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सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण के साथ ही उनके बेहतर पालन-पोषण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं बेहतर आश्रय उपलब्ध हुआ है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को गोवंश के पालन-पोषण से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की समस्या को कम करने के साथ-साथ गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को जनसहभागिता से प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक एवं गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के 62 जनपदों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सीएम योगी का अधिवक्ताओं को बड़ा तोहफा, 5 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा

लखनऊ यूपी के वकीलों को 5 लाख तक का कैशलेस इलाज की को लेकर सीएम योगी ने ऐलान किया है। यूपी के वकीलों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में मेंटेनेंस के लिए फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है। अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है। इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी। फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा। समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात: मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।  

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की।   हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।   अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है।   इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।   विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी।   फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।   समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें। अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।  

CM योगी का बड़ा संदेश- गलत करने वाले लोक सेवकों की तय हो जवाबदेही, झूठी शिकायतों पर भी हो कार्रवाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है। मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं। मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं। राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने। उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया। लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है। चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया। 1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 … Read more

504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया अब तकनीक की नई रफ्तार पकड़ रही है। योगी सरकार राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े स्तर पर जमीन पर उतार रही है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और इनसे काम भी शुरू हो गया है। वहीं 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के केटीएस (चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यह बदलाव जमीन की पैमाइश को पारंपरिक तरीकों से निकालकर अधिक तेज, सटीक और डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जा रहा है। खेत-खलिहान से नक्शे तक, एक ही तकनीक से कई काम राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवर की तैनाती केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। 350 रोवर सीधे तहसीलों में पहुंचने के बाद फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके साथ 143 रोवर 10 यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) की नक्शा परियोजनाओं के लिए लगाए गए हैं। हरदोई के केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरी ओर, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर का इस्तेमाल प्रशिक्षण में किया गया और सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यानी राजस्व विभाग में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों को इसके संचालन के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। सीएम योगी ने सहारनपुर से रखी थी अभियान की नींव कंचन वर्मा ने कहा कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान को प्रभावी और एक समान तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी की। अब इसी व्यवस्था को आधुनिक सर्वे तकनीक का सहारा मिलने से जमीन से जुड़े कामों में तकनीकी क्षमता बढ़ी है। जीएनएसएस रोवर के कई फायदे सेंटीमीटर स्तर तक सटीक स्थिति बताता है रोवर जीएनएसएस रोवर आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है, जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह लगभग 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकता है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी और क्षेत्रफल की गणना की जाती है व डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। जंजीर-फीते से डिजिटल पैमाइश की ओर बढ़ा कदम जमीन की पैमाइश के पारंपरिक तरीकों में जंजीर और फीते के इस्तेमाल की तुलना में रोवर तकनीक सर्वेक्षण को अधिक वैज्ञानिक और डिजिटल बना रही है। फील्ड में जुटाए गए डिजिटल निर्देशांकों को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे तैयार डेटा को सुरक्षित रखना, उसकी गुणवत्ता जांचना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल करना आसान बन रहा है। मानवीय चूक की संभावना होगी कम रोवर के जरिए भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदु डिजिटल रूप में दर्ज किए जाते हैं। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम हो रहा है और गलतियों की संभावना घट रही है। बड़े क्षेत्र में सर्वेक्षण कम समय में पूरा किया जा रहा है और अपेक्षाकृत कम जनशक्ति की जरूरत पड़ रही है। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत बचाने में भी मदद मिलने लगी है। फसल को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन की पैमाइश कृषि भूमि की पैमाइश में फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही और लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम की जा रही है। सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना पैमाइश करने की सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता रोवर से तैयार डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है। रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांचने और डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखने में भी सुविधा है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग, नक्शा परियोजनाओं और जीआईएस आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने में सहायता प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री की प्रदेशवासियों से अपील- ‘वोकल फॉर लोकल’ को बनाएं व्यवहार का हिस्सा

    लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘योगी की पाती’ लिखकर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी और 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गणेश चतुर्थी को सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति संकल्प को सुदृढ़ करने वाला महापर्व बताया। मुख्यमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि इसे सिर्फ विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को संबोधित पाती में लिखा कि प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश शुभत्व एवं मंगल के आराध्य हैं। प्रदेश में युवाओं द्वारा घरों में भगवान गणपति की स्थापना कर श्रद्धा के साथ उनका पूजन किया जाना देख हृदय प्रफुल्लित हो उठता है। सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति अपने संकल्प को सुदृढ़ करने वाले महापर्व गणेश चतुर्थी की सभी को कोटि-कोटि मंगलकामनाएं। सीएम ने लिखा कि भगवान गणेश का पर्यावरण और जीवों के साथ गहरा जुड़ाव, उनकी रूप-रचना तथा जीवन-दर्शन, प्रकृति के संरक्षण और संतुलन का संदेश देता है। गज मुख जंगलों और वन्यजीवों का प्रतीक हैं, तो मूषक वाहन भूमि की उर्वरता और कृषि से जुड़ा है। विशाल उदर संपूर्ण ब्रह्मांड को समाहित करने का भाव व्यक्त करता है, जबकि उनके बड़े कान हमें प्रकृति की हर पुकार को सुनने का संदेश देते हैं। सीएम ने लिखा कि गणेश चतुर्थी पर पूजा जाने वाला 'एकविंशति पत्र' (21 प्रकार की विशेष पत्तियां) औषधीय पौधों के संरक्षण से जुड़ा है। इस प्रकार गणपति भगवान का चरित्र हमें मानव जीवन और प्रकृति के एक-दूसरे का पूरक होने का संदेश देता है। इसी विराटता को लोकमान्य तिलक ने आस्था से एकता, एकता से जनशक्ति और जनशक्ति से राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला महापर्व बना दिया। गणेशोत्सव के ज्ञान, विवेक और कर्म की भावना सृजन तथा निर्माण के स्वरूप भगवान विश्वकर्मा के पूजन में दिखाई देती है। 17 सितंबर को जब सृष्टि के प्रथम अभियंता भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाएगा, तब कौशल एवं तकनीक के संगम से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प और पुष्ट होगा। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और आधुनिक आधारभूत संरचनाएं नए उत्तर प्रदेश के बढ़ते सामर्थ्य का प्रमाण हैं। किसी प्रदेश का वास्तविक निर्माण केवल बड़े ढांचों से नहीं, वहां के लोगों के हुनर, विचारों की शक्ति और उद्यमिता के साहस से होता है। इसी सोच के साथ हमारी सरकार विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जनपद-एक उत्पाद, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी पहलों के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों, युवाओं और उद्यमियों को कौशल, उपकरण, वित्त और बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया कि 'वोकल फॉर लोकल' को केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का अंग बनाएं। स्थानीय उत्पादों का सम्मान बढ़ेगा तो कारीगरों के हाथों को काम, युवाओं को रोजगार के अवसर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और हुनर तथा स्थानीय सामर्थ्य पर विश्वास से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा- जनता का विश्वास ही सुशासन की कसौटी, इसके बिना लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है।   मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।   राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी।   मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने।   उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।   भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया।   लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है। चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया।   1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 … Read more

