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17 अप्रैल काला दिवस के रूप में जाना जाएगा: अन्नपूर्णा देवी

लखनऊ. भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है और अब उन्हें राजनीतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही थी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा सार्थक रही, लेकिन विपक्षी दलों कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने बिल का विरोध कर महिलाओं की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाई। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इन दलों ने हमेशा की तरह इस बार भी नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लटकाने, भटकाने और अटकाने की राजनीति अपनाई। इसके लिए 17 अप्रैल काला दिवस के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक और सशक्त हो चुकी हैं तथा हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े होने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उसका अधिकार नहीं दिया। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का कार्य एनडीए सरकार ने किया। सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने मुखर होकर कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी परिवारवाद की राजनीति कर रहे हैं। इन्हें देश की जनता के हितों से कोई लेना देना नहीं है।

बलबीर पुंज का निधन राजनीति व पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति: मुख्यमंत्री

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सांसद बलबीर पुंज के निधन पर शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।  मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्व सांसद, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनेता व प्रख्यात स्तंभकार बलबीर पुंज का निधन अत्यंत दुःखद है। यह राजनीति और पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि! मुख्यमंत्री ने लिखा, प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

यूपी में स्मार्ट मीटर परियोजना पर ब्रेक, UPPCL का बड़ा फैसला, टेक्निकल रिपोर्ट की होगी समीक्षा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विवाद और विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है. उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने प्रदेश में स्मार्ट मीटर बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है. यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक तकनीकी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती।  पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने इस संबंध में सभी डिस्कॉम (डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों) को निर्देश जारी कर दिए हैं. आदेश में साफ कहा गया है कि अगली सूचना तक पुराने मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरी तरह बंद रखा जाए।  दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रदेश के कई जिलों में बिजली उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था. उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के पुराने मीटर हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. कई जगहों पर लोगों ने इसे जबरन कार्रवाई बताते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया।  इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को एक तकनीकी कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी को स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों, तकनीकी खामियों और उपभोक्ताओं की समस्याओं की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. अब इस पूरे मामले में आगे की रणनीति कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।  प्रदेश में 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लग चुके आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें करीब 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं. हालांकि, मौजूदा फैसले के तहत पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है, लेकिन नए बिजली कनेक्शन केवल स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए ही दिए जाएंगे।  इसके अलावा बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन रोका नहीं जाएगा. यानी जो लोग नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें स्मार्ट मीटर के साथ ही बिजली मिलेगी, लेकिन पहले से लगे मीटरों को बदलने की कार्रवाई फिलहाल बंद रहेगी. यदि कमेटी की रिपोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो सरकार आगे इस पर फैसला लेगी। 

कांग्रेस और सपा समेत समूचे इंडी गठबंधन का आचरण उजागर करता है नारी-विरोधी मानसिकता को: सीएम

