samacharsecretary.com

शनिवार के दिन सुंदरकांड पाठ क्यों है खास? तरीका और फायदे समझें

हिंदू धर्म शास्त्रों में गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्री रामचरितमानस’ के पांचवें अध्याय, सुंदरकांड का पाठ अत्यंत चमत्कारी और फलदायी माना गया है. यह केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और सफलता का महामंत्र है. वैसे तो यह पाठ कभी भी किया जा सकता है, लेकिन शनिवार को इसका विशेष महत्व है. माना जाता है कि शनिवार के दिन हनुमान जी के साथ-साथ न्याय के देवता शनिदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. अगर आप जीवन में बार-बार आ रही परेशानियों, ग्रह-दोषों, या किसी बड़े संकट से जूझ रहे हैं, तो शनिवार को विधि-विधान से सुंदरकांड का पाठ करने से अद्भुत लाभ मिल सकते हैं. आइए जानते हैं शनिवार के दिन सुंदरकांड पाठ करने से क्या होता है, इसकी सही विधि क्या है और इसके प्रमुख लाभ क्या हैं. क्यों है शनिवार को सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व? शनिवार का दिन मुख्य रूप से शनिदेव को समर्पित है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वह भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे. इसलिए, शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से शनि की महादशा, ढैय्या और साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है. यह पाठ कुंडली के अन्य मारक ग्रहों (जैसे राहु और केतु) के दुष्प्रभावों को भी शांत करता है. शनिवार को सुंदरकांड पाठ करने के लाभ शनि दोष से मुक्ति: यह शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों को कम करता है, जिससे जीवन में शांति आती है. हर मनोकामना की पूर्ति: मान्यता है कि लगातार संकल्प लेकर इसका पाठ करने से भक्त की सभी इच्छाएं जल्द ही पूर्ण होती हैं. आत्मविश्वास में वृद्धि: पाठ से हनुमान जी जैसा बल और बुद्धि प्राप्त होती है, जिससे आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति में जबरदस्त वृद्धि होती है. भय और संकटों से बचाव: यह पाठ हर प्रकार के संकट, अज्ञात भय और जीवन में आने वाली बाधाओं को तुरंत दूर करने वाला माना गया है. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर में मौजूद प्रेत बाधा, नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर दूर होती है. जिस स्थान पर यह पाठ होता है, वहां स्वयं बजरंगबली का वास होता है. सुंदरकांड पाठ की सही विधि पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त या शाम का समय सबसे शुभ माना जाता है. सबसे पहले स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र (काले रंग को छोड़कर) धारण करें. फिर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें. शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं, हनुमान जी को फूलमाला, सिंदूर, लाल पुष्प और लड्डू/गुड़-चना का भोग लगाएं. हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना दोहराते हुए संकल्प लें कि आप किस उद्देश्य से यह पाठ कर रहे हैं. सबसे पहले भगवान गणेश और अपने गुरु की वंदना करें. अब “राम सिया राम सिया राम जय जय राम” का कीर्तन या जाप करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुंदरकांड का पाठ अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए. इसे एक ही बैठक में पूरा करने का प्रयास करें. पाठ पूरा होने पर हनुमान चालीसा का पाठ करें. आखिर में भगवान हनुमान जी की आरती करें और उनसे अपनी गलती के लिए क्षमा मांगते हुए आशीर्वाद लें. भोग प्रसाद को भक्तों में वितरित करें और खुद भी ग्रहण करें.

