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महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स का धमाल, 1 साल में बेचीं हजारों यूनिट्स, कंपनी ने हासिल किया नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स मार्केट में बेहतरीन परफॉर्म कर रही है. खासकर कंपनी की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स. यहां परफॉर्मेंस की बात सड़कों पर नहीं बल्कि नंबर्स के मामले में हो रही है. कंपनी ने अपने सभी इलेक्ट्रिक मॉडल्स की कुल 50 हजार यूनिट्स को बेच दिया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में मन में जो सवाल रहते हैं उसे देखते हुए ये नंबर बेहतरीन हैं।  सेल्स की ये संख्या महिंद्रा की बीई6, एक्सईवी 9ई और एक्सईवी 9एस की हैं. ये सभी गाड़ियां कंपनी की इलेक्ट्रिक कार्स के प्लेटफॉर्म INGLO पर बेस्ड हैं. इन गाड़ियों की ये संख्या एक अलग कहानी कह रही है. कंपनी को 30 हजार यूनिट्स बेचने में लगभग 7 महीनों का वक्त लगा था।  कैसा रहा इलेक्ट्रिक कार्स का सफर? नवंबर 2025 में महिंद्रा की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स की सेल 30 हजार पार पहुंची थी. वहीं फरवरी 2026 तक कंपनी 41 हजार के सेल्स नंबर तक पहुंच गई थी, जबकि 41 हजार से 50 हजार का सफर तय करने में कंपनी को सिर्फ 6 हफ्तों का वक्त लगा है. साल 2025 में कंपनी औसतन हर महीने 5 हजार इलेक्ट्रिक कार्स बनाई हैं।  मार्च 2026 से उस लिमिट को बढ़ाकर 8000 यूनिट किया गया है. ये एक्सपेंशन बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो दिखाता है कि कंपनी कितनी जल्दी अपनी वेटिंग लिस्ट को क्लियर करेगी. जिन लोगों ने महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स को महीनों पहले ऑर्डर किया था, उन्हें अब इसकी डिलीवरी जल्दी मिलेगी।  कितनी है कीमतें? सिर्फ मार्च 2026 की बात करें, तो कंपनी ने 5,217 बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स को बेचा है, जो पिछले साल की मार्च के मुकाबले 141 परसेंट ज्यादा है. ब्रांड की सबसे सस्ती बॉर्न इलेक्ट्रिक कार बीई6 है, जिसकी कीमत 18.90 लाख रुपये से शुरू होती है. वहीं एक्सईवी 9एस की कीमत 19.95 लाख रुपये से शुरू होती है. जबकि एक्सईवी 9ई की कीमत 21.90 लाख रुपये से शुरू होती है।  ये तीनों ही गाड़ियां INGLO स्टेकबोर्ड आर्किटेक्चर पर बेस्ड हैं. इनमें 59 kWh या 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है. 79 kWh वाले बैटरी पैक की रेंज 650 किलोमीटर से ज्यादा है. कंपनी की मानें, तो इन गाड़ियों में हायर बैटरी पैक की डिमांड ज्यादा है. कुल प्रीऑर्डर में से 73 परसेंट प्रीऑर्डर हायर बैटरी पैक का है।     

Maruti, Tata और Mahindra के बाद इन कंपनियों ने छेड़ी सफलता की धारा, Toyota टॉप-5 से बाहर, मार्च 2026 सेल्स रिपोर्ट देखें

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता है. सितंबर 2025 में हुए बड़े GST Cut के बाद इंडस्ट्री में एकदम से बड़ा बूस्ट आया है. इंडियन कार कंपनियों ने घटे हुए टैक्स का फायदा उठाते हुए पिछले महीने भी दनादन सेल की हैं।  हमेशा की तरह पिछले महीने भी Maruti Suzuki देश की सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी रही. वहीं, Tata और Mahindra ने भी धमाकेदार बढ़ोतरी दर्ज की है. इसके अलावा, Skoda-VW, Mercedes और JLR जैसी कंपनियों ने सेल के मामले में गिरावट देखी है. आइए, कंपनी-वाइज सेल्स रिपोर्ट पर एक नज़र डालते हैं।  सेल के मामले में पहले नंबर पर मारुति है. पिछले महीने इस कार कंपनी को कुल 1,72,919 नए ग्राहक मिले हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 1,34,784 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  बिक्री के मामले में दूसरे नंबर पर टाटा मोटर्स है. पिछले महीने इनकी कुल 67,268 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 51,237 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  लिस्ट में तीसरे नंबर पर महिंद्रा है. मार्च 2026 में इनकी कुल 61,032 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में सेल की गईं महिंद्रा की कुल 49,428 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल के मामले में चौथे नंबर पर हुंडई ने पैर जमा रखे हैं. पिछले महीने इनको कुल 48,623 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी हुंडई की कुल 43,969 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल में बढ़ोतरी के दम पर किआ ने टॉप-5 कंपनियों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है. पिछले महीने इसको कुल 27,987 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 22,820 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 18.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  ऊपर बताई गई मार्च 2025 की टॉप-5 कंपनियों के अलावा पिछले महीने Toyota की 27,479 यूनिट, Skoda VW की 8,676 यूनिट, MG की 6,233 यूनिट, Honda की 5,507 यूनिट, Renault की 3,588 यूनिट, Nissan की 2,538 यूनिट, BMW की 1,559 यूनिट, Mercedes-Benz की 1,320 यूनिट, Citroen की 758 यूनिट, VinFast की 688 यूनिट, JLR की 430 यूनिट, BYD की 413 यूनिट, Jeep की 210 यूनिट, Volvo की 122 यूनिट, Isuzu की 72 यूनिट और Tesla की मात्र 49 यूनिट बिकी हैं। 

Rupee vs Dollar: RBI का बड़ा फैसला, रुपये में आई 12 साल की सबसे बड़ी तेजी

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिस कारण रुपये में गिरावट सिर्फ थमी ही नहीं, बल्कि बड़ी उछाल आई है. RBI द्वारा करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्‍त उपाय पेश करने के लिए एक दिन बाद यह तेजी आई है।  2 अप्रैल को डॉलर की तुलना में रुपये में 12 सालों से ज्‍यादा समय में सबसे अधिक तेजी देखी गई है, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करना जारी रखे हुए थे. करेंसी मार्केट खुलने के बाद करेंसी ट्रेड फिर से शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत तक बढ़कर 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्‍यादा है।  क्‍यों आई इतनी बड़ी तेजी?  1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्‍स मार्केट के नियम को कड़ा किया है. आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंस और नॉन-रेजिडेंस कस्‍टमर्स को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड (एक तरह का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) जारी करने से रोक दिया. नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड एक तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट है, जो  फ्यूचर में रुपया का स्‍तर क्‍या होगा? उस आधार पर खरीदारी करने की अनुमति देता है. एक तरह से आप इसे करेंसी में डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कह सकते हैं. बस इसी कॉन्‍ट्रैक्‍ट को जारी करने से आरबीआई ने रोक लगा दी है. आरबीआई ने यह भी कहा कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट को दोबारा बुक नहीं कर सकतीं।  रुपये में गिरावट के कई कारण  सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है. मार्च महीने में ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग कर डाली थी. इसके साथ ही जंग के शुरू होने से दुन‍िया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. साथ ही होमुर्ज के रास्‍ते के बंद होने की वजह से कच्‍चे तेल के दाम में लगातार तेजी रही है, जिस कारण रुपये में लगातार गिरावट रही है।  वहीं रुपये पर बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के लिए आरबीआई द्वारा कदम उठाए जाने के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी में 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. हालांकि, ट्रंप के ईरान वॉर को लेकर दिए गए संबोधन के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।   कच्‍चे तेल के भाव में उछाल  ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान जंग को लेकर अपने लक्ष्‍यों को लगभग हासिल कर ही लिया है. 2 से 3 हफ्तों के दौरान हम एक बड़ा कदम उठाएंगे. हालांकि उन्‍होंने जंग को समाप्‍त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिस कारण कच्‍चे तेल के भाव में तगड़ी उछाल देखने को मिली और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। 

तेल के दामों में फिर बढ़ोतरी, डीजल ₹25 और पेट्रोल ₹7.4 महंगा, नायरा के बाद इस कंपनी ने भी बढ़ाए रेट

नई दिल्‍ली  नायरा के बाद निजी क्षेत्र की कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के कारण तेल के दाम बढ़ाए गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेल ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर की वृद्धि की है. पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढोतरी की गई है. इस वृद्धि के बाद सामान्य डीजल की कीमत शेल इंडिया के पंपों पर ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।  वहीं, बेंगलुरु में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।  सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप के कारण खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों को ऐसा करने पर सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती. घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।  कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कच्‍चे तेल के बढ़े दाम हैं. फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी आयात करता है। 

Gold-Silver Prices Crash: चांदी 13,000 रुपये सस्ती, सोने में भी भारी गिरावट, जानें 3 मुख्य कारण

इंदौर  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के संबोधन के बाद सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. ट्रंप के बयान से यह क्लियर होता हुआ दिख रहा है कि दो से तीन हफ्तों में कुछ बड़ा एक्‍शन हो सकता है. वहीं ट्रंप ने होर्मुज को लेकर कहा कि हम उस रास्‍ते से तेल लेकर नहीं आते हैं, जो देश उस रास्‍ते से तेल लेकर गुजरते हैं, वे चिंता करें और आगे आएं. अमेरिका मदद कर सकता है।  इस बयान के बाद डॉलर में काफी मजबूती देखने को मिली, जिस कारण ग्‍लोबल से लेकर MCX पर सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट आई. 5 मई वायदा के लिए चांदी का भाव करीब 13,000 रुपये टूटकर 2,29,888 रुपये प्रति किलो पर आ गया।  इसी तरह, सोने के भाव में भी भारी गिरावट रही. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने का भाव 2200 रुपये टूटकर 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।  इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ी गिरावट ग्‍लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने का भाव 2.15 फीसदी टूटकर 4,710.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए. इसकी के साथ चांदी के भाव में भी तेज गिरावट आई और यह 5.20 फीसदी गिरकर 72.108  डॉलर प्रति औंस पर आ गया।  सोने-चांदी के गिरावट के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है. सेंसेक्‍स में 1500 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 420 अंको से ज्‍यादा टूटा है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में इतनी बड़ी गिरावट     ट्रंप के संबोधन से बाजार का मूड बिगड़ा है. ट्रंप ने कहा है कि हम 2 से 3 हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करेंगे. इस बयान के बाद जंग के हालात और बिगड़ते हुए दिख रहे हैं, जिस कारण सोने-चांदी के भाव में भी गिरावट देखी जा रही है।        कच्‍चे तेल के दाम में भी भारी तेजी आई है. कल की तुलना में कच्‍चे तेल का भाव 8 डॉलर प्रति बैरल से ज्‍यादा चढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है।      डॉलर इंडेक्‍स में तेजी देखी जा रही है, जो अब करीब 100 के करीब पहुंच रहा है. वहीं रुपया डॉलर की तुलना में 94 लेवल के करीब है. डॉलर की मजबूती से सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट है।    

ईरान युद्ध का असर: शोरूम में धूल खा रही रोल्स-रॉयस से लेकर फेरारी तक लग्जरी कारें

 नई दिल्ली ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बीच पश्चिमी एशिया इस समय बारूद की गंध के साये में सांस ले रहा है. आसमान तक उठती आग की लपटें और धुएं के गुबार सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं हैं, उनका असर सीधे बाजारों और लोगों के भरोसे पर दिख रहा है. जिन सड़कों पर कभी दौलत का रौब और लग्जरी कारों की चमक नजर आती थी, वहां अब ठहराव और खामोशी है. करोड़ों की गाड़ियां बेचने वाले शोरूमों में आज वीरानी छाई हुई है. कारोबारी हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती चिंता गिन रहे हैं. यह जंग सिर्फ सरहदों की नहीं है, यह उस चमक-दमक पर भी वार है जिसने मिडिल ईस्ट को दुनिया का सबसे मुनाफे वाला बाजार बना दिया था।  दुनिया की सबसे महंगी और शाही कार बनाने वाली कंपनियों के लिए पश्चिमी एशिया हमेशा से सोने की खान रहा है. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. जंग के चलते यहां का लग्जरी कार बाजार हिल गया है और करोड़ों रुपये की कारें भी शोरूम में खड़ी रह जा रही हैं. हाल ही में रोल्स-रॉयस ने दुबई के एक ग्राहक के लिए बेहद शानदार स्पेशल “फैंटम अरबेस्क” मॉडल पेश किया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद हालात ऐसे बदले कि पूरी इंडस्ट्री चिंता में आ गई है।  शाही कारों में खास डिजाइन का जलवा रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोल्स-रॉयस के इस स्पेशल मॉडल में अरब आर्किटेक्चर से इंस्पायर्ड लेजर-एंग्रेव्ड बोनट और ख़ास वुडेन मेड (लकड़ी से बना हुआ) इंटीरियर दिया गया था. यह कार खास तौर पर अमीर ग्राहकों के लिए बनाई गई थी. आम तौर पर रोल्स-रॉयस फैंटम की कीमत करीब 5.7 लाख डॉलर (लगभग 5.36 करोड़ रुपये) से शुरू होती है, लेकिन खास कस्टमाइजेशन के बाद इसकी कीमत दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।  मिडिल ईस्ट का बाजार कुल बिक्री का 10% से भी कम होता है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह मार्केट बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है. ऐसे में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बाद बाजार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. जंग शुरू होने के बाद कई लग्जरी कार शोरूम अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. फेरारी और मासेराती जैसी कंपनियों ने कुछ समय के लिए डिलीवरी भी रोक दी है।  30% तक गिरा कारोबार रिपोर्ट के अनुसार, दुबई की मशहूर लग्जरी कार डीलरशिप फर्स्ट मोटर्स का कहना है कि, जंग के बाद कारोबार में करीब 30% की गिरावट आई है. ये डीलरशिप दुबई में फेरारी और बुगाटी की लग्ज़री स्पोर्ट कारें बेचता है. जब युद्ध शुरू हुआ तो शोरूम को बंद करना पड़ा था. हालांकि कुछ दिनों के बाद शोरूम को फिर से खोला गया लेकिन लोगों की आवाजाही बेहद कम है और बमुश्किल कारोबार करने की कोशिश की जा रही है. डीलरशिप के डायरेक्टर क्रीस बुल ने मीडिया को बताया कि, कुछ ग्राहक तो 70 लाख डॉलर की कार को दूसरे देश भेजने के लिए 30 हजार यूरो तक खर्च करने को तैयार हैं।  लैंबॉर्गिनी, बेंटले, फेरारी, जगुआर लैंड रोवर और पोर्श जैसी कंपनियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट में स्पेशल एडिशन और कस्टम कारों पर कंपनियां काफी ज्यादा कमाई करती हैं, जो अब लगभग रुक गई है।  कंपनियों के लिए क्यों जरूरी ये बाजार पश्चिमी एशिया की खास बात यह रही है कि यहां ग्राहक लिमिटेड एडिशन और खास डिजाइन वाली कारों पर भारी रकम खर्च करते हैं. इसके अलावा ग्राहक गाड़ियों में स्पेसिफिक कस्टमाइजेशन भी कराते हैं, जिनके बाद कारों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि, 2024 में रेंज रोवर स्पोर्ट के “Sadaf” एडिशन की सिर्फ एक एसयूवी 3.3 लाख पाउंड (लगभग 4.09 करोड़ रुपये) में बेची गई थी. इस दौरान कंपनी ने इसके कुल 20 यूनिट बेचे थे. जो इसकी रेगुलर प्राइसिंग से तकरीबन 3 गुना ज्यादा थी. लेकिन अब ऐसे ऑर्डर लगभग बंद हो चुके हैं।  पहले ही अमेरिका में टैरिफ और चीन-यूरोप में गिरती मांग से जूझ रही लग्जरी कार कंपनियों के लिए मिडिल ईस्ट आखिरी बाजार था. अब वहां भी हालात खराब हो रहे हैं. कुछ कंपनियां तो प्रोडक्शन घटाने तक पर विचार कर रही हैं. ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक, खासकर प्रीमियम और लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है. अगर जल्द शांति नहीं बनी, तो आने वाले समय में इसका असर और गहरा हो सकता है। 

MG की नई पावरफुल SUV, Tata और Mahindra को देगी कड़ी टक्कर

 नई दिल्ली जेएसडब्लू-एमजी मोटर साल 2026 में कई लॉन्चिंग करने वाले हैं. कंपनी भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंटरनल कंबस्चन इंजन और प्लग-इन हाइब्रिड कार्स को लॉन्च कर सकती है. इसमें से एक वूलिंग स्टारलाइट 560 (Wuling Starlight 560) हो सकती है. इस कार का भारत में पेटेंट फाइल हुआ है।  हाल के दिनों में इसे भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है. ये कार एमजी की ब्रांडिंग के साथ आएगी. पेटेंट फाइल होने से पहले ही इसे कई बार टेस्ट करते हुए पाया गया है. ये दोनों ही पॉइंट्स इसकी भारत में एंट्री का साफ संकेत दे रहे हैं. ध्यान रखें कि एमजी और वूलिंग दोनों की ब्रांड का मालिकाना अधिकार चीन की SAIC मोटर के पास है।  एक्सटीरियर और इंटीरियर  Starlight 560 चार मीटर से लंबी कार है. इसकी लंबाई 4745 एमएम, चौड़ाई 1850 एमएम और हाइट 1750 एमएम है. कार का व्हीलबेस 2810 एमएम का है. एक्सटीरियर की बात करें, तो इसमें फुल एलईडी लाइटिंग का सेटअप मिलता है. स्टारलाइट 560 में रूफ रेल, स्किड प्लेट्स, 18-इंच के डुअल टोन एलॉय और स्प्लिट टेल लैम्प मिलता है।  वहीं इंटीरियर की बात करें, तो इसमें टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, 3.5 इंच का इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले और 12.8 इंच का टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ आता है. कैबिन में लेदर अपहोल्स्ट्री मिलेगी. भारतीय बाजार में कंपनी इसे कुछ बदलाव के साथ लॉन्च कर सकती है।  इंजन और पावर  इस SUV में मल्टीपल पावरट्रेन का विकल्प मिलता है. इसमें 1.5 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन आता है, जो 174 बीएचपी की पावर ऑफर करता है, जो मैन्युअल या सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आएगा. मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ ये इंजन 260 एनएम का और ऑटोमेटिक के साथ 290 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  इसके अलावा ये एसयूवी 1.5 लीटर के इंजन के साथ हाइब्रिड में भी आती है. कार में प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम मिलता है, जो 194 बीएचपी की पावर और 230 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसका ऑल इलेक्ट्रिक वर्जन भी आता है, जो 134 बीएचपी की पावर और 200 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है।  भारत में इस कार का सीधा मुकाबला टाटा हैरियर और महिंद्रा एक्सयूवी 7एक्स0 से होगा. हालांकि, इसका कंपटीशन पूरी तरह से निर्भर करता है कि ये कार किस पावरट्रेन के साथ आती है. ज्यादा संभावना है कि कंपनी इसे प्लगइन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वर्जन में लॉन्च कर सकती है। 

तेल-गैस की तलाश में मेगा गेम शुरू, कीमतों में गिरावट और निवेश का मौका

नई दिल्ली  भारत सरकार ने तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए देश के 2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. सरकार का मकसद साफ है कि आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाए।  क्या है पूरा फैसला और कितना बड़ा है इसका दायरा: सरकार ने कुल 2,62,817 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोला है, जिसमें जमीन के साथ साथ समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं. यह कोई छोटा कदम नहीं है, बल्कि भारत के कुल सेडिमेंटरी बेसिन का बड़ा हिस्सा अब कंपनियों के लिए उपलब्ध हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा इलाकों में तेल और गैस की तलाश की जा सकेगी।  OALP मॉडल क्या है और कंपनियों को कैसे फायदा मिलेगा: यह पूरा प्रोसेस ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम यानी OALP के तहत किया जा रहा है. इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें सरकार खुद ब्लॉक ऑफर करने के बजाय कंपनियों को यह आजादी देती है कि वे अपनी पसंद के इलाकों को पहचान कर वहां के लिए बोली लगा सकें. इससे कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ती है और एक्सप्लोरेशन ज्यादा टारगेटेड तरीके से हो पाता है।  किन इलाकों में होगा एक्सप्लोरेशन और क्या है संभावना: इस फैसले के तहत 26 सेडिमेंटरी बेसिन के ब्लॉक्स को शामिल किया गया है. ये वही इलाके होते हैं जहां भूगर्भीय संरचना ऐसी होती है कि तेल और गैस मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि संभावना होना और असल में रिजर्व मिलना दो अलग बातें हैं, इसलिए हर ब्लॉक में सफलता की गारंटी नहीं होती। समुद्र पर बढ़ता फोकस और समुद्र मंथन पहल: सरकार इस बार खासतौर पर डीप सी एक्सप्लोरेशन पर जोर दे रही है, जो प्रधानमंत्री के समुद्र मंथन इनिशिएटिव का हिस्सा है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर जैसे इलाकों में बड़ी संभावनाएं मानी जाती हैं, लेकिन यहां काम करना तकनीकी रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और महंगा होता है।  विदेशी और निजी कंपनियों के लिए बड़ा मौका: इस कदम के जरिए सरकार ने साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल और गैस कंपनियों को भारत में निवेश के लिए न्योता दिया है. रिलायंस, ओएनजीसी के अलावा बीपी, शेल, टोटल और एक्सॉन जैसी विदेशी कंपनियां भी इसमें दिलचस्पी दिखा सकती हैं. इससे न सिर्फ निवेश आएगा बल्कि नई तकनीक और विशेषज्ञता भी देश में आएगी।  भारत की आयात निर्भरता कम करने की कोशिश: भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालता है. अगर घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ता है, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी कम होगा. यही इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी रणनीतिक सोच है।  चुनौतियां भी कम नहीं हैं, समय और लागत दोनों भारी: तेल और गैस की खोज कोई आसान या जल्दी होने वाली प्रक्रिया नहीं है. इसमें कई साल लग जाते हैं और भारी निवेश करना पड़ता है. कई बार कंपनियों को सालों की मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता, इसलिए जोखिम भी काफी ज्यादा होता है।  कब दिखेगा असर और क्या है आगे की तस्वीर: इस फैसले का असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोडक्शन तक पहुंचने में 5 से 10 साल तक का समय लग सकता है. लेकिन अगर कुछ बड़े रिजर्व मिलते हैं, तो आने वाले समय में भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत हो सकती है और देश को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।   

सोने की कीमत फिर पहुंची 1 लाख 50 हजार के पास, चांदी भी हुई 9 हजार रुपये महंगी, देखें आज का रेट

इंदौर  भारतीय सर्राफा बाजार में महीने के पहले दिन आज, 01 अप्रैल 2026 को सोना-चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. 24 कैरेट सोना एक झटके में ही 2836 रुपये महंगा हुआ है तो वहीं, चांदी के भाव में 9348 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है।  इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर 01 अप्रैल 2026 की सुबह जारी रेट्स के मुताबिक, 22 कैरेट सोने का रेट 137005 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो बीते कारोबारी दिन यानी 30 मार्च की शाम को 134407 रुपये था।  चांदी का रेट क्या है? चांदी की कीमत में भी भारी उछाल देखने को मिला है.  चांदी का रेट बढ़ोतरी के साथ आज 239483 रुपये किलो पहुंच गया है।  बता दें कि ibja की ओर से केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के अलावा शनिवार और रविवार को रेट जारी नहीं किए जाते हैं. बीते दिन यानी 31 मार्च को महावीर जयंती के अवकाश के कारण सर्राफा बाजार के रेट्स जारी नहीं किए गए थे. आइए जानते हैं बीते कारोबारी दिन की तुलना में आज सोना-चांदी कितने रुपये हुआ महंगा?   शुद्धता सोमवार, 30 मार्च शाम के रेट बुधवार, 1 अप्रैल सुबह की कीमतें कितने बदले रेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 999     146733 149569 2836 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995      146145 148970 2825 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916      134407 137005  2598 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750      110050 112177 2127 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585      85839 87498 1659 रुपये महंगा चांदी (प्रति 10 ग्राम) 999      230135 239483 9348 रुपये महंगी बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (Indian Bullion Jewelers Association) की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. इसमें टैक्स, मेकिंग चार्ज एवं जीएसटी शामिल नहीं होता है.

प्रीमियम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई का असर, घर से निकलने से पहले चेक करें

नई दिल्ली प्रीमियम पेट्रोल के दाम में आज बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर XP100 पेट्रोल 149 से 160 रुपये प्रति लीटर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल 91.49 से 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया है। दूसरी ओर कच्चे तेल में उछाल के बावजूद आज भी IOCL, HPCL, भारत पेट्रोलियम समेत ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सामान्य पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ाए हैं। जबकि, कमर्शियल सिलेंडर के दाम में आज भारी बढ़ोतरी की गई है। 1 अप्रैल की सुबह छह बजे जारी रेट के मुताबिक दिल्ली के इंडियन ऑयल के पंपों पर साधारण पेट्रोल की रिटेल कीमत ₹94.77 और डीजल 87.67 रुपये लीटर है। भारत में सबसे सस्ता तेल पोर्ट ब्लेयर में है। यहां पेट्रोल ₹82.46 प्रति लीटर है तो डीजल ₹78.05 प्रति लीटर। पेट्रोल पर कितना टैक्स दिल्ली में 1 अप्रैल 2026 से सामान्य पेट्रोल की कीमत तय करने में कई हिस्से शामिल हैं। सबसे पहले डीलर्स को बिना वैट के जो बेस प्राइस दिया जाता है। आज 1 अप्रैल को इंडियन ऑयल द्वारा जारी डेटा के मुताबिक यह ₹74.97 प्रति लीटर है। इसके ऊपर औसतन ₹4.40 प्रति लीटर डीलर कमीशन जोड़ा गया है। इसके बाद वैट (जिसमें डीलर कमीशन पर लगने वाला टैक्स भी शामिल है) ₹15.40 प्रति लीटर लगाया गया है। इन सभी को मिलाकर दिल्ली में आज 1 अप्रैल को पेट्रोल की खुदरा कीमत करीब ₹94.77 प्रति लीटर बैठती है। डीजल की कीमत का पूरा हिसाब सामान्य डीजल की कीमत भी इसी तरह तय होती है, जिसमें सबसे पहले डीलर्स का कमीशन, वैट आदि जुड़े होते हैं। आज जारी प्राइस बिल्डअप के मुताबिक दिल्ली में एक लीटर डीजल की कीमत ₹87.67 है। इसका बेस प्राइस बिना वैट के ₹71.81 प्रति लीटर है। इसके बाद औसतन ₹3.03 प्रति लीटर डीलर कमीशन और फिर वैट (जिसमें कमीशन पर टैक्स भी शामिल है) ₹12.83 प्रति लीटर शामिल है। आज पश्चिम बंगाल के शहरों में पेट्रोल के दाम कोलकाता में ₹ 104.99, अलीपुर में पेट्रोल ₹ 104.99 प्रति लीटर, बहरामपुर में ₹ 106.12, बांकुड़ा में ₹ 105.19, बारासात में ₹ 105.24, वर्धमान में ₹ 105.33, कूचबिहार में ₹ 106.14, हुगली में ₹ 105.52, हावड़ा में ₹ 104.99, कृष्णानगर में ₹ 106.07, मेदिनीपुर में ₹ 105.37, पुरुलिया में ₹ 106.05, रायगंज में ₹ 105.36, सूरी में ₹ 105.43 और तामलुक में ₹ 104.61 प्रति लीटर है। कच्चे तेल का क्या है हाल अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कच्चे तेल के रेट में उछाल है। ब्रेंट क्रूड 1.71 डॉलर उछलकर 105.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। जबकि, WTI क्रूड 1.44 डॉलर उछलकर 102.82 डॉलर प्रति बैरल पर है। एक अन्य खबर की बात करें तो होर्मूज स्ट्रेट के बंद होने से अमेरिका में औसत गैस की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन के पार चली गईं।