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ग्राम प्रहरी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रखे विचार

लखनऊ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ग्राम प्रहरी ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी भूमिका ग्राम सुरक्षा में अहम है। गांवों में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की रोकथाम तथा पुलिस और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में ग्राम प्रहरी अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी सतर्कता, सेवा भावना और जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पुलिस कमिश्नरेट, लखनऊ द्वारा आयोजित ‘ग्राम प्रहरी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों का योगदान केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण समाज में विश्वास, जागरूकता और सुरक्षा की भावना मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके कार्यों का सम्मान करना और उनकी सुविधाओं का विस्तार करना आवश्यक है। ग्राम प्रहरियों के लिए सरकार प्रतिबद्ध उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्राम प्रहरियों के हितों और कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सरकार द्वारा ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2,500 रुपए से बढ़ाकर 3,500 रुपए प्रतिमाह तथा पेंशन 1,000 रुपए से बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रतिमाह की गई है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 68 हजार ग्राम प्रहरियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मानदेय और पेंशन में वृद्धि ग्राम प्रहरियों के योगदान को महत्व देने तथा उनके आर्थिक हितों को संबल प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ग्राम प्रहरी विषम परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करते हैं। उनके अनुभव और स्थानीय स्तर पर सक्रियता से पुलिस को समय पर सूचनाएं प्राप्त करने तथा समस्याओं की पहचान करने में भी मदद मिलती है। सुरक्षित गांव, समृद्ध प्रदेश की आधारशिला उन्होंने कहा कि सुरक्षित गांव, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और जागरूक नागरिक समृद्ध उत्तर प्रदेश की आधारशिला हैं। ग्राम प्रहरियों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल से ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य ग्राम प्रहरियों को सम्मान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही प्रदेश के प्रत्येक गांव में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना है। सशक्त ग्राम प्रहरी, सुरक्षित गांव और समृद्ध उत्तर प्रदेश, इसी संकल्प के साथ ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

नवरात्र में पूजा कॉम्बो पैक तैयार कर आत्मनिर्भरता की राह मजबूत कर रहीं वाराणसी की महिलाएं

