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तेल-गैस के कुओं से निकला क्रूड बनाता है ये 50 आम चीजें: प्लास्टिक से लेकर वैसलीन तक

 नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग से सिर्फ तेल और गैस का संकट ही नहीं बढ़ा है. इस जंग से हमारी रोजमर्रा की जरूरतों के समान पर भी संकट मंडराने लगा है. क्योंकि, हम हर दिन, हर वक्त कोई न कोई ऐसी चीज का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो पेट्रो केमिकल्स या पेट्रोलियम मैटेलियल से बना होता है. ऐसे में जानते हैं कि  पेट्रोलियम बेस्ड उन छोटी-छोटी चीजों के बारे में, जिनका हम हर रोज इस्तेमाल करते हैं।   हम हर जो रोज जिस बोतल से पानी पीते हैं, उसकी प्लास्टिक या फिर जिस गाड़ी से चलते हैं, उसके टायर की रबड़ या जो लोशन चेहरे और शरीर पर लगाते हैं, उसमें मिला केमिकल कहां से आता है. ये सब पेट्रो केमिकल उत्पाद हैं और मिडिल ईस्ट की जंग से  सिर्फ गैस और तेल ही नहीं, पेट्रोलियम से बनने वाले इन छोटे-छोटे प्रोडक्ट्स पर भी संकट गहरा रहा है।   हमारी सुबह की शुरुआत ही पेट्रोकेमिकल से बने टूथपेस्ट ट्यूब से होती है. इसके बाद बाथरूम में मौजूद शैम्पू , शैम्पू की बोतलें, साबुन, लोशन, बॉडी वॉश और सिंथेटिक कपड़ों की बारी आती है. पेट्रोलियम का मतलब सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस नहीं होता है. इससे और भी कई तरह की चीजें निकलती है, जो हमारी कई छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करती है।  1. प्लास्टिक और पैकेजिंग मैटेरियल पानी की बोतलें फूड कंटेनर, टिफिन बॉक्स पॉलिथीन बैग, रैपर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पैकेजिंग नोट – इन सबमें ज्यादातर प्लास्टिक, पॉलिथीन और पॉलीप्रोपेलीन पेट्रोकेमिकल से बनते हैं.  पेट्रो केमिकल्स​ 2. कपड़े और टेक्सटाइल पॉलिएस्टर  नायलॉन  स्पोर्ट्स वियर क्लोथिंग मैटेरियल कारपेट और परदे नोट- ये सभी  सिंथेटिक कपड़े हैं और  पूरी तरह पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं. 3. पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक्स साबुन, शैम्पू क्रीम, लोशन टूथपेस्ट परफ्यूम नोट – इन प्रोडक्ट्स को बनाने में ग्लीशरीन और दूसरे पेट्रो केमिकल्स यूज होते हैं. पेट्रो केमिकल्स​ 4. घरेलू सामान डिटर्जेंट और क्लीनिंग लिक्विड प्लास्टिक फर्नीचर किचन के कुछ नॉन स्टीक बर्तन  फोम, मैट्रेस और कुशन 5. ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट टायर (Synthetic rubber) कार के डैशबोर्ड, सीट कवर लुब्रिकेंट (Engine oil) पेंट और कोटिंग नोट – इन उत्पादों का निर्माण विशुद्ध पेट्रो केमिकल्स से होता है. 6. इलेक्ट्रॉनिक्स मोबाइल फोन के पार्ट्स लैपटॉप/टीवी का बॉडी वायर और केबल (इंसुलेशन) 7. दवाइयां और मेडिकल प्रोडक्ट कई दवाओं के केमिकल कंपोनेंट सिरिंज, बैग मेडिकल प्लास्टिक उपकरण 8. कंस्ट्रक्शन मैटेलियल PVC पाइप पेंट और वार्निश इन्सुलेशन मटेरियल फ्लोरिंग विनायल 9. खिलौने और स्पोर्ट्स मैटेलियल प्लास्टिक टॉय फुटबॉल, हेलमेट जिम इक्विपमेंट 10. फूड पैकेजिंग मैटेलियल फूड पैकेजिंग फिल्म बोतलें और कैन फूड स्टोरेज कंटेनर पेट्रो केमिकल्स​ कच्चे तेल और गैस को रिफाइन करने के दौरान अलग-अलग स्टेज पर उससे अलग-अलग कैमिकल निकलते हैं और उनका इस्तेमाल कई तरह की जरूरी चीजों को बनाने में होता है. कच्चे तेल और गैस का शोधन या डिस्टिलेशन के अलग-अलग चरणों में होता है और हर स्टेज में अलग-अलग पेट्रो केमिकल्स या हाईड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं.  पहले चरण में ही इससे एथेन, मीथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे गैस निकलते हैं. इनमें से प्रोपेन और ब्यूटेन से एलपीजी, पीएनजी और अन्य गैस बनाए जाते हैं,जिनका इस्तेमाल किचन से लेकर ऑटोमोबाइल तक में होता है.  इसके साथ ही ब्यूटाडाइन, बेंजीन, टोल्यून, मेथनॉल, ग्लिसरीन जैसे तत्व निकलते हैं, जिससे प्लास्टिक, पेंट, रबर, फॉर्मास्यूटिकल उत्पाद, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, लोशन, क्रीम जैसी चीजें बनती हैं. आगे के स्टेज में एथिलीन, प्रोपिलीन, ब्यूटिलीन जैसे पदार्थ निकलते हैं, जिनसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, रबड़ और ऐसे ही अन्य मैटेरियल बनाए जाते हैं.  शोधन प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है – एक्रिलोनाइट्राइल और आइसोब्यूटिलीन जैसे पेट्रो केमिकल प्राप्त होते हैं, जिससे फोम, रेजिन, पेंट और कोटिंग्स जैसे मेटेलियल बनते हैं. इन हाईड्रोकार्बन का इस्तेमाल पैकेजिंग मैटेरियल, चिपकने वाले पदार्थ, विस्फोटक, गोंद, औद्योगिक रसायन, सिंथेटिक रबर, टायरों, साबुन और डिटर्जेंट, रंग, दवाई, क्लीनिंग मैटेरियल और कई तरह के मेडिकल उपकरणों बनाने में होता है. पेट्रोलियम को रिफाइन करने के दौरान ही अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरक बनाने वाले तत्व भी निकलते हैं. 

