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रेलवे दोहरीकरण कार्य का असर: कई प्रमुख ट्रेनें डायवर्ट, सुवंसा स्टेशन पर बढ़ाया गया इंटरसिटी का ठहराव

लखनऊ गर्मी की छुट्टी में रेल यात्रियों की आफत थोड़ी बढ़ गई है। उत्तर रेलवे के गौरा-सुवंसा-जंघई रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के चलते रेलवे ने 23 से 30 जून तक अर्चना और नीलांचल एक्सप्रेस समेत नौ प्रमुख ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। वहीं, यात्रियों की सुविधा के लिए वाराणसी-लखनऊ इंटरसिटी का सुवंसा स्टेशन पर अस्थाई ठहराव बढ़ाया गया है। सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता ने यात्रियों से सफर पर निकलने से पहले हेल्पलाइन नंबर 139 पर स्थिति जांचने की अपील की है। मार्ग परिवर्तन के तहत लखनऊ-वाराणसी (24204), अमृतसर-हावड़ा पंजाब मेल (13006), जम्मूतवी-पटना अर्चना एक्सप्रेस (12356) और नई दिल्ली-वाराणसी विशेष गाड़ी (04210) लखनऊ-सुलतानपुर-जफराबाद-वाराणसी मार्ग से चलेंगी, जिससे रायबरेली, अमेठी और प्रतापगढ़ जैसे स्टेशनों पर इनका ठहराव नहीं होगा। दूसरी तरफ, हावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल (13005), पटना-जम्मूतवी अर्चना एक्सप्रेस (12355) और पुरी-आनंद विहार नीलांचल एक्सप्रेस (12875) वाराणसी-जफराबाद-सुलतानपुर-लखनऊ मार्ग से डायवर्ट रहेंगी। बनारस-देहरादून एक्सप्रेस (15119) 23 से 27 जून तक जंघई-फाफामऊ और 28 से 30 जून तक प्रयागराज के रास्ते चलाई जाएगी, जबकि फिरोजपुर-पटना साहिब गाड़ी (04616) 23 जून को उतरेठिया-सुलतानपुर होकर निकलेगी। बनारस इंटरसिटी का ठहराव सुवंसा पर रेलवे के अनुसार 26 से 30 जून तक बादशाहपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म न होने से 15108 लखनऊ-बनारस इंटरसिटी, 15107 बनारस-लखनऊ इंटरसिटी और 24203 वाराणसी-लखनऊ एक्सप्रेस का ठहराव सुवंसा स्टेशन पर 2 मिनट के लिए दिया जाएगा। जंघई पर ठहराव यथावत रहेगा। 29 मिनट में ट्रेन पलटाने की साजिश का रहस्य छुपा लखनऊ, संवाददाता। दिलकुशा के पास रेलवे पटरी पर लोहे का एंगल रखकर पंजाब मेल ट्रेन को पलटाने की साजिश का रहस्य 29 मिनट में छिपा। पुलिस, एजेंसियां, जीआरपी और आरपीएफ की विशेष टीमें इस दो ट्रेनों के बीच के इस अंतराल में ट्रैक पर हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। इस दौरान ट्रैक पर कौन गया? वह किधर से आया? कितने लोग थे? टीमें तफ्तीश कर रही हैं। एसपी जीआरपी रोहित मिश्रा के मुताबिक शुक्रवार दोपहर एक ट्रेन ट्रैक से 1:36 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर लोहे का एंगल नहीं था। दूसरी पंजाब मेल 2:05 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर एंगल रखा था। चालक ने काफी हद तक हादसा रोकने की कोशिश की पर आखिर में इंजन में एंगल फंस गया था। लोहे का एंगल करीब 50 किलो वजन का था। जिसे उठाने में करीब तीन से चार लोग लगे होंगे। एसीपी कैंट ज्ञानेंद्र सिंह निर्देशन में थाने की टीम के अलावा, जीआरपी, रेलवे, खुफिया एजेंसियां घटनास्थल को जाने वाले मार्ग पर लगे सीसी कैमरे खंगाल रही हैं।

5.87 लाख परिवारों को मिला आशियाना, सर्वे में सामने आया मुख्यमंत्री आवास योजना का सकारात्मक प्रभाव

