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भाजपा का वार: तेजस्वी यादव की ‘जमीन के बदले नौकरी’ नीति पर फिर उठे सवाल

नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव के विमर्श में जगह बना रहे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर महागठबंधन के विरुद्ध बाजी सजाने का मौका भाजपा को मिल गया है। आईआरसीटीसी के होटलों को लीज पर देने के मामले में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव पर आरोप तय होते ही भाजपा ने लालू परिवार को निशाने पर ले लिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व सांसद रविशंकर प्रसाद ने सत्ता में आने पर युवाओं को नौकरी देने के तेजस्वी यादव के वादे पर कटाक्ष किया कि बिहार की जनता झांसे में न आए, तेजस्वी यादव जमीन तो ले लेंगे, लेकिन नौकरी नहीं देंगे। यह इनका टेस्टेड मॉडल है। अदालत ने तय किए आरोप पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज अदालत ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए हैं। ये आरोप बहुत गंभीर हैं, जिनमें सरकारी संपत्ति के आवंटन में भ्रष्टाचार, षड्यंत्र रचना और बेईमानी से सरकार की निर्णय प्रक्रिया में गड़बड़ी करने जैसे अपराध शामिल हैं। इन मामलों में आईपीसी की धारा 120-बी और 420 दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार बदलने निकले हैं, जबकि उन्हीं के खिलाफ 420 का आरोप अदालत ने तय किया है। सवाल यह है कि जब किसी की ऐसी छवि और ऐसे आरोप हों, तो वह बिहार को कैसे बदल सकता है? 'जमीन ले लेंगे, लेकिन नौकरी नहीं देंगे' अपने प्रहार को धार देते हुए प्रसाद ने कहा कि अगर लालू प्रसाद के पूरे शासनकाल को तीन वाक्यों में कहा जाए तो वह होंगे- चारा खाना, अलकतरा पीना और सरकारी संपत्ति तथा टेंडर में हेराफेरी कर जमीन हड़पना। इसमें एक चौथा मॉडल भी जोड़ना चाहिए, 'जमीन दो, नौकरी लो।' यह चारों मॉडल लालू राज की पहचान रहे हैं। इस मॉडल की सबसे खास बात यह रही कि इसका सारा लाभ सिर्फ परिवार तक सीमित रहा, बाहर किसी को नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन दो, नौकरी लो योजना का सबसे बड़ा शिकार गरीब लोग हुए हैं। यह जमीन मजदूरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ली गई। नौकरी देने से पहले उनसे जमीन छीनी गई। यही कांग्रेस और राजद का तथाकथित सामाजिक न्याय है। मुकदमे की चार्जशीट में दर्ज तथ्यों को दोहराने के साथ ही सांसद रविशंकर प्रसाद ने तेजस्वी यादव का वर्ष 2020 के चुनाव का हलफनामा भी दिखाया। सवाल उठाया कि 17 साल की उम्र में तेजस्वी के पास 11 संपत्ति कैसे हो गईं? राबड़ी देवी के नाम पद दर्ज संपत्तियों का ब्योरा साझा करते हुए प्रश्न किया कि राबड़ी देवी ऐसा क्या कार्य करती हैं? और आय का स्रोत क्या है? आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में दाखिल चार्जशीट की बात करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि लालू परिवार के भ्रष्ट आचरण की पोल एक बार फिर खुल गई है। यह विषय बिहार में बड़ा मुद्दा है और जनता इस पर जरूर विचार करेगी।  

दूसरी लिस्ट में 65 सीटों के प्रत्याशी शामिल, जनसुराज की नई घोषणा

पटना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने पहले ही कहा था कि समाज में जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उन्हें उतनी ही हिस्सेदारी मिलेगी। बिहार में अतिपिछड़ा समाज के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इसीलिए हमलोगों ने अब तक एक तिहाई सीटों पर इन्हें ही टिकट दिया है। आज दूसरी लिस्ट में 65 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की गई है। इससे पहले 51 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई थी। अब तक 116 प्रत्याशी के नाम की घोषणा की गई है। इसमें सबसे अधिक संख्या अतिपिछड़ा समाज के लोगों की है। पीके ने कहा कि बिहार के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राजनीतिक दल ने इतने अधिक संख्या में अतिपिछड़ों को टिकट दिया है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने 65 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। इससे पहले जनसुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपने पहले 51 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में 7 सुरक्षित और 44 सामान्य सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। पार्टी ने जातीय संतुलन का ध्यान रखते हुए अति पिछड़ा वर्ग से 17 (16 हिंदू और 1 मुस्लिम), अन्य पिछड़ा वर्ग से 11, सामान्य वर्ग से 9 और अल्पसंख्यक वर्ग से 7 उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा, वाल्मीकिनगर विधानसभा सीट से एक अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार को टिकट दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में एनडीए उम्मीदवारों की घोषणा आज, दिलीप जायसवाल ने जताया एकजुटता का भरोसा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के अंतर्गत एनडीए आज (सोमवार) की शाम अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगा। यह जानकारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दी। उन्होंने रविवार को घोषित सीट बंटवारे को लेकर एनडीए के भीतर किसी तरह के मतभेद होने से इनकार किया और कहा कि गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि एनडीए ने पहले ही सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। अब भाजपा समेत राजग के सभी घटक दलों के उम्मीदवारों की घोषणा शाम में की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में राजग के पांच घटक दल ‘पांच पांडव’ की तरह हैं और सभी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तथा भारी बहुमत से सरकार बनाएंगे। बता दें कि सीट बंटवारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि शेष 243 सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की एलजेपी (राम विलास) 29 सीटों पर, जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। हम और आरएलएम ने सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी जताई है। सुबह दिल्ली से लौटने के बाद उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि सीट बंटवारे की व्यवस्था आपसी सहमति से तय की गई है। उन्होंने दावा किया कि हम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।  

कर्नाटक से बिहार चुनाव में धन वर्षा? कांग्रेस पर BJP के गंभीर आरोप

पटना  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की बुलाई कैबिनेट बैठक को लेकर अटकलों का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि यह बैठक राज्य कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को होने वाली इस मीटिंग के तार बिहार विधानसभा चुनाव से जोड़े हैं। भाजपा का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च की जिम्मेदारी उठाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक को बिहार चुनाव के लिए एटीएम बना दिया है। उन्होंने कहा, 'मुझे जानकारी मिली है कि उन्होंने बिहार चुनाव के दौरान कांग्रेस के पूरे खर्च की जिम्मेदारी उठाई है। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने इस पर चर्चा करने के लिए डिनर मीटिंग बुलाई है।' उन्होंने कहा है कि कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र ने चुनाव में इस्तेमाल के लिए कथित तौर पर 40 किलो सोना बिहार भेजा है। खास बात है कि वीरेंद्र को हाल ही में ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। अशोक ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नवंबर में सिद्धारमैया को बदला जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री की डिनर मीटिंग, शिवकुमार के सीएम बनने को लेकर विधायकों के बयान और जल्दबाजी में जातिगत जनगणना से कांग्रेस में राजनीतिक क्रांति के संकेत मिल रहे हैं।' कांग्रेस क्या बोली इधर, कांग्रेस के जिला प्रभारी मंत्री एन चालूवरयस्वामी ने कहा कि डिनर का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने इसे अफवाह बताया है। उन्होंने कहा है कि बिहार चुनावों के बाद कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है, लेकिन नेतृत्व में बदलाव का फैसला पार्टी आलाकमान पर है। उन्होंने कहा, '34 मंत्री हैं। अन्य के लिए कुछ और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।' कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों को खारिज करते हुए इसे मीडिया में चल रही एक 'अफवाह' बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि पार्टी हाईकमान इस पर फैसला करेगा। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि नवंबर में जब कांग्रेस सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल की आधी अवधि पूरी कर लेगी तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है, जिसे कुछ लोग 'नवंबर क्रांति' के रूप में मान रहे हैं। एक सवाल के जवाब में शिवकुमार ने संवाददाताओं को बताया, 'कोई मंत्रिमंडल फेरबदल नहीं, कुछ नहीं। ये सब मीडिया में चल रही अफवाहें हैं, कुछ लोगों की बातें सुन रहा हूं। बातें मीडिया में हैं। या तो मुझे या मुख्यमंत्री को इस बारे में बोलना होगा। जब हम दोनों ने ही कुछ नहीं कहा, तो इसमें क्या है?' उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों को (मंत्री बनने की) जल्दी है। अगर उनके नाम मीडिया में आ गए, तो वे (नेताओं के) घर-घर जाएंगे। इसकी कोई संभावना नहीं है। सब कुछ आलाकमान तय करेगा।' पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनका खेमा फेरबदल पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाना, जब सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे करने वाली है, इस संदेश के रूप में देखा जाएगा कि सत्ता की कमान उनके हाथ में है और आगे भी वही नेतृत्व करते रहेंगे। यह कदम शिवकुमार के लिए एक झटका साबित हो सकता है, जो मुख्यमंत्री पद पर दावा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य के राजनीतिक हलकों में, विशेषकर सत्तारूढ़ कांग्रेस में, इस वर्ष के अंत में मुख्यमंत्री परिवर्तन के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं, जिसमें सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते का दावा किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से, मंत्री पद के इच्छुक कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग की ओर से भी मंत्रिमंडल में फेरबदल करके उन्हें शामिल करने की मांग उठ रही है। कुछ विधायकों ने तो खुले तौर पर मंत्री बनने की इच्छा भी व्यक्त की है।