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पारित नहीं होने देने पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल नारी सम्मान के खिलाफ है, बल्कि “अक्षम्य पाप” है, जिसके लिए देश की नारी शक्ति उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। विधेयक गिरने के बाद विपक्षी दलों द्वारा जिस प्रकार जश्न मनाया गया और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की गईं, उसने भारतीय इतिहास के उस पीड़ादायक प्रसंग की याद दिला दी, जब भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ था। सीएम ने इसे लोकतंत्र और महिला सम्मान, दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह आचरण विपक्ष की नारी-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने 2014 में सत्ता संभालने पर एक बात बहुत स्पष्ट रूप से कही थी कि देश के अंदर चार ही जातियां हैं- गरीब, युवा, किसान व नारी। भारत को कमजोर करने की नीयत से जिन लोगों ने जातिवाद के नाम पर अपने परिवार का भरण-पोषण किया और देश को लूटा, स्वाभाविक रूप से उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती थी और चेतावनी भी। इसीलिए जब भी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में कोई प्रगतिशील कदम उठाया गया, कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों ने हमेशा उस प्रगतिशील सोच और देशहित में उठाए जाने वाले कदमों का विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में विपक्ष के नारी-विरोधी आचरण के प्रति आधी आबादी के मन में भारी आक्रोश है। यह आक्रोश कांग्रेस और इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी, डीएमके और अन्य उन दलों के प्रति है, जो इस पाप में भागीदार थे। आधी आबादी में यह आक्रोश साफ देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए एक-एक कदम, जो समाज के हर वर्ग और देशहित में थे, इंडी गठबंधन ने कैसे बैरियर की तरह खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए षड्यंत्र किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था। जब महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों ने इस बात की मांग की कि यह अधिनियम 2034 के बजाय 2029 में लागू हो, तो उनकी मांग के अनुरूप प्रधानमंत्री जी ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श करने के उपरांत नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में जरूरी संशोधन लेकर संसद के विशेष अधिवेशन में इसे पेश किया। कुछ राज्यों ने इस बात की मांग उठाई थी कि कहीं ऐसा न हो कि इसके माध्यम से उनके हक को कम कर दिया जाए। प्रधानमंत्री जी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होते समय स्पष्ट किया था कि किसी का भी हक नहीं लिया जाएगा। इस 33 प्रतिशत आरक्षण को माता-बहनों को उपलब्ध कराने के लिए हम लोकसभा और विधानसभाओं में अतिरिक्त सीटें बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यह चर्चा में आया कि दक्षिण भारत के राज्य मांग उठा रहे हैं कि उनका हक कम हो जाएगा, तो प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि 2011 की जनगणना के अनुसार जो व्यवस्था है, उसी के तहत जैसे उत्तर और पूर्व के राज्यों में सीटें बढ़ेंगी, वैसे ही दक्षिण के राज्यों में भी उसी अनुपात में सीटें बढ़ाई जाएंगी। किसी का हक कम नहीं होगा। सरकार की एकमात्र इच्छा थी कि पूरा सदन मिलकर भारत की नारियों को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इस संशोधन के साथ पारित कर दे, ताकि 2029 में ही उन्हें उनका अधिकार मिल जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लेकिन सदन में इंडी गठबंधन, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके का जो व्यवहार रहा, वह पूरी तरह से भरी सभा में द्रोपदी के चीर-हरण जैसा दृश्य था। किस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां विपक्ष द्वारा की गईं, किस प्रकार का आचरण किया गया, यह किसी से छिपा नहीं है। यदि सर्वसम्मति से यह कार्य होता, तो स्वाभाविक रूप से पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता। नारियों के सम्मान, सुरक्षा व स्वावलंबन के लिए जो कदम उठाए जा रहे थे,  उससे महिलाओं को वह हक मिलता जो उनका स्वाभाविक अधिकार है। सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मुद्दा छेड़ा कि इसमें मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं मिल पा रहा है। ये संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भावनाओं के प्रतिकूल आचरण यहां भी देखने को मिला। जब भारत का संविधान निर्माण हो रहा था, उस समय भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की मांग उठी थी। तब सभी पक्षों ने इसका विरोध किया था। बाबा साहेब ने इस पर बहुत तीखी टिप्पणी की थी कि एक बार विभाजन हो गया है, अब भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नहीं हो सकता। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इसका पुरजोर विरोध किया। उस समय संविधान निर्माण समिति से जुड़े सभी सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो मुस्लिम महिलाओं की बात करते हैं, वे तब कहां जब शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को पूरी तरह वंचित करने का प्रयास किया था? जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस के पाप का परिमार्जन कर ट्रिपल तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया,  तय किया कि भारत का कानून शादी-विवाह के मामले में प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू होगा,  तब ट्रिपल तलाक के खिलाफ बने कानून का भी कांग्रेस व इंडी गठबंधन के सभी दलों, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके ने कड़ा विरोध किया था। यह उनके दोहरे आचरण को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन को देश में सबसे अधिक समय तक शासन करने का अवसर मिला। लेकिन जिन चार जातियों का उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया, नारी (भारत की आधी आबादी), गरीब, अन्नदाता किसान और युवा, उनके लिए कांग्रेस व इंडी गठबंधन कभी कोई अच्छी सोच, अच्छा कार्यक्रम या प्रगतिशील पहल आगे नहीं बढ़ा पाए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने जब 2014 में देश की सत्ता संभाली, तब उन्होंने प्रत्येक तबके के लिए बिना किसी भेदभाव के कार्य आगे बढ़ाए। उनका स्लोगन न … Read more

