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वट सावित्री व्रत 2026: जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। हर साल की तरह इस बार भी महिलाओं के मन में इस व्रत की तारीख को लेकर थोड़ी कन्फ्यूजन है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। वट सावित्री व्रत 2026 तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 17 मई को रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए वट सावित्री व्रत 16 मई को रखा जाएगा। इसी दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त 16 मई को सुबह से ही पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 4 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं। वट वृक्ष की पूजा का महत्व शास्त्रों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना गया है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा कर महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि मांगती हैं। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर सूत का धागा लपेटना और 7 या 108 बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। पूजन विधि इस दिन महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र पहनकर शृंगार करती हैं। पूजा की थाली में धूप, दीप, रोली, अक्षत, कच्चा सूत, फल और भीगे हुए चने रखे जाते हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है और अंत में बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत पूर्ण किया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन आटे के गुलगुले व कई तरह के पकवान बनाने की भी परंपरा है।  

सीता नवमी पर विवाह में देरी दूर करने के खास उपाय और पूजा विधि

 वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 'सीता नवमी' या 'जानकी नवमी' के रूप में बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता का प्राकट्य धरती से हुआ था। माता सीता को त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सीता नवमी का दिन उन जातकों के लिए वरदान के समान है, जिनके विवाह में देरी हो रही है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। सीता नवमी और मां गौरी का संबंध माता सीता ने खुद भगवान श्री राम को पति के रूप में पाने के लिए देवी गौरी की कठिन आराधना की थी। उन्होंने 'गिरिजा पूजन' कर माता गौरी से सुयोग्य वर का आशीर्वाद मांगा था। यही वजह है कि सीता नवमी के दिन अगर कुंवारी कन्याएं माता गौरी की पूजा करती हैं, तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। करें ये खास उपाय गौरी-सीता पूजन: सीता नवमी के दिन माता सीता और भगवान राम के साथ मां गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। माता सीता को पीली चुनरी और मां गौरी को लाल चुनरी अर्पित करें। इससे कुंडली के दोष शांत होते हैं। शृंगार सामग्री का दान: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करने से विवाह के योग जल्दी बनते हैं। मनोकामना पूर्ति मंत्र: पूजा के दौरान तुलसीदास जी द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के उस प्रसंग का पाठ करें, जिसमें सीता जी गौरी पूजन करती हैं। प्रसंग "मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।" इस चौपाई के जप से विवाह की अड़चनें स्वतः समाप्त होने लगती हैं। पीले फूल चढ़ाएं: अगर विवाह तय होकर बार-बार टूट जाता है, तो सीता नवमी पर राम-सीता के चरणों में 108 पीले फूल अर्पित करें। ।।गौरी स्तुति।। जय जय गिरिराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥ जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनी दुति गाता॥ देवी पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥ मोर मनोरथ जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही के॥ कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥ बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मुरति मुसुकानि॥ सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ। बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥ सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सूचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥ मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥ एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥ ।।गौरी स्त्रोत।। ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके। हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।। हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके। शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।। मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले। सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये।। पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते। पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।। मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले। संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।। देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः। प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।। तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्। वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।। मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।

गर्मी में घर में सांप आने का कारण और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके संकेत

