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मुकुल रॉय की विधायकी रद्दीकरण पर SC ने लगाई रोक, TMC को ED केस में बड़ी राहत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 जनवरी) को कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा के विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। I-PAC के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC को झटका मिलने के बाद टॉप कोर्ट से यह बड़ी राहत है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने हाई कोर्ट के 13 नवंबर 2025 के आदेश पर रोक लगा दी है। दलबदल विरोधी कानून का सहारा लेते हुए उच्च न्यायालय ने पहली बार दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी निर्वाचित सदस्य को अयोग्य घोषित करने के लिए अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया था। BJP के टिकट पर जीते, TMC में चले गए रॉय मई 2021 में कृष्णानगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए थे लेकिन उसी वर्ष जून में विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उनकी सदस्यता को विधानसभा अध्यक्ष के पास चुनौती दी थी लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बिमान बोस ने उनकी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मुकुल रॉय भाजपा के ही विधायक हैं। स्पीकर के फैसले को HC ने दिया था विकृत करार बाद में शुभेंदु अधिकारी और भाजपा विधायक अंबिका रॉय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बोस के फैसले को ‘विकृत’ करार दिया था, जिन्होंने दल-बदल विरोधी कानून के तहत रॉय को विधायक के रूप में अयोग्य ठहराने की याचिका पर अपने फैसले में कहा था कि वह भाजपा के ही विधायक हैं। HC ने लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के रूप में रॉय के नामांकन को भी रद्द कर दिया था क्योंकि सदन की उनकी सदस्यता 11 जून, 2021 से समाप्त मानी गई थी। पहली बार HC ने संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर MLA को दिया अयोग्य करार शुभेंदु अधिकारी के वकील बिलवादल बनर्जी ने तब कहा था, ‘‘देश में यह पहली बार है कि किसी उच्च न्यायालय ने दल-बदल विरोधी कानून (जो 1985 में संविधान के 52वें संशोधन द्वारा लागू किया गया था) के तहत किसी विधायक को अयोग्य ठहराने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है। अदालत को यह फैसला सुनाने में भले ही कुछ समय लगा हो। लेकिन, यह सत्य और धर्म की विजय है।’’ अधिकारी ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी के उस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें रॉय को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने के अनुरोध संबंधी उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।  

चाचा-भतीजा साथ आए, फिर भी नहीं बदला समीकरण; एका वाले शहरों में NCP का कमजोर प्रदर्शन

पुणे BMC समेत महाराष्ट्र की 29 महा नगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे आने शुरू हो गए हैं। ताजा रुझानों के मुताबिक, महाराष्ट्र के लगभग सभी बड़े शहरों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है। BMC में पहली बार ठाकरे परिवार के हाथ से सत्ता फिसलती नजर आ रही है और भाजपा-शिंदे सेना गठबंधन बहुमत की तरफ बढ़ती दिख रही है। दोपहर 12.30 बजे तक BMC की 227 में से 167 सीटों पर आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा गठबंधन को 102 सीटें मिलती दिख रही हैं। BMC में उद्धव सेना की अगुवाई ाले गठबंधन को 57 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलती दिख रही हैं। बड़ी बात यह है कि देवेंद्र फडनवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की NCP के खाते में यहां एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है।   दूसरी तरफ, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़, जहां चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) की NCP ने गिले-शिकवे भुलाकर गठबंधन किया, वहां भी भाजपा उन पर भारी पड़ती दिख रही है। इन दोनों प्रमुख शहरों में एनसीपी के दोनों गुटों ने "परिवार की एकजुटता" और विकास के नाम पर आपसी गठबंधन किया है। दोनों ने मिलकर पुणे नगर निगम (PMC) के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया था। पुणे में भाजपा सबसे आगे ताजा रुझानों के मुताबिक, पुणे की 165 सीटों में से 122 पर आए रुझानों के मुताबिक भाजपा गठबंधन 90 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि दोनों NCP को मिलाकर सिर्फ 20 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें अजित पवार गुट को 20 और शरद पवार गुट को 00 सीटें मिलती दिख रही हैं। उद्धव गुट वाले गठबंधन को कुल 10 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें सभी 10 कांग्रेस को जबकि उद्धव सेना और MNS को इस गठबंधन में कोई सीट मिलती नहीं दिख रही है। शरद पवार की NCP का बुरा हाल पिंपरी-चिंचवाड़ की बात करें तो यहां कुल 128 सीटों में से 119 पर रुझान आ गए हैं। ताजा रुझानों के मुताबिक, यहां भी पवार फैमिकी की एका पर भाजपा भारी पड़ती दिख रही है। भाजपा गठबंधन को यहां 70 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि NCP गठबंधन को 41 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें अजित पवार गुट को 40 जबकि शरद पवार गुट को सिर्फ एक सीट मिलती दिख रही है। उद्धव ठाकरे की सेना को यहां एक सीट भी मिलती नहीं दिख रही, जबकि उनके भाई राज ठाकरे की MNS को एक सीट मिलती दिख रही है। कांग्रेस और प्रकाश आंबेडकर के गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिलती दिख रही है।

