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Suzuki Motorcycle इंडिया ने कीमतों में किया संशोधन, GST 2.0 के कारण बड़ी बचत

मुंबई   GST 2.0 के चलते वाहन निर्माता कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर रही हैं. नई GST दरों के चलते 350cc से कम क्षमता वाली बाइक और स्कूटरों की कीमतों में कटौती की जा रही है. अब तक कई दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने अपनी कीमतों की घोषणा कर दी है. इसी क्रम में Suzuki Motorcycle India भी अपने उत्पादों की कीमतों में कटौती करने वाली है. Suzuki Motorcycle के उत्पादों की कीमतों में होने वाली कटौती Suzuki की बाइक्स और स्कूटर की संशोधित कीमतें मॉडल पुरानी कीमत (एक्स-शोरूम, दिल्ली) नई कीमतें (एक्स-शोरूम, दिल्ली) कीमत में अंतर Suzuki Access 125 1,02,400 रुपये 93,877 रुपये 8,523 रुपये Suzuki Avenis 125 94,000 रुपये 86,177 रुपये 7,823 रुपये Suzuki Burgman Street 1,00,600 रुपये 92,227 रुपये 8,373 रुपये Suzuki Burgman Street EX 1,17,700 रुपये 1,07,902 रुपये 9,798 रुपये Suzuki GIXXER 1,38,401 रुपये 1,26,881 रुपये 11,520 रुपये Suzuki GIXXER SF 1,47,901 रुपये 1,35,590 रुपये 12,311 रुपये Suzuki GIXXER 250 1,98,501 रुपये 1,81,976 रुपये 16,525 रुपये Suzuki GIXXER SF 250 2,16,500 रुपये 1,98,476 रुपये 18,024 रुपये Suzuki V-Strom SX 2,16,000 रुपये 1,98,018 रुपये 17,982 रुपये जानकारी के अनुसार Suzuki Motorcycle ने 350cc और उससे कम क्षमता के अपने पूरे लाइन-अप की कीमतों में कटौती करने वाली है. सबसे पहले, कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली 125cc वाहनों में से एक Suzuki Access 125 की बात करें तो कंपनी इसकी कीमत में 8,523 रुपये की कटौत करने वाली है. वहीं दूसरी ओर Suzuki Access के स्पोर्टी वर्ज़न, Suzuki Avenis 125 की कीमत में 7,823 रुपये तक की अपेक्षाकृत कम कटौती की जा सकती है. इसके अलावा, Suzuki Burgman Street की बात करें तो इसकी कीमतों में 8,373 रुपये तक की कटौती की जाएगी. Suzuki Burgman Street के ज्यादा महंगे EX वेरिएंट की कीमतों में 9,798 रुपये की ज़्यादा कटौती की जाएगी. बाइक्स की कीमतों की बात करें तो, Suzuki Gixxer लाइनअप की कीमतों में कम से कम 11,520 रुपये की कटौती की जाएगी, जबकि ज़्यादा महंगी Gixxer SF 250 पर सबसे ज़्यादा 18,024 रुपये की छूट दी जाएगी. इसके अलावा Suzuki Motorcycle की क्वार्टर-लीटर टूरर मोटरसाइकिल Suzuki V-Strom SX की कीमत में 17,982 रुपये की गिरावट आएगी. इसके अलावा, Suzuki Motorcycle का कहना है कि स्पेयर पार्ट्स और एक्सेसरीज पर कम GST का लाभ भी मालिकों को दिया जाएगा और इससे रखरखाव की लागत भी कम होगी.    