इन 5 आदतों को अकेले अपनाएं, सफलता आपके कदम चूमेगी

यूं तो अपने जीवन में सफलता का स्वाद हर व्यक्ति चखना चाहता है। लेकिन यह सुख हर किसी को नसीब नहीं होता है। सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति को कठिन परिश्रम और लगन की जरूरत होती है। जिसके ना होने पर व्यक्ति हमेशा निराशा का मुंह देखता है। बहरहाल, सफलता हासिल करने के इस मूल मंत्र को तो ज्यादातर सभी लोग जानते हैं, लेकिन क्या आप यह भी जानते हैं कि मेहनत और लगन के अलावा भी सफलता पाने के लिए कुछ ऐसी चीजें हैं, जो व्यक्ति को हमेशा साथ में नहीं बल्कि हमेशा अकेले बैठकर करनी चाहिए। माना जाता है इन चीजों को अकेले बैठकर करने वाला व्यक्ति अपने लिए एक बेहतर जिंदगी का निर्माण कर सकता है। आइए जानते हैं जीवन से जुड़ी ऐसी ही 5 बातों के बारे में, जिन्हें सफलता पाने के लिए व्यक्ति को हमेशा अकेले करना चाहिए। अकेले बैठकर करें पढ़ाई किसी व्यक्ति या विद्यार्थी के लिए सफलता का पहला मंत्र यह है कि उसे हमेशा अकेले बैठकर ही अपना पाठ याद करना या नौकरी की तैयारी करनी चाहिए। अकेले में व्यक्ति अपने पाठ और लक्ष्य पर अच्छी तरह ध्यान लगा पाता है जबकि भीड़ में, दोस्तों के साथ बैठकर पढ़ने से उसका ध्यान सिर्फ पढ़ाई से इधर-उधर भटकता रहता है। जिससे ना सिर्फ उसका समय बल्कि पढ़ाई भी खराब होती है। पैसों से जुड़ा कोई काम आपने अकसर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि अच्छी से अच्छी दोस्ती भी पैसों के बीच में आने से टूट जाया करती है। ऐसे में एक सफल व्यक्ति हमेशा इस बात का ध्यान रखता है और हमेशा पैसों से जुड़े काम अकेले में ही करना पसंद करता है। अगर आप पैसों के जुड़े काम दोस्तों या लोगों के साथ मिलकर करते हैं तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। योग अगर आप रोजमर्रा का तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन और योग का सहारा लेते हैं तो उसे भी अकेले ही करने की कोशिश करें। योग और मेडिटेशन अन्य लोगों के साथ करने से आपके मन को शांति महसूस नहीं होगी, जिससे आप तनाव महसूस करेंगे और अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं। जीवन के निर्णय खुद लें जीवन में सफलता ही नहीं बल्कि अकेले रहने से कई बार जीवन सुखद भी बन जाता है। अकेले रहने से व्यक्ति को अपने लिए समय निकालने के साथ आत्मचिंतन और आत्ममंथन करने का मौका मिलता है। जिससे वह अपनी कमियों को दूर करके लक्ष्य हासिल करने के लिए जरूरी नई बातें और तरीके सीखता है। अकेले चलने वाला व्यक्ति अपने जीवन के निर्णय खुद लेता है। जिससे उसकी दूसरों के प्रति निर्भरता कम हो जाती है और उसे अपने जीवन के लिए सही फैसले लेने आ जाते हैं। वहीं चार लोगों से ली गई सलाह आपको आपके लक्ष्य से भटका सकती है।

मनी प्लांट लगाने के बाद भी लाभ नहीं मिल रहा? वजह बन सकती हैं ये आम गलतियां

जैसा कि नाम से ही जाहिर है, मनी प्लांट को धन आकर्षित करने वाला पौधा माना गया है। यदि आप वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए यदि घर में मनी प्लांट का पौधा लगाते हैं, तो इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी का फ्लो बढ़ता है। लेकिन अगर आपको मनी प्लांट लगाने से शुभ परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो इसके पीछे आपकी कुछ गलतियां हो सकती हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में। इन दिशा में लगाएं पौधा वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट लगाने के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को सबसे अच्छा माना गया है। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि मनी प्लांट को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आपको आर्थिक समस्याएं झेलनी पड़ सकती है।   रखें इन बातों का ध्यान मनी प्लांट का पौधा लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि मनी प्लांट की बेल को इस तरह लगाएं कि वह ऊपर की ओर बढ़ता हुआ हो। ऐसा करना शुभ माना जाता है। वहीं इस बात का भी ध्यान रखें कि बेल जमीन को न छुए। इसके साथ ही मनी प्लांट के पौधे को सूखने से भी बचाना चाहिए और इसके सूखी हुई और पीली पत्तियों को हटाते रहना चाहिए। अगर आप इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपको मनी प्लांट लगाने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। न करें ये गलतियां कई लोगों का मानना है कि मनी प्लांट को चोरी करके लगाना अच्छा होता है, लेकिन ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, मनी प्लांट को घर के बाहर नहीं बल्कि अंदर लगाना चाहिए। साथ ही इसे किसी अंधेरे वाले स्थान या बाथरूम के पास न रखें। आप इसे किसी कांच की बोतल या गमले में लगा सकते हैं। इन बातों का ध्यान रखने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है।  