 लखनऊ  शासन के मूल्यांकन प्रभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के मध्य कराए गए सर्वेक्षण में मुख्यमंत्री आवास योजना के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। सर्वे में दावा किया गया है कि पक्का मकान मिलने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सुरक्षा के स्तर पर आया है। 84 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि अब उन्हें सर्दी, गर्मी और बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा मिल रही है। जबकि 77 प्रतिशत परिवारों ने रहन-सहन और जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार की बात कही। प्रदेश सरकार ने फरवरी 2018 में मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की शुरुआत की थी। इसके तहत प्राकृतिक आपदा, कालाजार, वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार, बैगा वर्ग, जेई-एईएस प्रभावित, कुष्ठ रोग प्रभावित परिवारों व प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाता है। पात्रों में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाओं व अनुसूचित जनजातियों को भी शामिल किया गया है। योजना में अब तक 5.87 लाख से अधिक आश्रयहीन ग्रामीण परिवारों को आवास आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें 1.30 लाख दिव्यांगजन व 72 हजार से अधिक निराश्रित विधवाएं भी शामिल हैं। मूल्यांकन प्रभाग की रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 1464 परिवारों में से 1457 परिवारों ने माना कि पक्का घर मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। आवास मिलने से लोगों के आत्मसम्मान में भी वृद्धि हुई है। 71 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि पक्का घर मिलने से समाज में उनका सम्मान बढ़ा है और उन्हें सामाजिक बराबरी का अनुभव हो रहा है। ॉसर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 68 प्रतिशत लाभार्थियों को पहले घरों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के खतरा रहता था, जिससे अब उन्हें राहत मिली है। वहीं 27 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि आवास मिलने के बाद बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है। सर्वेक्षण को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अब केवल मकान निर्माण की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह गरीब परिवारों के जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन चुकी है। पक्की छत ने लाखों परिवारों के जीवन में आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा का नया अध्याय जोड़ा है।

6.30 लाख ग्राहकों के लिए खुशखबरी, पोस्ट ऑफिस से निकासी के लिए पासबुक जरूरी नहीं

 रायबरेली  जिले के करीब 6.50 लाख डाकघर खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। अब पासबुक साथ न होने पर भी आधार कार्ड के माध्यम से मुख्य डाकघर, उपडाकघर और ग्रामीण शाखा डाकघरों से जमा-निकासी की सुविधा मिल सकेगी। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को बड़ी सहूलियत होगी। डाक विभाग ने अन्य बैंकों की तर्ज पर आधार आधारित लेनदेन एईपीएस (आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली) की सुविधा लागू कर दी है। इसके तहत खाताधारक आधार संख्या और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अपने खाते से नकदी निकालने के साथ ही धनराशि जमा भी करा सकेंगे। इससे पासबुक खो जाने या साथ न होने की स्थिति में भी बैंकिंग कार्य प्रभावित नहीं होगा। जिले में दो मुख्य डाकघर और 54 उपडाकघर संचालित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा डाकघरों के माध्यम से भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डाक अधीक्षक अनूप अग्रवाल का कहना है कि 6.50 लाख खाताधारकों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आधार आधारित जमा-निकासी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही लेनदेन किया जाएगा।

हीट वेव की चुनौती को देखते हुए पूरे प्रदेश में लागू होगी एक समान अवकाश व्यवस्था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीट वेव की परिस्थितियों को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाकर 24 जून तक कर दी गई है।  अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब प्रत्येक वर्ष 20 मई से 24 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा तथा 25 जून से विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन प्रारंभ होगा। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखते हुए नए शैक्षणिक सत्र की बेहतर और व्यवस्थित शुरुआत सुनिश्चित करना है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जब हीट वेव की स्थिति के कारण जिलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर बार-बार अवकाश बढ़ाना पड़ता था। नई व्यवस्था से पूरे प्रदेश में एकरूपता सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर उपलब्ध हो सकेगा। 22 जून से विद्यालय पहुंचेंगे शिक्षक, नए सत्र की तैयारियां होंगी पूरी योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विद्यालय खुलने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसके लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस अवधि में लेसन प्लान तैयार करने, मध्याह्न भोजन व्यवस्था को अंतिम रूप देने, पाठ्यपुस्तक वितरण की तैयारी, विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक, बाल वाटिका संचालन की तैयारी, विद्यालय परिसर, रसोईघर एवं शौचालयों की साफ-सफाई, खेल सामग्री की उपलब्धता तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील बनाने जैसे कार्य संपन्न किए जाएंगे। 220 कार्यदिवस और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 220 कार्यदिवस और नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारियों को भी स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित करने से पूर्व इस विधिक प्रावधान को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार का मानना है कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना आवश्यक है। योग, स्वच्छता और बेहतर अधिगम वातावरण पर फोकस आदेश में विद्यालयों में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुचारु रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ना भी है।

79 करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च, पयर्टन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी की जाएगी मजबूत

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग ने 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं पर तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के 8 जिलों में 33 पर्यटन एवं धार्मिक विकास परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जा रहा है, जिन पर लगभग 79.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ‘आस्था के साथ विकास’ है। इसी सोच के तहत धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि जारी कर दी गई है और कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को 8 जिलों की 33 परियोजनाओं का दायित्व सौंपा गया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 79.17 करोड़ रुपये से अधिक है। आधुनिक सुविधाओं से जुड़ेंगे आस्था स्थल इन परियोजनाओं में लखनऊ और सीतापुर की एक-एक परियोजना, मिर्जापुर की 7, भदोही की 5, सोनभद्र की 2, हमीरपुर की 2, महोबा की 3, बांदा और चित्रकूट की 6-6 परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के विभिन्न आस्था स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई दी जाए। परियोजनाओं के लिए जारी धनराशि का ब्योरा जयवीर सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित मोहनलाल गंज में हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास के लिए 11.99 करोड़, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना कार्य के लिए 1.49 करोड़ रुपये, मिर्जापुर की 07 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.04 करोड़, करोड़, 79.64 लाख, 1.94 करोड़, 1.97 करोड़, 83.69 लाख, 88.87 लाख और 2.15 करोड़ रुपये के करीब धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार भदोही जनपद की 05 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.03 करोड़, 1.47 करोड़, 1.45 करोड़ 99.97 लाख, 1.25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। वहीं सोनभद्र जनपद की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.25 करोड़ और 1.16 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है। इसी तरह महोबा जनपद के विभिन्न मंदिरों के लिए क्रमशः 1.08 करोड़ रुपये, 45.58 लाख और 71.77 लाख रुपये तीन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत किए गए। हमीरपुर की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 70 लाख और 69.81 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। बांदा की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 53.82 लाख, 1.38 करोड़, 1.14 करोड़, 1.30 करोड़, 3.38 करोड़ और 2.83 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं चित्रकूट की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.81 करोड़, 2.29 करोड़, 5.25 करोड़, 1.71 करोड़, 1.66 करोड़ और 9.05 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। निविदा की कार्यवाही भी जारी उन्होंने बताया कि लगभग सभी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिए निविदा की कार्यवाही प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि पर्यटन सेक्टर की लोकप्रियता एवं निवेश की असीमित संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार आस्था के साथ विकास के अंतर्गत सभी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करा रही है।

72 जिलों के 1011 केंद्रों पर पारदर्शी और नकलविहीन तरीके से सम्पन्न हुई बी.एड. प्रवेश परीक्षा

