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24 सितंबर का राशिफल: इन राशियों के लिए खास रहेगा गुरुवार का दिन

मेष आज आपका कॉन्फिडेंस अलग ही लेवल पर रहेगा। नौकरी में तरक्की के मार्ग नजर आएंगे। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। पेशेंस रखें। क्रोध के भाव से बचें। आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। आय में वृद्धि होगी। वृषभ नौकरी में तरक्की के योग बन रहे हैं। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकते हैं। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। मिथुन आय में वृद्धि होगी, परन्तु कार्यभार बढ़ सकता है। ऑफिस में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा पर जाने के योग भी बन रहे हैं। माता की सेहत का ध्यान रखें। कर्क अपनी भावनाओं को वश में रखें। आय वृद्धि के स्रोत विकसित हो सकते हैं। परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। पारिवारिक जीवन में दिक्कतें आएंगी। धार्म‍िक यात्रा पर जाने के योग हैं। सिंह लग्जरी में बेफिजूल खर्च न करें। नौकरी में धन लाभ के योग बन रहे हैं। आत्मविश्वास मे कमी रहेगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। भागदौड़ बढ़ेगी। मन में निराशा एवं असन्तोष रहेगा। पेशेंस रखें। कन्या आज माता के सहयोग से धन की प्राप्‍ति‍ होगी। परिवार से दूरी महसूस हो सकती है। भाई के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयां आ सकती हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिल सकता है। तुला चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। भागदौड़ बढ़ सकती है। उथल-पुथल भरा दिन है, मन अशांत रहेगा। कारोबार में वृद्धि तो होगी, परन्तु मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वृश्चिक वाणी में मधुरता बनी रहेगी। जीवन में थोड़ी-बहुत मुश्किलें आना नॉर्मल है। इसलिए निराश न हों। कॉन्फिडेंस के साथ कमर कसें और अपने ऑफिस टास्क को पूरा करें। खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं। धनु कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ सकता है। आज नेचर के बीच वक्त बिताएं। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। अपनी मेंटल का हेल्थ का खासतौर पर ख्याल रखें। मकर जीवनसाथी के स्वास्थ्‍य को लेकर परेशान हो सकते हैं। लाइफ पार्टनर को खुश रखने के लिए किसी रोमांटिक ट्रिप का प्लान बनाएं। आज का दिन किसी नए कार्य की शुरुआत करने के लिए अच्छा माना जा रहा है। कुंभ कारोबार में तरक्‍की के योग हैं। नौकरी करने वालों का दिन बिजी रहेगा। कारोबार में परिश्रम अधिक रहेगा। हेल्थ का ध्यान रखें। व्यर्थ के गुस्से और वाद-विवाद से बचें। नौकरी में तरक्की के लिए टास्क मिल सकते हैं। मीन मन खुश रहेगा। इंकम के स्रोत बनेंगे। बात-चीत में पेशेंस रखें। क्रोध से बचें। संपत्ति में निवेश करना अच्छा रहेगा। संतान सुख और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। आपका पारिवारिक जीवन मधुर रहेगा।

क्या महिलाएं कर सकती हैं श्राद्ध और पिंडदान? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये नियम