नवरात्रि विशेष-4: उत्पादन की शक्ति योगी सरकार की पहल से प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार, 65 दुकानों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच रहे स्थानीय उत्पाद पूजा की जरूरी सामग्री एक पैक में उपलब्ध, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और आमदनी बढ़ाने का अवसर वाराणसी एक तरफ घर-घर मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं, दूसरी तरफ मुर्दहा गांव में कुछ महिलाओं के हाथ चुनरी सहेज रहे हैं, रोली तौल रहे हैं, हवन सामग्री बांध रहे हैं। पहले जिनकी दुनिया घर की चौखट तक सिमटी थी, आज उनके बनाए पूजा कॉम्बो पैक वाराणसी के बाजार में पहुंच रहे हैं। हरहुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुर्दहा में माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नवरात्र की मांग को आजीविका के अवसर में बदल रही हैं। मां की चुनरी से लेकर हवन-पूजन की जरूरी सामग्री तक एक ही पैक में उपलब्ध है। नौ दिन शक्ति की उपासना हो रही है और ये महिलाएं उसी शक्ति को अपने हुनर और हौसले से जमीन पर उतार रही हैं। एक पैक में पूरी पूजा, हर पैक में महिलाओं की मेहनत माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह की निहारिका देवी और सीमा देवी अपने समूह की अन्य महिलाओं के साथ सुबह से ही काम में जुट जाती हैं। कोई चुनरी सहेजती है, कोई रोली और चंदन तौलती है, तो कोई सिंदूर, अक्षत, धूप, कपूर, कलावा और हवन सामग्री को करीने से पैक करती है। इन सबको मिलाकर बनता है नवरात्र का पूजा कॉम्बो पैक। इस पैक की खासियत यह है कि भक्त को पूजा की तैयारी के लिए बाजार में भटकना नहीं पड़ता। जो चाहिए, सब एक जगह मिल जाता है। नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। समूह की महिलाओं ने इसी मांग को अवसर में बदल दिया है। 65 प्रेरणा मार्ट बने महिला उद्यमियों का बाजार उत्पाद बन जाने के बाद असली चुनौती उसे सही ग्राहक तक पहुंचाने की होती है और इसका जवाब बने हैं प्रेरणा मार्ट। योगी सरकार की महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की पहल के तहत ये मार्ट स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहे हैं। उपायुक्त (स्व रोजगार) पवन कुमार सिंह के अनुसार वाराणसी के आठ ब्लॉकों में आठ-आठ प्रेरणा मार्ट संचालित हैं। जिला मुख्यालय पर एक मार्ट अलग है। इस तरह जिले में कुल 65 प्रेरणा मार्ट हैं, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही करती हैं। उत्पादक से उद्यमी तक का सफर ब्लॉक मिशन मैनेजर पूजा तिवारी बताती हैं कि प्रेरणा मार्ट के माध्यम से महिलाएं केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी बिक्री और विपणन से भी जुड़ रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपनी पहचान उद्यमी के रूप में बना रही हैं। नवरात्र में हम देवी के नौ रूपों की उपासना करते हैं और ये महिलाएं उसी शक्ति का व्यावहारिक रूप दिखा रही हैं। वे परिवार को संभालती हैं, समूह में मिलकर काम करती हैं और बाजार में अपने उत्पाद की पहचान गढ़ती हैं। मुर्दहा की ये महिलाएं हर पैक के साथ यही संदेश दे रही हैं कि शक्ति की सच्ची आराधना अपने हुनर पर भरोसा करना है। “नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए प्रेरणा मार्ट के माध्यम से हमारे बनाए पैक लोगों तक पहुंच रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। हमें खुशी है कि हम अपने काम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे पा रहे हैं।”-निहारिका देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह   “पहले हम घर के कामकाज तक ही सीमित रहते थे, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद कुछ नया करने का अवसर मिला है। सरकार की ओर से समूह की महिलाओं को आगे बढ़ने के ऐसे अवसर मिलना हमारे लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। सीमा देवी, माहेश्वरी स्वयं सहायता समूह नवरात्र जैसे त्योहारों पर पूजा सामग्री के कॉम्बो पैक तैयार करना महिलाओं के लिए आमदनी बढ़ाने का अच्छा अवसर है। इससे उनके पारंपरिक कौशल को बाजार मिल रहा है और समूह के माध्यम से मिलकर काम करने की भावना भी मजबूत हो रही है। पवन कुमार सिंह, उपायुक्त (स्व रोजगार), वाराणसी

बरेली के प्रेमपाल, रामदयाल और शेरसिंह बोले परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत

प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों को 3500 रुपये मानदेय और पांच लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा बरेली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ाने और पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा से ग्राम प्रहरियों में खुशी की लहर है। मंगलवार को बरेली पुलिस लाइन में आयोजित ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह में पहुंचे बरेली और पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों के ग्राम प्रहरियों ने प्रदेश सरकार के फैसले की सराहना की। ग्राम प्रहरियों ने कहा कि मानदेय में बढ़ोतरी से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, वहीं कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से परिवार के स्वास्थ्य संबंधी खर्च की चिंता कम होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्राम प्रहरियों की समस्याओं और जरूरतों पर ध्यान दे रही है। प्रेमपाल बोले- सरकार ने ग्राम प्रहरियों की मेहनत को दिया सम्मान बरेली के बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम प्रहरी प्रेमपाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानदेय बढ़ाने का निर्णय उनके लिए राहत देने वाला है। सरकार की ओर से कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी सराहनीय है। इससे ग्राम प्रहरियों के साथ उनके परिवारों को भी लाभ मिलेगा। रामदयाल ने कैशलेस इलाज की सुविधा को बताया बड़ी राहत बरेली के ग्राम प्रहरी रामदयाल ने भी प्रदेश सरकार के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने विशेष रूप से पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा की सराहना की। रामदयाल ने कहा कि बीमारी के समय इलाज पर होने वाला खर्च परिवार के लिए बड़ी चिंता बन जाता है। ऐसे में सरकार की यह पहल ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित होगी। मानदेय बढ़ने से भी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहूलियत मिलेगी। शेरसिंह ने कहा- मानदेय बढ़ने से मिलेगी आर्थिक मजबूती बिथरी चैनपुर के ग्राम प्रहरी शेरसिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी गांव की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस के सहयोगी के रूप में काम करते हैं। सरकार ने मानदेय बढ़ाकर उनकी जिम्मेदारियों और योगदान को महत्व दिया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलने से ग्राम प्रहरियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया। पीलीभीत के बालकराम ने भी जताई खुशी पीलीभीत जिले के देवरिया कला निवासी ग्राम प्रहरी बालकराम ने मानदेय बढ़ाने और कैशलेस इलाज की सुविधा की घोषणा पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों के हित में उठाया गया यह कदम उनके परिवारों के लिए लाभकारी साबित होगा। मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी से आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। वहीं इलाज की सुविधा मिलने से बीमारी के समय आर्थिक परेशानियों का सामना कम करना पड़ेगा। रामपाल ने भी मुख्यमंत्री के फैसले की सराहना की पीलीभीत के ग्राम प्रहरी रामपाल ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों के मानदेय में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार उनके लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले ग्राम प्रहरियों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से ग्राम प्रहरियों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। 2500 से बढ़कर 3500 रुपये हुआ मानदेय, 68 हजार ग्राम प्रहरियों को लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बरेली पुलिस लाइन में आयोजित समारोह में ग्राम प्रहरियों का मासिक मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये करने की घोषणा की। इससे प्रदेश के करीब 68 हजार ग्राम प्रहरियों को लाभ मिलेगा। मानदेय में एक हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी होने से प्रत्येक ग्राम प्रहरी को सालाना 12 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने की भी घोषणा की। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम प्रहरियों को सम्मानित भी किया गया। गांवों की सुरक्षा में ग्राम प्रहरियों की अहम भूमिका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में कहा कि गांवों में ग्राम प्रहरियों की भूमिका शहरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की तरह महत्वपूर्ण है। ग्राम प्रहरी गांव की गतिविधियों पर नजर रखकर संदिग्ध व्यक्तियों और घटनाओं की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को ग्राम प्रहरियों के साथ नियमित बैठकें करने और उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित गांव ही आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव बन सकते हैं। प्रदेश सरकार ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ इसमें योगदान देने वाले ग्राम प्रहरियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, समारोह में पहुंचे ग्राम प्रहरियों ने मानदेय वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधा की घोषणा को अपने हित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित संग्रहण एवं अधिकृत माध्यमों से निस्तारण पर जोर

योगी सरकार में पर्यावरण संरक्षण की पाठशाला बनेंगे विद्यालय, प्रार्थना सभा में होगी ई-वेस्ट पर प्रश्नोत्तरी और गतिविधियां डीआईओएस और बीएसए सुनिश्चित करेंगे अभियान का संचालन, पोर्टल पर अपलोड होगा गतिविधियों का विवरण लखनऊ पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सही प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा के साथ पर्यावरणीय चेतना और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रयासों के क्रम में 28 अक्टूबर को प्रदेश के विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन का विशेष अभियान-6 आयोजित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित संग्रहण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से निस्तारण के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रार्थना सभा में प्रश्नोत्तरी और जागरूकता गतिविधियों के साथ विद्यालयों में एकत्रित ई-वेस्ट को अधिकृत रिसाइक्लर अथवा रिफर्बिशर तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को अभियान के प्रभावी संचालन तथा गतिविधियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल के माध्यम से विद्यालयों में पर्यावरणीय जागरूकता को मजबूत करने, विद्यार्थियों में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की समझ विकसित करने और ई-वेस्ट के जिम्मेदार प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रार्थना सभा से पर्यावरण संरक्षण का संदेश 28 अक्टूबर को विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान ई-वेस्ट प्रबंधन पर विशेष जागरूकता गतिविधियां और प्रश्नोत्तरी आयोजित की जाएंगी। पोस्टर, बैनर तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों, सुरक्षित संग्रहण और जिम्मेदार निस्तारण की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को विद्यार्थियों के दैनिक व्यवहार से जोड़ना है। सुरक्षित तरीके से होगा ई-वेस्ट का प्रबंधन अभियान के अंतर्गत पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में फेंकने या खुले में जलाने के बजाय अधिकृत माध्यमों से निस्तारित करने के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालयों में ई-वेस्ट संग्रहण के दौरान विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खोलने या तोड़ने से दूर रखने और एकत्रित ई-वेस्ट को अधिकृत रिसाइक्लर अथवा रिफर्बिशर तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। इससे संग्रहण से निस्तारण तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी अहम अभियान के प्रभावी संचालन के लिए डीआईओएस और बीएसए को अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियां सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारी विद्यार्थियों की सहभागिता, ई-वेस्ट संग्रहण तथा अधिकृत एजेंसियों को हस्तांतरण की व्यवस्था पर ध्यान देंगे। अभियान से जुड़ी गतिविधियों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना और ऑनलाइन रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण रहेगा। संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन का यह अभियान विद्यार्थियों में स्वच्छता, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा ने कहा- विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, सुरक्षित संग्रहण और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से निस्तारण पर जोर देते हुए अभियान की नियमित निगरानी एवं निर्धारित पोर्टल पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।  

