोदी के साथ शामिल होंगे 35 हजार लोग अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार पश्चिम बंगाल देश को एक अनूठी तस्वीर दिखाने की तैयारी में है। 21 जून को हुगली नदी में 500 से अधिक नौकाओं पर हजारों लोग एक साथ योग करेंगे, जबकि कोलकाता के रेड रोड पर राष्ट्रीय स्तर का मुख्य योग कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों के साथ योग करेंगे। पहली बार पश्चिम बंगाल इस आयोजन की मेजबानी कर रहा है और इसे लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग रखी गई है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि अभी भारत दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश है, लेकिन अगले 25-50 वर्षों में यह सबसे ज्यादा बुजुर्गों वाला देश हो सकता है। ऐसे में सभी बुजुर्ग स्वस्थ्य रहें, इसके लिए प्रधानमंत्री ने इस बार का थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” तय किया है। राज्य सरकार और आयुष मंत्रालय की योजना के तहत हुगली नदी में सैकड़ों नौकाओं पर प्रतिभागी सामूहिक रूप से योगासन और प्राणायाम करेंगे। सुरक्षा और समन्वय के लिए नदी पुलिस, आपदा प्रबंधन बल और स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें तैनात रहेंगी।  रेड रोड पर मोदी करेंगे योग 21 जून को मुख्य आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में किया जा रहा है। इस मौके पर खास रूप से  मोदी यहां करीब 35 हजार लोगों के साथ योग करेंगे। योग दिवस कार्यक्रम को देखते हुए कोलकाता के रेड रोड पर सुरक्षा और मंच निर्माण की तैयारियां जोरों पर प्रशासन ने रेड रोड को सात दिनों के लिए आम यातायात के लिए बंद कर दिया है।    योग दिवस कार्यक्रम से पहले रेड रोड एक सप्ताह तक बंद रहेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस प्रमुख सड़क पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने तक, रेड रोड एक सप्ताह के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से यातायात के लिए बंद रहेगी।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क रविवार तक बंद रहेगी और उस पर यातायात की अनुमति "आवश्यकतानुसार" ही दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि रेड रोड पर यह अब तक का सबसे लंबा बंद रहेगा।“यह निर्णय लिया गया है कि 21 जून तक रेड रोड के दोनों किनारों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, यातायात की मात्रा के आधार पर एक किनारा खुला रखा जा सकता है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। “जमीनी अधिकारी आवश्यकतानुसार निर्णय लेंगे।” सोमवार को राजभवन की ओर जाने वाली रेड रोड की एक तरफ को बंद कर दिया गया था और सड़क के बीचोंबीच एक विशाल चबूतरा बनाया गया था। वाहनों को दूसरी तरफ से, लेकिन राजभवन की ओर जाने की अनुमति दी गई थी। रेड रोड को इतने लंबे समय तक यातायात के लिए शायद ही कभी बंद किया गया हो। 23 से 29 मई, 2016 के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के लिए इसे पांच दिनों तक बंद रखा गया था। इसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की परेड और ममता बनर्जी के दुर्गा पूजा उत्सव के लिए भी बंद किया गया था, लेकिन ये प्रतिबंध केवल कुछ घंटों या एक दिन तक ही चले। राज्य की भाजपा सरकार ने इससे पहले रेड रोड पर यातायात सुचारू रखने के महत्व पर जोर दिया था और मई में वहां ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी, बल्कि उसे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में स्थानांतरित कर दिया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तब कहा था कि कोई भी धर्म कानून से ऊपर नहीं है।कई मार्गों से आने वाले वाहनों की भारी संख्या के कारण रेड रोड शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "एजेसी बोस रोड फ्लाईओवर, डीएल खान रोड, विद्यासागर सेतु और हेस्टिंग्स से काफी संख्या में वाहन रेड रोड के राजभवन की ओर जाने वाले हिस्से में प्रवेश करते हैं।" वैकल्पिक मार्ग की योजना तैयार कर ली गई है, लेकिन अगले सप्ताह यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।इस योजना के तहत, रेड रोड होते हुए राजभवन की ओर जाने वाले वाहनों को जेएन आइलैंड से आउट्राम रोड-जवाहरलाल नेहरू रोड चौराहे या डफरिन रोड-मेयो रोड क्रॉसिंग की ओर मोड़ दिया जाएगा। अलीपुर में जीरत ब्रिज से होकर आने वाली डलहौजी और हावड़ा जाने वाली बसें बेलवेडियर रोड और एजेसी बोस रोड के चौराहे से एजेसी बोस रोड, टर्फ व्यू रोड, एजेसी बोस रैंप और सेंट जॉर्ज गेट रोड-स्ट्रैंड रोड की ओर मोड़ दी जाएंगी ताकि वे आगे हावड़ा और डलहौजी की ओर जा सकें। रेड रोड के रास्ते जेके द्वीप की ओर जाने वाले वाहनों को रेड रोड-मेयो रोड चौराहे से मेयो रोड-डफरिन रोड के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।  

