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निर्जला एकादशी 2026 कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

साल की सबसे बड़ी एकादशी यानी निर्जला एकादशी आने वाली है. जिसकी तिथि को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है. कोई कह रहा है कि यह एकादशी 25 जून को आएगी और कुछ लोगों के मुताबिक यह 26 जून को आएगी. सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और फलदायी व्रत कहा जाता है. यह व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन बिना जल के उपवास रखने से सालभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है. धार्मिक कथा के अनुसार, पांडवों में से भीम उपवास नहीं रख पाते थे. तब उन्होंने महर्षि व्यास के कहने पर केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखा. लेकिन बिना भोजन और पानी के वे मूर्छित हो गए थे. इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. निर्जला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर 25 जून को रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के मुताबिक, 25 जून को ही निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. निर्जला एकादशी का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा.   क्यों खास है निर्जला एकादशी? निर्जला एकादशी को सबसे कठोर तपस्या माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे 24 घंटे तक जल का भी त्याग करना होता है, खासकर गर्मियों के मौसम में. शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से पापों का क्षय होता है. शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलता है. जीवन में सुख और समृद्धि आती है. मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं कैसे करें निर्जला एकादशी का व्रत? सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करें. पीले वस्त्र धारण करें. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. विष्णु मंत्रों का जप करें. इस दिन जरूर करें ये काम – प्यासे को जल पिलाना – पेड़-पौधों को पानी देना – पशु-पक्षियों को जल देना – अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और छाता दान करना

धृतराष्ट्र के 7 पाप, जिन्होंने महाभारत में तय किया कुरुक्षेत्र युद्ध का रास्ता

 महाभारत एक ऐसा महान ग्रंथ है जिसमें अनेक पात्र और उनके जटिल जीवन प्रसंगों का वर्णन मिलता है. इन सभी पात्रों में एक नाम है धृतराष्ट्र. जी हां, वही धृतराष्ट्र, जिनका जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों ही रहस्यों से भरे हुए हैं. कहा जाता है कि धृतराष्ट्र ने अपने जीवन में कई ऐसे कर्म किए, जिन्हें पाप माना जाता है. इन्हीं पापों के कारण अंततः उनकी मृत्यु अग्नि में जलकर हुई थी. आज हम उन 7 प्रमुख पापों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने धृतराष्ट्र के पतन की नींव रखी. महाभारत में धृतराष्ट्र को भी कुरुक्षेत्र युद्ध का जिम्मेदार माना जाता है. क्योंकि वे चाहते तो इस युद्ध को रोक सकते थे, लेकिन पुत्र मोह में उन्होंने अपने ही वंश का नाश कर दिया था. यह कहना गलत नहीं होगा कि वे केवल आंखों से ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से भी अंधे हो चुके थे. आइए जानते हैं उनके उन 7 पापों के बारे में. गांधारी के साथ धोखा धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से हुआ. विवाह से पहले ज्योतिषियों ने चेतावनी दी थी कि गांधारी का पहला विवाह अशुभ होगा. इसलिए उनका पहले एक बकरे से विवाह कराया गया और बाद में उसे बलि देकर धृतराष्ट्र से विवाह कर दिया गया. यह एक प्रकार का छल ही था. गांधारी के परिवार को कारागार में डालना जब धृतराष्ट्र को यह बात पता चली, तो उन्होंने क्रोधित होकर गांधारी के पिता राजा सुबल और उनके पूरे परिवार को जेल में डाल दिया. उन्हें भोजन भी बहुत कम दिया जाता था, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएं. इसी में शकुनि बच गए थे. पुत्र मोह में युद्ध को बढ़ावा देना धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन के अन्याय को कभी नहीं रोका था. वे चाहते तो महाभारत का युद्ध टल सकता था, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का साथ दिया और पूरे वंश का विनाश होने दिया. द्रौपदी चीरहरण पर मौन रहना जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब धृतराष्ट्र चुप रहे. यह महाभारत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक थी, जिसने महाभारत के युद्ध की आग को भड़काया था. अधर्म का साथ देना धृतराष्ट्र जानते थे कि दुर्योधन और शकुनि अधर्म कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने उनका साथ दिया. उन्होंने विदुर और संजय जैसे ज्ञानी लोगों की सलाह को भी अनसुना कर दिया. भीम को मारने का प्रयास महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव उनसे मिलने आए, तो धृतराष्ट्र ने भीम को मारने की योजना बनाई. लेकिन श्रीकृष्ण ने उनकी चाल समझ ली और भीम की जगह लोहे की मूर्ति आगे कर दी, जिसे धृतराष्ट्र ने तोड़ दिया. पूर्व जन्म का पाप कहा जाता है कि पिछले जन्म में धृतराष्ट्र एक क्रूर राजा थे, जिन्होंने एक हंस की आंखें निकलवा दी थीं. मरते समय हंस ने उन्हें श्राप दिया था, जिसके कारण अगले जन्म में वे अंधे पैदा हुए और उनके पुत्रों का भी विनाश हुआ. मृत्यु का रहस्य माना जाता है कि महाभारत युद्ध के 15 साल बाद धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और संजय वन में चले गए थे. एक दिन जंगल में आग लग गई थी. धृतराष्ट्र ने वहां से जाने से मना कर दिया था और गांधारी व कुंती भी उनके साथ रुक गईं. अंततः तीनों अग्नि में जलकर मृत्यु को प्राप्त हुए थे, जबकि संजय हिमालय की ओर चले गए थे. बाद में नारद मुनि ने युधिष्ठिर को यह समाचार दिया, और उन्होंने सभी की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक कार्य किए थे.

