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इस एयरलाइन का शानदार ऑफर, इंडिगो के बाद 30% डिस्काउंट पर विदेश यात्रा करें

  नई दिल्ली अगर आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है. साल 2026 में ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म सेक्टर में आई तेजी के बीच एयरलाइंस के बीच सस्ते टिकटों की जंग शुरू हो गई है. हाल ही में भारतीय एयरलाइन इंडिगो (Indigo) द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बंपर ऑफर देने के बाद, अब वियतनाम की लो-कॉस्ट एयरलाइन वियतजेट (Vietjet) ने भारतीय यात्रियों के लिए अपना पिटारा खोल दिया है. कंपनी ने वियतनाम और उसके आगे के डेस्टिनेशंस के लिए अपने 'डीलक्स' (Deluxe) फेयर पर 30 फीसदी की सीधी छूट देने का ऐलान किया है. वियतजेट की ओर से लाई गई यह सेल बहुत ही सीमित समय के लिए है. कंपनी ने इसे केवल एक दिन के लिए पेश किया है. यह प्रमोशन ऑफर 14 जनवरी रात 10:30 बजे से शुरू होकर 15 जनवरी 2026 की रात 9:30 बजे (भारतीय समयानुसार – IST) तक चलेगा. इसका मतलब यह है कि यात्रियों के पास सस्ते टिकट बुक करने के लिए महज 23 घंटे का समय होगा. कैसे उठाएं इस ऑफर का लाभ? इस बंपर डिस्काउंट का फायदा उठाने के लिए यात्रियों को वियतजेट की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए टिकट बुक करना होगा. बुकिंग के दौरान 'डीलक्स' (Deluxe) टिकट चुनते समय यात्रियों को 'DELUXE2026' प्रोमो कोड (Promotional Code) का इस्तेमाल करना होगा, जिससे उनके बेस फेयर (Base Fares) पर सीधे तौर पर 30% की छूट (Discount) मिल जाएगी. हालांकि, यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि यह छूट केवल आधार किराए पर ही लागू होगी और इसमें टैक्स व अन्य फीस (Taxes and fees) शामिल नहीं किए गए हैं. जहां तक यात्रा की अवधि (Travel Period) का सवाल है, तो इस ऑफर के तहत बुक किए गए टिकटों पर यात्री 1 फरवरी से 31 दिसंबर 2026 के बीच कभी भी अपना सफर तय कर सकते हैं. एयरलाइन ने साफ किया है कि यह ऑफर रूट के हिसाब से तय शर्तों के अधीन होगा और कुछ खास तारीखों यानी ब्लैकआउट डेट्स (Blackout dates), जिनमें ऑफर लागू नहीं होता, उन पर यह लाभ नहीं मिलेगा. डीलक्स श्रेणी में मिलेंगी खास सुविधाएं एयरलाइन के मुताबिक, डीलक्स (Deluxe) श्रेणी के तहत टिकट बुक करने पर यात्रियों को किफायती सफर के साथ-साथ खास सुविधाएं भी मिलेंगी. इसमें 20 किलो तक चेक-इन बैगेज, फ्री सीट चयन और मुफ्त यात्रा कार्यक्रम बदलाव की सुविधा दी जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीयों के लिए वियतनाम की छुट्टियों, बिजनेस ट्रिप्स और फैमिली विजिट को और अधिक आरामदायक और वैल्यू-एडेड बनाना है. भारतीयों की पहली पसंद बन रहा है वियतनाम भारतीय पर्यटकों के बीच वियतनाम को लेकर दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. हनोई (Hanoi) और हो ची मिन्ह सिटी (Ho Chi Minh City) जैसे शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शहरी जीवन के मेल के लिए जाने जाते हैं. वहीं, दा नांग (Da Nang), फु क्वोक (Phu Quoc), न्हा ट्रांग (Nha Trang), सा पा (Sa Pa) और हा गियांग (Ha Giang) जैसे क्षेत्र अपने खूबसूरत समुद्र तटों और पहाड़ों के लिए पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं. वियतजेट को उम्मीद है कि इस प्रमोशन के जरिए भारतीय यात्रियों को वियतनाम की परंपराओं और व्यंजनों को करीब से जानने का मौका मिलेगा, जिससे पर्यटन व्यवसाय को नई रफ्तार मिलेगी.

