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झूठ की राजनीति? IAF चीफ के बयान को लेकर BJP का राहुल गांधी पर वार

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर में राजनैतिक नेतृत्व ने सुरक्षा बलों को खुली छूट दी या नहीं इसका जवाब एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने दिया है। उनके इस बयान के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी लोकसभा नेता विपक्ष राहुल गांधी पर हमलावर हो गई है। संसद में खड़े होकर केंद्र सरकार के ऊपर भारतीय जवानों के 'हाथ बांधने का आरोप लगाने वाले राहुल गांधी के ऊपर जमकर तंज कसा। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने पद की मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं और भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही विपक्ष लगातार इस बात पर सवाल खड़े कर रहा था कि इसमें राजनीतिक इच्छा सकती नहीं थी। जवानों को पूरी आजादी नहीं दी गई थी। एयर चीफ मार्शल ने इस दावे का खंडन करते हुए शनिवार को कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था और उन्हें ऑपरेशन के दौरान हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने की "पूरी आज़ादी" थी। एयर चीफ के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, "मैं राहुल गांधी जी से अनुरोध करता हूँ कि भारत की संसद की मर्यादा बनाए रखें। आप हर समय झूठ क्यों बोलते रहते हैं? मैंने विपक्ष के कई नेताओं को देखा है जिन्होंने संसदीय मर्यादा बनाए रखी। आपने न केवल अपना कद गिराया है, बल्कि भारत की उच्च प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुँचाई है!" अमित मालवीय ने भी साधा निशाना भाजपा की तरफ से राहुल गांधी पर हमला केवल किरेन रिजिजू तक ही नहीं रुका, बल्कि बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने कांग्रेस की तुलना पाकिस्तान के साथ कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में लिखा, "एयर चीफ मार्शल एपी सिंह द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को नष्ट करने की बात को उजागर करने के बाद पाकिस्तानी और कांग्रेसी मीडिया दोनों में सन्नाटा पसरा हुआ है। समय की पाबंदी लाज़मी है। यह खुलासा ठीक उसके बाद हुआ है जब राहुल गांधी ने संसद में खुद को पूरी तरह से मूर्ख बना लिया था। इस खुलासे के साथ, विपक्ष के नेता की जो थोड़ी-बहुत विश्वसनीयता बची थी, वह भी अब तार-तार हो गई है, अगर शुरू से ही थी। रक्षाबंधन के दिन को चुने जाने का प्रतीकात्मक महत्व किसी से छिपा नहीं है।  

मुंबई कांग्रेस में बड़ा फेरबदल संभव, वर्षा गायकवाड़ की कुर्सी पर संकट गहराया

मुंबई मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर से पार्टी के स्थानीय नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ पर संगठन को दिशा देने में विफल रहने और सीमित समूह के सहारे पार्टी चलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे संगठन की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला 12 अगस्त को पुणे में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के 10 सदस्यों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में वर्षा गायकवाड़ के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। चेन्निथला 12 और 13 अगस्त को पुणे में आयोजित महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल होंगे। दूसरी बार उठी हटाने की मांग यह पहली बार नहीं है जब गायकवाड़ के खिलाफ असंतोष सामने आया है। 16 जून को भी कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि गायकवाड़ से मिलना मुश्किल होता है। उन्हें कार्यकर्ताओं और नेताओं के सुझाव भी पसंद नहीं आते हैं। इसके अलावा संगठन के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने में असफल रही हैं। चुनाव से पहले बढ़ी अंदरूनी खींचतान मुंबई में आगामी नगर निगम चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि पार्टी संगठन मजबूत और एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरे। लेकिन गायकवाड़ के नेतृत्व में गुटबाजी और असंतोष की खबरें पार्टी की चुनावी तैयारी पर असर डाल सकती हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 12 अगस्त की बैठक में असंतुष्ट नेताओं को अपनी बात सीधे प्रभारी के सामने रखने का मौका मिलेगा। यदि नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति बनती है तो मुंबई कांग्रेस में जल्द ही नया अध्यक्ष देखने को मिल सकता है।  

