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बीमा बनाम अस्पताल: जंग का खामियाज़ा भुगत रहे मरीज

नई दिल्ली देश में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर इन दिनों गहरे विवाद में फंस गया है. कैशलेस इलाज को लेकर अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच चल रही खींचतान का सबसे बड़ा खामियाजा पॉलिसीधारकों को उठाना पड़ रहा है. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (AHPI), जिसमें 15 हजार से अधिक अस्पताल जुड़े हैं, ने हाल ही में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के पॉलिसीधारकों को 22 सितंबर से कैशलेस सुविधा बंद करने की चेतावनी दी थी. यह फैसला 12 सितंबर को लिया गया, हालांकि अब इसे फिलहाल टाल दिया गया है. पहले भी दी जा चुकी हैं धमकियां स्टार हेल्थ से पहले भी अस्पताल संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया था. 22 अगस्त 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस और केयर हेल्थ इंश्योरेंस को चेतावनी जारी की गई थी कि उनके ग्राहकों को कैशलेस सर्विस नहीं दी जाएगी. दरअसल, टैरिफ दरों को लेकर असहमति इस जंग की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है. बीमा कंपनियों का पलटवार केवल अस्पताल संगठन ही नहीं, कई बीमा कंपनियां भी कुछ अस्पतालों को अपनी सूची से बाहर कर रही हैं. उदाहरण के लिए, निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने 16 अगस्त 2025 को मैक्स हेल्थकेयर को अपने पैनल से हटा दिया. इसी तरह, केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने 17 फरवरी 2025 को दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों के साथ करार समाप्त कर दिया था. मरीज बन रहे बीच का शिकार बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच खिंची इस रस्साकशी का सीधा असर मरीजों पर हो रहा है. कई जगह पॉलिसीधारकों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल रही, जबकि कुछ को पूरा बिल एडवांस में चुकाना पड़ रहा है. कई बार रीइंबर्समेंट भी नहीं मिल पाता, जिससे बीमा होने के बावजूद लोग आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. बढ़ रही पॉलिसीधारकों की मुश्किलें भारत में अभी भी स्वास्थ्य बीमा धारकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच चल रही यह खींचतान नए ग्राहकों को बीमा पॉलिसी लेने से हतोत्साहित कर सकती है. बढ़ते विवाद ने लोगों के मन में बीमा की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. पुराना है यह विवाद अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच यह टकराव नया नहीं है. इसकी जड़ें वर्षों पुरानी हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बाद यह तनाव और गहरा गया. AHPI के महानिदेशक गिरीधर ग्यानी ने कहा था कि जब बीमा कंपनियों ने कुछ अस्पतालों को अपनी पैनल लिस्ट से हटाना शुरू किया, तब अस्पतालों ने भी एकजुट होकर विरोध करने का निर्णय लिया. आखिर कौन कर रहा है मनमानी? अस्पताल संगठन बीमा कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हैं, जबकि बीमा कंपनियां अस्पतालों पर. मैक्स हेल्थकेयर का कहना है कि बीमा कंपनियां लगातार दरें घटाने का दबाव बनाती हैं, नए कॉन्ट्रैक्ट को लटकाए रखती हैं और पुराने कॉन्ट्रैक्ट में संशोधन करने से बचती हैं. वहीं, अस्पतालों की मांग है कि टैरिफ दरें बढ़ाई जाएं, लेकिन बीमा कंपनियां पुराने रेट में भी कटौती चाहती हैं. नतीजा यह है कि दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही और इसकी कीमत आम मरीज चुका रहा है.

