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बजट 2026 में हेल्थ-टेक बूस्ट: बायोफार्मा हब बनाने की तैयारी, 10 हजार करोड़ की मेगा योजना

नई दिल्ली Union Budget 2026 बजट 2026-27 में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने बायोफार्मा सेक्टर के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि बायोफार्मा शक्ति प्रोग्राम के तहत अगले पांच साल में इस क्षेत्र में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बायोफार्मा शक्ति योजना का लक्ष्य बायोफार्मा इकोसिस्टम को विकिसित करना है। बायोफार्मा के तहत सूक्ष्मजीवों, प्रोटीनों के जरिए दवाओं का निर्माण किया जाता है जिसके साइड इफेक्ट्स कम होते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि इस सेक्टर में बड़ा निवेश करने से देश में फार्मा सेक्टर को बड़ी मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य ज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य योजना को उन्नत करना है। यह निवेश भारत को वैश्विक बायो फार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने और गैर संक्रामक बीमारियों से निपटने में मदद करेगा। युवाओं पर केंद्रित बजट सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण में बताया कि कर्तव्य भवन में तैयार पहला बजट तीन कर्तव्यों से प्रेरित है। पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज और अनवरत बनाए रखना होगा ताकि वैश्विक उथल-पुथल का मजबूती से समाना किया जा सके। दूसरा कर्तव्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनके क्षमता निर्माण की है ताकि देश को समृद्धि के मार्ग पर ले जाया जा सके। सबका साथ सबका विकास के अनुरूप तीसरा कर्तव्य संसाधन, सुविधा और अवसर तक हर परिवार, समाज, इलाके और सेक्टर की पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार इन कर्तव्यों को पूरा करने के लिए समर्थन का वातावरण तैयार करेगी। उन्होंने सात रणनीतिक सेक्टरों में विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया। देश के बायो फार्मा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अगले पांच साल 10 हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायो फार्मा शक्ति का प्रस्ताव किया। इसके तहत देश में बायोलॉजिक्स और बायो सिमिलर बनाने के लिए पारितंत्र तैयार किये जायेंगे। फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए तीन राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और मौजूदा सात संस्थानों को अपग्रेड किया जायेगा। केंद्रीय औषधि नियंत्रण संस्थान को मजबूत कर वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जायेगा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गयी है जिसके तहत उपकरण आदि तैयार किये जायेंगे, फुल स्टैक स्वदेशी आईपी तैयार किया जायेगा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जायेगा। उद्योग के नतृत्व में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जायेगा और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अप्रैल 2025 में शुरू की गयी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण योजना के लिए आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।  

बजट 2026 का बड़ा अपडेट: बायबैक टैक्स बढ़ा, STT में संशोधन और अन्य घोषणाएँ

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sithraman) ने अपना 9वां लगातार बजट भाषण (Budget Speech) पूरा किया। इनकम टैक्स स्लैब में वित्त मंत्री ने कोई भी बदलाव नहीं किया है। इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट (IT Act 2025) एक अप्रैल 2025 से लागू होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका ऐलान बजट स्पीच में किया है। बजट 2026 में टैक्स को लेकर क्या-क्या हुआ ऐलान? 1- आईटीआर टाइमलाइन – TR-1 और ITR-2 को फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई तक रहेगी। 2- रिवाइज्ड रिटर्न – अब 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकेगा। इसके लिए थोड़ा सा शुल्क देना होगा। 3- गलत जानकारी देने पर पेनाल्टी इनकम की गलत जानकारी देने पर पेनाल्टी को बढ़ाकर टैक्स की रकम का 100 प्रतिशत कर दिया गया है। 4- विदेशी संपत्तियों खुलासा योजना – छोटे टैक्स पेयर्स 6 महीने तक विदेशी संपत्तियों का खुलासा कर सकते हैं। 5- अचल संपत्तियों का भी खुलाजा जरूरी – अब अचल संपत्तियों का खुलासा ना करने पर जुर्माना लगेगा। 6- ओवरसीज टूर टीसीएस में कटौती – ओवरसीज टूर पैकेज पर लगने वाले टीसीएस को घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यह 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत था। 7- NRI के द्वारा प्रॉपर्टी बेचने पर – अब एनआरआई को अचल संपत्तियों की बिक्री पर टीडीएस लागू होगा। 8- शेयर बायबैक पर देना होगा टैक्स – अब शेयरों के बायबैक पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स देना होगा। यह नियम सभी शेयरहोल्डर्स पर लागू होगा। 9- फ्यूचर एंड ऑप्शंस पर STT में इजाफा – केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर एंड ऑप्शंस पर STT पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। फ्यूचर्स पर STT 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, ऑप्शंस पर STT को बढ़ाकर 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया है। बजट 2025 में हुए थे बड़े ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025 में 12.75 लाख रुपये की आय वाले लोगों को टैक्स फ्री कर दिया था। वित्त मंत्री ने तब ऐलान किया था जिनकी आय 12 लाख रुपये तक है उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। 75000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ लें तो यह छूट 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। बायबैक पर लगेगा कैपिटल गेन्स टैक्स केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि बायबैक अब कैपिटल गेन्स के दायरे में आएगा। यह सभी कैटगरी के शेयरहोल्डर्स पर लागू होगा। 31 मार्च तक फाइल किया जा सकेगा रिवाइज्ड आईटीआर कोई भी कर दाता अब 31 मार्च तक थोड़े से शुल्क के साथ रिवाइज्ड आईटीआर फाइल किया जा सकेगा – वित्त मंत्री इन विदेशी कंपनियों को बड़ा तोहफा  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडियन कंपनियों को क्लाउड सर्विसेज प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलीडे का ऐलान किया गया है। आ गया है नया आयकर कानून केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट स्पीच में कहा कि नया आयकर कानून इस वर्ष एक अप्रैल से लागू होगा। क्या होम लोन की छूट होगी न्यू टैक्स रिजीम में शामिल?  मौजूदा समय में न्यू टैक्स रिजीम में किसी भी निवेश से पर कोई छूट नहीं मिलती है। मिडिल क्लास ओल्ड टैक्स रिजीम की तरह न्यू टैक्स रिजीम में भी होम लोन के ब्याज दरों पर टैक्स में छूट की डिमांड कर रहा है। ओल्ड टैक्स रिजीम या न्यू टैक्स रिजीम  पुरानी कर व्यवस्था में जहां कुछ ही टैक्स स्लैब हैं। तो वहीं नई कर व्यवस्था में अधिक स्लैब बनाए गए हैं। न्यू टैक्स रिजीम के जरिए कोई भी टैक्सपेयर्स 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई भी टैक्स नहीं देगा। इस कर प्रणाली में डायरेक्ट छूट मिलती है। वहीं, ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्सपेयर्स को अलग-अलग इंवेस्टमेंट के जरिए छूट प्राप्त कर सकते हैं। कम होगा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स? मौजूदा समय में जब अब इक्विटी शेयर्स या म्यूचुल फंड्स को 12 महीने से पहले बेचते हैं तो 20 प्रतिशत का टैक्स देना पड़ता है। इसे ही शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है। देखना है कि क्या बजट 2026 में इसको लेकर कोई बदलाव देखने को मिलता है या नहीं? क्या है इनकम टैक्स एक्स का सेक्शन 54 अगर कोई टैक्सपेयर्स पुराना घर बेचकर नया घर अगले दो साल में बनाता है या फिर खरीदता है तो उसे इनकम टैक्स एक्ट 54 के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में छूट मिलती है। मौजूदा समय में यह छूट 10 करोड़ रुपये के रिइंवेस्टमेंट तक मिलता है।  

किस सेक्टर पर बरसेगा बजट का पैसा? स्वास्थ्य-शिक्षा के खर्च को लेकर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का बजट पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाएं की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में देश के परिवहन और रक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक पैसा लगाया है। दोनों ही क्षेत्रों पर करीब 6-6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी राशि रखी गई है।   वित्त मंत्री ने ट्रांसपोर्ट पर सबसे अधिक 5,98,520 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है। वहीं, रक्षा क्षेत्र पर 5,94,585 रुपये खर्च किए जाएंगे। होम अफेयर्स पर 2,55,234 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव है। कृषि कार्यों और इससे जुड़ी गतिविधियों पर 1,62,671 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। शिक्षा पर 1,39,289 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं ऊर्जा पर 1,09,029 करोड़ रुपये और हेल्थ पर 1,04,599 करोड़ रुपये का निवेश होगा। बजट 2026 में किस सेक्टर को कितना पैसा शहरी विकास पर 85,522 करोड़, आईटी और टेलिकॉम सेक्टर पर 74560 करोड़, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री पर 70296 करोड़, सोशल वेलफेयर पर 62362 करोड़, साइंटिफिक डिपार्टमेंट्स पर 55,756 करोड़, टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन पर 45500 करोड़, एक्सटर्नल अफेयर्स पर 22,119 करोड़, फाइनेंस पर 20,649 करोड़ और नॉर्थ ईस्ट डिवलेपमेंट के लिए 6812 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। रुपया कहां से आएगा और कहां जाएगा बजट डॉक्युमेंट्स में सरकार ने यह बताया है कि पैसा कहां से कितना आएगा और कहां कितना खर्च होगा। इसके मुताबिक बजट का 24 पर्संट हिस्सा सरकार उधार लेगी। 21 फीसदी हिस्सा इनकम टैक्स से और 18 पर्सेंट कॉर्पोरेशन टैक्स से आता दिख रहा है। 4 पर्सेंट कस्टम से और 6 फीसदी यूनियन एक्साइज ड्यूटीज से आएगा। नॉन-डेब्ट कैपिटल से 2 फीसदी की प्राप्ति होगी। नॉन टैक्स रेवेन्यू से 10 फीसदी और जीएसटी और अन्य टैक्सों से 15 फीसदी हिस्सा मिलने की उम्मीद है। रुपया कहां कितना जाएगा, इसके ब्योरे में बताया गया है कि सर्वाधिक 22 फीसदी हिस्सा राज्यों को टैक्स का हिस्सा देने में जाएगा। ब्याज देनदारी पर 20 फीसदी खर्च होगा। केंद्रीय योजनाओं पर 17 फीसदी हिस्सा खर्च होगा। बड़ी सब्सिडी पर 6 फीसदी, डिफेंस पर 11 फीसदी, केंद्र प्रयोजित योजनाओं पर 8 फीसदी पैसा खर्च होगा। सिविल पेंशन पर 2 फीसदी और अन्य मदों में 7 फीसदी पैसा लगेगा।  

महंगाई पर वार! इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों में भारी कटौती की राह साफ, घर-घर पहुंचेगा फायदा

नई दिल्ली बजट 2026 में अनाउंट किए गए Semiconductor Mission 2.0 का असली फायदा यही है कि भारत की टेक्नोलॉजी विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम होगी। इसका सीधा मतलब है कि देश में गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से ये सब होगा सस्ता वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया और इसमें स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए India Semiconductor Mission 2.0 को 40,000 करोड़ रुपये का समर्थन मिला है। इसका सीधा मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले सेमीकंडक्टर चिप अब भारत में बनाए जाएंगे। सीधा मतलब है कि फोन से लेकर होम अप्लायंसेज तक अगले कुछ साल में सस्ते होने वाले हैं और इनकी कीमतें गिरेंगी। आप नीचे देख सकते हैं कि किन चीजों की कीमत में गिरावट देखने को मिल सकती है।   इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और कारें आज की कारों और खासकर EV में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों चिप्स इस्तेमाल होती हैं। पिछले कुछ सालों में चिप की कमी के कारण गाड़ियां महंगी हुईं और वेटिंग बढ़ी है। देश में ऑटोमोटिव-ग्रेड चिप्स बनने से सप्लाई स्टेबल होगी और लागत घटेगी। लंबे समय में इससे EV की कीमत और मेंटिनेंस कॉस्ट कम हो सकती है।   इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज टीवी, फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, आज हर अप्लायंस 'स्मार्ट' हो चुका है और इन स्मार्ट फीचर्स के लिए माइक्रोचिप्स जरूरी हैं। लोकल सेमीकंडक्टर सप्लाई मिलने पर कंपनियों का खर्च घटेगा, जिसका असर स्मार्ट टीवी, इन्वर्टर AC और एनर्जी-एफिशिएंट अप्लायंसेज की कीमतों पर दिख सकता है।   स्मार्टफोन और टैबलेट स्मार्टफोन में प्रोसेसर, कैमरा, नेटवर्क और बैटरी मैनेजमेंट, सब कुछ चिप्स पर निर्भर करता है। अभी ये चिप्स ज्यादातर बाहर से मंगाई जाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है। ये चिप्स भारत में बनने लगती हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी। इसका फायदा सबसे पहले बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन में दिख सकता है। लैपटॉप, राउटर और स्मार्ट गैजेट्स लैपटॉप, Wi-Fi राउटर, स्मार्टवॉच और IoT डिवाइस कई तरह की चिप्स के साथ काम करते हैं। अभी इन्हें इंपोर्ट करना पड़ता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। Semiconductor Mission 2.0 में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग पर भी जोर है, जिससे इन गैजेट्स की लागत कम हो सकती है। ऐसे में पहले एंट्री-लेवल लैपटॉप और नेटवर्किंग डिवाइसेज को फायदा मिलेगा। मेडिकल और हेल्थकेयर डिवाइसेज BP मशीन, ECG, ऑक्सीमीटर और कई डायग्नोस्टिक टूल्स भी चिप्स पर चलते हैं। देश में चिप्स बनने से मेडिकल डिवाइस का प्रोडक्शन सस्ता होगा और इलाज से जुड़े टूल्स अफऑर्डेबल बन सकते हैं। पावर, सोलर और चार्जिंग सिस्टम स्मार्ट मीटर, सोलर इन्वर्टर, EV चार्जर और पावर कंट्रोल सिस्टम में सेमीकंडक्टर बड़ी भूमिका निभाते हैं। Mission 2.0 के साथ पावर-चिप्स को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम हो सकती है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

नई रणनीति के साथ Jeep India का बड़ा कदम, 2027 से भारत में लॉन्च होंगे नए मॉडल

मुंबई   लग्जरी एसयूवी निर्माता कंपनी Jeep ने भारतीय बाजार के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है, जिसे कंपनी ने Strategic Plan Jeep 2.0 नाम दिया है. कंपनी ने इस प्लान को ऐसे समय में तैयार किया है, जब बाज़ार के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता की जरूरत है और यह इसे पक्का करता है, जब उसका लोकल पोर्टफोलियो अभी भी सीमित है. यह प्लान भारत को Jeep के एशिया पैसिफिक ऑपरेशंस के केंद्र में रखता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत इस ब्रांड के लिए दोहरी भूमिका निभाता रहेगा, एक घरेलू बाज़ार के तौर पर और एक रीजनल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बेस के तौर पर. कंपनी का कहना है कि भारत में डेवलप और बनाई गई गाड़ियां न सिर्फ लोकल खरीदारों बल्कि एशिया पैसिफिक और उससे बाहर के बाजारों को भी सर्विस देंगी. क्षेत्रीय मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में भारत की भूमिका इस योजना के बारे में बताते हुए, Stellantis India के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश हज़ेला ने कहा कि, "Jeep की 85 साल की विरासत असलियत और एडवेंचर पर बनी है. Strategic Plan Jeep 2.0 बताता है कि हम अपनी प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी को कैसे बेहतर बनाएंगे और हर साल कस्टमर एक्सपीरियंस को कैसे मज़बूत करेंगे, जो ज़्यादा लोकलाइज़ेशन, ग्लोबल प्रोडक्ट अलाइनमेंट, अपनी गाड़ियों की रेंज बढ़ाने और ऐसे प्रोग्राम्स पर आधारित होगा जो असली वैल्यू देते हैं." उन्होंने आगे कहा कि, "हम अपने मौजूदा कस्टमर्स का ख्याल रखने पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, यह पक्का करते हुए कि उन्हें वह सपोर्ट, सर्विस और भरोसा मिले जिसकी वे Jeep से उम्मीद करते हैं. भारत में सफलता के लिए मज़बूती और लंबे समय की कमिटमेंट की ज़रूरत है, और हम उसी सोच के साथ निवेश कर रहे हैं, ताकि यह पक्का हो सके कि Jeep गर्व और पसंद का ब्रांड बना रहे." 2027 से नए मॉडल लाने की योजना कारों की बात करें तो Jeep ने जानकारी दी है कि भारत के लिए नए मॉडल लाने की तैयारी चल रही है, और इसकी फ्यूचर लाइनअप की पहली गाड़ी साल 2027 में आने की उम्मीद है. तब तक, कंपनी शोरूम में कस्टमर्स की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए अपनी मौजूदा रेंज के पीरियोडिक अपडेट और स्पेशल एडिशन बाजार में उतारती रहेगी. इसके साथ ही Jeep की इंडिया स्ट्रेटेजी के लिए एक्सपोर्ट भी ज़रूरी हैं. कंपनीन ने पुणे के पास रंजनगांव फैसिलिटी से साल 2017 में अपना प्रोडक्शन शुरू किया था और Jeep Compass के साथ ग्लोबल मार्केट में सप्लाई शुरू की थी. उसके बाद से कंपनी ने Jeep Meridian और Commander जैसे मॉडल जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे इलाकों में एक्सपोर्ट किए गए हैं. कंपनी ने कहा कि वह अब अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में और एक्सपोर्ट के मौकों का मूल्यांकन कर रही है. स्थानीयकरण में होगी बढ़ोतरी जानकारी के अनुसार, कंपनी का प्लान रंजंगांव प्लांट में लोकलाइज़ेशन को और बढ़ाने का भी है, जिसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 1,60,000 यूनिट्स होने वाली है. लोकल कंटेंट मौजूदा 65-70 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत होने की उम्मीद है. बता दें कि Jeep भारत में Jeep Club, Jeep Trails और Camp Jeep इवेंट्स के ज़रिए अपनी ओनर कम्युनिटी को बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है, साथ ही अपने कॉन्फिडेंस 7 प्रोग्राम के तहत कस्टमर एश्योरेंस पहल को भी बढ़ा रही है, जिसमें एक्सटेंडेड वारंटी, बायबैक ऑप्शन और सर्विस प्लान शामिल हैं.

सोने के दाम में उतार-चढ़ाव: बजट 2026 से हो सकती है कीमतों में कमी, जानें एक्सपर्ट्स की राय

नई दिल्ली 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में यूनियन बजट पेश करेंगी. इस दिन पर सोने की कीमतों पर सबसे ज्यादा नजर रहने वाली है, क्योंकि लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बजट में सोने से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. अभी सोने की कीमत एमसीएक्स पर 10 ग्राम 24 कैरेट के लिए करीब 1.49 लाख रुपये के आसपास है. चांदी 2.91 लाख रुपये प्रति किलो है. पिछले बजट से सोना 100 फीसदी और चांदी 250 फीसदी तक महंगा हो चुका है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में सोने पर कस्टम ड्यूटी या इंपोर्ट ड्यूटी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की उम्मीद है. पिछले साल बजट में सोने पर कुल कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी गई थी. अब एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सरकार इसे और कम नहीं करेगी क्योंकि आयात बहुत ज्यादा हो रहा है. सोना और चांदी के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. अगर ड्यूटी बढ़ाई गई तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं लेकिन ऐसा होने की कम संभावना है. बजट में क्या गोल्ड पर आ सकता है बड़ा फैसला? एक्सपर्ट्स की राय है कि इनकम टैक्स रिटर्न में सोने के गहनों या ज्वेलरी की ज्यादा जानकारी देने के नए नियम आ सकते हैं. शेड्यूल एएल में ज्यादा डिटेल मांगी जा सकती है. सेल्फ रिपोर्टिंग का तरीका शुरू हो सकता है, ताकि सोने की होल्डिंग ट्रैक की जा सके. सोने की बिक्री पर टैक्स नियमों में कुछ राहत मिल सकती है. जीएसटी में भी छोटे बदलाव जैसे मेकिंग चार्जेस पर 5 फीसदी जीएसटी या 3 फीसदी जीएसटी में एडजस्टमेंट की बात हो सकती है. लेकिन घर में रखे सोने पर कोई हार्ड लिमिट नहीं लगेगी. पुराना गोल्ड कंट्रोल एक्ट 1990 में खत्म हो चुका है और अब वैध सोर्स से सोना रखने पर कोई सीमा नहीं है. शादीशुदा महिलाओं के लिए 500 ग्राम, अविवाहित के लिए 250 ग्राम और पुरुषों के लिए 100 ग्राम तक डिस्क्रेशनरी तरीके से कोई जब्ती नहीं होती. एक्सपर्ट्स जैसे दीपाश्री शेट्टी और सोनम चंदवानी कहते हैं कि रिपोर्टिंग और डिस्क्लोजर पर फोकस रहेगा न कि घरेलू होल्डिंग पर सख्त नियम. अगर हार्ड लिमिट लगाई गई तो लोगों में डर फैलेगा और ब्लैक मार्केट बढ़ सकता है. इसलिए सरकार सावधानी बरतेगी. क्या बजट पर गिरेगा सोने का भाव? बजट 2026 के दिन पर सोने की कीमत क्या होगी, इसकी भविष्यवाणी मुश्किल है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में अगर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं या छोटी गिरावट आ सकती है. लेकिन अगर ड्यूटी में कटौती की उम्मीद से लोग खरीदारी बढ़ा दें तो रिबाउंड हो सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर ड्यूटी 3-5 फीसदी कम हुई तो 10 ग्राम पर 2000 से 4000 रुपये तक गिरावट आ सकती है. लेकिन ऐसा होने की कम संभावना है. बाजार में पहले से ही कीमतें हाई हैं और बजट के बाद सोमवार को ट्रेडिंग में तेज मूवमेंट देखने को मिल सकता है. बजट सोने के लिए ज्यादा बड़ा सरप्राइज नहीं देगा. फोकस रिपोर्टिंग और टैक्स राहत पर रहेगा. सोने की कीमतें ग्लोबल फैक्टर्स जैसे इन्फ्लेशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और सेंट्रल बैंक की खरीदारी से ज्यादा प्रभावित होंगी. भारतीय परिवारों के लिए सोना संपत्ति बनाने का जरिया है इसलिए सरकार बैलेंस बनाए रखेगी. बजट के बाद सोने में इंटरमिटेंट करेक्शन के बाद रिकवरी हो सकती है.

चांदी का बुलबुला फूटा! एक झटके में ₹1 लाख की गिरावट, सोने के भाव भी टूटे

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट (Gold-Silver Price Crash) देखने को मिली है. एक ही दिन में जहां चांदी का भाव 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गया है, तो वहीं सोना भी एक झटके में 33000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है. न सिर्फ वायदा कारोबार में, बल्कि घरेलू मार्केट में भी इन कीमती धातुओं के दाम में अचानक तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्सपर्ट पहले से ही ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे थे और हुआ भी कुछ ऐसा है. आइए जानते हैं गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश के पीछे के बड़े कारणों के बारे में…  देखते ही देखते फूटा चांदी का बुलबुला एक्सपर्ट्स के अनुमान सच साबित हुए हैं और आखिर चांदी का बुलबुला फूट गया (Silver Bubble Burst) है. जी हां, सिर्फ एक ही दिन में 1 Kg Silver Price एक लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते गुरुवार को तूफानी तेजी के साथ उछाल भरते हुए अपना नया हाई लेवल छूने के बाद अंत में 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई थी, वहीं शुक्रवार को वायदा कारोबार बंद होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट क्रैश (Silver Price Crash) हो गया और ये तेजी से गिरते हुए 2,91,922 रुपये पर आ गई. यानी एक झटके में ये 1,07,971 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई.  हाई से इतना टूटा चांदी का भाव  इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चांदी की कीमतों ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और ये 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंच गई थी. लेकिन झटके में बुलंदियों पर पहुंची चांदी ने अचानक ही निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और इस हाई लेवल से 1,28,126 रुपये महज एक दिन में ही सस्ती हो गई.  Silver ही नहीं, Gold भी धड़ाम न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का बुलबुला भी फूटा है. 10 Gram 24 Karat Gold Rate में सिर्फ एक कारोबारी दिन में ही 33,113 रुपये की बड़ी गिरावट आई है. सिल्वर प्राइस बुरी तरह फिसलने के साथ-साथ गोल्ड रेट भी क्रैश हो गया. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को क्लोजिंग तक ये फिसलकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया.  अगर सोने के हाई लेवल से इसकी कीमत में आई गिरावट पर गौर करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate भी चांदी की तरह ताबड़तोड़ तेजी लेकर 1,93,096 रुपये के अपने लाइफ टाइम हाई पर पहुंचे थे और फिर अचानक इसमें ऐसी गिरावट आई कि सोना इस हाई से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया.  अचानक क्यों आई ये बड़ी गिरावट?  सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल के बीच एक्सपर्ट्स पहले सी ही अनुमान जता रहे थे कि ये इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेजी से फिसल भी सकता है और उनके अनुमान शुक्रवार को सच भी साबित हो गए. अगर इन कीमती धातुओं के भाव में आई गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई वजह नजर आती हैं.  Gold-Silver Crash का एक बड़ा कारण मुनाफासूली रही, ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी और बिकवाली के दबाव में झटके में दोनों के दाम बिखर गए. न सिर्फ सोना-चांदी, बल्कि इनके ईटीएफ (Gold-Silver ETF Crash) भी बिखरे हुए नजर आए. इसमें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी का भी बड़ा रोल रहा. आमतौर पर जब US  Dollar मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए गोल्ड- सिल्वर खरीदना महंगा पड़ता है और इनकी डिमांड घट जाती है, जिससे कीमतें भी कम होती है. डॉलर के साथ ही US Treasury की यील्ड भी बढ़ी है और निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न नजर आने लगा है, जिससे ये बिकवाली देखने को मिली. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन में कमी और US Fed में जेरोम पॉवेल की जगह उनके पसंदीदा व्यक्ति केविन वार्श की एंट्री से जुड़ी खबरों ने भी सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है. 

Apple की भारत रणनीति तेज, मुंबई में नया स्टोर और चेन्नई में ऑफिस जल्द

 मुंबई  एप्पल भारत में अपने बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर लेकर जाने की कोशिश कर रहा है. भारत में एप्पल अब सिर्फ आईफोन मैन्युफैक्चरिंग तक की सीमित नहीं रहना चाहती है, बल्कि रिटेल और कॉरपोरेट दोनों तरफ से अपनी पकड़ को मजबूत कर रहा है. इस दिशा में एप्पल ने मुंबई में दूसरा रिटेल स्टोर खोलने की तैयारी कर ली है और चेन्नई में अपना पहला डेडिकेटेड कॉरपोरेट ऑफिस भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने अपनी की फिस्कल Q1 2026 की अर्निंग कॉल के दौरान बताया कि भारत में कंपनी का बिज़नेस रिकॉर्ड ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है. इसके कारण एप्पल मुंबई में एक और रिटेल स्टोर खोलने की प्लानिंग कर रहा है. हालांकि, स्टोर की सटीक लोकेशन और ओपनिंग डेट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. फिलहाल, भारत में एप्पल के कुल पांच ऑफिशियल रिटेल स्टोर हैं. हाल ही में दिसंबर तिमाही के दौरान एप्पल ने नोएडा में अपना पांचवां स्टोर खोला था, जो दिल्ली-एनसीआर का दूसरा स्टोर है. यह स्टोर दिल्ली मॉल ऑफ इंडिया (DLF), नोएडा सेक्टर 18 में स्थित है. यहां एप्पल प्रोडक्ट्स की बिक्री के साथ-साथ Today at Apple सेशन्स, टेक्निकल सपोर्ट और रिपेयर सर्विस भी मिलती है. मुंबई और चेन्नई में एप्पल की बड़ी प्लानिंग इससे पहले अगस्त 2023 में एप्पल ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल में अपना पहला ऑफिशियल स्टोर खोला था, जिसका नाम Apple BKC है. अब कंपनी मुंबई में दूसरा स्टोर खोलने जा रही है, जिससे कंपनी की रिटेल पहुंच और भी बढ़ेगी. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा था कि मुंबई का दूसरा एप्पल स्टोर बोरीवली के ओबेरॉय स्काई सिटी मॉल में खुल सकता है, लेकिन एप्पल के आधिकारियों ने अभी तक मुंबई के दूसरे एप्पल स्टोर की लोकेशन पर कोई कमेंट नहीं किया है. वहीं, दूसरी ओर, एप्पल चेन्नई में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने पोरुर में स्थित डीएलएफ साइबर सिटी आईटी पार्क में करीब 20,000 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है. यह एप्पल का भारत में पहला ऐसा कॉरपोरेट ऑफिस हो सकता है, जहां सीधे कंपनी के कॉरपोरेट ऑपरेशंस चलाए जाएंगे. आपको बता दें कि अभी तक चेन्नई एप्पल के लिए खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग हब बना हुआ है, लेकिन नया ऑफिश खुलने से चेन्नई कंपनी के स्ट्रैटेजिक और मैनेजमेंट ऑपरेशंस का भी हिस्सा बन सकता है. एप्पल के CFO केविन परेख के मुताबिक, भारत में कंपनी का इंस्टॉल्ड यूज़र बेस भी डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रहा है, जो आने वाले सालों में एप्पल के लिए भारत को एक बेहद अहम मार्केट बनाता है.

FTA डील के बाद Fortuner जैसी कीमत में मिल सकती है Defender, जानें आंकड़े

नई दिल्ली  भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बीते 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) फाइनल हुआ है. इस डील के सील होते ही इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि, अब भारत में लग्जरी कारें सस्ती हो जाएंगी. खास तौर पर चर्चा में है दमदार एसयूवी लैंड रोवर डिफेंडर. हालांकि, इससे पहले भारत-यूके एफटीए के समय भी ऐसे ही कयास लगाए गए थे, लेकिन तब डिफेंडर की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली थी. लेकिन इस बार मामला कहीं, आगे बढ़ गया है. आइये समझते हैं कि इस बार क्या बदलेगा और क्या नहीं. भारत-यूके एफटीए लागू होने के बाद कुछ रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती जरूर हुई थी, लेकिन डिफेंडर इससे बाहर रही. इसकी वजह साफ थी. लैंड रोवर डिफेंडर यूके में नहीं, बल्कि स्लोवाकिया में बनती है. इसलिए उस पर यूके एफटीए का फायदा लागू ही नहीं हो सका. अब भारत-ईयू एफटीए के बाद उम्मीद जगी है कि डिफेंडर पर आयात शुल्क कम हो सकता है. नए समझौते के तहत आयात शुल्क में बड़ी कटौती जरूर की गई है, लेकिन यह फायदा सिर्फ उन कारों को मिलेगा जो पूरी तरह बनी हुई गाड़ियां यानी सीबीयू के रूप में भारत आती हैं. लैंड रोवर डिफेंडर भी इसी कैटेगरी में आती है. यही वजह है कि इस एसयूवी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. लैंड रोवर डिफेंडर की मौजूदा कीमत  भारत में लैंड रोवर डिफेंडर 110 की एक्स-शोरूम कीमत करीब 1.03 करोड़ रुपये है. इसकी बेस कॉस्ट एंड फ्रेट यानी BCF करीब 35 लाख रुपये मानी जाती है. इस पर फिलहाल 110 फीसदी का इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जो करीब 38.5 लाख रुपये के आसपास बैठती है. इसके बाद पूरी रकम पर लगभग 40 फीसदी जीएसटी लगता है, जो करीब 29 लाख रुपये होता है. इसी वजह से इसकी कीमत 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाती है. अगर इंपोर्ट ड्यूटी 40 फीसदी कर दिया जाता है, तो डिफेंडर पर करीब 14 लाख रुपये का ड्यूटी चार्ज लगेगा और जीएसटी करीब 19.6 लाख रुपये हो जाएगी. ऐसे में इसकी एक्स-शोरूम कीमत घटकर लगभग 68.6 लाख रुपये हो सकती है. वहीं, एफटीए के अंतिम चरण में जब इंपोर्ट ड्यृटी 10 फीसदी तक आ जाएगा, तब डिफेंडर की एक्स-शोरूम कीमत करीब 53.9 लाख रुपये तक आ सकती है. क्या Fortuner के दाम में आएगी Defender? इतनी बड़ी कटौती के बाद भी लैंड रोवर डिफेंडर पूरी तरह से टोयोटा फॉर्च्यूनर से सस्ती नहीं होगी. फिलहाल फॉर्च्यूनर की कीमतें 34.16 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 49.59 लाख रुपये तक जाती हैं. यानी 10 फीसदी टैरिफ के बावजूद डिफेंडर उससे थोड़ी महंगी ही रहेगी. यह समझना जरूरी है कि आयात शुल्क में यह कटौती एकदम से लागू नहीं होगी. अभी ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर 40 फीसदी हुई है और आगे चलकर यह 10 फीसदी तक जाएगी, लेकिन यह फेज़्ड मैनर (चरणबद्ध तरीके से) में लागू होगी. साथ ही, यह छूट सिर्फ शुरुआती 2.5 लाख इंपोर्टेड कारों ही मिलेगी. इसके अलावा, यह फायदा केवल CBU मॉडल्स को ही मिलेगा. इंडिया–ईयू एफटीए को पूरी तरह लागू होने में एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है और नई कीमतों का असर 2028 के आसपास ही दिखने की उम्मीद है.      

भविष्य की दिशा तय करेगा Budget 2026 – दुनिया के विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ऊँची ब्याज दरों ने निवेश की रफ्तार धीमी कर दी है, वहीं यूरोप आर्थिक सुस्ती से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।Moody’s, S&P और OECD जैसे प्रमुख वैश्विक रेटिंग और शोध संस्थानों के मुताबिक भारत की GDP ग्रोथ 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। मजबूत घरेलू मांग, निरंतर सरकारी पूंजीगत व्यय और संरचनात्मक सुधार भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अब “Global Growth Driver” कहा जा रहा है।OECD का मानना है कि Budget 2026 में लिए गए सुधारात्मक और दूरदर्शी फैसले भारत को अगले दशक में सुपर इकॉनमी की श्रेणी में पहुँचा सकते हैं। वैश्विक संकट के इस दौर में भारत का बजट अब केवल घरेलू आर्थिक दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया की आर्थिक धड़कन से जुड़ चुका है। यह बजट तय करेगा कि भारत केवल उभरती शक्ति बना रहेगा या वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा और सुपर शक्ति । निर्यात और प्रतिस्पर्धा वैश्विक बाजार में भारत के निर्यात को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उद्योग जगत टैक्स राहत, आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज और नए Free Trade Agreements (FTA) की मांग कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक Budget 2026 को पूंजी आकर्षण और निवेश सुरक्षा के संकेतक के रूप में देख रहे हैं। FDI में अतिरिक्त छूट, सुविधा-केंद्रित टैक्स नीति और निवेश-अनुकूल विनियमन को इन्वेस्टमेंट-लीड ग्रोथ के लिए अनिवार्य माना जा रहा है, ताकि भारत विदेशी पूंजी के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश गंतव्य बन सके। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर, बजट से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहा है। ड्यूटी में कटौती, उत्पादन प्रोत्साहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से भारत न केवल घरेलू EV मांग को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक EV बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक ताकत भी बन सकता है। टेक्नोलॉजी और AI में अगली वैश्विक छलांग AI और एडवांस टेक्नोलॉजी अब केवल उद्योग नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति बन चुकी है। टेक सेक्टर की अपेक्षा है कि Budget 2026 में AI-संबंधित सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्लेटफॉर्म, स्किल-बिल्डिंग और R&D को प्राथमिकता दी जाए, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा सके।।  भारत की साइलेंट स्ट्रेंथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अब मूल अवसंरचना माना जा रहा है। डिजिटल बैंकिंग, पेमेंट सिस्टम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ी पारदर्शिता और पहुँच ने भारत को वैश्विक निवेश और व्यापार के लिए अनुकूल और भरोसेमंद वातावरण प्रदान किया है। Budget 2026 भारत के आर्थिक भविष्य का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जो यह तय करेगा कि भारत केवल वैश्विक संकटों से सुरक्षित रहेगा या दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने वाला नेता बनेगा।  वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का उभरता रोल लगभग $700 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $387.6 बिलियन का सेवा निर्यात और दुनिया का सबसे बड़ा $135.4 अरब का रेमिटेंस प्रवाह ये आंकड़े बताते हैं कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।