चयनित विद्यार्थियों को एक साल तक निःशुल्क कोचिंग के साथ आवास और भोजन की सुविधा

सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सुनहरा अवसर, दक्षणा फाउंडेशन देगा साथ कक्षा 10 के अंकों और पारिवारिक आय के आधार पर होगा चयन, पात्र विद्यार्थी ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन लखनऊ आर्थिक अभाव मेधावी विद्यार्थियों के इंजीनियर और डॉक्टर बनने के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा के अवसरों को अधिक सुलभ बनाने और वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को जेईई और नीट जैसी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का विशेष अवसर मिल रहा है। दक्षणा फाउंडेशन की संयुक्त दक्षणा चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को एक वर्ष तक निःशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो प्रतिभा और मेहनत के बावजूद महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। निःशुल्क तैयारी की सुविधा मिलने से उन्हें इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की शिक्षा संबंधी पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उनके भविष्य को मजबूत बनाना है। पुणे के निकट दक्षणा वैली में मिलेगी तैयारी की सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जेडीएसटी-2027 के तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे के निकट स्थित दक्षणा वैली परिसर में एक वर्ष तक जेईई अथवा नीट की तैयारी कराई जाएगी। इस दौरान कोचिंग के साथ रहने और भोजन की सुविधा भी निःशुल्क मिलेगी। इससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आर्थिक बोझ कम होगा और छात्र अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। अंकों और आय के निर्धारित मानकों पर मिलेगा अवसर समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में पढ़ने वाले और मई 2027 तक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इंजीनियरिंग वर्ग में सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए कक्षा 10 के गणित एवं विज्ञान विषयों में 85 प्रतिशत और छात्राओं के लिए 80 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित है। अन्य श्रेणियों के लिए अलग मानक लागू होंगे। मेडिकल वर्ग में सामान्य श्रेणी के लिए 80 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 75 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 65 प्रतिशत कटऑफ तय है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी अलग कटऑफ का प्रावधान है। पारिवारिक आय की शर्तों के तहत छात्रों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम और छात्राओं के परिवार की वार्षिक आय पांच लाख रुपये से कम होनी चाहिए। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले विद्यार्थी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। प्रधानाचार्यों को पात्र विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश समाज कल्याण विभाग ने सर्वोदय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को इस योजना की जानकारी दें और पात्र विद्यार्थियों को आवेदन के लिए प्रेरित करें। इससे योग्य विद्यार्थियों तक अवसर की जानकारी पहुंचाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।जेडीएसटी-2027 के लिए आवेदन दक्षणा फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट https://apply.scholarship.dakshana.org पर किया जा सकता है।

दशहराः भगवान श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी में रूस में हो रही तैयारी

