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भारत में विभाजन की स्थिति पर रीवा सांसद का विवादित बयान, बहस गरमाई

रीवा  कांग्रेस पर वोट चोरी का आरोप लगाने के बाद रीवा के भाजपा सांसद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बार भारत-पाकिस्तान विभाजन की बात करते-करते उनकी जुबान फिसल गई। सांसद ने धर्म विशेष के लोगों को लेकर एक विवादित बयान दिया है। रीवा के सांसद ने कहा कि वो लोग भारत छोड़कर नहीं गए और अब यहां छाती में बैठकर मूंग दलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां हिंदु बहुसंख्यक था वहां अल्पसंख्यक हो गया। सांसद जनार्दन मिश्रा ने वायरल वीडियो में कहा कि सबसे ज्यादा मुस्लिम उत्तरप्रदेश और बिहार में थे, वो यहीं रह गए और अब यहां रहकर छाती में मेक ठोक रहे हैं(छाती पर बैठकर मूंग दलने वाली कहावत), यह स्थिति रह गई है भारत में विभाजन की। सांसद ने मऊगंज जिले में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान की मांग करने वालो के साथ जा रहे कुछ लोगों को कांग्रेस ने अपने फायदे के लिए रोक लिया था। देश के लगभग 150 जिले है जहां हिन्दू बहुसंख्यक थे, लेकिन अब अल्पसंख्यक हो गए हैं। मुस्लिमों की आबादी बढ़ गई है, ये भारत में रहकर छाती में मेक ठोंक रहे हैं। गौरतलब है कि सांसद जनार्दन मिश्र अक्सर अपने बड़बोले बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते है। उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दिया बयान हो या फिर IPS और IAS अफसरों के लिए मंच पर धमकी। जनार्दन का वायरल होना तय होता है। सोमवार को ही उनका एक और बयान सोशल मीडिया में वायरल हुआ था जिसमें वो वोट चोरी का उदाहरण देते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी पर निशाना साधा था। अब सोमवार को ही उनका एक और विवादित बयान सामने आया है जो मुस्लिम समाज को लेकर है।

विधानसभा चुनाव 2027: जीत सुनिश्चित करने बीजेपी के पुराने विधायकों के टिकट होंगे जोखिम में

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बीजेपी इस बार जिताऊ और लोकप्रिय चेहरों पर दांव लगा सकती है। साथ ही उन सभी मौजूदा विधायकों के टिकट खतरे में है, जो पिछले चुनाव में बीजेपी के दम पर अपनी सीट निकलने में कामयाब हुए थे और इस बार भी इसी फिराक में बैठे हैं। सूत्रों की माने तो बीजेपी इस बार बड़ी संख्या में यानी 100 से 115 के बीच विधायकों का टिकट काट सकती है। इस तरह बीजेपी के मौजूदा विधायकों में से आधे विधायकों के टिकट पर तलवार लटक सकती है। इनकी जगह पर इस बार नए चेहरों के साथ ही विपक्षी दलों से आये मौजूदा विधायकों को बीजेपी अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाने का दांव खेल सकती है। हालांकि इस सर्वे से बीजेपी के साथ ही समाजवादी पार्टी के बागी विधायकों की भी मुश्किलें बढ़ गई है। सपा का PDA बीजेपी की हैट्रिक में बन रहा रोड़ा राजनीतिक जानकारों की माने तो सपा से आने वाले विधायक ये न सोचे कि बीजेपी में उनका टिकट पक्का है। उनका कहना है कि बीजेपी विधायकों के साथ ही सपा के बागी विधायकों को भी इंटरनल सर्वे के इम्तिहान में पास होना पड़ेगा। दरअसल बीते लोकसभा चुनाव के आए नतीजो ने 2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है। बीजेपी इस बार जहां जीत की हैट्रिक लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं समाजवादी पार्टी के पीडीए ने बीजेपी की हालत पतली कर दी है। सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हुए पीडीए का नारा दे रहे हैं। साथ इस बार बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने की बात भी पूरे दमखम के साथ कह रहे हैं। इन्ही सब चीजों को देखते हुए बीजेपी अभी से अंदर ही अंदर बिना किसी को भनक लगे अपनी तैयारियों में जुट गई है। सर्वे और BJP विधायकों की कीकत सूत्रों की माने तो बीजेपी इस बार टिकटों से पहले हर विधानसभा सीट पर इंटरनल सर्वे करा सकती है। इससे जिन सीटों पर बीजेपी के विधायक है उनकी असलियत का पता लग जाएगा। साथ ही जो सीट सपा समेत अन्य दलों के खाते में हैं वहां के किये क्या रणनीति तैयार करनी है उसका खाका भी तैयार हो जाएगा। इस तरह बीजेपी एक तीर से कई निशाने साध सकती है। उधर इंटरनल सर्वे की बात सुनकर विधायकों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि सूत्रों की माने तो कई ऐसे मौजूदा विधायक है, जिनके टिकट पर तलवार लटकी है। कहा ये भी जा रहा है कि इस बार के टिकट वितरण में पैरवी और परिवारवाद की झलक नहीं दिखाई देगी। पूजा पाल को भी टिकट मिलने की संभावना समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद से चायल सीट से विधायक पूजा पाल चर्चाओ में आ गई हैं। उन्होंने जन्माष्टमी के दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की है। इस मुलाकात को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलने लगी है। हालांकि पूजा पाल अभी बीजेपी में शामिल नहीं हुई है, लेकिन आने वाले समय में ऐसा देखने को मिल सकता है। साथ ही बीजेपी अगर पूजा पाल को टिकट दे देती है तो ये कोई आश्चर्यजनक बात नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सपा के बागी अभय सिंह, मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह समेत अन्य बागियों को भी बीजेपी मौका देकर समाजवादी पार्टी की मुसीबतें खड़ी कर सकती है। 