कांग्रेस में बड़ा फेरबदल संभव, खतरे में मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ की कुर्सी

मुंबई. मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर से पार्टी के स्थानीय नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ पर संगठन को दिशा देने में विफल रहने और सीमित समूह के सहारे पार्टी चलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे संगठन की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला 12 अगस्त को पुणे में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के 10 सदस्यों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में वर्षा गायकवाड़ के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। चेन्निथला 12 और 13 अगस्त को पुणे में आयोजित महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल होंगे। दूसरी बार उठी हटाने की मांग यह पहली बार नहीं है जब गायकवाड़ के खिलाफ असंतोष सामने आया है। 16 जून को भी कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि गायकवाड़ से मिलना मुश्किल होता है। उन्हें कार्यकर्ताओं और नेताओं के सुझाव भी पसंद नहीं आते हैं। इसके अलावा संगठन के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने में असफल रही हैं। चुनाव से पहले बढ़ी अंदरूनी खींचतान मुंबई में आगामी नगर निगम चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि पार्टी संगठन मजबूत और एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरे। लेकिन गायकवाड़ के नेतृत्व में गुटबाजी और असंतोष की खबरें पार्टी की चुनावी तैयारी पर असर डाल सकती हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 12 अगस्त की बैठक में असंतुष्ट नेताओं को अपनी बात सीधे प्रभारी के सामने रखने का मौका मिलेगा। यदि नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति बनती है तो मुंबई कांग्रेस में जल्द ही नया अध्यक्ष देखने को मिल सकता है।

महाराष्ट्र चुनाव से पहले दो नेताओं का भरोसा, शरद पवार बोले- 160 सीटें हमारी पक्की जीत

मुंबई  एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर शनिवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले दो व्यक्तियों ने नई दिल्ली में उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने 288 में से 160 निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्ष की जीत की गारंटी दी थी। नागपुर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि उन्होंने दोनों व्यक्तियों को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलवाया। शरद पवार ने यह खुलासा ऐसे समय में किया है, जब राहुल ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया, ‘महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले नई दिल्ली में दो लोग मुझसे मिले थे। उन्होंने विपक्ष (महा विकास आघाडी) को 288 में से 160 सीटें जीतने में मदद की गारंटी दी।’ एनसीपी (एसपी) प्रमुख ने कहा, ‘मैंने उन्हें राहुल गांधी से मिलवाया। उन्होंने उन दोनों व्यक्तियों ने जो कुछ भी कहा, उसे नजरअंदाज कर दिया। उनका यह भी मानना था कि हमें ऐसे मामलों में नहीं पड़ना चाहिए और सीधे जनता के पास जाना चाहिए।’ भाजपा ने विधानसभा चुनावों में 132 सीटें जीतीं शरद पवार ने दावा किया कि चूंकि दोनों व्यक्तियों ने जो कुछ भी कहा, उसे उन्होंने बहुत तवज्जो नहीं दी। इसलिए उन्होंने उनका नाम और संपर्क ब्योरा नहीं रखा। मालूम हो कि भाजपा ने विधानसभा चुनावों में 132 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने क्रमशः 57 और 41 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। विपक्षी गठबबंधन ‘महा विकास आघाडी’ ने अपनी हार के लिए ईवीएम में गड़बड़ी और डेटा में छेड़छाड़ को जिम्मेदार ठहराया था। महा विकास आघाडी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 में से 30 लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी।  

क्या सुरक्षित हैं धनखड़? सिब्बल ने शाह से की सीधी बात

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद से जगदीप धनखड़ सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। ना ही उनका कोई बयान सामने आया है। इस बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक्स पर देश के गृह मंत्री अमित शाह से उनको लेकर एक बड़ा सवाल पूछा है। उन्होंने पूछा है कि क्या हमें बताया जा सकता है कि जगदीप धनखड़ कहां हैं? उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर पूछा, 'क्या वह सुरक्षित हैं? उनसे संपर्क क्यों नहीं हो पा रहा है?' कपिल सिब्बल आगे लिखते हैं, ''अमित शाह जी को पता होना चाहिए! वह हमारे उपराष्ट्रपति थे। देश को चिंतित होना चाहिए।'' जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा देने के बाद 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद रिक्त हो गया था। धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होना था। इसके बाद से नए उपराष्ट्रपति के नाम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो चुका है। निर्वाचन आयोग ने भी उपराष्ट्रपति पद के लिए नौ सितंबर को होने वाले चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत हो गई। अधिसूचना के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है और दस्तावेजों की जांच 22 अगस्त को की जाएगी। नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 25 अगस्त है।  

एमपी बीजेपी में नेतृत्व बदलाव के बाद कार्यकारिणी गठन पर अटकलें तेज

भोपाल भारतीय जनता पार्टी को पिछले दिनों सभी जिला अध्यक्षों के साथ ही राज्य अध्यक्ष भी मिल चुका है। वहीं, अब तक जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं किया जा सका है। पार्टी संगठन अब प्रदेश और संभाग के दो-दो पदाधिकारी जिलों में भेजकर जिला कार्यकारिणी का गठन कराने पर विचार कर रही है। ये वरिष्ठ पदाधिकारी जिला कार्यकारिणी गठन के लिए कार्यकर्ताओं का चयन कराएंगे। संभागीय प्रभारियों की बैठक हुई गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल में प्रदेश और संभाग प्रभारियों बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद सहित कई नेता मौजूद रहे। इस बैठक में जिला कार्यकारिणी गठन का मुद्दा उठा। हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि जिला कार्यकारिणी का गठन जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाए। जिलों में जाएंगे पार्टी के पदाधिकारी पार्टी का प्लान है कि जिला कार्यकारिणी गठन के लिए दो-दो पदाधिकारी जिलों में जाकर कार्यकारिणी गठन के लिए आम सहमति बनाएंगे, ताकि निर्विरोध कार्यकारिणी का गठन हो सके। कार्यकारिणी में एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी होगा और एक अन्य पदाधिकारी संभाग का होगा। इन दो पदाधिकारियों को दो जिलों की कमान सौंपी जाएगी। विभाजन की विभीषिका से युवाओं को कराएंगे परिचित भाजपा ने पूरे प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई है। 14 अगस्त को भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस निकालने के साथ प्रदर्शनी लगाने की कार्ययोजना है। बैठकों का आयोजन कर देश के विभाजन के समय पीड़ितों के परिजनों से भेंट करने के साथ प्रदर्शनी और अन्य माध्यमों से युवाओं को देश के विभाजन की विभीषिका से अवगत कराया जाएगा।  

बीजेपी में उपराष्ट्रपति पद को लेकर मंथन, इस जाट नेता का नाम चर्चा में

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब चुनाव का शेड्यूल आ गया है। इसके बाद से ही चर्चाएं तेज हैं कि आखिर एनडीए का उम्मीदवार अब कौन होगा। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की संख्या को देखते हुए स्पष्ट है कि एनडीए का कैंडिडेट ही जीतने की स्थिति में है। इसलिए एनडीए की ओर से किसे कैंडिडेट बनाया जाएगा। इस पर कयासों का दौर चल रहा है। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के एलजी वीके सक्सेना और मनोज सिन्हा का नाम चर्चा में है। इसके अलावा राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। इसका कारण बिहार का विधानसभा चुनाव भी है। उनके बिहार कनेक्शन का फायदा भाजपा और जेडीयू उठाना चाहेंगे। इसके अलावा अब एक और नाम तेजी से चर्चा में है। यह नाम है, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का। आचार्य देवव्रत उसी जाट बिरादरी से हैं, जिससे जगदीप धनखड़ आते हैं। ऐसे में जाट समाज के बीच संदेश देने के लिए आचार्य देवव्रत को मौका दिया जा सकता है। वह आर्य समाज से जुड़े रहे हैं और प्रखरता से विचारधारा का प्रचार करने में जुटे रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक कुरुक्षेत्र स्थित एक गुरुकुल में प्रिंसिपल के तौर पर काम किया है। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश के भी राज्यपाल रह चुके हैं। वह हरियाणा के ही समालखा के रहने वाले हैं। खबर है कि 18 से 20 अगस्त के बीच किसी भी दिन भाजपा की ओर से उपराष्ट्रपति पद के कैंडिडेट के नाम का ऐलान हो सकता है। बता दें कि जेडीयू, टीडीपी और शिवसेना जैसे एनडीए के दलों ने पीएम नरेंद्र मोदी को अधिकार दिया है कि वे किसी भी नेता का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। इस तरह एनडीए में आम सहमति बन गई है कि भाजपा की ओर से दिए गए नाम के पक्ष में ही मतदान किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग की ओर से इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किरेन रिजिजू का कहना है कि एनडीए के दलों ने पीएम मोदी और जेपी नड्डा को अधिकृत किया है कि वे जिस नेता पर भी मुहर लगाएंगे, उस पर उनकी सहमति रहेगी।

कांग्रेस का हमला: ट्रंप की आलोचना के बीच मोदी खुद को किसानों का सबसे बड़ा पक्षधर बता रहे हैं

नई दिल्ली कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि ''ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति) के हमले से पस्त'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद को भारतीय किसानों के सबसे बड़े हितैषी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी को भी इस पर कोई भ्रम नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात पर भारत पर दोगुना शुल्क लगाए जाने के बाद मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि भारत अपने किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन वह इसके लिए तैयार हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पांच साल पहले एक समय ऐसा भी था जब संसद में प्रधानमंत्री ने आंदोलन कर रहे किसानों का उपहास उड़ाते हुए उन्हें 'आंदोलनजीवी' कह दिया था। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''तीन काले, किसान-विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन में 700 से ज़्यादा किसान शहीद हो गए, लेकिन प्रधानमंत्री के मुंह से उनके लिए न दर्द, न अफ़सोस और न ही सहानुभूति का एक शब्द निकला।'' उन्होंने कहा कि किसान संगठन आज भी समूचे उत्पादन की लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और ठोस कर्ज राहत की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने जगदीप धनखड़ के संदर्भ में कहा कि इन मांगों पर प्रधानमंत्री पूरी तरह से चुप हैं, जबकि इन्हीं मुद्दों को भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति ने भी उठाया था। उन्होंने दावा किया कि नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) व्यापार समझौते में भारत को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार थे, जो भारतीय किसानों और डेयरी उत्पादकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता था। रमेश ने कहा कि लेकिन कांग्रेस और किसान संगठनों के लगातार दबाव के चलते, आख़िरी वक्त पर प्रधानमंत्री मोदी को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा, ''ट्रंप के हमले से पस्त प्रधानमंत्री मोदी खुद को भारतीय किसानों के सबसे बड़े हितैषी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी को भी इस पर कोई भ्रम नहीं है।''  

ईसीआई फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया, प्रियंका गांधी ने कहा- जांच हो