जीएसटी कटौती का मिडिल क्लास पर असर: जानें महीने के बचत के आंकड़े

नई दिल्‍ली  22 सितंबर यानी आज से जीएसटी का नया रेट लागू हो गया है. जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर को हुई बैठक में कार से लेकर किचन तक की चीजों पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं. ज्‍यादातर चीजों पर जीएसटी दरें घटने से कीमतों में भी कटौती हो गई है. इसका सबसे ज्‍यादा लाभ मिडिल क्‍लास को बताया जा रहा है. नई दरें लागू होने के साथ ही यह सवाल भी लोगों के मन में घूम रहा है कि कीमतों में कटौती होने के बाद मिडिल क्‍लास का हर महीने आखिर कितना पैसा बचेगा. सबसे पहले बात करते हैं वाहन की. त्‍योहारी सीजन शुरू हो गया है और मिडिल क्‍लास इसी समय बाइक और कार की खरीदारी करता है. कार, दोपहिया और थ्री-व्‍हीलर्स पर जीएसटी की दरें 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई हैं, जबक‍ि साइकिल पर जीएसटी की दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 लाख रुपये की बाइक पर सीधे 10 हजार रुपये की बचत होगी. 6 से 8 लाख रुपये की कार खरीदने पर भी 60 से 80 हजार रुपये की सीधी बचत हो जाएगी. अगर कोई ऑटो रिक्‍शा खरीदता है तो 3 लाख रुपये के वाहन पर सीधे 30 हजार रुपये की बचत हो जाएगी. वाहनों के कलपुर्जों पर भी जीएसटी की दर 28 से घटकर 18 फीसदी हो गई है, तो इनके मेंटेनेंस पर भी बचत होती रहेगी. रोजमर्रा के सामान पर कितना पैसा बचेगा रोजमर्रा की जरूरी चीजों में शामिल साबुन, टूथपेस्‍ट, शैम्‍पू, हेयर ऑयल, टूथ पाउडर आदि पर जीएसटी की दर घटकर 5 फीसदी हो गई है. इसके अलावा डायपर, बेबी बॉटल, किचन के बर्तन, सिलाई मशीन, माचिस और मोमबत्‍ती भी सस्‍ती हो गई है. अगर एक मिडिल क्‍लास परिवार इन चीजों पर महीने में 5 हजार रुपये खर्च करता था, तो अब उसे सीधे 500 रुपये की बचत होगी. खाने-पीने के सामान पर कितनी बचत दूध, पनीर, मक्‍खन, घी, चॉकलेट, बिस्‍कुट, नमकीन, पास्‍ता, नूडल्‍स और जूस आदि पर भी जीएसटी घटकर 5 फीसदी हो गया है. इसका मतलब है कि अगर कोई मिडिल क्‍लास पारिवार इन चीजों पर 8 से 10 हजार रुपये हर महीने खर्च करता है तो उसे निश्चित रूप से 800 से 1,000 रुपये की बचत होगी. बिस्‍कुट चॉकलेट 15 फीसदी सस्‍ता हो गया है, जबकि नारियल पानी 5 से 6 रुपये प्रति लीटर सस्‍ता हुआ है. पढ़ाई-लिखाई और इलाज पर कितनी बचत स्‍टेशनरी के सामान जैसे नोटबुक, मैप, पेंसिल, क्रेयॉन्‍स और कटर आदि को भी 12 फीसदी से घटाकर शून्‍य या 5 फीसदी कर दिया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जो स्‍कूल किट पहले 1,000 रुपये की आती थी, अब 850 रुपये में मिल जाएगी. इसका फायदा सिर्फ यूपी के ही 4.3 करोड़ स्‍कूली बच्‍चों को होगा. जीएसटी परिषद ने जरूरी दवाओं को भी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी में कर दिया है. रेयर डिजीज और कैंसर जैसी दवाओं पर जीएसटी को पूरी तरह खत्‍म कर दिया गया है. जांच किट और मेडिकल सप्‍लाइज को भी 5 फीसदी स्‍लैब में डाल दिया गया है. चश्‍मे को भी 18 से घटाकर 5 फीसदी में डाल दिया गया है. इसका मतलब है कि अब 1,000 रुपये की दवाओं पर 70 से 100 रुपये कम हो जाएंगे. मकान बनवाने पर कितना पैसा बचेगा सीमेंट पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिसका फायदा गांव और शहर दोनों जगहों पर मकान बनवाने वालों को होगा. पहले जिस मकान को बनाने में 50 हजार की सीमेंट लगती थी, अब उस पर 5 हजार की सीधी बचत होगी. मार्बल, ग्रेनाइट, बांस और अन्‍य लकड़ी के सामान पर भी जीएसटी रेट कम हो गया है और ये सामान सस्‍ते हो जाएंगे. सीधे तौर पर देखा जाए तो 50 लाख रुपये के मकान पर 3 से 4 लाख रुपये की बचत होगी. इलेक्‍ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरण 32 इंच के टीवी, एसी, डिशवॉशर और मॉनिटर पर जीएसटी 28 से घटकर 18 फीसदी हो गया है. इसका मतलब है कि 40 हजार का टीवी अब 4 हजार रुपये सस्‍ता मिलेगा. इसी तरह, 35 हजार के एसी पर 3,500 रुपये की बचत होगी. 60 हजार रुपये सोलर वॉटर हीटर पर जीएसटी 5 फीसदी होने से अब 7 हजार की सीधी बचत हो जाएगी. इससे दिवाली में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सामानों की खरीदारी सस्‍ती पड़ेगी.

