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Maruti Hybrid Cars 2026: दमदार इंजन और शानदार माइलेज के साथ लॉन्च होने वाली 4 नई कारें

नई दिल्ली  मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने जा रही है। कंपनी 2026 तक चार नई हाइब्रिड कारें लॉन्च करेगी। Victoris, Fronx Hybrid, नई Baleno और Suzuki Spacia बेस्ड MPV इसमें शामिल हैं। आइए जानते हैं इन कारों के माइलेज, फीचर्स और लॉन्च डिटेल्स। मारुति का बड़ा दांव– हाइब्रिड कारों की एंट्री भारत में तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल बाजार में अब इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए मारुति सुजुकी आने वाले वर्षों में ग्रीन मोबिलिटी पर जोर दे रही है। कंपनी 2026 तक चार नई हाइब्रिड कारें लॉन्च करने वाली है। इनमें Victoris, Fronx Hybrid, नई Baleno और Suzuki Spacia प्लेटफॉर्म पर आधारित एक मिनी MPV शामिल है। Victoris 1.5 लीटर माइल्ड हाइब्रिड पेट्रोल इंजन (103bhp) 1.5 लीटर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन (116bhp) 1.5 लीटर पेट्रोल + CNG इंजन (89bhp) कंपनी का दावा है कि Victoris का स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट 28.65 kmpl तक का माइलेज देगा। अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह SUV भारत की सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली कार बन जाएगी। Fronx Hybrid मारुति अपनी इन-हाउस हाइब्रिड टेक्नोलॉजी HEV (Hybrid Electric Vehicle) पर काम कर रही है। यह एक सीरीज हाइब्रिड सिस्टम होगा, जिसमें पेट्रोल इंजन, इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का उपयोग होगा। इसकी खासियत होगी कि यह बेहद किफायती होगा और 35 kmpl से ज्यादा का माइलेज देगा। इस सिस्टम को सबसे पहले 2026 में आने वाली Fronx Hybrid में इस्तेमाल किया जाएगा। बाहर की ओर ‘Hybrid’ बैज और अंदर खास सॉफ्टवेयर देखने को मिलेंगे। हालांकि डिजाइन और इंटीरियर में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन माइलेज और ड्राइविंग अनुभव में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। Baleno Hybrid  मारुति की नेक्स्ट-जेन Baleno भी हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ आएगी। इसमें नया स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन, बेहतर स्टाइलिंग और फीचर-लोडेड इंटीरियर दिया जाएगा। इसका डिजाइन मौजूदा Baleno से ज्यादा प्रीमियम और मॉडर्न होगा। हाइब्रिड इंजन की वजह से ग्राहकों को बेहतर परफॉर्मेंस और माइलेज दोनों मिलेंगे। Suzuki Spacia मारुति अपनी नई सब-4 मीटर MPV को जापान-स्पेक Suzuki Spacia के प्लेटफॉर्म पर तैयार करेगी। यह कार सीधे तौर पर Renault Triber और Nissan की आने वाली सब-कॉम्पैक्ट MPV से टक्कर लेगी। इसमें हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ ज्यादा स्पेस और प्रैक्टिकल फीचर्स मिलेंगे, जिससे यह फैमिली कार सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनेगी। मारुति का भविष्य का हाइब्रिड रोडमैप 2027 में आने वाली नई Swift में यह हाइब्रिड सिस्टम मिलेगा। 2029 में लॉन्च होने वाली नई Brezza में भी यही टेक्नोलॉजी दी जाएगी। क्यों खास है मारुति की नई हाइब्रिड टेक्नोलॉजी? पेट्रोल और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन, जिससे फ्यूल की बचत होगी। 35 kmpl से ज्यादा माइलेज देने की क्षमता। कम उत्सर्जन, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान। किफायती और मिडिल क्लास ग्राहकों के लिए उपयुक्त विकल्प।

अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति 2025 के लिए आवेदन शुरू, इस बार 2.5 लाख छात्राओं को मिलेगा लाभ

वर्ष 2024-25 कुल 25000 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी जिसमे मध्यप्रदेश की 18,000 से अधिक छात्राएं लाभान्वित हुई । छात्रवृत्ति के पहले वर्ष की धनराशी को इन छात्राओ के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है भोपाल  अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति पायलट के तौर पर शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड के कुछ चुनिन्दा जिलों में लॉन्च किया गया था । इस पायलट कार्यक्रम में 25,000 से अधिक छात्राओ को यह  छात्रवृत्ति दी गई है  मध्य प्रदेश में 18,000 से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई जिसमे से भोपाल जिले की लगभग 295 छात्राएं लाभान्वित हुई | अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओ को वित्तीय सहायता प्रदान करना है एवं यह सुनिश्चित करना है की धन की कमी से कोई  भी छात्रा अपनी पढ़ाई न छोड़े | अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का अनुमान है कि वह शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख छात्राओ को अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही होगी । यह कार्यक्रम इस साल से देश के 18 राज्यों में शुरू किया जा रहा है   इस वर्ष छात्रवृत्ति हेतु आवेदन 10 सितंबर से प्रारंभ हो रहे है | प्रथम चरण में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर है ।  अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित अज़ीम प्रेमजी छात्रवृत्ति के बारे में मुख्य बातें: • पात्रता: o ऐसी छात्रायें जिन्होने सरकारी (पब्लिक) स्कूलों से कक्षा 10वी और 12वी की पढ़ाई की हो। o किसी प्रामाणिक उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) में डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम में प्रवेश लिया हो। ‘प्रामाणिक’ HEI की सूची में सभी सरकारी (पब्लिक) HEI और चुनिंदा निजी HEI भी शामिल होंगे। उपरोक्त पात्रता  रखने वाली कोई भी छात्रा  इस छात्रवृति  हेतु  ऑनलाइन आवेदन कर सकती है  आवेदन पूर्णतः निःशुल्क है   • छात्रवृत्ति: डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम की अवधि के लिए प्रति वर्ष 30,000 रुपये, जब तक छात्रा सफलतापूर्वक कार्यक्रम में जारी रहती है । उदाहरण के लिए, 4 वर्षीय बीएससी नर्सिंग प्रोग्राम करने वाली छात्राओं को उन 4 वर्षों में 1,20,000( एक लाख बीस हजार) रुपये की छात्रवृत्ति सहायता मिलेगी । यह धनराशि हर साल दो किश्तों में छात्राओ के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी । वह अपनी जरूरत के हिसाब से इस धनराशि का उपयोग कर सकती है । । अठारह राज्यों की सूची इस प्रकार है: अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड । कार्यक्रम का विवरण और कार्यक्रम के डिजाइन या कवरेज में कोई भी बदलाव आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत में अधिसूचित किया जाएगा । आने वाले वर्षों में ये संभावना है की छात्रवृत्ति कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो को शामिल किया जाएगा  

आईटीआर फाइलिंग की घड़ी: फॉर्म में दिक्कतों के बीच अब मांग हुई जल्द समाधान की

नई दिल्ली  आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2025, अब केवल एक हफ्ते दूर है। इस बीच कई संगठनों ने वित्त मंत्रालय से आईटीआर रिटर्न दाखिल करने की तारीख बढ़ाने की अपील की है। कारण है देरी से फॉर्म जारी किया जाना और फिर इसके बाद रिटर्न फाइल होने होने में बार-बार आ रही परेशानी। 2 सितंबर, 2025 को भीलवाड़ा स्थित टैक्स बार एसोसिएशन ने भी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को पत्र लिखकर समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। टैक्स बार एसोसिएशन में कर विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिव, अधिवक्ता और सलाहकार शामिल हैं। संगठन ने अपने पत्र में बताया कि कैसे करदाता और पेशेवर इस वर्ष यूटीलिटीज के देरी से जारी होने, आईटीआर पोर्टल पर चल रही तकनीकी समस्याओं और अतिरिक्त अनुपालन चरणों के कारण रिटर्न दाखिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टैक्स बार एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी जाए क्योंकि अब रिटर्न सही ढंग से तैयार करने और दाखिल करने के लिए कम समय बचा है। दूसरी ओर, तकनीकी दिक्कतों के कारण भी लोगों को परेशानी हो रही है।  आटीआर दाखिल करने में यूजर्स को किस-किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं, विस्तार से। 1. यूटिलिटी फॉर्म्स जारी होने में देरी चंडीगढ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स टैक्सेशन एसोसिएशन (सीसीएटीएक्स) और गुजरात चैंबर कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) ने भी ऐसी ही चिंता जताई है और समय सीमा को आगे बढ़ाने की मांग की है। आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2025 थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दिया गया। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि आम तौर पर करदाताओं के पास अपना रिटर्न तैयार करने और दाखिल करने के लिए लगभग 122 दिन (1 अप्रैल से 31 जुलाई) का समय होता है। लेकिन इस साल, यूटीलिटी फॉर्म्स काफी देर से जारी किए गए, इससे रिटर्न दाखिल करने के समय में कमी आ गई है। दूसरी ओर, आईटीआर दाखिल करने में भी यूजर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को तकनीकी दिक्कतों के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसे देखते हुए इसकी समयसीमा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।  2. आयकर रिटर्न दाखिल करने में आ रही तकनीकी दिक्कत  बार एसोसिएशन ने आईटीआर पोर्टल पर आ रही तकनीकी समस्याओं की भी शिकायत की है। उनके अनुसार रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करते समय सिस्टम में बार-बार त्रुटियां आ रही हैं।  फॉर्म 26AS, AIS और TIS में देरी से अपडेट होने के कारण विसंगतियां दिख रही है, जिससे मिलान में अत्यधिक समय लगता है। फाइलिंग के व्यस्त समय के दौरान टाइमआउट होने के कारण भी लोगों को परेशानी हो रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभम सिंघल के अनुसार, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 (Section 54) करदाताओं को बड़ी राहत प्रदान करती है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF) अपना आवासीय मकान बेचता है और उससे प्राप्त दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long Term Capital Gain) को नए आवासीय मकान में निवेश करता है, तो उसे कर से छूट मिल सकती है। यह छूट तभी मिलेगी जब पुराना मकान कम से कम 24 महीने तक स्वामित्व में रहा हो और नया मकान भारत में ही खरीदा या बनाया जाए। कुछ करदाताओं ने आईटीआर (ITR) भरते समय इसके तहत छूट क्लेम करने के दौरान त्रुटि की शिकायत की है। आम तौर पर यह समझा जाता है कि समस्या CGAS की डिटेल न भरने से आ रही है, जबकि सच यह है कि यह त्रुटि अधिकतर CGAS से जुड़ी नहीं होती। समस्या प्रायः फॉर्म के अंतिम टैब में आती है, जहां करदाता को पुनः यह बताना होता है कि उसने धारा 54 या धारा 54F के अंतर्गत कितनी छूट का दावा किया है। कई लोग केवल शेड्यूल CG (Capital Gains Schedule) में छूट की राशि भरते हैं, लेकिन अंतिम टैब में इसे दोबारा दर्ज करना भूल जाते हैं। परिणामस्वरूप सिस्टम एरर दिखता है। इसका समाधान भी उतना ही आसान है। करदाता को अंतिम टैब में जाकर वही छूट की राशि फिर से भरनी चाहिए, जो उसने शेड्यूल CG में दिखाई है। जैसे ही यह आंकड़ा दोबारा डाला जाता है, त्रुटि दूर हो जाती है और रिटर्न बिना किसी समस्या के सबमिट हो जाता है। 3. आईसीएआई के प्रारुप में बदलाव के कारण अधिक समय की जरूरत वित्त वर्ष 2024-25 से गैर-कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए संशोधित आईसीएआई प्रारूप भीलवाड़ा टैक्स बार एसोसिएशन ने लिखा है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते के लिए एक नया वर्टिकल फॉर्मेट अनिवार्य कर दिया है। तुलनात्मक आंकड़े, संबंधित पक्ष के लेन-देन, आकस्मिक देनदारियों आदि का विस्तृत खुलासा अब अनिवार्य है। इसमें आगे कहा गया है कि संस्थाओं और पेशेवरों को सही तरीके से अपनाने और मिलान के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। ऐसे में आईटीआर दाखिल करने की तिथि बढ़ाने की जरूरत है। 4. त्योहारी सीजन से जुड़ी दिक्कतें आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा के बीच ही देश में त्योहारी सीजन भी शुरू हो चुका है। गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली सहित कई प्रमुख भारतीय त्योहारों भी आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा के बच ही पड़े हैं या पड़ने वाले हैं। इस अवधि के दौरान छुट्टियों और यात्राओं के कारण कार्यालय और फर्म न्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करते हैं, और ग्राहक समन्वय और लेखा परीक्षक समीक्षा बैठकों में देरी होती है। इससे अनुपालन समय-सीमा और भी कम हो जाती है। इससे पेशेवरों पर भारी दबाव पड़ता है। इस लिए भी विभिन्न टैक्स बार एसोसिएशन और चार्टर्ड अकाउंटेंट आईटीआर की समय अवधिक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, समय विस्तार पर अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है। भीलवाड़ा टैक्स बार एसोसिएशन ने तथ्यों और कठिनाइयों देखते हुए आयकर विभाग से आईटीआर की समयसीमा बढ़ाने की अपील की है। आईटीआर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग तेज वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट हरिदास भट ने बताया कि पहले जुलाई से सितंबर तक रिटर्न दाखिल करने तक का समय मिलता था, लेकिन अब इसको घटाकर 15 सितंबर तक कर दिया गया है। जिसकी वजह से रिटर्न दाखिल करने का समय काफी कम हो गया है। वहीं इस साल, यूटीलिटी फॉर्म्स काफी … Read more