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए धांधली के आरोप को लेकर चुनाव आयोग फैक्ट चेक ने जवाब दिया है। ईसीआई फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि अगर राहुल गांधी मानते हैं कि वे जो कह रहे, वह सच है तो उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के 20(3)(बी) के अनुसार घोषणा या शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करके गुरुवार शाम तक देना चाहिए। चुनाव आयोग ने इस शपथ पत्र को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पेश करना चाहिए ताकि आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सके। चुनाव आयोग की ओर से आए बयान पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिएक्ट किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका ने कहा कि वे हलफनामा क्यों मांग रहे हैं? जांच क्यों नहीं कर रहे- प्रियंका का ईसी से सवाल केरल की वायनाड सीट कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि 'याचिका के अनुसार, 30 दिनों के भीतर हलफनामा प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। वे हलफनामा क्यों मांग रहे हैं? अगर कोई जानबूझकर गलती हुई है, तो आपको इसकी जांच करनी चाहिए। आप हमें मतदाता सूची क्यों नहीं दे रहे हैं? आप जांच क्यों नहीं कर रहे हैं? उसके बजाय आप कह रहे कि हलफनामा साइन करके दो। इससे बड़ी शपथ क्या है जो हम सदन में लेते हैं। इससे बड़ी कोई शपथ है जो हमने सदन में ले रखी है।' 'राहुल गांधी इतना बड़ा खुलासा कर रहे…' प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पूरे मुद्दे की जानकारी दे रहे हैं। पब्लिक में सबकुछ कर रहे हैं। बता रहे हैं कि देखिए एक लाख से ज्यादा फर्जी वोट हैं। एक विधानसभा में अंदर इतने फर्जी वोट, जो चुनाव लड़ता है वो समझता है इस बात को। विधानसभा चुनाव में एक लाख से ज्यादा का फर्जी वोट, सोचिए जहां उन्होंने वोट कर दिया वही जीतेंगे। 'वोट चोरी' पर विपक्ष की रणनीति को लेकर क्या बोलीं प्रियंका प्रियंका गांधी से जब पूछा गया कि आगे विपक्ष की क्या रणनीति होगी। इस पर कांग्रेस नेता ने बताया कि ये इंडिया गठबंधन के नेता तय करेंगे कि आगे इस मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाएगा। लेकिन यह सभी लोग समझते हैं कि विधानसभा चुनाव में प्रत्येक मतदाता कितना महत्वपूर्ण है? लगभग 1 लाख मतदाताओं को हटाकर, वे स्पष्ट रूप से तय कर सकते हैं कि कौन जीतता है। वहीं पूरे मामले में बीजेपी नेताओं के जो जवाब आ रहे उससे सब स्पष्ट है। टीचर वाला उदाहरण देकर चुनाव आयोग को घेरा प्रियंका गांधी ने कहा कि आप टीचर के पास जाओ और कहो कि मैम चीटिंग हो रही है तो क्या टीचर आपको थप्पड़ मारेंगी? या वो बोलेंगी कि मैं चेक करती हूं क्या हो रहा। वो जांच करेंगी। यहां देखिए क्या हो रहा। जो मांग की जा रही उसकी जांच की जगह उल्टा सीधा बोला जा रहा जो शिकायत कर रहा। यही नहीं उनसे हलफनामा मांगा जा रहा। एफिडेविट साइन करने की बात कही जा रही है। इतना सब कुछ हो रहा और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।  

जहां से वोट चोरी का दावा, वहीं कांग्रेस की जीत पर केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल

नई दिल्ली  राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। इसको लेकर केंद्र सरकार उन पर हमलावर है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी पर तंज किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि वोट चोरी हुए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि राहुल गांधी ने जिन जगहों पर वोट बढ़ने की कही है कांग्रेस वहीं पर ज्यादा सीटें जीती है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर गलत सूचना फैला रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। राहुल गांधी के दावों पर सवाल गौरतलब है कि एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक के महादेवपुरा में बड़ी संख्या में वोटों में हेर-फेर हुई है। राहुल गांधी के मुताबिक यह सबकुछ भाजपा को जिताने के लिए किया गया। भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दावा है कि महाराष्ट्र में 1 करोड़ वोटर बढ़े। वहीं, चुनाव आयोग के मुताबिक केवल 40 लाख वोटर बढ़े। यह राहुल गांधी के दावे से 60 फीसदी कम है। ऐसी होती है नेता विपक्ष की भाषा? भूपेंद्र यादव ने आगे कुछ और बातों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस अधिकतर उन्हीं सीटों पर जीती है, जहां पर वोट बढ़ने की बात कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से राहुल गांधी एटम बम छोड़ने की बात कर रहे हैं। वह चुनाव आयोग कर्मचारियों के खिलाफ अशालीन भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि अगर हम सत्ता में आए तो चुनाव आयोग कर्मचारियों को सजा मिलेगी। क्या नेता विपक्ष सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल कर सकते हैं? क्या था राहुल गांधी का आरोप गौरतलब है कि गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र में पांच तरह की हेराफेरी के जरिए एक लाख से अधिक वोट चुराए गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी’ हमारे लोकतंत्र पर एक ‘एटम बम’ की तरह है। गांधी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आंकड़ों का विश्लेषण किया है।