2026 में कब-कब पड़ेगी पूर्णिमा? जानें व्रत और पूजा की पूरी तारीखें

पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है. इसे विशेष रूप से त्योहार की तरह मनाया जाता है क्योंकि यह चंद्र मास का वह दिन है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है. हर साल 12 पूर्णिमा होती हैं, लेकिन वर्ष 2026 में अधिमास होने के कारण 13 पूर्णिमा का संयोग बन रहा है. इस दिन को मां लक्ष्मी की जन्म तिथि के रूप में भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है. इसके अलावा, चंद्रमा को अर्घ्य देने से रोग-दोष और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं. कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन पवित्र नदी या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है. सिर्फ पूजा और स्नान ही नहीं, बल्कि पूर्णिमा का दिन दान, त्याग और पुण्य कर्म करने के लिए भी विशेष महत्व रखता है. इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुणा बढ़कर मिलता है. इसलिए पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है. पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा  3 जनवरी 2026   माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026   फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च 2026 चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल 2026 वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत (अधिक मास) 31 मई 2026 ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2026 आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 अश्विन पूर्णिमा 26 अक्टूबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 मार्गशीर्ष पूर्णिमा  23 दिसंबर 2026 पूर्णिमा पर स्नान का महत्व पूर्णिमा पर गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. इसे केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण का भी साधन माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जल में दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है, जो मनुष्य के पाप और दोषों को दूर करने में सहायक होती है. इसलिए पूर्णिमा पर स्नान करने से आत्मा और मन दोनों की शांति मिलती है.  पूर्णिमा का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों में पूर्णिमा का व्रत और ध्यान करने का विशेष महत्व बताया गया है.  ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए व्रत और पूजा से व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है.  पूर्णिमा की दिव्य ऊर्जा का असर मन और शरीर दोनों पर पड़ता है.  

5 दिसंबर का दैनिक राशिफल, जानें 12 राशियों का आज का भविष्य

मेष राशि- 5 दिसंबर के दिन रिलेशन और करियर में थोड़ा तनाव का सामना करना पड़ सकता है। चीजों के कंट्रोल से बाहर जाने से पहले ही प्यार से जुड़ी हर समस्या को सॉल्व करें। आधिकारिक चुनौतियों के बावजूद, आप पेशेवर रूप से सफल होंगे। वृषभ राशि- 5 दिसंबर का दिन पैसों के मामले में अपके लिए शुभ रहेगा। आज जल्दबाजी में किसी भी तरह का डीसीजन लेने से बचें। आज आपकी ऊर्जा क्रीएटिवटी को आकर्षित करती है, लेकिन टास्क चुनने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। मिथुन राशि- 5 दिसंबर के दिन से ही व्यक्तिगत विकास और सफलता पर ध्यान देना शुरू करें। प्रेम, करियर और वित्त में भाग्य और प्रगति आपका इंतजार कर रही है। परिवर्तन को अपनाएं और चुनौतियों का सामना डटकर करें। कर्क राशि- 5 दिसंबर का दिन शानदार रहने वाला है। सेल्फ-लव की यात्रा आपका इंतजार कर रही है। सितारें आपकी यात्रा में क्लियरिटी और मोटिवेशन प्रदान करने के लिए संरेखित हो रहे हैं। पैसों के मामले में कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है। सिंह राशि- 5 दिसंबर का दिन उथल-पुथल भरा साबित हो सकता है। करियर में कई ऐसे टास्क मिल सकते हैं, जिन्हे समय रहते खत्म कर पाना मुश्किल लगेगा। याद रखें, ऐसी कोई भी प्रॉब्लम नहीं है, जिसे आप सॉल्व नहीं कर सकते। कन्या राशि- 5 दिसंबर के दिन स्मार्ट तरीके से पैसों को मैनेज करें। आज आपको सभी डीसीजन सावधानी के साथ लेने होंगे। लॉंग डिस्टेंस रिलेशन वालों की जल्द ही अपने पार्टनर से मुलाकात हो सकती है। तुला राशि- 5 दिसंबर के दिन परिवर्तनों और अप्रत्याशित प्रोजेक्ट्स को अपनाएं। हेल्थ पर भी ध्यान दें। नए अवसरों और विकास के रास्ते को अनलॉक करें। आज बहस से दूरी बनाएं। वित्तीय मामलों पर नजर रखें। वृश्चिक राशि- 5 दिसंबर के दिन पूरे कॉन्फिडेंस के साथ चुनौतियों से निपटें। आज का दिन अवसर और सावधानी का मिश्रण प्रदान करता है। दिन की मांगों से निपटते समय अपने लॉंग टर्म लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें। धनु राशि- 5 दिसंबर के दिन की एनर्जी का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहें। आज का दिन अवसरों से भरपूर रहेगा। पर्सनल ग्रोथ और नई मुलाकातों पर फोकस करना बेहतर रहेगा। मकर राशि- 5 दिसंबर का दिन मकर के जातकों के लिए दिलसचस्प रहने वाला है। नई संभावनाओं को अनलॉक करें, बदलावों को अपनाएं। सरप्राइज आपका इंतजार कर रहा है। खुली सोच नए अवसर लेकर लाएगी। कुंभ राशि- 5 दिसंबर के दिन महत्वपूर्ण वृद्धि का अवसर आज आपके द्वार पर दस्तक दे सकता है। इसलिए सोच-समझकर कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट करें। हेल्थ से जुड़े छोटे-मोटे मुद्दे आपको परेशान कर सकते हैं। मीन राशि- 5 दिसंबर का दिन पॉजिटिव रहेगा। कुछ लोगों को पेरेंट्स से अपने रिलेशन के लिए फुल सपोर्ट मिल सकता है। अपनी मेंटल हेल्थ पर गौर फरमाएं और बहुत ज्यादा प्रेशर लेने से बचें। किसी पुराने निवेश से बंपर धन-लाभ हो सकता है।

