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सीएम योगी ने जिलाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई का काम करते समय सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और कार्य संपन्न होते ही खोदी गई सड़कों व गड्ढों को तत्काल भरा जाए। जिलाधिकारी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पानी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। जल जीवन मिशन के जरिए करोड़ों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकरी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करें। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करें। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम को समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। टोल फ्री नंबर पर कीजिए शिकायत जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग 18001212164 टोल फ्री नंबर पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2.50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। योगी सरकार घर-घर साफ पानी पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है।

UP में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना, पूरी योजना जानें

  लखनऊ उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि राज्य में जातीय जनगणना की तैयारी की जा रही है. शीतल वर्मा ने ये भी बताया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है।  पहले फेज में 'हाउस होल्ड लेवल' यानी घरेलू स्तर पर डेटा जुटाया जाएगा. इसमें परिवारों की बुनियादी जानकारी और मकानों की लिस्ट तैयार की जाएगी. दूसरा चरण सबसे अहम चरण होगा।  दूसरे फेज की जनगणना फरवरी में शुरू होगी जिसमें 'व्यक्तिगत डेटा' का कलेक्शन किया जाएगा. इसी दौरान लोगों से उनकी जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी।  वर्मा ने जानकारी दी कि दूसरे फेज में होने वाली ये गणना, आजादी के बाद पहली बार होगी. केंद्र सरकार की नीति के तहत इस बार जातिगत आंकड़ों को जनगणना का हिस्सा बनाया जा रहा है. अब तक जनगणना में जातियों का विवरण इस तरह व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाता था।  फरवरी 2027 में होगा दूसरा चरण इसमें जनगणना एजेंट घर-घर जाकर हर मकान की स्थिति, परिवार को मिलने वाली सुविधाएं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एक मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज करेंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। इस दौरान जनसंख्या की विस्तृत गणना की जाएगी। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह प्रक्रिया पहले चरण में जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ेगी। राज्य में जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। करीब 5.25 लाख कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस बार की जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल इनमें सभी 18 मंडल आयुक्त, 75 जिलाधिकारी, 17 नगर आयुक्त, 600 जिला स्तरीय अधिकारी, 1195 चार्ज अधिकारी, 285 मास्टर ट्रेनर, 6939 फील्ड ट्रेनर के साथ लगभग 5 लाख पर्यवेक्षक और प्रगणक शामिल हैं। इस बार की जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल होगी, जो दूसरे चरण में की जाएगी। इसे आजादी के बाद पहली बार लागू किया जा रहा है। हालांकि इसके लिए अभी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार नहीं हुई है। शीतल वर्मा ने बताया कि दूसरे चरण में केंद्र सरकार की नीति के अनुसार जातीय जनगणना होगी। पहले चरण में केवल मकानों और घरेलू जानकारी का डेटा लिया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत स्तर पर विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह जनगणना आने वाले समय में विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभी एसओपी का इंतजार भले ही जातिगत जनगणना प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां हो रही हैं, लेकिन अभी इसकी एसओपी (Standard Operating Procedure) तय होना बाकी है. जातिगत जनगणना की प्रक्रिया कैसे चलेगी और किन नियमों का पालन होगा, इसके लिए एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।  नीति और डेटा सुरक्षा शीतल वर्मा ने बताया कि जातीय जनगणना पूरी तरह से केंद्र सरकार की निर्धारित नीतियों के तहत ही पूरी होगी. व्यक्तिगत डेटा कलेक्शन के दौरान प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।  जातिगत जनगणना उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. फरवरी में होने वाले दूसरे चरण पर प्रशासन और जनता, दोनों की नजरें टिकी हुई हैं. इसके जरिए राज्य की आबादी के असल जातीय आंकड़े सामने आ पाएंगे।  जानें महत्वपूर्ण बातें     जनगणना में caste census यानी जातिगत जनगणना भी होगी यह दूसरे चरण में होगा           आजादी के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना           जातिगत जनगणना दूसरे चरण में होगी।           अभी जातिगत जनगणना की प्रक्रिया sop का बनना बाकी है।           जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा का बयान।           दूसरे फेज फरवरी में होगी जातीय जनगणना।           दूसरे फेज में केंद्र की नीति के तहत होगी जातीय जनगणना।           पहले फेज में हाउस होल्ड लेवल डाटा कलेक्शन होगा।           दूसरे फेज में व्यक्तिगत डाटा कलेक्शन होगा।           अभी जातीय जनगणना की SOP नहीं की गई तय।           दूसरे फेज में आजादी के बाद पहली बार होगी जातीय जनगणना।  