तपती गर्मी और उमस के कारण जमीन के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए सांप अक्सर ठंडी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों या घरों का रुख करते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में सांपों के आगमन को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता. इसे घर की ऊर्जा और वास्तु दोषों से जोड़कर देखा जाता है. क्या कहता है वास्तु शास्त्र? वास्तु के अनुसार, सांप का घर में आना राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को दर्शाता है. यदि आपके घर में राहु का दोष है, तो ऐसे जीव घर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. विशेष रूप से घर का नैऋत्य कोण (South-West) यदि दूषित हो या वहां गंदगी रहती हो, तो यह राहु को सक्रिय करता है, जो सांपों के आगमन का कारण बन सकता है. इन दिशाओं से निकलना है खतरे की घंटी अगर सांप बार-बार घर की उत्तर-पश्चिम (Vayavya) या दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश कर रहा है, तो यह घर में अस्थिरता और मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के नीचे दरारें होना या दहलीज का टूटा होना भी नकारात्मक ऊर्जा और रेंगने वाले जीवों को निमंत्रण देता है. पितृ दोष और कालसर्प दोष का संकेत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सांपों का संबंध हमारे पूर्वजों से भी माना गया है. यदि किसी को सपने में बार-बार सांप दिखें या गर्मियों में अचानक घर के आंगन में सांप आ जाए, तो यह पितृ दोष या कुंडली में कालसर्प दोष का संकेत हो सकता है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि घर में किसी विशेष पूजा या शुद्धि की आवश्यकता है. वास्तु दोष दूर करने के उपाय गर्मियों में सांपों को घर से दूर रखने और वास्तु दोष को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं: सफाई का महत्व: घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा साफ और खाली रखें. यहां कबाड़ जमा होने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. सर्पगंधा का पौधा: घर के मुख्य द्वार के पास या बगीचे में सर्पगंधा या लेमन ग्रास का पौधा लगाएं. इनकी सुगंध से सांप दूर रहते हैं और वास्तु भी ठीक रहता है. चंदन की धूप: घर में नियमित रूप से चंदन की धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसकी महक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. शिव उपासना: चूंकि सांप भगवान शिव के आभूषण हैं, इसलिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करने से भय और दोष दोनों दूर होते हैं.

सूखी तुलसी भी बदल सकती है किस्मत, वास्तु के 3 चमत्कारी उपाय

 पारा 40 डिग्री के पार है, लू के थपेड़े और चिलचिलाती धूप ने न सिर्फ इंसानों का बुरा हाल कर रखा है, बल्कि घर के आंगन में लगी तुलसी भी इस तपिश को झेल नहीं पा रही है. लाख जतन के बाद भी अगर इस भीषण गर्मी में तुलसी सूख गई है, तो निराश होकर उसे फेंकने की गलती बिल्कुल न करें. वास्तु शास्त्र में माना गया है कि जो तुलसी चिलचिलाती धूप में सूख जाती है, उसकी सूखी लकड़ियों में भी चमत्कारिक शक्तियां होती हैं. ये सूखी लकड़ियां न केवल आपके घर की नकारात्मकता को सोख सकती हैं, बल्कि आर्थिक तंगी और वास्तु दोष जैसी समस्याओं के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में सूखी हुई तुलसी की लकड़ियों के वो 3 अचूक उपाय, जो आपके जीवन में खुशहाली की ठंडी बयार ला सकते हैं. 1. मुख्य द्वार पर बांधें लकड़ी वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में आए दिन क्लेश होता है या आपको लगता है कि घर को किसी की नजर लग गई है, तो सूखी तुलसी की छोटी सी लकड़ी उठाएं. इसे एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर कलावा की मदद से घर के मुख्य द्वार पर बीचों-बीच लटका दें. माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. 2. तिजोरी में रखें एक टुकड़ा: खिंची चली आएंगी लक्ष्मी अगर कड़ी मेहनत के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिक रहा या फिजूलखर्ची बढ़ गई है, तो सूखी तुलसी की लकड़ी या उसकी जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा लें.  इसे गंगाजल से पवित्र करके पीले कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या धन रखने वाली अलमारी में रख दें.  मान्यता है कि यह उपाय धन को आकर्षित करता है . इससे कंगाली दूर होती है. 3. तुलसी दीप से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. किसी भी शुभ तिथि या एकादशी के दिन जब आप घी का दीपक जलाएं, तो उसमें सूखी तुलसी की एक छोटी सी लकड़ी डाल दें. इसे तुलसी दीप कहा जाता है. ऐसा करने से घर के वास्तु दोषों का नाश होता है, रुके हुए काम बनने लगते हैं. भूलकर भी न करें ये गलती     तुलसी को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है, इसलिए पौधा सूखने के बाद भी उसकी लकड़ियों का अपमान न करें.     इन्हें कभी भी गंदे हाथों से न छुएं.     लकड़ियों को इधर-उधर कचरे या नाली में न फेंकें.     उपाय करने के बाद बची हुई लकड़ियों को गमले की मिट्टी में ही दबा दें या पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें.  