इन जगहों पर भूलकर भी न पहनें चप्पल, नहीं तो घर में आती है नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने की अपनी ऊर्जा और पवित्रता होती है। जिस तरह हम कुछ जगहों पर जूते-चप्पल उतारकर प्रवेश करते हैं, उसी तरह वास्तु में घर के भीतर भी कुछ ऐसे स्थान बताए गए हैं जहां चप्पल या जूते पहनकर जाना अशुभ माना जाता है। इन स्थानों पर जूते-चप्पल पहनने से न सिर्फ वहां की पवित्रता भंग होती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है, जिसका सीधा असर घर की सुख-समृद्धि पर पड़ता है। तो आइए जानते हैं कौन से स्थानों पर जूते-चप्पल पहनने नहीं चाहिए। रसोई घर रसोई घर को अन्नपूर्णा देवी का स्थान और घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। यहां भोजन तैयार होता है, जो ब्रह्म या ऊर्जा का स्रोत है। बाहर से लाई गई चप्पलें अशुद्ध होती हैं और उनमें गंदगी लगी होती है। रसोई में इन्हें पहनकर प्रवेश करने से अन्न का अपमान होता है और नकारात्मक ऊर्जा भोजन में प्रवेश कर सकती है। माना जाता है कि रसोई में चप्पल पहनने से घर की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। तिजोरी या धन रखने का स्थान तिजोरी वह स्थान है जहां धन, आभूषण और महत्वपूर्ण कागजात रखे जाते हैं। यह साक्षात देवी लक्ष्मी का निवास माना जाता है। धन के स्थान पर चप्पल पहनकर जाने से धन की देवी लक्ष्मी का अपमान होता है। इस स्थान पर अशुद्धता लाने से घर में धन की बरकत रुक सकती है और आर्थिक तंगी आ सकती है। पूजा घर या मंदिर पूजा घर घर का सबसे पवित्र और शांत स्थान होता है, जहां देवी-देवताओं का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। यह स्पष्ट रूप से धर्म और स्वच्छता से जुड़ा है। जूते-चप्पल गंदे होते हैं, और इन्हें पहनकर पूजा घर में प्रवेश करना अत्यंत अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता और घर में नकारात्मकता का संचार होता है। अन्न भंडारण या अनाज रखने का स्थान चाहे वह किचन से अलग कोई स्टोररूम हो या घर का कोई कोना जहां अनाज, चावल, दालें आदि संग्रहित किए जाते हैं, यह स्थान भी अन्नपूर्णा देवी से जुड़ा माना जाता है। अनाज को कभी भी पैरों से छूना या उसके पास जूते-चप्पल पहनकर जाना उचित नहीं माना जाता है, क्योंकि अन्न का सम्मान करना ज़रूरी है। अन्न के भंडार के पास चप्पल पहनकर जाने से घर में अन्न की कमी या अन्न की बरकत में बाधा आ सकती है।