वास्तु शास्त्र: दिशाओं और तरंगों से जानें घर शुभ है या अशुभ

 वास्तु शास्त्र के मुताबिक, दुनिया की हर चीज के अंदर तरंगें पाई जाती हैं. मकान, जमीन, यहां तक कि कपड़ों में भी तरंगें होती हैं. ये तरंगें शुभता भी पैदा करती हैं और अशुभता भी. अगर अशुभता ज्यादा हो जाए तो मकान में रहने पर समस्या होती है. ऐसे मकानों में कुंडली के शुभ योग भी काम नहीं करते. ये अशुभता कुंडली के माध्यम से भी जानी जा सकती है. दिशाओं से जानें मकान शुभ है या अशुभ वास्तु शास्त्र के मुताबिक, पूर्व और उत्तर दिशा के मकान सबसे ज्यादा शुभ माने जाते हैं. वहीं, पश्चिम और दक्षिण दिशा के मकान शुभ नहीं माने जाते हैं. अब ये जानते हैं कि किस दिशा के मकान में क्या सावधानियां रखें. – अगर पूर्व दिशा का मकान है तो पूर्ण रूप से सात्विक रहें. – पश्चिम दिशा का मकान है तो घर में लकड़ी का प्रयोग कम करें. – उत्तर दिशा का मकान है तो आग और बिजली के उपकरणों पर विशेष ध्यान दें. – दक्षिण दिशा के मकान में सीलन और गंदगी का विशेष ध्यान रखें. घर में सूर्य का प्रकाश ना आता हो वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्य का प्रकाश घर में ना आने पर अकारण बीमारियां होती हैं. बच्चों के भविष्य, स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना ज्यादा होती है. व्यक्ति नशे और अवसाद का शिकार हो जाता है. साथ ही, उसको भय और नकारात्मकता का अनुभव होता है. – घर में शीशे की सहायता से सूर्य के प्रकाश की व्यवस्था करें. – रोज सुबह घर में 3 बार शंख बजाएं. – रोज सुबह गायत्री मंत्र का 108 बार उच्चारण करें. – घर में लोहे का सामान कम रखें. अगर इन उपायों से भी लाभ नहीं होता है तो जल्द से जल्द घर बदल लें. घर के रंगों से कैसे आती है अशुभता? वास्तु शास्त्र में घर में गलत रंगों का प्रयोग भी किस्मत और भाग्य को खराब कर सकता है. दरअसल, रंगों का संतुलन ठीक ना हो तो व्यक्ति की सोच खराब हो जाती है. गाढ़े रंगों का प्रयोग जीवन में संघर्ष बढ़ा देता है. भूरा, लाल और गाढ़ा हरा रंग नौकरी में समस्याएं बढ़ाता है. घर की अशुभता कैसे दूर करें? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, गलत और बुरे कामों से तौबा करें. घर के लोग आपस में षडयंत्र और राजनीति से बचें. जहां तक हो सके गलत तरीके से धन अर्जन ना करें. अगर घर में किसी की मृत्यु हुई है तो सफेदी करवाएं. उसके बाद, घर में भगवान शिव या भगवान कृष्ण की स्थापना करें.