भारत में लॉन्च हुई Mini Cooper S Victory Edition, कीमत और डिजाइन पर एक नजर

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Mini India ने भारतीय बाजार में अपनी MINI Cooper S Victory Edition लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को 57.50 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर उतारा है।  गौरतलब है कि इस मॉडल की बुकिंग फरवरी के आखिर में शुरू हुई थी, और इसे भारत में पूरी तरह से CBU इम्पोर्ट के तौर पर सीमित संख्या में लाया जा रहा है. इस स्पेशल एडिशन का डिजाइन 1965 की Monte Carlo Rally जीतने वाली Mini Cooper S से प्रेरित है।  MINI Cooper S Victory Edition का डिजाइन MINI Cooper S John Cooper Works Pack पर आधारित, नया Victory Edition विशेष रूप से Chili Red कलर स्कीम में पेश किया गया है, जिसमें रूफ का कलर ब्लैक रखा गया है और कार की पूरी लंबाई में एक सफ़ेद धारी बनी हुई है. वहीं इसके किनारों पर '52' नंबर के ग्राफ़िक्स भी बने हुए हैं, जो रैली जीतने वाली कार के रेस नंबर को दर्शाते हैं।  वहीं रियर प्रोफाइल की बात करें तो, इस एडिशन में रूफ पर लगा हुआ एक स्प्लिट स्पॉइलर और बीच में लगा एग्जॉस्ट दिया गया है. कार में बाहर की तरफ, इसमें C-पिलर पर '1965' की बैजिंग, व्हाइट कलर के हब कैप और JCW Lap Spoke 2-tone डिज़ाइन वाले 18-इंच के अलॉय व्हील्स जैसे अतिरिक्त फ़ीचर्स भी दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का इंटीरियर केबिन के इंटीरियर पर नजर डालें तो, यहां ब्लैक और रेड कलर की थीम दी गई है, और इसमें ड्राइवर-साइड के दरवाज़े पर 'Rallye Monte-Carlo' का स्टिकर, Victory Edition के दरवाज़े की सिल्स, और स्टीयरिंग व्हील के रिम और बीच के स्टोरेज बॉक्स पर '1965' की बैजिंग जैसे एलिमेंट्स दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का पावरट्रेन मैकेनिकल तौर पर नए Victory Edition में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले की तरह ही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 300 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। 

Meta के मेटावर्स पर ₹6.5 लाख करोड़ का नुकसान, पाकिस्तान का साल भर का बजट इससे कम है

