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नीम करोली बाबा से मिले अमेरिकी डॉक्टर, एक मुलाकात ने बदल दी लैरी ब्रिलियंट की जिंदगी

इन दिनों नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है. इस फिल्म के जरिए बाबा के चमत्कारों ने एक बार लोगों के दिलों में जगह बना ली है. नीम करोली बाबा के प्रति ऐसी ही गहरी आस्था सिर्फ आज के लोगों में ही नहीं है, बल्कि दशकों पहले सात समंदर पार से आए एक अमेरिकी डॉक्टर की जिंदगी भी उनके एक इशारे पर हमेशा के लिए बदल गई थी. आइए जानते हैं उस अद्भुत यात्रा के बारे में, जहां उत्तराखंड के कैंची धाम में एक विदेशी डॉक्टर की भेंट नीम करोली बाबा से हुई थी. जब भटके हुए डॉक्टर की हुई थी बाबा से मुलाकात 70 वह दौर था जब पश्चिमी दुनिया से ढेरों युवा आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत आ रहे थे. उसी समय अमेरिका के रहने वाले डॉ. लैरी ब्रिलियंट (Dr. Larry Brilliant) अपनी जिंदगी के एक ऐसे दौर से गुजर रहे थे जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं. इसी तलाश में वे भारत आए और उत्तराखंड में नीम करोली बाबा के आश्रम (कैंची धाम) पहुंचे. मुलाकात के बाद बाबा उन्हें प्यार से 'डॉक्टर अमेरिका' कहकर बुलाने लग गए थे. वहीं, ट्राइसाइकिल द बुद्धिस्ट रिव्यू को दिए एक इंटरव्यू में लैरी ने बताया था कि आगे चलकर नीम करोली बाबा ने उन्हें दिल्ली जाने और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर देश से चेचक (Smallpox) जैसी खतरनाक बीमारी को खत्म करने के काम में जुटने के लिए भी कहा था. जिसके बाद आगे चलकर लैरी ब्रिलियंट भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक (Smallpox) मिटाने वाले प्रोग्राम से जुड़ गए थे. वे जब भी अपनी पुरानी बातें याद करते हैं, तो कैंची धाम जाना और इस बीमारी के लिए काम करना, उन्हें हमेशा याद आता है. लैरी के मुताबिक, उनकी जिंदगी को एक नई दिशा देने के पीछे सिर्फ नीम करोली बाबा का हाथ था. नीम करोली बाबा से हुई थी लैरी की खास बातचीत डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने इंटरव्यू में बताया था कि, 'जुलाई 1973 में नीम करोली बाबा ने मुझसे कहा था कि तुरंत दिल्ली जाओ और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर काम करो. देश से चेचक की बीमारी को जड़ से मिटाओ.' उसी इंटरव्यू में लैरी ने बाबा के साथ पैसों को लेकर हुई एक मजेदार बातचीत भी शेयर की थी. उन्होंने बताया कि नीम करोली बाबा ने उनसे पूछा था कि, "डॉ. अमेरिका, तुम्हारे पास कितने पैसे हैं?" लैरी ने जवाब दिया था कि, "मेरे पास केवल 500 डॉलर हैं." इस पर बाबा ने जवाब दिया कि, "500 डॉलर? तुम झूठ बोल रहे हो, अमेरिका में तुम्हारे पास कुल कितने पैसे हैं?" लैरी ने तब इमरजेंसी रूम में डॉक्टर के तौर पर काम करने के दिन याद किए और कहा कि, "अमेरिका में भी मेरे पास बस 500 डॉलर ही हैं." लैरी बताते हैं कि इसके बाद वह बातचीत एक कॉमेडी शो में बदल गई. बाबा ने उस बात को हंसी-मजाक में बदल दिया था. वो हंसते बार बार एक ही बोल रहे थे कि, ''500 डॉलर यहां, 500 डॉलर वहां… तुम कोई डॉक्टर नहीं हो!" लैरी को यह सुनकर अपनी मां की बात याद आ गई, जो अक्सर उन्हें ताना मारती थीं कि तुम पैसे नहीं कमा सकते क्योंकि तुम कोई असली डॉक्टर नहीं हो. लेकिन, बाबा बार-बार यही दोहरा रहे थे कि, "500 डॉलर यहां और 500 डॉलर वहां… तुम डॉक्टर नहीं हो, बल्कि यू-एन-ओ (U.N.O.) डॉक्टर हो." इसके बाद उनकी बातचीत ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसे लैरी पूरी जिंदगी नहीं भूले. बाबा ने उनसे कहा था कि वह यूनाइटेड नेशन के डॉक्टर बनने जा रहे हैं, जिससे वह दुनिया से चेचक (Smallpox) जैसे खतरनाक बीमारी को मिटाने में मदद करेंगे. आगे लैरी ने उस समय को याद करते हुए बताया था कि बाबा ने इस खतरनाक बीमारी और उसके भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा था, "यह भयानक बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी. क्योंकि भगवान इंसानों को एक ऐसा तोहफा देने जा रहे है, जिससे मानवता इस बड़े दुख और दर्द पर हमेशा के लिए जीत हासिल कर लेगी." कैंची धाम से लेकर चेचक के खिलाफ जंग तक कैंची धाम जाने और नीम करोली बाबा से मिलने के बाद लैरी ब्रिलियंट की पूरी जिंदगी ही बदल गई थी. आगे चलकर लैरी भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक कार्यक्रम (Smallpox Eradication Programme) में शामिल हुए. जिसके बाद WHO का यह अभियान ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बना था. साल 1980 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने आधिकारिक तौर पर दुनिया को चेचक से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया था. इंसानों की इतिहास में यह पहली ऐसी बीमारी थी जिसे जड़ से खत्म किया गया था. लैरी ब्रिलियंट के लिए कैंची धाम की यादें हमेशा उनके सफर से जुड़ी रहीं. वे हमेशा यही मानते थे कि नीम करोली बाबा के एक-एक शब्द ने उन्हें एक नई राह दिखाई और अपनी मेडिकल की पढ़ाई का इस्तेमाल चेचक के खिलाफ जंग लड़ने में करने की प्रेरणा दी थी.  