27 अप्रैल को सूर्य के भरणी नक्षत्र में प्रवेश से 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही उनका नक्षत्र परिवर्तन भी मायने रखता है. 27 अप्रैल 2026 को ग्रहों के राजा सूर्य देव अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. शुक्र के आधिपत्य वाले इस नक्षत्र में सूर्य का आगमन आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद प्रभावशाली माना जाता है. सूर्य का यह गोचर कुछ खास राशि वालों के लिए गोल्डन पीरियड की शुरुआत करने वाला है. आइए जानते हैं किन 4 राशियों की किस्मत चमकने वाली है और किसे मिलेगा बंपर धन लाभ. मेष राशि: करियर में ऊंची उड़ान मेष राशि वालों के लिए सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन वरदान की तरह है. आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी. कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी.  अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. अगर आप नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो यह सही समय है. मिथुन राशि: आय के नए स्रोत मिथुन राशि के जातकों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे. सूर्य और शुक्र का यह नक्षत्र संबंध आपकी सुख-सुविधाओं में विस्तार करेगा. शेयर बाजार या प्रॉपर्टी में किया गया पुराना निवेश अब मुनाफा देना शुरू करेगा. प्रभावशाली लोगों से मेलजोल बढ़ेगा, जो भविष्य में बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिला सकता है. सिंह राशि: मान-सम्मान और पदोन्नति चूँकि सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए भरणी नक्षत्र में उनका जाना आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा. समाज और दफ्तर में आपका दबदबा बढ़ेगा. सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद आपके पक्ष में सुलझ सकते हैं. धनु राशि: भाग्य का पूरा साथ धनु राशि वालों के लिए यह समय बंपर ग्रोथ वाला साबित होगा. आपकी निर्णय लेने की क्षमता आपको दूसरों से आगे रखेगी. व्यापार के सिलसिले में की गई यात्राएं धनवर्षा का कारण बनेंगी. फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी, आपकी बैंक बैलेंस में इजाफा होगा.

मई 2026 में बनेंगे तीन राजयोग, धन और करियर में बड़े बदलाव के संकेत

मई 2026 सिर्फ एक सामान्य महीना नहीं है, बल्कि यह समय ज्योतिष के अनुसार बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है. इस महीने गजलक्ष्मी राजयोग, मालव्य राजयोग और लाभ दृष्टि राजयोग जैसे तीन शक्तिशाली योग बन रहे हैं. खास बात यह है कि ये योग अलग-अलग तारीखों पर बनते हुए पूरे महीने को एक पॉजिटिव फ्लो देते हैं, जिससे धन, करियर और जीवन में लगातार ग्रोथ के संकेत मिलते हैं. 2 मई से लाभ दृष्टि राजयोग महीने की शुरुआत ही एक मजबूत योग से होती है. 2 मई को शनि और शुक्र की खास स्थिति से लाभ दृष्टि राजयोग बनता है. यह योग बताता है कि जो मेहनत आप लंबे समय से कर रहे थे, उसका फल अब मिलने लगेगा. रुके हुए काम आगे बढ़ेंगें, करियर या बिजनेस में स्थिरता आएगी. यह समय धैर्य रखने वालों के लिए खास लाभ देने वाला हो सकता है. किन राशियों को फायदा? मेष राशि: रुका हुआ काम पूरा होगा, करियर में स्थिरता आएगी वृषभ राशि: आर्थिक स्थिति सुधरेगी, नियमित आय के स्रोत बनेंगे कन्या राशि: नौकरी में सुधार और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं मकर राशि: मेहनत का पूरा फल मिलेगा, प्रमोशन के योग 14 मई से गजलक्ष्मी राजयोग जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ता है, 14 मई से गुरु और शुक्र की युति गजलक्ष्मी राजयोग बनाती है, जो 8 जून तक प्रभावी रहेगा. यह वह समय है जब आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं. अचानक धन लाभ, निवेश से फायदा और लाइफस्टाइल में सुधार देखने को मिल सकता है. जो लोग लंबे समय से किसी बड़े मौके का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह समय दरवाजे खोल सकता है. किन राशियों को फायदा? मिथुन राशि: सबसे ज्यादा लाभ, आय में बढ़ोतरी और नए मौके कर्क राशि: धन संचय के योग, परिवार में सुख-समृद्धि सिंह राशि: प्रतिष्ठा के साथ आर्थिक लाभ तुला राशि: लग्जरी लाइफस्टाइल और सुख-सुविधाओं में इजाफा धनु राशि: निवेश से अच्छा रिटर्न और भाग्य का साथ पूरे महीने बना रहेगा मालव्य राजयोग का असर इन दोनों योगों के बीच शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण पूरे मई में मालव्य राजयोग का प्रभाव भी बना रहता है. यह योग जीवन में सुख-सुविधाएं, आकर्षण और करियर में ग्रोथ लेकर आता है. खासकर जो लोग क्रिएटिव या पब्लिक डीलिंग वाले काम में हैं, उन्हें इसका फायदा ज्यादा मिल सकता है. किन राशियों को फायदा? वृषभ राशि: पर्सनालिटी में निखार, धन और सुख में वृद्धि मिथुन राशि: करियर में ग्रोथ और नई पहचान तुला राशि: रिश्तों में मजबूती और जीवन में संतुलन कुंभ राशि: क्रिएटिव फील्ड में सफलता और नए अवसर मीन राशि: मानसिक शांति और आर्थिक सुधार