RTE दाखिला विवाद, निजी स्कूलों पर बीएसए की सख्ती बढ़ी

लखनऊ राजधानी के नामी विद्यालय शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2020 (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने राजधानी के करीब 55 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है। विभाग का स्पष्ट निर्देश है, एक सप्ताह के अंदर प्रवेश न लेने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बीएसए विपिन कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एल्डिको लखनऊ पब्लिक स्कूल की अपील को खारिज करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। राजधानी में 55 ऐसे विद्यालय हैं जो आरटीई के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। विद्यालय में चयन होने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहते हैं। इन विद्यालयों को नोटिस जारी करते हुए प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं। जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय के अनुसार, राजधानी के सिटी मॉन्टेंसरी, जयपुरिया, टीपीएस, एलपीएस, स्टडी हॉल सहित 35 से अधिक विद्यालयों को पहले से नोटिस जारी किया गया है। जबकि अन्य विद्यालयों को भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चों को प्रवेश न देने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने की भी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का ये है आदेश हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की ओर से भेजे गए सभी बच्चों को प्रवेश देना निजी विद्यालयों का कर्तव्य है। आरटीई अधिनियम के तहत प्रत्येक विद्यालय में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है। नियम का पालन न करने पर सरकार को कार्रवाई का अधिकार है। 4500 बच्चे प्रवेश के इंतजार में बीएसए कार्यालय के अनुसार, राजधानी के 1600 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत प्रवेश होने हैं। अभी तक 12,000 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की प्रक्रिया जारी है। करीब 4500 ऐसे बच्चे हैं जिनका आरटीई में चयन हुआ है लेकिन निजी विद्यालय प्रवेश देने में हीलाहवाली कर रहे हैं।  

स्टेशन पर अब नहीं करनी होगी कुली से मोलभाव, ऑनलाइन बुकिंग से तय होगा फिक्स चार्ज

प्रयागराज रेलवे स्टेशनों पर अब आपको कुली के लिए इधर-उधर भटकने या उनके साथ रेट को लेकर मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल देश में पहली बार कुलियों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इस पहल से यात्रियों को ओवर चार्जिंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यात्री रेलवे के अधिकृत एप या वेबसाइट के माध्यम से अपनी ट्रेन के आगमन या प्रस्थान के समय के अनुसार कुली को पहले से ही बुक कर सकेंगे। जैसे ही यात्री स्टेशन पहुंचेगा, बुक किया गया कुली निर्धारित स्थान पर मौजूद रहेगा। इस सेवा के लिए एक पारदर्शी डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे यात्रियों को पहले से पता होगा कि उन्हें कितना शुल्क देना है। मनमाना किराया वसूलने की अक्सर रहती है शिकायत अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या भीड़भाड़ के समय कुछ कुली यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे यात्रियों और कुलियों के बीच विवाद की स्थिति भी पैदा होती है। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम शुरू होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी। वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल यात्री सुविधाओं में इजाफा होगा, बल्कि कुलियों के काम में भी अनुशासन और पारदर्शिता आएगी। जंक्शन, छिवकी से होगी शुरुआत यह सुविधा शुरुआत में मंडल के प्रयागराज जंक्शन, छिवकी, कानपुर सेंट्रल, मिर्जापुर, इटावा, अलीगढ़ जैसे प्रमुख स्टेशनों पर लागू की जाएगी। इसके सफल ट्रायल के बाद इसे अन्य मंडल के स्टेशनों में विस्तार देने की योजना है। सीनियर डीसीएम हरिमोहन का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देना ही हमारा लक्ष्य है। यात्री कुलियों की ऑन लाइन बुकिंग कर सके इस दिशा में तैयारी की जा रही है।  

SCERT की नई पहल: परिषदीय विद्यालयों में शुरू होगा दैनिक गतिविधि आधारित शिक्षण ‘अरुणोदय’

लखनऊ प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 से बच्चों को हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने पूरे वर्ष के लिए दैनिक गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया है, जिसे जल्द ही सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा। यह पहल अपने आप में अनोखी मानी जा रही है। नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार इस कैलेंडर को ‘अरुणोदय’ नाम दिया गया है। इसके तहत हर दिन किसी न किसी विषय जैसे पर्यावरण, स्वास्थ्य, महापुरुषों की जयंती, नदियां, शब्द ज्ञान, कला, कहानी-कविता, देशभक्ति और स्वतंत्रता से जुड़े प्रसंग पर बच्चों को जानकारी दी जाएगी। यह गतिविधियां सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान आयोजित होंगी। संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक बच्चों को विषय की जानकारी देंगे और उससे जुड़ी गतिविधियां भी कराएंगे। खास बात यह है कि प्रत्येक विषय के साथ क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जिससे शिक्षक अतिरिक्त जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। कैलेंडर को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के अनुसार अलग-अलग तैयार किया गया है, ताकि बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप सामग्री मिल सके।   विविध विषयों से होगा सर्वांगीण विकास कैलेंडर में बच्चों से छुट्टियों के अनुभव साझा कराने से लेकर मौसमी फल-सब्जियों के लाभ, वर्णमाला, शब्द निर्माण, विलोम शब्द, कहानी-कहानी, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक सेंस, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण, पौधरोपण, बाढ़ से बचाव, संचारी रोगों की रोकथाम, विद्यालय शिष्टाचार, वाद्ययंत्र और लोकगीतों की जानकारी भी दी जाएगी। बच्चों को अच्छी आदतें, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, जीवन मूल्य, प्रकृति, आपदा प्रबंधन, ऋतुओं का ज्ञान और खेल-खेल में विज्ञान भी सिखाया जाएगा।   अखबारों से भी जोड़ने की पहल एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए बच्चों को अखबारों से भी जोड़ा जाएगा। उन्हें नए और पुराने अखबारों की उपयोगिता, समाचारों की समझ और उनसे जुड़ी चर्चाओं के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। साथ ही गणित के डर को दूर करने के लिए खेल, पहेलियां, गणित किट और भारतीय गणितज्ञों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों का बहुमुखी विकास करना है, ताकि वे विभिन्न विषयों की समग्र जानकारी प्राप्त कर सकें। इसे जल्द ही प्रदेशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा।  

यूपी पुलिस का एक्शन, आगरा धर्मांतरण गैंग के 4 सदस्य दबोचे, STF की मदद से कार्रवाई