बुध का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों को 1 अक्टूबर तक रहना होगा सावधान

वैदिक ज्योतिष में बुध देव को बुद्धि, तर्क, वाणी, व्यापार और संचार का कारक माना जाता है. वहीं, मंगल के स्वामित्व वाला चित्रा नक्षत्र ऊर्जा, कला, तीक्ष्णता और त्वरित फैसलों का प्रतीक है. आज ग्रहों के राजकुमार बुध मंगल के नक्षत्र चित्रा में प्रवेश करने जा रहे हैं और वे 1 अक्टूबर की सुबह तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे. बुध और मंगल के बीच सम संबंध होने के बावजूद, बुध (शांत बुद्धि) का मंगल (आक्रामक ऊर्जा) के नक्षत्र में जाना कई बार विचारों में उथल-पुथल, जल्दबाज़ी में गलत फैसले और वाणी में कटुता पैदा कर सकता है. आज से 1 अक्टूबर के दौरान बुध का यह नक्षत्र परिवर्तन जहां कुछ राशियों के लिए शुभ रहेगा, वहीं 3 राशियों के जातकों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी. आइए जानते हैं कि किन राशियों को इस दौरान संभलकर चलने की सलाह दी जाती है. मेष राशि (Aries) अशुभ प्रभाव: बुध का यह गोचर आपके छठे (रोग, ऋण व शत्रु) और सातवें (साझेदारी व दांपत्य) भाव को प्रभावित करेगा. रखें ये सावधानियां: व्यापारिक साझेदार (Business Partner) या जीवनसाथी के साथ संवादहीनता के कारण मतभेद हो सकते हैं. जल्दबाजी में कोई भी नया अनुबंध (Contract) साइन न करें. अपनी सेहत का ध्यान रखें और काम के तनाव को खुद पर हावी न होने दें. वृश्चिक राशि (Scorpio) अशुभ प्रभाव: आपकी राशि के स्वामी मंगल के ही नक्षत्र में बुध का जाना आपके खर्चों और मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है. रखें ये सावधानियां: आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतें; बिना सोचे-समझे किया गया बड़ा निवेश नुकसान पहुंचा सकता है. गुप्त शत्रु आपके खिलाफ साजिश रच सकते हैं, इसलिए अपनी गुप्त बातें किसी से साझा न करें. वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं. मीन राशि (Pisces) अशुभ प्रभाव: बुध आपके सातवें और आठवें (अष्टम – रुकावटें व अचानक उतार-चढ़ाव) भाव के स्वामी होकर चित्रा नक्षत्र से गुजरेंगे. रखें ये सावधानियां: कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों या सहकर्मियों के साथ बातचीत करते समय संयम बनाए रखें. इस दौरान पैसों के लेन-देन में लापरवाही न बरतें. अचानक कुछ अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है. वाहन चलाते समय सावधानी रखें. बुध के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय – प्रतिदिन या विशेषकर बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश को दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें. – इस अवधि के दौरान बहसबाजी से दूर रहें और कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर लें. – बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या पालक का दान करें.

कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं. भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण और बुद्ध जैसे अवतारों का वर्णन पुराणों और धार्मिक परंपराओं में मिलता है. इनके बाद दशम और अंतिम अवतार के रूप में कल्कि अवतार का उल्लेख किया गया है. मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. लेकिन भगवान कल्कि का जन्म कब होगा? उनका जन्म कहां होगा? उनके माता-पिता कौन होंगे और उनका स्वरूप कैसा होगा? इन सवालों का जवाब जानने की उत्सुकता आज भी लोगों के मन में रहती है. तो आइए जानते है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित उनके स्वरूप के बारे में. धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब धर्म की स्थापना के लिए वे अवतार लेते हैं. इसी भाव को भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की परंपरा से जोड़ा जाता है. कल्कि अवतार को इसी क्रम का भविष्य में होने वाला अवतार माना गया है. श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है. इसके अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा. कहां होगा भगवान कल्कि का जन्म? श्रीमद्भागवत महापुराण में बताया गया है कि भगवान कल्कि का जन्म शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर होगा. श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है कि भगवान कल्कि शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर प्रकट होंगे. यानी धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के जन्मस्थान के रूप में शंभल ग्राम का उल्लेख मिलता है. हालांकि शंभल की भौगोलिक पहचान को लेकर अलग-अलग धार्मिक और विद्वत परंपराओं में मत मिलते हैं. कैसा होगा भगवान कल्कि का स्वरूप? धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि एक दिव्य योद्धा के रूप में प्रकट होंगे. उन्हें घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार धारण किए हुए बताया गया है. पुराणिक वर्णनों में उनका वाहन देवदत्त नाम का दिव्य घोड़ा बताया गया है. मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि इसी घोड़े पर सवार होकर अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. इसके बाद धर्म की पुनर्स्थापना होगी और युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी. भगवान कल्कि की माता का नाम क्या होगा? पौराणिक परंपराओं में भगवान कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमती बताया गया है. इसी परिवार में भगवान कल्कि के प्राकट्य की धार्मिक मान्यता है. कल्कि अवतार से जुड़ी विस्तृत कथाएं केवल श्रीमद्भागवत पुराण में ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रंथों और पुराणिक परंपराओं में भी मिलती हैं. इसलिए उनके परिवार, विवाह और अन्य विवरणों में ग्रंथ के अनुसार अंतर दिखाई दे सकता है. कौन होंगे भगवान कल्कि के गुरु? कल्कि अवतार से जुड़ी पुराणिक कथाओं में भगवान परशुराम का भी विशेष उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही कल्कि को युद्ध और शस्त्र विद्या की शिक्षा देंगे. इसी वजह से कल्कि और परशुराम का संबंध हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष माना जाता है. कब होगा कल्कि अवतार? अब सबसे बड़ा सवाल है कि भगवान कल्कि का अवतार आखिर कब होगा? धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार को कलयुग के अंतिम चरण से जोड़ा गया है. हिंदू कालगणना के अनुसार कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है और धार्मिक मान्यता के अनुसार अभी इसका काफी समय बाकी है. इसलिए वर्तमान समय में भगवान कल्कि के अवतार की कोई निश्चित तारीख या वर्ष शास्त्रों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है. कल्कि अवतार को भविष्य में होने वाली उस घटना के रूप में देखा जाता है, जब कलयुग अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे. कल्कि अवतार के बाद क्या होगा? पौराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म, अन्याय और अराजकता चरम पर पहुंच जाएगी, तब भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा. वे अधर्म का अंत करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. इसके बाद युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी और सत्ययुग के पुनः प्रारंभ होने की धार्मिक मान्यता है. इस तरह कल्कि अवतार केवल भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की कथा नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और युग परिवर्तन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुराणिक मान्यता है. हालांकि, भगवान कल्कि के प्राकट्य का समय भविष्य से जुड़ा धार्मिक विषय है. इसलिए वर्तमान समय में उनके अवतार की कोई निश्चित तारीख बताना शास्त्रसम्मत नहीं है.

