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गूगल – माइक्रोसॉफ्ट का पासवर्ड मुक्त लॉगिन सिस्टम, भारत में उत्पन्न हो सकती हैं समस्याएं

नई दिल्ली    पासवर्ड अब धीरे धीरे बीते दौर की चीज बनते जा रहे हैं. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां यह मान चुकी हैं कि पासवर्ड न सिर्फ असुरक्षित हैं, बल्कि यूज़र एक्सपीरियंस के लिहाज से भी कमजोर पड़ चुके हैं. इसी वजह से Passkey और FIDEO बेस्ड पासवर्डलेस लॉगिन सिस्टम को तेजी से अपनाया जा रहा है. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और कई बड़े प्लेटफॉर्म अब Passkey को सुरक्षित और फिशिंग प्रूफ विकल्प के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं. FIDEO अलायंस के मुताबिक पिछले दो सालों में पासकी सपोर्ट करने वाले अकाउंट्स की संख्या अरबों तक पहुंच चुकी है. गूगल ने साफ कहा है कि वह पासकी को भविष्य का डिफॉल्ट लॉगिन मानता है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट नए यूज़र्स को पासवर्ड के बिना अकाउंट बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.  टेक इंडस्ट्री में यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहली बार पासवर्ड को हटाने की कोशिश स्केल पर हो रही है. Passkey के जरिए किसी भी अकाउंट को लॉगइन करना काफी आसान और सिक्योर है. पासकी सिस्टम का दावा है कि यह फिशिंग से लगभग पूरी तरह सुरक्षित है. इसमें पासवर्ड याद रखने या टाइप करने की जरूरत नहीं होती. लॉगिन आपके डिवाइस और बायोमेट्रिक पर आधारित होता है, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी. यही वजह है कि सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स इसे अब तक का सबसे सुरक्षित ऑथेंटिकेशन तरीका मानते हैं. आसान शब्दों में समझें तो आपका फोन ही पासवर्ड की तरह काम करता है. भारत में अगल है स्थिति… लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब इस टेक्नोलॉजी को इंडिया जैसे देश में लागू करने की बात आती है. यहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ पर्सनल फोन तक सीमित नहीं है. भारत में फोन शेयर करना आम है. एक ही डिवाइस घर के कई लोग इस्तेमाल करते हैं. सिम बदलना, फोन अपग्रेड करना या सेकेंड हैंड डिवाइस लेना भी सामान्य बात है. पासकी सिस्टम डिवाइस से डीपली इंटिग्रेटेड होता है. अगर फोन खो जाए, चोरी हो जाए या खराब हो जाए, तो यूज़र के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि अकाउंट वापस कैसे मिलेगा. अभी तक पासकी रिकवरी का कोई एक जैसा और आसान तरीका सभी प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है. कई मामलों में रिकवरी प्रोसेस इतना मुश्किल होता है कि यूज़र खुद को लॉक आउट महसूस करने लगता है. यही वजह है कि यूएक्स रिसर्च और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स में बार बार यह बात सामने आई है कि पासकी अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अकाउंट रिकवरी है. जिन देशों में हर यूज़र के पास पर्सनल फोन, क्लाउड बैकअप और मल्टी डिवाइस सिंक मौजूद है, वहां यह सिस्टम आसानी से काम करता है. लेकिन भारत में यह मानकर चलना कि हर यूज़र के पास वही सुविधाएं हैं, एक बड़ी भूल हो सकती है. डिवाइस शेयरिंग भी बड़ा इश्यू है… एक और बड़ी चुनौती है डिवाइस शेयरिंग. अगर किसी परिवार में एक फोन पर कई लोगों के अकाउंट लॉगिन हैं, तो पासकी सिस्टम में प्राइवेसी और एक्सेस कंट्रोल को संभालना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से कई प्लेटफॉर्म मजबूरी में बैकअप के तौर पर पुराने और कम सुरक्षित लॉगिन तरीके भी छोड़ देते हैं, जिससे पासकी का असली सुरक्षा फायदा कमजोर पड़ जाता है. टेक कंपनियां यह मानती हैं कि पासकी भविष्य हैं, लेकिन इंडिया के लिए यह भविष्य बिना तैयारी के नहीं आ सकता. जब तक अकाउंट रिकवरी, ऑफलाइन बैकअप और डिवाइस लॉस जैसे हालात के लिए साफ और सरल समाधान नहीं दिए जाते, तब तक पासवर्डलेस सिस्टम कई यूज़र्स के लिए सुविधा की जगह परेशानी बन सकता है. आपको क्या करना चाहिए? अगर आप अपना फोन किसी के साथ शेयर नहीं करते हैं तो आप अपने फोन को Passkey के तौर पर यूज कर सकते हैं. Gmail अकाउंट से लेकर कई दूसरे अकाउंट में Passkey ऐड करने का ऑप्शन होता है. लेकिन अगर आपको पासवर्ड मैनेज ही करना है तो आप 1Pass जैसे ऐप्स यूज कर सकते हैं. हालांकि ये पेड ऐप है और इसके लिए आपको सब्सक्रिप्शन लेना होता है. 