अपस्किलिंग ही है करियर रीस्टार्ट का सबसे बड़ा मंत्र

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। और सीखना तब ज्यादा जरूरी हो जाता है, जब बात अस्तित्व की हो। एक महिला का जीवन चारदीवारी के बाहर भी होता है। पर, घर के बाहर की ओर नजर डालें तो स्थितियां अभी भी चुनौतीपूर्ण ही हैं क्योंकि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में बेहद कम नजर आती है। इसका एक बड़ा कारण है घर की जिम्मेदारी। घर संभालने और बच्चों की देखरेख के लिए अधिकांश कामकाजी महिलाओं को अपने काम से ब्रेक लेना ही पड़ता है। कई लोगों के लिए यह छुट्टी आजीवन हो जाती है। जो वापस आना चाहती हैं, उनके लिए राहें आसान नहीं होती क्योंकि चार-पांच साल का करियर गैप और उस बीच उद्योग में आए बदलाव उनकी वापसी की राह कठिन कर देते हैं। एक अध्ययन बताता है कि भारत में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा केवल 25 प्रतिशत है, जिसमें भी अकसर बच्चों की देखरेख के चलते काम छोड़ने वाली महिलाओं में से करीब 60-70 प्रतिशत की वापसी वर्क फोर्स में नहीं होती है। हालांकि अच्छी बात यह है कि कुछ महिलाओं को अब इसका अहसास होने लगा है। और काम पर वापसी के लिए वह खुद को नए दौर के लिए तैयार भी करने लगी हैं। एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की मानें तो कोविड महामारी के बाद करीब 53 प्रतिशत महिलाएं अब उनके अलग-अलग कोर्स में दाखिल ले रही हैं। यह आंकड़ा महामारी से पहले के आंकड़े का दोगुना है। लिंक्डइन के ट्रेंड पर नजर डालें तो पिछले कुछ समय में नौकरी की दुनिया में छोटे-छोटे स्किल्स की मांग बढ़ी है। ऐसे में ऐसे शॉर्ट टर्म कोर्स करके खुद को बेहतर बनाना और नई दुनिया के लिए खुद को तैयार करना आपके करियर को नए पंख दे सकता है। अगर आप अभी भी कामकाजी हैं, तब भी अपस्किल आपके करियर को उड़ान देगी। सीखना जारी रखें माना की जिम्मेदारियां कम नहीं हैं, लेकिन यह बात भी ध्यान में रखें कि समय तेजी से बदल रहा है। ऐसे में आपका भी सीखना जारी रखना बेहद जरूरी है। करियर काउंसलर जितिन चावला कहते हैं कि चाहे आप नौकरी कर रही हैं या फिर ब्रेक के बाद वापसी कर रही हैं, आपको जमाने के हिसाब से ही चलना होगा। दौर टेक्नोलॉजी का है और जो इसमें पीछे हो गया, वह पिछड़ता चला जाएगा। आप ऐसा नहीं चाहतीं तो अपने क्षेत्र को समझें, उसमें आने वाले बदलावों को भांपें और खुद को तैयार करें। सीखने के लिए ऑनलाइन कई प्लेटफॉर्म हैं, जो आपकी राह आसान बनाते हैं। इसके अलावा कुछ जाने-माने संस्थान भी समय-समय पर शॉर्ट टर्म कोर्स निकालते हैं। ऐसी जगह से कोर्स करने पर आप खुद को और बेहतर दर्शा सकती हैं। इनका लाभ उठाएं और अपने रेज्यूम को और बेहतर बनाएं। इंटर्नशिप का लाभ उठाएं अगर आपके हाथ में किसी तरह का काम नहीं है तो नौकरी में वापसी के लिए इंटर्नशिप आपकी मदद कर सकता है। इसकी जानकारी जॉब पोर्टल पर आसानी से मिल जाएगी। यहां तक कि सरकार भी कई बार इंटर्नशिप प्रोग्राम निकालती है। कई बार इसमें उम्र की सीमा निर्धारित होती है, लेकिन हर प्रोग्राम में ऐसा नहीं होता। आप अपने क्षेत्र में ऐसे प्रोग्राम तलाशें और काम पर वापसी की तैयारी करें। इंटर्नशिप से आप कार्यक्षेत्र के नएपन को तो समझ ही पाएंगी, साथ ही उसी संस्थान में आपके लिए नौकरी की संभावना भी खुल सकती है। यह एक तरह से बिना पैसे लगाए कोई कोर्स करने जैसा ही हुआ। कुछ इंटर्नशिप नि:शुल्क होती हैं, वहीं कुछ में पैसे मिलते हैं। बदलते दौर को समझें करियर का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं है। अब समय स्टार्टअप का भी है। आपका करियर किसी भी क्षेत्र का रहा हो, लेकिन नए स्किल सीखकर भी आप खुद के लिए कई संभावनाएं बना सकती हैं। ऑनलाइन ऐसे कई प्लेटफॉर्म हैं, जो महिलाओं को इसके लिए तैयार कर रहे हैं। मान लीजिए आप पहले एचआर में काम करती थीं, लेकिन अब कॉर्पोरेट में वापसी नहीं हो पा रही। ऐसे में निराश होने की जगह आप ऑनलाइन आर्ट सीखकर किसी स्कूल में आर्ट टीचर बन सकती हैं या खुद का आर्ट बिजनेस शुरू कर सकती हैं। यहां तक कि ऐसे कई कोर्स भी हैं, जिन्हें करने के बाद आप खुद ऑनलाइन पढ़ा सकती हैं। इस काम में पंखुड़ी, मॉम्सप्रेसो, द गुड ग्लैम ग्रुप जैसे ऐप आपकी मदद करेंगे।  