गणपति विसर्जन की तारीख तय, 25 सितंबर को इस विधि से दें बप्पा को विदाई

गणपति भगवान का अपने घर में स्वागत करना यानी उन्हें विधि-विधान से विराजमान करना भक्तों के लिए बेहद शुभ और भावनात्मक अवसर होता है. कोई एक दिन के लिए गणपति जी को विराजमान करता है, तो कोई डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार अधिक दिनों तक उनकी सेवा करता है. लेकिन जितने सम्मान और श्रद्धा के साथ हम गणपति जी को अपने घर बुलाते हैं, उतने ही सम्मान के साथ उनकी विदाई भी करनी चाहिए. गणपति विसर्जन केवल मूर्ति को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके साथ पूजा की एक पूरी विधि जुड़ी होती है. तो आखिर गणपति विसर्जन कब किया जाएगा और गणपति जी को विदाई किस तरह दी जाती है? क्या गणपति जी का वास्तव में विसर्जन होता है और विसर्जन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं. गणेश विसर्जन तिथि (Ganesh Visarjan 2026 Date) द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी. इसी कारण गणेश विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा. गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक. रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26 गणपति विसर्जन से पहले करें उत्तर पूजन गणपति जी की स्थापना के दिन से लेकर जितने दिनों तक आपने उनकी सेवा और पूजा की है, विसर्जन के दिन सबसे पहले उत्तर पूजन किया जाता है. उत्तर पूजन का अर्थ है गणपति जी की अंतिम पूजा, जिसके बाद उनकी विधिवत विदाई की जाती है. उत्तर पूजन की प्रक्रिया काफी हद तक उसी तरह होती है, जैसे आपने स्थापना के समय गणपति जी का पूजन किया था. सबसे पहले गणपति जी को स्नान कराया जाता है. परंपरा के अनुसार पहले सामान्य जल से स्नान कराया जाता है. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से पंचामृत स्नान कराया जा सकता है. इसके बाद दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है. कुछ लोग गणपति अथर्वशीर्ष के मंत्रों के साथ अभिषेक भी करते हैं. हालांकि, यदि आप अभिषेक नहीं करना चाहते हैं तो सामान्य स्नान और पूजा भी अपनी परंपरा के अनुसार कर सकते हैं. स्नान के बाद गणपति जी को पहनाएं वस्त्र स्नान के बाद गणपति जी को नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. पहले उपवस्त्र अर्पित किया जाता है. इसके बाद यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है और फिर ऊपर का वस्त्र अर्पित किया जाता है. इसके बाद गणपति जी को चंदन, अक्षत, दूर्वा, सिंदूर और सुगंधित द्रव्य अर्पित करें. फिर धूप और दीप दिखाएं. इसके बाद गणपति जी को नैवेद्य अर्पित करें. इसमें मोदक या आपकी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद रखा जा सकता है. नैवेद्य के बाद आचमन और ऋतु फल अर्पित करें. इसके बाद दक्षिणा और तांबूल यानी पान, सुपारी आदि अर्पित करने की परंपरा भी है. चाहें तो अंत में नारियल भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद गणपति जी की आरती करें. पहले गौरी, फिर कलश और अंत में गणपति जी का पूजन यदि आपने गणपति स्थापना के समय मां गौरी और कलश की भी स्थापना की है, तो उत्तर पूजन में इनका भी पूजन किया जाता है. इस क्रम में पहले मां गौरी को अर्पण करें. इसके बाद कलश का पूजन करें और अंत में गणपति जी का पूजन करें. गणपति जी यहां प्रधान देवता माने जाते हैं, इसलिए उनका पूजन अंत में मुख्य रूप से किया जाता है. कैसे करें विसर्जन? कुछ पूजा परंपराओं में माना जाता है कि विसर्जन से पहले की मुख्य पूजा और आरती घर पर ही पूरी कर लेनी चाहिए. इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है. वहां पहुंचकर स्थानीय परंपरा के अनुसार संक्षिप्त प्रार्थना करके विसर्जन किया जा सकता है. नदी या तालाब में प्लास्टिक, कपड़ा, फूल-माला या अन्य ऐसी सामग्री नहीं डालनी चाहिए, जो जल को प्रदूषित करें. आजकल कई जगह प्रशासन की ओर से कृत्रिम विसर्जन कुंड भी बनाए जाते हैं. पर्यावरण की दृष्टि से इनका उपयोग करना उचित विकल्प हो सकता है. कलश के जल का क्या करें? पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल का घर में छिड़काव करने की परंपरा भी है. इसे पवित्रता और मंगल की भावना से किया जाता है. इसके बाद पूजा की सामग्री को सम्मानपूर्वक अलग करें. जो सामग्री विसर्जित करनी हो, उसे निर्धारित और स्वच्छ स्थान पर ही विसर्जित करें.