भारत ने अमेरिकी टैरिफ पर भारी जीत हासिल की, सीफूड निर्यात में 21% की बढ़ोतरी

मुंबई   भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने 2024-25 में रिकॉर्ड उच्च मूल्य 62,408 करोड़ रुपये को छू लिया, जो 2023-24 के 60,523.89 करोड़ रुपये की तुलना में 3.11 प्रतिशत अधिक है. सरकार ने  यह जानकारी दी और बताया कि अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद यह वृद्धि जारी है. मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 2013-14 में 95.79 लाख टन उत्पादन से बढ़कर 2024-25 में यह 197.75 लाख टन हो गया, जो 106 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारतीय समुद्री उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर कुल 58.26 प्रतिशत कर दिया, जिसमें झींगा (श्रीम्प) निर्यात प्रमुख है. भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अमेरिका को होने वाले झींगा निर्यात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसके बावजूद, भारत का समुद्री उत्पाद क्षेत्र लचीला और अनुकूल साबित हुआ. अप्रैल–अक्टूबर 2024 (पूर्व-शुल्क) और अप्रैल–अक्टूबर 2025 (पश्चात शुल्क) के आंकड़ों की तुलना में, निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत वृद्धि (35,107.6 करोड़ रुपये से 42,322.3 करोड़ रुपये) और मात्रा में 12 प्रतिशत वृद्धि (9.62 लाख टन से 10.73 लाख टन) हुई. वहीं, फ्रोज़न झींगा निर्यात में मूल्य में 17 प्रतिशत और मात्रा में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. मछली पालन और संबंधित योजनाओं के माध्यम से 2014-15 से अब तक 74.66 लाख रोजगार अवसर (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) उत्पन्न किए गए हैं. भारत वर्तमान में 350 से अधिक समुद्री उत्पादों को 130 देशों में निर्यात करता है. इसमें 62 प्रतिशत मूल्य मछली पालन से आता है. मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) निर्यात ने पिछले पांच वर्षों में 56 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जो 4,863.40 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपये हो गया. सरकार ने फिशरी सेक्टर में निवेश को बढ़ाया है. विभिन्न योजनाओं जैसे ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) के तहत कुल 38,572 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई या घोषणा की गई. मंत्रालय का कहना है कि इन उपायों और रणनीतियों की वजह से भारत वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य, प्रोसेस्ड समुद्री उत्पादों का हब बनता जा रहा है.

रिटेल महंगाई में बढ़ोतरी, दिसंबर में 1.33% तक पहुंची, नवंबर में 0.71% थी

नई दिल्ली  दिसंबर महीने में भारत की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि यह बाजार के अनुमान से कम रही। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दिसंबर में 1.33% रही। विश्लेषकों ने महंगाई दर 1.56% रहने का अनुमान जताया था। नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई 0.71% और अक्टूबर में 0.25% रही थी, जो 14 साल में सबसे कम स्तर रहा था। खास बात यह है कि खुदरा महंगाई लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य के दायरे से काफी नीचे बनी हुई है। यह लगातार दूसरा तिमाही है जब महंगाई दर केंद्रीय बैंक के कंफर्ट जोन से नीचे रही है। महंगाई में लगातार नरमी को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को पहले के 2.6% से घटाकर 2% कर दिया है। इससे आने वाले समय में मौद्रिक नीति को लेकर नरमी की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं।