 गरुड़ पुराण में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है. आमतौर पर आपने देखा होगा कि पितरों के निमित्त किए जाने वाले इन कर्मों को परिवार के पुरुष सदस्य ही करते हैं. इसी वजह से लोगों के बीच यह धारणा बन गई है कि महिलाएं श्राद्ध या पिंडदान नहीं कर सकतीं. हालांकि, धर्मग्रंथों में इस विषय को लेकर परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग नियम बताए गए हैं. हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं. मान्यता है कि इन कर्मों के जरिए मृतक के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य व्यक्त किया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि अगर परिवार में कोई पुत्र या पुरुष उत्तराधिकारी मौजूद न हो, तो क्या महिला यह कर्म कर सकती है? गरुड़ पुराण में महिलाओं के श्राद्ध करने को लेकर क्या कहा गया है? गरुड़ पुराण में श्राद्ध कर्म के महत्व और इसे करने वाले व्यक्ति को लेकर चर्चा मिलती है. इसमें एक श्लोक में पुत्र के अभाव में पत्नी, बहू और अन्य निकट संबंधियों द्वारा श्राद्ध किए जाने की बात कही गई है. श्लोक में कहा गया है कि "पुत्राभावे वधूः कुर्यात् आर्याभावे शिष्य एव वा…" इसका भावार्थ यह है कि यदि पुत्र उपलब्ध न हो, तो परिस्थितियों के अनुसार पत्नी या बहू श्राद्ध कर्म कर सकती है. इनके अभाव में परिवार के अन्य सदस्य, जैसे भाई, भतीजा या भांजा भी यह कर्म कर सकते हैं. यदि ऐसे निकट संबंधी भी उपलब्ध न हों, तो शिष्य, मित्र या अन्य योग्य व्यक्ति द्वारा श्राद्ध किए जाने की परंपरा बताई गई है. इससे यह संकेत मिलता है कि श्राद्ध कर्म को केवल पुरुषों तक सीमित मानना पूरी तरह सही नहीं है. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और धर्मशास्त्रीय मतों में श्राद्ध की विधि और अधिकार को लेकर अंतर भी मिलता है. क्या महिलाएं तर्पण और पिंडदान कर सकती हैं? धार्मिक परंपराओं में आमतौर पर पुत्र या निकट पुरुष संबंधी को श्राद्ध और पिंडदान में प्राथमिकता दी जाती है. लेकिन पुत्र के अभाव या विशेष परिस्थितियों में पत्नी, पुत्रवधू या अन्य योग्य परिजन द्वारा यह कर्म किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में महिला को श्राद्ध या पिंडदान करने से पूरी तरह वंचित किया गया है. परिवार की स्थिति, स्थानीय परंपरा और संबंधित धार्मिक मत के अनुसार इसकी विधि अलग हो सकती है. माता सीता ने किया था राजा दशरथ का पिंडदान? महिलाओं द्वारा पिंडदान किए जाने के उदाहरण के तौर पर माता सीता और राजा दशरथ की कथा का भी उल्लेख किया जाता है. गया से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में प्रचलित इस कथा के अनुसार, वनवास के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता गया पहुंचे थे, जहां राजा दशरथ का श्राद्ध किया जाना था. कथा के अनुसार, श्रीराम और लक्ष्मण श्राद्ध की सामग्री लेने के लिए गए. इसी दौरान माता सीता को राजा दशरथ के दर्शन हुए और उन्होंने समय निकलने से पहले पिंडदान करने की इच्छा व्यक्त की. इसके बाद माता सीता ने फल्गु नदी, केतकी के फूल और वटवृक्ष को साक्षी मानकर बालू से पिंड बनाकर राजा दशरथ का पिंडदान किया था. यह कथा मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं और गया की पौराणिक मान्यताओं में प्रचलित है. इसे महिलाओं द्वारा पिंडदान किए जाने के उदाहरण के रूप में बताया जाता है. तो क्या महिलाएं पितरों का श्राद्ध कर सकती हैं? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में परिस्थितियों के अनुसार महिलाओं द्वारा श्राद्ध किए जाने का उल्लेख मिलता है. विशेषकर पुत्र या अन्य निकट पुरुष उत्तराधिकारी के अभाव में पत्नी या पुत्रवधू द्वारा श्राद्ध किए जाने की बात कही गई है. हालांकि, श्राद्ध और पिंडदान की विधि अलग-अलग संप्रदायों और पारिवारिक परंपराओं में भिन्न हो सकती है. इसलिए किसी विशेष परिस्थिति में कर्मकांड करने से पहले परिवार की परंपरा और योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार विधि का पालन करना उचित माना जाता है.