आज से महंगाई पर ब्रेक! ब्रेड, दूध और पनीर समेत 20 चीजों पर GST छूट

मुंबई  देश में GST 2.0 लागू हो गया है और आज नवरात्रि के पहले दिन 22 सितंबर से ऐसे तमाम सामानों के दाम घट गए हैं, जिन्हें देश का आम आदमी लगभग हर रोज खरीदता है. इनमें दूध, ब्रेड से लेकर मक्खन-पनीर तक शामिल हैं. जीएसटी सुधार लागू होने से पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बचत उत्सव की शुरुआत करार दिया था और कहा था कि इससे गरीब-मिडिल क्लास सभी के पैसे बचेंगे. त्योहारों से ऐन पहले सरकार का ये तोहफा राहत भरा है, क्योंकि अब डेली इस्‍तेमाल होने वाली चीजें सस्ती हो जाएंगी. आइए ऐसी ही 20 रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों में बचत का कैलकुलेशन समझते हैं… देश में हर दिन सुबह से शाम तक लोग दूध, ब्रेड से लेकर आटा-दाल, सब्जियां तक की खरीदारी करते हैं. लेकिन आज से इनकी खरीद पर जेब में काफी पैसे बचेंगे, क्योंकि सरकार ने नए जीएसटी रिफॉर्म लागू कर दिए हैं और करीब 99% रोजमर्रा के सामानों के दाम घट गए हैं.  यूएचटी दूध  दूध, सब्‍जियों पर पहले भी जीएसटी रेट लागू नहीं था और अब भी नहीं लगाया गया है. लेकिन अल्ट्रा हाई टेंप्रेचर दूध यानी UHT Milk को जीरो जीएसटी में शामिल किया गया है, जिसपर अब तक 5% की दर से टैक्स लगता था. इसके बाद अमूल से लेकर मदर डेयरी तक ने इसकी कीमतें कम कर दी हैं, जो 22 सितंबर से लागू हो गई हैं. अब   1 लीटर UHT मिल्क (टोंड-ट्रेटा पैक) 77 रुपये के बजाय 75 रुपये में और 450 एमएल मिल्क पैक 33 रुपये की जगह 32 रुपये का मिलेगा.  पनीर दूध के साथ ही पनीर पर लगने वाला 12 फीसदी का जीएसटी भी अब खत्म हो गया है और ये जीरो जीएसटी स्लैब में शामिल हो गया है. इसपर बचत की बात करें, तो अगर आप 90 रुपये में 200 ग्राम पनीर का पैकेट खरीदते थे, तो अब आपको 10 रुपये कम देने होंगे.  मक्खन  रोजमर्रा में रसोई में इस्तेमाल होने वाले डेयरी प्रोडक्ट्स में मक्खन भी अहम है, जो सोमवार से सस्ता हो गया है. जीएसटी रेट कट लागू होने के बाद पहले जो मक्खन (500 ग्राम) 305 रुपये में मिलता था, वो अब 285 रुपये में मिलेगा और 100 ग्राम की मक्खन की टिकया 62 रुपये की जगह 58 रुपये में मिलेगी. घी घी को लिक्विड गोल्ड कहकर भी पुकारा जाता है और जीएसटी रेट कट का असर इसकी कीमतों पर भी दिखा है, क्योंकि सरकार ने इस पर जीएसटी 12% से कम करते हुए 5% कर दिया है. इसके बाद तमाम कंपनियों के घी के दाम घट गए हैं. अमूल का घी (1 लीटर कार्टन पैक) अब 650 रुपये के बजाय 610 रुपये में मिलेगा, तो मदर डेयरी का घी (1 लीटर कार्टन पैक) 675 रुपये की जगह 645 रुपये का हो गया है. पतंजलि गाय का घी 900 एमएल पैक 780 रुपये से कम होकर अब 731 रुपये का रह गया है.  आइसक्रीम  तमाम सामानों के साथ ही GST Rate Cut का फायदा आइसक्रीम पर भी मिलेगा. नए रेट्स लागू होने से पहले ही तमाम कंपनियों ने अपने आइसक्रीम प्रोडक्ट्स के दाम में कटौती का ऐलान कर दिया था. अमूल की नई रेट लिस्ट देखें, तो 22 सितंबर से 1 लीटर वनीला मैजिक कप 195 रुपये की जगह अब 180 रुपये का मिलेगा, तो वहीं शुगर फ्री शाही अंजीर आइसक्रीम का 125 एमएल कम 50 रुपये की जगह 45 रुपये का मिलेगी. इसके अलावा बटर स्कॉच.(125 एमएल), कुल्फी पंजाबी (60एमएल) में पांच रुपये की कटौती की गई है. मदर डेयरी की आइसक्री के प्राइस पर नजर डालें, तो जीएसटी कट का लाभ देते हुए कंपनी ने आइसकैंडी (45 ग्राम ), 50 एमएल वनीला कप, 30 एमएल चोकोबार की कीमत 10 रुपये से घटकर 9 रुपये रह गई.  ब्रेड ब्रेड का इस्तेमाल भी हर रोज घरों में होता है, फिर बात चाहे चाय के साथ ब्रेड की हो या सैंडविच के लिए, इसपर भी सरकार ने बड़ी राहत दी है. ब्रेड भी 5% जीएसटी स्लैब से सीधे शून्य जीएसटी वाले उत्पादों में शामिल हो गया है. यानी इस पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. मतलब जो ब्रेड का पैकेट आप 20 रुपये में खरीदते थे, वो 1 रुपये कम यानी 19 रुपये में मिलेगा.  पिज्जा  आपके घर में बच्चे हैं, तो फिर वो पिज्जा खाने की जिद तो करते ही होंगे, रोज नहीं तो एक दो दिन छोड़कर आप दिलाते भी होंगे, तो बता दें सरकार ने इसपर भी टैक्स घटा दिया है. पिज्‍जा, ब्रेड पर जीएसटी को 5% से शून्‍य कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है. ठीक ब्रेड की तरह, ऐसे में अगर आप दुकान से 100 रुपये का पिज्जा खरीदते समय 5 रुपये का जीएसटी देते थे, तो अब ये नहीं लगेगा. मतलब ये 95 रुपये का मिलेगा.  पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स बच्चों के लिए सुबह की शुरुआत आज के समय में घरों में पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स के साथ होती है और नूडल्स भी खूब बनाए जाते हैं, अब इन फूड प्रोडक्ट्स पर भी राहत मिली है. 22 सितंबर से ये सभी चीजें भी सस्ती हो गई हैं. इन पर लगने वाले 12-18% की स्लैब को कम करते हुए इन्हें 5% में शामिल किया गया है. 100 रुपये के नूडल्स के पैकेट पर अब 18 या 12 रुपये की जगह 5 रुपये का टैक्स ही लगेगा.  बिस्कुट-नमकीन सरकार रोजमर्रा में यूज होने वाले सामानों पर जीएसटी घटाने पर विशेष तौर पर फोकस किया है. इनकी लिस्ट में रोज इस्तेमाल होने वाले नमकीन-बिस्कुट भी शामिल हैं, जिनपर अब तक 12 से 18 फीसदी तक का टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे कम करते हुए 5 फीसदी कर दिया गया है. कैलकुलेशन समझें, तो 5 रुपये की नमकीन पर पहले 12% टैक्‍स के हिसाब से 60 पैसे GST लगता था, लेकिन अब सिर्फ 25 पैसे लगेगा. वहीं बिस्‍कुट 18% स्लैब में आता था और 5 रुपये के पैकेट पर 90 पैसे टैक्स लगता था, जो अब महज 25 पैसे लगेगा.  तेल-शैंपू और साबुन रोजमर्रा के सामानों की लिस्ट में तेल, शैंपू और साबुन जैसे सामान भी शामिल हैं. इन पर टैक्‍स को 18 फीसदी से कम करके 5% किया गया है. ऐसे … Read more