लखनऊ मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय भवन में उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित किया गया। उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 के टॉपर्स से उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कुलपतिगण तथा प्रमुख सचिव एवं सचिव द्वारा वीडियो कॉल पर वार्ता कर शुभकामनाएं दी और उनकी भविष्य की योजनाओं को जाना। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य की दिशा तय की है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हुआ है। 'गुरु देवो भव, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की भावना के साथ हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। देशभक्ति केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। समाज ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण से पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी और एआई को जोड़कर अभेद्य सिस्टम से परीक्षा कराई। यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि परीक्षाएं कैसे शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ कराई जाएं। योगी सरकार के आने के बाद लखनऊ, बरेली और अब झांसी विश्वविद्यालय ने बी.एड. परीक्षाएं कराकर शिक्षा के स्तर को सुधारा है। पहले नकल को बढ़ावा देने की बात होती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से जुड़कर परीक्षाएं नकलविहीन हो रही हैं। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज बी.एड. करने वाले छात्रों के लिए हर्ष का दिन है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपका ज्ञान, अनुभव और समर्पण आपको अलग पहचान दिलाएगा। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उसकी टीम को परीक्षा के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी को राज्य स्तरीय संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 आयोजित कराने का दायित्व सौंपा गया था। विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 31 मई 2026 को दो पालियों में प्रातः 9.00 से 12.00 बजे तक तथा अपराह्न 2.00 से 5.00 बजे तक प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केंद्रों पर पूर्ण शुचिता, पारदर्शिता एवं गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित कराई गई। बी.एड. प्रवेश परीक्षा में 4,44,958 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2,72,659 महिलाएं, 1,72,297 पुरुष तथा 2 ट्रांसजेंडर शामिल थे। श्रेणीवार 2,36,272 सामान्य, 1,32,217 अन्य पिछड़ा वर्ग, 72,128 अनुसूचित जाति, 1341 अनुसूचित जनजाति तथा 2448 विकलांग अभ्यर्थी पंजीकृत थे। प्रथम पाली में 4,00,499 तथा द्वितीय पाली में 4,00,756 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। कुल उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत रही। कासगंज एवं पीलीभीत में सबसे अधिक 95 प्रतिशत तथा गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सबसे कम 84 प्रतिशत उपस्थिति रही। तकनीक का हुआ अभूतपूर्व प्रयोग:   परीक्षा में हाईटेक कमांड कंट्रोल रूम स्थापित कर आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर) के माध्यम से 72 जिलों के 1011 केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई। 22000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 5651 बायोमेट्रिक्स मशीनें लगाई गईं। एआई और रियल टाइम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से सभी अभ्यर्थियों की फेस रिकॉगनीशन एवं फिंगर प्रिंट अटेंडेंस कराई गई। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष एवं प्रवेश/निकास स्थान की एआई युक्त सीसीटीवी से निगरानी की गई। वीओआईपी आधारित सिस्टम से सभी केंद्रों से रियल टाइम संपर्क स्थापित किया गया। विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को जीपीएस आधारित बॉडी बॉर्न कैमरे दिए गए। परीक्षा के दौरान 04 अभ्यर्थी अनुचित साधन प्रयोग करते पाए गए, जिनका परिणाम निरस्त कर दिया गया। परीक्षाफल: परीक्षा के दौरान ओएमआर उत्तर पत्रकों की डबल स्कैनिंग एवं इमेज स्कैनिंग के माध्यम से स्कोरिंग की गई। कुल 4,00,107 अभ्यर्थियों को रैंक जारी की गई, जिनमें 1,53,612 पुरुष, 2,46,494 महिला तथा 01 ट्रांसजेंडर हैं। कला वर्ग के 2,48,452, विज्ञान वर्ग के 1,28,018, वाणिज्य वर्ग के 20,514 एवं कृषि वर्ग के 3771 अभ्यर्थी शामिल हैं। टॉपर्स: प्रथम 10 में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में 04 पुरुष तथा 06 महिला हैं। जनपद अलीगढ़ की सुश्री वन्दना सिंह (विज्ञान वर्ग) ने प्रदेश में प्रथम, अलीगढ़ के श्री नितिन पचौरी (विज्ञान वर्ग) ने द्वितीय तथा जौनपुर की सुश्री मिश्रा खुशी अजय (विज्ञान वर्ग) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।  इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडे, आरएमएल विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा  एम.के. अग्रवाल, प्रमुख सलाहकार प्रो. एस.पी. सिंह, राज्य समन्वयक प्रो. सौरव श्रीवास्तव, सह राज्य समन्वयक प्रो. डी.के. भट्ट एवं प्रो. काव्या दुबे, कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जुलाई में सभी विद्यार्थियों के लिए चलेगा 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधार के अगले चरण में प्रवेश करते हुए अब बच्चों के सीखने के अंतराल (लर्निंग गैप) को समाप्त करने के लिए प्रदेशव्यापी ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’ शुरू करने जा रही है। निपुण भारत मिशन के माध्यम से आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के बाद सरकार का फोकस अब उन विद्यार्थियों तक पहुंचने पर है, जो किसी कारणवश अपेक्षित अधिगम स्तर से पीछे रह गए हैं। इसी उद्देश्य से जुलाई 2026 में सभी विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जबकि अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक विद्यालयों में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का विशेष कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफएसई-2023 की भावना के अनुरूप तैयार की गई इस कार्ययोजना का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी सीखने की आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है। योगी सरकार का मानना है कि यदि समय रहते अधिगम अंतराल को दूर नहीं किया गया तो बच्चों की आगे की शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है। इसलिए विद्यालय स्तर पर सुनियोजित, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी रणनीति लागू की जा रही है। अधिगम परिणामों पर केंद्रित शिक्षा सुधार का नया चरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार अब नामांकन और आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों के वास्तविक अधिगम परिणामों पर केंद्रित हो चुका है। निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल अनुश्रवण और अब कैच-अप शिक्षण अभियान के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि कोई भी बच्चा सीखने की दौड़ में पीछे न रह जाए। यह पहल गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अनुभव आधारित और रुचिकर होगा शिक्षण कैच-अप शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय परिवेश, दैनिक जीवन के अनुभवों और गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ा जाएगा। शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), गणित किट, पुस्तकालय पुस्तकों, चार्ट, पोस्टर और स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। खेल आधारित गतिविधियों, कहानी, चित्र, लेखन, समूह कार्य तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण के माध्यम से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ाई जाएगी। त्रुटि विश्लेषण और पीयर लर्निंग पर रहेगा जोर कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की कठिनाइयों की पहचान कर उनका समाधान किया जाएगा। त्रुटि विश्लेषण के माध्यम से यह समझा जाएगा कि बच्चे कहां और क्यों पिछड़ रहे हैं। ‘मैं करूं-हम करें-तुम करो’ रणनीति, पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोऑपरेटिव लर्निंग जैसी पद्धतियों का उपयोग कर बच्चों में आत्मविश्वास, सहयोग और समस्या समाधान क्षमता विकसित की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी विद्यार्थी स्वयं को कमजोर या उपेक्षित महसूस न करे। आकलन, अनुश्रवण और अभिभावक सहभागिता बनेगी सफलता की कुंजी कार्यक्रम को परिणाममुखी बनाने के लिए विद्यार्थियों का बेसलाइन और एंडलाइन आकलन किया जाएगा तथा उनकी प्रगति का नियमित अभिलेखीकरण किया जाएगा। एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारी समय-समय पर कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे। वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों को विद्यालय और घर दोनों स्थानों पर सीखने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप स्थानीय स्तर पर विकसित होंगे छोटे उद्योग