UP में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा: गन्ना समितियों में फ्री स्पेस देगी योगी सरकार

लखनऊ.  योगी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गन्ना समितियों में रोजगार के लिए निशुल्क स्थान देने का निर्णय लिया है। यह स्थान ‘आधी आबादी’ को प्रेरणा कैंटीन और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए दिया जाएगा। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने एमओयू साइन किया है। योगी सरकार की पहल से स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाओं को गन्ना समितियों के माध्यम से सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।  दो साल के लिए दिया जाएगा निशुल्क स्थान गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना समितियों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की गन्ना सहकारी समितियां अपने परिसरों में उपलब्ध खाली या अतिरिक्त स्थान को महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराएंगी। यह स्थान प्रेरणा कैंटीन चलाने और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए उपयोग किया जाएगा। खास बात यह है कि इन स्थानों के उपयोग के लिए शुरुआती दो वर्षों तक कोई किराया नहीं लिया जाएगा। दो साल की मोरेटोरियम अवधि के बाद स्वयं सहायता समूहों को केवल 50 प्रतिशत किराया ही देना होगा, जो जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार तय किया जाएगा।  डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर से हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों की कर सकेंगी बिक्री गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान का स्वामित्व पूरी तरह संबंधित समिति के पास ही रहेगा। किसी भी परिस्थिति में इस स्थान का स्वामित्व स्वयं सहायता समूहों या किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इससे सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रेरणा कैंटीन और डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर के माध्यम से महिलाएं अपने हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों को बेच सकेंगी। इनमें खाद्य पदार्थों के अलावा सोलर लैंप, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुएं शामिल हैं। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी एक संगठित बाजार मिलेगा। इसके लिए विभाग स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण, विपणन और प्रचार-प्रसार में भी सहयोग देगा। महिलाओं को मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी। इसके अलावा जरूरत पर अतिरिक्त सहयोग भी प्रदान किया जाएगा ताकि गन्ना क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती, बढ़ेगा उत्पादन और खपत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) को भी योजना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। मिशन यह सुनिश्चित करेगा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कैंटीन संचालन, साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण का उचित प्रशिक्षण मिले। वहीं, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के साथ समन्वय भी किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी। इससे जहां एक ओर महिलाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गन्ना समितियों की गतिविधियों में भी विविधता आएगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और खपत बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।  

यूपी में बेटियों के लिए वरदान बनी योगी सरकार की यह योजना, 6 चरणों में मिल रही सहायता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेटियों के उत्थान और सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से योगी सरकार बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। महिला कल्याण विभाग की ओर से संचालित यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन रही है। इस योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27 लाख से अधिक बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा और शिक्षा का मजबूत आधार साल 2019 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27,37,676 से अधिक बालिकाओं को लाभ मिल चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक 674.13 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह सहायता राशि कुल 6 चरणों में दी जाती है, जो बालिका के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन में प्रवेश तक उसे आर्थिक संबल प्रदान करती है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मिल रहा बल यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता देती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह योजना प्रभावी साबित हो रही है। यह योजना शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है। धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना का संचालन ऑनलाइन पोर्टल (mksy.up.gov.in) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। साथ ही पीएफएमएस के जरिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना खत्म हो जाती है। शासन स्तर से साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे। योजना का लाभ पाने के लिए मुख्य शर्तें इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। योजना के तहत लाभ पाने के लिए सबसे पहले लाभार्थी परिवार का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इससे अधिक आय वाले परिवार इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। एक परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही परिवार में कुल बच्चों की संख्या भी अधिकतम दो ही होनी चाहिए। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार ने राहत भी दी है। अगर किसी महिला को दूसरे प्रसव में जुड़वा बच्चियां होती हैं, तो तीसरी संतान के रूप में जन्मी बालिका को भी योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अगर पहले प्रसव से एक बालिका और दूसरे प्रसव में दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में तीनों बच्चियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई परिवार अनाथ बालिका को गोद लेता है, तो जैविक और विधिक रूप से गोद ली गई संतानों को मिलाकर अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ मिल सकेगा। छह चरणों में मिल रही सहायता योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को मजबूती मिलती है। पहले चरण में बालिका के जन्म पर 5000 रुपये की धनराशि दी जाती है। जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के बाद 2000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। तीसरे चरण में कक्षा प्रथम में प्रवेश लेने पर 3000 रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह चौथे चरण में कक्षा छह में प्रवेश पर 3000 रुपये और पांचवें चरण में कक्षा नौ में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये की सहायता दी जाती है। अंतिम और छठे चरण में कक्षा 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 7000 रुपये की धनराशि दी जाती है। इस प्रकार कुल 25 हजार रुपये की सहायता से सरकार बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल महिला कल्याण निदेशालय की डायरेक्टर डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार के साफ निर्देश है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र लाभार्थियों का समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और उन्हें शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। डॉ. वर्मा ने कहा कि यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री योगी के रोड-शो के दौरान सड़कों पर गूंजा- ‘एक ही नारा-एक ही नाम, जय श्रीराम-जय श्रीराम’