‘वर्क फ्रॉम होम करें ठाकरे भाई’— BMC चुनाव संकेतों पर शिवसेना की सियासी चुटकी

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की 227 वार्डों की मतगणना जारी है। अब तक के रुझानों के मुताबिक, बीएमसी में भाजपा गठबंधन 118 सीटों पर आगे चल रहा है। ठाकरे भाइयों को 69 सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस को 12 सीटों पर बढ़त हासिल है। इस बीच, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने महायुति की महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में बड़ी जीत का भरोसा जताया है। शाइना ने विपक्षी पार्टी के बार-बार लगाए जाने वाले आरोपों पर सवाल उठाया और ठाकरे से स्क्रिप्ट बदलने की सलाह दी।   शिवसेना लीडर ने कहा, 'उद्धव ठाकरे को अपना स्क्रिप्ट राइटर बदलना चाहिए और कोई नया बहाना ढूंढना चाहिए। हार-जीत का फैसला जनता करती है। संदेश यह है कि जो लोग जमीन पर काम करते हैं, उन्हें मौका मिलता है। जो घर से काम करते हैं, उन्हें घर पर ही रहना पड़ता है।' उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राज्य में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया और शिवसेना (यूबीटी) पर राज्य के विकास में विफल रहने का आरोप लगाया। ठाकरे भाइयों पर कसा तंज महायुति के प्रदर्शन पर शाइना एनसी ने कहा, '25 सालों में उन्होंने कुछ नहीं किया। लेकिन हमारे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दो चरणों में गड्ढों की समस्या हल की। उन्होंने 26 भ्रष्ट ठेकेदारों को जेल भेजा। पिछली सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं दे पाई। हमने समय पर 7 प्रदान किए। विकास के मामले में हमने 5000 इलेक्ट्रिक बसें, 435 किमी मेट्रो कनेक्टिविटी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की हैं।' उन्होंने आगे कहा कि BMC चुनावों के लिए गठबंधन बनाने वाले ठाकरे भाइयों को वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और घर पर रहना चाहिए। वर्क फ्रॉम होम का तंज शाइना एनसी ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि घर बैठे काम हो सकता है, उनके लिए यह समय राजनीति और प्रदर्शन का है, न कि सिर्फ सरनेम के आधार पर वोट कमाने का। हमारे नेता एकनाथ शिंदे आम लोगों के प्रति समर्पित रहे और उनके लिए काम किया, जिससे उन्होंने उनका विश्वास जीता। 2017 के चुनावों में अविभाजित शिवसेना ने कुल 227 में से 84 सीटें जीती थीं। उस समय भाजपा के साथ गठबंधन में आधे से ज्यादा 114 सीटें हासिल की थीं, जिसमें भाजपा ने 82 सीटें जीतीं। अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 9 और कांग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं। हाल ही में संपन्न बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में मतदान प्रतिशत 52.94% रहा।

फ्लॉप रहा मुंबई कांग्रेस का शो, लेकिन सियासी गणित में उलझे ठाकरे और पवार

मुंबई   महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों और रुझानों ने राज्य में शक्ति संतुलन के नए संकेत दिए हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बड़ी बढ़त के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, वहीं कांग्रेस की स्थिति विरोधाभासों से भरी नजर आ रही है। कांग्रेस मुंबई जैसे बड़े महानगरों में तो संघर्ष कर रही है, लेकिन पूरे राज्य के आंकड़ों में वह ठाकरे और शरद पवार जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों से काफी आगे निकल गई है। 29 नगर निगमों के अब तक के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 910 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 213 और कांग्रेस के खाते में 171 सीटें जाती दिख रही हैं। कांग्रेस भले ही भाजपा से काफी पीछे है, लेकिन वह राज्य की तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जो ठाकरे और शरद पवार के गुटों के लिए चिंता का विषय है। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के प्रभावशाली कुल आंकड़े में मुंबई (BMC) का योगदान न के बराबर है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और शिक्षा के केंद्र पुणे दोनों ही जगह कांग्रेस महज 5-5 सीटों पर बढ़त बना पाई है। पिंपरी-चिंचवाड़, वसई-विरार, उल्हासनगर, नांदेड़ वाघाला, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले और कल्याण-डोंबिवली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। मुख्यमंत्री शिंदे के गढ़ ठाणे में कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर आगे है, जबकि नवी मुंबई में यह शून्य पर अटकी है। जहां कांग्रेस ने मारी बाजी भले ही भाजपा ने प्रमुख शहरों पर कब्जा किया हो, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नगर निगमों में अपना परचम लहराया है। लातूर में कांग्रेस 21 वार्डों में बढ़त के साथ सबसे आगे है। अमरावती और चंद्रपुर, दोनों जगहों पर पार्टी 13 और 12 वार्डों के साथ शीर्ष पर है। भिवंडी निजामपुर में भी कांग्रेस 12 वार्डों के साथ अन्य दलों से आगे निकल गई है। इसके अलावा, नागपुर (22 वार्ड), कोल्हापुर (23 वार्ड) और अकोला (15 वार्ड) में कांग्रेस दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ी है। पवार और ठाकरे का गिरता ग्राफ चुनाव के रुझानों ने क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए कड़े संदेश दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर की जंग में अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहे हैं। शरद पवार के गुट का प्रभाव अब कुछ ही क्षेत्रों तक सिमटता दिख रहा है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना मुंबई में तो एक मजबूत दावेदार है, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में उनकी स्थिति कांग्रेस और एनसीपी (अजीत गुट) से भी नीचे चली गई है।  

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम 20 जनवरी को होगा घोषित, 19 जनवरी को होगा नामांकन

नई दिल्ली  भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान 20 जनवरी को किया जाएगा, जबकि नामांकन 19 जनवरी को दाखिल किया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी के 'संगठन पर्व' के अंतर्गत राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है. बता दें कि नितिन नबीन को भाजपा ने पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुना है. इस वजह से ये तय माना जा रहा कि नितिन नबीन ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे. इसके साथ ही वो सबसे लंबे समय तक पार्टी अध्यक्ष का दायित्व संभालने वाले जेपी नड्डा का स्थान लेंगे. नितिन नबीन 19 जनवरी को नामांकन दाखिल करेंगे भाजपा में अहम संगठनात्मक बदलाव के क्रम में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक के तौर पर उपस्थित रहने की संभावना है. साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. नितिन नबीन के प्रस्तावक बन सकते हैं प्रधानमंत्री पीएम मोदी की मौजूदगी को भाजपा की संगठनात्मक और स्थिरता पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है. नामांकन प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए उसके स्थापित आंतरिक संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है. कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय नेतृत्व के सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी के अलावा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हो सकते हैं.

‘फर्जी विकास की तस्वीर’— जयराम रमेश का आरोप, महंगाई-समायोजित जीडीपी आंकड़े गुमराह करने वाले

नई दिल्ली कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि महंगाई समायोजित (इन्फ्लेशन-एडजस्टेड) जीडीपी ग्रोथ रेट के जो बड़े-बड़े आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, वे देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर नहीं दिखाते और आम लोगों को गुमराह करते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई को ध्यान में रखकर जो जीडीपी ग्रोथ दर बताई जा रही है, वह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर इसलिए दिखाया जा रहा है क्योंकि जिन प्राइस डिफ्लेटर्स (कीमतों के समायोजन के आधार) का इस्तेमाल किया गया है, वे असामान्य रूप से बहुत कम हैं। जयराम रमेश ने कहा, "महंगाई समायोजित जीडीपी वृद्धि दर के हेडलाइन आंकड़े धोखा देने वाले हैं। जब प्राइस डिफ्लेटर्स बहुत कम रखे जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वृद्धि दर ज्यादा दिखाई देती है।" उनके मुताबिक सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकती है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है।उन्होंने दावा किया कि कम प्राइस डिफ्लेटर्स दरअसल कमजोर उपभोक्ता मांग का संकेत हैं। रमेश ने कहा, "कम कीमतों का आंकड़ा सरकार के लिए खुशी की बात हो सकता है, लेकिन इसकी असली वजह यह है कि आम लोगों की आय नहीं बढ़ी है। आय में बढ़ोतरी केवल समाज के सबसे ऊपरी तबके तक सीमित है, जबकि बाकी आबादी की आमदनी ठहरी हुई है।" कांग्रेस नेता ने कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी कंपनियों के पास इस समय भारी मात्रा में नकदी मौजूद है। कॉरपोरेट इंडिया के पास रिकॉर्ड स्तर का कैश है। मुनाफा भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और कर्ज ऐतिहासिक रूप से सबसे कम है। इसके बावजूद कंपनियां नए निवेश और क्षमता विस्तार में रुचि नहीं दिखा रही हैं। जयराम रमेश ने कहा कि आने वाले केंद्रीय बजट को इस सवाल का सीधा जवाब देना चाहिए कि कंपनियां उत्पादन बढ़ाने में निवेश करने के बजाय वित्तीय बाजारों में संपत्ति प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान क्यों दे रही हैं। उनके मुताबिक देश के निवेश माहौल को एक बड़े 'बूस्टर डोज' की जरूरत है। उन्होंने सरकार की नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में लगातार की गई कटौतियां भी मांग बढ़ाने में नाकाम रही हैं। टैक्स कट्स की पूरी श्रृंखला मांग को बढ़ाने में पूरी तरह विफल रही है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि समस्या सिर्फ बजट या कर नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के पूरे राजनीतिक-आर्थिक मॉडल से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि बढ़ता बाजार एकाधिकार और सरकार का संरक्षण निजी निवेश और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को हतोत्साहित कर रहा है, जिसका असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

BMC चुनाव: Exit Poll ने दिखाया बड़ा उलटफेर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को झटका

मुंबई महाराष्ट्र में मुंबई समेत राज्य की 29 नगर निगमों के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वोटिंग शाम 5.30 बजे खत्म हुई. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, कुल बीएमसी के 227 वार्ड में से बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं यूबीटी को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं. महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित होंगे. महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित होंगे. महाराष्ट्र में मुंबई समेत राज्य की 29 नगर निगमों के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वोटिंग शाम 5.30 बजे खत्म हुई. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, बीएमसी के कुल 227 वार्ड में से बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं यूबीटी को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं. मुंबई के साथ-साथ ठाणे, नवी मुंबई, उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी-निजामपुर, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, पनवेल, नासिक, मालेगाव, अहिल्यानगर, जलगाव, धुले, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, सोलापुर, कोल्हापुर, इचलकरंजी, सांगली-मिराज-कुपवाड, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़-वाघाला, परभणी, जालना, लातूर, अमरावती, अकोला, नागपुर और चंद्रपुर नगर निगमों में भी वोटिंग हुई. बृहन्मुंबई महानगरपालिका के 227 वार्डों के लिए इस बार 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे. नतीजों की घोषणा कल यानी शुक्रवार को होगी. सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी.   मुंबई बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने कहा कि ठाकरे परिवार अब महाराष्ट्र के लोगों के साथ वह कनेक्शन नहीं रखता, जो पहले कभी हुआ करता था. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, बीएमसी चुनाव में यूबीटी गठबंधन को 58 से 68 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिल सकती हैं.