27 जुलाई को शनि होंगे वक्री, शश महापुरुष राजयोग से 4 राशियों को बड़ा लाभ

27 जुलाई 2026 को कर्मफल दाता और न्याय के देवता शनि देव मीन में वक्री (Retrograde) होने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि की उल्टी चाल को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वक्री होने पर शनि का प्रभाव और अधिक गहरा और तीव्र हो जाता है. आमतौर पर शनि की वक्री चाल को कष्टकारी माना जाता है, लेकिन यह सभी राशियों के लिए बुरी नहीं होती है. शनि देव व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से फल देते हैं. इस बार मीन राशि में शनि के वक्री होने से 4 विशेष राशियों को 'शश महापुरुष राजयोग' के प्रभाव से जबरदस्त लाभ और तरक्की मिलने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं वे भाग्यशाली राशियाँ कौन सी हैं. वृषभ राशि (Taurus)- करियर में बड़ी सफलता शनि देव आपकी राशि के स्वामी शुक्र के परम मित्र हैं और आपकी कुंडली के 10वें (कर्म) भाव में वक्री हो रहे हैं. आपके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन, सैलरी इंक्रीमेंट या मनचाही जगह ट्रांसफर मिल सकता है. बिजनेस में अटके हुए प्रोजेक्ट्स दोबारा शुरू होंगे. प्रॉपर्टी या रियल एस्टेट से जुड़े लोगों को तगड़ा मुनाफा होगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान और अधिकार बढ़ेगा. मिथुन राशि (Gemini)- भाग्य का पूरा साथ शनि देव आपकी राशि से 9वें (भाग्य) भाव में वक्री होने जा रहे हैं, जो कि भाग्य और धर्म का स्थान है. पिछले काफी समय से आपके बनते हुए कामों में जो रुकावटें आ रही थीं, वे अब दूर होंगी. भाग्य का बंद दरवाजा खुलेगा. उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को सफलता मिलेगी. व्यापार के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद लाभदायक रहेंगी. आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी. आप कोई नया वाहन या मकान खरीदने की योजना बना सकते हैं. तुला राशि (Libra)- अचानक धन लाभ और संतान सुख तुला राशि के लिए शनि देव 'योगकारक' ग्रह माने जाते हैं. वे आपकी राशि से 5वें (संतान, बुद्धि और प्रेम) भाव में वक्री होंगे. जो छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam) की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. संतान की ओर से सुखद समाचार मिलेगा. अचानक धन लाभ (आकस्मिक धन) के योग बनेंगे. अगर कहीं पैसा फंसा हुआ था, तो वह वापस मिल सकता है. प्रेम संबंधों में गहराई और स्पष्टता आएगी, रिश्ते मजबूत होंगे. वृश्चिक राशि (Scorpio)- सुख-साधनों में वृद्धि और ढैय्या से राहत वृश्चिक राशि पर इस समय शनि की ढैय्या चल रही है, लेकिन चौथे (सुख और माता) भाव में शनि के वक्री होने से आपको ढैय्या के नकारात्मक प्रभावों से बड़ी राहत मिलेगी. पारिवारिक विवाद या मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी. माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा. नया घर, जमीन या गाड़ी खरीदने के लिए यह समय बेहद अनुकूल है. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद आपके पक्ष में सुलझ सकता है. नौकरी में आपके काम की सराहना होगी, जिससे आपका मानसिक बोझ कम होगा.