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने गोशालाओं की क्षमता का राज्यव्यापी मूल्यांकन पूरा कर लिया है। इसके आधार पर अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप एक प्रमुख गो आधारित उद्योग विकसित करने की तैयारी है। इस पहल को "एक जनपद-एक नवाचार" मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। गोशालाओं की भूमि, गोवंश, जल संसाधन और स्थानीय बाजार के आधार पर आकलन योजना का उद्देश्य गोशालाओं को केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, रोजगार, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए प्रदेशभर की गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया गया है। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन तो कहीं इको पेंट निर्माण को मिलेगा बढ़ावा उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण और अध्ययन के बाद प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा तो कहीं इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद, पंचगव्य उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर छोटी उद्योग इकाइयों का विकास होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। ऐसा होगा जिला विशेष नवाचार मॉडल जिला विशेष नवाचार मॉडल के माध्यम से संसाधनों को आय और रोजगार में बदलने की रणनीति तैयार की गई है। योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाएगा। यह मॉडल सफल होने पर गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, प्राकृतिक खेती को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। साथ ही प्रत्येक जिले की एक विशिष्ट गो-आधारित पहचान विकसित होगी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।

केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों से बदली प्रदेश की तस्वीर, सुरक्षित बेटी, सशक्त महिला एवं आर्थिक सशक्तीकरण का मॉडल बना यूपी