मार्कर इंक पर बवाल: बीएमसी चुनाव में धांधली का दावा, राज ठाकरे ने चुनाव आयोग को घेरा

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया जारी है। इस बीच कुछ वोटर्स ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि उनके अंगुलियों पर लगाया गया मार्कर का निशान आसानी से साफ हो जाता है। इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने भी चिंता जाहिर की है। वोट डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है। सरकार ने तय कर लिया है कि इस चुनाव को किसी भी तरह जीतना है। ये वही तरीका है जो उन्होंने विधानसभा चुनावों में अपनाया था। पहले अमिट स्याही इस्तेमाल होती थी, लेकिन अब मार्कर का उपयोग किया जा रहा है। ये मार्कर सैनेटाइजर से आसानी से साफ हो जाता है। ऐसे चुनाव जीतकर सत्ता में आना लोकतंत्र नहीं कहला सकता। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए पूछा कि विकास की बात करने वाले लोग अगर वोट की सच्चाई को मिटाकर दोबारा वोट डाल सकते हैं, तो ये किस तरह का विकास है? राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार और आयोग मिलकर लोकतंत्र के नियमों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बीएमसी चुनाव में सत्ता को जीत मिल सके। उन्होंने वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई। राज ठाकरे का आरोप है कि मुख्यमंत्री फडणवीस की सरकार जानबूझकर विपक्ष को हाशिए पर डाल रही है। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि जो सिस्टम है, उसमें सत्ता पक्ष किसी भी हद तक जीतना चाहता है। मनसे प्रमुख का कहना है कि जब हमने डुप्लिकेट वोटर्स का मुद्दा उठाया, तो चुनाव आयोग ने दूरी बना ली। वीवीपीएटी मशीनों पर सवाल उठाए, तो अनसुना कर दिया गया। राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद भी उम्मीदवार घर-घर जाकर मिल रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने सत्ताधारी पार्टी को पैसे बांटने की सुविधा देने के लिए ये अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन पूरी तरह सत्ता पक्ष के हाथ की कठपुतली बना हुआ है। ये मरते हुए लोकतंत्र का संकेत है। दरअसल, इस मामले में मामला तब और गंभीर हो गया, जब दादर के छाबिलदास स्कूल में एक डुप्लिकेट वोटर पकड़ा गया। इसके बाद राज ठाकरे ने अपने समर्थकों और शिवसेना कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और वोटिंग बूथों की निगरानी करें ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि धोखाधड़ी से चुनाव जीतना असली जीत नहीं है। उनकी पार्टी ऐसे गड़बड़ियों को रोकने के लिए काम कर रही है, लेकिन लोकतंत्र की लंबी उम्र को लेकर गहरी चिंता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि चुनाव आयोग ही चुनाव से जुड़ी सभी चीजों का फैसला करता है। मार्कर पेन पहले भी इस्तेमाल होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर संदेह है तो आयोग अलग पेन इस्तेमाल करे। यहां तक कि ऑयल पेंट भी इस्तेमाल कर सकते हैं। फडणवीस ने यह भी चेतावनी दी कि संस्थान और चुनाव प्रक्रिया पर लगातार शक करना सही नहीं है। बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने जांच का आदेश दिया। कई शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने नए निर्देश दिए कि वोटर्स की अंगुलियों पर जो इंक लगाई जाए, वह त्वचा में अच्छी तरह से लगे ताकि आसानी से न मिट सके। नगर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने पारंपरिक इंडलेबल इंक की जगह मार्कर किट उपलब्ध कराई थी। चुनाव आयोग का कहना है कि ये मार्कर 2012 से हर लोकल बॉडी चुनाव में इस्तेमाल हो रहे हैं।