24 अप्रैल का राशिफल: कुछ राशियों के लिए रहेगा शुभ, कुछ को होगी नई चुनौतियों का सामना

मेष राशि- निर्णय लेने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ढेर सारे अवसर पाने के लिए आपको विनम्र और ईमानदार रहना चाहिए। अंत में आप देखेंगे कि आपकी प्रतिभा आपके काम आएगी और आप आसानी से सफल हो जाएंगे। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें। खर्च पर कंट्रोल करें। वृषभ राशि- आपको अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। सब कुछ भगवान की इच्छा के अनुसार होगा. बेहतर भविष्य के लिए रचनात्मक योजनाएं बनाएं ताकि आप अपना ख्याल रख सकें। ये दिन आपके जीवन में खुशियां और संतुष्टि लेकर आने वाला है। मिथुन राशि- आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। नए प्रोजेक्ट के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं, उसे प्राप्त करना हमेशा संभव नहीं होता है, विशेषकर विलासिता की वस्तुएं। आपको अपने साथी के साथ बात करने में आसानी होगी। कर्क राशि- आपको अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताना चाहिए। अगर आप अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं, तो आपको कमाई के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। सिंह राशि- जल्द ही आप आगे की यात्रा के लिए अपने जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव करने में सक्षम होंगे। स्थिति में सुधार के लिए आपको कुछ वित्तीय विचारों के साथ प्रयोग करने की आवश्यकता है। कन्या राशि- 24 अप्रैल के दिन आपके करियर और आय के स्तर में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। शादीशुदा लोगों को कुछ गलतफहमियों का सामना भी करना पड़ सकता है। दिन आपको अपने बारे में और अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कुछ सीखने में मदद करेगा। तुला राशि- आपको अपने परिवार और दोस्तों से समर्थन मिलेगा, जो आपको अच्छे भविष्य के बारे में पॉजिटिव सोचने में मदद करेगा। आपको अपने करियर और नौकरी के अवसरों पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि आप महत्वपूर्ण अवसर न चूकें। वृश्चिक राशि- 24 अप्रैल के दिन आपके काम में असंतुलन पैदा हो सकता है। जल्द ही आपको कोई दिलचस्प प्रोजेक्ट मिल सकता है। धैर्य रखने की कोशिश करें। छोटी बचत से शुरुआत करें और देखें कि आपका प्रदर्शन कैसा रहता है। धनु राशि- 24 अप्रैल के दिन आप अभी कोई बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं। बेहतर रहेगा कि अब आप अपने पार्टनर के संग क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें। ये दिन आपको जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कराने वाला है। मकर राशि- 24 अप्रैल के दिन सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलेंगे। आप दोनों के बीच विश्वास और अंडर्स्टैंडिंग होनी चाहिए। अगर आप शादी के बारे में सोच रहे हैं तो इसे फिलहाल टाल देना ही बेहतर है। कुंभ राशि- 24 अप्रैल के दिन आध्यात्मिक बनने का प्रयास करें ताकि आप खुश और संतुष्ट रह सकें। आपको लोगों से मदद और सपोर्ट मिलेगा। अपने परिवार या रिश्तेदारों से सलाह लें, जो खराब वक्त में आपका साथ दें। आपके प्रेम संबंध मधुर बने रहेंगे। मीन राशि- 24 अप्रैल के दिन आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। अभी आपको केवल एक ही काम पर ध्यान देने की जरूरत है और वह है आपका करियर और लोगों के साथ व्यवहार बनाना। आपको अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मंगल और 3 अन्य ग्रह बदलेंगे अपनी चाल, इन राशियों के लिए शुभ संकेत