बांकुड़ा.  पश्चिम बंगाल की सड़कों पर शनिवार को 'बुलडोजर बाबा' का जबरदस्त क्रेज दिखा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने बीच पाकर स्थानीय नागरिकों का जोश देखते ही बनता था। जनता ने उनका जोरदार स्वागत किया। सीएम योगी को देख गगनभेदी नारों के बीच बंगालवासी बोल उठे, ‘देखो-देखो, कौन आया, शेर आया-शेर आया। योगी जी सुस्वागतम!’ उत्तर प्रदेश के इस शेर को बंगाल के मतदाताओं ने भी विश्वास दिलाया कि 4 मई, 'दीदी' गई। सीएम योगी ने इस शानदार रोड शो के लिए स्थानीय लोगों के प्रति आभार जताया।  बंगाल की जनता के स्वागत से अभिभूत मुख्यमंत्री ने रोड शो में विधायक व बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी नीलाद्रि शेखर दाना के लिए जनसमर्थन मांगा तो ‘एक ही नारा-एक ही नाम, जय श्रीराम-जय श्रीराम, हर-हर महादेव’ की गूंज से गुंजायमान बांकुड़ा की सड़कों पर उतरे मतदाताओं ने उन्हें आश्वस्त किया कि विधानसभा क्षेत्र में कमल ही खिलेगा। पूरे रोड-शो के दौरान सड़कों पर ‘योगी-योगी’ की गूंज सुनाई देती रही।  जनसैलाब से आई 'मन की आवाज', 4 मई-'दीदी' गई  बंगाल की सड़कों पर स्थानीय नागरिकों ने शनिवार को 'बुलडोजर बाबा' का अभूतपूर्व स्वागत किया। भगवा रंग की पगड़ी पहने सीएम योगी की एक झलक पाने को सड़क के दोनों और जनसैलाब उमड़ पड़ा। उन्हें अपने बीच देखकर मतदाताओं के मनोभाव भी जुबां पर आ गए। जगह-जगह से गूंज सुनाई देने लगी- 4 मई, ‘दीदी’ गई। अंधकार छंटेगा-कमल खिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाथ हिलाकर, हाथ जोड़कर बंगालवासियों का ह्रदय से अभिवादन किया। छतों पर खड़ी महिलाओं-बच्चों ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया सीएम योगी को देखने के लिए महिलाएं व बच्चे भी रोड के दोनों तरफ मकानों की छतों पर खड़े थे। जैसे ही सीएम का काफिला उनके सामने से गुजरता, तमाम महिलाएं व बच्चे हाथ जोड़कर 'बुलडोजर बाबा' को प्रणाम करते, सीएम ने भी हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन किया। रास्ते व  छतों पर खड़े लोग अपने मोबाइल में सीएम योगी की फोटो भी लेते रहे। आमार सोनार बांग्ला, टीएमसी मुक्तो बांग्ला सीएम योगी ने रोड-शो के समापन पर मतदाताओं से संवाद किया और इतने भव्य स्वागत के लिए जनता का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि आमार सोनार बांग्ला,  अब टीएमसी मुक्तो बांग्ला (हमारा सोने जैसा बंगाल, अब टीएमसी मुक्त बंगाल)। समूचे बंगाल का उत्साह बता रहा है कि 4 मई को बंगाल में भाजपा का कमल खिलेगा। बंगाल भारत की कल्चरल कैपिटल के रूप में जानी जाती है, लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस व कम्युनिस्टों ने इस पहचान को मिटाया है। मुख्यमंत्री ने भाजपा का अर्थ भी बताया, कहा-भाजपा मतलब सुरक्षा, नौजवान को रोजगार, किसान को उपज का अच्छा दाम, बहन-बेटी को सुरक्षा, विरासत का संरक्षण और विकास के लिए डबल इंजन की स्पीड।