 नई दिल्ली Meta ने अपने मेटावर्स प्लेटफॉर्म Horizon Worlds को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कंपनी अब इसे बंद करने जा रही है. साथ ही वीआर एक्सपीरियंस पर नए इन्वेस्टमेंट और डेवलपमेंट को भी लिमिट किया जा रहा है।  यह फैसला सिर्फ एक प्रोडक्ट बंद करने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का इशारा है कि Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हट रही है, जिसे कभी मार्क जकबरबर्ग इंटरनेट का फ्यूचर बताया गया था।  मेटावर्स को फ्यूचर बता कर जकरबर्ग ने Facebook को Meta कर दिया साल 2021 में फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ने दुनिया को बताया था कि सोशल मीडिया का दौर खत्म होने वाला है और अगला मेटावर्स अगला बड़़ा प्लेटफॉर्म होगा. मेटावर्स यानी एक वर्चुअल दुनिया ।  हाइप इतनी बनी की मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक का नाम बदलकर Meta कर दिया गया. यह टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा मोड़ था. पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने खुले तौर पर कहा कि वह इंटरनेट के अगले रूप को खुद बनाएगी ।  उस समय यह सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं था, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सिग्नल था. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऐपल, सबने इस दिशा में काम तेज कर दिया. वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और डिजिटल दुनिया को लेकर एक नई दौड़ शुरू हो गई।  पांच साल बाद अब तस्वीर बिल्कुल अलग है Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हटती दिख रही है. Horizon Worlds, जिसे कंपनी ने अपने वर्चुअल सोशल प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया था, वह उम्मीद के मुताबिक नहीं चला. अब कंपनी वर्चुअल रिएलिटी पर फोकस कम कर रही है और मोबाइल और AI पर ज्यादा ध्यान दे रही है।  यह सिर्फ एक प्रोडक्ट का फेल होना नहीं है. यह उस पूरे आइडिया की कमजोरी दिखाता है, जिसे इंटरनेट का भविष्य बताया गया थ।  80 अरब डॉलर का दांव, लेकिन यूजर नहीं आए Meta ने अपने Reality Labs डिवीजन के जरिए मेटावर्स पर 80 से 85 अरब डॉलर तक खर्च कर दिए. इसमें वीआर हेडसेट्स, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर, और डेवलपर टूल्स तक सब शामिल था।  इतना बड़ा निवेश करने के बाद भी कंपनी उस स्तर का यूजर एडॉप्शन नहीं ला पाई, जो इस पूरे मॉडल को टिकाऊ बना सके।  Horizon Worlds पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लाखों में ही सीमित रही. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि ज्यादातर यूजर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ ही समय के लिए आते थे और फिर वापस नहीं लौटते थे. यानी यूजर रिटेंशन में फेल हो गए।  टेक इंडस्ट्री में किसी भी प्लेटफॉर्म की सफलता सिर्फ यूजर्स से नहीं, बल्कि उनके बार-बार लौटने से तय होती है. मेटावर्स इस कसौटी पर कमजोर साबित हुआ।  टेक्नोलॉजी तैयार नहीं थी, या यूजर तैयार नहीं थे? मेटावर्स की असफलता को समझने के लिए यह सवाल जरूरी है. पहली नजर में लगता है कि समस्या टेक्नोलॉजी की थी. वीआर (VR) हेडसेट अभी भी महंगे हैं, भारी हैं, और लंबे समय तक पहनना आसान नहीं है. बैटरी लाइफ लिमिटेड है, और हाई क्वालिटी ग्राफिक्स के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए।  लेकिन असली समस्या इससे भी गहरी है. यूजर्स को जरूरत ही महसूस नहीं हुई. लोग अपने फोन और लैपटॉप पर पहले से ही सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो कॉल कर रहे हैं. मेटावर्स ने इन्हीं चीजों को एक नए फॉर्म में पेश किया, लेकिन ऐसा कुछ नया नहीं दिया जो लोगों को मजबूर करे कि वे अपनी आदतें बदलें यही वजह है कि मेटावर्स एक ऐसी टेक्नोलॉजी बन गया, जो मौजूद तो थी, लेकिन जरूरी नहीं थी. मेटावर्स कोनॉमी का सपना भी नहीं चला Meta का प्लान था कि मेटावर्स के अंदर एक पूरी डिजिटल इकोनॉमी बनेगी. लोग वर्चुअल जमीन खरीदेंगे, डिजिटल सामान लेंगे, और क्रिएटर्स पैसे कमाएंगे।  लेकिन यह मॉडल भी जमीन पर नहीं उतर पाया. यूजर्स के पास ऐसा कोई ऐसी वजह नहीं थी कि वे वर्चुअल चीजों पर पैसा खर्च करें।  जहां गेमिंग में लोग पैसे खर्च करते हैं, वहां भी एक स्ट्रॉन्ग गेम प्ले और कम्युनिटी होती है. मेटावर्स में वह दोनों चीजें कमजोर थीं. क्रिएटर्स के लिए भी कमाई का रास्ता साफ नहीं था, जिससे पूरा इकोसिस्टम धीमा पड़ गया।  फेसबुक से Meta बनना: एक बड़ा जोखिम जब फेसबुक ने अपना नाम बदलकर Meta किया, तब उसने अपने फ्यूचर को एक ही डायरेक्शन  में बांध दिया. यह एक साहसी बोल्ड मूव था, लेकिन रिस्की भी था।  कंपनी ने अपने मेन बिजनेस, जैसे विज्ञापन और सोशल प्लेटफॉर्म, से ध्यान हटाकर एक लंबे समय वाले विजन पर ज्यादा खर्च करना शुरू किया. इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा डगमगाया और कंपनी को कई बार अपनी स्ट्रैटिजी भी बदलनी पड़ी।  बाद में Meta को लागत कम करनी पड़ी, कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और नए फोकस की तलाश करनी पड़ी।  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने  पूरा खेल बदल दिया 2022 के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने टेक इंडस्ट्री का फोकस पूरी तरह बदल दिया. जहां मेटावर्स को भविष्य माना जा रहा था, वहीं एआई ने तुरंत असर दिखाया. कंटेंट बनाना, ऑटोमेशन, कोडिंग, कस्टमर सर्विस और हर जगह एआई का इस्तेमाल बढ़ गया।  कंपनियों को यहां तुरंत फायदा दिखा, जबकि मेटावर्स में फायदा दूर का सपना था. Meta ने भी यह बदलाव समझा और अब वह तेजी से एआई पर काम कर रहा है. इससे साफ है कि कंपनी ने अपनी प्रायॉरिटी बदल दी है।  क्या मेटावर्स को खत्म समझा जाए?  मेटावर्स पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसका बड़ा सपना फिलहाल रुक गया है. अब जो दिशा दिख रही है, वह ज्यादा प्रैक्टिकल है। पूरी वर्चुअल दुनिया बनाने के बजाय, अब कंपनियां असली दुनिया में डिजिटल चीजें जोड़ने पर काम कर रही हैं. ऑगमेंटेड रियलिटी, एआई और मोबाइल बेस्ड एक्सपीरिएंस इस डायेरक्शन में आगे बढ़ रहे हैं।  गेमिंग, ट्रेनिंग और कुछ खास इंडस्ट्री में मेटावर्स का इस्तेमाल जारी रहेगा, लेकिन यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा अभी नहीं बन पाया है।  Meta ने क्या खोया, क्या पाया? Meta ने इस पूरे एक्सपेरिमेंट में बहुत बड़ा पैसा खोया, समय खोया और कुछ हद तक भरोसा भी खोया. लेकिन इसके साथ ही कंपनी ने बहुत कुछ सीखा भी. वीआर और एआर टेक्नोलॉजी में उसकी पकड़ मजबूत हुई है. उसने नए प्लेटफॉर्म, नए चिप्स और नई तकनीकों पर … Read more

डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी बने सीआईआई मध्य प्रदेश के चेयरमैन

सीआईआई एमपी स्टेट एनुअल मीटिंग 2026 में उद्योग, संस्थागत निर्माण और समावेशी विकास पर हुआ मंथन भोपाल भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा मध्य प्रदेश स्टेट एनुअल मीटिंग 2026 का आयोजन इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राज्यभर से उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के भविष्य पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सीआईआई मध्य प्रदेश के नए नेतृत्व की घोषणा रही। आईसेक्ट लिमिटेड के निदेशक डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी को वर्ष 2026–27 के लिए सीआईआई मध्य प्रदेश का चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जबकि कृति न्यूट्रिएंट्स लिमिटेड के निदेशक श्री सौरभ सिंह मेहता को वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है। शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग-सरकार समन्वय के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के साथ डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी का नेतृत्व मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास, नवाचार और सहयोगात्मक पहल को नई दिशा देगा। उनके नेतृत्व में सीआईआई एमपी राज्य में नीति संवाद, उद्योग वृद्धि, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए कार्य करेगा। यह सम्मेलन “India’s Moment: Enterprise, Institution Building and Inclusive Growth” थीम पर आयोजित किया गया, जो विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। इस दौरान उद्योग की भूमिका, संस्थागत मजबूती और साझेदारी आधारित विकास मॉडल पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम के पब्लिक सेशन में “Advancing Industry, Powering Growth, Encouraging Collaboration” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राज्य में औद्योगिक विकास के नए अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण फायरसाइड चैट रहा, जिसमें भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन श्री राकेश भारती मित्तल ने “India’s Moment: Enterprise, Institution Building and Inclusive Growth” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने उद्योग नेतृत्व, संस्थागत विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह वार्षिक बैठक इस बात का प्रमाण रही कि मध्य प्रदेश उद्योग, नवाचार और सहयोग के माध्यम से देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में अग्रसर है।