15 जून को बनेगा बुधादित्य राजयोग, चार राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर एक बेहद महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है. 15 जून को ग्रहों के राजा सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र ग्रह बुध की स्वराशि मिथुन में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां बुद्धि और व्यापार के दाता बुध देव पहले से ही विराजमान हैं. सूर्य और बुध की इस युति से ब्रह्मांड में एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब आत्मा और प्रतिष्ठा के कारक सूर्य का मिलन बुद्धि और संवाद के कारक बुध से होता है, तो जातकों के आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और करियर में अभूतपूर्व प्रगति होती है. इस बार इस युति के शुरुआती समय में चंद्रमा की मौजूदगी से 'त्रिग्रही योग' का विशेष प्रभाव भी देखने को मिलेगा. इस महासंयोग का सबसे सकारात्मक प्रभाव मुख्य रूप से 4 भाग्यशाली राशियों पर पड़ने वाला है. आइए जानते हैं. मेष राशि (Aries)- करियर में बड़ी उपलब्धि और व्यावसायिक मुनाफा मेष राशि के लिए यह बुधादित्य योग दशम भाव में बनने जा रहा है, जो पेशेवर जीवन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. नौकरीपेशा जातक: नौकरी में प्रमोशन और वेतन वृद्धि के प्रबल योग हैं. नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिलेंगे. व्यापार: नए काम या स्टार्टअप की शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी है. बाजार में आपकी साख बढ़ेगी और मुनाफे का ग्राफ ऊपर जाएगा. स्वास्थ्य: यदि आप पिछले कुछ समय से किसी पुरानी शारीरिक समस्या से परेशान थे, तो उसमें सुधार देखने को मिलेगा. वृषभ राशि (Taurus)– भाग्य का साथ और धार्मिक कार्यों में रुचि वृषभ राशि के जातकों को इस योग से रुके हुए कार्यों में गति मिलेगी. अटके काम पूरे होंगे: जो काम पिछले कई महीनों से सरकारी कागजी कार्रवाई या किसी अन्य वजह से रुके हुए थे, वे अब आसानी से पूरे हो जाएंगे. प्रतियोगी परीक्षाएं: छात्रों और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को इस अवधि में अपनी मेहनत का सुखद परिणाम मिल सकता है. मानसिक शांति: आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों की तरफ आपका झुकाव बढ़ेगा. लंबी दूरी की यात्राओं के योग बनेंगे जो भविष्य में फलदायी सिद्ध होंगी. मिथुन राशि (Gemini)– आत्म-विश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि चूंकि, यह युति और बुधादित्य राजयोग इसी राशि के लग्न भाव (प्रथम भाव) में बन रहा है, इसलिए सबसे अधिक और सीधा लाभ मिथुन राशि के जातकों को मिलेगा. करियर व व्यापार: कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी निखरकर सामने आएगी. उच्च अधिकारियों से सराहना मिलेगी. व्यापार में कोई नई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं. यदि कहीं पैसा अटका हुआ था, तो उसकी वापसी की संभावना बढ़ेगी. व्यक्तित्व: आपके आत्मविश्वास में गजब की वृद्धि होगी. आपकी वाणी प्रभावशाली और सौम्य रहेगी, जिससे लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे. सिंह राशि (Leo)- आय के नए स्रोत और पारिवारिक सुख सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं, इसलिए इस गोचर का प्रभाव आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है. यह युति आपके एकादश भाव में होगी. आर्थिक लाभ: आपकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी के संकेत हैं. धन कमाने के नए-नए स्रोत सामने आएंगे, जिससे बैंक बैलेंस मजबूत होगा. पारिवारिक जीवन: परिवार में लंबे समय से चल रहे मतभेद या तनाव समाप्त होंगे. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे और उनका पूरा सहयोग मिलेगा. निवेश: यदि आप शेयर बाजार, संपत्ति या किसी अन्य क्षेत्र में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल साबित हो सकता है.

