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15 जनवरी तक कांग्रेस की पंचायत-वार्ड टीम तैयार, भोपाल में हरीश चौधरी ने संगठन सुधार पर सवाल उठाए

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में पार्टी ने जमीनी स्तर की तैयारियां तेज करने का मन बना लिया है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में मास कनेक्ट प्रोग्राम और पंचायत एवं वार्ड कमेटियों के गठन को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने, जनसंपर्क को मजबूत करने एवं आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में  एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि आज की बैठक में मास कनेक्ट प्रोग्राम तथा पंचायत एवं वार्ड कमेटियों के गठन को लेकर गंभीर एवं व्यापक चर्चा हुई।  गांव से बूथ, बूथ से जिला तक पहुंचेगा संगठन बैठक में तय किया गया कि गांव चलो–बूथ चलो अभियान के तहत गांव से कार्यकर्ता बूथ तक पहुंचेंगे। बूथ से मंडल, मंडल से ब्लॉक और ब्लॉक से जिला स्तर तक संगठनात्मक संवाद किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के कार्यक्रमों के साथ-साथ भाजपा सरकार की असफलताओं को तथ्यों के साथ जनता के सामने रखा जाएगा। यह अभियान हर छह माह में नियमित रूप से चलाया जाएगा। 65 हजार बीएलए को लेकर सवाल प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने बैठक में कहा- “हमने 65 हजार बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए हैं, अगर उन्हें बुलाएंगे तो क्या वे आएंगे?” सूत्रों के मुताबिक उनका आशय यह था कि नियुक्तियां वास्तविक और सक्रिय हैं या नहीं। संगठन पदाधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और बुलाने पर सभी बीएलए सक्रिय रहेंगे। चौधरी ने कहा कि SIR की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और इसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, कई पात्रों के नाम हटाए गए, जबकि कुछ अपात्र नाम अब भी सूची में बने हुए हैं। गांव चलो-बूथ चलो अभियान का ऐलान कांग्रेस ने मतदाता अधिकारों की रक्षा, जनसंपर्क बढ़ाने और सरकार के खिलाफ मुद्दों को उठाने के लिए प्रदेशभर में गांव चलो-बूथ चलो अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस अभियान की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए प्रदेश प्रभारी के नेतृत्व में प्रदेश और संभाग स्तर की समितियां अगले कुछ दिनों में गठित की जाएंगी। एसआईआर पर सवाल, चुनावी निष्पक्षता पर उठे मुद्दे प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने एसआईआर प्रक्रिया को निष्पक्ष न बताते हुए गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ रही है। साथ ही भाजपा पर संविधान और महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत काम करने का आरोप भी लगाया गया। 1 जनवरी से 15 फरवरी तक संगठन सृजन अभियान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक पूरे प्रदेश में पंचायत, वार्ड और मंडल स्तर पर संगठन का पुनर्गठन पूरा कर लिया जाएगा। उनका कहना था कि यह कांग्रेस के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब 71 जिला कांग्रेस अध्यक्षों और सभी ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति पारदर्शी संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत एक साथ की गई है। 2023 चुनावों पर बड़ा आरोप जीतू पटवारी ने 2023 विधानसभा चुनावों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करीब 60 विधानसभा सीटों पर जीत के अंतर से कहीं ज्यादा वोट एसआईआर प्रक्रिया में काटे गए, जिससे यह संदेह मजबूत होता है कि चुनाव में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ हुई। उन्होंने इसे वोट चोरी करार दिया। पटवारी-सिंघार के कार्यकाल की सराहना, संगठन पर भरोसा बैठक के बाद नेताओं ने बताया कि दो साल के कार्यकाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के संगठनात्मक कामकाज की सर्वसम्मति से सराहना की गई। पंचायत और वार्ड कमेटियों के गठन, मास कनेक्ट प्रोग्राम और बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर सहमति बनी। दिग्विजय सिंह ने रखी गांव-गांव संपर्क की रूपरेखा बैठक में दिग्विजय सिंह ने गांव-गांव चलाए जाने वाले संपर्क कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आमजन से सीधा संवाद बढ़ाना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यकर्ता बूथ तक जाएं। रात्रि विश्राम गांवों में करें। लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनें। भाजपा सरकार की नीतिगत और प्रशासनिक विफलताओं को तथ्यों के साथ रखें। इस प्रस्ताव पर बैठक में सर्वसम्मति बनी। 22 जनवरी तक दावा-आपत्ति में उतरेगा पूरा संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिल्ली और प्रदेश कांग्रेस की टीम ने प्रस्तुतीकरण दिया। तय किया गया कि 22 जनवरी तक चलने वाली दावा-आपत्ति प्रक्रिया में वरिष्ठ नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक मैदान में उतरेंगे, हर मतदाता तक पहुंचकर यह जांच की जाएगी कि नाम सही हटाया गया या गलत। 60 सीटों पर वोट चोरी का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा- “जिन विधानसभा सीटों पर भाजपा को एक लाख, पचास हजार या चालीस हजार वोटों से जीत मिली, उन्हीं सीटों पर सबसे ज्यादा नाम काटे गए।” पटवारी ने दावा किया कि ऐसा करीब 60 विधानसभा सीटों पर हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 2023 का चुनाव वोट चोरी के जरिए जीता गया। उन्होंने कहा कि न्यायालय जाने सहित सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और कांग्रेस का हर कार्यकर्ता बीएलए के साथ मिलकर मतदाता सूची के सत्यापन में जुटेगा। 2027 की तैयारी अभी से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि “सरकार ऐसे ही नहीं बनेगी। अगले एक साल में संगठन को बूथ स्तर तक जाना होगा। 2027 से सभी को पूरी तरह चुनाव में जुटना होगा।” एसटी-एससी और अल्पसंख्यक साधे तो सरकार तय बैठक में विधायक फूलसिंह बरैया ने कहा- अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग को साधना होगा। यदि ये वर्ग हमारे साथ आ गए, तो सरकार बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।    

राजनीति में बड़ा मोड़: बंगाली अभिनेत्री ने थामा टीएमसी का दामन, भाजपा से मोहभंग

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा को झटका लगा है। बंगाली एक्ट्रेस और पूर्व भाजपा नेता पर्णो मित्रा शुक्रवार को टीएमसी में शामिल हो गई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी जर्नी हमेशा हम जैसी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। ममता सरकार में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और पार्टी प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने पर्णो मित्रा को पार्टी में शामिल कराया। कोलकाता में आईएएनएस से बातचीत में टीएमसी नेता और अभिनेत्री पर्णो मित्रा ने कहा कि मुझे ममता बनर्जी के काम करने का तरीका पसंद है। यही वजह है कि लोगों के हित के लिए मैं भी आज उनके साथ जुड़ी हूं। चुनाव से पहले टीएमसी जॉइन करने पर उन्होंने कहा कि इसका कारण हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। वे बंगाल के लोगों, खासकर महिलाओं के लिए बहुत अच्छा काम कर रही हैं। वे साथ काम करने के लिए सबसे अच्छी इंसान हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि जब मैंने सोचा था कि मैं राजनीति में आऊंगी, तो मैं सिर्फ जनता के हित के लिए काम करूंगी। शायद मुझे जितनी आकांक्षा थी, उतना कार्य करने का मौका नहीं मिला। चूंकि मैं अब टीएमसी के साथ हूं तो अपने लोगों के लिए काम करने में काफी खुशी होगी। उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा कि हम महिलाएं ममता बनर्जी की जर्नी से काफी प्रेरित हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए काफी काम किया है। मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि पर्णो मित्रा ने खुद कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि वे भाजपा में शामिल होकर काम कर पाएंगी, लेकिन सच यह है कि भाजपा में कोई काम नहीं कर सकता, इसीलिए वे हमारी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई हैं।

अल्पसंख्यकों पर हिंसा का मुद्दा: बांग्लादेश को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली  बांग्लादेश के अंदर हिंदुओं समेत अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत में आक्रोश है। कांग्रेस पार्टी ने भी बांग्लादेश के हालातों पर चिंता जाहिर की है और कहा कि सरकार को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह चिंता की बात है कि हर दिन वहां जान-माल पर हमलों की खबरें आती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि भारत सरकार इस दिशा में कोई खास कदम उठा रही है।" कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया और कहा कि इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि भारत को इसके खिलाफ आवाज उठाते रहना चाहिए, दबाव बनाना चाहिए और हर मुमकिन तरीका अपनाना चाहिए। तारिक अनवर ने कहा कि जब भी किसी देश में किसी भी समुदाय के खिलाफ अन्याय होता है, तो भारत को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने सरकार पर सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने कहा, "क्या यहां विपक्ष की गलती है? अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के जरिए बांग्लादेश पर दबाव क्यों नहीं डाला जा रहा है? सरकार इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं ले रही है?" उन्होंने कहा कि अगर सरकार पड़ोसी देश नहीं संभाल सकती है तो इस्तीफा दे देना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर से हमले बढ़े हैं। हाल ही में दो युवकों की हत्या की जा चुकी है। कुछ दिन पहले दीपू चंद्र दास की लिंचिंग करके उसकी बॉडी को आग लगा दी गई थी। इसके बाद एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 29 साल के अमृत मंडल उर्फ ​​सम्राट की हत्या राजबाड़ी के पंग्शा सब-डिस्ट्रिक्ट में रात करीब 11 बजे हुई। यह जगह राजधानी ढाका से करीब साढ़े तीन घंटे दूर है।

बांग्लादेश में पाकिस्तान जैसे हालात बन रहे हैं, भारत को सतर्क रहना होगा : जीतन राम मांझी

गया  बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बांग्लादेश पाकिस्तान के रास्ते पर चल रहा है। वहां लगातार हिंदुओं को मारा जा रहा है, जो कि ठीक नहीं है। वर्तमान सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। गया में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बांग्लादेश और दूसरे पड़ोसी देशों में हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। बंटवारे के बाद भारत में अल्पसंख्यक आबादी 7 फीसदी थी। आज यह 18 फीसदी है, क्योंकि हमने उन्हें शरण दी और उनका पालन-पोषण किया। पाकिस्तान में बंटवारे के समय हिंदुओं की आबादी 11 फीसदी थी, लेकिन आज वे सिर्फ 1 फीसदी हैं। बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर चलता दिख रहा है। हिंदुओं को मारा जा रहा है। हमारी सरकार को इन अत्याचारों पर ध्यान देना चाहिए और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे इस तरह के उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे गलती हो गई। उन्हें बांग्लादेश को अलग नहीं करवाना चाहिए था। उस समय भी हमें लगता था कि बांग्लादेश हमारे लिए आंख का कांटा बनेगा और बांग्लादेश के ताजा हालात उसे साबित कर रहे हैं। बांग्लादेश में जितना हक मुसलमानों को है, उतना हिंदुओं को भी है, लेकिन उन्हें चुन-चुनकर मारा जा रहा है। दूसरे देशों का जिक्र करते हुए मांझी ने कहा कि चीन के अलावा अन्य राष्ट्रों में हिंदू हैं, लेकिन वहां सब ठीक है। बांग्लादेश में यह क्यों हो रहा है? भारत के लोगों और भारत के नेताओं को संज्ञान लेना चाहिए, बात करनी चाहिए और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह सरकारी आदेश है और इसका पालन करना ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर जो फैसले लिए जाते हैं, उसमें हमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। रेलवे किराए में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि देखिए, महंगाई बढ़ रही है। यह स्वाभाविक है। सुविधाएं दी जा रही हैं और रेल खंड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए अगर आम जनता से सहयोग लिया जाए तो गलत नहीं है। यह रेल मंत्रालय की ओर से लोगों की भलाई के लिए किया जा रहा है। रेल मंत्री काफी ईमानदार हैं। जनता के पैसे का सदुपयोग होगा।

परिवार सत्ता में, फिर भी सवाल! उपेंद्र कुशवाहा पर जीतन राम मांझी के बयान के मायने क्या हैं?

नई दिल्ली  राज्यसभा सीट को लेकर एनडीए (NDA) में जुबानी जंग तेज हो गई है। दरअसल, बिहार कोटे से राज्यसभा की 5 सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं। वहीं, एनडीए (NDA) गठबंधन के सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने अपनी पार्टी के लिए एक सीट की मांग की, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने उनकी मांग को अनुचित बताया। वहीं, अब उपेंद्र कुशवाहा पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें मेरी मांग पर ऐतराज नहीं जताना चाहिए था। कुशवाहा को चुप रहना चाहिए- Jitan Ram Manjhi जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने कहा कि कुशवाहा एक परिपक्व राजनेता है। उन्हें मेरी मांग पर ऐतराज नहीं जताना चाहिए था, उन्हें चुप रहना चाहिए। वह खुद राज्यसभा जा चुके हैं। उनकी पत्नी विधायक है, जबकि बेटा बिहार सरकार में मंत्री है। इसलिए उन्हें दूसरों की मांग पर बोलने का हक नहीं है। उनको लाभ मिल गया है। वहीं, मांझी का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर उठता सवाल है। बता दें कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) बिहार में एक दलित-केंद्रित क्षेत्रीय पार्टी है, जिसकी स्थापना जीतन राम मांझी ने 2015 में जनता दल (यूनाइटेड) से अलग होने के बाद की थी। मांझी, एक प्रमुख महादलित नेता, 2014 से 2015 तक थोड़े समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे और तब से उन्होंने HAM (S) को हाशिए पर पड़े समुदायों की एक प्रमुख आवाज के रूप में स्थापित किया है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, HAM(S) बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ गठबंधन में शामिल हो गई। 2024 के लोकसभा चुनावों में केंद्र में NDA की जीत के बाद, मांझी को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। 

केरल में टूटा राजनीतिक मिथक: बीजेपी का पहला मेयर, असेंबली चुनाव से पहले बड़ा संकेत

केरल दक्षिणी राज्य केरल में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। वहां पहली बार भाजपा का मेयर बना है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश (V V Rajesh) शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पहले भाजपा मेयर चुने गए हैं। यह दक्षिणी राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अहम घटना मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में अब तक BJP को कभी सत्ता नहीं मिली थी। पद संभालने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने कहा, "हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। सभी 101 वार्डों में विकास किया जाएगा… तिरुवनंतपुरम को एक विकसित शहर में बदला जाएगा।" इससे पहले शुक्रवार की सुबह हुए मेयर चुनाव में 45 साल के राजेश को कुल 51 वोट मिले। उन्हें एक निर्दलीय पार्षद (एम. राधाकृष्णन) का भी समर्थन मिला, जबकि एक निर्दलीय पार्षद ने वोट नहीं दिया। इस तरह 100 सदस्यों की उपस्थिति वाले सदन में राजेश के पक्ष में 51 वोट हो गए। उनके खिलाफ खड़े CPIM के आरपी शिवाजी को 29 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के केएस सबरिनाथन को कुल 19 वोट मिले। बता दें कि BJP ने दिसंबर की शुरुआत में हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में 50 सीटें जीतीं थीं। केरल में भाजपा के लिए क्या संकेत? राजेश का मेयर के रूप में पदभार ग्रहण करना ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में आगामी छह महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा को लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस राज्य में कभी भी जीत हासिल नहीं की है। भाजपा ने 2016 में सिर्फ एक सीट जीती थी। ओ राजगोपाल ने 2016 में तब नेमोम सीट जीती थी। इसके बाद 2024 में पार्टी के एक सांसद अभिनेता सुरेश गोपी ने त्रिशूर से जीत हासिल की थी। इसलिए, राजेश का मेयर बनना केरल की शहरी राजनीति में बीजेपी के लिए एक नए अध्याय का संकेत है। CPM का 45 साल का कब्जा टूटा यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 45 वर्षों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर CPM का कब्जा था। BJP की यह जीत उस परंपरा को न सिर्फ तोड़ती है बल्कि दक्षिणी राज्य में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करती है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CPM और कांग्रेस ने मिलकर शहर को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था और पिछले कई वर्षों में ड्रेनेज, पानी और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “आज से हमारा काम शुरू होता है। हमारा लक्ष्य तिरुवनंतपुरम को देश के शीर्ष तीन शहरों में शामिल करना है।” BJP का कहना है कि यह जीत केरल में शहरी राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं।  

बंगाल चुनाव से पहले TMC को बड़ा तोहफा, अभिनेत्री पर्णो मित्रा पार्टी में शामिल

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनावी साल की शुरुआत से पहले ही नेताओं के एक से दूसरी पार्टी में जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुकी बंगाली अभिनेत्री पर्णो मित्रा ने पार्टी छोड़ दी. पर्णो मित्रा ने बीजेपी छोड़कर अब सूबे की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है. पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध टीवी फेस पर्णो मित्रा ने शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से टीएमसी की सदस्यता ग्रहण कर ली. टीएमसी जॉइन करने के बाद पर्णो ने अपने बीजेपी में शामिल होने के फैसले को गलती बताया है. उन्होंने कहा कि अब उन गलतियों को सुधारने का समय है. बंगाली अभिनेत्री पर्णो ने ममता बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी जॉइन करने को अपने लिए बड़ा अवसर भी बताया.  उन्होंने बीजेपी को लेकर कहा कि छह साल पहले मैंने बीजेपी जॉइन की थी. वहां चीजें ठीक नहीं थीं. गौरतलब है कि पर्णो मित्रा पश्चिम बंगाल में टीवी का लोकप्रिय चेहरा हैं. पर्णो ने 2019 में बीजेपी जॉइन कर अपने राजनीतिक सफर का आगाज किया था. बीजेपी ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पर्णो को उम्मीदवार भी बनाया था. हालांकि, पर्णो मित्रा तब चुनाव हार गई थीं. पर्णो मित्रा को पिछले बंगाल चुनाव में बीजेपी ने बारानगर विधानसभा सीट से टिकट दिया था. तब पर्णो मित्रा को टीएमसी उम्मीदवार से शिकस्त झेलनी पड़ी थी. चुनाव प्रचार के दौरान उनके काफिले पर हमले की घटना भी हुई थी, जिसके बाद सियासत गर्मा गई थी. पर्णो मित्रा ने तब कथित हमले के लिए टीएमसी को जिम्मेदार बताते हुए कहा था कि हमला करने वाले लोग टीएमसी के थे. इस घटना के बाद पर्णो ने कहा था कि बंगाली फिल्म स्टार हूं, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ता होने के नाते मुझे अपनी जान का डर है.

दिग्विजय सिंह ने कहा: अयोध्या जाने की आवश्यकता नहीं, ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का जिक्र किया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने दिग्विजय सिंह से राम मंदिर जाने को लेकर सवाल किया था. इसपर कांग्रेस नेता ने राम मंदिर जाने से इनकार कर दिया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे कहीं जाने की जरूरत नहीं है. ‘शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे’ राम मंदिर जाने के सवाल पर कांग्रेस नेता ये भी कहा कि वे शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे. साथ ही प्रवचन भी करवाएंगे. इसमें लिखा है, ‘अहं ब्रह्मास्मि’. मतलब मुझमें ही ब्रह्म है, इसलिए मुझे कहीं और जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. ‘कमलनाथ सरकार पुजारियों को वेतनमान दे रही थी’ कांग्रेस नेता ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘उज्जैन में मंदिरों में जो चढ़ावा आ रहा है, वो मंदिरों के रखरखाव में इस्तेमाल नहीं हो रहा है. मंदिरों के रखरखाव का पैसा कलेक्टर, SDM के खाते में जमा होता है, लेकिन अधिकारी साइन नहीं करते हैं. गुना में इसी तरह का मामला सामने आया है. मंदिरों की जमीन स्थापित इष्ट देव की है, ये बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है. देवता के नाम दर्ज भूमि नीलाम नहीं हो सकती, लेकिन इसका उल्लंघन एमपी सरकार कर रही है. एमपी में 50 हजार पुजारी है उनके साथ कुठाराघात हो रहा है. वहीं कमलनाथ सरकार पुजारियों का वेतनमान समेत कई सुविधा दे रही थी. सांसद ने कहा- दिग्विजय सनातन समाज से माफी मांगे भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हम सबके आदर्श और श्रृद्धा के केन्द्र हैं। मैं दिग्विजय सिंह से पूछना चाहता हूं अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं जाओगे तो क्या दिल्ली की जामा मस्जिद में जाओगे? क्या मक्का-मदीना में जाओगे। देश की जनता इनके बारे में बहुत कुछ समझती है। इसलिए इनकी पार्टी और उनकी खुद की दुर्गति हो रही है। इस प्रकार के स्टेटमेंट के लिए उनको सनातन समाज से माफी मांगना चाहिए। ‘मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं’ दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, ‘मैं जब मुख्यमंत्री था, तो मेरे खिलाफ विश्व हिंदू परिषद ने झूठा प्रचार किया था. मुझ पर आरोप लगाते हैं कि मैं मुस्लिम और ईसाई हूं. मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. पुजारियों के साथ गलत हुआ है, तो हम लड़ाई लड़ेंगे. पुजारियों की जमीन कोई नहीं ले सकता है. जब सरकार बदलेगी तब सारी पोल खोलेंगे.  राम मंदिर के लिए दिग्विजय ने दिया था चंदा जनवरी 2021 में दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1,11,111 रुपए का चेक भेजा था। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था। दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में अपील की थी कि राम मंदिर के नाम पर चंदा संग्रह सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी माहौल में किया जाए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का तनाव या विभाजन न हो। आस्था के इस विषय में सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। दिग्विजय ने चंदे का हिसाब भी मांगा था दिग्विजय सिंह ने पत्र के माध्यम से विश्व हिंदू परिषद द्वारा पूर्व में एकत्र किए गए चंदे का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने कहा था कि चंदे की पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। दिग्विजय सिंह का यह कदम उस समय चर्चा में रहा था, जब देशभर में राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर चंदा अभियान चलाया जा रहा था। उनके इस निर्णय को उन्होंने आस्था के सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर बताया था।

ममता बनर्जी के लिए चुनौती: बंगाल में हुमायूं कबीर समेत तीन मुस्लिम नेताओं की सक्रियता