लखनऊ  वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद प्रदेश में विकास की नई धारा देखने को मिली। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभ यदि किसी वर्ग को मिला है तो वह प्रदेश की महिलाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों ने महिला सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। केंद्र की योजनाओं और राज्य सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन ने लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षा, सम्मान और अवसरों का वातावरण  आज उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षा, सम्मान और अवसरों का वातावरण पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है। उज्ज्वला योजना, मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी, कन्या सुमंगला योजना जैसी पहलों ने महिलाओं को न केवल सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है। महिलाओं की सुरक्षा है योगी सरकर की प्राथमिकता महिला सशक्तीकरण की पहली शर्त सुरक्षा है, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा तो शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन के अवसर भी सीमित रह जाएंगे। योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया, महिला हेल्पलाइन 1090 को मजबूत किया गया, महिला डेस्क की स्थापना की गई तथा मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता पैदा की गई। महिला सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 44 हजार से अधिक हो गई, जबकि वर्ष 2017 तक यह संख्या लगभग 10 हजार के आसपास थी। महिला पुलिस बल में इस वृद्धि ने महिलाओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण और संवेदनशील मामलों में बेहतर पुलिसिंग को सुनिश्चित किया है। आज प्रदेश के लगभग हर जिले में महिला बीट पुलिसिंग, पिंक पेट्रोलिंग और महिला हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा रहीं हैं। उज्ज्वला योजना से बदला जीवन, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से मिली राहत ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ महिला सशक्तीकरण की सबसे प्रभावशाली योजनाओं में से एक मानी जाती है। उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है। प्रदेश में लगभग 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। इस योजना ने महिलाओं को धुएं से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाई है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं लकड़ी, उपले और कोयले से खाना बनाती थीं, जिससे उन्हें आंखों और फेफड़ों की बीमारियों का सामना करना पड़ता था। उज्ज्वला योजना ने न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा की बल्कि समय और श्रम की भी बचत की। आज लाखों महिलाएं गैस चूल्हे का उपयोग कर रही हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है और उन्हें अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को मिला संबल योगी सरकार ने बेटियों के जन्म से लेकर शिक्षा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना शुरू की। इस योजना के अंतर्गत अब तक 27.37 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा चुका है। योजना के तहत विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रु…

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ में बोले सीएम योगी, उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से निकलकर देश की टॉप-3 इकोनॉमी में शामिल

लखनऊ/नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से सोमवार को वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर को एक नया और आधुनिक एयरपोर्ट मिल गया है। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट से पहली वाणिज्यिक उड़ान इंडिगो एयरलाइंस की रही। सुबह लखनऊ से आई पहली फ्लाइट का स्वागत किया गया, जबकि इसके बाद बेंगलुरु के लिए पहली उड़ान रवाना हुई। इंडिगो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है। पहली उड़ान के साथ शुरू हुआ नया अध्याय नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत इंडिगो की उद्घाटन उड़ान से हुई। सोमवार सुबह लखनऊ से उड़ान भरकर पहली फ्लाइट जेवर एयरपोर्ट पहुंची, जबकि इसके बाद पहली प्रस्थान उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ एयरपोर्ट ने नियमित वाणिज्यिक सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर लिया। इंडिगो ने घोषणा की है कि वह चरणबद्ध तरीके से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक प्रमुख शहरों से जोड़ेगी। इनमें लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, अमृतसर, चंडीगढ़, श्रीनगर, धर्मशाला और पंतनगर जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक हवाई सेवाएं मिलेंगी। जल्द शुरू होंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें एयरपोर्ट से फिलहाल घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू किया गया है, जबकि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं भी शुरू करने की योजना है। इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वैश्विक कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनकर उभरेगा और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। यहां यात्रियों को डिजीयात्रा, सेल्फ चेक-इन, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एयरपोर्ट का डिजाइन उत्तर प्रदेश की संस्कृति और परंपरा से प्रेरित है। टर्मिनल परिसर में वाराणसी के घाटों और भारतीय स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी। प्राकृतिक रोशनी और खुले स्थान यात्रियों को बेहतर अनुभव देंगे। यात्रियों के लिए मजबूत मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को विभिन्न परिवहन सेवाओं से जोड़ा गया है। यहां एयरपोर्ट टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली बस सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में रेल और रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क से भी इसकी कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाएगा। कार्गो हब से व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यात्री सेवाओं के साथ-साथ एक बड़े कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया गया है। एयर इंडिया सैट्स द्वारा विकसित कार्गो सुविधा की शुरुआती क्षमता दो लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख मीट्रिक टन तक किया जाएगा। इससे ई-कॉमर्स, निर्यात और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई गति मिलेगी। 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता एयरपोर्ट के प्रथम चरण को प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुविधाओं और विस्तार की संभावनाओं के साथ विकसित यह एयरपोर्ट भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यात्री अनुभव को बनाया गया खास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस चेयरमैन क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने कहा कि यह केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और बेहतर यात्री अनुभव की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि हर यात्री को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिल सके। योगी सरकार के विकास मॉडल का अहम हिस्सा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं में शामिल है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ यह एयरपोर्ट प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देगा। सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट के संचालन से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद करेगा।