सोना-चांदी में गिरावट के बाद तेजी से रिकवरी, जानें अभी कितने सस्ते हुए हैं

भोपाल सोने और चांदी के बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ब्लैक थर्सडे की भारी गिरावट के बाद आज शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं में जोरदार रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों के चेहरे पर राहत की मुस्कान लौट आई है। आज भारतीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹1,47,660 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले दिन के मुकाबले ₹2,737 की तेजी दर्शाता है। हालांकि, सोना अभी भी ₹1.5 लाख के अहम स्तर से नीचे बना हुआ है, जिसे बाजार में खरीदारी का सुनहरा मौका माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, चांदी ने आज सबसे बड़ा धमाका किया है। चांदी की कीमत ₹2,37,678 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो कल के मुकाबले ₹6,387 महंगी है। खास बात यह है कि चांदी अभी भी अपने ऑल टाइम हाई से करीब ₹1.80 लाख सस्ती मिल रही है, जिससे इंडस्ट्रियल डिमांड में तेजी की उम्मीद और मजबूत हो गई है। बाजार में अचानक क्यों लौटी तेजी? निचले स्तर पर जबरदस्त खरीदारी: कल की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने मौके का फायदा उठाया ग्लोबल टेंशन: खाड़ी देशों में तनाव ने सोने को फिर से सेफ हेवन बना दिया फेड के संकेत: अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद डॉलर-रुपया अस्थिरता: कमजोर रुपये ने घरेलू कीमतों को सपोर्ट दिया एक्सपर्ट्स की राय मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। ऐसे में लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय “Buy on Dip” यानी गिरावट पर खरीदारी का बेहतरीन अवसर माना जा रहा है। क्या करें निवेशक? शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है लॉन्ग टर्म के लिए यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है निवेश से पहले बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी कुल मिलाकर: गिरावट के बाद सोना-चांदी ने जबरदस्त वापसी की है, लेकिन बाजार अभी भी अस्थिर है — ऐसे में समझदारी से निवेश ही मुनाफे की कुंजी है।

तेल बाजार में हलचल, ईरान संकट से पावर पेट्रोल के दाम उछले

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद बनी ईंधन संकट की स्थिति का पहली बार पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ा है। देश में प्रीमियम यानी पावर पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक, प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल डीलरों ने इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल यह कीमतें सिर्फ पावर पेट्रोल की कीमतों पर लागू होंगी और रेगुलर पेट्रोल की कीमत नहीं बढ़ाई गई है। इस बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं। बता दें कि प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज़्यादा माइलेज के लिए किया जाता है। फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि जानकारों का मानना ​​है कि ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स खर्च में बदलाव कीमत में बढ़ोतरी की मुख्य वजह हो सकती हैं।  

BMW ने भारत में लॉन्च की नई M2 CS, जानिए इसकी कीमत और शानदार फीचर्स

मुंबई लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW India ने भारतीय बाजार में अपनी ऑल-न्यू BMW M2 CS को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने परफॉर्मेंस कार को 1.66 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है, जोकि स्टैंडर्ड BMW M2 से लगभग 65 लाख रुपये ज़्यादा है. इस अतिरिक्त कीमत के बदले, यह अब तक की सबसे पावरफुल M2 है, जिसमें एक अपग्रेडेड मोटर, हल्का कंस्ट्रक्शन और ऐसी परफॉर्मेंस मिलती है, जो बेमिसाल है।  आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CS का मतलब 'Competition Sport' है. इसे एक स्टैंडर्ड M कार और हार्डकोर CSL मशीनों के बीच रखा गया है. खास बात यह है कि यह एक ऐसी रेस कार के सबसे करीब है जिसे आप सड़क पर चलाने के लिए खरीद सकते हैं।  BMW M2 CS का इंजन इस कार में मिलने वाले इंजन की बात करें तो यह काफी जाना-पहचाना है, लेकिन कहीं ज्यादा दमदार है. कार में एक 3.0-लीटर ट्विन-टर्बो स्ट्रेट-सिक्स इंजन लगाया गया है, जो जो BMW M4 GT3 Evo रेस कार को भी पावर देता है. यह इंजन ज़बरदस्त 530bhp की पावर और 650Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है, जो स्टैंडर्ड BMW M2 से 50bhp और 50Nm ज़्यादा है. यह M4 Competition के लगभग बराबर ही है।  कंपनी का दावा है कि यह कार 0 से 100 km/h की रफ़्तार सिर्फ़ 3.8 सेकंड में पकड़ सकती है. अगर आप 'वन-फ़ुट रोलआउट' तरीके को भी शामिल करते हैं, तो यह समय घटकर लगभग 3.5 सेकंड हो जाता है. इसके बाद यह 0 से 200 km/h की रफ़्तार सिर्फ़ 11.7 सेकंड में हासिल कर लेती है, हालांकि इसकी टॉप स्पीड 302 km/h दर्ज की गई है।  खास बात यह है कि इसमें कोई मैनुअल गियरबॉक्स नहीं इस्तेमाल किया गया है, बल्कि इसकी जगह BMW का आठ-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाया गया है. इसका इंजन कार के पिछले व्हील्स को पावर पहुंचाता है, जिसके लिए पिछले एक्सल पर रेसिंग से प्रेरित एक डिफ़रेंशियल का इस्तेमाल किया गया है।  BMW M2 CS का एक्सटीरियर खास बात यह है कि नई CS, स्टैंडर्ड M2 से लगभग 30 किलोग्राम हल्की है. इसकी रूफ, बूट लिड (जिसमें एक इंटीग्रेटेड डकटेल स्पॉइलर भी लगा है), रियर डिफ्यूज़र, मिरर कैप्स और यहां तक कि सेंटर कंसोल पर भी CFRP, यानी कार्बन फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।  BMW M2 CS का इंटीरियर इसके इंटीरियर में सबसे बड़ा अपग्रेड M कार्बन बकेट सीट्स के रूप में देखने को मिलता है. इसके अलावा, कार में CS की ब्रांडिंग पूरे केबिन में भी दिखाई देती है, और दरवाज़ों पर, सेंटर कंसोल पर और यहां तक कि Alcantara लेदर से लिपटे स्टीयरिंग व्हील पर भी CS बैजिंग मिलती है. स्टीयरिंग व्हील में खुद भी हल्के कार्बन-फाइबर पैडल शिफ्टर्स लगाए गए हैं। 

महिंद्रा ने Batman Edition को लेकर ग्राहकों के दबाव में वापस किए पैसे

 नई दिल्ली देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने हाल ही में अपनी मशहूर इलेक्ट्रिक कार BE 6 का नया स्पेशल Batman Edition का दूसरा बैच लॉन्च किया था. लेकिन यह कदम कंपनी के लिए परेशानी का कारण बन गया. जहां नए ग्राहकों ने इसे उत्साह के साथ लिया, वहीं पहले बैच के खरीदार इस फैसले से नाराज हो गए. अब ग्राहकों की नाराजगी को देखते हुए कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए बायबैक ऑफर पेश किया है। क्यों देना पड़ा बायबैक ऑफर दरअसल, कंपनी ने अगस्त 2025 में BE 6 बैटमैन एडिशन को 'लिमिटेड रन' मॉडल बताते हुए लॉन्च किया था और इसकी सिर्फ 999 यूनिट्स ही बनाने की बात कही थी. खास बात यह रही कि ये सभी यूनिट्स कुछ ही मिनटों में बिक गई थीं. लेकिन इसके करीब 7 महीने बाद, 6 मार्च 2026 को कंपनी ने इसी स्पेशल एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च कर दिया. इससे पहले बैच के ग्राहकों को लगा कि कंपनी ने लिमिटेड एडिशन के नाम पर उनके साथ धोखा किया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने इस फैसले की जमकर आलोचना की। ग्राहकों की नाराजगी के बावजूद, BE 6 बैटमैन एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च होते ही मिनटों में बिक गया. इस बार कीमत में करीब 70,000 रुपये की बढ़ोतरी भी की गई थी, फिर भी डिमांड में कोई कमी नहीं दिखी. हालांकि, पहले खरीदारों का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा। कंपनी का बड़ा फैसला ग्राहकों के रिस्पांस को देखते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अब पहले बैच के ग्राहकों के लिए फुल बायबैक ऑफर की घोषणा की है. यानी अगर कोई ग्राहक अपनी कार वापस करना चाहता है, तो वह कंपनी से संपर्क कर सकता है. इसके लिए ग्राहकों को अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करना होगा. कंपनी ने साफ किया है कि यह ऑफर 18 मार्च 2026 से सिर्फ 30 दिनों के लिए ही वैलिड रहेगा। Batman Edition में क्या है ख़ास BE 6 Batman Edition में डार्क नाइट थीम दी गई है, जो इसे एक यूनिक लुक देती है. कार के एक्सटीरियर पर Batman के बैज दिए गए हैं, वहीं केबिन के अंदर भी इसी थीम को फॉलो किया गया है. हालांकि, इसके पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक बार चार्ज करने पर 682 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है. इसमें रियर माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 286 hp की पावर और 380 Nm का टॉर्क जनरेट करती है।

बाजार में उथल-पुथल और सप्लाई संकट से बढ़े दबाव, क्या क्रूड $200 तक जाएगा?

मुंबई ईरान के साथ चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. यूएस क्रूड (WTI) करीब $100 के आसपास आ गया है. मार्च 2026 में ब्रेंट की कीमत $113 से $116 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ हफ्तों में 50-60% की बढ़ोतरी दिखाती है. ईरान-इजराइल तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  में जहाजों की आवाजाही रोक दी है, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. इससे वेस्ट एशिया से तेल निर्यात 60% से ज्यादा घट गया है. फिलहाल दोपहर 3 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 फीसदी उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।  सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया है कि भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब खुल जाए, लेकिन बाजार की स्थिति सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा. सिटीग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, Q2 CY26 में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या फिलहाल तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकती है? चलिए जानते हैं. क्या तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है? कई विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अब असंभव नहीं रहा. ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाकारी ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो तेल $200 तक पहुंच सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा बिगड़ रही है. ईरान ने कहा है कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के लिए एक भी लीटर तेल नहीं गुजरेगा. होर्मुज सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यहां अगर ब्लॉकेज हुआ तो सप्लाई तुरंत टूट जाएगी।  विशेषज्ञ अमृता सेन (एनर्जी एस्पेक्ट्स) का कहना है, “यह अब सिर्फ रिस्क प्रीमियम नहीं है, असली सप्लाई डिसरप्शन हो रहा है.” बॉब मैकनैली और हेलिमा क्रॉफ्ट जैसे एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बड़ा डिसरप्शन हुआ तो कीमतें तेजी से उछल सकती हैं, क्योंकि स्पेयर कैपेसिटी बहुत कम है. कुछ एनालिस्ट्स कहते हैं कि $150-$200 तक जाना अब “अनथिंकेबल” नहीं रहा. हालांकि अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा है कि $200 “अनलाइकली” है, लेकिन पूरी तरह नामुमकिन नहीं।  करेंसी पर दबाव बढ़ेगा अगर होर्मुज बंद रहा तो ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ जाएगी, महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक मंदी आ सकती है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, करेंसी पर दबाव बढ़ेगा और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा. भारत ने अपने टैंकरों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए हैं और डिप्लोमैसी से जहाजों को पास करवाया है. लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो गैसोलीन $6-7 प्रति गैलन तक जा सकती है, जो आम आदमी पर बोझ डालेगा।  इतिहास में 2008 में ब्रेंट $147 तक पहुंचा था (आज के मुताबिक $211 के बराबर), और 1973-74 के ऑयल क्राइसिस में भी कीमतें कई गुना बढ़ी थीं. आज का बाजार पहले से ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि कई जगहों पर डिसरप्शन एक साथ हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब अनिश्चितता नहीं, बल्कि असली शॉक प्राइस कर रहा है. डिप्लोमेसी, स्ट्रैटेजिक रिजर्व रिलीज या मिलिट्री एक्शन से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो $200 तेल दुनिया को अलग ही दौर में ले जाएगा. ऐसे में महंगाई, मंदी और ग्लोबल पावर बैलेंस बदल सकता है। 