Meta बनने का सपना चुराया, फेसबुक के 1000 कर्मचारियों को जकरबर्ग ने किया नौकरी से बाहर

कैलिफोर्निया अमेरिकी टेक कंपनी Meta ने 2026 की शुरुआत में अपने Reality Labs डिविज़न में 1,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को निकाल दिया है. यह खबर सिर्फ नौकरी छंटनी नहीं है, बल्कि एक बड़ा इशारा है कि Meta किस दिशा में जा रहा है. Reality Labs वही यूनिट है जो Virtual Reality (VR), Metaverse और XR (Extended Reality) जैसी टेक पर काम करती थी. अगर आपको याद हो तो कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पूरी कंपनी का नाम फेसबुक से Meta कर दिया था और Metaverse पर बिलियन डॉलर्स निवेश किए थे. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेटावर्स एक बबल की तरह था जो फूट रहा है और कंपनी अब दूसरे डायरेक्शन में शिफ्ट हो रही है.  Metaverse पर लगाया था बड़ा दांव, लेकिन टूटा सपना   Meta ने Reality Labs में करीब 10% से ज़्यादा स्टाफ को निकालने का फैसला लिया है, जिससे यह साफ़ होता है कि कंपनी अब Metaverse प्रोजेक्ट पर उतना बड़ा भरोसा नहीं कर रही जितना पहले कर रही थी. यह बदलाव अलग अलग टीमों और प्रोडक्ट्स को प्रभावित कर रहा है, खासकर उन लोगों को जो Meta के VR हेडसेट्स, Horizon Worlds जैसे Metaverse प्लेटफ़ॉर्म और कुछ अन्य इमर्सिव गेमिंग स्टूडियोज़ पर काम करते थे. यह छंटनी बुधवार सुबह से शुरू हुई और इसके बारे में कंपनी ने अपने इनसाइड मैसेज में भी बताया. Meta के Chief Technology Officer एंड्रयू बोस्वर्थ ने इंटर्नली स्टाफ को बताया कि यह कदम कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले लिया गया है, जो इस साल की रणनीति को तय करेगा. Meta के एक प्रवक्ता ने कहा है कि यह बदलाव Metaverse में भारी खर्च और कम उपयोग के कारण ज़रूरी था, और कंपनी अब अपने संसाधनों को AI-ड्राइव्ड प्रोडक्ट्स और वियरेबल टेक की तरफ़ ज़्यादा फोकस कर रही है.  LinkedIn पर Open to Work की भरमार इस बदलाव के बाद LinkedIn जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर Meta के पूर्व कर्मचारियों की तरफ़ से 'Open to Work' पोस्ट्स की भरमार देखी जा रही है, जिससे यह साफ़ होता है कि कई अनुभवी टेक प्रोफेशनल अब नई नौकरी की तलाश में हैं. इस हफ्ते से LinkedIn पर हजारों Open to Work पोस्ट्स वायरल हो रही हैं, जो दिखाती हैं कि यह सिर्फ एक कंपनी की नौकरी छंटनी नहीं, बल्कि पूरे टेक सेक्टर में बदलाव की हवा है. Meta के Reality Labs ने पिछले कुछ सालों में Metaverse और XR टेक पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन इन प्रोडक्ट्स को Mainstream यूज़र्स द्वारा उतना अपनाया नहीं गया जितना कंपनी ने सोचा था. कई रिपोर्ट्स के अनुसार Reality Labs ने पिछले कुछ वर्षों में भारी वित्तीय नुकसान भी झेला है, जिससे Meta को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा. अब Meta को लगता है कि दुनिया अभी मेटावर्स के लिए तैयार नहीं है, बल्कि AI और Wearables जैसे प्रोडक्ट्स ज़्यादा प्रैक्टिकल हैं और कंपनियों को वहीं ज़्यादा फायदा मिलेगा. Meta स्मार्ट AI ग्लासेस पर पूरा फोकस इसी वजह से Ray-Ban Smart Glasses जैसे AI वाले डिवाइसेज़ पर ज़्यादा निवेश कर रही है, जिनकी मांग बढ़ रही है, वहीं VR हेडसेट्स और Metaverse प्लेटफ़ॉर्म की दिशा थोड़ी धीमी पड़ रही है. स्मार्ट ग्लासेज अपने कॉम्पैक्ट साइज और प्रैक्टिकल होने की वजह से दुनिया भर में काफी पॉपुुलर हुए और इनकी बिक्री भी खूब हुई. हाल ही में Meta ने डिस्प्ले वाले स्मार्ट ग्लासेज भी लॉन्च किए हैं जो अमेरिका में Out Of Stock हो रहा है. इतना  ही नहीं, कंपनी Orion ग्लासेज पर भी काम कर रही है जो चश्मा की तरह ही है, लेकिन उसमें मिक्स्ड रिएलिटी के तमाम फीचर्स मिलेंगे जैसे Apple Vision Pro में देखने को मिलते हैं. Meta के इस बड़े बदलाव से यह भी पता चलता है कि Tech इंडस्ट्री में जो भी प्रोडक्ट तेजी से पैसा नहीं कमा रहे, उनसे कंपनियां जल्दी दूरी बना रही हैं. पिछले साल भी कई बड़ी टेक कंपनियों ने Job Cuts का दौर देखा है, जिसमें Meta, Microsoft, Google जैसे बड़े नाम शामिल रहे. इस साल की शुरुआत में Meta ने Reality Labs में छंटनी कर यह संदेश दिया है कि अब कंपनी का ध्यान भविष्य की AI फर्स्ट तकनीकों पर है न कि सिर्फ़ हॉलीवुड-ज़्यादा फ्यूचरिस्टिक Metaverse पर.  

सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, जानिए 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड और चांदी का नया भाव

इंदौर     सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) ने बीते साल 2025 में गदर मचाया था, तो वहीं इस साल 2026 की शुरुआत से ही ये फिर रॉकेट की रफ्तार से बढ़ते हुए पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ती हुईं नजर आ रही हैं. सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भी चांदी का भाव (Silver Price) खुलने के साथ ही एक झटके में 12000 रुपये से ज्यादा बढ़ गया. वहीं सोने के भाव (Gold Rate) की बात करें, तो इसमें भी तगड़ी तेजी आई है. अमेरिका-ईरान के बीत तनाव से बढ़ी ग्लोबल टेंशन ने एक बार फिर निवेशकों को सोना-चांदी में निवेश (Gold-Silver Investment) की ओर मोड़ने का काम किया है.  चांदी का गदर लगातार जारी  सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत के बारे में, तो बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर ये कीमती धातु खुलते ही रॉकेट की रफ्तार से भागती नजर आई है. 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव (Silver Price) मिनटों में अपने पिछले बंद के मुकाबले 12,803 रुपये बढ़ गया. बीते कारोबारी दिन चांदी की वायदा कीमत 2,75,187 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, लेकिन बुधवार को ये 2,87,990 रुपये के नए लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गई.  10 दिन में 52000 रुपये महंगी हुई चांदी  चांदी के वायदा भाव में इस साल अब तक महज 10 कारोबारी दिनों में आई तेजी पर गौर करें, तो 1 Kg Silver Price इस दौरान 52,117 रुपये उछला है. दरअसल, साल के पहले दिन 1 जनवरी को चांदी की वायदा कीमत 2,35,873 रुपये प्रति किलो थी, जो बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही बढ़कर 2,87,990 रुपये पर पहुंच गई. इस सप्ताह के महज तीन कारोबारी दिनों की बात करें, तो ये 19,020 रुपये प्रति किलो चढ़ी है.  सोना भी रुकने को तैयार नहीं न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार नए रिकॉर्ड बनाता जा रहा है. इसकी वायदा कीमतों में इस साल अब तक 10 दिनों में 7,369 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी आ चुकी है. 1 जनवरी 2026 को 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट (10 Gram 24 Karat Gold Rate) 1,35,804 रुपये था, जो कि बुधवार को करीब 832 रुपये की उछाल के साथ 1,43,173 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई.     क्या US-Iran टेंशन का है असर?  सोना-चांदी की कीमतों में इस साल आए तगड़े उछाल के पीछे के कारणों की बात करें, तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी टेंशन का भी अहम रोल माना जा सकता है. आमतौर पर ग्लोबल टेंशन बढ़ने के निवेशक सेफ हैवेन के तौर पर Gold-Silver की ओर भागते हुए नजर आते हैं और फिलहाल भी ऐसा ही नजर आ रहा है.

मारुति सुजुकी ने IOLके साथ किया करार, पेट्रोल पंप पर मिलेगी अब मारुति कारों की सर्विसिंग सुविधा

नई दिल्ली    जरा सोचिए… आप पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल भरवाने पहुंचते हैं. उसी वक्त कार में कोई तकनीकी खामी सामने आती है. ऐसे में जहां तेल भरवाया जा रहा है  वहीं बगल में आपकी कार की सर्विस भी हो जाए. न लाइन की टेंशन, न वर्कशॉप खोजने की भागदौड़. आम आदमी के इसी जरूरत को देखते हुए मारुति सुजुकी ने ऐसा कदम उठाया है, जो गाड़ी मालिकों की रोजमर्रा की परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है. अब सर्विस सेंटर खोजने की भी जरूरत नहीं होगी आपकी कार सीधे पेट्रोल पंप पर ही सर्विस हो जाएगी. जी हां, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अपने ग्राहकों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. कंपनी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत अब चुनिंदा इंडियन ऑयल पेट्रोल पंपों पर ही मारुति कारों की सर्विसिंग की सुविधा उपलब्ध होगी. इस पहल का मकसद कार सर्विसिंग को आसान, तेज और हर जगह सुलभ बनाना है, खासकर उन इलाकों में जहां अधिकृत वर्कशॉप कम हैं. मारुति सुजुकी और इंडियन ऑयल के बीच हुए समझौता के तहत देशभर के चुनिंदा इंडियन ऑयल आउटलेट्स पर मारुति सुजुकी के सर्विस प्वाइंट्स बनाए जाएंगे. यहां ग्राहकों को रेगुलर मेंटेनेंस, छोटे-मोटे रिपेयर और जरूरत पड़ने पर बड़ी सर्विसिंग की सुविधा भी मिलेगी. इससे कार मालिकों को अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की भी बचत होगी. यह नया कदम मारुति सुजुकी के पहले से मजबूत आफ्टर-सेल्स नेटवर्क को और बेहतर बनाएगा. फिलहाल कंपनी के पास देशभर में 2,882 शहरों में 5,780 से ज्यादा सर्विस टचप्वाइंट्स हैं. पेट्रोल पंपों पर सर्विस शुरू होने से यह नेटवर्क और भी ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचेगा. क्या कहती है कंपनी? मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सर्विस राम सुरेश अकेला ने कहा कि, "कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों के लिए कार सर्विसिंग को जितना हो सके उतना आसान बनाना है. इंडियन ऑयल जैसी भरोसेमंद कंपनी के साथ साझेदारी से उन जगहों तक सर्विस पहुंचाई जा सकेगी, जहां ग्राहक रोजाना आते-जाते हैं. यह कदम मोबिलिटी और एनर्जी सेक्टर को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम है." वहीं इंडियन ऑयल के मार्केटिंग डायरेक्टर सौमित्र पी. श्रीवास्तव ने कहा कि, "कंपनी अपने पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वैल्यू एडेड सर्विस पर लगातार काम कर रही है. देशभर में 41,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क के साथ इंडियन ऑयल जरूरी सेवाओं को ग्राहकों के और करीब लाने पर काम कर रही है. मारुति सुजुकी के साथ यह साझेदारी इसी सोच का हिस्सा है." इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब ग्राहकों को फ्यूल भरवाने और कार सर्विस कराने के लिए अलग-अलग जगह नहीं जाना पड़ेगा. एक ही लोकेशन पर दोनों काम हो जाने से समय और मेहनत दोनों बचेंगे. खासकर छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कार मालिकों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है. 

ट्रंप का 500% टैरिफ अगर लागू हुआ, तो अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, भारत पर क्या असर पड़ेगा?

नई दिल्ली  डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो रूस से तेल खरीदते हैं. पहली नजर में यह फैसला दूसरे देशों को दबाव में लाने जैसा लगता है, लेकिन व्यापार आंकड़े बताते हैं कि इसका बोझ अमेरिकी ग्राहकों पर ज्यादा पड़ सकता है. अमेरिका कई रोजमर्रा के सामान के लिए भारत जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में अगर अचानक भारी शुल्क लगा दिया गया, तो वहां के बाजार में सस्ते विकल्प मिलना आसान नहीं होगा. सितंबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने अमेरिका को ऐसे उत्पादों की आपूर्ति की, जिनकी कीमत 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी. यह उस महीने अमेरिका को किए गए भारत के कुल निर्यात का लगभग 6 प्रतिशत था. कई श्रेणियों में भारत की पकड़ इतनी मजबूत है कि हाई टैरिफ लगने पर कंपनियां तुरंत किसी दूसरे देश से समान गुणवत्ता और मात्रा में सामान नहीं मंगा पाएंगी. इसका सीधा असर अमेरिकी दुकानों में कीमत बढ़ने के रूप में दिख सकता है. घरेलू वस्त्र इसका बड़ा उदाहरण हैं. बिना छपी सूती बेडशीट के मामले में सितंबर में अमेरिका के कुल आयात का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भारत से आया, जिसकी कीमत करीब 66.9 मिलियन डॉलर थी. टेबल लिनन में तो भारत की हिस्सेदारी और भी ज्यादा, लगभग 81.5 प्रतिशत रही. पैकेजिंग सामग्री में इस्तेमाल होने वाले फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर में भी भारत ने करीब 69 प्रतिशत सप्लाई की. इतनी मजबूत हिस्सेदारी के कारण अमेरिका के लिए अचानक सप्लायर बदलना आसान नहीं होगा. तो रूस से यूरेनियम पर बात कौन करेगा? इस पूरे मसले में राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम है. पिछले हफ्ते अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप ने एक ऐसे बिल को हरी झंडी दी है, जिसमें रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर सख्त दंडात्मक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है. इस बिल के तहत ऐसे देशों से आने वाले सभी सामान और सेवाओं पर शुल्क काफी बढ़ाया जाएगा, ताकि उन्हें रूस से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया जा सके. विडंबना यह है कि खुद अमेरिका, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे बड़े देश भी 2024 में रूस से यूरेनियम के बड़े आयातक रहे हैं. इससे यह साफ होता है कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार नेटवर्क कितने जटिल और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. सिर्फ नियम बनाकर इन रिश्तों को तुरंत बदल देना आसान नहीं है. कपड़े और पैकेजिंग में भारत का लगभग एकाधिकार कपड़ा और पैकेजिंग के अलावा कुछ खास उत्पादों में तो भारत की स्थिति लगभग एकाधिकार जैसी है. सितंबर में अरंडी के तेल के आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 99 प्रतिशत थी. कुछ विशेष रसायनों और औद्योगिक इनपुट में भी भारत की पकड़ मजबूत बनी हुई है, जबकि अगस्त में अमेरिका ने इनमें से कुछ वस्तुओं पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था. खाद्य उत्पादों में भी भारत की भूमिका अहम है. तैयार या संरक्षित खीरे और घेरकिन्स के मामले में सितंबर में अमेरिका के आधे से ज्यादा आयात भारत से आए. एयरटाइट पैकिंग में आने वाले झींगे जैसे समुद्री उत्पादों में भी भारत की हिस्सेदारी लगभग 56 प्रतिशत रही. ऐसे उत्पादों की सप्लाई चेन पहले से सीमित देशों पर निर्भर होती है, इसलिए जल्दी बदलाव करना मुश्किल होता है. भारत के लिए कितना डर? हालांकि आंकड़े भारत के लिए चेतावनी भी देते हैं. हर क्षेत्र में भारत की पकड़ समान नहीं रही है और कुछ जगहों पर हिस्सेदारी घटती दिख रही है. विग बनाने में इस्तेमाल होने वाले बालों के उत्पादों में सितंबर में भारत की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत रही, जबकि साल के पहले सात महीनों में यह लगभग 76 प्रतिशत थी. इसी तरह सिंथेटिक या पुनर्निर्मित हीरों में भी सितंबर की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत रही, जो पहले लगभग 93 प्रतिशत तक थी. कुछ बड़े क्षेत्रों में गिरावट और तेज रही. हीरों के आयात में भारत की हिस्सेदारी सितंबर में घटकर करीब 22 प्रतिशत रह गई, जबकि पहले सात महीनों में यह लगभग 51 प्रतिशत थी. ग्रेनाइट में यह हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत से गिरकर 9 प्रतिशत तक आ गया. कुछ पत्थर से जुड़े उत्पादों में भी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से घटकर करीब 31 प्रतिशत रह गई. इससे संकेत मिलता है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत को अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए सतर्क रहना होगा.

हवाई सफर हुआ आसान: इंडिगो ने लॉन्च किया ₹1499 का टिकट ऑफर, 16 जनवरी तक करें बुकिंग

नई दिल्ली इंडिगो एयरलाइंस ने नए साल की शुरुआत में यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए ‘सेल इंटू 2026’ नाम से न्यू ईयर सेल लॉन्च की है। यह ऑफर 13 जनवरी से 16 जनवरी तक टिकट बुकिंग के लिए खुला रहेगा। इस सेल के तहत यात्री 20 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 के बीच यात्रा कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह ऑफर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह की चुनिंदा उड़ानों पर लागू होगा।   कितनी है टिकट की कीमत इंडिगो की इस सेल में घरेलू उड़ानों के एकतरफा टिकट ₹1,499 से शुरू हो रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर किराया ₹4,499 से मिल रहा है। प्रीमियम सुविधा वाले IndiGoStretch टिकट कुछ घरेलू रूट्स पर ₹9,999 से उपलब्ध हैं। इसके अलावा, दो साल तक के बच्चों के लिए घरेलू उड़ानों में सिर्फ ₹1 में टिकट दिया जा रहा है, बशर्ते बुकिंग इंडिगो के डायरेक्ट प्लेटफॉर्म से की जाए। क्या है छूट एयरलाइन ने यात्रियों के लिए अतिरिक्त सेवाओं पर भी भारी छूट दी है। 6E ऐड-ऑन पर 70% तक की छूट, प्रीपेड एक्स्ट्रा बैगेज पर 50% तक की छूट और स्टैंडर्ड सीट सिलेक्शन पर 15% तक की छूट दी जा रही है। वहीं, ज्यादा लेगरूम चाहने वाले यात्रियों के लिए इमरजेंसी XL सीटें ₹500 से चुनिंदा घरेलू रूट्स पर उपलब्ध होंगी। यह ऑफर कम से कम 7 दिन पहले की गई बुकिंग पर मान्य होगा और सभी बुकिंग चैनल्स पर लागू रहेगा। यात्री इंडिगो की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, 6ESkai AI असिस्टेंट, व्हाट्सऐप और ट्रैवल पार्टनर प्लेटफॉर्म्स के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं। कम बजट में हवाई सफर की योजना बना रहे लोगों के लिए यह सेल एक शानदार मौका मानी जा रही है।

टाटा पंच फेसलिफ्ट का हुआ लॉन्च, 11 सेकेंड में 0 से 100 किमी की स्पीड हासिल करेगी

नई दिल्‍ली. टाटा मोटर्स ने आज 13 जनवरी को भारत में नई टाटा पंच फेसलिफ्ट को आधिकारिक तौर पर लॉन्‍च कर दिया है. नई टाटा पंच की कीमत ₹5.59 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. इसके साथ ही कंपनी ने भारत की पहली iCNG AMT SUV भी पेश की है. अपडेटेड टाटा पंच फेसलिफ्ट 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार सिर्फ 11.1 सेकंड में पकड़ लेती है. नई पंच में इंटीरियर के लिहाज से भी बड़े बदलाव किए गए हैं. अब इसमें फ्री-स्टैंडिंग 10.25-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और इल्यूमिनेटेड एलिमेंट्स के साथ नया दो-स्पोक स्टीयरिंग व्हील दिया गया है. टच-बेस्ड AC कंट्रोल्स को स्क्रीन के नीचे लगाया गया है, जिससे केबिन को पहले से ज्यादा आधुनिक और प्रीमियम लुक मिलता है. अपने नए लुक, टर्बो इंजन और एडवांस फीचर्स के साथ, 2026 टाटा पंच एक बार फिर से सेल्स चार्ट में टॉप पर रहने के लिए तैयार है. बाजार में इसका मुकाबला मुख्य रूप से Hyundai Exter से होगा. इसके अलावा यह निसान मैग्नाइट, रेनो काइगर और मारुति सुजुकी इग्निस जैसी कारों को भी कड़ी टक्कर देगी. नया एक्सटीरियर: शार्प और मॉडर्न लुक 2026 टाटा पंच फेसलिफ्ट के बाहरी डिजाइन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जो इसे सफारी और हैरियर जैसी बड़ी टाटा एसयूवी के करीब ले जाते हैं. इसके सिग्नेचर बॉक्सी शेप को बरकरार रखते हुए फ्रंट फेसिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है. बाहर जो बदलाव हुए हैं उनमें शामिल हैं-     फ्रंट लुक: अब इसमें बेहद पतले और स्लीक LED DRLs दिए गए हैं जो ऊपर की तरफ स्थित हैं. मुख्य हेडलाइट यूनिट अब नीचे बंपर में शिफ्ट कर दी गई है और इसमें नए LED लैंप्स का इस्तेमाल किया गया है.     साइड और रियर: कार के साइड प्रोफाइल में नए डिजाइन वाले 16-इंच के डायमंड-कट अलॉय व्हील्स मिलते हैं. पीछे की तरफ सबसे बड़ा बदलाव इसकी टेललाइट्स में है, जहाँ अब कनेक्टेड LED टेललैंप्स का सेटअप देखने को मिलेगा, जो रात के समय इसे एक प्रीमियम अहसास देता है. रिफ्रेश्ड इंटीरियर टाटा ने नई पंच के केबिन को अधिक आधुनिक और आरामदायक बनाया है. डैशबोर्ड की बनावट को नया रूप दिया गया है और इसमें सॉफ्ट-टच मटेरियल्स का यूज किया गया है. सबसे बड़ा बदलाव इसका दो-स्पोक वाला नया स्टीयरिंग व्हील है. टाटा की नई कारों की तरह, इस पर भी एक ग्लॉस ब्लैक फिनिश है जिसके बीच में टाटा का ‘इल्यूमिनेटेड’ लोगो दिया गया है. सीटों के लिए कंपनी ने ‘ग्रे और ब्लू’ का नया ड्यूल-टोन कॉम्बिनेशन चुना है, जो केबिन को अधिक हवादार और फ्रेश दिखाता है. साथ ही, अब AC कंट्रोल यूनिट को टच-बेस्ड इंटरफेस में बदल दिया गया है, जो कार के अंदर लग्जरी का अहसास कराता है. फीचर्स से फुली लोडेड है पंच 2026 टाटा पंच हमेशा से एक सुरक्षित कार रही है, लेकिन अब यह फीचर्स के मामले में भी अपने सेगमेंट में सबसे आगे निकलने की कोशिश कर रही है. 2026 मॉडल में कई ‘फर्स्ट-इन-सेगमेंट’ फीचर्स जोड़े गए हैं:-     इंफोटेनमेंट: इसमें नया 10.25-इंच का बड़ा टचस्क्रीन दिया गया है, जो वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को सपोर्ट करता है.     ड्राइवर डिस्प्ले: ड्राइवर के लिए 7-इंच का पूरी तरह से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है.     360-डिग्री कैमरा: तंग जगहों पर पार्किंग को आसान बनाने के लिए अब इसमें 360-डिग्री कैमरा सिस्टम भी शामिल है.     अन्य सुविधाएं: इसमें वॉयस-असिस्टेड सनरूफ, वायरलेस फोन चार्जिंग, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और रेन-सेंसिंग वाइपर्स जैसे फीचर्स टॉप वेरिएंट्स में उपलब्ध होंगे. टाटा पंच इंजन और परफॉर्मेंस 2026 टाटा पंच की सबसे बड़ी खबर इसका नया इंजन विकल्प है. टाटा मोटर्स ने अब इसमें 1.2-लीटर का टर्बो-पेट्रोल इंजन शामिल करने का फैसला किया है. यह उन ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प होगा जो माइक्रो SUV में अधिक पावर और बेहतर ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं. इसके अलावा, पुराना और भरोसेमंद 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन भी उपलब्ध रहेगा, जो मैनुअल और AMT गियरबॉक्स विकल्पों के साथ आएगा. सभी वैरिएंट में मिलेंगे 6 एयरबैग टाटा पंच अपनी 5-स्टार सुरक्षा रेटिंग के लिए जानी जाती है. 2026 फेसलिफ्ट में सुरक्षा को और पुख्ता करते हुए अब 6 एयरबैग्स को स्टैंडर्ड (सभी वेरिएंट्स में) कर दिया गया है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), ABS के साथ EBD, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और रियर पार्किंग कैमरा जैसे फीचर्स इसे अपने सेगमेंट की सबसे सुरक्षित कारों में से एक बनाए रखते हैं.  

चांदी की कीमत ₹20,000 बढ़ी, ₹2.63 लाख/kg हुई; सोना ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम, दोनों की कीमतें ऑल टाइम हाई पर

मुंबई  देश में सोने और चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। 13 जनवरी को लगातार दूसरे दिन दोनों कीमती धातुएं ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार चांदी और सोने में आई इस तेजी ने न सिर्फ निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि आम खरीदारों की चिंता भी बढ़ा दी है। वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की कमजोरी और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जा रहा है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड IBJA के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 6,566 रुपए बढ़कर 2,62,742 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। इससे पहले सोमवार को चांदी ने 2,57,283 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था। यानी सिर्फ दो दिनों में चांदी करीब 20 हजार रुपए महंगी हो चुकी है। सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में बढ़ती मांग ने चांदी को इंडस्ट्रियल मेटल के रूप में और मजबूत बना दिया है। दो दिन में चांदी करीब 20 हजार रुपए महंगी हो चुकी है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 33 रुपए बढ़कर 1,40,482 रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। कल ये 1,40,449 रुपए प्रति 10 ग्राम था। सोना भी ऑल टाइम हाई पर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 33 रुपए बढ़कर 1,40,482 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। सोमवार को यह 1,40,449 रुपए प्रति 10 ग्राम था। निवेशकों के लिए सोना अब भी सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं रेट IBJA द्वारा जारी कीमतों में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के दाम अलग नजर आते हैं। IBJA के रेट्स का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंकों द्वारा गोल्ड लोन के रेट तय करने में किया जाता है। 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी पूरे 2025 की बात करें तो सोने की कीमत में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2024 को जहां सोना 76,162 रुपए प्रति 10 ग्राम था, वहीं 31 दिसंबर 2025 को यह 1,33,195 रुपए पहुंच गया। चांदी में और भी बड़ी छलांग देखने को मिली है। एक साल में इसका भाव 167 प्रतिशत बढ़कर 86,017 रुपए से 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गया। आगे भी जारी रह सकती है तेजी केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, चांदी की मजबूत डिमांड आगे भी बनी रहने की संभावना है और इस साल यह 2.75 लाख रुपए प्रति किलो तक जा सकती है। वहीं सोना भी साल के अंत तक 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाले महीनों की चाल पर टिकी हुई है। अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग क्यों होते हैं? IBJA की सोने की कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज, ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होता। इसलिए शहरों के रेट्स इससे अलग होते हैं। इन रेट्स का इस्तेमाल RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए करता है। कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं। 2025 में सोना 75% और चांदी 167% महंगी हुई     पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत 57,033 रुपए (75%) बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपए हो गया।     चांदी का भाव भी इस दौरान 1,44,403 रुपए (167%) बढ़ा। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो इस साल के आखिरी दिन 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गई। गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण     डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।     जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।     रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण     इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।     ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।     मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल 2.75 लाख तक जा सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें तो इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में इस साल आखिर तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके     मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।     आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी।     स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है।     क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।

Royal Enfield Goan Classic 350 का अपडेटेड वर्शन लॉन्च, स्लिप एंड असिस्ट क्लच का शामिल किया गया नया फीचर

नई दिल्ली  दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Royal Enfield ने अपनी Goan Classic 350 के लिए एक छोटा सा अपडेट जारी किया है, जिसमें स्लिप-एंड-असिस्ट क्लच और एक फास्ट USB टाइप-C चार्जिंग पोर्ट शामिल किया गया है. इस अपडेट के साथ, अब इसके शेक ब्लैक और पर्पल हेज़ कलर ऑप्शन की कीमतें 2.20 लाख रुपये से शुरू होती हैं, जबकि ट्रिप टील ग्रीन और रेव रेड वेरिएंट की कीमत 2.23 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो गई हैं. यह पहले की कीमतों के मुकाबले लगभग 2,000 रुपये की बढ़ोतरी को दिखाता है. Royal Enfield Goan Classic 350 का इंजन Goan की Classic 350, Royal Enfield की 350 cc लाइनअप में स्लिप-एंड-असिस्ट क्लच पाने वाला लेटेस्ट मॉडल बन गया है, क्योंकि कंपनी इस फीचर को ज़्यादा से ज़्यादा मॉडल्स में दे रही है. फिलहाल, इस लिस्ट में Classic 350 और Bullet 350 ही एकमात्र 350cc मॉडल हैं, जिनमें स्लिप और असिस्ट क्लच नहीं है. इंजन की बात करें तो इन बदलावों के अलावा इस मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें वही 349 cc, सिंगल-सिलेंडर J-सीरीज़ इंजन इस्तेमाल किया गया है. यह इंजन 20.2 bhp की पावर और 27 Nm का टॉर्क प्रदान करता है. इस इंजन के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स जोड़ा गया है. USB टाइप-C चार्जिंग पोर्ट का जोड़ा जाना भी एक ऐसा ही अपडेट है जो अपडेटेड हंटर 350 में पेश किया गया था. Goan Classic 350 में टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क और रियर मोनोशॉक लगाया गया है. ब्रेकिंग के लिए इसमें 300 mm फ्रंट डिस्क और 270 mm रियर डिस्क के साथ डुअल-चैनल ABS दिया गया है. यह मोटरसाइकिल 19-इंच के फ्रंट व्हील और 16-इंच के रियर व्हील पर चलती है.

ट्रंप के ऐलान के बाद शेयर बाजार में तूफानी उतार-चढ़ाव, तेजी के बाद आई गिरावट

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) ने सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को तूफानी तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की थी, लेकिन अचानक ये तेजी बड़ी गिरावट में तब्दील हो गई. ट्रंप की नई टैरिफ धमकी का सीधा असर भारतीय बाजार (Trump Tariff Warning Impact) पर देखने को मिला है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने का ऐलान किया है और ये धमकी तमाम देशों की टेंशन बढ़ाने वाली है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) खुलने के बाद करीब 300 अंक अछला था, फिर झटके में 250 अंक से ज्यादा टूट गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (Nifty) का भी ऐसा ही हाल नजर आया.  अचानक सेंसेक्स-निफ्टी की बदली चाल शेयर मार्केट में कारोबार के शुरुआत की बात करें, तो बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,878.17 की तुलना में तेजी लेकर 84,000 के स्तर के पार ओपन हुआ था और फिर 84,258 तक उछला था. फिर अचानक ही इसकी तेज रफ्तार पर ब्रेक लग गया और BSE Sensex 250 अंक से ज्यादा टूटकर 83,616 के लेवल पर आ गया.  बात एनएसई के निफ्टी इंडेक्स की करें, तो इसकी भी चाल सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 25,790 की तुलना में उछलकर 25,897 पर खुला और फिर फिसलकर 25,709 तक आ गया.  ट्रंप की ऐलान से भारत को क्या डर?  बता दें कि Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ऐलान किया कि अमेरिका, ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा, जिससे ईरान और उसके कारोबारी साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा. ट्रंप ने साफ किया कि जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार कर रहा है, उसे अमेरिका के साथ सभी व्यापार पर तत्काल प्रभाव से 25 फीसदी टैरिफ देना होगा और ये आदेश फाइनल है. भारत के लिहाज से देखें, तो अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरानी तेल का आयात 2019 से ही बंद कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद कई अन्य चीजों का आयात-निर्यात (India Export-Import With Iran) किया जाता है. ईरान में जहां भारत से चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, इलेक्ट्रिक मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहुंचती है, तो वहीं जबकि ईरान से भारत में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन के साथ ही कांच के बर्तन आते हैं. अब ऐसे में अगर सभी कारोबार करने वाले देशों पर Trump 25% Tariff लगाते हैं, तो फिर भारत पर पहले से लागू 50% टैरिफ के बढ़कर 75% होने की संभावना बनती है. यही डर शेयर बाजार पर देखने को मिला है.  ये 10 बड़े शेयर बिखरे शेयर बाजार में तूफानी तेजी के बाद अचानक आई गिरावट के चलते जिन शेयरों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है. उनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल LT Share (2.30%), HCL Tech Share (2.10%), Bharti Airtel Share (1.50%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल  Glenmark Share (3.10%), Dixon Tech Share (2.20%), Godrej Properties Share (2.05%) और AU Bank Share (2%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैप कैटेगरी में Lotus Chocolate Share (8%), Jubilant Agri Share (5.50%) और NEC Life Share (5%) गिरकर ट्रेड कर रहे थे.