मई 2026 का महीना ज्योतिष के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है. इस दौरान कई बड़े ग्रह अपनी चाल और स्थिति में बदलाव करेंगे, जिससे कई शुभ योग बनेंगे. इन ग्रहों के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. करियर, धन, पढ़ाई और रिश्तों से जुड़े मामलों में अच्छे परिणाम मिलने के संकेत हैं।  द्रिक पंचांग के मुताबिक, महीने की शुरुआत में यानी 1 मई को बुध मेष राशि में अस्त होंगे, इसके बाद मंगल मेष में प्रवेश करेंगे. फिर, शुक्र मिथुन राशि में जाएंगे. महीने के बीच में सूर्य वृषभ राशि में गोचर करेंगे. साथ ही बुध का वृषभ में उदय और बाद में मिथुन में प्रवेश भी इस समय को और खास बना देगा. इन सभी ग्रहों की चाल मिलकर कुछ राशियों के लिए शुभ समय बना सकती है।  मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए मई का महीना अच्छे अवसर लेकर आ सकता है. नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है. आपकी मेहनत का फल मिलेगा. कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान बढ़ेगी. इस दौरान धार्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं. पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।  वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए यह समय नई शुरुआत का हो सकता है. पढ़ाई से जुड़े लोगों को मनचाहा संस्थान मिल सकता है. व्यापार में भी नए अवसर सामने आएंगे. दोस्तों और करीबियों के साथ रिश्ते बेहतर होंगे. इस महीने यात्रा के भी कई मौके मिल सकते हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे।  सिंह राशि सिंह राशि के लोगों के लिए यह महीना तरक्की के संकेत दे रहा है. लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं. व्यापार में लाभ मिलने की संभावना है. नौकरी में पद और सम्मान दोनों बढ़ सकते हैं. आपकी मेहनत और समझदारी आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी।  मकर राशि मकर राशि वालों के लिए मई का महीना सुखद परिणाम लेकर आ सकता है. जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे काम आसान होंगे. प्रेम संबंधों में भी मिठास बनी रहेगी. कोई खास सरप्राइज मिल सकता है. रुके हुए काम पूरे होंगे. कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी राहत मिलने के संकेत हैं। 