सीएम योगी ने बढ़ाया अयोध्या के दीपोत्सव और रामलीला का वैभव, विदेशी कलाकार भी ले रहे प्रेरणा सीएम योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंची अयोध्या में मंचित रामलीला 2017 के बाद कई अवसरों पर रूस से अयोध्या आकर रामलीला का मंचन कर चुके हैं अंतरराष्ट्रीय कलाकार लखनऊ भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी और दीपोत्सव का उल्लास अब सरयू के तट तक सीमित नहीं है। रामकथा की गूंज रूस की राजधानी मास्को में भी सुनाई देने की तैयारी है। अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारियों के बीच मास्को में भी रामलीला के मंचन की तैयारी शुरू हो गई है। रूस के 16 कलाकार रामायण के पात्रों को मंच पर जीवंत करने के लिए जुट गए हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि रामायण के पात्रों की वेशभूषा के लिए दिल्ली के चांदनी चौक से वस्त्र खरीदकर रूस ले जाए गए हैं। भारतीय परंपरा, रामकथा और रूसी कलाकारों की भागीदारी का यह मेल अयोध्या के सांस्कृतिक वैभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या के दीपोत्सव और रामलीला से जुड़े आयोजनों को लेकर दुनिया भर में चर्चा होती रही है। मास्को में आयोजित होने वाली रामलीला के निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद रामलीला का वैभव अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुत बढ़ा है। रूसी कलाकारों की रामलीला के मंचन से भारत और रूस के संबंधों को मजबूती मिलती है। इस दृष्टि से मास्को में होने वाली रामलीला केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि दो देशों के बीच परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति के आदान-प्रदान का अवसर भी है। 2018 में अयोध्या से शुरू हुआ सफर रूसी कलाकारों और अयोध्या के बीच रामलीला के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी नवंबर 2018 में जुड़ी। उस समय अयोध्या में रूस की ‘दिशा रामलीला’ की पहली प्रस्तुति हुई। यह आयोजन रूसी कलाकारों के रामायण से जुड़े मंचन और अयोध्या के सांस्कृतिक वातावरण के बीच संपर्क का अहम पड़ाव बना। भगवान श्रीराम की कथा को दूसरे देश के कलाकारों द्वारा मंच पर प्रस्तुत किया जाना इस सांस्कृतिक यात्रा की विशिष्टता रही। इसके बाद जनवरी 2019 में ‘दिशा रामलीला’ को प्रयागराज कुंभ मेले के मंच पर प्रस्तुत किया गया। कुंभ जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में रूसी कलाकारों की भागीदारी ने इस यात्रा को एक और महत्वपूर्ण आयाम दिया। रामलीला के माध्यम से भारतीय धार्मिक परंपराओं और रंगमंचीय अभिव्यक्ति के बीच संवाद का अवसर बना। दीपोत्सव से जुड़ता गया रूसी कलाकारों का रिश्ता अयोध्या में दीपोत्सव समारोहों के साथ ‘दिशा रामलीला’ की प्रस्तुतियों का सिलसिला भी जुड़ा रहा। दीपोत्सव भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी जो लेकर आयोजित होने वाला प्रमुख उत्सव है। इस अवसर पर रूसी कलाकारों की भागीदारी ने भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। रामकथा बनेगी सांस्कृतिक संवाद का माध्यम रामलीला की विशेषता यह है कि इसकी कथा भारतीय समाज और परंपरा में गहरे रूप से जुड़ी हुई है, लेकिन इसके मंचन की संभावनाएं भौगोलिक सीमाओं तक बंधी नहीं हैं। जब दूसरे देश के कलाकार रामायण के पात्रों को मंच पर प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें भारतीय साहित्य, परंपरा और रंगमंच की अभिव्यक्ति से जुड़ने का अवसर मिलता है। मास्को में 16 रूसी कलाकारों की टीम की तैयारी इसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक कड़ी है। डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार इस तरह के मंचन दोनों देशों के संबंधों को मजबूती देते हैं। श्रीराम की कथा से जुड़े इस आयोजन में अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और रूसी कलाकारों की भागीदारी एक साथ दिखाई देती है। इस तरह रामलीला का मंचन केवल कथा की प्रस्तुति नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम भी बन रहा है। दिशा रामलीला महान रंगकर्मी गेन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की विरासत को भी आगे बढ़ाती है, जिन्हें स्नेहपूर्वक “रूसी राम” कहा जाता था। रूसी दर्शकों के बीच रामलीला को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। रामलीला के किरदार 1) राम – अलेक्सी 2) सीता  – दाशा 3) लक्ष्मण – ओलेग 4) हनुमान -दमित्री 5) भरत -एवजेनी 6) रावण – सर्गेई 7) दशरथ – आरतियों 8) कौशल्या – रति 9) सुमित्रा- नतातालया 10) कैकेई – इरीना 11) जनक- वसीली 12) सोने का हिरान – रीता 13) मिशा 14) नादेजदा 15) राक्षस सेना 16) वानर सेना ।