Tesla ने भारत में अपनी स्थिति मजबूत की, बेंगलुरु में नया शोरूम खोलने की तैयारी

बेंगलुरु   एलन मस्क के मालिकाना हक वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने हाल ही में जानकारी दी है कि मुंबई और दिल्ली में फिजिकल टचपॉइंट खोलने के बाद अब वह भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की है कि वह बेंगलुरु में अपना तीसरा और सबसे नया टचपॉइंट खोलने जा रही है. संभावना जताई जा रही है कि बेंगलुरु में इस टचपॉइंट में चार सुपरचार्जर स्टेशन लगाए जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और नई दिल्ली के एयरोसिटी में टचपॉइंट्स में हैं. Tesla के इंडिया पोर्टफोलियो में अभी सिर्फ़ एक कार Tesla Model Y मौजूद है. भारत में Tesla Model Y दो अलग-अलग बैटरी पैक के साथ बेची जाती है. पहला इसमें 60 kWh बैटरी पैक मिलता है, जबकि दूसरा 75 kWh बैटरी पैक मिलता है. इसके अलावा, भारत में बेची जाने वाली Tesla Model Y सिर्फ़ रियर-व्हील ड्राइव (RWD) वेरिएंट में पेश की गई है, जबकि दुनिया भर में ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) वेरिएंट बेचे जाते हैं. Tesla Model Y के दो वेरिएंट हैं, जिसमें 60-kWh बैटरी पैक वाला रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट शामिल है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 500 km है. वहीं दूसरी ओर, लॉन्ग-रेंज रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट 75-kWh बैटरी पैक पर चलता है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 622 km है.         इसके अलावा, कंपनी भारत में 6 लाख रुपये के प्रीमियम पर ऑटोनॉमस ड्राइविंग देने की उम्मीद कर रही है. हालांकि, भारत में सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों को कंट्रोल करने वाले कानूनों में अस्पष्टता के कारण, इस फीचर को बाद में लॉन्च किया जा सकता है. Tesla Model Y की कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 59 लाख रुपये है और यह 67.89 लाख रुपये तक जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने दिल्ली NCR और मुंबई में जो सुपरचार्जर लगाए हैं, वे वर्जन 4 यूनिट हैं, जो दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज कर सकते हैं. फिलहाल इनका इस्तेमाल सिर्फ Tesla गाड़ियों के लिए ही किया जा सकेगा, और बाद में दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज करने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, Tesla ने गुरुग्राम में DLF होराइजन सेंटर में अपना पहला डेडिकेटेड चार्जिंग स्टेशन खोलकर अपने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और बढ़ाया है. इसमें कई तरह के चार्जिंग ऑप्शन हैं, जिसमें चार वर्जन 4 सुपरचार्जर यूनिट शामिल हैं, जो 250 kW की पीक आउटपुट देते हैं और तीन डेस्टिनेशन चार्जर जो 11 kW तक की पावर देते हैं. गुरुग्राम चार्जिंग स्टेशन के लॉन्च के साथ, कंपनी के पास अब तीन बड़े चार्जिंग स्टेशन हो गए हैं, जिनमें 12 सुपरचार्जर यूनिट और 10 डेस्टिनेशन चार्जर यूनिट शामिल हैं.

Gold ETF में बड़ा उछाल, दिसंबर में निवेश 211% बढ़कर ₹11,646 करोड़ का ऑल टाइम हाई, SIP से ₹31,000 करोड़ का इनफ्लो

मुंबई  भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और इस महीने यह एक नए शिखर पर पहुंच गया है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 211 फीसदी बढ़कर 11,646 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो नवंबर के 3,742 करोड़ और अक्टूबर के 7,743 करोड़ की तुलना में कहीं ज्यादा है। इस कैटेगरी के लिए यह अब तक का सबसे ज्यादा मंथली इनफ्लो है। वैश्विक और घरेलू स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजारों में समय-समय पर जोखिम से बचने (रिस्क-ऑफ) का माहौल बनने के कारण गोल्ड ईटीएफ में यह मजबूत निवेश देखने को मिला।  म्युचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए ताबड़तोड़ निवेश जारी है। दिसंबर 2025 में एसआईपी ने नया रिकॉर्ड बनाया और पहली बार निवेश 31,000 करोड़ के पार चला गया। हालांकि, इ​क्विटी म्युचुअल फंड्स में इनफ्लो नवंबर के मुकाबले 6 फीसदी घटकर 28,054 करोड़ रुपये पर आ गया। इ​क्विटी फंड्स में फ्लेक्सी कैप फंड का दमदार प्रदर्शन जारी है। पिछले महीने इस कैटेगरी में 10 हजार करोड़ से ज्यादा का जबरदस्त इनफ्लो आया। एक्सपर्ट मानते हैं कि निवेशकों का भारत की ग्रोथ स्टोरी और लंबी अव​धि के नजरिए से बाजार पर भरोसा बना हुआ है। Gold ETFs में निवेश 4 गुना बढ़ा निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों (सेफ-हेवन एसेट्स) में भी एक बार फिर रुचि दिखाई। मिरे असेट में डिस्ट्रीब्यूटशन और स्ट्रैटेजिक एलायंस की हेड सुरंजना बोरठाकुर ने कहा, सोने के लिए यह साल बेहद शानदार रहा है और गोल्ड ईटीएफ में नेट इनफ्लो पिछले साल की तुलना में चार गुना बढ़ गया है। अब सोने को सिर्फ जोखिम से बचाव (हेज) के तौर पर ही नहीं, बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो का एक रणनीतिक और दीर्घकालिक हिस्सा भी माना जा रहा है।” क्यों बढ़ी गोल्ड ईटीएफ की चमक? साल 2025 में सोने की कीमतों में आई जोरदार तेजी के दम पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। आनंद राठी वेल्थ के फिरोज अजीज ने कहा, “कैलेंडर वर्ष 2025 में सोने ने 70 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है, जिसके बाद गोल्ड ETFs में अब तक का सबसे अधिक निवेश दर्ज हुआ है। यह हालिया प्रदर्शन से प्रभावित निवेश व्यवहार (रेसेंसी बायस) की ओर भी इशारा करता है।” Gold ETFs पर क्यों लट्टू हो रहे निवेशक? सोने की कीमतों में तेजी के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों का योगदान है। इसके अलावा, सेंट्रल बैंक की खरीद और भू-राजनैतिक तनाव जैसे वैश्विक कारकों ने सोने को सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) के रूप में पसंदीदा बना दिया है। विशेष रूप से गोल्ड ईटीएफ को तरजीह दी जा रही है क्योंकि ये लिक्विडिटी, किफायती लागत, पारदर्शिता और ट्रेडिंग में आसानी प्रदान करते हैं, जबकि फिजिकल सोने में स्टोरेज और शुद्धता संबंधी चिंताएं होती हैं। ICRA एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड मार्केट डेटा, अश्विनी कुमार ने कहा, “दुनिया में बढ़ते तनाव और अनिश्चित माहौल के कारण लोग अब सोने को एक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। निवेशक गोल्ड ईटीएफ को उनकी तरलता (लिक्विडिटी), पारदर्शिता, कम लागत और ट्रेडिंग की आसान प्रक्रिया के कारण पसंद करते हैं।” Gold ETF क्या है? गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) एक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड है, जो देश में सोने की कीमतों को ट्रैक करता है। यह एक पैसिव इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट है जो सोने की कीमतों (Gold Price) पर आधारित होता है और गोल्ड बुलियन (भौतिक सोने) में निवेश करता है। गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट 1 ग्राम सोने के बराबर होती है और इसे डीमैट (Demat) या पेपर फॉर्म में रखा जा सकता है। यह उच्च शुद्धता वाले फिजिकल गोल्ड से समर्थित होता है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने से निवेशकों को शेयर बाजार की तरह लचीलापन (Flexibility) मिलता है, साथ ही सोने में निवेश की सरलता भी बनी रहती है।

भारत और ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी बॉन्ड से दूरी बनाई, 2026 तक खत्म होगा अमेरिका का राज, भारत-रूस में 90% व्यापार डॉलर में नहीं

नई दिल्ली जहां विकसित देश अमरीकी बॉन्ड और डॉलर को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं, वहीं ब्रिक्स समेत उभरते देश अपनी वित्तीय स्वतंत्रता की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच विकसित देश अमरीकी सरकारी बॉन्ड्स और डॉलर खरीदते रहे। जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन इनमें पूंजी लगा रहे हैं। वहीं, भारत, चीन और ब्राजील जैसे ब्रिक्स देश इनसे दूरी बना रहे हैं। पिछले एक साल में भारत, चीन और ब्राजील ने अमरीकी बॉन्ड में निवेश 183 अरब डॉलर घटाया है। हर अमेरिकी पर 1 लाख डॉलर का कर्ज अमेरिकी कर्ज का जाल हाथ से निकल गया है। आहूजा का लिंक्डइन पोस्ट को लेकर वित्तीय हलकों में बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है-अमेरिका पर यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की कुल जीडीपी से भी ज्यादा कर्ज है। यह हर अमेरिकी पर एक लाख डॉलर से ज्‍यादा का कर्ज है। यह चेतावनी IMF की ओर से अमेरिका के 36 ट्रिलियन डॉलर के संघीय कर्ज पर हालिया आंकड़े के बाद आई है। IMF ने किस बात पर जताई है गंभीर चिंता आईएमएफ ने बीते साल अमेरिका के 36 ट्रिलियन डॉलर के संघीय ऋण पर चिंता जताई थी। यह कर्ज मुख्य रूप से 2008 के बाद के वित्तीय सहायता पैकेजों, रिकॉर्ड रक्षा खर्च और महामारी के दौरान दिए गए प्रोत्साहन पैकेजों के कारण बढ़ा है। अब अमेरिका के सबसे बड़े ऋणदाता अपना पैसा वापस चाहते हैं। चीन, जापान, ब्रिटेन और कनाडा ने चुपचाप अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बेचना शुरू कर दिया है। निवेशकों को बनाए रखने के लिए अमेरिका ब्याज दरें बढ़ा रहा है। लेकिन इससे संकट और गहरा रहा है। वार्षिक ब्याज भुगतान अब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, जो पेंटागन के बजट से भी अधिक है दुनिया के कारोबार पर डॉलर का रहा है राज दशकों से अमेरिकी डॉलर ने दुनिया की अग्रणी आरक्षित मुद्रा के रूप में राज किया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अनुसार, 1999 से 2019 के बीच अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 96 प्रतिशत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 74 प्रतिशत और बाकी दुनिया में 79 प्रतिशत डॉलर का उपयोग किया गया था। अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, अमेरिकी डॉलर का उपयोग लगभग 88 प्रतिशत मुद्रा विनिमय में किया जाता है और केंद्रीय बैंकों के रखे गए सभी विदेशी मुद्रा भंडार का 59 प्रतिशत उपयोग डॉलर में किया जाता है। भारत-रूस में 90 फीसदी कारोबार में गैर डॉलर मुद्रा में नवभारत टाइम्स के एक लेख के मुताबिक, रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने नवंबर, 2024 में कहा था कि भारत और रूस के बीच लगभग 90% व्यापार अब स्थानीय या वैकल्पिक मुद्राओं के माध्यम से हो रहा है, जबकि शेष व्यापार अभी भी अन्य मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्राओं में होता है। यानी इस कारोबार में डॉलर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने दिल्ली में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 25वें सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में कहा-द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय और वैकल्पिक मुद्राओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह अब 90% के करीब पहुंच रही है। हम रूसी और भारतीय बैंकों के बीच संवाददाता संबंधों के विस्तार पर अपना काम जारी रखना आवश्यक समझते हैं। भारत ने कर दी थी बड़ी पहल, ब्रिक्स होगा मजबूत भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान को सक्षम बनाने की दिशा में पहला कदम तब उठाया, जब जुलाई 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लेनदेन के चालान और भुगतान को रुपये में अनुमति दे दी। यह कदम यूक्रेन युद्ध की शुरुआत और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान एवं निपटान प्रणालियों से रूस को बाहर करने के बाद उठाया गया था। भारत में लगभग 20 प्राधिकृत डीलर (एडी) बैंकों को इस व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए 22 से अधिक देशों के साझेदार बैंकों के 92 विशेष रुपया वास्ट्रो खाते खोलने की अनुमति दी गई है। भारत के ब्रिक्स का अध्यक्ष बनने के बाद से इससमें और तेजी आ सकती है। भारतीय एक्सपर्ट ने भी बता दी हकीकत बीते साल जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मचेलानी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा था कि प्रतिद्वंद्वी गुटों में बंटती दुनिया में पुतिन की 4-5 दिसंबर की नई दिल्ली यात्रा सिर्फ एक और कूटनीतिक पड़ाव नहीं है। यह एक शक्तिशाली भू-राजनीतिक बयान है। इस यात्रा से महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है, जिनमें स्विफ्ट प्रणाली को दरकिनार करने और अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने के लिए डिजाइन किए गए नए भुगतान चैनल शामिल हैं।…भारत अपना एक स्पष्ट संदेश दे रहा है। ब्रिक्स मुद्रा के क्या फायदे हो सकते हैं एक नई मुद्रा से ब्रिक्स देशों को कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें अधिक कुशल सीमा-पार लेनदेन और बेहतर वित्तीय समावेशन शामिल हैं। ब्लॉकचेन तकनीक, डिजिटल मुद्राओं और स्मार्ट अनुबंधों का लाभ उठाकर, यह मुद्रा वैश्विक वित्तीय प्रणाली में क्रांति ला सकती है। निर्बाध सीमा-पार भुगतानों के माध्यम से, यह ब्रिक्स देशों और अन्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा दे सकती है। पुतिन ने डॉलर से अलग मुद्रा की बात की बीते साल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कजान के मंच से कहा था-हम डॉलर से इनकार नहीं कर रहे हैं, उससे लड़ नहीं रहे हैं, लेकिन अगर वे हमें इसके साथ काम करने नहीं देंगे, तो हम क्या कर सकते हैं? हमें तब अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी, जो हो भी रहा है। एक संभावित ब्रिक्स मुद्रा इन देशों को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए अपनी आर्थिक स्वतंत्रता का दावा करने में सक्षम बनाएगी। वर्तमान प्रणाली में अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व है, जो सभी मुद्रा व्यापार का लगभग 89 प्रतिशत है। परंपरागत रूप से, लगभग 100 प्रतिशत तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता था। हालांकि, 2023 में तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गैर-अमेरिकी डॉलर मुद्राओं का उपयोग करके किया गया। ब्रिक्स देश इसलिए चाहते हैं डॉलर के मुकाबले नई मुद्रा ब्रिक्स देशों के समक्ष हाल की वैश्विक वित्तीय चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। आक्रामक अमेरिकी विदेश नीतियां भी इसके पीछे बड़ी वजह हैं। अपने आर्थिक हितों को बेहतर ढंग से पूरा करने का मकसद है। अमेरिकी डॉलर और यूरो पर वैश्विक निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। अमेरिका-यूरोप की पाबंदियों … Read more

गोल्ड खरीदने का प्लान है? 10 जनवरी का ताजा रेट और 22-24 कैरेट के भाव देखें आपके शहर के अनुसार

इंदौर  मकर संक्रांति और शादियों के सीजन से पहले जनवरी में सोने-चांदी की कीमतों में बार-बार परिवर्तन देखने को मिल रहा है। शनिवार सुबह सोने की कीमतों में ₹1150 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) का उछाल आया है। वहीं चांदी के भाव में भी ₹11,000 प्रति किग्रा की तेजी देखी गई है। शुक्रवार शाम को 24 कैरेट का भाव ₹1,39,460 और चांदी का भाव ₹2,49,000 (प्रति किग्रा) पर बंद हुआ था। अगर आप 10 जनवरी 2026 को सोना या चांदी खरीदने का विचार कर रहे हैं तो पहले 18, 22 और 24 कैरेट का ताजा भाव देख लें। भारतीय सराफा बाजार (व्यापारियों द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार) में आज 22 कैरेट सोने के दाम ₹1,28,900, 24 कैरेट का भाव ₹1,40,610 और 18 कैरेट सोने का रेट ₹1,05,490 चल रहे हैं। चांदी ₹2,60,000 (प्रति किग्रा) दर्ज हुई। 18 कैरेट (18K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,05,490     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,05,390     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,05,340     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,07,650 22 कैरेट (22K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     ​मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,28,900     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,28,800     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,28,750     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,29,000 24 कैरेट (24K) सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम में)     मेरठ, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़: ₹1,40,610     ​इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद: ₹1,40,510     ​मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु: ₹1,40,460     ​चेन्नई, कोयंबटूर: ₹1,39,650 (दक्षिण भारत के कुछ शहरों में स्थानीय प्रीमियम/मेकिंग/डीलर मार्जिन के कारण अंतर) प्रमुख शहरों का चांदी (Silver Rate Today) का भाव     10 ग्राम: ₹2,600     100 ग्राम: ₹26,000     ₹2,60,000 (प्रति किग्रा): दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, कोलकाता, भोपाल और इंदौर ।     ​ ₹2,75,000 (प्रति किग्रा): चेन्नई, मदुरै, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल। (दक्षिण भारत के राज्यों के भाव में मेकिंग चार्ज, डीलर प्रीमियम/स्थानीय शुल्क, परिवहन लागत और मांग के चलते कीमतों में बढ़त बनी है।) किन कारणों से बदलते हैं सोने-चांदी के दाम?     अंतरराष्ट्रीय बाजार     डॉलर में उतार-चढ़ाव     वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनाव     केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ब्याज दरें     शेयर बाजार में बदलाव     भारत जैसे देशों में आयात शुल्क और अन्य कर     घरेलू दामों पर USD-INR, आयात शुल्क     जीएसटी/टीसीएस, लोकल मेकिंग चार्ज     देश की महंगाई दर     त्योहार और शादियों का सीजन सोना खरीदने से पहले जान लें ये प्रमुख बातें     इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) देश भर के लिए सोने-चांदी के मानक भाव जारी करता है। हालांकि शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित अवकाश के दिनों में नए भाव जारी नहीं किए जाते हैं।     IBJA द्वारा जारी रेट में जीएसटी शामिल नहीं होता, जिसके कारण अलग-अलग शहरों और शोरूम्स में अंतिम कीमत अलग-अलग हो सकती है। ​सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क और HUID (Hallmark Unique Identification) कोड जरूर जांचें।     हॉलमार्क के निशान में ​BIS लोगो (भारतीय मानक ब्यूरो का आधिकारिक प्रतीक), ​कैरेट/शुद्धता, HUID नंबर (एक यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक कोड) और सेंटर मार्क ( लैब टेस्टिंग निशान) होता है।     24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है। 24 कैरेट गोल्ड 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है और 22 कैरेट में 91.6% शुद्धता होती है (इसीलिए इसे 916 गोल्ड कहा जाता है)।     24 कैरेट सोना शुद्ध होता है, इसलिए इसके गहने नहीं बनाए जाते हैं।     22 कैरेट गोल्ड में 8.4% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक मिलाकर गहने तैयार किए जाते हैं। अधिकतर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट का सोना बेचते हैं और इसी के आभूषण बनाते हैं।  

ट्रंप के टैरिफ से बाजार में गहरा संकट, 13 लाख करोड़ की गिरावट, 5 दिनों में सेंसेक्स 2200 अंक टूटा

मुंबई  सोमवार से लेकर शुक्रवार तक पूरा सप्‍ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बुरा वक्‍त रहा. पिछले पांच दिनों के दौरान सेंसेस में करीब 2200 अंकों की गिरावट आई है. सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्‍स 604 अंक टूटकर 83576 और निफ्टी 193 अंक गिरकर 25683 लेवल पर बंद हुआ. निफ्टी बैंक में भी 435 अंकों की गिरावट आई.  BSE टॉप 30 शेयरों में 21 शेयर लाल निशान पर बंद हुए, जबकि 9 शेयर हरे निशान पर थे. पिछले पांच कारोबारी दिनों के दौरान सेंसेक्‍स में 2186 अंकों की बड़ी गिरावट आई है. वहीं NSE निफ्टी में 2.5 फीसदी की गिरावट रही है. इस भारी गिरावट के कारण लगातार पांच कारोबारी सत्रों में बीएसई के मार्केट कैप में 13 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की गिरावट रही.  इस बड़ी गिरावट के कारण बीएसई के मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्‍स में गिरावट दर्ज की गई. यह बिकवाली मुख्य रूप से रूस से तेल आयात करने वाले देशों के खिलाफ अमेरिकी व्यापारिक कार्रवाइयों में बढ़े टेंशन के कारण हुआ है. आइए जानते हैं किन-किन कारणों से शेयर बाजार में गिरावट आई है.   5 दिन में 13 लाख करोड़ साफ बीएसई के मार्केट कैप के आधार पर मापी गई निवेशक संपत्ति पिछले सत्र के 472.25 लाख करोड़ रुपये से घटकर 467.87 लाख करोड़ रुपये रह गई, जिसमें 4.38 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है. पिछले पांच सत्रों में यह आंकड़ा 13.37 लाख करोड़ रुपये कम हुआ है.  क्‍यों आई भारतीय शेयर बाजार में गिरावट?      अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विधेयक को मंजूरी दे दी है जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदना जारी रखने वाले भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर टैरिफ में भारी वृद्धि हो सकती है, जो 500% तक हो सकता है.      विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली ने पांच दिनों की गिरावट के दौरान बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है. विदेशी निवेशकों ने 8 जनवरी को 3,367.12 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे.      ग्लोबल बाजारों में कमजोरी ने भारतीय इक्विटी में सतर्कता को और भी बढ़ा दिया है. एशियाई स्टॉक मार्केट थोड़े नीचे आए हैं. साथ ही भारत अमेरिका में डील भी रुका हुआ है.        डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आज फैसला आने वाला है. जिसमें यह तय होगा कि क्‍या दूसरे देशों पर टैरिफ लगाना उचित है कि नहीं.      कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय इक्विटी के लिए एक और चुनौती बनकर उभरी हैं, खासकर देश की कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता को देखते हुए. भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ीं और ग्‍लोबल दबाव दिख रहा है.  

रिपोर्ट: दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 95,000 तक पहुंच सकता है

मुंबई   भारत का शेयर बाजार आने वाले समय में अच्छा-खासा मुनाफा दे सकता है। मजबूत आर्थिक स्थिति, स्थिर बाजार, सही कीमत पर शेयरों की उपलब्धता और ग्रोथ साइकिल के चलते भारतीय शेयर बाजार में तेजी की संभावना जताई गई है। बुधवार को जारी एमएस रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएसई सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक 95,000 अंक तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके इस लेवल तक पहुंचने की 50 प्रतिशत संभावना है। इसका मतलब है कि सेंसेक्स में लगभग 13 प्रतिशत की बढ़त देखी जा सकती है। रिपोर्ट में माना गया है कि सरकार खर्च पर नियंत्रण बनाए रखेगी, निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा और देश की आर्थिक वृद्धि दर ब्याज दरों से बेहतर रहेगी। इन सभी कारणों से शेयर बाजार को सपोर्ट मिलेगा।रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स से जुड़ी कंपनियों की कमाई साल 2028 तक हर साल लगभग 17 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले करीब पांच वर्षों में पहली बार शेयर बाजार की कीमतें ब्याज दरों की तुलना में बेहतर दिख रही हैं, जिससे शेयरों में आगे और बढ़त की संभावना बनती है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता वस्तुओं और उद्योग क्षेत्र में करीब 300 बेसिस प्वाइंट्स, जबकि वित्तीय क्षेत्र में लगभग 200 बेसिस प्वाइंट्स की अतिरिक्त तेजी आ सकती है। इसकी वजह शहरों में मांग का बढ़ना, जीएसटी दरों में कटौती, सरकार का ज्यादा खर्च, कर्ज में बढ़ोतरी और कम कर्ज नुकसान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज विकास, कम उतार-चढ़ाव और घटती ब्याज दरों के चलते लोग बचत को शेयर बाजार में लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे बाजार को और मजबूती मिल रही है। सरकार द्वारा रेपो रेट में कटौती, कैश रिजर्व रेशियो में कमी, बैंकों के नियमों में आसानी और बाजार में तरलता बढ़ाने जैसे कदमों से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है।इसके अलावा, सरकार द्वारा पहले से किया गया पूंजी खर्च, लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती, चीन के साथ संबंधों में सुधार और वहां की नई नीतियां भी बाजार के लिए फायदेमंद मानी गई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी होती है या दुनिया में राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो इससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत का चीन को झटका? रिपोर्ट में दावा – चीनी कंपनियों से प्रतिबंध हटाकर सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में उन्हें मिलेगी मौका

 नई दिल्‍ली रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया है कि वित्त मंत्रालय उन प्रतिबंधों को हटाने की योजना बना रहा है, जिनके कारण 2020 से चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने से रोका गया था. यह प्रतिबंध भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए घातक सीमा झड़प के बाद लागू किए गए थे और चीन समेत पड़ोसी देशों की कंपनियों को बोली लगाने से पहले एक सरकारी समिति में पंजीकरण कराना और राजनीतिक सुरक्षा संबंधी मंजूरी लेना अनिवार्य था.   इस प्रतिबंध लगने के बाद से ही चीनी कंपनियां करीब 700 अरब डॉलर से 750 अरब डॉलर के सरकारी टेंडर से बाहर हो गई थीं. अधिकारियों को कहना है कि मंत्रालय का लक्ष्य पड़ोसी देशों के बोलीदाताओं के लिए पंजीकरण की आवश्यकता को समाप्त करना है.  PMO से आएगा आखिरी फैसला रिपोर्ट का कहना है कि प्रतिबंध हटाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय के पास है और इसकी मंजूरी का इंतजार है. रिपोर्ट का कहना है कि प्रतिबंध इसलिए हटाए जा रहे हैं, क्‍योंकि क्षेत्रीय कमी, परियोजनाओं में देरी हो रही है.  कई मंत्रालयों ने भी उपकरण जुटाने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में चुनौतियों की सूचना दी है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की है. ये सिफारिशें कई मंत्रालयों के उन अनुरोधों के अनुसार है, जिनमें परियोजनाओं में देरी को रोकने के लिए छूट मांगी गई थी.  2020 में लागू हुए थे प्रतिबंध यह प्रतिबंध 2020 में लागू किए गए थे, जिसका तत्‍काल प्रभाव पड़ा था. उदाहरण के लिए, नियमों के लागू होने के तुरंत बाद चीनी सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 216 मिलियन डॉलर के ट्रेन निर्माण कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए बोली लगाने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था.  ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में चीनी कंपनियों को दिए गए नए प्रोजेक्टों की वैल्‍यू 27 प्रतिशत घटकर 1.67 अरब डॉलर रह गया. पिछले एक साल में राजनयिक प्रयास किए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा, व्यापार वीजा की मंजूरी में आसानी और सीधी उड़ानों की बहाली जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, भारत सतर्क बना हुआ है और चीनी डायरेक्‍ट विदेशी निवेश पर अन्य प्रतिबंध बरकरार रखे हुए है.