12 जून का राशिफल: किन राशियों के खुलेंगे सफलता के नए द्वार, जानिए आज का भविष्यफल

मेष राशि- आज दिन अच्छा रहेगा। काम समय पर पूरे होंगे और मेहनत का पूरा फायदा मिलेगा। नौकरी हो या बिजनेस आपको आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। घर का माहौल भी अच्छा रहेगा। खानपान का ध्यान रखें। वृषभ राशि- आज मन शांत रहेगा और कई काम आसानी से बनते नजर आएंगे। पैसों के मामले में राहत मिल सकती है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। पानी खूब पिएं। सेहत को लेकर लापरवाही नहीं करनी है। कोशिश करें कि रात में नींद ठीक से आए। मिथुन राशि- आज कुछ नया सीखने या करने का मौका मिल सकता है। ऑफिस में आपकी तारीफ हो सकती है। दोस्तों से कोई अच्छी खबर मिलेगी और दिन प्रोडक्टिव रहेगा। आप खुश रहेंगे। परिवार और दोस्तों का फुल सपोर्ट मिलेगा। बाहरी खानपान से बचें। कर्क राशि- आज आप जल्दबाजी से बचें और आराम से फैसले लें। घरवालों का पूरा साथ मिलेगा। पैसों से जुड़ा कोई अच्छा मौका हाथ लग सकता है। बिजनेस में भी लाभ मिलेगा। निवेश के लिए अच्छा समय है लेकिन हड़बड़ी में कुछ भी नहीं करना है। तला-भुना ना खाएं। सिंह राशि- आज आपका कॉन्फिडेंस बढ़ा रहेगा। काम में सफलता मिलेगी और लोग आपकी बात सुनेंगे। किसी पुराने काम का अच्छा नतीजा मिल सकता है। जिससे मन खुश रहेगा। सारे काम बनते नजर आएंगे। आप खुश रहेंगे तो बाकी चीजों में उसका असर साफ तौर पर दिखेगा। अपने लिए कुछ समय निकालें और वो करें जो आपके मन को सुकून देता है। कन्या राशि- आज आपको अपनी मेहनत का अच्छा रिजल्ट मिलेगा। रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। घर और ऑफिस दोनों जगह माहौल आपके ही फेवर में रहेगा। दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बीतेगा। लेनदेन से बचें। फालतू के खर्चा ना करें। बजट के साथ आगे की प्लानिंग करें। तुला राशि- आज किस्मत आपका साथ पूरा-पूरा देगी। नया काम शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताकर मन खुश रहेगा। कोशिश करें कि आपकी वजह से किसी का दिल ना दुखे। खानपान में सही बैलेंस बनाए रखें। ज्यादा बाहर का खाएंगे तो दिक्कत होगी। ऐसे में बाहर के खाने से बचें। वृश्चिक राशि- आज का दिन थोड़ा बिजी रह सकता है। नौकरी से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। बिजनेस में थोड़ा अप्स एंड डाउन आएगा लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं है। खानपान का ध्यान रखें। नींद पूरी लें। धनु राशि- आज हर काम सोच-समझकर करें। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसान करा सकती है। नौकरी और बिजनेस में धीरे-धीरे अच्छे नतीजे मिलेंगे। घर-परिवार में माहौल सुकून भरा होगा। कोशिश करें कि आज के दिन कुछ समय अपने लिए निकाल पाएं। अपने शौक खुलकर पूरा करें। मकर राशि- आज आपकी मेहनत फाइनली रंग लाएगी। ऑफिस में जिम्मेदारी बढ़ सकती है लेकिन उसका फायदा भी मिलेगा। पैसों की स्थिति पहले से बेहतर रहेगी। बस किसी से लेनदेन करने से बचें। निवेश के लिए सही समय है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। रुटीन में अब एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें। कुंभ राशि- आज मन खुश रहेगा और नए आइडिया काम आएंगे। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। खर्च थोड़ा संभालकर करें। बजट बनाकर चलेंगे तो चीजें आसान होंगी। घर-परिवार में सब अच्छा होगा। लव लाइफ में थोड़ी कहासुनी हो सकती है लेकिन चीजें इतनी भी खराब नहीं होंगी। शाम तक स्थिति सही हो जाएगी। मीन राशि- आज आपकी कई इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। परिवार का साथ मिलेगा और काम में सफलता मिलने से खुशी होगी। दिन कुल मिलाकर अच्छा रहेगा। बस हड़बड़ी में कोई भी फैसला लेने से बचें। लोगों के साथ घुल-मिलकर रहें। कोई ऐसी बात ना कहने से बचे जिससे किसी का दिल टूटे।