गीता प्रेस से वृंदावन शोध संस्थान तक…डिजिटल हो रहीं यूपी की दुर्लभ पांडुलिपियां

ज्ञान भारतम मिशन के तहत यूपी की हजारों पांडुलिपियां हो रहीं डिजिटल, 15 हजार से ज्यादा पांडुलिपियों की स्कैनिंग पूरी सदियों पुरानी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में योगी सरकार की है विशेष रुचि लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सदियों पुरानी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम तेजी से बढ़ रहा है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत प्रदेश के छह प्रमुख संस्थानों में हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सितंबर 2026 तक गीता प्रेस गोरखपुर, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान मथुरा में कुल 15,890 पांडुलिपियों से जुड़े 7,56,392 पन्नों को स्कैन किया जा चुका है। इनमें से 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ है, जबकि 14,208 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। छह संस्थानों में चल रहा डिजिटल संरक्षण का काम संस्कृति-पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'ज्ञान भारतम मिशन के तहत इन संस्थानों में अलग-अलग स्तर पर पांडुलिपियों की पहचान, स्कैनिंग, मेटाडाटा तैयार करने और डिजिटल अपलोड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पुराने दस्तावेजों को स्कैन करना नहीं, बल्कि उनमें मौजूद ज्ञान व ऐतिहासिक सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखना और भविष्य में शोध तथा अध्ययन के लिए डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है।' वृंदावन शोध संस्थान में सबसे अधिक पन्नों की स्कैनिंग मथुरा के वृंदावन शोध संस्थान में 3,161 पांडुलिपियों से जुड़े 1,93,256 पन्नों को स्कैन किया जा चुका है। यहां 2,998 का मेटाडाटा तैयार हुआ और 2,846 रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन में 2,400 पांडुलिपियों के 1,26,878 पन्नों की स्कैनिंग हुई है। यहां 2,090 मेटाडाटा तैयार किए गए और 2,023 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 1,192 पांडुलिपियों के 90,300 पन्नों को डिजिटल रूप में स्कैन किया गया है। यहां 759 मेटाडाटा तैयार करने के साथ 759 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। वहीं राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में 1,623 पांडुलिपियों से जुड़े 1,52,519 पन्नों की स्कैनिंग हुई है। यहां 1,472 मेटाडाटा तैयार किए गए और 1,410 रिकॉर्ड अपलोड हुए हैं। नागरी प्रचारिणी सभा में 6,720 पांडुलिपियों से जुड़े 61,175 पन्नों को स्कैन किया गया है। यहां 6,680 मेटाडाटा तैयार किए जा चुके हैं और 6,600 रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड हुए हैं। वहीं गीता प्रेस गोरखपुर में 794 पांडुलिपियों के 1,32,264 पन्नों की स्कैनिंग की गई है। यहां 595 मेटाडाटा तैयार हुए और 570 रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं। 'पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण से शोध होगा आसान' मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण होने से पुरानी और दुर्लभ सामग्री को समय के साथ खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इनका व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य एवं इतिहास से जुड़े लोगों के लिए इन सामग्रियों तक पहुंच आसान हो सकेगी। मेटाडाटा तैयार करने से प्रत्येक पांडुलिपि की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा रहा है।' पांडुलिपियों के जरिये ज्ञान की विरासत सहेजने की पहल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहा यह अभियान उत्तर प्रदेश की साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़ी पुरानी सामग्री को नई तकनीक के जरिए सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गीता प्रेस से लेकर नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान जैसे संस्थानों में मौजूद सामग्री का डिजिटल रूपांतरण आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ शोध और अध्ययन के नए रास्ते भी खोलेगा।'

राज्यसभा सांसद का आरोप, राहुल गांधी और विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे

बोले- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती ताकत अमेरिका समेत विदेशी शक्तियों को नहीं आ रही रास   नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में भी अस्थिरता पैदा कर सरकार गिराने की साजिश का लगाया आरोप   मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा- कांग्रेस को आज भी चाहिए अपने प्रति प्रतिबद्ध न्यायपालिका   लखनऊ भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे हैं। इनका उद्देश्य देश में अराजकता पैदा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को गिराना है। इसके लिए नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है। बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज किसी भी महाशक्ति से आंख में आंख डालकर बात करता है। भारत की यह बढ़ती ताकत अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी डीप स्टेट की इसमें मुख्य भूमिका है और कांग्रेस सहित विपक्षी दल उसके इशारे पर काम कर रहे हैं।   बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पा रही है और आगे भी सत्ता में आने की संभावना नहीं देख रही है। इसलिए अब विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती है। उन्होंने सीजेपी को भी इसी साजिश का हिस्सा बताते हुए आम आदमी पार्टी की बी टीम करार दिया। आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाना चाहते हैं।   मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का लगाया आरोप बृजलाल ने कहा कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी अपने सहयोगियों अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने पहुंचे थे। वे चुनाव आयोग और एसआईआर समेत अन्य मामलों को लेकर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलना चाहते थे। मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए ईमेल के माध्यम से संवैधानिक परंपराओं की जानकारी दी। कांग्रेस ने इस पत्र को अपने एक्स हैंडल पर सार्वजनिक कर दिया।   उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इस्तीफे की मांग की। यहां तक कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश कार्रवाई नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दें, उनका विकल्प नियुक्त कर लिया जाएगा। बृजलाल ने इसे सर्वोच्च न्यायपालिका का घोर अपमान और मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर लेते तो राहुल गांधी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद की तरह फिर कोई फर्जी नैरेटिव गढ़ लेते।   इंदिरा गांधी के दौर से कांग्रेस को चाहिए प्रतिबद्ध न्यायपालिका बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रतिबद्ध न्यायपालिका की सोच उसके पुराने इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने जस्टिस बहरूल इस्लाम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 1962 और 1968 में राज्यसभा भेजा। इसके बाद वह गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश बने। वर्ष 1980 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। बृजलाल ने आरोप लगाया कि बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मामले में राहत देने के बाद बहरूल इस्लाम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस्तीफा दिया और कांग्रेस ने 1983 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेज दिया।   उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले के फैसले के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर जस्टिस एएन रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया। इसी तरह आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर मामले में जीवन के अधिकार के पक्ष में असहमति जताने वाले जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी कर जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।   बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसे न्यायाधीशों को महत्व दिया जो सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करें। राहुल गांधी भी अपनी पार्टी की उसी पुरानी नीति के अनुसार प्रतिबद्ध न्यायपालिका चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस अब न्यायपालिका पर दबाव बनाने और विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है।

‘मुसलमानों के नेता अखिलेश नहीं, ओवैसी हैं’, ओमप्रकाश राजभर का सपा पर तीखा हमला

'ओवैसी की भीड़ देखकर गोपनीय सर्वे करा रहे अखिलेश', राजभर बोले- मुस्लिम वोटों पर सपा की पकड़ हो रही कमजोर 'यूपी में ओवैसी की सक्रियता ने अखिलेश यादव के उड़ाए होश', राजभर बोले- इस बार सपा को मुस्लिम सिखाएगा सबक 'सपा ने मुसलमानों को सिर्फ दरी बिछाने तक सीमित रखा', राजभर का अखिलेश पर हमला; बोले- अब हिस्सेदारी मांगेगा मुस्लिम समाज 'आजमगढ़ में भी अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी', राजभर का दावा- इस बार सपा का बुरा हाल होगा लखनऊ योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखकर अखिलेश यादव डरे हुए हैं और AIMIM के साथ गठबंधन के फायदे-नुकसान को लेकर सपा गोपनीय सर्वे करा रही है। राजभर ने कहा कि यूपी में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता ने सपा को चिंता में डाल दिया है। सपा से अब मुस्लिम समाज अपनी हिस्सेदारी मांग रहा है क्योंकि उसे यह एहसास हो गया है कि अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को केवल धोखा दिया है। 'मुसलमानों के नेता अब ओवैसी हैं, अखिलेश नहीं' ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी ने पहले ही अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन तब सपा ने इसपर ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब ओवैसी की रैलियों में आ रही भारी भीड़ को देखते हुए सपा गोपनीय सर्वे कराने में जुट गई है। राजभर ने कहा कि ओवैसी जिन राज्यों में सक्रियता से चुनाव लड़ते हैं, वहां मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा उनकी पार्टी की ओर जाता है। राजभर ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां RJD नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ओवैसी को हल्के में लेने की गलती की थी। राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी ओवैसी की सक्रियता सपा के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन को प्रभावित कर सकती है। 'सपा ने मुसलमानों को दरी बिछाने तक सीमित रखा' राजभर ने सपा पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में मुस्लिम विधायक, सांसद और नेता होने के बावजूद कोई अखिलेश यादव से यह मांग करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि मुस्लिम समाज के समर्थन के बदले उसे सत्ता में नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को सपा में बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी देने के बजाय उसे पार्टी के लिए काम करने तक सीमित रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज सपा को लगातार समर्थन देता रहा है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की मांग क्यों नहीं उठती? राजभर ने कहा कि ओवैसी इसी सवाल को उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज को अब केवल किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाने की राजनीति करने के बजाय अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नौकरी और सत्ता में भागीदारी पर भी ध्यान देना चाहिए। '20 प्रतिशत वाला हिस्सेदारी की बात करेगा' राजभर ने कहा कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर विधानसभा में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में है और उसे किसी दूसरे दल पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रतिनिधित्व की मांग करनी चाहिए। राजभर ने कहा कि पहले मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहता था, लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रहेगी। राजभर के मुताबिक, ओवैसी और पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब की सक्रियता से मुस्लिम मतदाताओं के सामने दूसरे राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं। आजमगढ़ में अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना ओवैसी को आजमगढ़ में करीब तीन प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन इस बार ओवैसी अभी से सक्रिय हैं। इस बार आजमगढ़ में भी सपा का बुरा हाल होगा। '2017 में जो इज्जत बची थी, वह भी चली जाएगी' राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट सपा को नहीं मिलेगा। अखिलेश यादव और सपा को लेकर मुस्लिमों में भयानक नाराजगी है। राजभर ने कहा कि इस बार के चुनाव में सपा का पूरा सफाया हो जाएगा। जो इज्जत 2017 में बच गई थी वो भी 2027 में चली जाएगी।