राहु–शुक्र युति 2026: 3 राशियों के लिए खुलेगी सफलता की नई राह, जानें आपका प्रभाव

नए साल की शुरुआत होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. नया साल ग्रहों के गोचर के लिहाज से बड़ा ही विशेष रहने वाला है. अगले साल 2026 की शुरुआत में शुक्र शनि देव की राशि कुंभ में गोचर करेंगे. इस राशि में राहु भी गोचर कर रहे हैं. ऐसे में साल 2026 में कुंभ राशि में राहु-शुक्र युति बनाएंगे. राहु-शुक्र का संयोग ज्योतिषीय दृष्टि से काफी प्रभावशाली माना जाता है. राहु और शुक्र दोनों का ही संबंध भौतिक सुख, आकर्षण, अवसर, नाम-प्रतिष्ठा और विलासिता से जुड़ा बताया जाता है, लेकिन उर्जा के लिहाज दोनों एक दूसरे से काफी अलग हैं. राहु तेजी, महत्वाकांक्षा और असाधारण उपलब्धियों की ओर बढ़ाता है. वहीं शुक्र आनंद, संबंध, कला, सौंदर्य, प्रेम और धन का कारक माना जाता है. आइए जानते हैं कि साल 2026 की शुरुआत में बनने जा रही दोनों ग्रहों की युति से किन राशि वालों का भाग्य चमक सकता है. वृषभ राशि साल 2026 की शुरुआत में बन रही राहु-शुक्र की युति वृषभ राशि वालों के लिए बहुत लाभदायक साबित हो सकती है. इस दौरान वृषभ राशि वालों को आर्थिक और करियर संबंधी सफलता मिल सकती है. लंबे समय चली आ रहीं कोशिशें अचानक जीवन में बदलाव ला सकती हैं. नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन मिल सकता है. व्यापार में विस्तार हो सकता है. मिथुन राशि साल 2026 की शुरुआत में बन रही राहु-शुक्र की युति मिथुन राशि वालों के लिए बहुत विशेष साबित हो सकती है. इस दौरान मिथुन राशि वालों की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ सकती है. भाग्य और धन में वृद्धि हो सकती है. नौकरी में परिवर्तन हो सकता है. धनु राशि राहु-शुक्र की युति धनु राशि वालों के लिए बहुत अनुकूल साबित हो सकती है. इस दौरान धनु राशि वालों के जीवन में खुशियां आ सकती हैं. आत्मविश्वास बढ़ सकता है. नई पहचान और नए अवसर मिल सकते हैं.