फ्रिज के ऊपर रखें ये 3 चीजें, वास्तु के अनुसार घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र और वैदिक ज्योतिष में घर की हर एक चीज और उसके स्थान का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है.  हम अक्सर अपने ड्राइंग रूम और लिविंग रूम को सजाने में लगे रहते हैं, लेकिन घर के कुछ ऐसे खास हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं जो चुंबक की तरह सकारात्मक ऊर्जा को खींच सकते हैं.  ऐसा ही एक स्थान है आपका फ्रिज! यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन फ्रिज के ऊपर कुछ विशेष चीजें रखकर आप घर की ऊर्जा (Aura) को पूरी तरह बदल सकते हैं और वास्तु दोषों को दूर कर सकते हैं. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, फ्रिज का ऊपरी हिस्सा प्राणा रिसेप्टर की तरह काम करता है.  यहाँ सही वस्तुएं रखने से घर में शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आगमन होता है.  आइए जानते हैं उन 3 खास चीजों के बारे में जिन्हें फ्रिज के ऊपर रखना बेहद शुभ माना जाता है: 1. समुद्री नमक का कटोरा (Sea Salt Bowl) वास्तु और ज्योतिष में नमक को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला सबसे शक्तिशाली माध्यम माना गया है. कैसे रखें: एक कांच के कटोरे में मोटा समुद्री नमक (Coarse Sea Salt) भरकर फ्रिज के ऊपर रखना चाहिए. फायदा: यह नमक घर की छुपी हुई नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को सोख लेता है.  यह आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है. यह घर के इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड को संतुलित करता है.  वास्तु के जानकारों के अनुसार, इस नमक को रोजाना घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) थोड़ा सा चलाना चाहिए ताकि घर के कंपन और ऊर्जा हमेशा सकारात्मक बनी रहें. 2. हल्दी से बना दीया (Turmeric Diya) हल्दी का इस्तेमाल धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टियों से बहुत शुभ माना जाता है. कैसे रखें: कांच की एक छोटी प्लेट पर हल्दी की गांठ से बने या हल्दीयुक्त छोटे दीये में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए (इस बात का खास ध्यान रखें कि इससे किसी तरह की दुर्घटना या आग लगने का खतरा न हो). फायदा: हल्दी का सुनहरा रंग और इसकी एंटीसेप्टिक प्रकृति घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.  यह उपाय घर से नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है.  गुरु ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाकर जीवन में पोषण और आर्थिक समृद्धि लाता है. 3. क्लियर क्वार्ट्ज क्रिस्टल (Clear Quartz Cluster) क्रिस्टल्स का हमारे ऑरा और ऊर्जा पर गहरा प्रभाव पड़ता है. कैसे रखें: फ्रिज के ऊपर एक क्लियर क्वार्ट्ज क्रिस्टल पॉइंट रखना बहुत ही चमत्कारी परिणाम दे सकता है.  इसे इस तरह रखें कि इसका मुख पूर्व दिशा की ओर हो. फायदा: यह क्रिस्टल सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Prana) को कई गुना बढ़ा देता है और वास्तु संबंधी बाधाओं या अवरोधों को तोड़ता है.  पूर्व दिशा की ओर मुंह करके रखने पर यह सूर्य की स्पष्ट ऊर्जा को चैनलize करता है, जिससे घर में पारिवारिक सौहार्द, शांति और मानसिक स्पष्टता बनी रहती है.

चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा सावधान

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, मानसिक स्थिति, माता और भावनाओं का स्वामी माना जाता है, जबकि शनि देव न्याय, अनुशासन, संघर्ष और कठिन परिश्रम के कारक ग्रह हैं. 21 सितंबर 2026 यानी आज चंद्रमा देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु से निकलकर अपने परम शत्रु शनि देव की राशि मकर (Capricorn) में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि की राशि में चंद्रमा का गोचर मानसिक तनाव, कार्यों में देरी और भावनात्मक उथल-पुथल लाने वाला माना जाता है. इस दौरान व्यक्ति को बनते हुए कामों में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. 21 सितंबर से शुरू हो रहा चंद्रमा का यह गोचर मुख्य रूप से 3 राशियों के लिए थोड़ा सतर्क रहने और संभलकर चलने का संकेत दे रहा है. आइए जानते हैं किन राशियों को इस दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता है. मिथुन राशि (Mithun Rashi) अशुभ स्थिति: चंद्रमा आपकी राशि से आठवें (अष्टम – आयु, संकट व अचानक उतार-चढ़ाव) भाव में गोचर करेंगे. बढ़ सकती हैं ये परेशानियां: आठवें भाव में चंद्रमा का होना मानसिक तनाव और अज्ञात भय दे सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ किसी बात पर मतभेद हो सकता है. वाहनों के प्रयोग और खान-पान में विशेष सावधानी बरतें, स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. इस दौरान कोई भी नया बड़ा निवेश करने से बचें. सिंह राशि (Leo Rashi) अशुभ स्थिति: चंद्रमा आपकी राशि से छठे (छठा – रोग, ऋण व शत्रु) भाव में गोचर करने जा रहे हैं. बढ़ सकती हैं ये परेशानियां: आपके गुप्त शत्रु या विरोधी सक्रिय हो सकते हैं और आपके बनते कामों में बाधा डालने का प्रयास करेंगे. स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है, विशेष रूप से पेट या मानसिक थकान से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. पैसों के लेन-देन में सावधानी रखें, बिना सोचे-समझे किसी को उधार न दें. धनु राशि (Dhanu Rashi) अशुभ स्थिति: आपकी राशि से दूसरे (धन, वाणी व कुटुंब) भाव में चंद्रमा का गोचर होगा. बढ़ सकती हैं ये परेशानियां: आपकी वाणी में कड़वाहट या कठोरता आ सकती है, जिससे परिवार के सदस्यों या व्यापारिक पार्टनर के साथ अनबन की स्थिति बन सकती है. अचानक से कुछ अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है. बातचीत के दौरान अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें. चंद्रमा के गोचर के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय – सोमवार या इस गोचर के दौरान नियमित रूप से शिवलिंग पर शुद्ध जल व अक्षत अर्पित करें और ऊं नमः शिवाय का जाप करें. – शनि की राशि में चंद्रमा का नकारात्मक प्रभाव दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें. – जरूरतमंदों को दूध, चावल या चीनी का दान करें और इस दौरान व्यर्थ के वाद-विवाद से खुद को दूर रखें.