मंत्री जीवेश मिश्रा का तंज – विपक्ष थक चुका, हार स्वीकार कर चुका

मगध बिहार में इन दिनों निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)  को लेकर सख्त है। वहीं, विपक्ष लगातार फर्जी वोटर आईडी को लेकर सरकार और आयोग पर निशाना साध रहा है। इन दिनों डबल वोटर आईडी कार्ड पर पक्ष विपक्ष दोनों की ओर से बयान दिए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजनीति में इस समय एसआईआर को लेकर घमासान मचा हुआ है. साथ ही डबल वोटर कार्ड का मुद्दा भी तेजी से तूल पकड़ रहा है। इसी सियासी खींचतान के बीच शहरी विकास एवं आवास मंत्री जीवेश मिश्रा ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि  चुनाव से पहले ही विपक्ष हार मान चुका है, इसलिए ऐसे आरोप लगा रहा है। जहानाबाद के टाउन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे मंत्री जीवेश मिश्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही विपक्ष हार मान चुका है. उनके पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है. इस दौरान मंत्री जीवेश मिश्रा ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर भी तगड़ा हमला बोला। 'मुझे इस… बारे में जानकारी नहीं है' मंत्री जीवेश ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पाले हुए प्रशांत किशोर भी एनडीए के सामने कोई लाभ नहीं दिला पा रहे हैं। जब पत्रकारों ने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के दो-दो वोटर कार्ड को लेकर सवाल किया तो मंत्री ने कहा कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर किसी के पास दो-दो ईपिक कार्ड हैं तो यह चुनाव आयोग का विषय है। आयोग को इसकी जांच करनी चाहिए. उन्होंने बताया कि सोमवार को वह फिर जहानाबाद आएंगे और जिले वासियों को बड़ी सौगात देंगे। ध्यान रहें कि मंत्री जीवेश मिश्रा एल्केम लैबोरेटरी के संस्थापक स्वर्गीय सम्प्रदा सिंह की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जहानाबाद के टाउन हॉल पहुंचे थे। इस समारोह में पूर्व सांसद अरुण कुमार समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की।

विधानसभा-लोकसभा चुनाव से पहले MP में कांग्रेस जांचेगी वोटर लिस्ट

भोपाल  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण में कई लाख नाम काटे जाने पर आपत्ति के बीच कांग्रेस को मध्य प्रदेश की मतदाता सूचियों में भी खामियों की आशंका है। इसको तलाशने के लिए पार्टी प्रदेश के हर बूथ स्तर पर सत्यापन कराएगी। इसमें 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के समय जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए, जोड़े या संशोधित किए गए, उनकी पहचान करके रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह काम जनवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 65 हजार कार्यकर्ताओं को बूथों पर भेजकर मतदाताओं का सत्यापन कराने की रणनीति बना ली गई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राहुल गांधी के निर्देश पर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई से मतदाता सूची का सत्यापन कराने को कहा है। प्रदेश के पदाधिकारियों के अनुसार, 65 हजार कार्यकर्ताओं को लगाकर सभी बूथों पर सत्यापन कराया जाएगा। इसकी रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। खामियां मिलने पर मुद्दे को उठाते हुए चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। 24 नाम शिकायत के बाद हटाए गए थे बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के अन्य नेता यह दावा कर चुके हैं कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी थी। लगभग 24 नाम पार्टी की शिकायत के बाद हटाए गए थे। 2023 के चुनाव में भी प्रमाण सहित शिकायतें की गई थीं, जिनमें से कुछ पर कार्रवाई भी हुई। पार्टी ने तय किया है कि बूथ लेवल एजेंटों के माध्यम से सूची का पड़ताल कराई जाएगी। 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद जो परिवर्तन हुआ था, उसकी जांच होगी। दोनों चुनाव के समय की मतदाता सूची लेकर बूथ लेवल एजेंट मतदान केंद्रों पर जाएंगे। यहां चिन्हित मतदाताओं के घर जाएंगे और यह पता करेंगे कि जो परिवर्तन हुए थे, वे सही थे या नहीं। बूथवार जांच कराएंगे, सतर्क भी रहेंगे कांग्रेस के प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि मध्य प्रदेश में मतदाता सूची की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसी माह 230 विधानसभा के प्रभारी नियुक्त कर दिए जाएंगे। पार्टी के 65 हजार बूथ लेवल एजेंट स्थिति देखेंगे। सूची से जिनके नाम हटाए, जोड़े या संशोधित किए गए, सबको देखा जाएगा। रिपोर्ट बनाकर पार्टी मुख्यालय भेजेंगे और चुनाव आयोग में भी जाएंगे। जांच कराएं, कोई बुराई नहीं पर एक वर्ग विशेष पर फोकस न करें भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि मतदाता सूची पारदर्शी और प्रमाणिक रहे, पार्टी हमेशा इसकी पक्षधर रही है। इसको लेकर पार्टी काम भी करती है। कांग्रेस एक मजहब को लेकर चुनाव आयोग के नियमों को दरकिनार करने की बात कर रही है। कांग्रेस मतदाता सूची का सत्यापन कराए, इसमें कोई बुराई नहीं। हम तो हमेशा कहते हैं कि सूची शुद्ध होनी चाहिए पर कांग्रेस का ध्येय मतदाता सूची का शुद्धीकरण नहीं तुष्टिकरण की राजनीति है। उसका संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा ही नहीं है। एक मजहब विशेष को लेकर बात करना कहां से उचित है। चुनाव चोरी पर रिपोर्ट जारी करेगी कांग्रेस कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि लोकतंत्र और संविधान को खत्म करने की खुली दुर्भावना रखने वालों की साजिशों को बेनकाब करना अब जरूरी हो गया है। मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था, इसे सबके सामने लाया जाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव-2023 को लेकर चुनाव-चोरी पर रिपोर्ट जारी की जाएगी।

दिग्विजय सिंह ने कहा, कांग्रेस छोड़ने के बावजूद ज्योतिरादित्य मेरे पुत्र जैसे

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हुई मुलाकात के बाद सियासत में कई तरह की अटकलें लग रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिग्विजय सिंह को मंच पर बैठने का वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा है। अब इस मामले में दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी मेरे बेटे की तरह हैं। क्या कहा दिग्विजय सिंह ने रविवार को मीडिया से चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंह ने सिंधिया परिवार को लेकर बात की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मेरे पुत्र के जैसे हैं। सिंधिया परिवार से हमारा पुराना संबंध हैं। माधवराव सिंधिया जी हमारी पार्टी के सीनियर नेता थे। उन्होंने गांधी परिवार को बहुत आदर और सम्मान दिया। ज्योतिरादित्य सिंधिया जी भी कांग्रेस में थी। कांग्रेस में उन्हें आदर और प्यार मिला। केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी गई लेकिन पता नहीं वह क्यों छोड़कर चले गए। क्यों लेकर गए मंच पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम लोग एक कार्यक्रम में मौजूद थे। मैं मंच के नीचे बैठा था और ज्योतिरादित्य सिंधिया जी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। इस दौरान जब उनकी नजर पड़ी तो वह मुझे मंच पर ले गए। अपनी कसम के बारे में बताया दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने मंच पर नहीं बैठने की कसम तोड़ दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंच पर इसलिए नहीं बैठता कि कई बार वहां मंच पर बैठने को लेकर विवाद की स्थिति हो जाती है कि मंच पर कौन-कौन बैठेगा। इसलिए मैं कार्यकर्ताओं के साथ बैठना पसंद करता हूं। उन्होंने कहा कि यह अभी से नहीं है यह कांग्रेस की बहुत पुरानी परंपरा है। मैंने कोई नई परंपरा शुरू नहीं की है। राहुल गांधी जब कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे तब वह भी मंच पर नहीं बैठे थे। आम कार्यकर्ताओं के साथ मंच के नीते बैठे थे। जब भाषण देने के लिए बुलाया जाता था तब लोग मंच पर भाषण देते थे। मंच पर केवल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बैठते थे। मंत्री, विधायक और सांसद नीचे ही बैठते थे। क्या हुआ था कार्यक्रम में दरअसल, शुक्रवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह राजधानी भोपाल में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। दिग्विजय सिंह मंच के नीचे बैठे थे जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए मंच पर कुर्सी लगाई गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब देखा की दिग्विजय सिंह नीचे बैठे हैं तो वह उठकर दिग्विजय सिंह के पास आए और हालचाल पूछा इसके बाद उनका हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर लेकर गए।  

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने छोड़ा विदेश मामलों का विभागाध्यक्ष पद, जानिए कारण

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने कहा कि यह कदम विभाग के पुनर्गठन और युवाओं को नेतृत्व का अवसर देने के लिए उठाया गया है. करीब एक दशक तक इस विभाग की कमान संभालने वाले आनंद शर्मा का कहना है कि “विभाग में संभावनाशील और प्रतिभाशाली युवा नेताओं को शामिल करने से इसके कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी.”  पीटीआई के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर अपना इस्तीफ़ा सौंपा और पार्टी नेतृत्व को इस ज़िम्मेदारी के लिए धन्यवाद दिया. अंतरराष्ट्रीय मामलों में पार्टी का चेहरा रहे हैं आनंद शर्मा आनंद शर्मा कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में पार्टी का चेहरा रहे हैं. उन्होंने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते, न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को छूट दिलाने, और भारत-अफ्रीका साझेदारी को संरचित रूप देने में अहम भूमिका निभाई. मुंबई 26/11 हमलों के बाद भी उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा. कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, उनके नेतृत्व में DFA ने दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को मानने वाली पार्टियों से मजबूत संबंध बनाए.  मनीष तिवारी की पोस्ट इस दौरान एशिया, अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट की राजनीतिक पार्टियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और डेलीगेशन एक्सचेंज आयोजित हुए. मनीष तिवारी ने X पर लिखा- “विदेश मामलों की उनकी समझ गहरी है, खासकर अफ्रीका पर. उनके अनुभव से हमने हमेशा लाभ उठाया है. उन्होंने अपने जीवन के साढ़े पांच दशक कांग्रेस की सेवा में लगाए हैं.” आनंद शर्मा अब भी कांग्रेस में बने रहेंगे, लेकिन DFA की कमान अब किसी युवा नेता के हाथ में जाएगी. वह ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का दृष्टिकोण रखने के लिए विदेश गए बहु-दलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का भी हिस्सा थे.

राहुल-प्रियंका, अखिलेश समेत कई सांसद हिरासत में, ‘वोट चोरी’ पर गरमाया माहौल

नई दिल्ली  ‘वोट चोरी’ को लेकर इंडिया ब्लॉक के सांसदों का संसद से लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च निकाला। पैदल मार्च में राहुल गांधी-प्रियंका समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहें। हालांकि रास्ते में दिल्ली पुलिस ने परमिशन नहीं लेने का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। इसके बाद सांसद सड़क पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका और अखिलेश समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया है। पुलिस सभी को वैन में बैठकर ले गई है। प्रोटेस्ट में बेहोश हुईं महुआ मोइत्रा वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी प्रदर्शन के दौरान बेहोश हो गईं। इस दौरान वे पुलिस की बस में थीं। महुआ मोइत्रा को बस में ही राहुल गांधी ने पानी पिलाया। पश्चिम बंगाल के आरामबाग से ही एक दूसरे सांसद मिताली बाग प्रदर्शन के दौरान बेहोश हो गईं। उन्हें सड़क पर लिटाकार साथी नेताओं ने पानी के छींटे मारे। इसके बाद राहुल गांधी उन्हें पकड़कर ले गए। इससे पहले संसद के मानसून सत्र के 16वें दिन यानी आज लोकसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत के साथ ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। सांसद सदन में वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाते हुए वेल के पास पहुंच गए। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे बाद विपक्ष के करीब 300 सांसदों ने मकर द्वार से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च शुरू किया विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रगान गाया। ये सभी हाथों में ‘वोट बचाओ’ के बैनर लेकर चल रहे हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने कहा था कि INDIA ब्लॉक ने मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश ने कहा कि सरकार सुनना ही नहीं चाहती। अखिलेश यादव बैरिकेड्स फांदकर कूदे दिल्ली पुलिस ने इस दौरान सुरक्षा के कई लेयर का इंतजाम किया था। इस दौरान अखिलेश यादव विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच बैरिकेड्स फांदकर कूद गए। बैरिकेड से कूदे अखिलेश यादव को वहां मौजूद दूसरे नेताओं ने संभाल लिया। थरूर बोले- सवाल गंभीर हैं, जवाब मिलना चाहिए मार्च में शामिल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा- मेरे लिए यह मुद्दा बहुत सीधा है। राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनका जवाब मिलना चाहिए। चुनाव आयोग की न सिर्फ देश के प्रति जिम्मेदारी है, बल्कि उसकी अपनी भी जिम्मेदारी है कि जनता के मन में हमारे चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर कोई संदेह न रहे।चुनाव पूरे देश के लिए मायने रखते हैं। हमारा लोकतंत्र इतना अनमोल है कि इसे इस संदेह से खतरे में नहीं डाला जा सकता कि कहीं डुप्लीकेट वोटिंग तो नहीं, कहीं कई पते तो नहीं, या कहीं फर्जी वोट तो नहीं।अगर लोगों के मन में कोई संदेह है, तो उसका समाधान किया जाना चाहिए। इन सवालों के जवाब उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन ये जवाब विश्वसनीय होने चाहिए। मेरा बस यही अनुरोध है कि चुनाव आयोग इन सवालों को लेकर उनका समाधान करे। चुनाव आयोग ने लिखा जयराम रमेश को पत्र इधर भारत निर्वाचन आयोग सचिवालय ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश को पत्र लिखा है। उसने पत्र में लिखा, चुनाव आयोग ने आज दोपहर 12:00 बजे बातचीत के लिए समय दिया है। अनुरोध है कि स्थान की कमी के कारण, कृपया अधिकतम 30 व्यक्तियों के नाम सूचित करें। चुनाव आयोग ने जयराम रमेश को चिट्ठी लिखकर जानकारी दी है। कांग्रेस ने पहले ही चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था। फिलहाल कांग्रेस की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों के नाम सामने नहीं आए हैं। देखना होगा कि कौन-कौन विपक्षी नेता चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। आज पेश हो सकते हैं 3 नए बिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में आज रिवाइज्ड इनकम टैक्स बिल 2025 पेश कर सकती हैं। 31 सदस्यों वाली सिलेक्शन कमेटी की ओर से बदलाव के सुझावों के बाद 8 अगस्त को सीतारमण ने न्यू इनकम टैक्स बिल 2025 को वापस ले लिया था। संसदीय समिति ने 21 जुलाई को लोकसभा में रिपोर्ट पेश की थी। कमेटी ने सुझाव दिए थे कि बिल में चीजों को और ज्यादा स्पष्ट और सख्त करना चाहिए। अस्पष्ट चीजों को हटाना और नए कानून को मौजूदा फ्रेमवर्क के साथ जोड़ना चाहिए। सिलेक्शन कमेटी ने 4584 पन्नों की रिपोर्ट में कुल 566 सजेशन और रिकमेंडेशन दिए थे। इनके अलावा राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक 2025 और भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 भी पेश किया जाएगा।

डबल वोटिंग विवाद: राहुल गांधी पर लगा आरोप और आर्टिकल 337 के तहत संभावित जेल की सजा

बेंगलुरु कर्नाटक में डबल वोटिंग का दावा अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए कानूनी पचड़ा बन गया है. राहुल गांधी ने अपनी प्रेजेंटेशन में एक डॉक्‍यूमेंट दिखाते हुए दावा किया था कि यह चुनाव आयोग का रिकॉर्ड है. शगुन रानी नाम की एक महिला के पास दो-दो वोटर आईडी हैं. इसमें पोलिंग बूथ ऑफिसर का टिक मार्क लगा है, जो यह साबित करता है कि शगुन रानी ने दो बार वोट भी किया. अब यही राहुल गांधी के गले की फांस बन गया है. क्‍योंक‍ि चुनाव आयोग कह रहा क‍ि पूरी कहानी ही उलटी है. कर्नाटक के चीफ इलेक्‍शन कमीश्नर ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर दिया है और पूछा है क‍ि जो दावा आपने क‍िया, उसका सबूत तो दीजिए. क्‍योंक‍ि हमने जो जांच की है, उसके मुताबिक- शगुन रानी नाम की मह‍िला ने दो वार वोट नहीं क‍िया. लेकिन सबसे बड़ा सवाल, अगर राहुल गांधी का दावा गलत पाया गया तो क्‍या होगा? कहा जा रहा है क‍ि उन पर आर्टिकल 337 के तहत कार्रवाई हो सकती है. आख‍िर ये आर्टिकल 337 है क्‍या? भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 337 एक गंभीर अपराध में लागू होती है. जब भी कोई शख्‍स सरकारी दस्तावेज या कोर्ट रिकॉर्ड की जालसाजी करता है तो उस पर ये धारा लगाई जा सकती है. जैसे कोई शख्‍स अगर वोटर आईडी, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु या विवाह रजिस्टर, सरकारी प्रमाणपत्र, कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेज में खेल करे, तो वो इस खेल में फंस सकता है. माना जा रहा क‍ि राहुल गांधी ने ज‍िस तरह चुनाव आयोग के डॉक्‍यूमेंट को गलत तरह से पेश क‍िया, उसमें छेड़छाड़ की गई, वह इस दायरे में आएगी. अगर ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. क्‍या कहता है कानून कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे किसी डॉक्‍यूमेंट को जाली साबित करने में दोषी पाया जाता है, चाहे वह डॉक्‍यूमेंट कागजी हो या इलेक्ट्रॉनिक, तो उसे 7 साल तक की कठोर कारवास की सजा दी जा सकती है. इतना ही नहीं, उस पर असीमित जुर्माना भी लगाया जा सकता है. कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपराध गैर-जमानती भी हो सकता है, यानी दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से ही जमानत लेनी होगी. क‍ितने द‍िन की सजा कानून ये भी कहता है क‍ि अगर आरोप साबित होते हैं तो दोषी व्यक्ति को राजनीति में बने रहने पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर संसद या विधानसभा की सदस्यता जा सकती है. राहुल गांधी के मामले में अगर जांच और कोर्ट में यह साबित होता है कि उन्होंने वोटर लिस्ट से जुड़ा कोई जाली डॉक्‍यूमेंट बनाया या इस्तेमाल किया, तो धारा 337 के तहत उन पर केस चल सकता है और दोषी साबित होने पर उन्हें 7 साल तक की जेल, जुर्माना, और सांसद पद गंवाने का खतरा भी हो सकता है. कहां फंसे पेच चुनाव आयोग को कोर्ट में यह तय करना होगा कि डॉक्‍यूमेंट जानबूझकर जाली बनाया गया या सिर्फ गलती से शामिल हुआ. सबूत की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष पर यानी चुनाव आयोग पर होगी. दोष साबित होने पर सजा और जुर्माने की मात्रा अदालत तय करेगी. कांग्रेस बोली, रंगे हाथ पकड़े गए तो सबूत मांग रहे कर्नाटक चुनाव आयोग के दावे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस महासच‍िव केसी वेणुगोपाल ने कहा- राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका बड़ा खुलासा आयोग के अपने डेटा, यानी वोटर लिस्ट, पर आधारित है. अब, जब वे आपको रंगे हाथ पकड़ चुके हैं, तो आप उनसे दस्तावेज़ मांग रहे हैं? ये वही डेटा है जो आपके पास है.राहुल का आरोप है कि आयोग डिजिटल, मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने से इंकार करता है, सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच रोकता है और सबूत मिटाता है. उनका कहना है कि सबूत सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं, फिर भी आयोग व्हिसलब्लोअर से सवाल कर रहा है. यह सिर्फ विडंबना नहीं, बल्कि दोष स्वीकारने जैसा है. कांग्रेस ने पांच सीधे सवाल पूछे हैं विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं दी जाती? सीसीटीवी और वीडियो सबूत मिटाने का आदेश किसने दिया? फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी क्यों हुई? विपक्षी नेताओं को धमकाने का कारण क्या है? क्या चुनाव आयोग अब भाजपा का चुनाव एजेंट बन गया है?

संसद के बाद सड़क पर जुटे 300 सांसद, 25 दलों का SIR विरोधी मेगा मार्च

नई दिल्ली बिहार में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावों में कथित धांधली के खिलाफ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी इंडिया अलायंस के करीब 300 सांसद आज संसद भवन से चुनाव आयोग तक पैदल मेगा मार्च करने जा रहे हैं। इसमें विपक्ष के 25 दलों के सांसद शामिल होंगे। बड़ी बात ये है कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मार्च की इजाजत नहीं दी है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किसी सांसद ने ऐसी अनुमति मांगी ही नहीं है। ऐसे में अब विपक्षी सांसद संसद के बाद सड़क पर भी संग्राम करते नजर आ सकते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पुलिस की अनुमति के लिए कोई औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत नहीं किया गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग सचिवालय ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश को जवाबी पत्र लिखकर आज दोपहर 12 बजे मुलाकात और बातचीत का समय तय किया है। इस चिट्ठी में कहा गया है कि चूंकि जगह कम है और पार्किंग स्पेस की दिक्कत है, इसलिए अधिकतम 30 लोग ही चर्चा करने के लिए बैठक में शामिल हों। इस बीच दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग के बाहर बैरिकेड्स लगा दिए हैं। ट्रांसपोर्ट भवन होते हुए मार्च इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर वोट चोरी करवा रहा है और भाजपा को फायदा पहुंचा रहा है। गांधी के आवास पर पिछले सप्ताह आयोजित डिनर में इस विषय पर चर्चा के बाद तय हुआ था कि गठबंधन दलों के सांसद इस मुद्दे पर संसद भवन के मकर द्वार से चुनाव आयोग के कार्यालय तक ट्रांसपोर्ट भवन होते हुए मार्च करेंगे। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेंगे। मार्च से पहले गठबंधन नेताओं की बैठक मार्च का आयोजन आज (सोमवार 11 अगस्त को) हो रहा है। इससे पहले संसद की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व सुबह संसद भवन परिसर में विपक्ष के नेता के कक्ष में गठबंधन के नेताओं की बैठक होगी, जिसमें संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने को लेकर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि इंडिया गठबंधन के नेता संसद भवन परिसर में पिछले सप्ताह की तरह प्रदर्शन भी करेंगे। करीब 11:30 बजे निकलेगा मार्च इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी समेत कई सांसद शामिल होंगे। सुबह करीब 11:30 बजे ये मार्च निकाला जा सकता है। इस दौरान ये सांसद 2024 के लोकसभा चुनावों में कथित "वोट चोरी" और चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करेंगे।

दो बार वोट डालने के आरोप से घिरे राहुल गांधी, शकुन रानी मामले में जवाब मांगा गया

कर्नाटक कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को वोट चोरी के आरोपों पर नोटिस भेजा है। 7 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया, 'चुनाव आयोग के आंकड़ों बता रहे हैं कि शकुन रानी ने दो बार मतदान किया। यह ईसी का डेटा है। इस आईडी कार्ड पर 2 बार वोट डाला गया है। इस पर जो टिक है, वो पोलिंग बूथ के अधिकारी का है।' मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से शुरुआती तौर पर जांच की गई। इसमें पता चला कि राहुल गांधी की ओर से प्रेजेंटेशन में दिखाए गए टिक मार्क ईसी के आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। इसके अलावा, शकुन रानी ने भी बयान दिया है कि उन्होंने केवल एक बार ही मतदान किया। न कि दो बार, जैसा कि आरोप लगाया गया है। इसे देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी से उन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने की मांग रखी है, जिनके आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि शकुन रानी या किसी अन्य व्यक्ति ने दो बार मतदान किया। यह दस्तावेज इस मामले में विस्तृत जांच के लिए आवश्यक बताया गया है। नोटिस में कहा गया कि इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।