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नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ-समर्थ युवा बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला

योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ लखनऊ पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है। सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है। योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़,  रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी। मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई।  वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

मेट्रो परियोजनाओं से आय के नए स्रोत विकसित करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजनाओं को गति, कानपुर और आगरा में तेजी से बढ़ रहा निर्माण कार्य लखनऊ मेट्रो के विस्तार को मिली रफ्तार, 2030 तक नए कॉरिडोर के पूर्ण होने का लक्ष्य आगरा मेट्रो के नए कॉरिडोर का काम जून 2026 तक हो जाएगा पूरा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेश में संचालित मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को आधुनिक, सुगम और विश्वस्तरीय शहरी परिवहन व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए निर्माण से लेकर संचालन तक हर स्तर पर दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि शहरों की अर्थव्यवस्था को गति देने और निवेश आकर्षित करने का मजबूत माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेट्रो परियोजनाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जाएं। स्टेशनों और परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियों जैसे मल्टीलेवल पार्किंग, रिटेल, फूड कोर्ट और ऑफिस स्पेस को बढ़ावा दिया जाए, विज्ञापन और डिजिटल ब्रांडिंग के अवसरों का अधिकतम उपयोग हो, तथा मेट्रो की भूमि और अन्य परिसंपत्तियों का बेहतर ढंग से उपयोग किया जाए। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के माध्यम से बड़े स्तर पर राजस्व सृजन, भूमि मूल्य संवर्धन और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि मेट्रो परियोजनाएं दीर्घकाल में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि मेट्रो के साथ मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाए, ताकि यात्रियों को घर से गंतव्य तक निर्बाध यात्रा मिल सके। इसके लिए मेट्रो स्टेशनों को सिटी बस, ई-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित सेवाओं से जोड़ा जाए। तीनों शहरों में अतिरिक्त पार्किंग स्थलों के विकास, फीडर रूट के निर्धारण और निजी बस सेवाओं के समन्वय पर भी तेजी से काम करने को कहा गया। बैठक में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि लखनऊ मेट्रो का लगभग 23 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूर्ण रूप से संचालित है और इसके विस्तार के अंतर्गत चारबाग से वसंत कुंज (कॉरिडोर-1बी, लगभग 11.16 किमी) को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को आधुनिक कनेक्टिविटी मिलेगी। कानपुर मेट्रो परियोजना के कुल 32.4 किलोमीटर लंबे दोनों कॉरिडोर पर कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें लगभग 15 किलोमीटर सेक्शन पर संचालन प्रारंभ हो चुका है और शेष कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है। आगरा मेट्रो की लगभग 29.4 किलोमीटर लंबी परियोजना में प्राथमिक सेक्शन (करीब 6.5 किमी) पर संचालन जारी है तथा कॉरिडोर-1 को जून 2026 तक और कॉरिडोर-2 को चरणबद्ध रूप से वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि मेट्रो सेवाओं का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और लखनऊ, कानपुर तथा आगरा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सड़कों पर यातायात का दबाव कम हुआ है और समय की बचत हो रही है। बेहतर परिचालन प्रबंधन और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के उपयोग से संचालन लागत में नियंत्रण रखते हुए गैर-भाड़ा आय (नॉन-फेयर बॉक्स) जैसे विज्ञापन, रिटेल, ब्रांडिंग और स्टेशन परिसरों के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में लगभग 222 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, तकनीकी गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, और कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी आवश्यक हो, नई तकनीकों का उपयोग कर कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा आमजन को बेहतर, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता रहे।