राजद नेता का दावा: महागठबंधन की सीटें तय, ऐलान सिर्फ कल बाकी

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विपक्षी दलों के महागठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला का ऐलान कल (सोमवार, 13 अक्टूबर) को होगा। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने यह बात कही है। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन में सब ठीक है और सब हो गया है। कल प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी और सब कुछ साफ हो जाएगा। राजद, कांग्रेस, लेफ्ट समेत सभी घटक दलों के बीच सीट बंटवारे की घोषणा कर दी जाएगी। राजद नेता भाई वीरेंद्र ने रविवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने महागठबंधन में सीटों को लेकर घटक दलों के बीच मतभेद की अटकलों से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में किसी भी मुद्दे पर कोई पेच नहीं है। सब ऑल इज वेल है। लालू परिवार के दिल्ली दौरे पर उन्होंने कहा कि कोर्ट का मामला है, इसलिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लैंड फॉर जॉब केस में जानबूझकर सरकार लालू एवं तेजस्वी यादव को तंग करना चाहती है। वहीं, अब तक महागठबंधन में सीट बंटवारे पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार राजद, कांग्रेस, वीआईपी और लेफ्ट पार्टियों में सीटों की संख्या को लेकर अभी हल नहीं निकल पाया है। मुकेश सहनी को राजद 15 के आसपास सीटें देने को राजी है लेकिन वे डिप्टी सीएम पद की घोषणा पर अड़े हुए हैं। पशुपति पारस की रालोजपा भी महागठबंधन से अलग रहकर ही चुनावी मैदान में उतरती नजर आ रही है। दूसरी ओर, सीट शेयरिंग के ऐलान से पहले ही महागठबंधन में शामिल पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों को नामांकन का इशारा कर दिया है। खबर है कि राजद ने 50 प्रत्याशियों को सिंबल देकर तैयार रहने को कहा है। वहीं, वाम दल सीपीएम ने दो सीटिंग विधायकों को नामाकंन की हरी झंडी दे दी है। सीपीआई माले के भी कुछ विधायकों ने नामांकन का ऐलान कर दिया है।  

Bihar Chunav में बड़े बदलाव की तैयारी, पुराने चेहरों की जगह युवाओं को तरजीह

नई दिल्ली बिहार भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रत्याशियों की सूची (Bihar Chunav BJP Candidate List 2025) लगभग तैयार कर ली है और अब बस दिल्ली में अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार शाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय चुनाव समिति एवं संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसी बैठक में सूची पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े, और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। दिल्ली में दो दिनों तक चली बैठकें पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में बीते दो दिनों से बिहार चुनाव को लेकर लगातार बैठकें हो रही थीं। अब सूची को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश चुनाव समिति और केंद्रीय चुनाव समिति के बीच उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। भाजपा नेतृत्व की स्वीकृति के बाद यह सूची आधिकारिक रूप से इंटरनेट मीडिया पर जारी की जाएगी। वहीं, NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में सीटों के बंटवारे पर भी लगभग सहमति बन चुकी है। राजग के सभी घटक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और शीर्ष नेता दिल्ली में ही मौजूद हैं। संभव है कि सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा रविवार रात या सोमवार सुबह तक हो जाए। युवा और नए चेहरों पर भाजपा का फोकस भाजपा इस बार युवा और नए चेहरों को अवसर देने के मूड में है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता अब नए नेतृत्व की ओर देख रही है। इसलिए, कई मौजूदा विधायकों का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन, स्थानीय समीकरण और जीत की संभावना को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश स्तर पर भाजपा संगठन ने पहले ही संभावित उम्मीदवारों का पैनल दिल्ली भेज दिया था। वहीं, कुछ नामों पर अभी भी अंतिम विचार चल रहा है, खासकर उन सीटों पर जहां गठबंधन के अंदर खींचतान बनी हुई है। प्रत्याशियों को मिले नामांकन की तैयारी के निर्देश दिल्ली से लौटे भाजपा नेताओं के अनुसार, पार्टी ने कुछ संभावित उम्मीदवारों को पहले ही नामांकन की तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। भाजपा प्रदेश संगठन बूथ स्तर पर चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ है, ताकि टिकट घोषणा के तुरंत बाद उम्मीदवार मैदान में सक्रिय हो जाएं।   NDA में तालमेल की स्थिति स्पष्ट राजग के अन्य घटक दलों- जदयू, एलजेपी(राम विलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के साथ सीटों के बंटवारे पर भी सहमति बन चुकी है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के अनुसार, गठबंधन को मजबूत बनाए रखते हुए हर क्षेत्र में सामंजस्यपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेता सोमवार सुबह तक पटना लौट सकते हैं। इसके बाद प्रदेश स्तर पर प्रत्याशियों की घोषणा और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू होगी। बिहार भाजपा अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है, और दिल्ली में मुहर लगने के बाद प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी और तेज़ होने की संभावना है।

ओवैसी की पार्टी AIMIM ने दिखाई ताकत, बिहार की कई सीटों पर उतरेगी मैदान में

पटना  बिहार चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसको लेकर शनिवार को पहली लिस्ट जारी कर दी गई है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी जिन सीटों पर पार्टी लड़ेगी उसकी प्रथम सूची की है। जिसमें 16 जिलों की 32 विधानसभा सीटों का ऐलान किया है। पहली लिस्ट देखे- जिला किशनगंज: बहादुरगंज, ठाकुरगंज, कोचाधामन और किशनगंज विधानसभा जिला पूर्णिया: अमौर, बायसी और क़स्बा विधानसभा जिला कटिहार: बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी और कदवा विधानसभा जिला अररिया: जोकीहाट और अररिया विधानसभा जिला गया: शेरघाटी और बेला विधानसभा जिला मोतिहारी: ढाका और नरकटिया विधानसभा जिला नवादा: नवादा शहर विधानसभा जिला जमुई: सिकंदरा विधानसभा जिला भागलपुर: भागलपुर और नाथनगर विधानसभा जिला सिवान: सिवान विधानसभा जिला दरभंगा: जाले, केवटी, दरभंगा ग्रामीण और गौरा बौराम विधानसभा जिला समस्तीपुर: कल्याणपुर विधानसभा जिला सीतामढ़ी: बाजपट्टी विधानसभा जिला मधुबनी: बिस्फी विधानसभा जिला वैशाली: महुआ विधानसभा जिला गोपालगंज: गोपालगंज विधानसभा आपको बात दें पिछली बार 2020 के चुनाव में ओवैसी की पार्टी उपेंद्र कुशवाहा के थर्ड फ्रंट के बैनर तले 20 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें मायावती की बीएसपी भी शामिल थी। एआईएमआआईएम के 5 विधायक जीते थे। जिसमें खुद अमौर से अख्तरूल ईमान भी शामिल हैं। लेकिन इस बार लग रहा है कि ओवैसी की पार्टी सीमांचल के अलावा मिथिलांचल, मगध और शाहबाद के इलाकों में भी दांव लगा रही है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कहा कि महागठबंधन में शामिल नहीं होने के चलते हम लोगों को थर्ड फ्रंट (तीसरा मोर्चा ) बनाना पड़ रहा है। जिसका जल्द ही ऐलान कर दिया जाएगा। तीसरे मोर्चे में कौन-कौन से दल होंगे। इसकी भी जानकारी आपको दे दी जाएगी। हमारी कई दलों के नेताओं के साथ बातचीत जारी है।  

