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TESLA का नया सुपरचार्जर, 15 मिनट में इलेक्ट्रिक कार पूरी तरह होगी चार्ज

 नई दिल्ली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने पिछले साल जुलाई में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मॉडल वाई को भारत में लॉन्च किया था. अब कंपनी ने नवी मुंबई में अपना नया चार्जिंग स्टेशन शुरू किया है. भारत में ये टेस्ला का पांचवा चार्जिंग स्टेशन है. ख़ास बात ये है कि ये नया सुपर चार्जिंग स्टेशन मॉल के अंदर लगाया गया है, इससे अब लोग शॉपिंग के साथ-साथ अपनी कार भी आसानी से चार्ज कर सकेंगे।  कंपनी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार टेस्ला का यह नया सुपरचार्जर मुंबई के नेक्सस सीवुड्स मॉल में लगाया गया है. ये कंपनी का पहला इन-मॉल चार्जिंग स्टेशन है. इससे पहले कंपनी ने इंडिया में किसी मॉल के अंदर चार्जिंग फेसिलिटी शुरू नहीं की थी. इस नई फेसिलिटी में कुल 8 चार्जर लगाए गए हैं, जिससे आसपास के Tesla कार मालिकों को बड़ी राहत की उम्मीद है. यह चार्जिंग स्टेशन मॉल के B1 पार्किंग एरिया में लगाया गया है।  टेस्ला पहले से गुरुग्राम, दिल्ली, और मुंबई में अपने चार्जिंग स्टेशन लगा चुका है. अब कंपनी पूरे देश में अपने Supercharger नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है. खास बात यह है कि कंपनी ऐसे लोकेशन की तलाश में है, जहां लोग आमतौर पर समय बिताते हैं, जैसे मॉल, हाईवे रेस्ट स्टॉप और फूड कोर्ट इत्यादि. ताकि कार को खड़ी चार्जिंग करना आसान हो।  पावरफुल चार्जिंग की सुविधा इस नए स्टेशन पर 4 V4 सुपरचार्जर (डीसी चार्जिंग) लगाए गए हैं. जिनकी स्पीड 250 kW तक है. इसके अलावा चार डेस्टिनेशन चार्जर भी लगाए गए हैं, जो 11 kW की पावर देते हैं. यानी यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से चार्जिंग का विकल्प चुन सकते हैं. कंपनी का दावा है कि सुपरचार्जर की मदद से Model Y इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ 15 मिनट में लगभग इतना चार्ज किया जा सकता है कि, यूजर को 275 किलोमीटर तक की रेंज मिलेगी।  Tesla ऐप से पूरा कंट्रोल Tesla के मोबाइल ऐप के जरिए यूजर्स आसानी से नजदीकी चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकते हैं, बैटरी को पहले से तैयार कर सकते हैं, चार्जिंग स्टेटस देख सकते हैं और पेमेंट भी कर सकते हैं. यह पूरा सिस्टम एक ही जगह पर उपलब्ध है. इस नए स्टेशन के साथ Tesla के भारत में अब कुल 4 चार्जिंग स्टेशन हो गए हैं. जिसमें 20 सुपरचार्जर और 14 डेस्टिनेशन चार्जर शामिल हैं।  चार्जिंग स्टेशन के साथ ही नेक्सस सीवुड्स मॉल के एट्रियम में Tesla ने एक पॉप-अप स्टोर भी शुरू किया है. यहां लोग कंपनी की कारों को करीब से देख सकते हैं, टेस्ट ड्राइव ले सकते हैं और नई तकनीक को समझ सकते हैं. Model Y की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है. साथ ही कंपनी होम चार्जिंग की सुविधा भी दे रही है। 

