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शिवराज मामा की रायसेन में बढ़ती सक्रियता, क्या विदिशा से मोहभंग या नया सियासी गणित?

रायसेन  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का झुकाव तेजी से रायसेन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कभी उनकी राजनीति का केंद्र रहे विदिशा क्षेत्र से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल ही में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के बाद अब रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन कराया जा रहा है। यह महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रहे आयोजनों से साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का फोकस अब इस क्षेत्र पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, विदिशा में पिछले कुछ समय से भाजपा के अंदरूनी समीकरण और खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी ने भी सियासी माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में रायसेन में बढ़ती सक्रियता को विदिशा से मोहभंग के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इधर रायसेन में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती नजदीकियां भी जन चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी और समन्वय से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिले में संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती के लिए नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में डॉ चौधरी का रामपाल सिंह राजपूत के करीब आना भी कई मायनों में अहम माना जा रहा है। वहीं, वर्ष 2020 के बाद से डॉ नरोत्तम मिश्रा शेजवार (डॉ शेजवार) और शिवराज मामा के बीच बनी दूरी भी सियासी जन चर्चा का केंद्र रही है। पहले जहां दोनों के बीच मजबूत तालमेल देखने को मिलता था। वहीं अब राजनीतिक मंचों पर यह सामंजस्य पहले जैसा नजर नहीं आता। इसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी बीजेपी के कद्दावर लोकप्रिय बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। रायसेन में शिवराज मामा के लगातार हो रहे बड़े आयोजन कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य के चुनावी नक्शे को ध्यान में रखकर राजनीति की नई जमीन तैयार की जा रही है। यदि परिसीमन में बदलाव होता है, तो रायसेन क्षेत्र का महत्व और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, विदिशा से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। यह सियासत का सोचा-समझा कदम भी हो सकता है, जिसमें सत्ता संगठन, समीकरण और भविष्य की संभावनाओं का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।

वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस बैकफुट पर, अल्पसंख्यक नेताओं की चुप्पी से नाराजगी, भाजपा हुई आक्रामक

इंदौर  इंदौर के नगर निगम सम्मेलन में ‘वंदे मातरम्’ विवाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने और विवादित बयान देने पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने दोनों महिला पार्षदों का बचाव नहीं किया। इससे कांग्रेस पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेता नाराज़ हो गए हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है, जबकि भाजपा अब इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार को इंदौर के कई वार्डों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पुतले जलाए और ‘वंदे मातरम्’ गीत गाया। विवाद सामने आने के बाद इंदौर शहर कांग्रेस ने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत अनिवार्य कर दिया है। पार्षद रुबीना इक़बाल के खिलाफ निष्कासन का प्रस्ताव भी भोपाल भेज दिया गया है। उधर, इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी चुप्पी साध रखी है। छतरपुर दौरे में मीडियाकर्मियों ने जब उनसे इस मामले में सवाल पूछा, तो पटवारी ने हाथ जोड़ लिए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधना कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। फिलहाल, जीतू पटवारी की इस चुप्पी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है।  कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इसे कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने पर है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस में उसकी विचारधारा से जुड़े हैं। सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। इसे इस तरह अनिवार्य करना अनुचित है। देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक एहसास है। निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं। 'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए' एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए। कांग्रेस में मतभेद वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए। जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध राष्ट्रगीत का अर्थ: 'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं। मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है। विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं। इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था

कांग्रेस ने अजित पवार के सम्मान में उम्मीदवारी वापस ली, सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत पक्की

मुंबई  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव नहीं लड़ेगी, जहां से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अपने पति अजित पवार के मृत्यु के बाद चुनाव मैदान में हैं। चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने की बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि है। उन्होंने कहा- अजित पवार के निधन के कारण बारामती उपचुनाव आवश्यक हो गया। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कांग्रेस इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। कांग्रेस के आकाश मोरे ने 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। चेन्निथला का यह बयान शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के शीर्ष नेताओं के आग्रह के बाद आया जिसमें उन्होंने कांग्रेस से बारामती उपचुनाव में राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवारी वापस लेने की अपील की थी। शरद पवार ने कहा कि यह उपचुनाव विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु की पृष्ठभूमि में हो रहा है, इसलिए वह कांग्रेस को चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने के लिए कहेंगे। क्या बोले थे शरद पवार? पवार ने कहा- कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और हम उसे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश नहीं दे सकते। हालांकि, महाराष्ट्र ने एक दुखद दुर्घटना में एक कुशल नेता को खो दिया, जिसके कारण बारामती सीट खाली हुई। अगर मुझसे पूछा जाए, तो मैं कांग्रेस को सुझाव दूंगा कि इस उपचुनाव को निर्विरोध कराया जाना उचित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय कांग्रेस का होगा। अजित पवार की पत्नी एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती सीट से नामांकन दाखिल किया है। हालांकि, निर्विरोध चुनाव की अपीलों के बीच कांग्रेस ने 23 अप्रैल के लिए निर्धारित उपचुनाव के लिए अधिवक्ता आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया। सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की। उन्होंने कहा- अजितदादा ने पहले कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और हमेशा आपकी पार्टी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। बारामती में निर्विरोध चुनाव उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगा। उन्होंने कहा, "इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी से विनम्र अनुरोध करती हूं कि कृपया अपनी उम्मीदवारी वापस लें और यह सुनिश्चित करें कि यह चुनाव निर्विरोध हो।" रोहित पवार ने किया था अनुरोध इससे पहले, राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मुलाकात कर पार्टी से उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह किया, ताकि सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सके। रोहित पवार ने कहा, "मुझे विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।" सूत्रों के अनुसार, एक दिन पहले सुनेत्रा पवार ने भी सपकाल से बात कर उनसे अनुरोध किया था कि वह सुनिश्चित करें कि कांग्रेस उम्मीदवार उनके खिलाफ नामांकन वापस ले। कांग्रेस ने कहा था कि वह चुनाव से तभी हटेगी जब जनवरी में हुई विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के मामले में महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। सुनेत्रा पवार के बेटे ने कांग्रेस पर साधा था निशाना पवार की मृत्यु के कारण ही बारामती में उपचुनाव जरूरी हो गया है। चुनाव की तैयारियों के बीच माहौल उस समय तल्ख हो गया जब सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने हाल में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारने की आलोचना की। रोहित पवार ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने चचेरे भाई पार्थ पवार की टिप्पणियों पर खेद जताया है। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।" सुनेत्रा पवार और कांग्रेस के आकाश मोरे सहित कुल 53 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि नौ अप्रैल है। राकांपा (शप) नेता ने कहा कि कांग्रेस ने यह सही संदेश दिया है कि विमान दुर्घटना मामले में न्याय मिलना चाहिए और महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। बारामती विमान दुर्घटना की लगातार उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे रोहित पवार ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज दिल्ली में मौजूद सुनेत्रा पवार केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिलेंगी और मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगी।" भाजपा ने दी थी चेतावनी शरद पवार नीत राकांपा (शप) ने पहले ही घोषणा की है कि वह सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यदि कांग्रेस ने राकांपा अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को बारामती विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध जीतने नहीं दिया, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। बावनकुले ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, अगर कांग्रेस सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध नहीं जीतने देती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। यदि वह अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं लेती है, तो उसका पतन बारामती से ही शुरू होगा।" एक अन्य सवाल के जवाब में बावनकुले ने कहा कि असम और केरल में पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन इस बार अधिक मजबूत होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में बृहस्पतिवार को एक ही चरण में मतदान हो रहा है। उन्होंने कहा, "ये चुनाव एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाएंगे।

आसनसोल में PM मोदी का बड़ा बयान: ‘TMC के पाप का घड़ा भर चुका है, अब डबल इंजन सरकार बनेगी बंगाल में’

आसनसोल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (गुरुवार) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए राज्य में एक ही दिन में तीन बड़ी रैलियां कर रहे हैं. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद राज्य की पीएम मोदी की यह दूसरी यात्रा है. बीजेपी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया टाउनशिप में पहली रैली की. इसके बाद पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल में पोलो ग्राउंड के आउटडोर स्टेडियम में दूसरी रैली को संबोधित किया. वहीं, बीरभूम जिले के सूरी शहर के चंदमारी मैदान में तीसरी जनसभा होगी।  बता दें कि विधानसभा चुनाव 2026 के तहत पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग होगी. पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. बंगाल चुनाव से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स के लिए इस पेज को रीफ्रेश करते रहें।  पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि '4 मई के बाद बंगाल में कानून का राज स्थापित होगा. हर तरह की गुंडागर्दी का हिसाब लिया जाएगा, एक-एक करके जवाबदेही तय होगी.' उनके इस बयान को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सीधा हमला माना जा रहा है।  इसके साथ ही उन्होंने हाल के चर्चित मामलों का जिक्र करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि आरजी कर जैसे घटनाक्रम और संदेशखाली की घटना यह दिखाती है कि टीएमसी सरकार कैसे दुष्कर्मियों के साथ खड़ी नजर आती है. उन्होंने दावा किया कि यही वजह है कि राज्य में महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है और एसिड अटैक के मामलों में भी इजाफा हुआ है।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि 'बंगाल में घुसपैठ सबसे बड़ी समस्या है. घुसपैठिए यहां जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर लोगों को पूजा करने की अनुमति नहीं दी जाती और कहीं-कहीं दुर्गा पूजा भी नहीं करने दी जाती।  उन्होंने इन सभी मुद्दों के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पहले हिंदू नरसंहार को लेकर चेतावनी संकेत दिए गए थे और अब वही काम टीएमसी कर रही है।  पलायन को मजबूर बंगाल को लोग: पीएम मोदी ने TMC पर किया वार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आसनसोल कोयला बेल्ट का बड़ा क्षेत्र है, फिर भी टीएमसी के राज में कोयला व्यापार पर सिंडिकेट का कब्जा हो गया है. कोयला ब्लैक मार्केटिंग, कोयला माफिया, रेत माफिया और जमीन माफिया – ये सभी इस पूरे इलाके पर भारी बोझ बन गए हैं. बंगाली लोग इनसे परेशान हैं. आसनसोल-दुर्गापुर का इलाका कभी पूरे देश का बड़ा औद्योगिक केंद्र था. यहां साइकिल से लेकर रेलवे कोच, कागज से लेकर स्टील, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक की फैक्टरियां थीं. देश के कोने-कोने से लोग यहां काम करने आते थे लेकिन आज स्थिति यह है कि युवाओं को मजबूरन घर छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है।  बंगाल में अब बनेगी डबल इंजन की सरकार, आसनसोल में बोले मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पापों का घड़ा अब भर चुका है. बंगाल में अगली सरकार डबल इंजन सरकार बनेगी. 4 मई के बाद बंगाल विकास के नए युग में प्रवेश करेगा. बंगाल के विकास के लिए TMC से मुक्ति जरूरी है।  पीएम मोदी बोले- बंगाल में परिवर्तन होने जा रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसनसोल में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल में बदलाव होने जा रहा है. बंगाल से जो आवाज उठ रही है, वह दूर तक जाएगी. यह आवाज दुर्गापुर, रानीगंज, साल्टोरा और रघुनाथपुर तक पहुंचेगी।  प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ठीक से लागू नहीं कर रही है टीएमसी: PM मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जहां भी भाजपा या एनडीए की सरकार है, वहां मछली उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. भाजपा सरकार की नीतियों से बिहार में मछली उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है. आज बिहार मछली नहीं मंगवाता, बल्कि खुद दूसरों को मछली भेजता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में मछली और झींगे के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी का बड़ा कारण प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना है. लेकिन टीएमसी सरकार को इस योजना का "पीएम" वाला नाम पसंद नहीं है. मछुआरों के भले के लिए बनी योजना को टीएमसी ठीक से लागू नहीं कर रही है. प्रधानमंत्री ने बंगाल के मछुआरों से अपील की कि वे इस चुनाव में बदलाव लाएं, ताकि बंगाल में भी मछली उत्पादन बढ़े और मछुआरे खुशहाल जीवन जी सकें।  PM मोदी बोले- TMC ने बंगाल के युवाओं के साथ गद्दारी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि टीएमसी सरकार ने बंगाल के युवाओं के साथ जो कुछ किया है, वह अपना पाप अगले 100 साल में भी नहीं धो पाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, टीएमसी ने बंगाल के युवाओं के साथ गद्दारी की है. यहां निजी क्षेत्र में नौकरियां नहीं हैं और जो थोड़ी बहुत हैं, वे भी घुसपैठियों को दे दी गई हैं. सरकारी पदों को टीएमसी के मंत्री लूट रहे हैं।  TMC के राज में सिर्फ घुसपैठियों की फैक्ट्री फली-फूली है: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय में देश भर के लोग हल्दिया में काम करने आते थे. लेकिन आज हालात यह हैं कि खुद हल्दिया के युवा रोजगार की तलाश में अंडमान, ओडिशा और दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "टीएमसी सरकार के राज में सिर्फ घुसपैठियों  घुसपैठियों की फैक्ट्री फली-फूली है. टीएमसी सरकार फर्जी दस्तावेज बनाने और गाय तस्करी का काम कर रही है. टीएमसी की राजनीति डर पर टिकी हुई है।  पीएम मोदी जी ने आगे कहा कि पहले हल्दिया काम का केंद्र था, लेकिन टीएमसी शासन में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. वे मजबूर होकर दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री ने जनसभा में लोगों से अपील की कि इस बार बंगाल को बदलने के लिए वोट दें ताकि युवाओं को अपने घर में ही रोजगार मिल सके और बंगाल फिर … Read more

बीजेपी की रणनीति: नरोत्तम मिश्रा पर फिर दांव, उपचुनाव की तैयारियों में तेजी

 दतिया  दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती को सहकारिता बैंक भ्रष्टाचार मामले में एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता भी शून्य घोषित कर दी गई है । कोर्ट में राजेंद्र भारती के केस की सुनवाई भी आगे बढ़ गई है। इस बीच बीजेपी ने दतिया में उपचुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की जिससे राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई। राजेंद्र भारती दतिया से पिछले चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराकर ही विधायक बने थे। यही वजह है कि दोनों नेताओं की इस मुलाकात को दतिया में संभावित उपचुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद सियासी चहलकदमी तेज हो गई है। भाजपा ने तो अंदरखेमे अभी से उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच राजधानी में बंद कमरे में तकरीबन आधा घंटे तक चर्चा चली। प्रदेश अध्यक्ष के भोपाल स्थित आवास में यह मुलाकात हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अभी से इस सीट को लेकर गुणा-भाग शुरू कर दिया है। बता दें, दतिया पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है। वे यहां से तीन बार जीते, लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें राजेंद्र भारती से हार मिली थी। नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने पर विचार सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है। यह अलग बात है कि भाजपा का यह दांव जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा किया जा सकता है। फिर यूजीसी पर अब फैसला कोर्ट से आना है, जिसका सभी को इंतजार है। 27 साल पुराने मामले में भारती को कोर्ट से झटका दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीते दिनों 27 साल पुराने एक बैंक फ्रॉड मामले में दोषी पाया था। उन्हें विभिन्न मामलों में अधिकतम तीन साल की सजा मिली। उधर कोर्ट का फैसला आते ही उसी दिन विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी निरस्त कर दी। हालांकि एक्शन नियमों के अनुरूप हुए, लेकिन कांग्रेस ने इसे सरकार की साजिश करार दिया था। सन 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हार गए थे। प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े राजेन्द्र भारती जीतकर विधायक बन गए थे। उन्होंने चुनाव में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से शिकस्त दी थी। तब राजेन्द्र भारती को 88977 वोट मिले थे और नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट प्राप्त हुए थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुप नहीं बैठे। वे इलाके और प्रदेश की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं। दतिया में उपचुनाव होने की स्थिति में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में स्वाभाविक दावेदार होंगे। इधर दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती केस की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है। कोर्ट ने राज्य सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेन्द्र भारती को बीते दिनों सहकारिता बैंक घोटाले में दोषी मानते हुए एमपी एमएलए कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। सजा का फैसला आने के कुछ घंटों बाद ही मध्यप्रदेश विधानसभा के सचिवालय ने राजेन्द्र भारती की सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी। अब राजेन्द्र भारती की विधानसभा की सदस्यता और राजनैतिक भविष्य का फैसला हाईकोर्ट में ही तय होगा।

मल्लिकार्जुन खरगे का बयान: गुजरातियों पर टिप्पणी के बाद मांगी माफी, हमेशा रहेगा सम्मान

नई दिल्ली केरल विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान गुजरात के लोगों पर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उनकी टिप्पणियों को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, लेकिन फिर भी वह खेद व्यक्त करते हैं। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ''हाल ही में केरल में दिए गए मेरे एक चुनावी भाषण की कुछ टिप्पणियों को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। फिर भी, मैं अपनी तरफ से जिम्मेदारी के साथ खेद व्यक्त करता हूं। गुजरात के लोगों के प्रति मेरे मन में हमेश सर्वोच्च सम्मान रहा है और हमेशा रहेगा। वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करना मेरा कभी उद्देश्य नहीं था।'' दरअसल, पिछले दिनों केरल चुनाव के दौरान प्रचार करते हुए खरगे ने एक रैली को संबोधित किया था, जहां पर उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधा था। हालांकि, इस दौरान उन्होंने गुजरात के लोगों का जिक्र किया, जिससे काफी विवाद हुआ। खरगे ने कहा था, "मोदी जी, आप गुजरात के अनपढ़ लोगों को बेवकूफ बना सकते हैं, लेकिन केरल के लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते।" खरगे की टिप्पणी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने व्यापक निंदा की थी और आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी के डीएनए में गुजरात विरोधी जहर बहता है और माफी की मांग की। खरगे की टिप्पणी की निंदा करने वाले भाजपा नेताओं में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल थे। गांधीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि खरगे ने ना केवल गुजरात की जनता का अपमान किया है, बल्कि महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की पवित्र भूमि की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। पटेल ने कहा, ''ये टिप्पणियां बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने (खरगे ने) ना केवल 6.5 करोड़ गुजरातियों का अपमान किया है, बल्कि महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की पवित्र भूमि की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। इन टिप्पणियों से राज्य की जनता का अपमान हुआ है और उनकी गरिमा को भी ठेस पहुंची है।'' वहीं, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि खरगे की टिप्पणियों से 6.5 करोड़ गुजरातियों की भावनाएं आहत हुई हैं। संघवी ने कहा, ''राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी राज्य के सभी नागरिकों का अपमान करना और उनकी बौद्धिक क्षमता पर सवाल उठाना ना केवल अशोभनीय है, बल्कि यह कांग्रेस की पूरी तरह से बीमार मानसिकता को भी उजागर करता है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां गुजरात के प्रति कांग्रेस के डीएनए में मौजूद "जहर" को दर्शाती हैं। संघवी ने कहा, ''अगर आप कांग्रेसियों द्वारा दिए गए बयानों के इतिहास पर थोड़ा ध्यान दें, तो आपको समझ आ जाएगा कि इन लोगों के डीएनए में, खासकर गुजरात और गुजरातियों के प्रति, किस तरह का जहर भरा हुआ है।''

मोहसिना किदवई, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता का दिल्ली में निधन, इंदिरा और राजीव से जुड़ा था खास रिश्ता

नई दिल्ली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके परिवार और दामाद रजी उर रहमान किदवई ने उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोहसिना किदवई ने बुधवार तड़के नोएडा के मेट्रो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय राजनीतिक गलियारे, विशेषकर कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार ने बताया है कि उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई (सुपुर्द-ए-खाक) देने की प्रक्रिया बुधवार शाम करीब 5 बजे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कब्रिस्तान में संपन्न की जाएगी। एक प्रभावशाली राजनीतिक सफर मोहसिना किदवई भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी का एक बेहद सम्मानित और प्रमुख चेहरा रही हैं। उनका एक लंबा और शानदार राजनीतिक करियर रहा है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वे उत्तर प्रदेश के मेरठ निर्वाचन क्षेत्र से छठी लोकसभा के लिए चुनी गईं और सातवीं तथा आठवीं लोकसभा में भी इस सीट पर बनी रहीं। यानी ने तीन बार मेरठ से सांसद रहीं। इसके अलावा, उन्होंने 2004 से 2016 के बीच छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य किया। संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व अपने राजनीतिक जीवन में वे अलग-अलग समय पर संसद के निचले सदन (लोकसभा) और उच्च सदन (राज्यसभा) दोनों की सदस्य रहीं और जनता की आवाज को मजबूती से उठाया। सरकार के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी उनका कद काफी बड़ा था। उन्होंने कांग्रेस की सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्था 'कांग्रेस कार्य समिति' (CWC) और प्रत्याशियों का चयन करने वाली पार्टी की 'केंद्रीय चुनाव समिति' के सदस्य के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी थीं। मोहसिना किदवई को कांग्रेस आलाकमान और विशेषकर गांधी परिवार के बेहद करीब और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। वे कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में से थीं जिन्होंने पार्टी के कई उतार-चढ़ाव देखे और अपना पूरा जीवन पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित कर दिया। उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक, उनके लंबे और बेदाग राजनीतिक योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

दतिया उपचुनाव पर सियासी माहौल गरम, हाईकोर्ट में सुनवाई 15 अप्रैल तक टली

दतिया उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज, हाईकोर्ट में सुनवाई टली प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहुंचे डॉ मिश्रा के  निवास,बंद कमरे में की चर्चा भोपाल  दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की गई है। न्यायाधीश डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के उपरांत यह आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि बैंक फ्रॉड मामले में राजेंद्र भारती को गत 2 अप्रैल को दिल्ली की एमपी/एमएलए कोर्ट ने तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। सजा के बाद उनकी विधायकी समाप्त हो गई, जिससे दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। सुनवाई टलने के साथ ही मध्यप्रदेश की राजनीति, विशेषकर भोपाल में, हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निवास पहुंचकर उनसे करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव की संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से डॉ. मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है, जहां से वे तीन बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान परिस्थितियों में सीट रिक्त होने के कारण उपचुनाव की स्थिति बन रही है, और ऐसे में डॉ. मिश्रा के फिर से मैदान में उतरने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अब 15 अप्रैल की सुनवाई और उसके बाद के घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो दतिया उपचुनाव की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

पवन खेड़ा की मुसीबत बढ़ी, दिल्ली और असम पुलिस ने दी घर पर दस्तक

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी सरमा पर लगाए गए आरोपों को लेकर बड़ी मुसीबत में घिरते दिख रहे हैं. इस मामले में असम पुलिस की टीम आज सुबह दिल्ली पहुंची और खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर छापा मारा. दिल्ली पुलिस भी असम पुलिस की मदद के लिए इस कार्रवाई में शामिल रही. हालांकि खबर है कि पवन खेड़ा इस समय अपने आवास पर मौजूद नहीं थे. उधर असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने दावा किया कि पवन खेड़ा हैदराबाद भाग गए हैं।  वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सीएम हिमंत पर प्रहार किया है. उन्होंने कहा, ‘हिमंत बिस्व सरमा आप पर करप्शन के गंभीर आरोप हैं और आप साफ़ तौर पर घबरा गए हैं. आप नाम लेकर बुलाने और डराने-धमकाने के बजाय पवन खेड़ा के लगाए आरोपों का जवाब क्यों नहीं देते? अपनी नौटंकी बंद करो, क्योंकि अब आप अपना करप्शन नहीं छिपा सकते।  क्या है पूरा मामला? दरअसल पवन खेड़ा ने रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों यूएई, एंटीगुआ और बारबुडा, मिस्र का पासपोर्ट है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के नाम दुबई में दो संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया है।  वहीं रिनिकी सरमा ने पवन खेड़ा के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन पर ‘खराब तरीके से गढ़े गए’ दस्तावेज फैलाने का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, रिनिकी सरमा ने कहा था कि न सिर्फ किए गए दावों में, बल्कि शेयर किए जा रहे या कहे जा रहे डॉक्यूमेंट्स में भी बड़ी कमियां थीं।  खेड़ा पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा, ‘आपकी सिर्फ तपस्या में ही नहीं, एआई जेनरेशन और फोटोशॉपिंग में भी कमी रह गई. मुझे उम्मीद थी कि एक राष्ट्रीय पार्टी का प्रवक्ता बुनियादी उचित जांच करेगा, न कि मनगढ़ंत पासपोर्ट और डॉक्यूमेंट्स की खराब इमेज सर्कुलेट करेगा.’ उन्होंने कहा कि इस मामले को अब कानूनी तौर पर निपटाया जाएगा. उन्होंने खेड़ा और कांग्रेस पार्टी को टैग करते हुए कहा, ‘अब मैं कानून को अपना काम करने दूंगी. क्रिमिनल चार्ज लगाए जा रहे हैं. हम इसे कोर्ट में जारी रख सकते हैं।  वहीं मुख्‍यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने पवन खेड़ा के आरोपों पर कहा था कि वह और उनकी पत्नी अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों प्रकार के मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे. मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्‍ट में पलटवार करते हुए कहा कि पवन खेड़ा की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पार्टी के भीतर गहरे असंतोष और घबराहट को दर्शाती है. जैसे-जैसे असम एक ऐतिहासिक जनादेश की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है, इस तरह के हताश और बेबुनियाद हमले केवल उनके कमजोर होते जनाधार को ही उजागर करते हैं।  सीएम ने कहा कि मैं उनके द्वारा लगाए गए हर आरोप को पूरी तरह से खारिज करता हूं. ये दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित झूठ हैं, जिनका मकसद असम की जनता को गुमराह करना है. मेरी पत्नी और मैं अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों तरह के मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे. उनके इन गैर-जिम्मेदाराना और मानहानिकारक बयानों के लिए उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाएगा।   