दो अफसरों की हत्या से मचा हड़कंप: बदायूं में 85 कर्मचारियों की नौकरी गई

 बदायूं बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैंजनी गांव स्थित एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में हुई दो अफसरों की हत्या के बाद कंपनी प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए 85 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। ये सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी थे। इनमें मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के दो भाई केशव प्रताप और चंद्रशेखर भी शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सीबीजी प्लांट में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवा समाप्ति की सूचना एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक पराग हलानी द्वारा ई-मेल के माध्यम से दी गई। कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 13 मार्च से सभी संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त मानी जाएंगी और नियमानुसार उक्त अवधि तक का भुगतान भी कर दिया गया है। प्लांट में घुसकर की गई थी दो अफसरों की हत्या बता दें कि बीते 12 मार्च को प्लांट परिसर में उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने का आरोप आउटसोर्सिंग कर्मचारी अजय प्रताप सिंह पर है, जो महज 14 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर कार्यरत था। बताया जाता है कि उसने नौकरी के बहाने प्लांट परिसर में पहुंचकर पराली आपूर्ति का ठेका भी लेना शुरू कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, प्लांट में बढ़ती अराजकता और अनुशासनहीनता को देखते हुए उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता ने सख्ती बरतनी शुरू की थी, जिससे आरोपी अजय प्रताप सिंह बौखला गया। इसी रंजिश में उसने इस जघन्य दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। इसके बाद आरोपी ने थाने पहुंचकर खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में पुलिस ने मुठभेड़ दिखाकर उसका चालान कर दिया। चार माह पहले बदली थी ठेका कंपनी, तब भी हुई थी छंटनी बताया जा रहा है कि लगभग चार माह पूर्व ही प्लांट में मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली पुरानी एजेंसी ‘लक्ष्य इंटरप्राइजेज’ का ठेका निरस्त कर एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नई कंपनी ने कार्यभार संभालते ही करीब 40 कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसमें आरोपी अजय प्रताप सिंह भी शामिल था। माना जा रहा है कि उसी समय से वह रंजिश पाले हुए था। फिलहाल प्लांट बंद, सुरक्षा व्यवस्था के बाद ही होगा संचालन हत्याकांड के बाद से प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कंपनी और प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि जब तक सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो जाते और माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक प्लांट दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया प्रयागराज हादसे का संज्ञान

मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख व घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक मदद की घोषणा हादसे में घायल लोगों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया सीएम ने लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रयागराज के फाफामऊ में हुए कोल्ड स्टोरेज हादसे का संज्ञान लिया। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को तत्काल राहत उपलब्ध कराने और घायलों के समुचित उपचार का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने कहा कि स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों को तेजी से पूरा करे, घायलों के इलाज में किसी प्रकार को कोताही न हो और सभी घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित कराया जाए। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।

यूपीसीडा की पहल से 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹800 करोड़ निवेश प्रस्तावित

योगी सरकार के विजन को मिली गति, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ा भरोसा अब तक 61 परियोजनाओं को स्वीकृति, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश से किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें लगभग ₹800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। सरकार की उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 के तहत निवेशकों को निजी भूमि पर लॉजिस्टिक्स और भंडारण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता और टैक्स छूट दी जा रही है। इसी नीति के प्रभाव से निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इन नई स्वीकृत परियोजनाओं में 5 साइलो, 2 वेयरहाउसिंग और 1 लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो उन्नाव, औरैया, बलरामपुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ समेत विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में विकास होगा, जिससे प्रदेश की कृषि और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी। 61 परियोजनाओं को मिल चुकी मंजूरी, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश इन 8 नई परियोजनाओं के साथ ही अब तक यूपीसीडा द्वारा वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 और पीआईपी नीति के अंतर्गत कुल 61 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएं करीब 810 एकड़ भूमि पर विकसित होंगी और इनमें ₹12,900 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से अनाज के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं मिलेंगी तथा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस क्लस्टर और आधुनिक वितरण केंद्रों के विकास को गति मिलेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के अवसर भी उत्पन्न होंगे। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। इसके लिए मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, कोल्ड चेन, साइलो और वितरण केंद्रों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लगातार बेहतर किया जा रहा है। प्राधिकरण का प्रयास है कि नीति के तहत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन निवेशकों तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाए जाएं। सरकार न केवल निवेश आकर्षित करने, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

31 जिलों की महिलाओं ने किया पांच हजार करोड़ का दूध का कारोबार

योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने की अभूतपूर्व तरक्की लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकीं हैं। प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार भी किया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। छह हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं यह मॉडल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित कर रहा है। इससे गांवों में पलायन कम होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के सहारे ग्रामीण महिलाओं का यह नेटवर्क आने वाले समय में प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश में राज्य आजीविका मिशन तरक्की का आधार स्तंभ बन रहा है। प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने दुग्ध संग्रहण के जरिए अभूतपूर्व तरक्की की है। विभिन्न जिलों में संभाली कमान प्रदेश में विभिन्न महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’ बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जिलों में कार्यरत है। पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’ बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी में सक्रिय है। सामर्थ्य एमपीसीएल प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर में महिलाओं को सशक्त बना रही है। गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल’ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में काम कर रही है। तराई क्षेत्र में ‘सृजन एमपीसीएल’ बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर में नई संभावनाएं गढ़ रही है।

यूपी में 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, 39 स्टेडियम निर्माणाधीन – गिरीश चंद्र यादव