आज का राशिफल 21 सितंबर: ग्रह-नक्षत्र बदलेंगे किस्मत, इन राशियों को मिलेगा शुभ फल

मेष अपने परिवार या रिश्तेदारों से सलाह लें, जो खराब वक्त में आपका साथ दें। आपके प्रेम संबंध मधुर बने रहेंगे और सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलेंगे। आप दोनों के बीच विश्वास और अंडर्स्टैंडिंग होनी चाहिए। वृषभ अगर आप शादी के बारे में सोच रहे हैं तो आपको आर्थिक और इमोशनल तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाइए और अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें। मिथुन आपका पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन संतुलित रहेगा। आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। दूसरी ओर, आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है ताकि आप दोनों इसे अगले लेवल पर ले जा सकें। कर्क आज के दिन आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा लेकिन आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। नियमित रूप से हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। इससे आपको मानसिक शांति पाने में मदद मिलेगी। सिंह आज का दिन आपके लिए अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। कन्या अगर आप अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं, तो आपको आय के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा, जिससे आपको अपने साथी के साथ संवाद करने में आसानी होगी। तुला आज आप आसानी से सफल हो जाएंगे। आपके परिवार को सहयोगी होना चाहिए ताकि यह एक टीम वर्क बन जाए। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने पर्सनल समय का त्याग करना होगा। वृश्चिक आपको इस समय बहुत त्याग करने की आवश्यकता है ताकि आप आगे एक अच्छा जीवन जी सकें। आपको अपने परिवार के लिए एक स्थिर स्थिति भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। धनु आज आप विकास हासिल करने में भी सफल रहेंगे, जो महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस सप्ताह ढेर सारे अवसर पाने के लिए आपको ईमानदार रहना चाहिए। आप देखेंगे कि आपकी प्रतिभा आपके काम आएगी। मकर आज सब कुछ भगवान की इच्छा के अनुसार होगा. बेहतर भविष्य के लिए रचनात्मक योजना बनाएं ताकि आप अपना ख्याल रख सकें। आज का दिन आपके जीवन में खुशियां और संतुष्टि लेकर आने वाला है। कुंभ आप उस कनेक्शन को महसूस करेंगे, जो एक साथ एक विशेष बॉन्ड बनाने के लिए आवश्यक है। आपको अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। मीन आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और स्थिर भविष्य के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं उसे प्राप्त करना हमेशा संभव नहीं होता है, विशेषकर विलासिता की वस्तुएं।

आज का राशिफल 20 सितंबर: इन राशियों पर बरसेगी लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के संकेत

मेष मन अशांत रहेगा। नकारात्मक विचारों से बचें। लेखनादि-बौद्धिक कार्यों से मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। वृषभ मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय के साधन भी बन सकते हैं। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। खर्च की अधिकता रहेगी। मिथुन मन अशांत रहेगा। पिता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। कारोबार में कठिनाई आ सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। आय के साधन भी बनेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। कर्क मन परेशान होगा। संयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। सिंह आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु आत्मसंयत रहें। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। कन्या मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। व्यर्थ के क्रोध से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम भी अधिक रहेगा। लाभ में भी वृद्धि होगी। कारोबार के लिए मित्र के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। तुला मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी अधिक रहेगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। वृश्चिक वाणी में सौम्यता रहेगी, परंतु मन परेशान हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। माता-पिता का साथ मिलेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग तो मिलेगा, परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। धनु मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। मकर मन प्रसन्न रहेगा, परंतु नकारात्मक विचारों से बचें। किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। किसी दूसरे स्थान पर भी जा सकते हैं। परिवार का साथ रहेगा। कुंभ मन प्रसन्न तो रहेगा। फिर भी आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। बातचीत में भी संतुलन बनाए रखें। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। मीन मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। व्यर्थ के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम भी अधिक रहेगा, परंतु आय में कमी हो सकती है। खर्चों में वृद्धि होगी।