‘आप’ ने पद से हटाया तो यूपी में हुई पूजा, राघव चड्ढा की तस्वीर का तिलक कर दीर्घायु की कामना

नई दिल्ली योगी यूथ ब्रिगेड यूपी के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय कुमार ने आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्ढा की तस्वीर की फोटो की आरती उतारी। उन्होंने कहा कि आज देश को राघव चड्ढा जैसे जनप्रतिनिधियों और नेताओं की जरूरत है। ऐसे ईमानदार नेता बहुत कम संख्या में देखने को मिलते हैं। इसी कारण हमने आज तस्वीर के समक्ष उनकी पूजा-अर्चना की, तिलक किया और उनके दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना भगवान से की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गरीबों, मध्यमवर्गीय परिवारों और आम जनता के हित की आवाज उठाता है, वह सदैव पूजनीय और वंदनीय होता है। अन्य जनप्रतिनिधियों को भी राघव चड्ढा जैसे नेताओं से सीख लेने की आवश्यकता है। आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी का नाम ‘आम आदमी पार्टी’ है, वही आम आदमी की आवाज उठाने वाले राघव चड्ढा पर कार्रवाई कर रही है। यह दर्शाता है कि पार्टी आम जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि वह खुले मंच से आम आदमी पार्टी और उसके कुछ नेताओं का विरोध करते हैं। कुंवर अजय कुमार ने कहा कि वह राघव चड्ढा का समर्थन करते हैं और जल्द ही उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर समर्थन देंगे। उन्होंने जनता से भी आह्वान किया कि ऐसे नेताओं का साथ दें और उन्हें अकेला न छोड़ें। आरोप लगाया कि आज टैक्स के नाम पर मध्यमवर्गीय परिवारों और मजदूरों का शोषण हो रहा है। निजी अस्पतालों और निजी स्कूलों द्वारा भी लोगों से अधिक वसूली की जा रही है। इन सभी मुद्दों को राघव चड्ढा समय-समय पर उठाते रहे हैं, और उनके खिलाफ कार्रवाई करना निंदनीय है। अंत में उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा जैसे नेता देश के लिए जरूरी हैं और वे उनके लिए पूजनीय एवं वंदनीय हैं। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटाया दरअसल, आम आदमी पार्टी ने बीते गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटा दिया। पार्टी ने उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त किया। चड्ढा पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ राघव चड्ढा के कथित मतभेदों को लेकर चर्चा जोरों पर थी। पार्टी नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजा गया था, जिसमें उच्च सदन में पार्टी के उप-नेता पद से चड्ढा को हटाने का अनुरोध किया गया था। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सदन के नेता संजय सिंह ने पत्रकारों से कहा, राज्यसभा सचिवालय को पार्टी के इस फैसले से अवगत करा दिया गया है। हालाकि आप नेताओं ने उन दावों को खारिज किया कि चड्ढा को पार्टी सांसदों के कोटे के तहत राज्यसभा में बोलने से रोका जा रहा था।