मेधावी छात्राओं के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 40 हजार स्कूटी देने की तैयारी

लखनऊ यूपी सरकार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी। दरअसल, महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटियों की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी। प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है, ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर और 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी। स्कूटी के साथ मिलेगी ये एक्सेसरीज हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एक्सेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर समेत अन्य वस्तुंए भी अनिवार्य है। स्कूटी BS6, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा। दिव्यांगजनों के लिए बेहतरीन काम करने वालों को मिलेगा प्राइज उधर, दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण और उनके लिए उत्कृष्ट काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योगी सरकार ने राज्य स्तरीय पुरस्कार-2026 की घोषणा की है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह पहल दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए है। राज्य सरकार ने पुरस्कारों के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए बेहतर काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को पहचान देने की व्यवस्था की है। पुरस्कार के लिए इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ 15 सितंबर तक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशालय लखनऊ में आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने पुरस्कार से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए विभागीय वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर 18001801995 उपलब्ध है।

वेलनेस सिटी फेज-2 का रास्ता साफ, छह गांवों की 98.5 एकड़ जमीन होगी अधिग्रहित

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बनने जा रही मेडिसटी और विस्तार लेगी। शहीद पथ के पास सुलतानपुर रोड पर वेलनेस सिटी फेज-2 के लिए रास्ता साफ हो गया है। छह गांवों की 98.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए जिलाधिकारी के स्तर से एसआईए अधिसूचना जारी हो गई। भूमि अर्जन अधिनियम के तहत एसआईए यानी सामाजिक समघात निर्धारण की यह प्रारंभिक अधिसूचना है। दूसरे फेज में विस्तार के लिए मोहनलालगंज तहसील के बक्कास, मस्तेमऊ, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, नूरपुर बेहटा गांव के 201 गांटों की कुल 98.51 एकड़ (39.8658 हेक्टेयर) जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी को एसआईए सर्वे 60 दिनों में पूरा कर रिपोर्ट देनी होगी। जिलाधिकारी के अनुसार अधिग्रहण शुरू करने से पहले एसआईए कराया जाना अनिवार्य होता है। योजना में सुलतानपुर रोड के पास लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से सुनियोजित विकास और आधुनिक आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वेलनेस सिटी का विस्तार किया जा रहा है। इसके पूर्व मई में योजना के दूसरे चरण के लिए भूमि अर्जन और सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। वेलनेस सिटी के फेज-1 के लिए काफी कार्य हो चुका है। जून में लॉटरी का आवंटन किया गया था। सबसे बड़ा हेल्थकेयर व मेडिकल जोन होगा यह परियोजना लगभग 1,474 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसे 7 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। करीब 150 एकड़ का विशेष अस्पताल क्षेत्र और सुपर-स्पेशलिटी मेडिसिटी बनाई जा रही है, जो मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही दवाओं का शहर में सबसे बड़ा केन्द्र होगा जो अभी तक अमीनाबाद है। कुल क्षेत्रफल का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा (करीब 204 एकड़) पार्कों, ग्रीन बेल्ट और खुली हरियाली के लिए तय किया गया है। ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा प्रोजेक्ट इस योजना के तहत लगभग 2,935 प्रीमियम आवासीय प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा और यातायात सुगम बनाने के लिए चार नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा। दो साल में बदल जाएगी शहर की सूरत लखनऊ विकास प्राधिकरण की वेलनेस सिटी परियोजना का बुनियादी ढांचा और आंतरिक विकास कार्य 2028 तक पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है।चूंकि यह एक विशाल प्रोजेक्ट है, इसलिए इसे अलग-अलग चरणों में तैयार किया जा रहा है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत स्थानीय किसानों और भू-स्वामियों को पहले चरण की लॉटरी के जरिए विकसित भूखंड आवंटित भी किए जा चुके हैं। सीवेज नेटवर्क, बिजली व्यवस्था, पानी की आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम जैसे बुनियादी कामों के लिए 225 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जा चुका है, जिस पर काम शुरू हो रहा है।

राजनाथ सिंह ने स्वागत में मिला चांदी का मुकुट लौटाया, बोले- इसे गरीब बेटी की पायल के लिए इस्तेमाल करें

 आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।  'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे' सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है।  उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।  'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते' रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है।  'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया' राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा।  सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना। खटीक समाज की तारीफ 1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था। खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे। यूपी तेजी से विकास कर रहा आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे। अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।