53 केंद्रों पर कड़ी निगरानी में सहायक आचार्य पुनर्परीक्षा संपन्न, 19,718 अभ्यर्थी हुए शामिल

53 केंद्रों पर कड़ी निगरानी में सहायक आचार्य पुनर्परीक्षा सम्पन्न, 19,718 अभ्यर्थी हुए शामिल प्रदेशभर में सख्त निगरानी के बीच परीक्षा सकुशल सम्पन्न एआई कंट्रोल रूम से की गई लाइव मॉनिटरिंग 6 जनपदों में दो पालियों में शांतिपूर्ण व नकलविहीन परीक्षा लखनऊ  उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के अंतर्गत 17 विषयों की लिखित पुनर्परीक्षा प्रदेश के 53 परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न कराई गई। परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण, नकलविहीन और निर्धारित समय पर आयोजित की गई। इस पुनर्परीक्षा में कुल 19,718 अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें 41.35% महिला और 58.65% पुरुष अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जो परीक्षा के प्रति अभ्यर्थियों की गंभीरता और उत्साह को दर्शाता है। 6 प्रमुख जनपदों में दो पालियों में आयोजन यह परीक्षा प्रदेश के 6 प्रमुख जनपदों, आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी में आयोजित की गई। प्रथम पाली सुबह 09:30 बजे से 11:30 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक आयोजित हुई, जिसमें अभ्यर्थियों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। 17 विषयों की हुई परीक्षा पुनर्परीक्षा में एशियन कल्चर, म्यूजिक तबला, फिजिकल एजुकेशन, उर्दू, इंग्लिश, सोशियोलॉजी, केमिस्ट्री, एजुकेशन, जूलॉजी, बॉटनी, एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स, हिंदी, लॉ, एनिमल हसबेंड्री एंड डेयरींग, म्यूजिक वोकल, फिलॉसफी और एंथ्रोपोलॉजी सहित कुल 17 विषय शामिल रहे। एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से सघन निगरानी परीक्षा की पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सभी केंद्रों की लाइव निगरानी की गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और उपसचिव की मौजूदगी में एआई कैमरों के जरिए परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। एआई आधारित निगरानी और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था के चलते यह परीक्षा पारदर्शिता और निष्पक्षता का उदाहरण बनी है। आयोग द्वारा अपनाई गई तकनीकी व्यवस्था भविष्य की परीक्षाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है। लखनऊ केंद्र पर आग की घटना, त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रित लखनऊ के गोमतीनगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में प्रथम पाली से पहले प्राचार्य कक्ष में एसी वायरिंग में आग लगने की सूचना मिली। हालांकि प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत आग पर काबू पा लिया और नोडल अधिकारी व आयोग के प्रेक्षक की मौजूदगी में परीक्षा केंद्र को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संचालित कर परीक्षा सकुशल सम्पन्न कराई गई। नकलविहीन और व्यवस्थित परीक्षा संचालन प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा नकलविहीन, शुचितापूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई। इसमें संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों का सक्रिय सहयोग भी देखने को मिला।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का आयोजन

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व होगा आयोजित 24 से 26 अप्रैल तक लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन नाटकों और एक नृत्य नाटिका का होगा मंचन सीएम योगी आदित्यनाथ होंगे मुख्य अतिथि, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे मुख्य वक्ता लखनऊ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश सरकार तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ का आयोजन करेगी। 24 अप्रैल को दिनकर जी की पुण्यतिथि से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में ‘रश्मिरथी पर्व’ मनाया जाएगा। इसमें तीन नाटकों एवं एक नृत्य नाटिका का मंचन होगा। लोकभवन में शनिवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेसवार्ता कर जानकारी साझा की। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष (75 वर्ष) पर यह कार्यक्रम होगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस दौरान "रश्मिरथी संवाद" स्मारिका का लोकार्पण भी होगा। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता होंगे। कार्यक्रम के संयोजक कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही हैं और अध्यक्षता राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा करेंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह विशिष्ट अतिथि और भाजपा नेता नीरज सिंह सह-संयोजक रहेंगे। कब और क्या कार्यक्रम होंगे – इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 24 अप्रैल को शाम 6.15 बजे ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का लोकार्पण होगा। शाम 6.20 बजे से राष्ट्रीय परिसंवाद – प्रकाश और प्रेरणा का पुंज: रश्मिरथी- कार्यक्रम तय है। वहीं शाम 7.05 बजे ‘रश्मिरथी’ नाट्य मंचन होगा। – 25 अप्रैल को शाम 6.10 बजे से सांस्कृतिक भारत के निर्माण में स्वामी विवेकानंद जी के योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद होगा। शाम 7.05 बजे से ‘स्वामी विवेकानंद’ नाटक का मंचन होगा। इस दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य होंगे। साथ ही अन्य गणमान्य नेता और पदाधिकारी शामिल होंगे। -26 अप्रैल शाम 6 बजे राष्ट्र निर्माण में लोकमान्य तिलक एवं पूर्व प्रधानमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी जी का योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद होगा। शाम 7.05 बजे से भारत रत्न, कवि अटल बिहारी वाजपेयी जी की 10 कविताओं पर आधारित संगीतमय नृत्य नाटिका ‘अटल स्वरांजलि’ आयोजित होगी। शाम 8 बजे से ‘लोकमान्य तिलक’ नाटक का मंचन होगा। कार्यक्रम में यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व होगा आयोजित, सीएम योगी होंगे मुख्य अतिथि

लखनऊ.  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश सरकार तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ का आयोजन करेगी। 24 अप्रैल को दिनकर जी की पुण्यतिथि से 26 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में ‘रश्मिरथी पर्व’ मनाया जाएगा। इसमें तीन नाटकों एवं एक नृत्य नाटिका का मंचन होगा। लोकभवन में शनिवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेसवार्ता कर जानकारी साझा की। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष (75 वर्ष) पर यह कार्यक्रम होगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस दौरान "रश्मिरथी संवाद" स्मारिका का लोकार्पण भी होगा। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता होंगे। कार्यक्रम के संयोजक कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही हैं और अध्यक्षता राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा करेंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह विशिष्ट अतिथि और भाजपा नेता नीरज सिंह सह-संयोजक रहेंगे। कब और क्या कार्यक्रम होंगे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 24 अप्रैल को शाम 6.15 बजे ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का लोकार्पण होगा। शाम 6.20 बजे से राष्ट्रीय परिसंवाद – प्रकाश और प्रेरणा का पुंज: रश्मिरथी- कार्यक्रम तय है। वहीं शाम 7.05 बजे ‘रश्मिरथी’ नाट्य मंचन होगा। 25 अप्रैल को शाम 6.10 बजे से सांस्कृतिक भारत के निर्माण में स्वामी विवेकानंद जी के योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद होगा। शाम 7.05 बजे से ‘स्वामी विवेकानंद’ नाटक का मंचन होगा। इस दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य होंगे। साथ ही अन्य गणमान्य नेता और पदाधिकारी शामिल होंगे। 26 अप्रैल शाम 6 बजे राष्ट्र निर्माण में लोकमान्य तिलक एवं पूर्व प्रधानमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी जी का योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद होगा। शाम 7.05 बजे से भारत रत्न, कवि अटल बिहारी वाजपेयी जी की 10 कविताओं पर आधारित संगीतमय नृत्य नाटिका ‘अटल स्वरांजलि’ आयोजित होगी। शाम 8 बजे से ‘लोकमान्य तिलक’ नाटक का मंचन होगा। कार्यक्रम में यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।