रॉयल एनफील्ड का खेल बिगाड़ने आई Triumph, सस्ती 350 सीसी बाइक्स लॉन्च, कीमत जानें

मुंबई  Triumph 350 Bike Launch: ब्रिटिश मोटरसाइकिल कंपनी ट्रायम्फ ने आज भारतीय बाजार में अपनी सबसे किफायती 350 सीसी बाइक रेंज को आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए लॉन्च किया है. 350 सीसी इंजन के साथ मिड-साइज़ सेगमेंट में आने वाली इन बाइक्स का नाम अभी भी 400 सीरीज ही रखा गया है. जीएसटी नियमों में बदलाव के बाद उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगा, क्योंकि अब ये बाइक्स पहले से सस्ती हो गई हैं।  GST ने बदला गेम दरअसल, सरकार के नए जीएसटी नियम के तहत 350 सीसी से ज्यादा इंजन वाली दोपहिया गाड़ियों पर 40 प्रतिशत टैक्स लागू हो गया. इस फैसले से कंपनियों के लिए हैवी इंजन वाली बाइक्स की कीमतों को कम रखना मुश्किल हो गया था. इसी चुनौती से निपटने के लिए Triumph ने अपनी 400 सीरीज के इंजन को घटाकर 350 सीसी कर दिया. इससे बाइक्स कम टैक्स स्लैब में आ गईं और कंपनी को कीमत कम करने का मौका मिल गया. बता दें कि, 350 सीसी से कम इंजन क्षमता वाली बाइक्स 18% स्लैब में आती हैं।  कीमतों में बड़ी कटौती  ट्रायम्फ के इस नए 350 सीरीज के लॉन्च के बाद पिछले मॉडल के मुकाबले कीमतों में भारी कटौती देखने को मिली है. दिल्ली में एक्स-शोरूम कीमतों की बात करें तो Speed T4 अब 1,95,000 रुपये में मिल रही है. Speed 400 की कीमत 2,31,890 रुपये हो गई है. Scrambler 400 की कीमत 2,59,241 रुपये तय की गई है. Thruxton 400 अब 2,65,538 रुपये में उपलब्ध है. वहीं Scrambler 400 XC की कीमत 2,89,534 रुपये रखी गई है।   इंजन छोटा, लेकिन कैरेक्टर बरकरार नई रेंज में सबसे बड़ा बदलाव इंजन का है. अब इन बाइक्स में 350 सीसी का इंजन दिया गया है, जिसे पुराने इंजन बोर और स्ट्रोक्स में बदलाव करते हुए थोड़ा छोटा किया गया है. इससे इंजन के पावर आउटपुट में भी कमी आई है, हालांकि कंपनी का कहना है कि राइडर को बाइक के परफॉर्मेंस में कोई ज्यादा कमी महसूस नहीं होगी।  Triumph Speed 400 और Scrambler 400X में दिया गया इंजन अब 36.50 बीएचपी की पावर और 32 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है. यह पहले के मुकाबले करीब 3 बीएचपी और 3.5 एनएम कम है. वहीं Speed T4 का इंजन 29 बीएचपी पावर और 31 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है, जो पहले से थोड़ा कम है. ट्रायम्फ का कहना है कि पावर कम होने के बावजूद बाइक का असली कैरेक्टर और राइडिंग फील बरकरार रखा गया है।  परफॉर्मेंस में मामूली गिरावट इंजन छोटा होने का असर परफॉर्मेंस पर भी दिखता है. Speed 400 पहले 0 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार करीब 7.4 सेकंड में पकड़ लेती थी. अब नई 350 सीरीज को यही स्पीड पाने में लगभग 8.1 सेकंड लगते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि टॉप स्पीड और 0 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार में ज्यादा फर्क नहीं आया है. यानी शहर और डेली राइडिंग में आपको ज्यादा अंतर महसूस नहीं होगा।  चर्चा में नया Tracker 400  कंपनी ने इसी के साथ भारत में Tracker 400 नाम का नया मॉडल भी पेश किया है. दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेशनल मॉडल के मुकाबले भारत में इसे छोटे 350 सीसी प्लेटफॉर्म पर लाया गया है. यह बाइक Thruxton 400 के साथ सबसे ज्यादा पावरफुल ट्यून में आती है, जिसका इंजन 40 एचपी की पावर और 32 एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है।  इंजन में बदलाव के अलावा बाकी बाइक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले जैसा ही फ्रेम, सस्पेंशन, ब्रेक और व्हील्स दिए गए हैं. इसका मतलब है कि राइडिंग स्टेबिलिटी, हैंडलिंग और ओवरऑल बिल्ड क्वालिटी पहले जैसी ही बनी रहेगी. भारत जैसे बाजार में प्राइस एक बड़ा फैक्टर होती है, ऐसे में Triumph की यह रणनीति काफी हद तक सफल हो सकती है. खासकर उन ग्राहकों के लिए जो कम खर्च में प्रीमियम ब्रांड का मजा लेना चाहते हैं. कंपनी का कहना है कि, भारत की सड़कों पर अब 1 लाख से ज्यादा Triumph बाइक्स दौड़ रही हैं।  मॉडल   कीमत (एक्स-शोरूम) Speed T4  1,95,000 रुपये Speed 400  2,31,890 रुपये Scrambler 400 2,59,241 रुपये  Thruxton 400 2,65,538 रुपये  Scrambler 400 XC 2,89,534 रुपये 