योगी सरकार का छात्राओं को तोहफा, पहले चरण में 25 हजार बेटियों को मिलेगी स्कूटी

 लखनऊ यूपी में छात्राओं को स्कूटी की सौगात की तारीख और नजदीक आ गई है। पहले दिसंबर में बांटने की तैयारी थी। अब दो चरणों में स्कूटी बांटी जाएगी। पहले चरण में अगले ही महीने यानी नवंबर में 20 से 25 हजार छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। स्कूटी के लिए मेधावी छात्राओं की सूची का काम लगभग पूरा हो चुका है। विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों की मेधावी छात्राओं को अगले महीने मुफ्त स्कूटी बांटे जाने की तैयारियां शासन स्तर पर तेज कर दी गई हैं। दो चरणों में 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी बांटने की तैयारी है। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी छात्राओं को स्कूटी बांटने की तैयारी है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी बांटने के लिए औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। क्यों दो चरणों में बांटने का फैसला 40 हजार तक स्कूटी खरीदने का बजट भी विभाग के पास है। फिलहाल एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी की उपलब्धता कराने में कंपनी को कठिनाई न हो इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा जाएगा। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी बेटियों को स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है। बाकी मेधावी छात्राओं को अगले चरण में दी जाएगी। नवंबर से स्कूटी वितरण की शुरुआत कर दी जाएगी। कंपनी की ओर से जैसे-जैसे डिलिवरी होगी उसके वितरण का काम भी तेजी से किया जाएगा। स्कूटी पर होगी पीएम मोदी और सीएम योगी की फोटो स्कूटी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो होगी। उत्तर प्रदेश सरकार का लोगो भी होगा। स्कूटी वितरण से विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का नामांकन बढ़ेगा। मेधावी बेटियों के नाम पहले ही विश्वविद्यालय व कॉलेजों से लेकर सत्यापन कराया गया है। कोई भी पात्र मेधावी छात्रा न छूटे इसके लिए एक-एक डाटा की जांच की जा रही है। एक अधिकारी के अनुसार 320 करोड़ रुपये का बजट भी इसके लिए दिया जा चुका है और टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर अब जल्द खरीद शुरू होगी। कंपनी को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी उपलब्ध कराने में कठिनाई न हो और वादे के मुताबिक नवंबर में वितरण शुरू हो इसके लिए दो चरणों में 40 हजार स्कूटी का वितरण किया जाएगा। हेलमेट, एसेसरीज और पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा स्कूटी देने के साथ ही सरकार इसके साथ कई चीजें मुफ्त देगी। हर स्कूटी के साथ हेलमेट और एसेसरीज भी सरकार की तरफ से दी जाएगी। इसके साथ ही पांच लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा।