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ठाकरे ब्रदर्स के लिए हार, सोसाइटी चुनाव में साथ आने के बावजूद जीत नहीं मिली

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में करीब 20 साल बाद साथ आए ठाकरे ब्रदर्स को पहले ही चुनाव में बड़ा झटका लगा है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की तरफ से समर्थित 'उत्कर्ष' पैनल को बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. ठाकरे ब्रदर्स की ओर से समर्थित पैनल को 21 में से एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई है.  एक सीट भी नहीं जीत पाए ठाकरे ब्रदर्स बेस्ट सोसाइटी चुनाव के नतीजों में शशांक राव के पैनल ने 14 सीटें हासिल जीतीं, जबकि महायुति पैनल ने सात सीटें हासिल कीं, जिससे सहकारी समिति पर ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का नौ साल पुराना प्रभुत्व अब खत्म हो गया. ठाकरे ब्रदर्स के बीच गठबंधन के कारण इस चुनाव पर सभी की नजरें थीं. लेकिन नतीजे ने उनके संयुक्त राजनीतिक प्रभाव को एक बड़ा झटका दिया. शशांक राव का पैनल विनर के तौर पर उभरा, जबकि बीजेपी और सहयोगियों वाले महायुति गठबंधन ने सम्मानजनक हिस्सेदारी हासिल की. उत्कर्ष पैनल का खाता न खोल पाने से आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले ठाकरे गुट की प्रासंगिकता पर अब सवाल उठ खड़े हो गए हैं. चुनाव शशांक राव पैनल को 21 में से 14 सीटे, महायुति पैनल को सात सीटें हासिल हुईं, जबकि ठाकरे ब्रदर्स का उत्कर्ष पैनल अपना खाता भी नहीं खोल पाया है. काम नहीं आई एकजुटता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की ओर से साल 2006 में शिवसेना से अलग होकर बनाई गई एमएनएस पार्टी ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी रही हैं. हालांकि, हाल के राजनीतिक बदलावों ने मुंबई के नगर निगम चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का मुकाबला करने के लिए एक संभावित गठबंधन की चर्चाओं को जन्म दिया है. बेस्ट चुनाव को उनकी संयुक्त रणनीति के लिए एक लिटमस टेस्ट के रूप में देखा गया, जिसका मकसद मराठी भाषी समुदायों और बेस्ट कर्मचारियों के बीच अपने बेस वोटबैंक का फायदा उठाना था. लेकिन यह हार उनके जनाधार को एकजुट करने में चुनौतियों का संकेत देती है और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के लिए उनकी रणनीति को प्रभावित कर सकती है, जहां मुंबई के नगर निकाय पर कब्जा दांव पर है. शशांक राव पैनल का दबदबा शशांक राव मुंबई के एक प्रमुख ट्रेड यूनियन नेता हैं, जिन्हें बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले बेस्ट वर्कर्स यूनियन के प्रमुख के रूप में उनकी प्रभावशाली भूमिका के लिए जाना जाता है. अनुभवी यूनियन नेता शरद राव के बेटे होने के नाते, शशांक ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है और बेस्ट कर्मचारियों, ऑटो-रिक्शा चालकों और अन्य श्रमिक समूहों के अधिकारों की वकालत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों की शिकायतों का समाधान करना है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस की तरफ से समर्थित 'उत्कर्ष' पैनल को एक बड़ा झटका लगा है, और वह बेस्ट सोसाइटी के चुनावों में एक भी सीट जीतने में असफल रहा, जिसमें 21 उम्मीदवार थे. यह हार ठाकरे ब्रदर्स के अप्रत्याशित गठबंधन के लिए एक बहुत बड़ा सबक है और इससे मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले उनकी संयुक्त रणनीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जहां उनका मकसद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को चुनौती देना है.

ट्वीट विवाद में संजय कुमार ने जताई खेद, चुनाव आयोग पर कांग्रेस का दबाव खत्म

मुंबई  चुनाव विश्लेषक और लोकनीति- CSDS के कोऑर्डिनटर संजय कुमार ने महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट पर सवाल उठाने को लेकर माफी मांगते हुए अपना पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया है। संजय कुमार के इन आंकड़ों का सहारा लेते हुए कांग्रेस चुनाव आयोग पर आक्रामक थी। राहुल गांधी ने कई बार संजय कुमार के इस ट्वीट का जिक्र कर चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। अब संजय कुमार ने माफी मांगते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करने में गलती हो गई थी। संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है। संजय कुमार ने कहा कि डेटा टीम से आंकड़ों का अध्ययन करने में गलती हो गई थी। हमारा उद्देश्य किसी तरह की गलत जानकारी देना नहीं था। संजय कुमार के माफी मांगने के बाद बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। बीजेपी ने कहा कि यह एक 'ईमानदारी वाली गलती' थी। बीजेपी के आईटी चीफ अमित मालवीय ने कहा, हर चुनाव में यही होता है कि पहले कहा जाता है कि बीजेपी हार रही है। वहीं जब बाजी पलट जाती है तो इस बात पर चर्चा शुरू होती है कि बीजेपी आखिर कैसे जीत गई। यही लोग किसी तरह समझाते हैं कि बीजेपी कैसे जीती। उन्हें लगता है कि टीवी देखने वाली जनता मूर्ख है। उन्होंने कहा, सीएसडीएस ने बिना जांचे-परखे ही आंकड़े पोस्ट कर दिए। इससे कांग्रेस को महाराष्ट्र में प्रपंच गढ़ने का मौका मिल गया। क्या था संजय कुमार का दावा डिलीट किए गए ट्वीट में संजय कुमार ने दावा किया था कि महाराष्ट्र की रामटेक विधानसभा नंबर 59 में लोकसभा चुनाव के वक्त कुल 466203 वोटर थे, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान यह संख्या घटकर केवल 286931 रह गई। ऐसे में दोनों चुनाव के बीच वोटरों की संख्या 38 फीसदी तक कम हो गई। संजय कुमार ने एक और दावा किया था कि देवलाली विधानसभा सीट पर लोकसभा चुनाव के दौरान 4,56,072 वोटर थे जो कि विधानसभा चुनाव के दौरान 2,88,141 ही रह गए। ऐसे में 36 फीसदी वोटर कम हो गए। बीजेपी ने कहा, जिन संस्थानों के आंकडों पर राहुल गांधी को भरोसा है, वे स्वीकार कर रहे हैं कि उनके आंकड़े ही गलत थे। यह केवल महाराष्ट्र के वोटर्स को बदनाम करने की कोशिश है। चुनाव आयोग से चल रही है तनातनी राहुल गांधी इन दिनों बिहार में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर 'वोट' चोरी के आरोप लगाते हुए प्रजेंटेशन दिया था। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा सीट में वोटर लिस्ट में धांधली की गई। वहीं संजय कुमार के डेटा का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने महाराष्ट्र में वोट चोरी का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने कहा कि बिहार में भी एसआईआर करवाकर केवल सरकार वोटों की चोरी करवाना चाहत है। उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी की साठगांठ के भी आरोप लगाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया और उनके दावों को खारिज कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राहुल गांधी निराधार दावे कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें शपथपत्र देकर देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहता है विपक्ष? खबर यह भी है कि इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहता है। विपक्ष का कहना है कि ज्ञानेश कुमार बीजेपी के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान महाभियोग पर चर्चा की गई। हालांकि किसी नेता ने इसकी पुष्टि नहीं की है।  

पंजाब सरकार की निगरानी कर रहे हैं केजरीवाल, बोले AAP नेता

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि राजधानी में पार्टी की हार के बाद से अरविंद केजरीवाल का फोकस गोवा, पंजाब और गुजरात पर है। वह इन राज्यों में संगठन को मजबूती और विस्तार देने में जुटे हैं। सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल पंजाब में सरकार के कामकाज की देखभाल कर रहे हैं। भारद्वाज का ऐसा कहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि अरविंद केजरीवाल पंजाब में सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर रहे हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक को विपक्षी दल 'सुपर सीएम' भी कहकर तंज कसते हैं। सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि केजरीवाल खाली बैठने वाले नहीं है। 8 फरवरी को दिल्ली में उनकी पार्टी की हार हुई और अगले दिन सुबह से वह गुजरात, गोवा और पंजाब पर काम कर रहे हैं। हार के बाद अधिकतर समय दिल्ली से बाहर रहने से जुड़े एक सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री ने कहा, 'उनके पास टाइम नहीं है मिलने का छोटी-मोटी चीजों के लिए। मैं उनके पास जाता हूं कभी गुजरात के लिए लोग बैठे होते हैं, भी पंजाब के लिए बैठे होते हैं, कभी गोवा के लिए बैठे होते हैं। कभी सोशल मीडिया टीम बैठी होती है।' केजरीवाल के तीन लक्ष्य, पंजाब में सरकार के कामकाज की देखभाल भी: भारद्वाज सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'अरविंद केजरीवाल लगातार पार्टी को विस्तार देने के लिए काम कर रहे हैं। उनके तीन लक्ष्य हैं, वह गोवा में पार्टी को विस्तार दे रहे हैं, दूसरा- गुजरात में विस्तार कर रहे हैं। तीसरा पंजाब में जो सरकार के काम चल रहे हैं उसकी थोड़ी देखभाल कर रहे हैं और पंजाब में जो हमारा संगठन है उसको लगातार मजबूत कर रहे हैं।' अभी कम हैं दिल्ली में दिखने को मौके: सौरभ भारद्वाज यह पूछे जाने पर कि उन्होंने खुद को दिल्ली का बेटा कहा था और हारते ही बाहर चले गए, क्या यह धोखा नहीं है? इस सवाल के जवाब में भारद्वाज ने कहा कि उनकी दिल्ली पर नजर है, लेकिन कम दिख रहे हैं। सही समय पर वह दिल्ली में भी दिखेंगे। भारद्वाज ने कहा, ‘जब झुग्गी झोपड़ी वाला मुद्दा हुआ तो अरविंद जी ने हमें बुलाया और कहा कि यह बहुत क्रूर है। इसके लिए आंदोलन करना पड़ेगा। रूपरेखा बनाई, हम लोग गली-गली गए, बड़ा आंदोलन किया। हमने स्कूल के लिए जो पर्चा बांटा है, उन्हें दिखाया उन्होंने संशोधन कराए। एक-एक चीज पर उनकी नजर है। हां, सार्वजनिक रूप से कम दिख रहे हैं, क्योंकि एक मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसा ज्यादा होता था, अब आप विपक्ष में है, इसलिए मौके कम है। जब सही समय आएगा वह दिल्ली में दिखेंगे। राष्ट्रीय राजनीति में भी कम उठाते हैं मुद्दे हैं, जहां उनका फोकस है वह बता दिया मैंने आपको।’  

TMC ने INDIA ब्लॉक से दूरी बनाई, उपराष्ट्रपति चुनाव में रखी ये मांग

कलकत्ता उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर NDA और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है. एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी पार्टियों के बीच अब भी आखिरी सहमति नहीं बन पाई है. सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मानना है कि INDIA गठबंधन का उम्मीदवार तमिलनाडु से नहीं होना चाहिए, और साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी ने उम्मीदवार को लेकर अपनी मंशा भी जाहिर की है. टीएमसी चाहती है कि विपक्ष एक नॉन-पॉलिटिकल उम्मीदवार उतारे, जो बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत कर सके. टीएमसी का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ पद की लड़ाई नहीं बल्कि संविधान और "आइडिया ऑफ इंडिया" को बचाने की जंग है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से निकलते समय बताया था कि "कल (मंगलवार) दोपहर 12.30 बजे मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर INDIA गठबंधन की बैठक होगी." उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष शाम तक एक मजबूत उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर देगा. एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को बनाया है अपना उम्मीदवार दूसरी तरफ, एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. इससे पहले फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया. इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. राधाकृष्णन तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं और सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव चार दशकों से भी अधिक का है. वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और कोयंबटूर से संसद पहुंचे थे. 2004 से 2007 तक उन्होंने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई. उनकी पहचान आरएसएस विचारधारा से जुड़ी हुई है. सितंबर में होंगे उपराष्ट्रपति चुनाव उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है. यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है. अब देखना यह होगा कि INDIA गठबंधन किस उम्मीदवार को मैदान में उतारकर एनडीए के मुकाबले में खड़ा करता है.

राधाकृष्णन के खिलाफ ISRO वैज्ञानिक को उतारने पर विचार, विपक्ष जल्द खोलेगा पत्ता

नई दिल्ली विपक्षी नेता उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सोमवार शाम बैठक करेंगे। रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने भी नए उपराष्ट्रपति के सर्वसम्मति से चुनाव के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे सहित कुछ विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए ऐसे गैर-राजनीतिक चेहरे को मैदान में उतारना चाहता है, जिसकी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कद हो। उन्होंने बताया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेताओं ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक वैज्ञानिक का नाम प्रस्तावित किया है, जो तमिलनाडु से हैं और काफी सम्मानित हैं। वरिष्ठ द्रमुक नेता तिरुचि शिवा का नाम भी चर्चा में है लेकिन अन्य विपक्षी नेताओं के साथ अभी इस पर चर्चा होनी बाकी है। शिवा ने हालांकि यह कहते हुए इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस मामले पर उनका नेतृत्व फैसला लेगा। NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं जहां 2026 में चुनाव होने हैं। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी सहित ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के वरिष्ठ नेताओं के इस बैठक में भाग लेने की संभावना है। यह बैठक सत्तारूढ़ राजग द्वारा महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने के एक दिन बाद होगी। सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी सहित अन्य वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श में डिजिटल माध्यम से शामिल हो सकते हैं जबकि अखिलेश यादव जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं के व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल होने की संभावना है। विपक्ष आज करेगा उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. लेकिन विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उम्मीदवार की घोषणा अभी बाकी है. सूत्रों की मानें तो आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया ब्लॉक का एक साझा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा. इसको लेकर संसद में मौजूद 'सभी विपक्षी दलों के नेताओं' की बैठक आज दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बुलाई गई है. उम्मीद है कि बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार का नाम घोषित किया जाएगा. किन नामों पर हो रही चर्चा? सूत्रों के मुताबिक, इंडिया ब्लॉक के शीर्ष नेता कई नामों पर चर्चा कर रहे हैं. इनमें पूर्व इसरो वैज्ञानिक मैलस्वामी अन्नादुरई का नाम भी शामिल है, जिन्होंने चंद्रयान-1 परियोजना की अगुवाई की थी. विपक्ष चाहता है कि इस चुनाव को ‘लोकतंत्र और संविधान की रक्षा’ की लड़ाई के रूप में पेश किया जाए. खबरों की मानें तो जिन नामों पर चर्चा हो रही है उनमें एक नाम तमिलनाडु से डीएमके के सांसद तिरुचि सिवा का भी है. चर्चा में शामिल तुषार गांधी का भी नाम इसके अलावा, महात्मा गांधी के परपोते और इतिहासकार तुषार गांधी का नाम भी शुरुआती चर्चा में आया है, ताकि यह चुनाव भाजपा के खिलाफ एक वैचारिक संघर्ष के रूप में दिखाया जा सके. साथ ही महाराष्ट्र से एक दलित बुद्धिजीवी को भी इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में विचार किया जा रहा है. पीएम मोदी से मिले राधाकृष्णन एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन सोमवार को दिल्ली पहुंचे. एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. उनका काफिला पहले से तैयार था और इस दौरान गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया. दिल्ली पहुंचने के बाद राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.

बीजेपी नेतृत्व में बड़ा बदलाव, अगला अध्यक्ष हो सकता है उत्तर भारत से

नई दिल्ली बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से जब इस सवाल का जवाब पूछा जाता है, तो वे कहते हैं कि अध्यक्ष तो बीजेपी का ही होगा। फिलहाल नाम नहीं बता सकते। लेकिन अब चर्चा है कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष 'उत्तर' से हो सकता है। अब सवाल उठता है कि उत्तर से ही अध्यक्ष क्यों होगा, तो आइये जानते हैं इसके पीछे की सियासत। सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी में ही सवाल का जवाब दरअसल, रविवार को बीजेपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए साउथ ( तमिलनाडु ) से आने वाले ओबीसी के बड़े नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है। सहयोगी दलों ने भी राधाकृष्णन को समर्थन किया है। राधाकृष्णन इस वक्त महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी में ही इस सवाल का जवाब छिपा है। क्षेत्रीय संतुलन का रखा जाएगा ख्याल बीजेपी के नए अध्यक्ष में क्षेत्रीय संतुलन का ख्याल रखा जाएगा। ठीक उसी तरह, जिस तरह सीपी राधाकृष्णन के चयन से पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन का ख्याल रखा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तर भारत से हैं। अब चर्चा हो रही है कि नया अध्यक्ष भी उत्तर भारत से ही होगा। इसको लेकर कई कयास भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी अपने अप्रत्याशित फैसलों के लिए जानी जाती है। अंत में कुछ भी हो सकता है। उत्तर भारत ही क्यों? दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूर्वी भारत से हैं। उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन दक्षिण भारत से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम भारत से आते हैं, और संसद में उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष उत्तर भारत से हो सकता है। इन नामों की है चर्चा नए अध्यक्ष के लिए जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है, उनमें मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव और केशव प्रसाद मौर्य प्रमुख हैं, जो सभी उत्तर भारत से आते हैं। यही कारण है कि सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी के बाद कयास लग रहे हैं कि नया अध्यक्ष उत्तर भारत से हो सकता है। जातीय समीकरण को लेकर भी चर्चा बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन में क्षेत्र के साथ-साथ जातीय समीकरणों को लेकर भी कयास लग रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी हैं, और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन भी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में अनुमान है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष सामान्य वर्ग से हो सकता है। यही कारण है कि नया अध्यक्ष किस क्षेत्र और जाति से होगा, इस पर चर्चा जोरों पर है।

राधाकृष्णन की एंट्री से सियासत गरमाई, बीजेपी के कदम से उद्धव-स्टालिन पर दबाव

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है. एनडीए उम्मीदवार के तौर पर सीपी राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगी है, लेकिन विपक्ष ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर एनडीए को एकजुट रखने के साथ-साथ विपक्षी किले में भी सेंधमारी का दांव चल दिया है. बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राधाकृष्णन के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि विपक्ष के साथ भी बातचीत कर उनके नाम पर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेंगे. एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राधाकृष्णन को उतारना मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी का हर एक फैसला राजनीतिक लिहाज से काफ़ी अहम होता है. ऐसे में राधाकृष्णन का चयन के पीछे बीजेपी की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है. सीपी राधाकृष्णन दक्षिण भारत के तमिलनाडु से आते हैं और फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. इस तरह से बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर डीएमके और एआईएडीएमके में सेंधमारी करने के साथ-साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना को भी कशमकश में डाल दिया है. राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में सेंधमारी देश में राष्ट्रपति चुनाव हो या फिर उपराष्ट्रपति का चुनाव, देखा गया है कि सत्तापक्ष ने विपक्षी खेमे में सेंधमारी करती रही है. चाहे कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए का दौर रहा हो या फिर मौजूदा बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए. यूपीए ने 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को उम्मीदवार बनाया था, जिनके ख़िलाफ़ एनडीए से भैरों सिंह शेखावत चुनाव लड़े थे. प्रतिभा पाटिल महाराष्ट्र की होने के नाते शिवसेना ने एनडीए गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी यूपीए को वोट किया था. इसी तरह 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए ने प्रणब मुखर्जी को जब उम्मीदवार बनाया था, तब भी एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना और जेडीयू ने यूपीए को वोट किया था. वहीं, 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए ने राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था, तब जेडीयू ने विपक्ष में रहते हुए भी उनका समर्थन किया था क्योंकि वे बिहार के राज्यपाल थे. इसके बाद 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए ने जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया था तो कांग्रेस की तरफ़ से मार्गरेट अल्वा विपक्षी उम्मीदवार थीं. इसके बाद भी टीएमसी ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था जबकि धनखड़ के साथ ममता की अदावत जगजाहिर रही है.  कशमकश में उद्धव से स्टालिन तक  तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन एनडीए के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जो फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एमके स्टालिन की डीएमके कशमकश की स्थिति में फंस गए हैं. स्टालिन और उद्धव दोनों ही विपक्षी खेमे में हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने सीपी राधाकृष्णन का नाम आगे बढ़ाकर इन दोनों नेताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उद्धव ठाकरे के लिए मुश्किल यह है कि अगर वे राधाकृष्णन को समर्थन नहीं देते हैं, तो यह सीधा मैसेज जाएगा कि उन्होंने अपने ही राज्यपाल के ख़िलाफ़ जाकर वोट किया. यही वजह है कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा, "सीपी राधाकृष्णन बहुत अच्छे इंसान हैं, वे विवादास्पद नहीं हैं और उनके पास अनुभव है. मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ." संजय राउत के बयान से साफ़ है कि उद्धव ठाकरे के सामने एनडीए कैंडिडेट का खुलकर विरोध करना आसान नहीं होगा. वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु की सियासत में भी डीएमके और एआईएडीएमके की टेंशन बढ़ा दी है. तमिलनाडु में क्षेत्रीय अस्मिता काफ़ी अहमियत रखती है. ऐसे में एमके स्टालिन के लिए राधाकृष्णन के नाम का विरोध करना आसान नहीं होगा. इसी तरह से एआईएडीएमके के लिए भी एनडीए के ख़िलाफ़ जाना मुश्किल होगा. विपक्षी एकता कैसे रहेगी बरकरार? उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की तरफ़ से सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' ब्लॉक के लिए आपसी एकता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतारकर एनडीए को टेंशन बढ़ाना चाहता था, लेकिन राधाकृष्णन की उम्मीदवारी होने के बाद 'इंडिया' ब्लॉक में भी सियासी चिंता बढ़ गई है. डीएमके के लोकसभा और राज्यसभा में कुल 32 सांसद हैं और तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसके सामने यह दुविधा रहेगी कि वह अपने राज्य के एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करे या नहीं. डीएमके के लिए दुविधा इसलिए भी होगी, क्योंकि अगले साल तमिलनाडु में चुनाव हैं और बीजेपी और एआईएडीएमके इसे बड़ा मुद्दा बना सकते हैं. सीपी राधाकृष्णन के नाम से विपक्षी एकता डगमगा सकती है. 2022 में टीएमसी ने वोटिंग में हिस्सा न लेकर कांग्रेस को गच्चा दे चुकी है. अब फिर से कांग्रेस के लिए सियासी चुनौती खड़ी हो गई है. देखना होगा कि उद्धव ठाकरे और एमके स्टालिन उपराष्ट्रपति चुनाव में क्या स्टैंड लेते हैं.

विपक्ष पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह बोले, उनका रवैया निराशाजनक रहा

नई दिल्ली  लोकसभा में अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से जुड़े मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर चर्चा की शुरुआत की। हालांकि, इस दौरान विपक्ष के सांसदों ने जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में विपक्ष के हंगामे को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शुभांशु शुक्ला की अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) यात्रा और उसके बाद की वापसी पर विशेष चर्चा के दौरान जिस तरह से विपक्ष ने सदन में हंगामा किया और सदन को चलने नहीं दिया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। रक्षा मंत्री ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि अंतरिक्ष जैसे विषय जो भारत की वैज्ञानिक और सामरिक दृष्टि से 21वीं सदी के भविष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, कम से कम उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''आज लोकसभा में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और इसरो मिशन के पायलट शुभांशु शुक्ला की अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) यात्रा और उसके बाद की वापसी पर विशेष चर्चा के दौरान जिस तरह से विपक्ष ने सदन में हंगामा किया और सदन को चलने नहीं दिया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह चर्चा ''भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और विकसित भारत 2047 में इसकी भूमिका'' विषय पर थी, जो राष्ट्रीय उपलब्धि और देश के सम्मान, स्वाभिमान और भविष्य की वैज्ञानिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की संभावनाओं से जुड़ी हुई है। इसमें जिस प्रकार से विपक्ष ने बाधा डाली, उनका व्यवहार आज बेहद निराशाजनक रहा है।'' उन्होंने आगे लिखा, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरिक्ष में विकास की जिन नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है, वह अभूतपूर्व है। विपक्ष चर्चा में भाग लेकर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की रचनात्मक समीक्षा, आलोचना व सुझाव दे सकता था। अंतरिक्ष जैसे विषय जो भारत की वैज्ञानिक और सामरिक दृष्टि से 21वीं सदी के भविष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, कम से कम उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।''

भाजपा ने साधा विपक्ष को, कहा—बस ‘अब्बा-डब्बा-जब्बा’ की बातें करते हैं

नई दिल्ली  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज कई राजनीतिक दलों के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, लेकिन उनकी विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनका रवैया संदिग्ध है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "आज मैं देख रहा था कि अनेक राजनीतिक पार्टियों के लोग बैठकर प्रेस वार्ता कर रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी खंडपीठ बड़ी है, या सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ बड़ी है। जब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर रोक नहीं लगाई है, तो आप कौन सी खंडपीठ हैं जो घोषणा कर रहे हैं कि चोरी हो रही है? ये दिखाता है कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ आप खिलवाड़ करते हैं।" उन्होंने कहा, "सिर्फ चुनाव आयोग ही नहीं, देश की ऐसी कोई संवैधानिक संस्था नहीं बची है, जिस पर कांग्रेस परिवार और उनके इर्द-गिर्द घूम रहे परिवारों ने हमला न किया हो। याद कीजिए, ये वही लोग हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर उंगली उठा दी थी। ये वही लोग हैं जिन्होंने भारत के आर्मी चीफ को 'सड़क का गुंडा' कहने की हिमाकत की थी। ये वही लोग हैं जो 'सर्जिकल स्ट्राइक', 'एयरस्ट्राइक' और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारतीय सेना पर हमला करने से नहीं कतराते हैं और सबूत मांगते हैं।" भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष को अनाड़ी बताया और कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को सभी मुद्दों पर विस्तार से जवाब दिया, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो इसे नहीं समझते हैं। वह (विपक्ष) खुद को खिलाड़ी समझते हैं, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि वह अनाड़ी हैं। वह चाहते हैं कि हिंदुस्तान के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बने ताकि वह राजनीतिक लाभ उठा सकें। हर मुद्दे पर विपक्ष का सिर्फ एक ही राग अब्बा-डब्बा-जब्बा है। उन्होंने कहा, "विपक्ष का एकमात्र लक्ष्य घुसपैठियों को बचाना है। इनका (कांग्रेस और उसके सहयोगियों का) मकसद घुसपैठियों को बचाना है। भारत की जनता जानती है कि आप किस प्रकार से वोट बैंक की, तुष्टिकरण की राजनीति और उसमें घुसपैठियों को जोड़कर अपना वोट बैंक बनाकर जीतना चाहते हैं। लेकिन इस देश के संसाधनों पर इस देश की जनता का अधिकार है, किसी घुसपैठिए का अधिकार नहीं है। संबित पात्रा ने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, भारत के चुनाव आयोग को चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार है। कांग्रेस, राजद, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का लक्ष्य बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना है। वे भारत की सड़कों पर पूरी तरह अराजकता फैलाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि भारतीय लोग बर्बर बनें और हिंसा का सहारा लें, ताकि विपक्ष इस अस्थिरता का फायदा उठा सके।"