No Hug, Only Handshake! मोदी-ट्रंप की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, समझिए भारत का कूटनीतिक मैसेज

नई दिल्ली आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी।  जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई।  पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं. पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया।  कैसे दोनों की हुई मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही।  मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी।  पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले।  इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही।  मोदी के नो हग का मैसेज हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा।  पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं।  मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे।  भारत का उदाहरण देकर समझाया पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन … Read more

बस्तर में नक्सलियों का काल बने सुंदरराज पी को मिली नई जिम्मेदारी, NIA में बने IG

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों को लीड करने वाले सीनियर आईपीएस अफसर सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र जारी कर उनके प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) की जानकारी दी।  गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सुंदरराज पी की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद NIA में की गई है. मंत्रालय ने राज्य सरकार से उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करने को कहा है, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।  बस्तर में लंबे समय तक की है सर्विस 46 वर्षीय सुंदरराज पी को बस्तर क्षेत्र में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईपीएस अधिकारियों में गिना जाता है. उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर संभाग में करीब 12 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. इनमें से लगभग सात वर्ष उन्होंने लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) या पुलिस प्रमुख के रूप में बिताए. बस्तर रेंज में दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिले शामिल हैं, जो लंबे समय तक देश में नक्सल हिंसा के सबसे बड़े केंद्र माने जाते रहे हैं।  कई नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की अपने कार्यकाल के दौरान सुंदरराज पी ने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों की निगरानी की. उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने और कई शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ सफल अभियानों में उनका योगदान अहम रहा।  पिछले कुछ वर्षों में जब भी सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली या किसी अभियान में नुकसान हुआ, तब मीडिया से संवाद करने के लिए सुंदरराज पी ही प्रमुख चेहरा रहे. बस्तर में सुरक्षा स्थिति, अभियान और रणनीति से जुड़ी जानकारी अक्सर उन्हीं के माध्यम से साझा की जाती थी।  तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं सुंदरराज पी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य तय किया था. अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में बस्तर क्षेत्र में मिली सफलताओं में सुंदरराज पी के नेतृत्व और रणनीतिक भूमिका का बड़ा योगदान रहा है. इसी कारण उनकी सेवाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।  पीटीआई से बातचीत में एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने सुंदरराज पी को NIA में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए विशेष सिफारिश की है. अधिकारी के अनुसार, यह फैसला बस्तर में माओवादियों के खिलाफ अभियानों में उनके नेतृत्व, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के प्रति सम्मान स्वरूप लिया गया है।  तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सुंदरराज पी ने कृषि विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया. अब NIA में IG के रूप में उनकी नियुक्ति को नक्सल विरोधी अभियानों में उनके अनुभव और विशेषज्ञता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी नेटवर्क और आतंकी गतिविधियों से निपटने के उनके व्यापक अनुभव का लाभ अब देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी NIA को भी मिलेगा। 

अमेरिका-ईरान समझौते से टूटी नाकाबंदी, होर्मुज जलडमरूमध्य से बहने लगा ईरानी तेल

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है।  4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं।  बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला।  एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी।  मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था।  डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल  गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है।   