23 अप्रैल का राशिफल: कुछ राशियों के लिए लाभकारी दिन, कुछ के लिए नई चुनौतियाँ

मेष अपने बजट और फ्यूचर गोल्स पर फोकस करें। आप अपने कनेक्शन को मजबूत बना सकते हैं। आज मेष राशि वालों के लिए प्यार और करियर में नए अवसर हैं। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए खुले दिमाग से काम लें। जरूरी काम पर ध्यान केंद्रित करें। वृषभ कल का दिन आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। प्यार और करियर में अवसर मिल सकते हैं। इसलिए सही रवैया बनाए रखना महत्वपूर्ण है। सफल होने के लिए अपने करियर में नई जिम्मेदारियां लें। मिथुन फाइनेंशियल मामले में सोच-समझकर डिसीजन लेने की आवश्यकता हो सकती है। आपको संतुलन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रोमांस से भरपूर प्रेम जीवन जिएं, जहां सभी पुराने मुद्दे सुलझ जाएं। टास्क को लगन के साथ पूरा करें। कर्क कल के दिन आप सिनीयर्स से तारीफ प्राप्त करेंगे। आज धन आगमन का भी योग है। आज रोमांटिक बनें और अपने पार्टनर के साथ अधिक समय बिताएं। काम में नई जिम्मेदारियां लें, जो करियर में वृद्धि का वादा कर सके। सिंह कल के दिन वित्तीय सफलता मिलने के योग हैं। अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं। आपसे सभी पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने की भी उम्मीद की जाती है। आप धन के मामले में पॉजिटिव रहेंगे, लेकिन सेहत संबंधी छोटी-मोटी दिक्कतें हो सकती हैं। कन्या कल के दिन अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए उनका लाभ उठाएं। वर्क लाइफ बैलेंस बनाने की कोशिश करें। खुद की देखभाल में शामिल होकर अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना याद रखें। पैसे कमाने के नए मौके मिल सकते हैं। तुला कल के दिन खुशियां बांटें। आप लव लाइफ को अगले लेवल पर ले जाने पर भी विचार कर सकते हैं। आपको अपने ऑफिस से जुड़ी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। धन आज समझदारी भरे फैसले लेने की अनुमति देता है। हेल्दी डाइट लें। वृश्चिक कल के दिन क्रिएटिव महसूस करेंगे। ये दिन व्यक्तिगत विकास के लिए अच्छा साबित होगा। अपने परिवार के सदस्यों के साथ गहराई से जुड़ें। क्रिएटिव एनर्जी का उपयोग करें। आज के दिन काम और स्वास्थ्य में संतुलन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करें। सिंगल जातकों के लिए विवाह के योग बनेंगे। धनु इस दिन धन के मामले पर कंट्रोल रखें। छोटी-मोटी स्वास्थ्य से जुड़ी प्रॉब्लम्स हो सकती है। प्रेम संबंधों को सकारात्मक बनाए रखें। छोटी-मोटी पेशेवर चुनौतियों के बावजूद, आप उनका सामना करेंगे। मकर हेल्थ संबंधी कुछ दिक्कतें होंगी, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। कोई बड़ा फाइनेंशियल मुद्दा सामने नहीं आएगा। अपनी प्रोफेशनल स्किल्स को साबित करने के लिए ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। आपका रिश्ता ज्यादातर दिक्कतों से मुक्त रहेगा। कुंभ कल फाइनेंशियल डिसीजन पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए। रिलेशन में सुखद पलों की तलाश करें। ध्यान रखें कि आप काम पर चुनौतियों को स्वीकार करें, जो आपके करियर में आगे बढ़ने में आपकी मदद करे। ऑयली फूड्स से दूर रहें। मीन आपके लिए पर्सनल ग्रोथ को बढ़ावा देने का दिन है। इमोशनल फीलिंग्स आपको परिवार और दोस्तों के साथ कनेक्शन को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शन करेगी। धन और समृद्धि बनी रहेगी। बॉस के साथ बहस से बचें। 

चारधाम यात्रा का आरंभ हरिद्वार से ही क्यों? जानें परंपरा और धामों की खासियत

चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. परंपरा के अनुसार, 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 23 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पावन यात्रा की शुरुआत हमेशा हरिद्वार से ही क्यों होती है? और इन चारों धामों का धार्मिक महत्व क्या है? आइए, विस्तार से जानते हैं. हरिद्वार से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा? हिंदू धर्म में हरिद्वार को देवताओं का द्वार कहा जाता है. मान्यता है कि यहीं से देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र तीर्थों की यात्रा का प्रवेश द्वार शुरू होता है. यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा है और यहां स्नान करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है. इसलिए श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर निकलने से पहले हरिद्वार में गंगा स्नान कर आत्मशुद्धि करते हैं. धार्मिक मान्यता यह भी है कि बिना हरिद्वार से यात्रा शुरू किए चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है. यही कारण है कि सदियों से यह परंपरा चली आ रही है. गंगोत्री धाम की कथा गंगोत्री धाम को मां गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं. माना जाता है कि गंगा का वास्तविक उद्गम गौमुख ग्लेशियर से होता है, लेकिन गंगोत्री धाम में ही मां गंगा की पूजा की जाती है. यमुनोत्री धाम की कथा यमुनोत्री धाम को मां यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना सूर्य देव और संज्ञा की पुत्री हैं और यमराज की बहन हैं. कहा जाता है कि यमुनोत्री में स्नान करने से मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है. केदारनाथ धाम की कथा केदारनाथ धाम भगवान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए शिव की शरण में गए. भगवान शिव उनसे नाराज होकर बैल का रूप धारण कर यहां छिप गए. बाद में जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तो शिव जी ने उन्हें दर्शन दिए और यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए. बद्रीनाथ धाम की कथा बद्रीनाथ धाम भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां तपस्या कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंड से बचाने के लिए बद्री (जंगली बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर लिया. इसी कारण इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा. यह भी माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. क्यों खास मानी जाती है चारधाम यात्रा? चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानी जाती है. गंगोत्री (जल) यमुनोत्री (शक्ति) केदारनाथ (शिव) और बद्रीनाथ (विष्णु) ये चारों धाम जीवन के चार महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा पर निकलते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं.