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अब बजट में कार लेना हुआ आसान: जीएसटी कम होने के बाद ₹5 लाख से कम की ये पांच गाड़ियां

नई दिल्ली सरकार के हाल ही में लागू किए गए जीएसटी 2.0 रिफॉर्म ने छोटे और आम लोगों के लिए बनी कारों को काफी सस्ता कर दिया है। पहले इन कारों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जिसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका फायदा तुरंत ग्राहकों तक पहुंचाया गया है। अब कई लोकप्रिय हैचबैक और एंट्री-लेवल कारें 5 लाख रुपये से कम कीमत में मिल रही हैं। यह सेगमेंट खासकर पहली बार कार खरीदने वालों, छात्रों और उन परिवारों के लिए फायदेमंद है जो दूसरी गाड़ी लेना चाहते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं, जीएसटी कटौती के बाद कौन-सी 5 कारें 5 लाख रुपये से कम में मिल रही हैं। मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 हमेशा से लोगों की पसंद रही Maruti Suzuki Alto K10 (मारुति सुजुकी ऑल्टो K10) अब और भी किफायती हो गई है। जीएसटी कटौती से पहले इसकी शुरुआती कीमत करीब 3.70 लाख रुपये थी, जो अब और कम हो गई है। यह कॉम्पैक्ट, माइलेज देने वाली और कम मेंटेनेंस वाली कार है, जो पहली बार कार खरीदने वालों और शहर में चलाने के लिए परफेक्ट है। इसमें सिर्फ पेट्रोल और सीएनजी ऑप्शन मिलते हैं। मारुति सुजुकी एस-प्रेसो मिनी एसयूवी के नाम से प्रचारित Maruti Suzuki S-Presso (मारुति सुजुकी एस-प्रेसो) अपनी बोल्ड डिजाइन और ऊंचे स्टांस की वजह से जानी जाती है। जीएसटी की नई दरों के बाद इसकी शुरुआती कीमत करीब 3.50 लाख रुपये रह गई है। अब यह और भी किफायती हो गई है और भारत की सबसे सस्ती नई कारों में शामिल हो गई है। इसकी ऊंची सीटिंग पोजिशन ड्राइवर को आगे का अच्छा व्यू देती है। इसमें पेट्रोल और सीएनजी दोनों ऑप्शन मौजूद हैं। मारुति सुजुकी वैगनआर फैमिली कारों में भरोसेमंद नाम Maruti Suzuki Wagon R (मारुति सुजुकी वैगनआर) अब सिर्फ 5 लाख रुपये एक्स-शोरूम कीमत से शुरू हो रही है। इसका टॉल-बॉय डिजाइन, ज्यादा स्पेस वाला केबिन और मारुति का सर्विस नेटवर्क इसे फैमिली खरीदारों के लिए बेस्ट डील बनाते हैं। इसमें सीएनजी और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स समेत कई ऑप्शन मिलते हैं। टाटा टियागो Tata Tiago (टाटा टियागो) अपनी मजबूत बिल्ड क्वालिटी, सेफ्टी फीचर्स और मॉडर्न डिजाइन के लिए हमेशा तारीफ पाती रही है। अब इसकी शुरुआती कीमत 4.57 लाख रुपये से शुरू होती है। जो लोग बजट में रहते हुए भी स्टाइल और सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए टियागो एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें कई पावरट्रेन और गियरबॉक्स मिलते हैं। खास बात यह है कि यह सीएनजी के साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाला देश का पहला मॉडल है। रेनो क्विड एसयूवी जैसा लुक और बजट-फ्रेंडली कीमत वाली Renault Kwid (रेनो क्विड) अब करीब 4.30 लाख रुपये से शुरू हो रही है। इसके एसयूवी-प्रेरित डिजाइन, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट और आसान ड्राइविंग फीचर्स ने इसे शहरी ग्राहकों की पसंद बना दिया है। इसमें 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल और AMT दोनों ऑप्शन मिलते हैं। 

लेदर सेक्टर को विदेशी एक्सपर्ट्स से मिलेगी आज़ादी, भारत में ही होंगे प्रोफेशनल्स तैयार

कानपुर  देश की लेदर और फुटवियर इंडस्ट्री अब विदेशी स्किलफुल लोगों पर निर्भर नहीं रहेगी. अभी लेदर इंडस्ट्री में स्किलफुल तकनीक और लोगों के लिए विदेश के एक्सपर्ट का रुख करना पड़ता है, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा अब देश में ही स्किलफुल लोग तैयार किया जा सकेंगे, जो लेदर इंडस्ट्री को प्रोफेशनल तरीके से संभाल सकेंगे. एचबीटीयू और लेदर सेक्टर स्किल काउंसिल (एलएसएससी) के बीच हुआ करार उद्योग जगत के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा. इस समझौते से छात्रों को जहां रोजगार और रिसर्च का सीधा अवसर मिलेगा, वहीं इंडस्ट्री को अपनी जरूरतों के हिसाब से तैयार कुशल मैनपावर. इंडस्ट्री के लिए तैयार होंगे स्किलफुल प्रोफेशनल्स एचबीटीयू के कुलपति प्रो. समशेर ने बताया कि लेदर टेक्नोलॉजी से जुड़े बीटेक छात्र अब अपने हुनर और रिसर्च को सीधे इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक ढाल सकेंगे.छात्रों को इस साझेदारी के तहत न केवल रिसर्च और प्रोजेक्ट में सहयोग मिलेगा, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री की असल चुनौतियों को समझने और उनके समाधान निकालने का अवसर भी मिलेगा.इससे रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे और देश की इंडस्ट्री को वही स्किल्ड युवा मिलेंगे, जिनकी कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी. ब्लू कॉलर और व्हाइट कॉलर दोनों तरह का मैनपावर सीएलई के चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने कहा कि इस करार से हमें सिर्फ ब्लू कॉलर वर्कफोर्स ही नहीं बल्कि व्हाइट कॉलर स्किल्ड प्रोफेशनल्स भी मिलेंगे. आज इंडस्ट्री को ऐसे युवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है. मैनपावर की कमी ने लेदर सेक्टर की ग्रोथ को रोक रखा था, लेकिन अब एचबीटीयू जैसे संस्थान के सहयोग से यह बाधा खत्म होगी. रिसर्च और ट्रेनिंग से खुलेगा वैश्विक बाजार एलएसएससी के अधिकारियों के अनुसार, छात्रों को एडवांस टेक्नोलॉजी, प्रोडक्शन प्रोसेस, डिजाइनिंग और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी. स्किल डेवलपमेंट के लिए नए मॉड्यूल तैयार होंगे और इंडस्ट्री इंटर्नशिप के जरिए छात्र सीधे कामकाजी माहौल का अनुभव हासिल करेंगे. इससे वे न सिर्फ देश बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनेंगे. आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि इस करार से भारत की लेदर इंडस्ट्री को विदेशी स्किलफुल लोगों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घरेलू स्तर पर ही ऐसा मैनपावर तैयार होगा, जो न केवल तकनीकी रूप से सक्षम होगा बल्कि रिसर्च और इनोवेशन से भी इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाएगा.

सहारा की 88 संपत्तियां होंगी नीलाम, रिफंड प्रक्रिया को मिलेगी रफ्तार – देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली सहारा ग्रुप (Sahara Group) एक बार फिर चर्चा में है, रिफंड (Refund) को लेकर निवेशकों में एक उम्मीद जगी है. सहारा इंडिया में सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से निवेशक हैं. कुछ लोगों ने अपनी सारी गाढ़ी कमाई सहारा इंडिया में जमा कर दी थी. लेकिन अब सहारा ग्रुप की संपत्तियां बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाने की बात कही जा रही है. दरअसल, Sahara India Commercial Corporation Ltd. (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी लगाई है, जिसमें वह अपनी कुछ प्रमुख अचल संपत्तियों को Adani Properties Pvt. Ltd. को एकमुश्त (Single Block) बेचने की अनुमति मांगी है. रिपोर्ट के मुताबिक सहारा इंडिया ग्रुप की 88 से अधिक संपत्तियां इस सौदे के तहत बेचने की तैयारी चल रही है. यानी इन संपत्तियों को बेचकर, निवेशकों के पैसे लौटाए जाएंगे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं. बता दें, सहारा इंडिया का मामला साल 2012 से चल रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक SEBI-सहारा एस्क्रो अकाउंट में करीब 26.25 हजार करोड़ रुपये जमा है. पिछले दो वर्षों में सुप्रीम कोर्ट (SC) के आदेश पर सेबी ने Sahara निवेशकों को करीब ₹5053 करोड़ लौटा दिए हैं. जिन निवेशकों ने Cooperative Societies of Sahara Group में पैसे जमा किए थे, उन्हें वापस किए गए हैं. बिकने वाली सहारा की ये संपत्तियां: सहारा ग्रुप के पास बड़ी संपत्ति के तौर पर Aamby Valley City है, जो महाराष्ट्र के पुणे में है, ये टाउनशिप लगभग 8,810 एकड़ में फैला हुआ है. सहारा के मुंबई एयरपोर्ट के पास Hotel Sahara Star है, लखनऊ में सहारा शहर और Sahara Ganj Mall है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों कई संपत्तियां फैली हुई हैं. हालांकि कितने में सभी संपत्तियों का सौदा हुआ है, इसका खुलासा नहीं हुआ है. इसपर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी. अगर अदालत संपत्ति सौदे पर अपनी मुहर लगाती है तो फिर सहारा ग्रुप की तमाम संपत्तियों की ब्रिकी का रास्ता साफ हो जाएगा. सहारा ग्रुप का बिजनेस रियल-एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी (होटल), मीडिया-चैनल, फाइनेंस/इंश्योरेंस और रिटेल में फैला हुआ था. सहारा समूह ने उत्तर भारत (UP, Bihar, Jharkhand, Rajasthan) में बड़े-बड़े आवासीय/प्लॉट और कृषि/विकास योग्य जमीन खरीदी थी. वहीं हाल के वर्षों में कई जमीनों को ED समेत तमाम जांच एजेंसियों ने अटैच कर रखा है. सहारा समूह ने न्यूयॉर्क के The Plaza Hotel में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी. बाद में यह संपत्ति साल 2018 में कतरी फंड (Qatar fund) को बेची दी गई. वहीं सहारा ग्रुप (Sahara Group) के पास मौजूद करीब 19 संपत्तियों की लीज़ समीक्षा हो रही है, क्योंकि इनमें से कुछ लीज समाप्त हो चुकी है, कुछ पर कब्जा है, और कुछ को सील कर दिया गया है. लखनऊ स्थित 'सहारा बाजार' की जमीन की कीमत लगभग ₹200 करोड़ आंकी गई है. रिफंड के लिए कहां करें अप्लाई बता दें, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहारा रिफंड पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in) ल़ॉन्च किया था, जिसके माध्यम से निवेशकों के पैसे लौटाए जा रहे हैं. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि करीब 26 लाख निवेशकों को अब तक 5,053 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं. वहीं, 13.34 लाख नए निवेशकों ने भी क्लेम किया है, जिसकी कुल राशि 27,849 करोड़ रुपये बैठती है. अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक करीब 32 लाख और निवेशक अपना दावा दर्ज कर सकते हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को पैसे लौटाने की डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है. इससे लाखों निवेशकों को राहत मिलेगी.

अरबपति बने शाहरुख! हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में एंट्री, मुकेश अंबानी फिर से टॉप पर

मुंबई  भारत अब अरबपतियों का नया हब बनता जा रहा और देश में अमीरों की तादाद में साल-दर-साल जोरदार इजाफा हो रहा है. एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 जारी कर दी गई है और इसके मुताबिक, भारतीय अरबपतियों की संख्या बढ़कर 350 से ज्यादा हो गई है. वहीं सबसे रईसों की रैंकिंग में एक बार फिर मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) का दबदबा दिखा है और इस बार भी वे नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज रहे हैं. खास बात ये है कि बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान पहली बार बिलेनियर्स क्लब में शामिल हुए हैं.  13 साल में छह गुना हुए अरबपति भारत में नए अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और ये इजाफा लगातार जारी है. अब भारत में 350 से ज्यादा अरबपति हो चुके हैं और ये आंकड़ा बीते 13 साल में छह गुना से ज्यादा बढ़ गया है. बता दें कि M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में शामिल किए गए अरबपतियों की कुल संपत्ति 167 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग आधा है. ये हैं देश के टॉप-3 अरबपति हुरुन इंडिया रिच लिस्ट-2025 के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ 9.55 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है और संपत्ति के इस आंकड़े के साथ उन्हें फिर से भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब हासिल हुआ है. वहीं दौलत के मामले में गौतम अडानी एंड फैमिली 8.15 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर है. लिस्ट में तीसरे नंबर पर रोशनी नादर मल्होत्रा को रखा गया है, जिनकी संपत्ति 2.84 लाख करोड़ रुपये है. बता दें कि वे इस सूची में अब तक की सर्वोच्च रैंकिंग वाली महिला अरबपति बन गई हैं और पहली बार टॉप-3 में एंट्री लेते हुए भारत की सबसे अमीर महिला के रूप में इतिहास रच दिया है. अमीरों की इस लिस्ट में शाहरुख खान की एंट्री  अमीरों की 2025 लिस्ट में पेरप्लेक्सिटी के फाउंडर 31 साल के अरविंद श्रीनिवास 21,190 करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ भारत के सबसे युवा अरबपति बन गए हैं. वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी पहली बार इस लिस्ट में आए हैं और 12,490 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ भारत के टॉप अरबपतियों के क्लब में शामिल हो गए हैं.  इसके अलावा जिस अरबपति की दौलत में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है, वो नीरज बजाज एंड फैमिली है, 69,875 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ इनकी नेटवर्थ अब 2.33 लाख करोड़ रुपये हो गई है. अमीरों का सेंटर रहा मुंबई  भारत के सबसे अमीरों की लिस्ट में इस बार भी मुंबई ही टॉप पर है, जहां पर देश के 451 सबसे धनी व्यक्ति रहते हैं. इसके बाद नई दिल्ली में 223 और बेंगलुरु 116 अमीरों के साथ लिस्ट में है. अगर बिजनेस सेक्टर्स की बात करें, तो हुरुन के मुताबिक, फार्मास्यूटिकल्स 137 अमीरों के साथ पहले पायदान पर है, जबकि इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और केमिकल सेक्टर से जुड़े अमीरों की तादाद क्रमश: 132 और 125 रही है.  महिला अरबपतियों ने दिखाया दम  Hurun Rich List में एक बार फिर से महिलाओं और सेल्फ मेड उद्यमियों ने अपना दम-खम दिखाया है. यह लिस्ट महिला उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति को भी दर्शाती है, जिसमें 2025 तक 101 महिलाएं शामिल हैं और इनमें 26 अरबपति हैं. वहीं इसमें शामिल 74% नए अमीरों ने जीरो से शुरू करने के बाद सबसे अमीरों में जगह हासिल की है. सेल्फ मेड अमीरों की तादाद इस बार 66% रहे हैं. 

त्योहारी सीजन में सोने की चमक बढ़ी, 1 अक्टूबर को गोल्ड रेट में कोई गिरावट नहीं

नई दिल्ली सोने में गिरावट का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए आज भी राहत की खबर नहीं आई है। फेस्टिव सीजन में सोना नया रिकॉर्ड बना रहे है और यह आम लोगों के पहुंच से दूर होता जा रहै हे। अक्टूबर माह की शुरुआत में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। MCX पर सोना 1,17,500 रुपए प्रति 10 ग्राम जबकि चांदी की कीमत 1,43,640 रुपए प्रति किग्रा के आसपास है।  दिल्ली में सोना, चांदी के भाव नए शिखर पर राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोना 500 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1.20 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने का भाव सोमवार को 1,500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,500 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा था।  स्थानीय सर्राफा बाजार में 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही और यह 500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,400 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले बाजार सत्र में इसकी कीमत 1,18,900 रुपए प्रति 10 ग्राम रही थी। इसके अलावा मंगलवार को चांदी की कीमत 500 रुपए बढ़कर 1,50,500 रुपए प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के नए शिखर पर पहुंच गई। सोमवार को यह 7,000 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1,50,000 रुपए प्रति किलोग्राम रही थी।    

EMI नहीं बढ़ेगी, आरबीआई ने रखा रेपो रेट स्थिर, दशहरा पर आई खुशखबरी

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजे आ चुके हैं. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 29 सितंबर से शुरू हुई बैठक के फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा. अगस्त के बाद अक्टूबर में भी ब्याज दर 5.5% पर यथावत रखी गई है. इस साल अब तक रेपो रेट में तीन बार कटौती की गई है और इसे कुल 100 बेसिस पॉइंट तक घटाया जा चुका है. रेपो रेट को लेकर लोगों को थी उम्मीद दशहरा के पहले लोग उम्मीद लगाकर बैठे थे कि जिस तरह से जीएसटी में सरकार की ओर से राहत दी गई है. उसी प्रकार से रेपो रेट को लेकर फैसला किया जा सकता है जिससे आम जनता को राहत मिलेगी. जानकारों ने भी कुछ इसी तरह की उम्मीद की बात की थी लेकिन एमपीसी की बैठक के बाद आम जनता को कोई राहत नहीं दी गई.  मौद्रिक नीति पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी ने एकमत से फैसला किया कि रेपो रेट 5.5% पर यथावत रहे. इसी के साथ STF रेट 5.25%, MSF रेट और बैंक रेट 5.75% पर बने रहेंगे. एमपीसी ने नीति के न्यूट्रल रुख को भी जारी रखने का निर्णय लिया. औसत मुद्रास्फीति को घटाकर 2.6% कर दिया गया इस साल की औसत मुद्रास्फीति को घटाकर 2.6% कर दिया गया है, जबकि जून में यह 3.7% और अगस्त में 3.1% अनुमानित थी. चौथी तिमाही और अगले साल की पहली तिमाही की मुद्रास्फीति भी कम हुई है और लक्ष्य के करीब बनी हुई है. वैश्विक अनिश्चितताएं और व्यापार संबंधी मुद्दे इस साल के दूसरे हिस्से में आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं. वर्तमान आर्थिक स्थिति विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है. जीडीपी अनुमान बढ़ाया आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है. FY26 के दूसरे तिमाही (Q2) में वृद्धि का अनुमान अब 7.0% किया गया है जो पहले यह 6.7% था. तीसरी तिमाही (Q3) में वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से घटाकर 6.4% किया गया है. चौथी तिमाही (Q4) में जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.2% रखा गया है, जो पहले 6.3% था. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में वृद्धि का अनुमान 6.4% लगाया गया है, जबकि पहले इसे 6.6% रखा गया था. महंगाई होगी कम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में महंगाई (CPI Inflation) के नए अनुमान जारी किए हैं. ताजा अनुमान के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में औसत खुदरा महंगाई दर घटकर 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसे 3.1% आंका गया था. आरबीआई का कहना है कि हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई तेज गिरावट ने महंगाई को काबू में करने में बड़ी भूमिका निभाई है. तिमाहीवार महंगाई अनुमान इस प्रकार हैं:     Q2 FY26: 1.8% (पहले 2.1%)     Q3 FY26: 1.8% (पहले 3.1%)     Q4 FY26: 4.0% (पहले 4.4%)     Q1 FY27: 4.5% (पहले 4.9%)  

SBI कार्ड धारकों की जेब पर लगेगा असर, 1 नवंबर से लागू होंगे ये नए नियम

नई दिल्ली  भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने क्रेडिट कार्ड फीस स्ट्रक्चर और चार्ज में बड़ा बदलाव किया है। यह नया बदलाव 1 नवंबर 2025 से देशभर में लागू होगा। नया चार्ज केवल कुछ चयनित ट्रांजेक्शन्स पर लागू होगा, जैसे एजुकेशनल पेमेंट और वॉलेट लोड, और केवल उन ग्राहकों पर, जो SBI क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर पेमेंट करते हैं। एजुकेशन पेमेंट पर नया चार्ज अगर ग्राहक अपने SBI कार्ड से थर्ड पार्टी ऐप्स जैसे CRED, Cheq और MobiKwik का इस्तेमाल करके एजुकेशन से जुड़ी पेमेंट करता है, तो 1% का चार्ज लगेगा। उदाहरण के लिए, 1000 रुपये के पेमेंट पर 10 रुपये का चार्ज देना होगा। हालांकि, यदि पेमेंट सीधे स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी को किया जाता है, तो यह शुल्क नहीं लगेगा। वॉलेट लोड पर चार्ज SBI कार्ड से किसी भी वॉलेट में 1000 रुपये से अधिक राशि जमा करने पर 1% का चार्ज लागू होगा। बैंक ने बताया कि एजुकेशन पेमेंट चार्ज MCC कोड 8211, 8220, 8241, 8244, 8249, 8299 वाले थर्ड पार्टी मर्चेंट्स पर ही लागू होगा। SBI कार्ड के अन्य चार्ज   SBI कार्ड कई अन्य ट्रांजेक्शन्स पर भी शुल्क लेता है, हालांकि इनमें हाल ही में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्रमुख शुल्क इस प्रकार हैं: कैश पेमेंट चार्ज: 250 रुपये पेमेंट अप्रूवल चार्ज: 2% (कम से कम 500 रुपये) चेक पेमेंट शुल्क: 200 रुपये डोमेस्टिक ATM कैश एडवांस: 2.5% (न्यूनतम 500 रुपये) इंटरनेशनल ATM कैश एडवांस: 2.5% (न्यूनतम 500 रुपये) कार्ड बदलने का शुल्क: 100–250 रुपये, आरम कार्ड के लिए 1500 रुपये विदेश में इमरजेंसी कार्ड बदलना: वीजा के लिए न्यूनतम $175, मास्टरकार्ड के लिए $148 अतिरिक्त लेट पेमेंट चार्ज यदि न्यूनतम ड्यू अमाउंट (MAD) लगातार दो बिलिंग सर्किल तक तय तारीख तक नहीं भरा जाता है, तो 100 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा। यह शुल्क तब तक जारी रहेगा जब तक कि MAD का भुगतान नहीं किया जाता।  

4 लाख रुपये में मिलेगा दुनिया का पहला बिना ड्राइवर वाला ऑटो, जानें क्या है खासियत

नई दिल्ली भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में आज एक बड़ा इतिहास रच दिया गया है। ओमेगा सीकी मोबिलिटी (OSM) ने दुनिया का पहला ऑटोनॉमस (बिना ड्राइवर वाला) इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ‘स्वयंगति’ लॉन्च कर दिया है। इसकी कीमत सिर्फ 4 लाख रुपये से शुरू होती है। ये व्हीकल अब कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। ‘स्वयंगति’ को OSM के इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म और AI-आधारित ऑटोनॉमी सिस्टम पर तैयार किया गया है। यह शॉर्ट-डिस्टेंस ट्रांसपोर्ट जैसे एयरपोर्ट, स्मार्ट कैंपस, इंडस्ट्रियल पार्क, गेटेड कम्युनिटी और भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में बिना ड्राइवर के आराम से चल सकेगा। वाहन को पहले से मैपिंग करके सेट किया जाता है, ताकि वह तय किए गए रास्ते पर सुरक्षित और सुचारू रूप से यात्रा करा सके। 2025 की McKinsey रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ऑटोनॉमस वाहन बाजार 2030 तक 620 बिलियन डॉलर से अधिक का हो जाएगा। ऐसे में ‘स्वयंगति’ भारत का पहला ऐसा प्रोडक्ट है, जो इस तेजी से बढ़ते ट्रेंड को मैच नहीं, बल्कि लीड करेगा। भारत जैसे देश में जहां ट्रैफिक और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सबसे बड़ी चुनौती है, वहां यह तकनीक सुरक्षित और किफायती समाधान लेकर आई है। OSM के फाउंडर और चेयरमैन उदय नारंग ने कहा कि स्वयंगति का लॉन्च सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि भारत के ट्रांसपोर्टेशन भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। अब ऑटोनॉमस व्हीकल कोई सपना नहीं, बल्कि आज की जरूरत है। यह साबित करता है कि AI और LiDAR जैसी तकनीकें भारत में देश के लिए और सस्ती कीमत पर बनाई जा सकती हैं। OSM के चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर विवेक धवन ने कहा कि हमारा मकसद ऑटोनॉमी को डेमोक्रेटाइज करना है। स्वयंगति ने दिखाया है कि EV इंडस्ट्री में इंटेलिजेंट सिस्टम्स को अब रोजमर्रा की मोबिलिटी में लाया जा सकता है। स्वयंगति ने हाल ही में 3 किमी की ऑटोनॉमस रूट टेस्टिंग पूरी की, जिसमें 7 स्टॉप, रीयल-टाइम ऑब्स्टेकल डिटेक्शन और पैसेंजर सेफ्टी शामिल थी। यह सब बिना किसी ड्राइवर के पूरा किया गया। अब कंपनी Phase-2 में इसे कमर्शियल रोलआउट के लिए तैयार कर रही है। 4 लाख की कीमत और ‘मेड-इन-इंडिया’ टैग के साथ स्वयंगति न सिर्फ ऑटो इंडस्ट्री का फ्यूचर बदलने वाला है, बल्कि यह भारत को दुनिया के ऑटोनॉमस मोबिलिटी लीडर्स में शामिल कर सकता है।  

सोने-चांदी के रेट में रिकॉर्ड तेजी, Gold 1.16 लाख के पार, silver भी महंगी हुई — जानें ताज़ा रेट

मुंबई  त्योहारी सीजन में सोना-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं. भारतीय सर्राफा बाजार में इस कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन आज (मंगलवार), 30 सितंबर 2025 को सोना-चांदी के भाव में फिर बढ़ोतरी देखने को मिली है. सोने की कीमत 1 लाख 16 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई है. वहीं, चांदी का रेट 1 लाख 45 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (India Bullion And Jewellers Association) के मुताबिक,सोमवार, 29 सितंबर की शाम को 916 शुद्धता यानी 22 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Rate) 105756 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो आज, 30 सितंबर की सुबह बढ़ोतरी के साथ 107083 रुपये तक आ गया है. इसी तरह शुद्धता के आधार पर सोना महंगा हुआ है और चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए रेट पूरे देश में सर्वमान्य हैं लेकिन इसकी कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं होती है. बता दें कि गहने खरीदते समय सोने या चांदी के दाम टैक्स समेत होने की वजह से ज्यादा होते हैं. Gold Price Today 30 September: सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट   शुद्धता सोमवार शाम का रेट मंगलवार सुबह का रेट कितना सस्ता या महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 115454 116903 1449 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 114992 116435 1443 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 105756 107083 1327 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 86591  87677 1086 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 67541 68388 847 रुपये महंगा चांदी (प्रति 1 किलो) 999  144387 145060 673 रुपये महंगी सोमवार को क्या रहा सोना-चांदी का भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (India Bullion And Jewellers Association) के मुताबिक, सोमवार को भी सोने के दामों में बढ़ोतरी देखी गई थी और चांदी के भाव भी बढ़ गए थे. IBJA के अनुसार, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने का रेट 115292 रुपये था जो शाम के समय 115454 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था. वहीं, चांदी की कीमत 144100 से बढ़कर 144387 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. ibja की ओर से केंद्रीय सरकार द्वारा द्वारा घोषित रेट शनिवार और रविवार के साथ-साथ केंद्र सरकार की छुट्टियों पर जारी नहीं किए जाते. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. ये सभी रेट टैक्स और मेकिंग चार्ज के पहले के हैं.

अब आम आदमी के लिए और भी खुशखबरी! GST रेट कट के बाद सरकार कर सकती है ये बड़ा कदम

रॉयटर्स जीएसटी में कटौती के बाद आम आदमी को एक और बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खबर है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक सरप्राइज रेट कट कर सकता है। यानी अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में आम आदमी पर से ईएमआई का बोझ कम हो सकता है। बता दें कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति बैठक में बुधवार को रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखने की संभावना है। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कमजोर निवेश, वैश्विक व्यापार दबाव और नरम महंगाई को देखते हुए RBI सरप्राइज रेट कट का विकल्प भी चुन सकता है। बता दें कि RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि RBI अपनी प्रमुख नीति दर (रेपो रेट) को 5.50% पर बनाए रखेगा। लेकिन, अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी व्यापार और कमजो महंगाई दर के प्रभाव को देखते हुए दर में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या है डिटेल रॉयटर्स पोल के मुताबिक, करीब तीन-चौथाई अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकॉनॉमिक्स और एसबीआई जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने रेट कट की संभावना जताई है। उनका कहना है कि विकास दर पर दबाव और महंगाई की नरमी, कटौती के पक्ष में माहौल बना रही है। इस साल की शुरुआत से अब तक RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट की दरों में कटौती की है, लेकिन इसके बावजूद निजी निवेश कमजोर बना हुआ है। अगस्त पॉलिसी मीटिंग में RBI ने दरों को स्थिर रखते हुए 'न्यूट्रल स्टांस' बनाए रखा था, जिसके बाद वित्तीय हालात और सख्त हो गए। एनालिस्ट की राय सिटी इकॉनॉमिस्ट्स ने लिखा कि अक्टूबर की बैठक फिर से 'लाइव' हो गई है। RBI एक 'इंश्योरेंस रेट कट' का विकल्प चुन सकता है ताकि बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके, या फिर डोविश पॉज लेकर संकेत दे सकता है कि आने वाले समय में कार्रवाई की जाएगी। भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8% की बेहतर-से-उम्मीद ग्रोथ दर्ज की। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा महंगाई के समायोजन के बाद वास्तविक मजबूती से अधिक दिख रहा है। बता दें कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए आयकर राहत और जीएसटी दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन बढ़े हुए टैरिफ और रुपये की कमजोरी ने आर्थिक दृष्टिकोण को अनिश्चित बना दिया है। अमेरिका के साथ व्यापार तनाव बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका गहराई है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है और वीजा फीस बढ़ाई है, जिससे सेवाओं के व्यापार पर और सख्त कदम उठाए जाने की चिंताएं बढ़ गई हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिजर्व बैंक पूरी स्थिति का असर देखने का इंतजार करने की बजाय पहले ही कदम उठा सकता है। कैपिटल इकॉनॉमिक्स के मुताबिक, “अमेरिकी टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ को झटका लग सकता है। वहीं, महंगाई का स्तर अभी भी नियंत्रित है। ऐसे में RBI एक बार फिर से रेट कट चक्र शुरू कर सकता है।” संस्था ने अनुमान जताया है कि RBI अगले हफ्ते दरों में कटौती कर सकता है और दिसंबर में एक और कटौती संभव है।