दिग्गी की रणनीति: पार्टी फंडिंग में साथ दें सभी नेता, बूथ स्तर पर निकालें जनजागरूकता यात्रा

भोपाल  भारत जोड़ों यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में पदयात्रा होगी. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिला प्रभारियों की बैठक में प्रस्ताव दिया. मध्य प्रदेश में पदयात्रा निकालने का प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव के बाद बैठक में दिग्विजय पदयात्रा को लेकर प्लानिंग करेंगे. जनता से जुड़े मुद्दे पदयात्रा में उठाए जाएंगे. भारत जोड़ो यात्रा का ब्लूप्रिंट भी दिग्विजय सिंह ने तैयार किया था. कांग्रेस को उम्मीद पदयात्रा के जरिए एमपी कांग्रेस मजबूत होगी. मध्य प्रदेश कांग्रेस की नई रणनीति: बूथों के बीच यात्रा और हस्ताक्षर अभियान हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और सह प्रभारी संजय दत्त मौजूद थे। इस बैठक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में बूथों के बीच यात्रा निकालने का प्रस्ताव रखा गया। यह यात्रा कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस, जो कि 28 दिसंबर को है, से शुरू होकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तक चलेगी। यह कदम पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति मानी जा रही है। बैठक में दिग्विजय सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय से पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठनात्मक काम नहीं किया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब बिहार की तरह मध्य प्रदेश में एसआईआर (सर्वे इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) कराने की योजना बनाई जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि कांग्रेस का समर्थक मतदाता वोटर लिस्ट से न हटाया जाए और कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। इसके लिए वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ी पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है। बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान के तहत हस्ताक्षर किए। बूथ से बूथ तक यात्रा का प्रस्ताव दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया कि पार्टी को भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर एक बूथ से दूसरे बूथ तक पदयात्रा निकालनी चाहिए। इस यात्रा के दौरान बूथ की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) के काम की समीक्षा की जाएगी और वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान को गति दी जाएगी। यह यात्रा न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को एकजुट करेगी, बल्कि मतदाताओं के बीच पार्टी की उपस्थिति भी बढ़ाएगी। इसके अलावा, उन्होंने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को यह भी कहा कि उन्हें संगठन का काम करने के लिए किसी नेता की तरफ पैसे के लिए नहीं देखना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह सुझाव दिया कि सक्षम कार्यकर्ताओं को खुद पार्टी की मदद करनी चाहिए। इसमें ऐसे कार्यकर्ताओं को बीएलए बनाया जाना चाहिए जो बूथ पर मजबूती और सक्रियता से काम कर सकें। हस्ताक्षर अभियान का लक्ष्य बैठक में जीतू पटवारी ने भी अपनी बात रखी और कहा कि हमें पूरे मध्य प्रदेश से 5 करोड़ मतदाताओं के हस्ताक्षर कराने हैं। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र से 20 हजार मतदाताओं के हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान वोट चोर गद्दी छोड़ मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पार्टी की रणनीतिक दिशा को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा। कांग्रेस पार्टी का यह नया कदम मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और मतदाता जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए यह यात्रा और हस्ताक्षर अभियान, पार्टी की संगठनात्मक मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार के प्रयासों से कांग्रेस पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि आगामी चुनावों में सफलता हासिल की जा सके। कुल मिलाकर, यह बैठक और उसके परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई दिशा दिखाने वाले हैं। पार्टी के नेता अब बूथ स्तर पर अधिक सक्रियता और जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो कि आने वाले चुनावों में उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आपको बता दें कि इस रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के साथ-साथ मतदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यह अभियान न केवल कांग्रेस के नेताओं के लिए, बल्कि पार्टी के समर्थकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