आज का राशिफल 3 सितंबर: इन राशियों के लिए शुभ रहेगा बुधवार, मिलेगा शिव आशीर्वाद

मेष आज के दिन मेष राशि के लोगों को परिवार का भरपूर सपोर्ट मिलेगा। आज जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए। अच्छी न्यूज मिल सकती है। प्रेमी के साथ आपको कुछ वक्त बिताना चाहिए। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है। वृषभ सेहत के मामले में कुछ लोगों को छोटी-मोटी दिक्कतें हो सकती हैं। आपकी स्किल्स और टैलेंट कठिन से कठिन टास्क को भी आसान बना देगी। घरेलू विवादों से दूर रहने से आपकी मानसिक शांति बनी रहेगी। मिथुन लंबे समय से आपको परेशान कर रही कोई समस्या जल्द ही दूर होने वाली है। आज मिथुन राशि वालों को कमाई के अच्छे अवसर मिल सकते हैं, जिनका आपको पूरा लाभ उठाना चाहिए। कर्क आज इन्वेस्ट करने के लिए अच्छा दिन है। बचपन के किसी दोस्त के साथ मुलाकात होने की संभावना है। इससे पुरानी यादें वापस आ सकती है। आपको अपने रिलेशन को रोमांटिक बनाने के लिए काम से कुछ समय निकालने की जरूरत है। सिंह आज सिंह राशि वाले कमाई बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित करके अच्छा प्रॉफिट पा सकेंगे। परिवार आपसे उम्मीद कर सकता है कि आप उन्हें किसी करीबी से मिलवाने ले जाएं। विदेश यात्रा के योग हैं। कन्या आज लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह अच्छा दिन रहेगा। बहुत ज्यादा ऑयली खाना खाने से बचें। अगर आप शाम को अपने पार्टनर के साथ कहीं जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको प्रेमी के मूड का ध्यान रखना होगा। तुला आज अपना बैग पैक करें और रोमांचक यात्रा पर निकल पड़ें। बड़े-बुजुर्गों की सलाह को नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह आपकी ही भलाई के लिए है। आज प्यार के मामले में मुलाकात के लिए टाइम निकालना मुश्किल हो सकता है। वृश्चिक आज बिजनेस करने वालों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। आज खुद को एक्टिव रखने से आप तरोताजा महसूस करेंगे। दुकानदारों को आज अच्छा मुनाफा होने की संभावना है। धनु आज धनु राशि वालों के लिए पैसों के मामले में एक्सपर्ट की सलाह लाभदायक साबित हो सकती है। दोस्तों के साथ ट्रैवल करने का प्लान बन सकता है। इसलिए रोमांचक समय के लिए तैयार रहें। मकर आज मकर राशि वालों को पॉजिटिव सोच अपनाने से सेहत के मामले में फायदा हो सकता है। धन आपके पास किसी डील के रूप में आ सकता है। कुछ रिश्तेदारों से मिलने की संभावना है। कुंभ आज भाग्यशाली लोगों को वह डील मिल सकती है, जिसका आप इंतजार कर रहे थे। देखभाल करने से रोमांटिक रिश्ता मजबूत होगा। हाइड्रेटेड रहें और फलों का सेवन करें। मीन गॉसिप आज अच्छा ऑप्शन नहीं है। परिवार के किसी बुजुर्ग की सलाह आपको घरेलू दिक्कत से उबरने में मदद करेगी। किसी खास चीज की खरीदारी आपको किसी दूसरे शहर भी ले जा सकती है।

ब्रह्म मुहूर्त में क्यों उठना चाहिए? प्रेमानंद महाराज ने बताया साधना का सही समय और नियम

 हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त बहुत ही शुभ समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त को अमृत वेला और अक्षय मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है, जिसे आम भाषा में ईश्वर का समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का बेहद शुभ समय माना जाता है. आमतौर पर यह समय सुबह करीब 4 बजे से 5:30 बजे तक माना जाता है. इस दौरान मंत्र जाप के साथ-साथ कुछ ऐसे उपाय भी किए जा सकते हैं, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ और लाभकारी माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त को लेकर मथुरा वृंदावन के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज ने भी अपनी राय रखी. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'कभी-कभी जब नए उपासकों से बातचीत होती है और वे अपनी दिनचर्या बताते हैं कि हम सुबह 6:30 बजे स्नान करते हैं, तब मन में सवाल आता है कि इतनी देर तक सोने के बाद साधना कैसे होगी? अगर कोई साधक सुबह 6:30 बजे तक सोता रहता है, तो उसकी साधना और ब्रह्मचर्य की दिनचर्या पर सवाल उठना स्वाभाविक है.' आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'शास्त्रों और महापुरुषों ने ब्रह्म मुहूर्त के समय को साधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है. सामान्य रूप से साधक को सुबह 2 से 4 बजे के बीच उठकर भजन, जप और ध्यान करना चाहिए. हालांकि, अगर कोई व्यक्ति पूरी रात भजन में लगा रहा हो और किसी कारण से सुबह देर से सोया हो, तो उसकी स्थिति अलग है. लेकिन बिना किसी विशेष कारण के देर तक सोते रहना साधक की दिनचर्या के लिए उचित नहीं माना जाता है.' केवल सत्संग सुनना पर्याप्त नहीं प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'मान लें आप खूब सत्संग सुनते हैं, प्रवचन सुनते हैं और भगवान की चर्चा करते हैं, लेकिन आपकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आ रहा. तब यह विचार करने की जरूरत है कि आखिर साधना का प्रभाव जीवन में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है. सत्संग सुनना अच्छी बात है, लेकिन उसके साथ अपनी दिनचर्या को भी सुधारना जरूरी है. सुबह समय पर उठना, जप करना, ध्यान लगाना और अपने नियमों का पालन करना साधना का हिस्सा है.' फिर साधना में हमारा अभ्यास इतना कमजोर क्यों हो कि हम सुबह उठकर दोबारा सो जाएं? आज से नई दिनचर्या बनाएं फिर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'अगर आपकी पुरानी दिनचर्या ठीक है तो उसे बनाए रखें. अगर उसमें कमी है तो आज से उसमें सुधार करें. अपनी दिनचर्या को लिखिए और स्वयं को उसके नियमों में बांधिए. केवल रजिस्टर में लिख देने से काम नहीं चलेगा कि आज मैं 2 बजे उठ गया या 3 बजे उठ गया. खुद को इसका साक्षी बनाना होगा और अपने नियमों का ईमानदारी से पालन करना होगा. बिना नियम के प्रेम भी स्थिर नहीं हो सकता. साधना में नियम और नियमितता बहुत महत्वपूर्ण हैं.' ' किसी भी संत के जीवन को देखिए, उनकी दिनचर्या में अनुशासन दिखाई देगा. हमें महापुरुषों की विशेष अवस्थाओं की नकल करने के बजाय उनके दिए हुए उपदेश और साधना के नियमों को अपने जीवन में उतारना चाहिए.' शरीर स्वस्थ है, तभी साधना का अवसर है 'जीवन बहुत अनमोल है. जब तक शरीर स्वस्थ है, तब तक हमारे पास भजन करने, सत्संग सुनने और भगवान का नाम लेने का अवसर है. जब कोई गंभीर बीमारी सामने आती है, तब मनुष्य को अचानक जीवन की वास्तविकता का एहसास होने लगता है. बीमारी की रिपोर्ट हाथ में आते ही अच्छे-अच्छे लोगों का मन विचलित हो जाता है. तब संसार की दूसरी चीजों से मन हटकर केवल बीमारी और मृत्यु का चिंतन करने लगता है. इसलिए जब शरीर स्वस्थ है, तभी समय का सदुपयोग करना चाहिए. यह नहीं सोचना चाहिए कि भजन बाद में कर लेंगे. भजन कोई साधारण वस्तु नहीं है. संतों ने बार-बार समझाया है कि जब तक शरीर स्वस्थ है और बुढ़ापा दूर है, तब तक भगवान के भजन में मन लगाना चाहिए.' भगवान का आश्रय और नाम जप फिर, प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'साधना की दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं- भीतर से भगवान का आश्रय और जिह्वा से भगवान का नाम. जब मनुष्य नियमित रूप से भगवान का नाम जपता है और उनका चिंतन करता है, तो धीरे-धीरे उसके भीतर वैराग्य बढ़ने लगता है. संसार की कई चीजों से अपने आप अरुचि होने लगती है. भजन का प्रभाव केवल बाहरी व्यवहार पर नहीं पड़ता, बल्कि मन और अंतःकरण पर भी पड़ता है. बाहरी कर्मों से बाहरी पवित्रता आती है, जबकि अंतःकरण की पवित्रता चिंतन और भजन से होती है. जब बाहरी और आंतरिक दोनों स्तरों पर साधना होने लगती है, तब धीरे-धीरे स्वभाव में परिवर्तन आता है.' दिनचर्या मन को बांधने का साधन है 'दिनचर्या का अर्थ केवल समय बांटना नहीं है. इसका उद्देश्य मन को अनुशासित करना भी है. किस समय जप करना है, किस समय सत्संग सुनना है, किस समय परिक्रमा करनी है, किस समय मौन रहना है और किस समय भोजन करना है – इन सबका एक निश्चित नियम होना चाहिए.' 'अगर आपने तय किया है कि सुबह एक निश्चित समय पर भजन करेंगे, तो उस समय को लंबे समय तक भजन के लिए सुरक्षित रखें. शुरुआत में अगर केवल 10 मिनट संभव हैं, तो 10 मिनट से शुरू कीजिए, लेकिन उस नियम को लगातार निभाइए. धीरे-धीरे अभ्यास मजबूत होगा और समय भी बढ़ाया जा सकता है.'

84 लाख योनियों का रहस्य: क्या हर आत्मा को सभी योनियों से गुजरना पड़ता है?