मैक्सिको की खाड़ी को मिडिल ईस्ट जैसा बनाना है, LPG और पेट्रोल को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने की योजना

वॉशिंगटन   ईरान और अमेरिका जंग के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ब्लॉक हुआ पड़ा है. ईरान ने दोस्त देशों को यहां से निकलने की इजाजत तो देदी है लेकिन तेल की सप्लाई पहले की तरह नहीं चल रही है. इस बीच अमेरिका के ‘मैक्सिको की खाड़ी’ (US Gulf) को लेकर एक बड़ा दांव खेला जा रहा है. बताया जा रहा है कि इसे दूसरा मिडिल ईस्ट बनाने की तैयारी की जा रही है, जहां से भर-भर कर LPG, पेट्रोल दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाया जाएगा. भारत के लिए ये सबसे आसान और सस्ता रास्ता होगा. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के इस गल्फ पर अभी से ही बड़े-बड़े बिजनेसमैन पैसों की बरसात करने लगे हैं।  तेल कंपनियों की लगी लाइन दुनिया की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनियां अमेरिका के इस अल्ट्रा-डीपवाटर प्रोजेक्ट में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिए लाइन लगाकर खड़ी हैं. यूरोप की दिग्गज कंपनी TotalEnergies और Shell के साथ-साथ लंदन की BP और स्पेन की Repsol भी इस रेस में शामिल हैं।  ‘शेननडोह’ फील्ड के मौजूदा मालिक अपनी 51% हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं. इसके लिए आने वाले कुछ ही हफ्तों में बिड्स लगाई जा सकती हैं. सूत्रों का कहना है कि मिडिल ईस्ट और एशिया के बड़े तेल उत्पादक भी इस रेस में शामिल हो सकते हैं, जिससे भारत के लिए भविष्य में तेल और LPG की सप्लाई का एक नया रास्ता खुल सकता है।  यहां से निकलेगा कितना तेल? ये कोई मामूली ऑयल फील्ड नहीं है. ये समंदर की उस गहराई में है जहां जाना किसी चुनौती से कम नहीं. यहां तेल और गैस के भंडार करीब 30,000 फीट नीचे हैं।  यहां का प्रेशर 20,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच तक पहुंच जाता है. इसके बावजूद, यहां से जुलाई में उत्पादन शुरू हो चुका है और रोजाना 1,00,000 बैरल तेल निकाला जा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह इलाका युद्ध क्षेत्र से कोसों दूर है. यहां से तेल की सप्लाई के लिए होर्मुज जैसे खतरनाक रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  भारत के लिए क्यों है ये गेम चेंजर मिडिल ईस्ट के संकट ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. होर्मुज में जारी समुद्री ब्लॉकेड के बीच अमेरिका का यह इलाका दुनिया के लिए तेल का नया केंद्र बन रहा है।  जब मिडिल ईस्ट में तनाव से कीमतें बढ़ती हैं, तब अमेरिका से होने वाला अधिक उत्पादन मार्केट को संतुलित रखने में मदद करेगा. भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में LPG से लेकर पेट्रोल तक भारी मात्रा में ईंधन चाहिए. अमेरिका जैसे स्थिर देश से सप्लाई मिलना भारत के लिए ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ की सबसे बड़ी गारंटी हो सकता है। 