4 साल पुरानी कीमत पर मिलेगी कार? TATA ने की तगड़ी कटौती

मुंबई   गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) रिफॉर्म की चर्चा चारो ओर रही है. डेली लाइफ में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की कीमत में भारी कटौती देखने को मिल रही है. लेकिन इस वक्त सबसे ज़्यादा चर्चा जिस ऑफर की हो रही है, वह टाटा मोटर्स का ‘फेस्टिवल ऑफ GST’ कैंपेन. GST 2.0 लागू होने के बाद कंपनी ने जिस आक्रामक अंदाज़ में दाम घटाए हैं और ऊपर से त्योहारों का तड़का लगाया है, वह ग्राहकों के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है.  कुल 2 लाख तक के फायदे, लॉन्च प्राइस से नीचे लुढ़के दाम और फीचर-लोडेड वैरिएंट्स. यह सब मिलाकर टाटा मोटर्स ने त्योहारी सीज़न में कार बाजार का असली खेल पलटने की तैयारी की है. जीएसटी छूट के अलावा दिया जाने वाला एक्स्ट्रा बेनिफिट आगामी 30 सितंबर 2025 तक के ही लिए लागू होगा. यानी कार खरीदारी का ये सुनहरा मौका है.  Tata का ऐलान टाटा मोटर्स ने नए जीएसटी छूट का लाभ अपने ग्राहकों तक सीधे पहुंचाने का ऐलान किया है. जिससे कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल सबसे सस्ती कार टिएगो से लेकर नेक्सन और सफारी तक, सभी कारों की कीमत में 1.55 लाख रुपये तक की कटौती हो गई है. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि, जीएसटी छूट के अलावा कारों की खरीदारी पर 65,000 रुपये तक के एक्स्ट्रा बेनिफिट भी दिए जा रहे हैं, जिससे कुल बचत का आंकड़ा 2 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. तो आइये देखें किस कार कितनी बचत होगी. Tata Nexon पर सबसे बड़ा फायदा  कंपनी की बेस्टसेलर एसयूवी Nexon की खरीद पर सबसे बड़ा लाभ मिल रहा है. यहां ग्राहक को 1.55 लाख तक की GST कटौती और 45,000 रुपये तक के एक्स्ट्रा बेनिफिट मिल रहे हैं. अब इस एसयूवी की शुरुआती कीमत 7.31 लाख रुपये हो गई है, जो पहले 8.00 लाख रुपये हुआ करती थी. कुल मिलाकर टाटा नेक्सन की खरीद पर ग्राहक इस समय 2 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं. इस एसयूवी के टॉप मॉडल पर 17.5% तक की कटौती हुई है. Curvv पर भी बड़ा सरप्राइज हाल ही में लॉन्च हुई Curvv एसयूवी को लेकर किसी को बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं थी, लेकिन टाटा ने यहां भी 1.07 लाख तक का लाभ दिया है. कंपनी ने इसकी कीमत में 67,000 रुपये तक की कटौती की है. अब इसकी शुरुआती कीमत 9.65 लाख रुपये हो गई है, इसके अलावा इस एसयूवी पर 40,000 रुपये का एक्स्ट्रा बेनिफिट भी दिया जा रहा है. इस पर कुल बचत 1.07 लाख रुपये होगी.  Harrier और Safari में भी भारी कटौती हैरियर और सफारी के दाम में क्रमश: 1.44 लाख और 1.48 लाख रुपये की कटौती की गई है. इनकी शुरुआती कीमत अब क्रमश: 13.99 लाख और 14.66 लाख रुपये हो गई है. इसके अलावा इन दोनों एसयूवी पर 50-50 हजार रुपये तक का एक्स्ट्रा बेनिफिट भी दिया जा रहा है. जिसके मिलाकर बचत का आंकड़ा लगभग 1.98 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. Punch और Tiago की बड़ी वापसी Punch, जो 2021 में 5.49 लाख की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुई थी, अब फिर से उसी दाम पर उपलब्ध है. यानी पिछले चार सालों में बढ़ी हुई महंगाई और प्राइस हाइक को कंपनी ने पूरी तरह से मिटा दिया है. इससे  भी बड़ा सरप्राइज है Tiago के लिए, जो आज 4.57 लाख से शुरू हो रही है. यह 2020 के लॉन्च प्राइस से भी कम है. एंट्री-लेवल हैचबैक सेगमेंट में इस तरह का वैल्यू फॉर मनी ऑफर ग्राहकों के लिए किसी बड़े तोहफ़े से कम नहीं. पंच के दाम में 1.08 लाख रुपये तक की कटौती हुई है. इसके अलावा इस छोटी एसयूवी पर 50,000 रुपये तक का एक्स्ट्रा बेनिफिट भी दिया जा रहा है. यानी कुल बचत 1.58 लाख रुपये होगी. वहीं टिएगो हैचबैक की कीमत में कंपनी ने 75,000 रुपये की कटौती की है. इस हैचबैक पर भी 45,000 रुपये का एक्स्ट्रा बेनिफिट दिया जा रहा है. यानी इस पर कुल बचत 1.20 लाख रुपये होगी. Tata Tigor पर 1.11 लाख की बचत टाटा की कॉम्पैक्ट सेडान कार टिगोर के दाम में 81,000 रुपये की कटौती की गई है. मारुति डिजायर के प्रतिद्वंदी के तौर पर दौड़ रही इस कार की शुरुआती कीमत अब 5.48 लाख रुपये हो गई है. इसके अलावा इस सेडान पर कंपनी 30,000 रुपये तक का एक्स्ट्रा बेनिफिट भी दे रही है. यानी कुल बचत का आंकड़ा 1.11 लाख रुपये तक पहुंच गया है.