मायावती ने अपने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड, सरकार में मिलेगा पूरा मान-सम्मान

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बड़ा सियासी दांव चला. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों 2025 में शीतकालीन सत्र में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की. ब्राह्मण विधायकों ने बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया है.  इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की बैठक हुई थी. हाल के ही दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है. बसपा सरकार बनने पर पार्टी उन्हें पूरा सम्मान देगी. मायावती ने कहा कि ‘हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया. ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं खाना चाहिए. ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए बीएसपी की सरकार जरूरी है.’ मायावती ने क्षत्रिय विधायकों का भी जिक्र कर कहा कि उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ. किसी को भी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए. बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का मुद्दा नहीं उठा. हमारी सरकार में कभी कोई दंगा नहीं हुआ. हमारी सरकार ने सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय के मूल सिद्धांत पर काम करती रही है. इतना ही नहीं हमारी सरकार में कानून व्यवस्था भी मजबूत रही है.मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में जो योजनाएं लाई गईं उन्हीं को आगे के सरकारों ने नाम बदलकर आगे बढ़ाया है. एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे बनाने का रोडमैप उनकी सरकार में ही बन गया था.  एक आध तो बन भी गए थे. उन्होंने बहुजन समाज को भी चेताते हुए कहा कि जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना है. अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान मायावती ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और EVM में धांधली और बेइमानी नहीं की जाती है तो परिणाम बेहतर होंगे. हम स्तर पर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं और क्या पता बाद में EVM को हटा दिया जाए जैसे अन्य कई देशों में हुआ है. हमारी पार्टी का गठबंधन करके चुनाव लड़ने का अनुभव ये रहा है कि इससे पार्टी को नुकसान होता है और गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टी को लाभ मिल जाता है. क्योंकि दलित वोटबैंक तो दूसरी पार्टी को मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी का वोट हमारी पार्टी को नहीं मिलता है.  हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान सभा और लोक सभा चुनाव अकेले लड़ना बेहतर समझा है, और हम कोई भी चुनाव गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे. आगे चलकर जब पूरा भरोसा हो जाएगा कि बसपा से गठबंधन करके वो हमारी पार्टी में भी अपना वोट ट्रासंफर करा सकती है तो सोचा जा सकता, लेकिन उसमें वर्षों लगेंगे.

BJP में छिंदवाड़ा गुटबाजी पर प्रदेश अध्यक्ष का सख्त एक्शन, बंटी साहू और शेषराव यादव को भोपाल बुलाया

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में छिंदवाड़ा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां भाजपा में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई है। लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच चल रही खींचतान को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दोनों नेताओं को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में तलब किया। दोनों को साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया। छिंदवाड़ा जिले में भाजपा की जिला इकाई में लंबे समय से गुटबाजी चल रही है। सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। जिलाध्यक्ष की बैठकों में सांसद शामिल नहीं हो रहे थे, जबकि शेषराव यादव सांसद के खिलाफ बयानबाजी कर रहे। यह विवाद जिला कार्यकारिणी गठन, पदों के बंटवारे और संगठनात्मक फैसलों को लेकर गहरा गया था।  भोपाल में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं से कहा कि लंबे संघर्ष के बाद पार्टी ने छिंदवाड़ा में सफलता हासिल की है, लेकिन वर्तमान स्थिति पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। दोनों को पार्टी हित में मतभेद भुलाकर एकजुट काम करने का निर्देश दिया गया। संगठन महामंत्री हितानंद ने मध्यस्थता की और खींचतान तुरंत खत्म करने की चेतावनी दी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, बैठक सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने पार्टी निर्देश मानने का आश्वासन दिया है।