 क्या मृत्यु के बाद मनुष्य फिर से जन्म लेता है? अगर हां, तो उसका अगला जन्म किस रूप में होता है? क्या यह सब केवल भाग्य से तय होता है या हमारे कर्म ही अगली यात्रा का रास्ता बनाते हैं? हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथ इन सवालों का बेहद गहरा जवाब देते हैं. पद्म पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है, जबकि गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीव की गति को उसके कर्मों से जोड़ा गया है. कुछ महापापों के संदर्भ में ऐसे पुनर्जन्मों का भी वर्णन मिलता है, जिन्हें सुनकर सामान्य मनुष्य हैरान हो सकता है. लेकिन यहीं से एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है. आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर 84 लाख योनियों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कहीं कहा जाता है कि हर आत्मा को सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ता है. कहीं हर पाप के लिए एक निश्चित पशु योनि बता दी जाती है. लेकिन क्या हमारे मूल शास्त्र वास्तव में यही कहते हैं? या फिर समय के साथ कुछ लोक मान्यताएं भी शास्त्रों के साथ जुड़ती चली गईं? आज जानेंगे कि 84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है, क्या हर आत्मा को इन सभी योनियों से गुजरना पड़ता है, मृत्यु के बाद जीव की गति कैसे निर्धारित होती है, कर्म अगले जन्म को किस तरह प्रभावित करते हैं और क्या मनुष्य जन्म-मृत्यु के इस चक्र से मुक्त हो सकता है. 84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है? पद्म पुराण में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है- जलजा नव लक्षाणि स्थावरा लक्षविंशतिः। कृमयो रुद्रसङ्ख्यकाः पक्षिणां दश लक्षकम्। त्रिंशल्लक्षाणि पशवश्चतुर् लक्षाणि मानुषाः।। इस श्लोक में जीवों की विभिन्न योनियों का वर्गीकरण बताया गया है. इसके अनुसार 9 लाख जलचर, 20 लाख स्थावर यानी पेड़-पौधे और अन्य स्थिर वनस्पतियां, 11 लाख कृमि और कीट, 10 लाख पक्षी, 30 लाख पशु और 4 लाख मानव योनियों का उल्लेख मिलता है. इन सभी को मिलाकर संख्या 84 लाख बताई गई है. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. इस श्लोक का उद्देश्य केवल जीवों की संख्या बताना नहीं माना जाना चाहिए. इसमें सृष्टि में मौजूद जीव-जगत की व्यापकता और विविधता को भी सामने रखा गया है. जल की गहराइयों से लेकर पेड़-पौधों तक, सूक्ष्म जीवों से लेकर पक्षियों और पशुओं तक और फिर मनुष्य तक, सृष्टि के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है. क्या हर आत्मा को 84 लाख योनियों से गुजरना पड़ता है? यहीं 84 लाख योनियों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है. पद्म पुराण में दिए गए इस श्लोक में योनियों का वर्गीकरण मिलता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि प्रत्येक आत्मा को एक-एक करके सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ेगा. इसलिए यह कहना कि हर आत्मा पहले जलचर बनेगी, फिर वनस्पति, फिर कीट, फिर पक्षी और फिर पशु-पक्षी की सभी योनियों से गुजरते हुए मनुष्य बनेगी, इस श्लोक से सीधे सिद्ध नहीं होता है. अगला जन्म किस आधार पर मिलता है? श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए कहते हैं कि जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी तरह आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है. अर्थात शरीर बदलता है, लेकिन आत्मा को नश्वर शरीर के समान नहीं माना गया है. क्या केवल एक कर्म से तय होता है अगला जन्म? यहां एक और जरूरी बात समझनी होगी. अगला जन्म केवल किसी एक कर्म से तय होता है, ऐसा सरल नियम शास्त्रों की पूरी शिक्षा को व्यक्त नहीं करता. कर्मों का संचय, जीवन की प्रवृत्तियां, संस्कार और चेतना जैसे विषय भी इस चर्चा में महत्वपूर्ण माने गए हैं. श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अंतिम समय के स्मरण और भाव की महत्ता बताते हैं. इसी आधार पर यह समझा जाता है कि मनुष्य जीवन भर जिस भाव और चेतना को विकसित करता है, उसका प्रभाव अंतिम समय पर भी पड़ सकता है. यानी पुनर्जन्म का विषय केवल एक अच्छे या बुरे कर्म की गणना नहीं, बल्कि जीव की व्यापक कर्म-यात्रा से जुड़ा हुआ माना गया है. क्या महापापों से मिलती है विशेष योनि? गरुड़ पुराण में कर्मों के फल का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें कुछ गंभीर पापों के लिए कठोर कर्मफल और विभिन्न गतियों का उल्लेख किया गया है. धर्मशास्त्रीय परंपरा में ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी और गुरु-पत्नी के साथ अनुचित संबंध जैसे कर्मों को गंभीर महापापों में गिना गया है. इनके परिणामों के संदर्भ में नरक, कष्ट और पुनर्जन्म जैसी विभिन्न गतियों का वर्णन मिलता है. लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है. हर पाप के लिए एक निश्चित पशु या पक्षी योनि तय है, ऐसा सरल फॉर्मूला पूरे गरुड़ पुराण की शिक्षा को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता है. कई प्रसंगों में पहले कर्म के फलस्वरूप कष्ट या नरक का वर्णन आता है और उसके बाद पुनर्जन्म की बात कही जाती है. इसलिए यह कहना कि 'फलां पाप करने पर निश्चित रूप से फलां पशु बनना पड़ता है', हर मामले में शास्त्र का सीधा निष्कर्ष नहीं माना जा सकता है. मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया? अब सवाल उठता है कि अगर जीव अलग-अलग योनियों में जन्म ले सकता है तो मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? इसका एक बड़ा कारण है – विवेक. भोजन, निद्रा, भय और प्रजनन जैसी मूल प्रवृत्तियां मनुष्य के साथ अन्य जीवों में भी देखी जाती हैं. लेकिन मनुष्य में धर्म-अधर्म का विचार करने, अपने कर्मों का चुनाव करने और अपने जीवन की दिशा बदलने की क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है. मनुष्य ज्ञान प्राप्त कर सकता है. तप कर सकता है. दान और सेवा कर सकता है. भक्ति कर सकता है और अपने भीतर के लोभ, क्रोध और अहंकार को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकता है. इसलिए भागवत परंपरा में मनुष्य जन्म को दुर्लभ अवसर के रूप में देखा गया है. यह केवल जीवन जीने का अवसर नहीं बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी माना गया है. क्या मोक्ष से पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो सकता है? सनातन धर्म का अंतिम लक्ष्य केवल अच्छा पुनर्जन्म … Read more