सीएम की रणनीति: इस राज्य में मंत्रियों की कटौती, जानें कौन रहेगा और कौन जाएगा

कर्नाटक  कांग्रेस शासित कर्नाटक में जल्द ही बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल के आसार हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट से करीब आधे मंत्रियों को हटाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि सिद्धारमैया ने ने 13 अक्तूबर को सभी कैबिनेट मंत्रियों के लिए रात्रिभोज पर बुलाया है। सूत्रों ने बताया है कि मुखअयमंत्री मौजूदा मंत्रियों में से 50 प्रतिशत को हटाकर नए चेहरों को लाने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि करीब 15 नए मंत्रियों के शामिल होने से आलाकमान को तत्काल बदलना मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, AICC यानी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी से साथ हुई चर्चा में सिद्धारमैया ने नवंबर में कैबिनेट फेरबदल के संकेत दिए थे। खास बात है कि नवंबर में सिद्धारमैया के सीएम के तौर पर ढाई साल पूरे हो रहे हैं। माना जा रहा है कि फेरबदल बिहार विधानसभा चुनाव के बाद हो सकता है। इधर, डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा, 'मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह काम मुख्यमंत्री का है। हम सी पार्टी के लिए काम करते हैं। मैं इसमें कोई दखल नहीं दूंगा। यह मुख्यमंत्री और पार्टी पर छोड़ा गया है। मैं सिर्फ सुझाव दे सकता हूं। किसी को भी कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए।' दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया सरकार के गठन के बाद से ही कथित ढाई साल फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं जारी थी। हालांकि, किसी भी नेता ने इसपर खुलकर बात नहीं की है। दलित नेता मिले रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन घटनाक्रमों के बीच तीन दलित मंत्रियों की मुलाकात हुई थी। इनमें जी परमेश्वरा, सतीश जरकिहोली और महादेवप्पा का नाम शामिल है। कथित तौर पर इन नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा की है कि अगर मुख्यमंत्री बदला जाता है, तो दलित नेताओं का कदम क्या होगा। कहा जा रहा है कि दलित मंत्री सीएम पद के लिए परमेश्वरा का नाम आगे बढ़ा सकते हैं।  

लोकसभा चुनाव 2025: BJP-JDU की सीटों की पहली फेज में कौन-कौन करेंगे तालमेल?

पटना  बात-मुलाकात से सीटों पर समझौता नहीं होता देख भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने सीट शेयरिंग की रणनीति बदल ली है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों के नेताओं चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को मनाने का काम भाजपा को दिया है। बीजेपी और जेडीयू की अब रणनीति है कि पहले चिराग, मांझी और कुशवाहा की सीट तय कर ली जाए और फिर बची सीटों को भाजपा और जदयू आपस में बांट ले। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों दल 100 से कम सीट लड़ना चाहते हैं। तीनों नेताओं ने कुल 75 सीटें मांगी हैं, जिन्हें समझाने-मनाने में धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े, नित्यानंद राय, मंगल पांडेय और सम्राट चौधरी मिशन मोड में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार की पार्टी ने भाजपा से कहा है कि पहले वो सहयोगी दलों के मसले सुलझा ले, फिर वो दोनों सीट बांट लेंगे। दोनों के बीच इस बात पर सहमति है कि बची हुई सीटों में दोनों आधा-आधा रख लेंगे। जदयू की चाहत है कि वो भाजपा से कम से कम एक सीट ज्यादा लड़े। चिराग, मांझी और कुशवाहा के तेवर ने नीतीश और बीजेपी को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर किया है। अब दोनों प्रमुख दल सहयोगियों का मामला पहले निपटा लेंगे, तब वो अपनी-अपनी देखेंगे। 20 महीने में हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देंगे, कानून बनेगा: तेजस्वी यादव का बड़ा चुनावी वादा चिराग पासवान की लोजपा-आर 40 सीट, उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को 20 सीट और जीतन राम मांझी की हम 15 सीट मांग रही है। बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की इन नेताओं से पहले राउंड की बातचीत में कोई नीचे उतरने को तैयार नहीं है। तीनों नेता अपनी-अपनी सीटों की डिमांड पर अड़े हुए हैं जो नंबर 75 हो जाता है। सबकी बात मान ली जाए तो 168 सीटें बचती हैं, जिसमें जेडीयू या बीजेपी का गुजारा नहीं होगा। दोनों दलों ने 101-103 सीटें लड़ने का टारगेट बना रखा है। कोशिश है कि 38-40 सीट में तीनों सहयोगी दलों को मना लिया जाए।