शेयर बाजार में रौनक लौटाई GST ने, ट्रंप की वीज़ा धमकी बेअसर

मुंबई  शेयर बाजार पर देश में लागू हुए जीएसटी रिफॉर्म्स को जोरदार असर देखने को मिला है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H1B वीजा बम पर टैक्स छूट भारी पड़ती नजर आई है. दरअसल, एच1वीजा फीस हाइक के ट्रंप के ऐलान के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी बड़ी गिरावट लेकर खुले. लेकिन कुछ ही मिनटों के बाद दोनों इंडेक्स जोरदार रिकवरी मोड में आ गए और शुरुआती गिरावट धीमी पड़ गई. जहां आईटी शेयर टूटे दिखाई दिए, तो वहीं अडानी पोर्ट्स-अडानी पावर से लेकर कोचीन शिपयार्ड तक के शेयरों में तेजी दर्ज की गई.  पहले तेज गिरावट, फिर संभले इंडेक्स  शेयर मार्केट में सोमवार को कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 82,626.23 की तुलना में बुरी तरह फिसलकर 82,151.07 के लेवल पर ओपन हुआ. इस बीच ट्रंप के H1B वीजा फीस में बढ़ोतरी के ऐलान के चलते खासतौर पर आईटी कंपनियों के शेयर बिखरे हुए नजर आए. लेकिन ये तेज गिरावट कुछ ही मिनटों के कारोबार में धीमी पड़ गई और बीएसई का इंडेक्स तगड़ी रिकवरी के मूड में नजर आया. खबर लिखे जाने तक आधे घंटे के कारोबार में ये मामूली गिरावट के साथ 82,557.88 पर कारोबार कर रहा था.  बात नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स की करें, तो इसमें भी सेंसेक्स की तरह ही पहले गिरावट और रिकवरी देखने को मिली. अपने पिछले बंद 25,327.05 की तुलना में ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स 25,238.10 पर ओपन हुआ और फिर रिकवरी करते हुए 25,331.70 पर ट्रेड करता हुआ नजर आया.  बाजार खुलते ही फिसले थे 2355 स्टॉक बाजार की खराब शुरुआत के दौरान शेयर मार्केट में लिस्टेड करीब 2,355 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले कारोबारी बंद के मुकाबले तेज या मामूली गिरावट लेकर ओपनिंग की थी, जबकि 948 कंपनियों के शेयर ऐसे थे, जो बढ़त के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुए थे. वहीं 155 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं दिखा और इनकी फ्लैट ओपनिंग हुई.  निफ्टी पर एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, श्रीराम फाइनेंस, एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स जहां सबसे ज्यादा भागते हुए नजर आए, तो वहीं टेक महिंद्रा, टीसीएस, टाटा मोटर्स, अपोलो हॉस्पिटल्स, डॉ रेड्डीज लैब्स जैसे बड़े स्टॉक्स ने गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की.  ट्रंप के ऐलान का IT शेयर पर असर  अब बताते हैं डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H1B Visa Fee Hike से प्रभावित हुए शेयरों के बारे में, तो इसका सबसे ज्यादा असर आईटी शेयरों पर पड़ा. सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में लार्जकैप में शामिल टेक महिंद्रा शेयर (3.74%), टीसीएस शेयर (2.20%), इंफोसिस (2.10%), एचसीएल शेयर (1.70%) की गिरावट लेकर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल हेक्सवेयर टेक शेयर (5.60%), एम्फेसिस शेयर (4%), टाटा टेक शेयर (2.10%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे.  अडानी पावर समेत ये 10 शेयर उछले बात करें, सबसे ज्यादा उछलने वाले शेयरों के बारे में, तो सबसे तूफानी रफ्तार से गौतम अडानी के नेतृत्व वाली अडानी पावर का शेयर भागा और 18 फीसदी से ज्यादा की तेजी लेकर 167.55 रुपये पर पहुंच गया. इसके अलावा अन्य बढ़त वाले स्टॉक्स में स्मॉलकैप कैटेगरी के स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (15%), आईआईएल (9%), बीसीएल इंडिया शेयर (7.56%), एमएमटीसी शेयर (7.50%) और नेट वेब शेयर (6%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. मिडकैप में पीईएल शेयर (5%), मुथूट फाइनेंस शेयर (3%), कोचीन शिपयार्ड शेयर (2.70%) और यस बैंक शेयर (2.10%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. 