बच्चों की सफलता की 6 कुंजी, चाणक्य ने बताए जीवन बदलने वाले सूत्र

आचार्य चाणक्य को अपने समय के सबसे ज्ञानी और बुद्धिमान पुरुष के तौर पर भी जाना जाता है. उन्होंने अपने समय में जिन बातों का भी जिक्र किया था वे आज के समय में भी हमें एक सही रास्ता दिखाने का काम कर रही हैं. आचार्य चाणक्य ने जिन बातों का जिक्र किया था उन्हें ही हम आज के समय में चाणक्य नीति के नाम से जानते हैं. अपनी इन्हीं नीतियों में चाणक्य ने कुछ ऐसे जरूरी सबक दिए गए हैं जो हर बच्चे को सीखने चाहिए. उनके अनुसार असली सफलता उन आदतों, फैसलों और संस्कारों से शुरू होती है जिन्हें कोई इंसान अपने बचपन में अपनाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको 6 ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें हर एक बच्चे को जितनी जल्दी हो सके सीखना चाहिए और अपनी जिंदगी में लागू करना भी शुरू कर देना चाहिए. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से. अपने दोस्तों को हमेशा बहुत सोच-समझकर चुनें यह बच्चों के लिए सबसे जरूरी सीखों में से एक है. आचार्य चाणक्य संगति के असर पर बहुत भरोसा करते थे. उनके अनुसार, हम जिन लोगों के साथ समय बिताते हैं, वे हमारी आदतों, हमारी थिंकिंग और हमारे फ्यूचरको तय करते हैं. बच्चों और टीनेजर्स के लिए, दोस्ती उनके पूरे पर्सनालिटी को निखारने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे दूसरों में कमियां निकालें. इसके बजाय उन्हें यह देखना सीखना चाहिए कि क्या वह दोस्ती उन्हें कुछ नया सीखने, आगे बढ़ने, ईमानदारी और अच्छाई के लिए मोटिवेट कर रही है या नहीं. रेप्युटेशन मायने रखती है, पर कैरेक्टर से ज्यादा नहीं चाणक्य का एक सबसे मजबूत संदेश यह था कि किसी इंसान की असली कीमत उसके कैरेक्टर से होती है. उनके अनुसार,आपकी रेप्युटेशन वो है जो लोग आपके बारे में सोचते हैं, लेकिन आपका कैरेक्टर वो है जो आप तब होते हैं जब आपको कोई नहीं देख रहा होता. चाणक्य की समझदारी हमें याद दिलाती है कि कुछ समय की तारीफ कभी भी अच्छे संस्कारों की जगह नहीं ले सकती. बच्चों पर अक्सर दूसरों को इम्प्रेस करने का प्रेशर होता है, लेकिन अच्छा कैरेक्टर तब बनता है जब कोई मुश्किल समय में भी ईमानदार रहता है, अपनी गलतियों को मानकर आने वाले समय में सुधार करता है, और बिना किसी फायदे की उम्मीद के सही काम करता है. हर सीक्रेट को शेयर न करें, हर बात बताना जरूरी नहीं आचार्य चाणक्य ने यह बात बहुत पहले सिखाई थी, लेकिन यह सीख आज के समय में भी उतनी ही सच है. सोशल मीडिया से घिरी इस दुनिया में, अपनी पर्सनल जानकारियों को संभालकर रखना बहुत जरूरी है. आचार्य चाणक्य ने हमेशा समझदारी और सावधानी बरतने पर जोर दिया था. उनकी सीख कहती है कि हर बात हर किसी के सामने खोलना ठीक नहीं होता. अपने पर्सनल इमोशंस या परिवार की बातें सिर्फ उन्हीं को बतानी चाहिए जो भरोसेमंद हों. ऐसी जानकारियां आंखें बंद करके किसी को भी नहीं देनी चाहिए. एक समझदार इंसान जानता है कि कौन उसके भरोसे के लायक है और कौन नहीं. बोलने से पहले सोचें और थोड़ा रुकना भी सीखें आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में शब्दों को बहुत बड़ा महत्व दिया है. उनका हमेशा से यह मानना था कि शब्दों में बहुत ताकत होती है. बच्चे अक्सर इमोशंस में बहकर तुरंत बोल देते हैं, लेकिन चाणक्य की सीख कहती है कि खुद पर काबू पाने के लिए हमें बोलने से पहले थोड़ा रुकना और सोचना सीखना चाहिए. कॉन्फिडेंस से बोलने के साथ-साथ, बच्चों को जिम्मेदारी से बोलना भी सीखना चाहिए. “क्या इसे कहने का कोई बेहतर तरीका है?” या “क्या यह बोलना जरूरी है?”, ऐसे सवाल बच्चों को बोलने से पहले सोचने में मदद कर सकते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार आपके बोले गए हर शब्द का एक असर होता है. कड़ी मेहनत और डिसिप्लिन से कभी न डरें शॉर्टकट और तुरंत सफलता चाहने वाली आज की दुनिया में, चाणक्य की नीतियों से मिलने वाला सबसे स्ट्रॉन्ग मैसेज यह है कि सफलता हमेशा लगन, डिसिप्लिन और लगातार की गई कोशिशों से ही मिलती है. उनका मानना था कि कड़ी मेहनत और पक्का इरादा ही किसी इंसान का फ्यूचर तय करते हैं. जो बच्चा मेहनत का सम्मान करना सीख जाता है, वह एक बहुत बड़ी सच्चाई समझ जाता है कि टैलेंट आपके लिए रास्ता तो खोल सकता है, लेकिन आपका डिसिप्लिन ही आपको उस रास्ते पर आगे ले जाता है. अपने इमोशंस को कंट्रोल करना सीखें आचार्य चाणक्य की एक अहम सीख खुद पर कंट्रोल और इमोशंस के डिसिप्लिन के बारे में थी. उनका मानना था कि जो इंसान गुस्से या इमोशंस में बह जाता है, उसे सही फैसले लेने में मुश्किल होती है. बच्चों के लिए यह अपनी फीलिंग्स को समझने, थोड़ा रुकने और शांति से जवाब देने का एक बहुत जरूरी सबक है. यह आदत बच्चों को अंदर से मजबूत बनाता है. माता-पिता बच्चों को अपने इमोशंस को खुलकर बताना सिखाकर, और मुश्किल पलों को शांति से संभालने के तरीके ढूंढने में मदद करके इसे आसानी से सिखा सकते हैं.