भूमिका मत बनाइए… CJI गवई ने सिब्बल को लगाई फटकार

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ आज (सोमवार को) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कुलपति के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को बरकरार रखने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। पीठ में CJI गवई के अलावा जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल थे। इसी दौरान जस्टिस चंद्रन ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। सुनवाई को दौरान जस्टिस चंद्रन ने खुलासा किया कि जब प्रोफेसर (डॉ.) फैजान मुस्तफा को चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) का कुलपति नियुक्त किया गया था, तब वे वहां के कुलाधिपति थे। मुस्तफा चूंकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए भी शॉर्टलिस्ट किए गए थे, जिसमें यह पद बाद में खातून को मिला। इसलिए उन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कीजिए, जिसमें जस्टिस चंद्रन न हों जस्टिस चंद्रन ने कहा, "जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था, तब मैं उस विश्वविद्यालय का कुलाधिपति था… इसलिए मैं मामले से अलग हो सकता हूँ।" हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने उनसे अनुरोध किया कि मामले से उनके अलग होने की जरूरत नहीं है, और उनमें उनका दृढ विश्वास है। इसी बीच, CJI गवई ने कहा, “मेरे भाई को फैसला करने दीजिए। इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कीजिए, जिसमें जस्टिस चंद्रन शामिल नहीं हैं।” भूमिका मत दीजिए, दलीलें दीजिए बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका की पैरवी करते हुए कहा कि अगर कुलपतियों की नियुक्ति इसी तरह होती रही, तो भविष्य में क्या होगा, यह सोचकर ही मैं काँप उठता हूँ। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई ने सिब्बल से दो टूक लहजे में कहा, 'भूमिका देने की बजाय, सीधे मुद्दे पर आइए और हमें अपनी दलीलें बताइए।' मामले की जाँच जरूरी है इसके बाद सिब्बल ने दलील दी, "अगर दो वोट निकाल दिए जाएँ तो उन्हें सिर्फ 6 वोट मिलेंगे। ऐसा सिर्फ कार्यकारी समिति में कुलपति के वोट की वजह से है और एक और वोट था। अगर आप इन दोनों को निकाल देते हैं, तो वह बाहर हो जाएँगी।" सिब्बल ने आगे कहा कि वह स्थगन की माँग नहीं कर रहे हैं, लेकिन मामले की जाँच जरूरी है। उन्होंने कहा, “तथ्यों के आधार पर इससे बेहतर कोई मामला नहीं हो सकता।” नईमा खातून की कुलपति के रूप में नियुक्ति ऐतिहासिक दूसरी तरफ, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि नईमा खातून की कुलपति के रूप में नियुक्ति ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा, "यह ऐतिहासिक है। वह इस यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति हैं। उनकी नियुक्ति थोड़ा इलेक्शन और थोड़ा सेलेक्शन है। हाई कोर्ट खातून के के चुनाव संबंधी तर्कों से सहमत नहीं था, बावजूद उनकी नियुक्ति को बरकरार रखा।" प्रोफेसर गुलरेज़ को भाग नहीं लेना चाहिए था मुख्य न्यायाधीश गवई ने टिप्पणी की कि प्रोफेसर गुलरेज़ को इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए था। जस्टिस गवई ने कहा, "आदर्श रूप से कुलपति को इसमें भाग नहीं लेना चाहिए था और सबसे वरिष्ठ व्यक्ति को इसमें शामिल होने देना चाहिए था। देखिए, जब हम कॉलेजियम के फैसले भी ले रहे हैं, अगर ऐसा कुछ होता है, तो हम भी इससे अलग हो जाते हैं।" अब मामले की अलग बेंच सुनवाई करेगी। विवाद क्या है? बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस साल मई में नईमा खातून की एएमयू कुलपति पद पर नियुक्ति को बरकरार रखा था। याचिकाकर्ताओं ने इस आधार पर खातून की नियुक्ति को चुनौती दी थी कि खातून के पति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज़ कुलपति के रूप में वहां कार्यरत थे, जब उनके नाम की सिफारिश की गई थी। इसके अलावा प्रोफेसर गुलरेज ने यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद की महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता भी की थी। हालांकि, हाई कोर्ट नेनियुक्ति को बरकरार रखते हुए फैसला सुनाया था कि उनका अंतिम चयन विजिटर द्वारा किया गया था, जिन पर पक्षपात के कोई आरोप नहीं हैं। राष्ट्रपति इस यूनिवर्सिटी की विजिटर हैं। मुजफ्फर उरूज रब्बानी ने उनकी नियुक्ति को चुनौती दी है।