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से गरमा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) यहां पहली बार सरकार बनाने तमन्ना लिए बैठी है। इस सबके बीच चुनावी बिसात पर बागी विधायक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ा दी है। कबीर के एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी और इंडिया सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से संपर्क साधने से राज्य की राजनीति में गरमाहट आ गई है। दूसरी तरफ तो भाजपा ने अपने मजबूत बूथ प्रबंधन से बदलाव की स्थिति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगभग सीधा मुकाबला है। कांग्रेस और तीन दशक तक राज्य में सत्ता पर काबिज रही माकपा और उसके सहयोगी दल हाशिए पर जा चुके हैं। ऐसे में तृणमूल से बाहर निकले हुमायूं तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश में है। हालांकि वह अकेले एक क्षेत्र विशेष तक सीमित है पर यदि उनको औवेसी व पीरजादा का साथ मिला तो कई सीटों पर समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। तीन मुस्लिम नेता एक साथ औवेसी ने हाल में बिहार में जो सफलता हासिल की है उससे साफ हुआ है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस पार्टी को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आईएसएफ ने पिछले चुनाव में ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी, जब उसने एक सीट जीत ली थी। ऐसे में अगर तीन प्रमुख मुस्लिम नेता एक मंच पर आते हैं तो मुसलमानों के बीच वह अपनी पैठ बढ़ा सकते हैं। ध्रुवीकरण से ममता को नुकसान बंगाल की लगभग 30% मुस्लिम आबादी है। हुमायूं कबीर जिस तरह से माहौल बना रहे हैं उसमें वह अगर मुस्लिम मतों का थोड़ा भी ध्रुवीकरण करने में सफल रहते हैं तो ममता बनर्जी को काफी नुकसान हो सकता है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। भाजपा विधायक भी मैदान में डटे भाजपा ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपना विस्तार किया है। उसके विधायक मैदान में डटे रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले से ही आक्रामक और राज्य की मौजूदा स्थितियों में और ज्यादा आक्रामकता दिखाकर ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ाएगा। पिछली बार भाजपा अपने बूथ प्रबंधन में कमजोर रही थी, इसलिए पार्टी ने इस बार पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर लगाया है।

क्या RLM में बढ़ रही है टूट? तीन विधायकों की नितिन नवीन से मुलाकात, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से अलग राह

पटना  बिहार की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायकों ने दिल्ली जाकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की तो दूसरी ओर अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिट्टी चोखा पार्टी से किनारा कर लिया। पहले भी रालोमो के भीतर खटपट की खबरें आ चुकी हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से हर बार एकजुटता का दावा और किसी की नाराजगी से इनकार किया जाता रहा है। उपेंद्र कुशवाहा पर बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़ाए मंत्री बनाने से परिवारवाद के आरोप लग रहे हैं।   बुधवार की शाम पटना में राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर लिट्टी चोखा पार्टी का आयोजन किया गया। इसमें मीडिया जगत और राजनीति की कई हस्तियो ने शिरकत की और लिट्टी चोखा का आनंद लिया। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह इस पार्टी में शामिल नहीं हुए। इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म रहा पर आधिकारिक रूप से ना किसी ने सवाल पूछा और ना कोई जवाब आया। गुरुवार को अचानक सियासत तब सुलग गई जब माधव आनंद के फेसबुक पर कुछ खास तस्वीरें शेयर की गईं। रालोमो के तीनों विधायक दिल्ली में थे। वे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ दिखे। इन विधायकों ने नितिन नवीन से ना सिर्फ मुलाकात की बल्कि तस्वीरें शेयर कर देश को इसकी जानकारी भी दी। फेसबुक पोस्ट में माधव आनंद ने लिखा- "आज भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष माननीय श्री नितिन नवीन जी से उनके पदभार ग्रहण के उपरांत औपचारिक एवं शिष्टाचार भेंट कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर बाजपट्टी विधानसभा के माननीय विधायक श्री रामेश्वर महतो जी, दिनारा विधानसभा से माननीय विधायक श्री आलोक सिंह जी भी उपस्थित रहे। हम सभी ने उनके नए दायित्व के सफल एवं प्रभावी निर्वहन हेतु शुभेच्छाएँ व्यक्त कीं।" रामेश्वर महतो भी कर चुके हैं फेसबुक पोस्ट रालोमो के चार विधायक हैं जिनमें एक कुशवाहा की पत्नी हैं। एक साथ तीन विधायकों की गैरहाजिरी रही। सोशल मीडिया पोस्ट बहुत सामान्य है पर इसकी टाइमिंग को लेकर बड़े कयास लगाए जा रहे हैं। परिवारवाद का आरोप झेल रहे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में ऑल इज वेल है या खटपट, यह सवाल सियासी गलियारे में हिलोरें ले रहा है। इससे पहले विधायक रामेश्वर महतो भी फेसबुक पर अपने दिल की बात बता चुके हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर शीर्ष नेतृत्व की नीयत और नीति पर सवाल उठाया था।