Vastu Tips: रोटी की लोई बनाते समय न करें ये गलतियां, घर में बढ़ सकती है अशांति

Vastu Tips: हिंदू परंपराओं में रसोई घर को केवल खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि देवी अन्नपूर्णा का पावन स्थान भी माना गया है. रसोई में किया जाने वाला हर छोटा-बड़ा काम, चाहे वह बर्तन रखने का तरीका हो या आटे की लोई बनाना, हमारे घर के वास्तु पर गहरा असर डालता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम रोटी बनाने के लिए आटे की लोई बनाते हैं, तो उसका सही आकार, तरीका और शुद्धता घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. वहीं, बेढंग या गलत तरीके से बनाई गई लोई न केवल स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, बल्कि घर में अकारण कलह और वास्तु दोष का कारण भी बन सकती है. आइए जानते हैं कि रोटी की लोई बनाने से जुड़ा वास्तु विज्ञान क्या कहता है और कैसे एक गोल लोई आपके घर में सुख, शांति और मां लक्ष्मी की कृपा ला सकती है. टेढ़ी-मेढ़ी लोई और रोटी का वास्तु पर असर वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में टेढ़ी-मेढ़ी, कटी-फटी या अनियमित आकार की लोई बनाकर रोटी सेकना वास्तु में शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि बेढंग आकार की रोटियां घर के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य और विचारों में असंतुलन पैदा करती हैं, जिससे परिजनों के बीच अकारण मतभेद बढ़ते हैं. गोल लोई और सुंदर रोटी का महत्व गोल लोई बनाकर पूर्ण रूप से गोल रोटी बेलना सकारात्मकता, संतुलन और पूर्णता का प्रतीक है. गोल रोटी बनाने से घर में शांति और अन्नपूर्णा देवी की कृपा बनी रहती है. बासी या फ्रिज में रखे आटे की लोई बनाने की मनाही वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में बचे हुए आटे की लोई बनाकर रोटी बनाने को सख्त मना किया गया है. ऐसा माना जाता है कि फ्रिज में रखा बासी आटा 'पिंड' के समान हो जाता है. ऐसे आटे पर राहु और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है. स्वास्थ्य और समृद्धि पर प्रभाव बासी आटे की लोई बनाकर पकाई गई रोटी खाने से घर में बीमारियां पनपती हैं और आर्थिक प्रगति रुक जाती है. हमेशा ताजा आटा गूंधकर ही लोई बनाएं. लोई में अंगुलियों के निशान न छोड़ें जब भी आप आटे की लोई बनाएं, तो उस पर उंगलियों के गहरे निशान दबाकर न छोड़ें (जैसा कि श्राद्ध या पिंड दान की लोई में किया जाता है). लोई को हमेशा दोनों हथेलियों के बीच घुमाकर चिकना और गोल रूप दें. रसोई और रोटी से जुड़े 4 अचूक वास्तु नियम – आटा गूंधने के बाद पहली लोई से बनने वाली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें. इसमें थोड़ा सा गुड़ या घी रखकर देना घर में रिद्धि-सिद्धि और धन-धान्य बढ़ाता है. – भोजन बनाते समय आखिरी लोई की रोटी कुत्ते या अन्य मूक पशु-पक्षियों के लिए निकालें. इससे राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं. – रोटी बनाते समय आपका मुख हमेशा पूर्व दिशा (East) की ओर होना चाहिए. इससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है और पाचन क्रिया अच्छी रहती है. – तवे पर रोटी बनाने से पहले उस पर चुटकी भर नमक छिड़कना या थोड़ा सा दूध छिड़कना बेहद शुभ माना जाता है. कभी भी गर्म तवे पर सीधे पानी न छिड़कें, इससे उत्पन्न छन-छन की आवाज वास्तु दोष पैदा करती है.

पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और जरूरी नियम

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में पूर्वजों (पितरों) के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और परिजनों द्वारा किए गए तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म से तृप्त होकर सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद पूर्णिमा से हो रही है, जिसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा. पितृ पक्ष 2026 के श्राद्ध की संपूर्ण तिथि सूची जिस तिथि को पूर्वज का गोलोकवास (निधन) हुआ होता है, पितृ पक्ष में उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है. यदि किसी की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध 'सर्वपितृ अमावस्या' के दिन करने का विधान है. महत्वपूर्ण तिथियां पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर 2026, शनिवार प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर 2026, रविवार द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर 2026, सोमवार तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर 2026, मंगलवार चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर 2026, बुधवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2026, रविवार दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2026, सोमवार एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर 2026, शनिवार श्राद्ध कर्म के मुख्य और आवश्यक नियम -श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय में ही करना चाहिए. प्रातः काल या संध्या के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है. – श्राद्ध का भोजन तैयार करने के बाद सबसे पहले पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) के लिए भोजन का अंश निकालें. कौए को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए उन्हें ग्रास देना अनिवार्य है. – श्राद्ध पूजा में काले तिल, जौ, कुशा (घास) और जल का उपयोग अनिवार्य रूप से करें. काले तिल से तर्पण करने पर पितर प्रसन्न होते हैं. – श्राद्ध के दिन किसी सात्विक ब्राह्मण को घर बुलाकर श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, तिल या दक्षिणा देकर विदा करें. कैसे करें श्राद्ध? पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए सही विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. दोपहर के कुतूप मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, गंगाजल और काले तिल से तर्पण करने के बाद सात्विक भोजन से पंचबलि (गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटी) का अंश निकालना अनिवार्य होता है. इसके पश्चात किसी योग्य और सात्विक ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा दी जाती है, जिससे प्रसन्न होकर पितर अपने वंशज को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

पितृ पक्ष में बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन 4 राशियों पर होगी धन की बारिश

पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होने जा रही है, जो कि 10 अक्टूबर को समाप्त होंगे. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो, इस बार पितृ पक्ष बहुत ही शुभ माना जा रहा है. पितृ पक्ष की शुरुआत से ठीक पहले शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां बुद्धि के कारक बुध ग्रह पहले से ही विराजमान रहेंगे. तुला राशि में शुक्र और बुध का यह महासंगम लक्ष्मी नारायण राजयोग बनाएगा. वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सुख-सुविधा, वैभव, सौंदर्य व आकर्षण का कारक माना जाता है, जबकि बुध को बुद्धि, व्यापार, तर्क और संवाद का कारक माना गया है. जब भी इन दोनों शुभ ग्रहों की किसी राशि में युति (संयोग) होती है, तो अत्यंत शुभ और फलदायी 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' का निर्माण होता है. यह राजयोग पितृ पक्ष के दौरान कई राशियों के जीवन से आर्थिक तंगी दूर कर सुख-समृद्धि लाएगा. मुख्य रूप से 4 ऐसी राशियां हैं, जिनके लिए यह शुभ योग अपार धन-लाभ और सफलता के नए अवसर लेकर आ रहा है. मिथुन राशि (Mithun Rashi) शुभ प्रभाव: आपकी राशि से पांचवें (ज्ञान, संतान व आकस्मिक धन-लाभ) भाव में यह महासंयोग बनने जा रहा है. मिलेगा यह फायदा: शेयर बाजार, ट्रेडिंग या किसी पुराने निवेश से उम्मीद से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति (प्रमोशन) और मनचाहे इंक्रीमेंट का शुभ समाचार मिल सकता है. कला, मीडिया, लेखन और डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के बड़े अवसर मिलेंगे. तुला राशि (Tula Rashi) शुभ प्रभाव: यह राजयोग आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में बनने जा रहा है, जिससे शुक्र और बुध दोनों आपको पूरा बल प्रदान करेंगे. मिलेगा यह फायदा: आपके आकर्षण, व्यक्तित्व और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त सुधार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, तो अचानक धन लाभ के मजबूत योग बनेंगे. नया व्यापार शुरू करने या बिजनेस डील फाइनल करने के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा. मकर राशि (Makar Rashi) शुभ प्रभाव: आपके दसवें (कर्म, करियर व बिजनेस) भाव में शुक्र और बुध की युति होगी. मिलेगा यह फायदा: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की तारीफ होगी और बड़े अधिकारियों का पूरा समर्थन मिलेगा. यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो कोई बड़ा पैकेज ऑफर हो सकता है. पैतृक संपत्ति या कारोबार से जुड़े किसी पुराने विवाद का हल निकलेगा, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी. कुंभ राशि (Kumbh Rashi) शुभ प्रभाव: आपकी राशि से नौवें (भाग्य व धार्मिक यात्रा) भाव में लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है. मिलेगा यह फायदा: आपके सोए हुए भाग्य का सितारा चमक उठेगा. रुके हुए काम बिना किसी अड़चन के पूरे होने लगेंगे. धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे. पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा. विदेश से जुड़े व्यापार या विदेशी कंपनियों में काम करने वाले जातकों को भारी आर्थिक लाभ मिलेगा. लक्ष्मी नारायण राजयोग की शुभता बढ़ाने के उपाय – शुक्रवार के दिन घर के मंदिर में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें तथा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें. – किसी मंदिर में या जरूरतमंद को चावल, मिश्री, दूध या सफेद वस्त्र दान करें. – रोजाना ताजी रोटी पर थोड़ा सा गुड़ या घी लगाकर गाय को खिलाएं.