अचानक बाजार में आई जोरदार रैली, जानें ये 5 कारण जिन्होंने इसे प्रेरित किया

मुंबई  अचानक सोमवार को शेयर बाजार ने सबको हैरान कर दिया है. सुबह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी. लेकिन दोपहर 12.30 बजे मार्केट ने पलटी मार दी, और धीरे-धीरे बाजार अब मजबूती के संकेत दे रहे हैं।  दोपहर ढाई बजे सेंसेक्स 641.81 अंक चढ़कर 73,950 पर कारोबार रहा था. वहीं निफ्टी 190 अंक चढ़कर 22,906 पर कारोबार कर रहा था. एक्सपर्ट्स की मानें तो बाजार में इस अचानक आए उछाल के पीछे वैश्विक के साथ-साथ घरेलू कारण भी हैं. अब निवशेक धीरे-धीरे बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया अपना रहे हैं।  कारोबार के दौरान Trent के शेयर में 7 फीसदी, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस के शेयर में करीब 4 फीसदी, टाइटन के शेयर में 3.50 फीसदी, एक्सिस बैंक के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. मिडकैप कैटेगरी में कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में 6.30 फीसदी की जोरदार तेजी है।  शेयर बाजार में इस तेजी के मुख्य तौर पर 5 कारण हैं. 1. मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत अमेरिका और ईरान में सुलह के संकेत से बाजार को बल मिला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 45 दिनों के युद्धविराम के लिए चर्चा कर रहे हैं. इस खबर ने बाजार में छाई अनिश्चितता को कम किया है. ईरान द्वारा ओमान के साथ मिलकर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'में आवाजाही के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने की घोषणा से भी निवेशकों ने राहत की सांस ली, क्योंकि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का डर कम हुआ।  2. आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है. बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी ब्याज दरों (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रख सकता है. महंगाई पर नियंत्रण और विकास दर को संतुलित रखने के आरबीआई के प्रयासों ने निवेशकों को भरोसा दिया है।  3. नए वित्त वर्ष से निवेश का आगाज इसके अलावा अप्रैल का महीना नए वित्त वर्ष की शुरुआत का समय होता है. पिछले महीने (मार्च) में भारी बिकवाली और सुधार के बाद, कई शेयरों के वैल्युएशन (Valuation) काफी आकर्षक हो गए थे. संस्थागत निवेशकों और रिटेल निवेशकों ने नए वित्त वर्ष के लिए नए सिरे से पूंजी निवेश शुरू कर दिया है. जिसे बाजार की तेजी का एक तकनीकी कारण माना जा रहा है।  4. आईटी और बैंकिंग सेक्टर में शानदार खरीदारी HDFC और Axis बैंक ने चौथी तिमाही के रिजल्ट से पहले अपडेट दिया है, जो कि बाजार को पसंद आया है. यही कारण है कि बाजार की इस रिकवरी को लीड बैंकिंग, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों ने किया है. बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखी गई. इसके अलावा, आईटी सेक्टर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्थिर संकेतों के कारण सकारात्मक रुख बना रहा।  5. घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का समर्थन भले ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) बिकवाली कर रहे थे, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा है. एलआईसी (LIC) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स की ओर से की गई खरीदारी ने बाजार को बड़े क्रैश से बचाया है और सोमवार को रिकवरी का आधार तैयार किया। 

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: खुलते ही चांदी ₹2800 सस्ती, सोना भी हुआ सस्ता

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में जारी गिरावट (Gold-Silver Rates) का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर वायदा कारोबार ओपन होने के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. चांदी एक झटके में अपने पिछले बंद के मुकाबले 2800 रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई, तो वहीं सोने का भाव 1300 रुपये से ज्यादा कम हो गया।  इस गिरावट के बाद अब 1 Kg Silver Price अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से क्रैश (Silver Crash From High) होते हुए 2.09 लाख रुपये सस्ती हो गई है. अगर आप सोना-चांदी में निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो फिर खरीदारी से पहले इनके लेटेस्ट रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है. हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट के दोनों कीमती धातुएं रिकवरी मोड में भी नजर आईं।  चांदी की कीमत में फिर गिरावट एमसीएक्स पर सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही चांदी की कीमत धड़ाम हो गई. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन गुरुवार को वायदा चांदी 2,32,495 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और जब लॉन्ग वीकेंड के बाद कमोडिटी मार्केट ओपन हुआ, तो Silver Price फिसलकर 2,29,651 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो चांदी अचानक 2844 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई।  सोमवार को आई इस शुरुआती गिरावट के बाद अब चांदी अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा कम कीमत पर मिल रही है. MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इस कीमती धातु का लाइफ टाइम हाई लेवल 4,39,337 रुपये प्रति किलोग्राम है और ताजा भाव से तुलना करें, तो अब 1 Kg Silver Price 2,09,686 रुपये तक कम है।  सोने का भी चांदी जैसा हाल  न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि सोने की कीमत में भी सप्ताह के पहले कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है. बीते गुरुवार को सोने का वायदा भाव 1,49,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और सोमवार को ये गिरावट के साथ 1,48,298 रुपये पर ओपन हुआ. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1382 रुपये कम हो गया।   सोना भी अपने हाई लेवल से अब काफी सस्ता हो चुका है. गोल्ड का लाइफ टाइम एमसीएक्स हाई 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है और ताजा भाव इस हाई के मुकाबले 54,686 रुपये सस्ता है।  ग्लोबल टेंशन, फिर भी टूटे सोना-चांदी  मिडिल ईस्ट युद्ध से ग्लोबल टेंशन चरम पर है और ट्रंप की ईरान को लेकर नई धमकियों ने इसे बढ़ाने का काम किया है. इन हालातों में भी सोना-चांदी की कीमतों में ये गिरावट चौंकाने वाली है, क्योंकि अक्सर किसी आपदा या जियो-पॉलिटिकल तनाव की स्थिति में कीमती धातुओं के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं।  वर्तमान हालात में सोना-चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल के दाम में तेजी के चलते महंगाई के जोखिम ने दबाव बढ़ाया है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. लोग अपने हाथ में कैश रखने को ज्यादा उचित मान रहे हैं. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी सोना-चांदी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। 

लखनऊ में बनेगा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, J Kumar Infra को मिला 1184 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

नई दिल्ली वैश्विक बाजार में मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता के बीच भारतीय घरेलू मार्केट में 6 अप्रैल से शुरू हो रहे ट्रेडिंग सेशन में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कुछ कंपनियां निवेशकों के रडार पर रह सकती हैं. हाल ही में इन कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर से उनके बिजनेस की आगे की संभावनाएं मजबूत बनती दिख रही हैं. J Kumar Infraprojects को मिला बड़ा प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की J Kumar Infraprojects Limited को हाल ही में एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ है. जिससे कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत हुई है. यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लखनऊ में वृंदावन योजना, सेक्टर-15 में 10,000 लोगों की क्षमता वाले इंटरनेशनल एग्जीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से जुड़ा है. कंपनी को इसके लिए 1,184 करोड़ रुपये देने की बात सामने आई है. निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय तय किया गया है. RVNL को मिला नया रेलवे प्रोजेक्ट साउथ सेंट्रल रेलवे ने Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) को 242 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. जिसके तहत ओंगोल से गुडूर सेक्शन में काम किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट विजयवाड़ा डिवीजन में आता है. कंपनी को इस काम के लिए 24 महीने का समय दिया गया है.   इस प्रोजेक्ट में मौजूदा 1×25 kV सिस्टम को अपग्रेड कर 2×25 kV AT फीडिंग सिस्टम में बदला जाएगा. साथ ही इस डील में ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) का डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसे काम भी शामिल हैं. GR Infraprojects को मिला बड़ा EPC कॉन्ट्रैक्ट GR Infraprojects Limited ने वेस्ट सेंट्रल रेलवे के साथ 1,898 करोड़ रुपये का बड़ा EPC एग्रीमेंट किया है. इस डील से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत हुई है. लगातार मिल रहे प्रोजेक्ट यह संकेत दे रहे हैं कि अलग-अलग सेगमेंट में कंपनी का ऑर्डर फ्लो स्थिर बना हुआ है. जो आगे की ग्रोथ के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है.

रियल एस्टेट में निवेश का सुनहरा मौका, नए टैक्स कानून से बढ़ेगी होम बायर्स की बचत और घटेगी कागजी कार्रवाई

नई दिल्ली 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ ने घर खरीदारों और इन्वेस्टर्स के लिए खुशियों का रास्ता खोल दिया है. इस नए कानून का सीधा मकसद लोगों की जेब में ज्यादा पैसा बचाना और प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस को सरल बनाना है. आइए समझते हैं कि यह आपकी प्रॉपर्टी प्लानिंग को कैसे बदलेगा. क्या आपकी जेब में अब ज्यादा पैसा बचेगा? बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नए टैक्स कानून की सबसे बड़ी खूबी 12 लाख रुपये की नई छूट सीमा (Exemption Threshold) है. इसका सीधा मतलब है कि अब नौकरीपेशा लोगों के पास घर ले जाने के लिए ज्यादा सैलरी (Disposable Income) बचेगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब हाथ में पैसा ज्यादा होगा, तो लोग आसानी से होम लोन की EMI चुका पाएंगे. इससे न सिर्फ पहली बार घर खरीदने वालों को हिम्मत मिलेगी, बल्कि पुराने इन्वेस्टर्स भी बिना कर्ज के बोझ के नई प्रॉपर्टी में पैसा लगा सकेंगे. क्या कागजी कार्यवाही अब कम होगी? अक्सर लोग प्रॉपर्टी खरीदने से इसलिए कतराते थे क्योंकि कागजी काम और टैक्स (TCS) के नियम बहुत उलझे हुए थे. नए कानून ने PAN आधारित नियमों को आसान बना दिया है. खास तौर पर NRI (अनिवासी भारतीयों) के लिए अब भारत में घर खरीदना पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुरक्षित हो जाएगा. जब कागजी काम कम होगा, तो सौदे जल्दी पूरे होंगे और मार्केट में पैसा तेजी से घूमेगा. क्या मिडिल क्लास को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? जी हां, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर मिडिल क्लास और किफायती घरों (Mid-income housing) पर दिखेगा. कम टैक्स और ज्यादा बचत के कारण अब लोग किराए के बजाय अपना घर खरीदने की तरफ तेजी से बढ़ेंगे. जानकारों का कहना है कि अब शहरों में लोग अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 10% तक बढ़ा सकते हैं. साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी घरों की मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है. क्या युवाओं के लिए यह सही समय है? आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) ट्रांसपेरेंसी और आसान इनवेस्टमेंट पसंद करती है. नया टैक्स ढांचा ट्रांसपेरेंट है, जिससे युवाओं के लिए रियल एस्टेट को एक लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखना आसान हो गया है. कुल मिलाकर, यह नया कानून रियल एस्टेट को केवल जरूरत नहीं, बल्कि कमाई का एक मजबूत जरिया बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

Oracle के को-फाउंडर की नेटवर्थ में भारी गिरावट, 17,94,485Cr साफ, एलन मस्क से भी थे ज्यादा अमीर

नई दिल्‍ली ओरेकल इन दिनों खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, क्‍योंकि कंपनी ने बड़ी छटनी का फैसला लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओरेकल ने ओरेकल ने 31 मार्च को ग्‍लोबल स्‍तर पर 20 से 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यह एक बड़ी छंटनी है, क्‍योंकि कंपनी ने अपने कुल वर्कफोर्स में से 18 फीसदी कर्मचारियों को निकाला है।  कई कर्मचारियों को बिना फोन और मीटिंग या पहले से जानकारी दिए बगैर ही सिर्फ एक ईमेल के जरिए नौकरी से निकाल दिया. कर्मचारियों को सुबह-सुबह ईमेल के माध्यम से जानकारी दी गई कि ओरेकल की वर्तमान व्यावसायिक आवश्यकताओं पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, हमने एक व्यापक संगठनात्मक परिवर्तन के हिस्से के रूप में आपकी भूमिका को समाप्त करने का फैसला लिया है।  इस बीच, खबर है कि ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन की नेटवर्थ 193 अरब डॉलर (लगभग 17,94,485 करोड़ रुपये) से ज्‍यादा कम हो गए हैं. संपत्ति में इतनी बड़ी गिरावट सिर्फ 6 महीने में ही हुई है. इस गिरावट से पहले ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन कुछ समय के लिए दुनिया के सबसे अमीर व्‍यक्ति थे।  एलन मस्‍क को भी छोड़ा था पीछे  साल 2025 में लैरी एलिसन ने मौजूदा सबसे अमीर व्‍यक्ति एलन मस्‍क को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन फिर नेटवर्थ में गिरावट होते ही लैरी एिलसन ने नंबर वन का ताज खो दिया. अभी एलन मस्‍क की कुल संपत्ति 636 अरब डॉलर है और लैरी एलिसन की नेटवर्थ 195 अरब डॉलर रह गई है।  ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एलिसन की कुल संपत्ति 22 सितंबर, 2025 तक 388 बिलियन डॉलर से घटकर 3 अप्रैल, 2026 तक 195 बिलियन डॉलर हो गई. लगभग 200 बिलियन डॉलर की इस गिरावट ने वैश्विक रैंकिंग में भी फेरबदल किया है, जिससे वह छठे स्थान पर खिसक गए हैं।  लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी गिरावट क्‍यों आई?  अब सबसे बड़ा सवाल है कि लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी बड़ी गिरावट क्‍यों आई है? दरअसल, प‍िछले कुछ समय से ओरेकल की वित्तीय स्थिति में गिरावट आई है, जिसका असर कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया है और कंपनी के शेयर तेजी से नीचे आए हैं. शेयरों के गिरावट के साथ ही लैरी एलिसन की नेटवर्थ भी गिरी है।  इसके शेयर सितंबर 2025 में $345.72 के उच्चतम स्तर से शेयरों में लगभग 58% की गिरावट आई है और 2 अप्रैल, 2026 को यह $146.38 पर बंद हुआ. एलिसन की ओरेकल में करीब 41% हिस्सेदारी है, इसी कारण कंपनी के बाजार प्रदर्शन से काफी हद तक प्रभावित हैं। 

टाटा की Safari EV: 600Km रेंज और ऑल व्हील ड्राइव, कब आएगी?

मुंबई  टाटा मोटर्स देश की एक प्रमुख इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी है. कंपनी की पंच ईवी उन चुनिंदा कार्स में से एक है, जिन पर वेटिंग चल रही है. ऐसे में कंपनी ने एक नई इलेक्ट्रिक कार लाने पर विचार कर रही है, जो साइज में बड़ी और लुक्स में दमदार होगी. हम बात कर रहे हैं टाटा सफारी की, जो ईवी अवतार में आ रही है।  अभी तक ब्रांड की फ्लैगशिप ईवी हैरियर है, लेकिन जल्द ही ये ताज हैरियर की बड़ी बहन सफारी को मिल जाएगा. कंपनी इस साल ही अपनी सफारी ईवी को लॉन्च करने पर विचार कर रही है. ये कार 7-सीटर अवतार में आएगी. इसका सीधा मुकाबला महिंद्रा एक्सईवी 9एस (Mahindra XEV 9S) और विनफास्ट वीएफ एमपीवी 7 (Vinfast VF MPV 7) से होगा।  कब लॉन्च होगी कार? टाटा मोटर्स इस कार को फेस्टिव सीजन में लॉन्च कर सकती है. उम्मीद है कि कंपनी इस कार को दीवाली पर लॉन्च कर सकती है. जहां हैरियर 5-सीटर सेटअप में आती है. वहीं सफारी को कंपनी 7 सीटर सेटअप में लॉन्च कर सकती है. लॉन्च होने के बाद ये कंपनी की पहली थ्री रो इलेक्ट्रिक व्हीकल होगी।  इस कार का प्रोडक्शन अगस्त 2026 में शुरू हो सकता है. इंटरनली इस कार को Tayrona कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि कंपनी इस कार को उसी प्लेटफॉर्म पर तैयार कर सकती है, जिस पर टाटा हैरियर ईवी को डेवलप किया गया है. कार का डिजाइन भी हैरियर ईवी की तरह ही रहेगा.  क्या कुछ मिल सकता है?  टाटा सफारी ईवी में भी हैरियर ईवी वाला ही बैटरी पैक और मोटर सेटअप मिल सकता है. ये कार 65kWh और 75kWh बैटरी पैक के साथ आ सकती है. रियर व्हील ड्राइव कॉन्फिग्रेशन में एक सिंगल मोटर मिलेगी, जो रियर साइड में लगी होगी. वहीं ऑल व्हील ड्राइव में डुअल मोटर सेटअप दिया जा सकता है।  रेंज की बात करें, तो हैरियर ईवी 75kWh बैटरी के साथ रियर व्हील ड्राइव वेरिएंट में 627 किलोमीटर की रेंज क्लेम करती है. वहीं ऑल व्हील ड्राइव वेरिएंट में रेंज घटकर 622 किलोमीटर हो जाती है. बात करें, 65kWh वाले मॉडल की तो इसमें 538 किलोमीटर की रेंज मिलती है. सफारी में कंपनी 100 किलोवॉट का डीसी चार्जिंग सपोर्ट दे सकती है। 

चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोना ₹53,000 घटा, जानें ताजे भाव

मुंबई  सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) बीते सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी बढ़त में रहीं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ, तो वहीं चांदी का भीव 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इन रेट्स की तुलना दोनों कीमती धातुओं के हाई लेवल से करें, तो ये अभी भी क्रैश (Gold-Silver Price Crash From High) नजर आ रही हैं. जी हां, चांदी जहां हाई से 2 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना 53000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है।        हाई छूने के बाद क्रैश होती गई चांदी  चांदी की कीमत एमसीएक्स पर अपने हाई को छूने के बाद से संभली नजर नहीं आई है. इस साल जनवरी महीने में इतिहास में पहली बार 1 Kg Silver Price 4 लाख रुपये के पार पहुंचा था और 4,39,337 रुपये के लेवल छू लिया था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि, बीच-बीच में उछाल भी आया, लेकिन वर्तमान 2,32,600 रुपये प्रति किलो के भाव के आधार पर कैलकुलेशन करें, तो चांदी 2,06,737 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी फिर न छू सका हाई न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी अपने लाइफ टाइम हाई को फिर से नहीं छू सका. चांदी की तरह ही जनवरी महीने में Gold Rate ने एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये का लेवल पार किया था और रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था. वहीं बीते गुरुवार को ये गिरावट के साथ 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ. ऐसे में अपने हाई से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 53,334 रुपये कम हो गया है।          बीते हफ्ते ऐसा था हाल  बात सिर्फ बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए चेंज की करें, तो एमसीएक्स पर 2 अप्रैल को  5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,49,650 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि 27 मार्च को ये 1,47,255 रुपये था. यानी हफ्तेभर में ये कीमती पीली धातु 2395 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगी हुई है. चांदी का भाव देखें, तो ये 2,27,954 रुपये से चढ़कर बीते सप्ताह 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई यानी इसमें 4646 रुपये की तेजी आई।                   घरेलू मार्केट में सोना-चांदी  MCX के बाद घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों को देखें, तो पिछले सप्ताह महज तीन कारोबार दिन में ट्रेड हुआ. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 24 कैरेट सोना 27  मार्च को 24 कैरेट सोना 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 2 अप्रैल को ये 1,46,608 रुपये पर क्लोज हुआ यानी यहां भी Gold Rate में 3666 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया. चांदी को देखें, तो घरेलू मार्केट में ये कीमती धातु 2,21,647 रुपये से बढ़कर 2,27,813 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी 1 किलो चांदी की कीमत 6166 रुपये बढ़ गई।             घरेलू मार्केट में GST+Making Charge गौरतलब है कि आईबीजेए द्वारा अपडेट किए जाने वाले गोल्ड-सिल्वर रेट्स देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब सर्राफा दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर तय 3 फीसदी जीएसटी के साथ मेकिंग चार्ज भी देना होता है. ये मेकिंग चार्ज विभिन्न शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से सोना-चांदी की कीमत बढ़ जाती है।  विदेशों में भी सोना-चांदी सस्ता, ये हैं कारण इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है. COMEX पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4317 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गया, तो चांदी की कीमत गिरकर 66.89 डॉलर प्रति औंस पर नजर आई।   Gold-Silver Rates में जारी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा लोगों को सता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा बीते सप्ताह ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर जारी अनिश्चितता ने भी इस गिरावट को रफ्तार देने का काम किया है. इसके अलावा मंगलवार को भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसका दबाव सोना-चांदी पर पड़ा।