FASTag यूजर्स को झटका: 1 अप्रैल से बढ़ेगा एनुअल पास का दाम, अभी ₹3000 में मौका

मुंबई नेशनल हाईवे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag एनुअल पास शुरू किया था। इसे 6 महीने के अंदर 50 लाख से ज्यादा यूजर्स ने एक्टिव कराया हैं। इस दौरान 26.55 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं। NHAI ने बताया था कि नेशनल हाईवे (NH) नेटवर्क पर होने वाले कुल कार ट्रांजैक्शन में से लगभग 28% अब FASTag एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं, जो नेशनल हाईवे यूजर्स के बीच FASTag एनुअल पास की बढ़ती पसंद को दिखाता है। हालांकि, लोगों की यही पसंद आप उनकी जेब पर थोड़ी सी भारी पड़ेगी। दरअसल, NHAI ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए इस पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपए करने का फैसला किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। अभी इस पास की कीमत 3,000 रुपए है।   यह नई कीमत 'राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008' में बताए गए टोल रिवीजन मैकेनिज्म के अनुसार तय की गई है। यही नियम राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क को नियंत्रित करता है। FASTag एनुअल पास नॉन-कमर्शियल व्हीकलके लिए है और इसका इस्तेमाल भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के नेटवर्क पर मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। व्हीकल में एक वैलिड FASTag लगा होना जरूरी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 56 लाख से ज्यादा वाहन चालक पहले ही इस एनुअल पास प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशनकरवा चुके हैं। FASTag एनुअल पास क्या है? सबसे पहले समझते हैं कि FASTag एनुअल पास क्या है? तो ये सालाना टोल पास एक तरह की प्रीपेड टोल स्कीम है, जिसे खास तौर से कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल प्राइवेट व्हीकल के लिए तैयार किया गया है। नए पास की घोषणा करते समय नितिन गडकरी ने कहा था कि इसका उद्देश्य 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाजा से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना और सिंगल, अफॉर्जेबल लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सरल बनाना है। टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को कम करके, भीड़भाड़ को कम करके और विवादों को कम करके, वार्षिक पास का उद्देश्य लाखों प्राइवेट व्हीकल ओनर्स के लिए एक फास्ट और आसान यात्रा का अनुभव देना है। खास बात ये है कि इसके लिए लोगों को नया टैग खरीदने के की जरूरत नहीं है, बल्कि ये आपके मौजूदा FASTag से जुड़ जाएगा। इसकी कंडीशन ये है कि आपका मौदूजा FASTag एक्टिव होना चाहिए और आपके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा हो। यह योजना केवल NHAI और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू होगा। इसके लिए बार-बार ऑनलाइन रिचार्ज करने की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह डेली पैसेंजर्स के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह पास नॉन-ट्रांसफरेबल है। इसे सिर्फ रजिस्टर्ड व्हीक के साथ ही इस्तेमला कर पाएंगे। FASTag एनुअल पास कहां काम करेगा? FASTag एनुअल पास केवल NHAI द्वारा ऑपरेटेड राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) पर स्थित टोल प्लाजा पर ही काम करता है। जैसे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मुंबई-नासिक, मुंबई-सूरत और मुंबई-रत्नागिरी मार्ग आदि। राज्य राजमार्गों या नगरपालिका टोल सड़कों पर आपका FASTag सामान्य रूप से काम करेगा और टोल सामान्य रूप से वसूला जाएगा। जैसे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे (समृद्धि महामार्ग), अटल सेतु, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे। ये सभी राज्य प्राधिकरणों द्वारा संचालित होते हैं। ऐसे एक्टिवेट करें फास्टैग एनुअल पास FASTag एनुअल पास एक्टिवेट करने को लेकर इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) की तरफ एक नोटिफिकेशस जारी किया गया है। IHMCL ने नोटिफिकेशन में इस एनुअल पास से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं। साथ ही, फास्टैग के एनुअल पास को एक्टिवेट करने का तरीका भी बताया है। IHMCL के मुताबिक, FASTag एनुअल पास को सिर्फ Rajmargyatra (राज मार्ग यात्रा) मोबाइल ऐप और NHAI पोर्टल पर जाकर ही एक्टिवेट किया जा सकेगा। इस पास को एक्टिवेट करने के लिए कार चालक को पहले अपने व्हीकल और उसके ऊपर लगे FASTag की एलिजिबिलिटी को वेरिफाई करना होगा। एक बार वेरिफिकेशन्स कंप्लीट होने के बाद 3000 रुपए का पमेंट करना होगा। यूजर द्वारा किया गया 3000 रुपए की पेमेंट कंफर्मेशन होने के बाद 2 घंटे के अंदर FASTag एनुअल पास एक्टिवेट हो जाएगा। यह एक्टिवेशन आपके मौजूदा फास्टैग पर ही होगा। FASTag एनुअल पास के लिए आपको न्यू फास्टैग खरीदने की जरूरत नहीं है। फास्टैग एनुअल पास पर पेमेंट करने से अगले 1 साल तक या फिर 200 टोल पाल करने तक की वैलिडिटी मिलेगी। 7000 रुपए की बचत होगी इस पास की कीमत 3000 रुपए रखी गई है, जिसमें 200 यात्राएं शामिल हैं। एक यात्रा का मतलब एक बार टोल प्लाजा पार करना है। यानी प्रति टोल खर्च सिर्फ 15 रुपए ही खर्च होंगे। अभी 200 बार टोल पार करने पर करीब 10,000 रुपए खर्च होते हैं, लेकिन नई स्कीम में यह काम सिर्फ 3000 रुपए ही लगेंगे। इसका मतलब है कि पैसेंजर व्हीकल चलाने वालों की करीब 7000 रुपए की सीधी बचत होगी।