ग्रामीण स्टेडियम, युवा सहभागिता और खेल प्रोत्साहन से संवर रहा युवाओं का भविष्य – गिरीश चंद्र यादव, युवा कल्याण एवं खेल मंत्री युवक और महिला मंगल दलों का गठन कर प्रदेश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा – गिरीश चंद्र यादव “माय भारत” पोर्टल पर 19 लाख युवा पंजीकृत, “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख युवाओं को मिली सरकारी योजनाओं की जानकारी – गिरीश चंद्र यादव लखनऊ प्रदेश सरकार में युवा कल्याण एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), गिरीश चंद्र यादव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में युवाओं के शारीरिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक प्रदेश सरकार खेल अवसंरचना के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इससे प्रदेश के युवाओं के विकास के साथ-साथ खेल जगत में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को बढ़ाना सुनिश्चित होगा।   खेल मंत्री ने योगी सरकार की प्रत्येक विकास खंड में मिनी स्टेडियम/ग्रामीण स्टेडियम के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इसके तहत प्रदेश में अब तक 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, साथ ही 8 विकास खंडों में दो-दो स्टेडियम भी बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। वर्तमान में ग्रामीण स्टेडियम निर्माण की 39 परियोजनाओं में कार्य प्रगति पर है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से इन स्टेडियमों के सुचारु संचालन के लिए खेल उपकरणों की खरीद हेतु हर वर्ष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से खेल प्रशिक्षकों की तैनाती भी की जा रही है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर युवक एवं महिला मंगल दलों का गठन किया गया है। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में अब तक 53,760 युवक मंगल दल और 52,354 महिला मंगल दल गठित किए जा चुके हैं। इन दलों को खेल गतिविधियों से जोड़कर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया जा रहा है। अब तक 96,000 मंगल दलों को खेल प्रोत्साहन सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है और शेष को भी जल्द सामग्री प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है। युवा कल्याण एवं खेल मंत्री ने बताया कि खेलों में युवाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विधायक खेल स्पर्धा और संसदीय क्षेत्रों में सांसद खेल स्पर्धा आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के 3 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। साथ ही दिल्ली में आयोजित 29वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में उत्तर प्रदेश के 79 युवाओं के दल ने भाग लिया, जबकि 28वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में राज्य को कहानी लेखन, कविता लेखन और पेंटिंग में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। युवा उत्सव के 29वें आयोजन में लोकनृत्य टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया। मंत्री ने बताया कि “माय भारत” पोर्टल पर अब तक 19 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण कराया जा चुका है, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवा स्वच्छता, पौधरोपण, नशामुक्ति और रक्तदान जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायी जा चुकी है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं और मंगल दलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष ‘राज्य स्तरीय विवेकानन्द यूथ अवार्ड’ प्रदान किया जाता है। प्रेस कॉफ्रेंस के समापन में मंत्री ने दोहराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी तरह के संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

सीएम योगी का बड़ा संदेश: जवान बेफिक्र रहें, परिवार की सुरक्षा सरकार करेगी

लखनऊ  ‘आप बेफिक्र होकर देशसेवा कीजिए। आपके परिवार समेत प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सेवा, सहूलियत, सुरक्षा और सम्मान सरकार के जिम्मे है। सरकार इसे लेकर पहले दिन से गंभीर है।’ ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में आए सैनिकों से कहीं। मुख्यमंत्री ने सैनिकों की समस्याएं सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया कि निश्चिंत होकर घर जाइए। सरकार हर समस्या का उचित निराकरण कराएगी। ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से पुलिस, जमीनी विवाद, आर्थिक सहायता व स्थानांतरण आदि से जुड़े मामले भी आए। सीएम ने एक-एक कर सबकी समस्याओं को सुना, प्रार्थना पत्र लेकर अधिकारियों को समय सीमा के अंदर उनके उचित निस्तारण का निर्देश दिया। ‘जनता दर्शन’ में कई जनपदों से सैनिक भी आए। इनमें से कुछ मामले जमीनी विवादों के भी थे। सीएम योगी ने इनके प्रार्थना पत्र लिए और स्थानीय जिला-प्रशासन व पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश की सीमा व आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों से संपर्क करें। उनकी समस्याओं का हर हाल में समयसीमा के अंदर उचित निराकरण कराएं और पीड़ित परिवार को संतुष्ट करें। ‘जनता दर्शन’ में पुलिस, जमीनी विवाद, आर्थिक सहायता और स्थानांतरण से जुड़े मामले भी आए। सीएम योगी ने पीड़ितों के प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि जमीनी विवाद में सभी पक्षों को सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इलाज के लिए आर्थिक सहायता के मामले पर सीएम ने मरीज के परिजनों से कहा कि आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करते हुए अस्पताल से एस्टीमेट बनवा लीजिए। सरकार हर तबके की मदद के लिए तत्पर है। आप मरीज की देखभाल कीजिए, इलाज की चिंता सरकार पर छोड़ दीजिए, सरकार पूरी मदद करेगी। धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। वहीं जनता दर्शन को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''लोकहित एवं सुशासन के प्रति दृढ़ संकल्पित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 'जनता दर्शन' में आए लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हेतु निर्देशित किया।''