अपोलो हॉस्पिटल्स ने मनाई अपनी 42वीं सालगिरह

अपोलो हॉस्पिटल्स ने मनाई अपनी 42वीं सालगिरह अपोलो 24/7 डिजिटल हेल्थ के माध्यम से 40 मिलियन भारतीयों को दी सेवाएं  नई दिल्ली  अपोलो हॉस्पिटल्स ने देश भर के 19000 पिनकोड्स तक पहुंच बनाने, 185 देशों का भरोसा जीतने और 200 मिलियन से अधिक ज़िंदगियों पर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने के बाद अपनी 42वीं सालगिरह का जश्न मनाया। अपोलो ने 1983 में भारत का पहला कॉर्पोरेट हास्पिटल खोल कर स्वास्थ्यसेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रान्ति की शुरूआत की, पिछले चार दशकों की अपनी यात्रा में अस्पताल 51 लाख से अधिक सर्जरियों और 27000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं को अंजाम दे चुका है। अपोलो ने 11 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित कर देश में हेल्थकेयर सेक्टर में कुशल मानवपूंजी बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।   देश की हेल्थकेयर की गुणवत्ता में भरोसा उत्पन्न कर, अपोलो ने भारत को उत्कृष्ट देखभाल के विश्वस्तरीय गंतव्य के रूप में स्थापित किया है, जबकि इससे पहले मरीज़ों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता था। डॉ प्रताप सी रेड्डी, चेयरमैन अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, ‘‘1983 में अपोलो की शुरूआत के साथ एक अस्पताल का नहीं बल्कि एक आंदोलन का जन्म हुआ। पिछले चार दशकों के दौरान यह आंदोलन ऐसी शक्ति बनकर उभरा है, जिसने 200 मिलियन लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, 185 देशों का भरोसा जीता है और हेल्थकेयर को नए आयाम दिए हैं। हम हमेशा से विश्वस्तरीय देखभाल को सुलभ और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु प्रयासरत रहे हैं। भारत विश्वस्तरीय मंच पर विकसित हो रहा है, इस बीच अपोलो एक प्रेरक शक्ति के रूप में स्वस्थ समाज के निर्माण, चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के साथ सुनिश्चित करेगा कि परिवार, उम्मीद स्वास्थ्य एवं खुशहाली के साथ भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।’ अपोलो की यात्रा भारत की बढ़ती दीर्घायु और स्वास्थ्य के मानकों के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। विदेशी देखभाल पर निर्भरता कम कर, विभिन्न सेक्टरों में चिकित्सा के मानकों को बेहतर बनाकर और लाखों लोगों तक पहुंच बनाकर, अपोलो ने मरीज़ों की उम्र बढ़ाने, उन्हें लम्बे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम बनाया है तथा हेल्थकेयर के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत बनाया है। इस अवसर पर डॉ प्रीथा रेड्डी, एक्ज़क्टिव वाईस चेयरपर्सन, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, ‘‘देश की क्षमता इसके लोगों के स्वास्थ्य में निहित है। भारत के डॉक्टरों, नर्सों और मरीज़ों की देखभाल करने वाले स्टाफ को प्रगति के साइलेन्ट आर्कीटेक्ट कहा जा सकता है। अपोलो में हमने न सिर्फ अस्पताल बल्कि मानव पूंजी बनाई है। जब हम लोगों में निवेश करते हैं, तो वास्तव में हम देश की गरिमा, प्रतिष्ठा और भविष्य में निवेश करते हैं।’ डॉ सुनीता रेड्डी, मैनेजिंग डायरेक्टर, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, ‘‘विकास की यात्रा में हमने हमेशा से मरीज़ों को प्राथमिकता दी है। निवारक देखभाल से लेकर आधुनिक उपचार तक, डिजिटल स्वास्थ्य से लेकर अनुसंधान तक, हर विस्तार भरोसे, सुलभता और प्रभाव पर आधारित रहा है। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, और हेल्थकेयर ही इस विकास की सबसे मजबूत नींव होनी चाहिए। अपोलो का मिशन यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्तापूर्ण देखभाल 1.4 बिलियन लोगों के इस देश के हर कोने तक पहुंचे।’ अपोलो ने भारत में चिकित्सा जगत का चेहरा बदल डाला है, संस्थान कई उल्लेखनीय कार्यों में अग्रणी रहा है जैसे दक्षिण एशिया का पहला प्रोटोन कैंसर सेंटर, भारत का पहला एआई-प्रेसीज़न ओंकोलोजी सेंटर और देश का पहला साइबरनाईफो रोबोटिक रेडियोसर्जरी सिस्टम। आज अपोलो 28 आधुनिक रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म्स, एआई-पावर्ड कार्डियोवैस्कुलर रिस्क प्रेडिक्शन, ऑगमेंटेड रिएल्टी- असिस्टेड सर्जरी में सबसे आगे है और आने वाले कल की चिकित्सा को सुलभ बना रहा है। डॉ संगीता रेड्डी, जॉइन्ट मैनेजिंग डायरेक्टर- अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘हेल्थकेयर का भविष्य सीमारहित, व्यक्तिगत तथा भावी तकनीकों से पावर्ड होना चाहिए। अपोलो में हम न सिर्फ बीमारियों के इलाज में बल्कि इनके अनुमान और रोकथाम के लिए भी एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं। एक ऐसी दुनिया की कल्पना कीजिए जहां हर भारतीय के पास डिजिटल हेल्थ ट्विन होगा, जहां हस्तक्षेप रियल टाईम में सुलभ, सटीक और किफ़ायती होंगे- एक ऐसा भविष्य जिसका हम निर्माण कर रहे हैं।’ अपोलो 24/7 के माध्यम से 40 मिलियन से अधिक भारतीय जब चाहें, जहां चाहें टेलीकन्सलटेशन, डायग्नॉस्टिक्स एवं फार्मेसी सर्विसेज़ का उपयोग कर सकते हैं। अस्पतालों के दायरे से बढ़कर, अपोलो फाउन्डेशन के बिलियन हार्ट्स बीटिंग एवं टोटल हेल्थ प्रोग्राम 1.9 मिलियन संवेदनशील लोगों तक पहुंचे हैं और अपोलो की इस अवधारणा की पुष्टि की है कि हेल्थकेयर कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि सभी का एक समान अधिकार है।

Gold Rate में बड़ी गिरावट की संभावना, निवेशकों के लिए अलर्ट — सोना फिलहाल न खरीदें

नई दिल्ली चंद दिन के बाद से देश में फेस्टिव सीजन (Festive Season) का आगाज हो जाएगा. दुर्गा पूजा के बाद दिवाली और धनतेरस है, इस मौके पर देश में सोना-चांदी खरीदने की परंपरा रही है. लेकिन इस बार त्योहार थोड़ी फीकी रह सकती है, क्योंकि सोना-चांदी इतना महंगा हो चुका है कि भाव सुनते ही लोग सोच में पड़ जाते हैं.  दरअसल, पिछले एक साल में सोना (Gold) करीब 46% महंगा हो चुका है. हैरानी तो इस बात होती है कि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  फेस्टिव सीजन में खरीदने वालों के अलावा वो लोग भी परेशान हैं, जिनके यहां इस साल शादी है, बिना ज्वेलरी की शादी कैसे हो सकती है, और ज्वेलरी की कीमत इतनी बढ़ चुकी है कि आम परिवार का बजट बिगड़ता जा रहा है. क्योंकि एक साल में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 35000 रुपये उछल चुका है.  एक साल में सोना कहां के कहां (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025  ₹75,930               ₹1,11,000 इस बीच पिछले दो दिनों से सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. गुरुवार को 24 कैरेट गोल्ड करीब 500 रुपये सस्ता हुआ है. IBJA के मुताबिक सोने का भाव गुरुवार को 1,09,264 रुपये प्रति 10 ग्राम है. जबकि बुधवार को भाव 1,09,733 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इससे पहले मंगलवार को भाव 1,10,869 रुपये प्रति 10 ग्राम था, बता दें, यही सोने का ऑलटाइम हाई रेट भी है. यानी मंगलवार के मुकाबले सोना 1600 रुपये से ज्यादा सस्ता हो चुका है. सोने के भाव में बड़ी गिरावट संभव वहीं बुधवार के मुकाबले चांदी में गुरुवार को मामूली गिरावट देखने को मिल रही है. 17 सितंबर को एक किलो चांदी का भाव 125756 रुपये था, जो कि गुरुवार को गिरकर 125563 रुपये पर पहुंच गया. जबकि चांदी 16 सितंबर को चांदी का भाव बढ़कर 129300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. यानी दो दिन में चांदी की कीमत लगभग 3500 रुपये घट चुकी है.  दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती कर दी है, फेड ने बेंचमार्क दर को 4.25% से घटाकर 4.0% कर दिया है. इस फैसले से सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ा है, और भाव टूटने लगा है. टैरिफ का असर आभूषण उद्योग पर भी पड़ रहा है. ये इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हुए हैं, खासकर अमेरिका होने वाला कारोबार.  लेकिन अब जिस तरह ब्याज दरों में कटौती की गई और आगे भी कटौती के संकेत दिए गए हैं, इससे सोने-चांदी पर दबाव बढ़ सकता है, साथ ही टैरिफ को लेकर भी धीरे-धीरे बीच का रास्ता निकल रहा है. जानकारों की मानें तो सोने-चांदी में फिलहाल मुनाफावसूली का भी वक्त है, क्योंकि इस साल सोने में एकतरफा रैली देखने को मिली है. सोने में कीमतों में क्यों आ सकती हैंं गिरावट? अगर भारत के परदृश्य से देखें तो टैरिफ के मोर्चे पर राहत और रुपया डॉलर की तुलना में मजबूत होने पर सोने की कीमतों को कुछ हद तक बढ़ने से रोका जा सकता है. जानकार मानते हैं कि फेस्टिव सीजन में भले ही कीमतों में और हल्की बढ़त देखने को मिल जाए, लेकिन सोने-चांदी में करक्शन आ सकता है. यहां से सोने की कीमत 10 फीसदी तक गिर सकती है. यानी सोने भाव फिर से 1 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है. ये करक्शन लंबा भी चल सकता है, संभव भी ये है कि लंबे समय तक सोने का भाव एक दायरे में बना रहे. जबकि कुछ एक्सपर्ट्स तो शॉर्ट टर्म में ही 5-6 फीसदी गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं. हालांकि चांदी में बड़ी गिरावट की संभावना कम है.    अनुमान है कि फेस्टिव सीजन के दौरान भारत में सोने की कीमतें ₹1,10,000 से ₹1,12,000 प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत प्रति औंस US$ 3600 से US$ 3700 के बीच होने की भविष्यवाणी की जा रही है. लेकिन अगर ग्लोबल तनाव कम हुए तो फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति औंस US$ 3300 तक फिसल सकता है, यानी 10% करक्शन संभव है. इस हिसाब में भारत में सोने की कीमत गिरकर 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे भी फिसल सकती है. हालांकि ग्लोबल कारोबार में टेंशन बढ़ने पर भाव में यहां से भी उछाल देखने को मिल सकता है.  एक्सपर्ट्स ने बताए- कब खरीदें सोना दरअसल इस दौर में करीब-करीब हर मध्यमवर्गीय परिवार का एक ही सवाल है कि सोना-चांदी अभी खरीदा जाए, या फिर यहां से गिरावट की कोई उम्मीद है? इसके जवाब में अधिकतक एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं, कि आंख मूंदकर फिलहाल सोने-चांदी में निवेश से बचें, क्योंकि भाव बहुत बढ़ चुका है, गिरावट की ज्यादा आशंका है. ऐसे में अगर आप मौजूदा भाव में निवेश करते हैं तो फिर आगे गिरावट आने पर पछताना पड़ सकता है. इसलिए अभी कम से कम 3-6 महीने इंतजार करें. अगर आपने खरीदने का मन बना ही लिया है, तो फिर थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करें. सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    बता दें, सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. यही नहीं, भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. इसके अलावा पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. साथ ही सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.

iPhone 17 लॉन्च पर क्रेज़: खरीदने की होड़ में झगड़े तक, दिल्ली-मुंबई में रातभर खड़े रहे लोग

मुंबई  एप्पल ने भारत में अपनी नई आईफोन 17 सीरीज की बिक्री शुरू कर दी है. एप्पल अपने नए आईफोन्स की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर रहा है. एप्पल ने भारत में अब अपने चार ऑफलाइन स्टोर्स खोल दिए हैं और आज एप्पल के इन सभी स्टोर्स पर लोगों की भारी भीड़ लगी हुई है. एप्पल के फैन्स में iPhone 17 सीरीज का इतना ज्यादा क्रेज देखने को मिल रहा है कि मुंबई में लोगों की भीड़ को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो रहा है, ग्राहक आपस में लड़ाई भी कर रहे हैं. दिल्ली के स्टोर पर लोग कल रात से ही लाइन लगाकर आईफोन खरीदने का इंतजार कर रहे हैं. आइए हम आपको वीडियो के जरिए दिखाते हैं कि भारत के ऑफलाइन एप्पल स्टोर्स में आईफोन 17 सीरीज को खरीदने के लिए कितनी भीड़ लगी है. iPhone 17 Series के लिए लोगों को जबरदस्त क्रेज आज सुबह पीटीआई ने एक वीडियो शेयर की, जिसमें देखा जा सकता है कि मुंबई में स्थित एप्पल स्टोर पर लोग घंटों से लाइन में लगे हैं और आपस में झगड़ा भी कर रहे हैं. मुंबई के एप्पल स्टोर के बाहर भारी भीड़ का आलम ऐसा है कि लोगों के बीच में झपड़ हो गई और उन्हें कंट्रोल करने के लिए सिक्योरिटी स्टाफ को लाठियों का भी इस्तेमाल करना पड़ा.    इसके अलावा मुंबई के एप्पल स्टोर की एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग 3-4 अलग-अलग लंबी लाइन्स में लगे हैं और आईफोन को खरीदने का इंतजार कर रहे हैं.इसके अलावा दिल्ली के साकेत सिटी वॉक मॉल में स्थित एप्पल स्टोर पर भी लंबी लाइन देखने को मिली. दिल्ली के साकेत में एप्पल स्टोर के बाहर लगी लाइन मॉल से मेन रोड तक लगी हुई है. लोगों ने बताया कि वो कल रात से ही आईफोन्स खरीदने के लिए लाइन्स में लगे हुए हैं. इसके अलावा बेंगलुरु के एप्पल स्टोर का भी हाल ऐसा ही है. बेंगलुरु में पहली बार लोगों को ऑफलाइन एप्पल स्टोर में जाकर आईफोन 17 सीरीज के आईफोन्स खरीदने का मौका मिल रहा है. ऐसे में वहां पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. एप्पल ने इसी महीने पहले 2 सितंबर को बेंगलुरु और फिर 4 सितंबर को पुणे में भी एप्पल स्टोर खोला था और वहां पर लोगों की काफी भीड़ देखने को मिली, जो आईफोन 17 सीरीज के फोन्स खरीदने के लिए आए थे. इस भारी भीड़ के क्रेज को पार करते हुए आईफोन 17 सीरीज के आईफोन्स खरीदने वाले कुछ लोगों से न्यूज़ एजेंसियों ने बात की. एएनआई को दिए एक बाइट में मुंबई के एक ग्राहक, अमन चौहान ने कहा, "मैंने iPhone 17PRO Max खरीदा है, एक 256GB का और दूसरा 1TB का है. मैं रात 12 बजे से लाइन में इंतज़ार कर रहा था और अब मुझे मिल गया है. इसमें नए फीचर हैं. नारंगी रंग नया है."

बाजार में बड़ी गिरावट से मचा हड़कंप, अडानी स्टॉक्स ने फिर जीता भरोसा

मुंबई  पूरे हफ्ते के दौरान तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय बाजार में गिरावट देखी जा रही है. सेंसेक्‍स-निफ्टी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि अडानी के शेयरों ने आज कमाल का प्रदर्शन किया है. अडानी के शेयर शुक्रवार को शानदार कारोबार कर रहे हैं. अडानी के शेयरों में यह तेजी, सेबी द्वारा हिंडनबर्ग केस खत्‍म करने के बाद आया है.  सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्‍स 240 अंक गिरकर 82771 पर और निफ्टी 60 अंक गिरकर 25361 पर कारोबार कर रहा है. निफ्टी बैंक में भी गिरावट देखी जा रही है, जो करीब 150 अंक टूट चुका है.  BSE के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 7 शेयर ही उछाल पर थे, जिसमें अडानी पोर्ट सबसे ऊपर कारोबार कर रहा था. वहीं 23 शेयर मामूली गिरावट पर थे. टीसीएस में एक फीसदी की गिरावट रही.  क्‍यों आई ये गिरावट?  यह गिरावट लार्जकैप के शेयरों में आई गिरावट के कारण है. सप्‍ताहभर तेजी के बाद आज इन शेयरों में बिकवाली हो रही है. इसके अलावा, अमेरिका से टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर भी रुख स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा भी फेड रेट में कटौती के कारण भी शेयर बाजार में दबाव दिख रहा है.  कौन से शेयर सबसे ज्‍यादा टूटे?  Zydus Wellness, डीसीएम श्रीराम, जेन टेक्‍नोलॉजी के शेयर 2 प्रतिशत से ज्‍यादा टूटकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा, आईएफसीआई, इंडियामार्ट और सोनट सॉफ्टवेयर जैसे शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली.  अडानी के शेयरों ने किया कमाल!  अडानी पावर का शेयर 7 फीसदी चढ़कर 675 के करीब पहुंच गया. अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी रही. अडानी एनर्जी सॉल्‍यूशन 3 फीसदी, अडानी पोर्ट 2 फीसदी और अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर में भी करीब 3 फीसदी की तेजी रही.  132 शेयरों में अपर सर्किट BSE पर आज कुल 3538 शेयर ट्रेड कर रहे हैं, जिसमें से 1,980 शेयरों में तेजी और 1,380 शेयरों में गिरावट है. बाकी 178 शेयर अनचेंज हैं. वहीं 132 शेयरों ने अपर सर्किट टच किया है, जबकि 61 ने लोअर सर्किट टच किया है. 87 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर और 29 52 सप्‍ताह के लो पर कारोबार कर रहे हैं. 

ट्रंप का बदला रुख? भारत पर से हट सकता है 25% एक्स्ट्रा टैक्स का बोझ

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में बड़ी राहत मिल सकती है और रूसी तेल खरीद पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक्स्ट्रा 25% टैरिफ हटाया जा सकता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार ये उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ हटा सकता है और रेसिप्रोकल टैरिफ को भी घटाकर 10 से 15% किया जा सकता है. इसके साथ ही सीईए ने भारत-US ट्रेड डील के आगे बढ़ने का भी संकेत दिया है.  8-10 हफ्ते में निकल आएगा हल कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए सीईए नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें टैरिफ मसले का अगले 8 से 10 हफ्तों के भीतर समाधान होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में कम से कम 25% के एक्स्ट्रा टैरिफ का समाधान जरूर निकल आएगा.' बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नागेश्वरन ने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे करीब 50 अरब  डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर दबाव कम हो सकता है. ट्रंप ने क्यों लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ? गौरतलब है कि भारत पर पहले अमेरिकी की ओर से 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था, लेकिन अगस्त में भारत की रूसी तेल खरीद को युक्रेन युद्ध में पुतिन की आर्थिक मदद करने का जरिया करार देते हुए जुर्माने के रूप में 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ जुर्माने के तौर पर लगाया था. इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया था और इससे ये ब्राजील के साथ सबसे ज्यादा ट्रंप टैरिफ को झेलने वाले देशों में शामिल हो गया था. अपने संबोधन में नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही सरकारों के बीच सतह के नीचे तमाम मुद्दों को हल करने के लिए काफी बातचीत हो रही है. भारत-US ट्रेड डील में क्या प्रोग्रेस?   भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स समेत अन्य मुद्दों को लेकर अटकी हुई थी और इस पर बातचीत भी ट्रंप के एक्स्ट्रा टैरिफ के बाद थमी हुई थी. लेकिन बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए ट्रेड डील के सफल निष्कर्ष निकलने की बात कही थी.  इसके बाद इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका की ओर से प्रमुख वार्ताकर ब्रेंडेन लिंच ट्रेड डील पर छठे चरण की बैठक करने के लिए नई दिल्ली आए थे और भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार राजेश अग्रवाल के साथ करीब 7 घंटे की लंबी चर्चा की थी.  55% सामान हाई टैरिफ के अंदर रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में अमेरिका को भारत के निर्यात का लगभग 55% हिस्सा ट्रंप के हाई टैरिफ के अंदर आ रहा है. इसकी मार से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स की बात करें, तो कपड़ा, केमिकल, मरीन फूड, जेम्स एंड ज्वेलरी के साथ ही मशीनरी शामिल हैं. ये इसलिए भी खास हैं, क्योंकि भारत की श्रम-प्रधान निर्यात अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं. टैरिफ के असर को देखें, तो अगस्त महीने में अमेरिका को निर्यात घटकर 6.87 अरब डॉलर रह गया, जो 10 महीने का सबसे निचला स्तर है.

अब रेंट पेमेंट पर सख्ती: फिनटेक ऐप्स से सिर्फ पंजीकृत मकान मालिक को ही भेज सकेंगे किराया

नई दिल्‍ली  आप भी अगर हर महीने फोनपे, पेटीएम या क्रेड जैसी मोबाइल ऐप्स से अपने घर का किराया क्रेडिट कार्ड से भरते थे, तो अब आपको मुश्किल होने वाली है. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि फिनटेक कंपनियों ने अब अपने ऐप्स पर रेंट पेमेंट सर्विस बंद कर दी है. बता दें कि बीते कुछ वर्षों में क्रेडिट कार्ड के जरिए रेंट पेमेंट करने का चलन बढ़ गया था. अब दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में भुगतान सेवाओं से जुड़े नए नियम लागू करने के बाद फिनटेक कंपनियों को यह सर्विस बंद करनी पड़ी है. आरबीआई ने 15 सितंबर को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया था. इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर होगा जो क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाकर पॉइंट्स कमाते थे या महीने भर तक बिना ब्याज के पैसे इस्तेमाल करते थे. अब उन्हें फिर से पुराना तरीका अपनाना होगा जैसे कि सीधे बैंक खाते में किराया ट्रांसफर करना या चेक से भुगतान करना. भुगतान पर मिलते थे रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स और कैशबैक अभी तक लोग आसानी से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके किराया चुकाते थे. ऐसा करने से उन्हें रिवॉर्ड प्वाइंट्स या कैशबैक भी मिलता था और साथ ही महीने भर का क्रेडिट पीरियड भी मिल जाता था. मकान मालिक को भी तुरंत पैसा मिल जाता था. इस वजह से यह सेवा बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई. लेकिन RBI को यह व्यवस्था ठीक नहीं लगी, क्योंकि इसमें मकान मालिकों का पूरा KYC नहीं होता था और फिनटेक कंपनियां बीच में मार्केटप्लेस की तरह काम कर रही थीं. बैंकों की पहले से चिंता बैंकों ने भी पिछले साल से इस पर रोक लगानी शुरू कर दी थी. HDFC बैंक ने जून 2024 में ही क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाने पर 1% तक का शुल्क लगा दिया था. ICICI बैंक और SBI कार्ड्स ने भी किराया भुगतानों पर रिवॉर्ड पॉइंट्स बंद कर दिए थे. मार्च 2024 से कई ऐप्स जैसे फोनपे, पेटीएम और अमेज़न पे ने यह सेवा रोक दी थी. हालांकि कुछ ने बाद में अतिरिक्त KYC प्रक्रिया जोड़कर इसे दोबारा शुरू किया.

सरकार ने GST 2.0 के लिए FAQ प्रकाशित किया, मिलेगी सभी जानकारी

नई दिल्ली  वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 2.0 को लेकर छह सवालों का एक फ्रीक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चन (एफएक्यू) जारी किया गया है। इसका उद्देश्य 22 सितंबर को लागू होने वाले जीएसटी सुधारों के बारे में लोगों को बेहतर ढंग से जानकारी देना है। एफएक्यू कुछ इस प्रकार है: प्रश्न 1. मुझे किस अधिसूचना में वस्तुओं पर सीजीएसटी दरों में बदलाव देखने को मिलेगा? क्या कोई नई अधिसूचना जारी की जाएगी? वस्तुओं पर सीजीएसटी दरों में बदलाव आपको अधिसूचना संख्या 9/2025- केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025 में मिलेगा। यह अधिसूचना संख्या 9/2025- केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025, पूर्व की अधिसूचना संख्या 1/2017- केंद्रीय कर (दर) दिनांक 28 जून 2017 के स्थान पर जारी की गई है। प्रश्न 2. मुझे सीजीएसटी से छूट प्राप्त वस्तुओं की सूची किस अधिसूचना में मिलेगी? क्या कोई नई अधिसूचना जारी की जा रही है? आपको सीजीएसटी से छूट प्राप्त वस्तुओं की सूची अधिसूचना संख्या 10/2025-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025 में मिलेगी। यह अधिसूचना संख्या 10/2025-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025, पूर्व की अधिसूचना संख्या 2/2017-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 28 जून 2017 के स्थान पर जारी की गई है। प्रश्न 3. हस्तशिल्प के लिए जीएसटी दर मुझे किस अधिसूचना में मिलेगी? क्या कोई नई अधिसूचना जारी की जाएगी? हस्तशिल्प के लिए जीएसटी दरें आपको अधिसूचना संख्या 13/2025-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025 में मिलेंगी। यह अधिसूचना संख्या 13/2025-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025, अधिसूचना संख्या 21/2018-केंद्रीय कर (दर) दिनांक 26 जुलाई, 2018 को संशोधित करने के लिए जारी की गई है। प्रश्न 4. कौन सी अधिसूचना क्षतिपूर्ति उपकर की संशोधित दरें निर्धारित करती है? क्षतिपूर्ति उपकर दरों में परिवर्तन अधिसूचित करने के लिए अधिसूचना संख्या 1/2017-क्षतिपूर्ति उपकर (दर) दिनांक 28.6.2017 को अधिसूचना संख्या 2/2025-क्षतिपूर्ति उपकर (दर) दिनांक 17.9.2025 द्वारा संशोधित किया गया है। प्रश्न 5. पेट्रोलियम ऑपरेशंस के लिए आयातित वस्तुओं पर जीएसटी दर में परिवर्तन से संबंधित अधिसूचना कौन सी है? कृपया इस संबंध में अधिसूचना संख्या 11/2025- केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025 देखें। प्रश्न 6. क्या स्पेशल कंपोजिशन स्कीम के अंतर्गत ईंटों के लिए कोई नई अधिसूचना जारी की गई है? रेत-चूना ईंटों के अलावा अन्य ईंटों के लिए स्पेशल कंपोजिशन स्कीम के अंतर्गत जीएसटी दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस संबंध में अधिसूचना संख्या 14/2025- केंद्रीय कर (दर) दिनांक 17.9.2025 जारी की गई है।

हिंडनबर्ग के दावों पर SEBI का फैसला: अदाणी ग्रुप को मिली क्लीन चिट

नई दिल्ली भारत के अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी को बड़ी राहत मिली है। हिंडनबर्ग मामले में सेबी ने अदाणी समूह को क्लीनचिट दे दी है। शेयर बाजार नियामक संस्था, SEBI ने कहा है कि अदाणी ग्रुप पर लगे आरोप साबित नहीं हुए। सेबी ने अपनी जांच के बाद बताया कि हिंडनबर्ग द्वारा अदाणी समूह पर लगाए गए इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप साबित नहीं हुए। सेबी ने 18 सितंबर को पारित अपने अंतिम आदेश में गौतम अदाणी, उनके भाई राजेश अदाणी, अदाणी पोर्ट्स, अदाणी पावर और एडिकॉर्प एंटरप्राइजेज को दोषमुक्त कर दिया है। SEBI ने ऑर्डर में क्या कहा? सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने आदेश में लिखा, "मुझे लगता है कि एससीएन में नोटिसियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, नोटिसियों पर किसी भी दायित्व के हस्तांतरण का सवाल ही नहीं उठता है और इसलिए जुर्माने की मात्रा के निर्धारण के सवाल पर भी किसी विचार-विमर्श की आवश्यकता नहीं है।" 24 जनवरी, 2023 को, अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी समूह के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें शेयरों में हेराफेरी, अकाउंटिंग धोखाधड़ी और फंड ट्रांसफर के लिए ऑफशोर टैक्स हेवन और शेल कंपनियों के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए थे। हिंडनबर्ग ने कहा था कि अदाणी ग्रुप द्वारा नियंत्रित संस्थाओं से कई टैक्स हेवन के ज़रिए फंड निकाला गया और फिर शेयर की कीमतों को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ाने के लिए बाजार में लिस्टेड अदाणी ग्रुप की कंपनियों में निवेश किया गया।

Maruti की बड़ी घोषणा: S-Presso और Wagon R की कीमत में भारी कटौती, अब और सस्ती हुईं कारें

मुंबई  देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने आज अपने कारों की कीमतों में भारी कटौती का ऐलान किया है. कंपनी ने घोषणा की है कि, मारुति वैगनआर से लेकर ऑल्टो और इग्निस जैसी छोटी कारों की कीमत में तकरीबन 1.29 लाख रुपये तक की कटौती की गई है. कारों की कीमत में ये कटौती आगामी 22 सितंबर से लागू होगी.  मारुति सुजुकी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, हाल ही में हुए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST Reforms) सुधारों का फायदा ग्राहकों तक सीधे पहुंचाया जाएगा. जिसके तहत कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में शामिल मॉडलों की कीमत में कटौती की घोषणा की है. तो आइये देखें किस कार के दाम में कितनी कटौती की गई है.  किस कार की कीमत में कितनी कटौती: मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, (मार्केटिंग एंड सेल्स) पार्थो बनर्जी ने आज प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि, कारों की कीमत में कटौती हालिया जीएसटी सुधारों के तहत की गई है. कीमतों में कटौती के चलते वाहन के फीचर्स और टेक्नोलॉजी इत्यादि में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. इस नए प्राइस अपडेट के बाद अब ऑल्टो के10 मारुति सुजुकी की सबसे सस्ती कार नहीं रही है. बल्कि अब कंपनी के पोर्टफोलियो को Maruti S-Presso सबसे सस्ती कार हो गई है. इस कार की कीमत में सबसे ज्यादा 1,29,600 रुपये की कटौती की गई है. यहां पर कारों की एक्स-शोरूम कीमत दी गई है.  अन्य कारों की कीमत में कटौती मारुति सुजुकी ने अपनी मशहूर कार स्विफ्ट की कीमत में 84,600 रुपये की कटौती का ऐलान किया है. अब स्विफ्ट की शुरुआती कीमत केवल 5.79 लाख रुपये हो गई है. बता दें कि, हाल ही में स्विफ्ट के थर्ड जेनरेशन मॉडल को लॉन्च किया गया था. उस वक्त इस कार को 6.49 लाख रुपये में पेश किया गया था.  इसके अलावा बलेनो के दाम 86,100 रुपये तक घट गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत केवल 5.99 लाख रुपये रह गई है. हालिया लॉन्च कंपनी की पहली 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कार मारुति डिजायर की कीमत में भी कंपनी ने कटौती की है. इस कार के कीमत में अधिकतम 87,700 रुपये की कटौती की गई है. अब मारुति डिजायर केवल 6.26 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में आती है.  यूटिलिटी व्हीकल रेंज में भी भारी कटौती मारुति सुजुकी ने अपने एसयूवी और एमपीवी रेंज की कीमतों में भी भारी कटौती की है. कंपनी की सबसे सस्ती एसयूवी Fronx की कीमत में 1,12,600 रुपये की कटौती की गई है. अब फ्रोंक्स की शुरुआती कीमत 6.85 लाख रुपये हो गई है. इसके अलावा ब्रेजा के दाम 1,12,700 रुपये तक घट गए हैं, अब आप ब्रेजा को 8.26 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में घर ला सकते हैं.  एमपीवी की बात करें तो Maruti Ertiga की कीमत में 46,400 रुपये की कटौती की गई है. इसकी शुरुआती कीमत अब 8.80 लाख रुपये है. वहीं XL6 की खरीद पर ग्राहक 52,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं. अब एसयूवी स्टाइल वाली ये एमपीवी 11.52 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में आती है. इसके अलावा वैन सेग्मेंट की Maruti Eeco की कीमत 68,000 रुपये घट कर केवल 5.18 लाख रुपये रह गई है. GST स्लैब क्या सुधार हुआ है? बीते 4 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला लिया गया था कि, अब देश में चार के बजाय केवल दो जीएसटी स्लैब (5% और 18%) की रहेंगे. इसके अलावा लग्ज़री और सिन गुड्स पर 40% जीएसटी लागू होगा. इस नए स्ट्रक्चर के तहत 4,000 मिमी से कम लंबाई वाली 1,200 सीसी तक की पेट्रोल कारें और 1,500 सीसी तक की डीजल कारों पर केवल 18% जीएसटी लगेगी. पहले इन कारों पर 28% जीएसटी लागू होता है.  वहीं 4 मीटर से लंबी और लग्ज़री सेग्मेंट की कारें 40% जीएसटी के दायरे में आएंगी. लग्ज़री कारों की कीमत में भी भारी कटौती हुई है. क्योंकि पहले इन पर 28% जीएसटी और तकरीबन 22% सेस (Cess) लगता था. जिसके बाद कुल टैक्स लगभग 50% हो जाता था. लेकिन अब इन पर कोई अतिरिक्त सेस या उपकर नहीं लगाया जा रहा है.