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: कर्क राशि में लगेगा ‘रिंग ऑफ फायर’, इन राशियों पर असर

 सूर्य ग्रहण एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक खगोलीय घटना है. जब अंतरिक्ष में चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है. इस स्थिति में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है और दिन में ही अंधेरा छा जाता है. इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं. साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन लगेगा. संयोग की बात यह है कि ये सूर्य ग्रहण सावन के महीने में पड़ेगा. ये सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा. खगोलीय दृष्टि से यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आसमान में रिंग ऑफ फायर के रूप में देखा जा सकेगा. हालांकि, ये भारत में दृश्यमान नहीं होगा, जिसकी वजह से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. आइए जानते हैं कि साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा. मेष धन हानि और खर्चों में अचानक बढ़ोतरी के योग बन सकते हैं. वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा, अन्यथा करीबी रिश्तों में खटास आ सकती है. निवेश करने से बचें. कर्क चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. मानसिक तनाव, सेहत में गिरावट और निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति बन सकती है. दुर्घटनाओं से बचें और वाद-विवाद से दूर रहें. तुला संतान को लेकर चिंता बढ़ सकती है. प्रेम संबंधों और विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुकावटें आ सकती हैं. बजट बिगड़ सकता है, इसलिए पैसों के लेनदेन में सावधानी बरतें. मकर साझेदारी के कामों और वैवाहिक जीवन में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद होने की आशंका रहेगी. इन राशियों के लिए रहेगा शुभ साल का आखिरी सूर्य ग्रहण मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ रहने वाला है. इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन सुनहरे अवसर, व्यापार में मनमुताबिक वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं. कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण? भारतीय समयानुसार, साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 09 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 की सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक लगेगा. कहां कहां दिखाई देगा? यह ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, और उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों में दिखाई देगा.

श्वान का धार्मिक महत्व: भैरव वाहन और सुरक्षा कवच की मान्यता

 सनातन परंपरा, लोक मान्यताओं और तांत्रिक धारणाओं में कुत्ता यानी श्वान को साधारण जीव नहीं माना गया है. विशेष रूप से भगवान भैरव के वाहन के रूप में कुत्ते का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि जिस घर के द्वार पर कोई कुत्ता नियमित रूप से आकर बैठता है, वह केवल आश्रय लेने नहीं आता है, बल्कि उस स्थान की सूक्ष्म ऊर्जा से भी जुड़ जाता है. कई परंपराओं में इसे घर की सुरक्षा, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और आने वाले संकटों के संकेत से जोड़ा जाता है. आइए इसका जवाब पंडित श्रीपति त्रिपाठी जी से जानते हैं. कुत्ते का घर के बाहर बैठने का संकेत शकुन शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी ऐसा कुत्ते पिछले जन्म के किसी आत्मीय संबंधी, मित्र या पूर्वज की चेतना से भी जुड़ा माना जाता है, जो किसी कारणवश उस परिवार के प्रति विशेष लगाव रखता है. कहा जाता है कि वह परिवार के दुख-कष्ट और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को अपने ऊपर लेने का प्रयास करता है तथा घर के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा कवच निर्मित करता है. इसी कारण शास्त्रीय परंपराओं में श्वान यानी कुत्ते को भोजन कराना, जल देना और उसके प्रति दया भाव रखना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. विशेषकर शनिवार और भैरव उपासना में काले श्वान को रोटी खिलाने का विधान भी बताया गया है. कुत्ते को न करें नजरअंदाज हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वंश विनाश, तत्काल पुण्य नाश या किसी विशेष भयावह दंड जैसी बातें मुख्यतः लोक मान्यताओं और जनश्रुतियों का हिस्सा हैं. शास्त्रों का मूल संदेश यह है कि किसी भी जीव पर अत्याचार करना पाप है और सभी जीवों के प्रति करुणा, सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म है. इसलिए, यदि कोई श्वान आपके द्वार पर आता है, तो उसे प्रेम, दया और सम्मान की दृष्टि से देखें. कौन जाने वह केवल भोजन की तलाश में आया एक जीव हो या ईश्वर द्वारा भेजा गया करुणा और सेवा का एक अवसर. आखिर दया ही वह धर्म है, जो मनुष्य को देवत्व के सबसे निकट ले जाती है. कुत्ते का पौराणिक महत्व महाभारत के महाप्रस्थानिक पर्व में वर्णन मिलता है कि जब पांडव हिमालय की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब एक श्वान अंत तक धर्मराज युधिष्ठिर के साथ रहा. अंत में वही श्वान यानी कुत्ता धर्मदेव का रूप निकला. यह प्रसंग दर्शाता है कि युधिष्ठिर ने शरणागत का त्याग करने से इनकार किया, क्योंकि ऐसा करना धर्म के विरुद्ध है. यह कथा श्वान के प्रति करुणा, निष्ठा और धर्म पालन का संदेश देती है.

परमा एकादशी 2026 आज, भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है विशेष पुण्य फल

 आज अधिकमास की परमा एकादशी मनाई जा रही है. एकादशी की तिथि अपने आप में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह व्रत शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है. इससे मानसिक शांति, एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. साल में सामान्यतः 24 एकादशी आती हैं, लेकिन जब अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. अधिकमास में आने वाली एकादशी विशेष रूप से अधिक फलदायी और पुण्यदायी मानी जाती है. इन्हीं में से एक है परमा एकादशी, जो अत्यंत दुर्लभ होती है क्योंकि यह केवल अधिकमास में ही आती है. परमा एकादशी की तिथि 11 जून यानी आज अर्धरात्रि 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन आज ही रात में 10 बजकर 36 मिनट पर होगा. परमा एकादशी का पारण 12 जून यानी कल सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 8 बजकर 10 मिनट तक कर सकते हैं. परमा एकादशी व्रत की पूजा विधि परमा एकादशी का व्रत विशेष रूप से 5 दिनों तक करने की परंपरा बताई जाती है. व्रत की शुरुआत एकादशी से पहले या उसी दिन की जा सकती है. इस दौरान अनाज का सेवन नहीं किया जाता और केवल फल, दूध या तरल आहार लिया जाता है, जबकि संभव हो तो निर्जल व्रत रखना सर्वोत्तम माना गया है. व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ, विशेषकर सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान ऊं नमो नारायणाय और विष्णवे नमः जैसे मंत्रों का जप करना शुभ होता है. साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद्गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी पर किया जाता है, जिसमें किसी जरूरतमंद को भोजन या अन्न का दान दिया जाता है और उसके बाद नींबू पानी या हल्के आहार से व्रत खोला जाता है. व्रत के दौरान ध्यान रखें ये बातें एकादशी व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए. साथ ही दान-पुण्य करना भी इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक दोनों प्रकार का लाभ प्राप्त होता है. परमा एकादशी का महत्व परमा एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से दरिद्रता दूर होती है और धन संबंधी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं. साथ ही संतान प्राप्ति का योग बनता है और व्यक्ति को जीवन में यश व प्रसिद्धि मिलती है. धार्मिक दृष्टि से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि इसके प्रभाव से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति और भगवान विष्णु के दर्शन का फल भी मिलता है. यदि कोई व्यक्ति अपनी विशेष मनोकामना पूरी करना चाहता है, तो उसे इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करते हुए व्रत अवश्य रखना चाहिए.