राजस्व संहिता में संशोधन, नक्शा पास होते ही लैंड यूज परिवर्तन होगा वैध

राजस्व संहिता में बड़ा बदलाव, नक्शा पास होते ही माना जाएगा लैंड यूज परिवर्तन कैबिनेट ने धारा-80 संशोधन अध्यादेश 2026 को दी मंजूरी दोहरी प्रक्रिया खत्म, निवेश और उद्योग स्थापना को मिलेगी रफ्तार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन हेतु अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस अहम फैसले के तहत विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों तथा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज़) परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है। अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो उसी को भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा। इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया (पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने) से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही सभी औपचारिकताएं समाहित कर दी गई हैं। इससे न केवल आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। इस सुधार से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग स्थापना में तेजी आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

लखनऊ के बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट से मिली मंजूरी, नई पहचान के लिए बनेगा कन्वेंशन सेंटर और फ्लाईओवर

लखनऊ में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को मिली कैबिनेट मंजूरी, कन्वेंशन सेंटर, हेरिटेज संरक्षण और फ्लाईओवर निर्माण से मिलेगी नई पहचान इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के लिए पुनरीक्षित लागत को कैबिनेट स्वीकृति, लखनऊ में बनेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन स्थल  रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को पर्यटन की दृष्ट से किया जाएगा विकसित, दुबग्गा चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण को कैबिनेट मंजूरी   लखनऊ लोकभवन में सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुनियादी ढांचे,  हेरिटेज संरक्षण और यातायात व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं में लखनऊ के वृन्दावन योजना सेक्टर-15 में प्रस्तावित इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही कैबिनेट फैसलों में राजधानी के ऐतिहासिक घरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत पीपीपी  मॉडल पर विकसित करने और परिवहन सुविधा के लिए दुबग्गा चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण करने की परियोजना की स्वीकृति शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजधानी लखनऊ में नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर की पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति प्रदान की  गई है। कैबिनेट ने लखनऊ की वृन्दावन योजना, सेक्टर-15 में प्रस्तावित इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए पहले 1297.42 करोड़ रुपये की लागत को स्वीकृत किया था, लेकिन निविदा प्रक्रिया के दौरान लागत अधिक आने के कारण इसे संशोधित कर 1435.25 करोड़ रुपये को मंजूर दी गई है। इस लागत में जीएसटी, लेवी, कंटीजेंसी और सुपरविजन चार्ज सहित अन्य खर्च भी शामिल हैं। ईपीसी मोड पर बनने वाले इस अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर में 10,000 लोगों की क्षमता वाला विशाल कन्वेंशन हॉल और 2,500 लोगों की क्षमता का ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। साथ ही बड़े स्तर पर पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप भीड़ नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।   इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश की राजधानी, लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिफेंस एक्सपों जैसे आयोजनों के स्थल के रूप में की जा रही है। कन्वेंशन सेंटर के आसपास 5-स्टार और बजट होटल विकसित करने की भी योजना है, जिससे देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, यहां आयोजित होने वाले आयोजनों के दौरान भारी उपकरणों, मॉडलों के प्रदर्शन की भी व्यवस्था होगी। यह परियोजना लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख आयोजन स्थल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी क्रम में योगी सरकार की ने लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने को कैबिनेट ने मंजूर प्रदान की है। इसके लिए इन भवनों से संबंधित भूमि का स्वामित्व पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है। इन ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित कर राज्य में पर्यटन को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवादस्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा। साथ ही लखनऊ की यातायात समस्या के समाधान के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस क्रम में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर स्थित दुबग्गा चौराहे पर 1,811.72 मीटर लंबा तीन लेन का फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 305.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। दुबग्गा चौराहा लखनऊ शहर का एक प्रमुख यातायात केंद्र है, फ्लाईओवर के निर्माण से इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि ये सभी परियोजनाएं लखनऊ को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षक शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।