19 सितंबर का राशिफल: इन राशियों पर मेहरबान रहेंगे शनिदेव, धन लाभ के संकेत

मेष राशि- आपका मन रचनात्मक कामों में लगा रहेगा। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पैसों की स्थिति संतुलित बनी रहेगी। परिवार और रिश्तों में मिठास रहेगी। सेहत ठीक रहेगी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। वृषभ राशि- किस्मत आपका पूरा साथ देती नजर आएगी। करियर और पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत संभव है। पैसों का लाभ होगा। मन खुश रहेगा और दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी। मिथुन राशि- मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका नतीजा सकारात्मक रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। प्रेम संबंधों में भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी। कर्क राशि- रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी होगा। साझेदारी से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। मानसिक शांति के लिए खुद को थोड़ा समय देना फायदेमंद रहेगा। सिंह राशि- नए विचार और योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में समझ और तालमेल बना रहेगा। मानसिक रूप से आज खुद को हल्का और शांत महसूस करेंगे। कन्या राशि- आपको अपनी योजनाओं पर पूरा ध्यान बनाए रखना होगा। कामकाज में की गई मेहनत का पूरा लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत में धीरे-धीरे सुधार महसूस होगा। तुला राशि- जिम्मेदारियों का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत रहेगी। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी जरूरी है। वृश्चिक राशि- दिन आपके लिए अच्छे संकेत लेकर आया है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत होने के योग हैं। प्रेम जीवन में उत्साह और नयापन बना रहेगा। सेहत भी अच्छी रहेगी। धनु राशि- आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। कामकाज में धैर्य रखना ज़रूरी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन बातचीत से समाधान निकल आएगा। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी। सेहत के लिहाज से आराम जरूरी है, खुद को ज्यादा थकाने से बचें। मकर राशि- आपकी बात करने की कला आपको फायदा दिला सकती है। नए लोगों से संपर्क बनेंगे, जो आने वाले समय में काम आ सकते हैं। करियर से जुड़े रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन ज्यादा काम करने से थकान महसूस हो सकती है। कुंभ राशि- दिन धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है। नौकरी और व्यापार में काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा। खर्च थोड़े बढ़ सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। मीन राशि- आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। कामकाज में आपकी मेहनत साफ नजर आएगी और अधिकारी आपके काम से खुश हो सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई बड़ा खर्च करने से बचें। घर का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस गुस्से और तनाव को खुद पर हावी न होने दें।

घर में फर्श पर न रखें ये 5 पौधे, वास्तु के अनुसार स्टैंड पर रखने से बढ़ती है समृद्धि

घर में पौधे लगाने से हरियाली और खूबसूरती तो बढ़ती ही है, साथ ही वास्तु शास्त्र में भी कुछ पौधों को विशेष महत्व दिया गया है. मान्यता है कि पौधों को सही दिशा और उचित स्थान पर रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है. वहीं, कुछ पौधों को सीधे फर्श पर रखने के बजाय स्टैंड या ऊंची जगह पर रखने की सलाह दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है. आइए जानते हैं ऐसे 5 पौधों के बारे में . मनी प्लांट मनी प्लांट को घर में समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे सीधे फर्श पर रखने के बजाय किसी स्टैंड या ऊंची जगह पर रखना बेहतर माना जाता है. इसकी बेल को नीचे की ओर फैलाने के बजाय ऊपर की दिशा में बढ़ने देना शुभ माना जाता है . मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक उन्नति का माहौल बना रहता है . जेड प्लांट जेड प्लांट को भी वास्तु में समृद्धि और ग्रोथ से जोड़ा जाता है. इसे जमीन पर रखने के बजाय किसी ऊंचे स्टैंड पर रखने की सलाह दी जाती है . वास्तु के अनुसार घर की पूर्व या उत्तर दिशा में जेड प्लांट रखना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में तरक्की और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ते हैं . तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र पौधे का दर्जा दिया गया है. वास्तु मान्यताओं में भी इसके स्थान को महत्वपूर्ण माना गया है . तुलसी के पौधे को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी, गमले के स्टैंड या किसी ऊंचे स्थान पर रखने की परंपरा है. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मकता और शांतिपूर्ण वातावरण बना रहता है . स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट घर की सजावट के लिए काफी पसंद किया जाता है. वास्तु के अनुसार इसे भी सीधे फर्श पर रखने के बजाय स्टैंड पर रखना अच्छा माना जाता है. इसे लकड़ी या धातु के स्टैंड पर रखा जा सकता है. मान्यता है कि सही तरीके से रखा गया यह पौधा घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है . एरेका पाम एरेका पाम आकार में अपेक्षाकृत बड़ा पौधा होता है और घर की खूबसूरती बढ़ाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे भी सीधे जमीन पर रखने के बजाय मजबूत स्टैंड पर रखना उचित माना जाता है. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है .