रेजिडेंसी परमिट को लेकर स्वीडन का बड़ा फैसला, नए कानून से बढ़ी प्रवासियों की चिंता

 स्टॉकहोम  स्वीडन की संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) का रेजिडेंसी परमिट खराब आचरण के आधार पर रद्द करने का अधिकार मिल गया है. इसमें बकाया कर्ज न चुकाना, बिना स्थानीय अधिकारियों को बताए काम करना या चरमपंथी संगठनों से संबंध जैसे कारण शामिल हैं।  ये कानून न केवल लंबित रेजिडेंसी परमिट आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से दिए जा चुके परमिटों की भी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकेगा. यह कदम दक्षिणपंथी सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सरकार लगातार इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर रही है।  नए कानून की हो रही आलोचना हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह मनमाना कानून है, क्योंकि इसके तहत ऐसे व्यवहार के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है जिसे कानूनी रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है।  स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह 'अच्छे व्यवहार वाला कानून' लोगों के बीच असमंजस पैदा करता है कि उनकी कौन-सी गतिविधि या अभिव्यक्ति उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. संगठन के अनुसार, इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जाता है।  2022 का चुनाव इस वादे के साथ जीतने वाली सरकार का कहना है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते या अपराध करते हैं, उनका देश में स्वागत नहीं है।  कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-कौन से व्यवहार अस्वीकार्य माने जाएंगे. हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि बकाया कर्ज, टैक्स न चुकाना, आपराधिक गतिविधियां और चरमपंथी संगठनों से संबंध ऐसे कारण हो सकते हैं।  इन मामलों की समीक्षा स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी करेगी और उसके फैसलों के खिलाफ माइग्रेशन कोर्ट में अपील की जा सकेगी. मार्च में इस विधेयक को पेश करते समय स्वीडन के आव्रजन मंत्री योहान फोर्शेल ने कहा था, 'जो लोग सही तरीके से रहने की कोशिश नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वो स्वीडन में बने रह सकेंगे।   

रेजिडेंसी परमिट को लेकर स्वीडन का बड़ा फैसला, नए कानून से बढ़ी प्रवासियों की चिंता

 स्टॉकहोम  स्वीडन की संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) का रेजिडेंसी परमिट खराब आचरण के आधार पर रद्द करने का अधिकार मिल गया है. इसमें बकाया कर्ज न चुकाना, बिना स्थानीय अधिकारियों को बताए काम करना या चरमपंथी संगठनों से संबंध जैसे कारण शामिल हैं।  ये कानून न केवल लंबित रेजिडेंसी परमिट आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से दिए जा चुके परमिटों की भी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकेगा. यह कदम दक्षिणपंथी सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सरकार लगातार इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर रही है।  नए कानून की हो रही आलोचना हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह मनमाना कानून है, क्योंकि इसके तहत ऐसे व्यवहार के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है जिसे कानूनी रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है।  स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह 'अच्छे व्यवहार वाला कानून' लोगों के बीच असमंजस पैदा करता है कि उनकी कौन-सी गतिविधि या अभिव्यक्ति उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. संगठन के अनुसार, इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जाता है।  2022 का चुनाव इस वादे के साथ जीतने वाली सरकार का कहना है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते या अपराध करते हैं, उनका देश में स्वागत नहीं है।  कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-कौन से व्यवहार अस्वीकार्य माने जाएंगे. हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि बकाया कर्ज, टैक्स न चुकाना, आपराधिक गतिविधियां और चरमपंथी संगठनों से संबंध ऐसे कारण हो सकते हैं।  इन मामलों की समीक्षा स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी करेगी और उसके फैसलों के खिलाफ माइग्रेशन कोर्ट में अपील की जा सकेगी. मार्च में इस विधेयक को पेश करते समय स्वीडन के आव्रजन मंत्री योहान फोर्शेल ने कहा था, 'जो लोग सही तरीके से रहने की कोशिश नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वो स्वीडन में बने रह सकेंगे।