सफर अब और आसान: Rail Neer का पानी अब होगा किफायती

नई दिेल्ली इंडियन रेलवे ने जीएसटी सुधारों के बाद रेल नीर की कीमतों में कटौती का एलान किया है। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी नोटफिकेशन के अनुसार, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) द्वारा निर्मित रेल नीर की एक लीटर की बोतल की कीमत 15 रुपये से घटाकर 14 रुपये कर दी गई है। वहीं, 500 मिलीलीटर पानी की बोतल की कीमत 9 रुपये से घटाकर 10 रुपये कर दी गई है। नोटिफिकेशन में कहा गया है, "पैकेज्ड पेयजल बोतल 'रेल नीर' का अधिकतम खुदरा मूल्य एक लीटर क्षमता वाली बोतल के लिए 15 रुपये से घटाकर 14 रुपये और 500 मिलीलीटर क्षमता वाली बोतल के लिए 10 रुपये से घटाकर 9 रुपये किया जाएगा।"   रेल नीर हुआ सस्ता नई कीतमें देश भर के रेलवे परिसरों और ट्रेनों में बेची जाने वाली सभी ब्रांडों की अन्य 'शॉर्टलिस्टेड' पैकेज्ड पेयजल बोतलों पर भी लागू होगा। रेलवे परिसरों/ट्रेनों में बेची जाने वाली आईआरसीटीसी/रेलवे द्वारा चयनित अन्य ब्रांडों की पैकेज्ड पानी की बोतलों का अधिकतम खुदरा मूल्य भी एक लीटर की बोतल के लिए 15 रुपये से घटाकर 14 रुपये और 500 मिलीलीटर की बोतल के लिए 10 रुपये से घटाकर 9 रुपये कर दिया जाएगा। जीएसटी सुधार क्या हैं? आज से  लागू होने वाले जीएसटी रिफॉर्म में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर 5 और 18 प्रतिशत का कर लगेगा। लग्जरी वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। अभी जीएसटी 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार स्लैब में लगाया जाता है। इसके अलावा, विलासिता वस्तुओं और अवगुण या पाप वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है।  

खुशखबरी! बदल गई कीमतें, देखें आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

नई दिल्ली भारत के इनडायरेक्ट टैक्सेशन सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव कल 22 सितंबर से लागू होने जा रहा है। यह बदलाव गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सुधार के रूप में सामने आया है। जीएसटी काउंसिल (जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं) ने सितंबर की शुरुआत में इस सुधार को मंजूरी दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाना, उपभोग को बढ़ावा देना और दरों का तार्किकरण करना है। इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलने वाली है। आइए जानते हैं डिटेल में… क्या है नया बदलाव? 1. दो मुख्य स्लैब – अब जीएसटी को सरल करते हुए दो प्रमुख दरें तय की गई हैं- 5% और 18% 2. विशेष स्लैब – तथाकथित सिन वस्तुओं जैसे तंबाकू, शराब, एरेटेड ड्रिंक्स इत्यादि पर 40% जीएसटी लगेगा। कल से आपके लिए क्या हो रहा है सस्ता? रोजमर्रा की जरूरी चीजें वो घरेलू सामान जिन पर अभी 12% जीएसटी लगता है, अब 5% स्लैब में आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं: • टूथपेस्ट, साबुन और शैम्पू • पैकेज्ड फूड जैसे बिस्किट, स्नैक्स और जूस • डेयरी उत्पाद जैसे घी और कंडेंस्ड मिल्क • साइकिल और स्टेशनरी • निश्चित कीमत तक के कपड़े और जूते 2. घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स जिन वस्तुओं पर अभी 28% टैक्स है, उन्हें घटाकर 18% किया जा सकता है। इससे कीमतें लगभग 7–8% तक कम हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: • एयर कंडीशनर • रेफ्रिजरेटर और डिशवॉशर • बड़े स्क्रीन वाले टेलीविजन • सीमेंट (निर्माण और हाउसिंग के लिए महत्वपूर्ण) ऑटोमोबाइल ऑटो सेक्टर को भी इस बदलाव से बड़ा फ़ायदा मिलने की उम्मीद है: • छोटे कार (1,200cc से कम इंजन वाली) पर जीएसटी 28% से घटकर 18% हो सकता है। • टू-व्हीलर (भारत की मोबिलिटी की रीढ़) भी कम स्लैब में आ सकते हैं। • बड़ी लग्जरी कार और एसयूवी पर ऊंचा टैक्स जारी रहेगा। बीमा और वित्तीय सेवाएं अभी बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी लगता है, जिससे यह महँगा हो जाता है। जीएसटी 2.0 में इन्हें कम स्लैब में लाया जा सकता है या कुछ मामलों में पूरी तरह छूट दी जा सकती है। बता दें कि बीमा सस्ता होने से मिडिल इनकम परिवारों में कवरेज बढ़ेगा, जिससे वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य/जीवन से जुड़े जोखिमों में कमी आएगी। कल से क्या होगा महंगा? जीएसटी 2.0 के बाद भी सब कुछ सस्ता नहीं होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कुछ वस्तुओं पर 40% ‘सिन टैक्स’ लागू रहेगा। • तंबाकू उत्पाद, शराब और पान मसाला • ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म • पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं मिलेगी। • लग्जरी सामान जैसे हीरे और कीमती रत्नों पर भी ऊंचा टैक्स जारी रहेगा।  

Bajaj Chetak ने रचा रिकॉर्ड, लॉन्च के बाद अब तक 5.1 लाख यूनिट्स की बिक्री

मुंबई  दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto की इलेक्ट्रिक स्कूटर Bajaj Chetak ने जनवरी 2020 में लॉन्च होने के बाद से अब तक 5,10,000 से ज़्यादा यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर दिया है. ख़ास तौर पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इन बिक्री हुए यूनिट्स में से 40 प्रतिशत से ज़्यादा यानी करीब 2,06,366 यूनिट्स बिक्री नवंबर 2024 के बाद के 10 महीनों में हुई है. Bajaj Chetak की बिक्री की उपलब्धि Bajaj Auto ने यह उपलब्धि हाल ही में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद हासिल की है. गौरतलब है कि रेयर अर्थ मैग्नेट की कमी के कारण Bajaj Chetak का उत्पादन अस्थायी रूप से रुक गया था. फिर भी, Bajaj Chetak लगातार भारत में सबसे ज़्यादा बिकने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों में से एक रहा है. Bajaj Chetak , TVS iQube के साथ टॉप स्थान पर भी रहा, जब तक कि हालिया समस्याओं ने इसे क्रम में नीचे नहीं गिरा दिया. हालांकि, अब उत्पादन फिर से पटरी पर आने के साथ, हम आने वाले महीनों में बिक्री के आंकड़ों में सुधार की उम्मीद कर सकते हैं. इस सफलता का श्रेय Bajaj Auto द्वारा Bajaj Chetak लाइनअप में कई वेरिएंट पेश करने और देश भर में 3,800 से ज़्यादा टचपॉइंट्स के अपने व्यापक सर्विस नेटवर्क का लाभ उठाने को दिया जा सकता है. अब तक बेचे गए 5,10,007 Chetak स्कूटरों में से, 3,48,251 यूनिट्स अप्रैल 2024 से पिछले 20 महीनों में भेजी गईं. दिल चस्प बात यह है कि Bajaj Auto के कारखाने से भारत भर के डीलरों तक पिछली 2,00,000 यूनिट्स 10 महीने से भी कम समय में भेजी गईं. Bajaj Chetak पोर्टफोलियो में वर्तमान में दो बैटरी कॉन्फ़िगरेशन वाले चार मॉडल शामिल हैं. इनमें Bajaj Chetak 3001 में 3kWh की बैटरी मिलती है, जबकि 3501, 3502 और 3503 वेरिएंट में 3.5kWh का बड़ा बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है. इस रेंज की कीमतें 99,900 रुपये से शुरू होकर 1.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती हैं.

PhonePe को RBI की हरी झंडी, डिजिटल भुगतान में SMEs और मर्चेंट्स को मिलेगी सहूलियत

मुंबई  PhonePe को RBI से ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस मिल गया है इससे SMEs और मर्चेंट्स के लिए डिजिटल भुगतान करना आसान होगा. यह कदम छोटे और मध्यम व्यवसायों को डिजिटल लेनदेन में सुरक्षित और तेज़ सुविधा प्रदान करेगा और वित्तीय समावेशन बढ़ाएगा.  भारत में डिजिटल पेमेंट का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में PhonePe ने अपनी ताकत साबित की है. 650 मिलियन से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स और 45 मिलियन मर्चेंट आउटलेट्स के नेटवर्क के साथ, PhonePe रोजाना 360 मिलियन से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है. अब कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस प्राप्त कर लिया है. यह मंजूरी न केवल कंपनी के लिए बल्कि छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) और मर्चेंट्स के लिए भी नई संभावनाएँ लेकर आई है. RBI लाइसेंस का महत्व RBI से मिली यह मंजूरी PhonePe को डिजिटल मर्चेंट्स को ऑनबोर्ड करने और उनके लेनदेन को सुरक्षित और तेज़ बनाने का अधिकार देती है. यह कदम डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ाने और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के RBI के प्रयासों का हिस्सा है. SMEs और मर्चेंट्स पर फोकस PhonePe विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों को डिजिटल भुगतान के समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर, युवराज सिंह शेखावत के अनुसार, यह लाइसेंस मर्चेंट सर्विसेज के विस्तार में सहायक होगा और व्यापारियों को डिजिटल लेनदेन की सुविधा देने में मदद करेगा. PhonePe की सेवाएं     SMEs और मर्चेंट्स को UPI, QR कोड और अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प उपलब्ध कराना     मर्चेंट्स के लिए टेक्नोलॉजी और एनालिटिक्स टूल्स प्रदान करना     व्यवसायिक लेनदेन को तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना RBI का यह कदम भारत में डिजिटल भुगतान को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगा. SMEs का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है और कैशलेस लेनदेन की दिशा में अहम कदम है. PhonePe को RBI से लाइसेंस क्यों मिला है? RBI ने PhonePe को ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस दिया है ताकि यह डिजिटल मर्चेंट्स को ऑनबोर्ड कर सके और उनके लेनदेन को सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बना सके. यह लाइसेंस SMEs और मर्चेंट्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? इस लाइसेंस के बाद छोटे और मध्यम व्यवसाय डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं, जिससे उनका व्यापार बढ़ेगा और लेनदेन अधिक सुरक्षित होगा. PhonePe रोजाना कितने ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है? PhonePe प्रतिदिन 360 मिलियन से अधिक ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है और इसका मर्चेंट नेटवर्क 45 मिलियन से अधिक आउटलेट्स तक फैला हुआ है. इस लाइसेंस से उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेगा? उपभोक्ताओं को सुरक्षित और तेज़ डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, साथ ही लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी.  

LPG सिलेंडर पर राहत मिल सकती है! 22 सितंबर से घट सकती हैं कीमतें, GST रेट जानें

नई दिल्ली 3 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया था, जिसमें नए GST Reform को मंजूरी दे दी गई. इस बैठक में 12  और 28 फीसदी GST स्‍लैब को हटाकर सिर्फ दो स्‍लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी को ही रखा गया. फूड आइटम्‍स से लेकर कपड़ा और कार- एसी, टीवी तक की चीजों पर जीएसटी रेट कट किया गया है, जो 22 सितंबर से प्रभावी होंगे.  नए GST Reform से आम जरूरत की ज्‍यादातर चीजें 22 सितंबर से सस्‍ती हो रही हैं. खाने-पीने की चीज से लेकर रोजमर्रा की लगभग हर जरूरी चीज 22 से सस्‍ती हो रही हैं. इसी बीच, लोग एलपीजी सिलेंडर को लेकर भी सर्च कर रहे हैं और ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्‍या LPG सिलेंडर के दाम घटेंगे या नहीं? तो आइए जानते हैं कि एलपीजी पर जीएसटी कितना लगेगा.  अभी कितना जीएसटी लगता है?  सरकार घरेलू सिलेंडर यानी रसोई गैस वाले सिलेंडर और कमर्शियल यूज वाले सिलेंडर पर अलग-अलग जीएसटी रेट लगाती है. घरेलू स‍िलेंडर पर 5% जीएसटी वसूला जाता है तो वहीं कमर्शियल यूज वाले सिलेंडर पर 18% GST लगता है. जीएसटी काउंसिल की तरफ से एलपीजी सिलेंडर पर GST रेट में बदलाव का ऐलान नहीं किया गया है, जिसका मतलब है कि एलपीजी पर जीएसटी नहीं कम होगा.  कमर्शियल सिलेंडर पर क्‍यों 18% जीएसटी?  22 सितंबर से घरेलू और कमर्शियल यूज वाले LPG सिलेंडर के दाम अपरिवर्तित रहेंगे. इनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा. कमर्शियल एलपीजी पर 18% जीएसटी इसलिए लागू किया गया है, क्‍योंकि ये सिलेंडर व्‍यवसाय के लिए यूज किए जाते हैं, जैसे होटल ओर रेस्‍तरां में कमर्शियल सिलेंडर का यूज होता है.  ये प्रोडक्‍ट्स हो रहे सस्‍ते गौरतलब है कि 3 सितंबर को हुई GST काउंसिल मीटिंग में कई बड़े फैसले की मंजूदी दी गई थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद के फैसले ने 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव किया. काउंसिल ने डेली आवश्यक वस्तुओं (FMCG) और स्वास्थ्य सेवा उत्पादों से लेकर शिक्षा सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कृषि उपकरण, बीमा और ऑटोमोबाइल तक जैसी वस्‍तुओं पर GST रेट को घटा दिया.  सिर्फ तंबाकू जैसे सिन प्रोडक्‍ट्स पर जीएसटी रेट 40 फीसदी करने का ऐलान किया. इसमें इस बार कोल्‍ड ड्रिंग्‍स को भी रखा गया है. सुपर लग्‍जरी कारों पर भी जीएसटी रेट को 40 फीसदी कर दिया गया है.