शेयर बाजार में उथल-पुथल? ग्लोबल सेंटीमेंट और महंगाई के आंकड़ों से खुला भविष्य

मुंबई  स्थानीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह ग्लोबल सेंटीमेंट, विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों और महंगाई के आंकड़ों से तय होगी। एक्सपर्ट्स ने यह राय जताई है। एक एक्सपर्ट्स ने कहा कि मजबूत घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत सुधारों के समर्थन से पिछले सप्ताह बेंचमार्क सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। क्या है एक्सपर्ट्स की राय? रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, “इस सप्ताह भी घरेलू और वैश्विक स्तर पर काफी आंकड़े आएंगे। घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति का आंकड़ा 12 सितंबर को जारी किया जाएगा।” मिश्रा ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर अमेरिका के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर रहेगी। इनमें उपभोक्ता मुद्रास्फीति, बेरोजगारी के दावे और उपभोक्ता धारणा शामिल हैं, जो फेडरल रिजर्व की नीतिगत अपेक्षाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई भी नई सूचना बाजार की धारणा को और मजबूत कर सकती है। पिछले हफ्ते शेयर बाजार में दिखी थी तेजी पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 314.15 अंक या 1.28 प्रतिशत के लाभ में रहा। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के वरिष्ठ तकनीकी एक्सपर्ट प्रवेश गौड़ ने कहा, “आगे की ओर देखते हुए, भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह सतर्क और आशावादी रुख के साथ शुरुआत कर सकता हैं। निवेशक विशेष रूप से उपभोग-आधारित और पूंजीगत व्यय-आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।” इसी महीने होनी है फेड रिजर्व की मीटिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये-डॉलर का रुख भी इस सप्ताह बाजार का रुख तय करेगा। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, ‘‘यह सप्ताह भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा एक संभावित प्रोत्साहन के रूप में काम कर रही है जो बाजार की धारणा को बेहतर बना सकती है और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी ला सकती है, जिससे निकट भविष्य में शुल्क की नकारात्मक धारणा का मुकाबला किया जा सकता है।’’ शेयर बाजार के लिए अगला बड़ा घटनाक्रम 16-17 सितंबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख-संपदा प्रबंधन सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘इस सप्ताह के प्रमुख वृहद आंकड़ों में भारत और अमेरिका की मुद्रास्फीति, ईसीबी (यूरोपीय केंद्रीय बैंक) का ब्याज दर पर निर्णय और जापान की दूसरी तिमाही की जीडीपी आंकड़े शामिल हैं।’’

शेयर बाजार की जोरदार शुरुआत, GST कट और ट्रंप के सुर बदलने से निवेशकों में उत्साह

मुंबई  मोदी सरकार के जीएसटी रेट कट के ऐलान का अभी भी असर शेयर बाजार पर दिख रहा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाले सेंसेक्स इंडेक्स ने खुलने के साथ ही 200 अंकों की छलांग लगा दी, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुआ. शुरुआती कारोबार में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स के साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, बीईएल जैसे बड़े शेयर तेज रफ्तार के साथ भागते हुए नजर आए. जीएसटी कट के असर के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर बदले रुख का प्रभाव भी बाजार पर साफ देखने को मिला है.  ग्रीन जोन में खुले दोनों इंडेक्स शेयर बाजार की तेज शुरुआत के बीच सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,710.76 के मुकाबले चढ़कर 80.904.40 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ही ये 81,000 के लेवल के पार निकल गया. बीएसई इंडेक्स की तरह ही निफ्टी की भी चाल नजर आई और ये एनएसई इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,741 की तुलना में चढ़कर 24,802.60 पर खुलने के बाद 24,831.35 तक उछला.  ये 10 शेयर ओपन होते ही भागे मार्केट में कारोबार शुरू होने के साथ ही जिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, उनमें टॉप-10 स्टॉक्स की बात करें, तो लार्जकैप में टाटा स्टील शेयर (2.50%), टाटा मोटर्स शेयर (2.35%), महिंद्रा एंड महिंद्रा शेयर (1.95%) और अडानी पोर्ट्स शेयर (1.10%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल फर्स्टक्राई शेयर (3.90%), मान्यवर शेयर (3%), भारतफोर्ज शेयर (2.95%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.90%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में प्राइम फोकस शेयर (10%) और म्यूफिन शेयर (8.10%) चढ़कर कारोबार कर रहा था.  बीते सप्ताह ऐसी थी बाजार की चल  बीता सप्ताह शेयर बाजार के लिए शानदार रहा था. हालांकि दोनों इंडेक्स आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मामूली घट-बढ़ के साथ बंद हुए थे. सेंसेक्स महज 7.25 अंक गिरकर लेकर 80,710.76 पर, जबकि निफ्टी सिर्फ 6.70 अंक की बढ़त लेकर 24,741 पर क्लोज हुआ था. लेकिन, पूरे सप्ताह की चाल देखें, तो बीएसई का सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12% की बढ़त में रहा, वहीं एनएसई का निफ्टी में 314.15 अंक या 1.28% का उछाल दर्ज किया गया था. बाजार में रौनक के चलते निवेशकों ने भी खूब कमाई की थी.  मिल रहे थे तेजी के संकेत  भारत के लिए सोमवार को पहले से ही विदेशों से पॉजिटव सिग्नल मिल रहे थे. जापान, हांगकांग-साउथ कोरिया समेत ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. जापान का निक्केई इंडेक्स 700 अंक से ज्यादा चढ़कर 43,700 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी 35 अंक की बढ़त लेते हुए 25,453.50 के लेवल पर, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेजी पकड़े हुए ग्रीन जोन में नजर आ रहा था और ये तेजी के साथ 3,206.34 पर ट्रेड कर रहा था. गिफ्ट निफ्टी भी 70 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा था.  जीएसटी के साथ ट्रंप के बदले रुख का असर जीएसटी सुधार को लेकर किए गए मोदी सरकार के ऐलानों का असर पहले से ही शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा था, सरकार ने टैक्स स्लैब की संख्या घटाने के साथ ही कई सामानों पर जीएसटी से राहत दी है. जिसके बाद संबंधित कंपनियों के शेयर रॉकेट बने हुए हैं. वहीं अब भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की सॉफ्ट टोन का इम्पैक्ट भी देखने को मिला है. बता दें कि भारत-यूएस के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर बीते कई महीनों से अनबन की खबरों के बाद पिछले शनिवार को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना भड़काऊ रुख छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति दोस्ती का कार्ड चला है. वहीं पीएम मोदी ने भी तुरंत पॉजिटिव रिस्पांस देते हुए और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर विश्वास जताया.

दिवाली पर किसानों की झोली होगी भारी! GST कटौती और PM KISAN 21वीं किस्त की तैयारी

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने GST Rate Cut करके किसानों को ही नहीं पूरे देशवासियों को दिवाली का गिफ्ट नवरात्रि में ही दे दिया। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। रोजमर्रा की जरूरतों का लगभग हर सामान सस्ता हो गया। कुछ वस्तुओं पर तो 0 जीएसटी लगेगा। ये गिफ्ट देश के हर वर्ग के लोग किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के लिए हैं। लेकिन किसानों को दिवाली पर मोदी सरकार एक और तोहफा दे सकती है। ये तोहफा PM KISAN YOJANA की 21वीं किस्त का हो सकता है। पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 2 अगस्त को PM Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20वीं किस्त जारी की थी। अब किसानों को अगली किस्त का इंतजार है। GST Rate Cut के बाद अब दिवाली पर PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि किसानों को दिवाली या दिवाली से पहले 21वीं किस्त का तोहफा मिल सकता है। पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर 2024 में मोदी सरकार ने 18वीं किस्त जारी की थी। इस बार दिवाली 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है।  ऐसे में संभावना यही है कि इस बार भी अक्टूबर में मोदी सरकार PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैंक खाते में आएंगे 2-2 हजार? अगर दिवाली से पहले किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये आते हैं तो यह डबल धमाके जैसे होगा। क्योंकि सरकार ने पहले ही जीएसटी की दरों में कटौती कर दी है। 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से New GST Rates लागू हो रहे हैं। सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त (21st installment of the PM Kisan Samman Nidhi Yojana) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत, पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों में विभाजित होते हैं, सीधे उनके बैंक खातों में।  

अब जेब ढीली करेगी ऑनलाइन फूड डिलीवरी: Zomato और Swiggy ने लगाया नया चार्ज

नई दिल्ली  अगर आप अक्सर Zomato, Swiggy या Magicpin से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। फेस्टिव सीजन से ठीक पहले, इन प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियों ने अपनी 'प्लेटफॉर्म फीस' बढ़ा दी है, जिससे अब ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना पहले से महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, 22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर लगने वाले 18% जीएसटी के बाद यह बोझ और भी बढ़ जाएगा। किस कंपनी ने कितना बढ़ाया चार्ज? Swiggy: स्विगी ने चुनिंदा शहरों में अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 15 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है। Zomato: ज़ोमैटो ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है, जो अब 12.50 रुपये (जीएसटी को छोड़कर) हो गई है। Magicpin: मैजिकपिन, जो इन कंपनियों के बाद सबसे बड़ा फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म है, ने भी अपना शुल्क बढ़ाकर 10 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह इंडस्ट्री के रुझान के अनुरूप है और उनका शुल्क अभी भी सबसे कम है। जीएसटी के बाद बढ़ेगा और बोझ 22 सितंबर से लागू होने वाले डिलीवरी चार्ज पर 18% जीएसटी के कारण ग्राहकों पर और भी बोझ बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए नियम के बाद ज़ोमैटो पर हर ऑर्डर पर करीब 2 रुपये और स्विगी पर करीब 2.6 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लग सकता है। हालांकि, कंपनियों की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए यह प्लेटफॉर्म फीस अब कमाई का एक नया जरिया बन गई है। 

सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: समय खत्म होने से पहले करें यह फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लौटने का अवसर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी और इसके बाद दोबारा UPS में लौटना संभव नहीं होगा। सरकार ने कहा कि पात्र कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी इस विकल्प का इस्तेमाल 30 सितंबर 2025 तक कर सकते हैं। तय समय सीमा के बाद यदि कोई कर्मचारी कदम नहीं उठाता है, तो उसे डिफॉल्ट रूप से UPS के अंतर्गत ही माना जाएगा। बता दें कि यह कदम उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो तय लाभ वाली UPS योजना से हटकर बाजार-आधारित NPS में जाना चाहते हैं। UPS निश्चित पेंशन, DA से जुड़ा महंगाई समायोजन, ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ देता है, जबकि NPS कर्मचारियों को अधिक रिटर्न और निवेश में लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम भी शामिल रहता है। क्या हैं शर्तें बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए UPS से NPS में बदलाव को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह विकल्प केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और कर्मचारी इसके बाद दोबारा (UPS) में वापस नहीं लौट पाएंगे। बदलाव का निर्णय भी समय से पहले लेना होगा। कर्मचारी को यह विकल्प अपनी सेवानिवृत्ति से कम से कम एक वर्ष पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से कम से कम तीन महीने पहले, जो भी पहले हो, चुनना होगा। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों पर हटाए जाने, बर्खास्तगी, दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई चल रही हो, या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। कौन सा विकल्प चुने कर्मचारी वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए पेंशन विकल्पों को लेकर अब स्पष्ट तुलना सामने आ गई है। जानकारों का कहना है कि UPS कर्मचारियों के लिए एक कम जोखिम वाला, सरकारी गारंटी वाला विकल्प है। इसमें पेंशन के साथ ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं। हालांकि, इसकी सीमाएं भी हैं—जैसे कि निवेश में लचीलापन कम होना, एकमुश्त निकासी का हिस्सा छोटा होना और ऊंचे रिटर्न की संभावना अपेक्षाकृत कम रहना। वहीं, नेंशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें निवेश इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में किया जाता है। इससे कर्मचारियों को निवेश आवंटन पर ज्यादा नियंत्रण और बेहतर ग्रोथ की संभावना मिलती है। NPS में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि में से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से अनिवार्य रूप से एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें कर लाभ भी शामिल हैं, जैसे धारा 80C और 80CCD के तहत छूट। लेकिन चूंकि यह बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें जोखिम बना रहता है और UPS की तरह मुद्रास्फीति समायोजन या पारिवारिक पेंशन की सुविधा नहीं मिलती। तुलनात्मक रूप से देखें तो, UPS एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान है, जिसमें पेंशन की गारंटी और DA से जुड़ा महंगाई भत्ता मिलता है। UPS में कर्मचारी को बेसिक वेतन + DA का 10% योगदान करना होता है, जबकि नियोक्ता (सरकार) 18.5% योगदान करती है। दूसरी ओर, NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है, जिसमें कर्मचारी भी 10% योगदान करते हैं लेकिन नियोक्ता का हिस्सा 14% होता है। UPS में पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युइटी उपलब्ध हैं, जबकि NPS में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। इसके बदले NPS अधिक रिटर्न और निवेश की आजादी देता है, लेकिन जोखिम और अनिश्चितता भी साथ लाता है।

जब पीएम मोदी ने निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी पर सलाह दी, पढ़िए क्या हुआ आगे

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बताई है। इसके चलते बेहद सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए पालन का बोझ कम हुआ है, वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि 9 महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।’ उन्होंने कहा, ‘फिर बजट के दौरान जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे याद दिलाया कि आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न। यह एक चीज थी।’ पीएम ने फोन पर क्या कहा सीतारमण ने कहा, ‘दूसरा, मंत्री समूह डेढ़ साल से काम कर रहे थे। मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया कि हम GST के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें। न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था। स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। 1 फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।’ वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘मई के मध्य में मैं प्रधानमंत्री के पास गई। उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिए इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं। फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम की ओर से किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।’ GST को लेकर किस तरह की चर्चा सीतारमण ने कहा, ‘हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच और उससे भी पहले जैसलमेर में वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था। वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम व शर्तों पर काम करना होगा। इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे।’ इसके बाद दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति (जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया) ने मंत्रिसमूह के कार्यों के अलावा, केंद्र की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। निर्मला सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। विलासिता और सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने के तहत टेलीविजन व एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गई हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार लोगों के लिए सुधार है।  

कब और कैसे हुआ GST सुधार का आगाज़? जानें वित्त मंत्री की बारीक बातें

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गयी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बतायी। इसके परिणामस्वरूप सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ कम हुआ है वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही, प्रधानमंत्री ने मुझे फोन करके कहा था,‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि नौ महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर, बजट के दौरान, जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे (प्रधानमंत्री) याद दिलाया कि ‘आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न।' यह एक चीज थी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘दूसरा, मंत्री समूह (जीओएम) डेढ़ साल से काम कर रहे थे और मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि अब समय आ गया है कि हम जीएसटी के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें, न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था… फिर, स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। एक फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘मई के मध्य में… मैं प्रधानमंत्री के पास गयी, उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया…। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिये इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा, क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम द्वारा किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘नियमानुसार, हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच, और उससे भी पहले, जैसलमेर में, वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था और वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी, क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम एवं शर्तों पर काम करना होगा। लेकिन इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए, मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से, यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे…।'' फिर दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया, ने मंत्रिसमूह द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गयी हैं।