राहु-केतु की चाल बदलेगी किस्मत! 76 दिनों तक इन 6 राशियों पर बरसेगा धन

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह और 'मायावी ग्रह' माना जाता है. नवग्रहों में ये दोनों ही ऐसे ग्रह हैं जो हमेशा उल्टी चाल यानी वक्री चलते हैं. राहु और केतु का गोचर काफी धीमी गति से होता है, इसलिए जब भी ये अपना नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका असर सभी 12 राशियों के जीवन में दीर्घकालिक और गहरा दिखाई देता है. वर्तमान में राहु देव मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान हैं, जबकि केतु देव स्वयं के नक्षत्र मघा में गोचर कर रहे हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु और केतु की यह चाल आने वाले 76 दिनों तक कई राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होने वाली है. ज्योतिषविद् नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इन दोनों छाया ग्रहों की चाल से मुख्य रूप से 6 राशियों का बैंक बैलेंस बढ़ेगा और उन्हें जबरदस्त आर्थिक मुनाफा मिलेगा. आइए जानते हैं कि राहु और केतु के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों की किस्मत चमकने वाली है: मघा नक्षत्र में केतु का गोचर: इन 4 राशियों को मिलेगा भारी लाभ केतु ग्रह 5 दिसंबर 2026 तक अपने ही स्वामित्व वाले मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे. केतु के इस नक्षत्र गोचर से निम्नलिखित 4 राशियों के जीवन में तरक्की और धन-समृद्धि के योग बन रहे हैं. मेष राशि (Aries): आपके साहस और निर्णय लेने की क्षमता में निखार आएगा. निवेश से उम्मीद से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है. सिंह राशि (Leo): आपके मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी. लंबे समय से अटकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी और करियर में नए अवसर मिलेंगे. वृश्चिक राशि (Scorpio): आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत होगी. बिजनेस में बड़े सौदे फाइनल हो सकते हैं और अचानक गुप्त धन-लाभ के योग बनेंगे. कुंभ राशि (Aquarius): साझेदारी में किए गए कार्यों से बेहतरीन मुनाफा मिलेगा. पारिवारिक जीवन में चल रही परेशानियां कम होंगी और आय के नए स्रोत बनेंगे. धनिष्ठा नक्षत्र में राहु का गोचर: इन 3 राशियों की होगी बल्ले-बल्ले राहु देव मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में 2 अगस्त 2026 से प्रवेश कर चुके हैं और वे वर्ष 2027 तक इसी नक्षत्र में संचार करेंगे. राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से 3 राशियों को विशेष फायदा होगा. मेष राशि (Aries): (राहु और केतु दोनों के प्रभाव से) मेष जातकों को दोहरे लाभ के योग हैं. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है. कन्या राशि (Virgo): कोर्ट-कचहरी या किसी पुराने विवाद से राहत मिलेगी. व्यापार में प्रतिस्पर्धियों पर आपकी बढ़त बनी रहेगी और मुनाफा बढ़ेगा. धनु राशि (Sagittarius): विदेश यात्रा या विदेशी स्रोतों से धन लाभ के योग बनेंगे. आपकी आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी और समाज में प्रभाव मजबूत होगा. राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से बचाव के अचूक उपाय राहु की शांति के लिए देवी दुर्गा की आराधना करें और केतु के शुभ फल पाने के लिए भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें. – जरूरतमंद और असहाय लोगों को भोजन, जल, वस्त्र या अपनी क्षमतानुसार धन का दान करें. – तामसिक भोजन और शराब-सिगरेट जैसी आदतों से दूरी बनाएं. – किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें. अपने अंदर अहंकार (Ego) और अत्यधिक क्रोध पर नियंत्रण रखें.

मंगलवार का राशिफल: इन राशियों पर शिवजी की रहेगी कृपा, कुछ रहें सावधान

मेष आज का दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। दिन के बाद नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। वृषभ आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है और नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। मिथुन आज व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है। कर्क हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें और सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। कारोबार फलेगा-फूलेगा, इसलिए अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। सिंह आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। आपके काम की सराहना होगी और तारीफ भी मिलेगी। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। कन्या आज आज करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे और आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। तुला करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। व्यवसाय में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है। वृश्चिक आज आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं और तनाव का कारण बन सकते हैं। धनु व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। जंक फूड्स से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। मकर आज कुछ नुकसान होने की आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। वहीं, खुद और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। कुंभ आज फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं। मीन आज तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। पार्टनरशिप करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। शाम में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है।