तुलसी चालीसा का पाठ करें इस पूर्णिमा: घर में आएगी सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का वास

हिंदू धर्म में हर माह में एक पूर्णिमा मनाई जाती है. इस माह में मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा की जाती है. पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फल प्राप्त होते हैं. इस दिन तुसली माता की भी पूजा की जाती है. इस दिन तुसली माता की पूजा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन तुलसी के पौधे की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. साथ ही इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में प्रवेश करती है, जिससे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती. मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 43 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में इस साल 04 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी. इसी दिन पूर्णिमा का स्नान-दान किया जाएगा. तुलसी चालीसा श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता, देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।। तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

करियर ग्रोथ क्यों थम जाती है? जानें कौन से डेस्क प्लांट्स रोकते हैं तरक्की

हमारा कार्यस्थल वह स्थान है जहां हम अपने दिन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बिताते हैं। इसलिए, यहां की ऊर्जा हमारे प्रदर्शन, मनोदशा और करियर की सफलता को सीधे प्रभावित करती है। प्राचीन भारतीय वास्तु शास्त्र और चीनी फेंग शुई दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि आसपास रखी गई वस्तुएं विशेषकर जीवित पौधे, एक विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। पौधों का चुनाव करते समय, हमें केवल उनके सौंदर्य को नहीं देखना चाहिए बल्कि उनके ऊर्जावान प्रतीकवाद को समझना चाहिए। गलत पौधे रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक सकता है, जिससे तनाव, टकराव और व्यवसायिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। आइए जानते हैं, वे कौन से पौधे हैं जिनसे ऑफिस डेस्क पर बचना चाहिए और क्यों: कांटेदार या नुकीले पत्ते वाले पौधे वास्तु और फेंग शुई दोनों में माना जाता है कि नुकीले और कांटेदार पौधे तीक्ष्ण ऊर्जा पैदा करते हैं, जो रिश्तों में तनाव, टकराव और आक्रमण की भावना को बढ़ावा देती है। ये ऊर्जाएं अक्सर आपके आसपास के लोगों के साथ आपके संबंधों को बिगाड़ती हैं। ऑफिस डेस्क पर ये पौधे रखने से आपके सहकर्मियों और वरिष्ठों के साथ आपके संबंध खराब हो सकते हैं। काम का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है, जिससे टीमवर्क और सकारात्मक समीक्षा की संभावनाएं कम हो जाती हैं। बोनसाई के पौधे बोनसाई एक छोटे से बर्तन में पौधे के प्राकृतिक विकास को जानबूझकर रोकता है। यह रुकावट और सीमित विकास की ऊर्जा का प्रतीक है। कार्यक्षेत्र में, यह प्रतीकवाद बताता है कि आपका करियर का विकास अवरुद्ध हो गया है या आपकी प्रगति धीमी हो गई है। यह अवचेतन रूप से आपकी महत्वाकांक्षाओं को दबाता है और आपकी करियर की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है, जिससे प्रमोशन मिलने में अप्रत्याशित देरी हो सकती है। मुरझाए हुए या मृत पौधे  मृत या मुरझाए हुए पौधे उदासी, अस्वस्थता और निराशा की ऊर्जा का स्पष्ट प्रतीक हैं। ये यिन ऊर्जा को दर्शाते हैं, जो निष्क्रिय और नकारात्मक होती है। वास्तु में इन्हें दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। यदि आपकी डेस्क पर जीवनरहित पौधे हैं, तो यह आपके कार्य में गति की कमी को दर्शा सकता है। यह न केवल आपकी मानसिक ऊर्जा को कम करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आप अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह हैं, जो प्रमोशन के लिए एक असुरक्षित संकेत है। गहरा रंग या अत्यधिक झाड़ीदार पौधे फेंगशुई में गहरे, घने पौधे बहुत अधिक यिन ऊर्जा पैदा करते हैं, जो कार्यक्षेत्र की तेज और सक्रिय यांग ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं है। अत्यधिक घनापन ऊर्जा के प्रवाह को अवरुद्ध करता है और स्थान को अंधकारमय बनाता है। डेस्क पर ये पौधे रखने से काम में आलस्य, थकान और निर्णय लेने में अस्पष्टता आ सकती है। इससे आपकी कार्यक्षमता घटती है और आप अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं, जिसका सीधा असर आपके प्रमोशन पर पड़ता है। लटकने या बेल वाले पौधे वास्तु के अनुसार, बेल या लटकने वाले पौधे यदि जमीन की ओर बढ़ते हैं या नीचे की ओर लटकते हैं, तो यह करियर में गिरावट या रुकावट को दर्शाता है। इन्हें ऊपर की ओर सहारा देकर रखना चाहिए। यदि ये अनियंत्रित रूप से लटक रहे हैं, तो यह नियंत्रण की कमी को दर्शा सकता है, जो प्रमोशन के समय आपकी लीडरशिप क्षमताओं पर सवाल खड़े कर सकता है।