आगरा यूपी के आगरा में सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण में शामिल गैंग के चार और सदस्यों पर आगरा पुलिस ने शिकंजा कसा है। कार्रवाई में एसटीएफ की भी मदद ली गई। दिल्ली, राजस्थान में दबिश दी गई थी। पकड़े गए आरोपियों से तीन कलीम सिद्दीकी से भी जुड़े रहे हैं। धर्मांतरण के बाद सभी कागजात तैयार कराकर दिया करते थे। वर्ष 2025 में सदर की सगी बहनें नाटकीय अंदाज में घर से लापता हुई थीं। सदर थाने में अपहरण का मुकदमा लिखा गया था। मुकदमे में एक कश्मीरी छात्रा पर शक जाहिर किया गया था। पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो पुलिस के होश उड़ गए। मामला देशभर में फैले धर्मांतरण गैंग से जुड़ा हुआ था। गैंग में महिलाएं भी शामिल थीं। छह राज्यों में दबिश देकर एक महिला सहित 14 आरोपियों को पकड़ा गया था। गैंग का मास्टरमाइंड दिल्ली का अब्दुल रहमान निकला था। पुलिस ने पिछले दिनों कनाडा में रह रहे गैंग के एक फाइनेंसर के घर भोपाल में कुर्की की कार्रवाई की थी। पिछले साल जेल भेजे गए सभी 14 आरोपित जेल में बंद हैं। सबको सौंपे गए थे अलग काम पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि मुकदमे की विवेचना प्रचलित है। पुलिस को मोबाइल और लैपटॉप का डेटा खंगालने पर कई नाम और मिले। पुलिस ने उनके बार में साक्ष्य संकलन शुरू किया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि चारों गैंग के सक्रिय सदस्य हैं। सभी की अलग-अलग भूमिका है। कोई फर्जी कागजात तैयार करता है तो कोई धन मुहैया कराता है। कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है। ब्रेनवॉश करने में मदद करता है। कोई दिल्ली में रुकने के लिए ठिकाने मुहैया कराता है। पुलिस ने साक्ष्य संकलन के बाद दिल्ली और राजस्थान में दबिश दी। चार आरोपियों को पकड़ा। कोर्ट ने रिमांड स्वीकृत करके आरोपियों को जेल भेज दिया है। धर्मांतरण गैंग को धन मुहैया कराता था परवेज आगरा में सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण में शामिल गैंग के चार और सदस्यों को आगरा पुलिस ने पकड़ा है। पकड़े गए ईस्ट दिल्ली, जामिया नगर निवासी तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर (अहाता किदारा, नॉर्थ दिल्ली), जतिन कपूर (आदर्श नगर, वेस्ट दिल्ली) व हसन मोहम्मद (डींग, भरतपुर) को जेल भेजा गया है। हसन मोहम्मद गैंग से लंबे समय से जुड़ा हुआ है। पहले कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था। अब्दुल रहमान के संपर्क में तभी से है। पुलिस का दावा है कि आरोपित निकाहनामा और धर्म परिवर्तन के कागजात तैयार किया करता था। गैंग की मांग पर भरतपुर से दिल्ली तक आता था। तलमीज उर रहमान भी अब्दुल रहमान से जुड़ा हुआ है। उसके साथ जमात में जाया करता था। परवेज अख्तर वह व्यक्ति है जो धर्म परिवर्तन के लिए किताबें तैयार कराता था। वे किताबें लोगों को ब्रेन वॉश के लिए पढ़ने के लिए दी जाती थीं। गैंग को धन भी मुहैया कराता था। जतिन कपूर गैंग को दिल्ली में ठिकाने दिया करता था।

समग्र शिक्षा 3.0 बैठक में बड़ा फैसला, KGBV शिक्षकों की सैलरी बढ़ाई गई

लखनऊ   शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के बाद अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़़ाने वाले अंशकालिक शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। इन शिक्षकों की सैलरी (मानदेय) भी जल्द ही बढ़ेगी। इन्हें 17,000 रुपये का मानदेय मिलेगा। गुरुवार को दिल्ली में हुई समग्र शिक्षा 3.0 की उच्चस्तरीय बैठक में अंशकालिक शिक्षकों के वेतन में वृद्धि का निर्णय किया गया है। वर्तमान में कस्तूरबा के अंशकालिक शिक्षकों को ईपीएफ काट प्रतिमाह 9961 रुपये मानदेय मिलते हैं, जो जल्द 17000 रुपये कर दिया जाएगा। इससे प्रदेश भर के करीब 2,000, देशभर के 5500 से अधिक अंशकालिक शिक्षक लाभांवित होंगे। इनके वेतन का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार, शेष 40 फीसदी राज्य सरकार देती है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अंशकालिक शिक्षकों को परिषदीय विद्यालयों के अनुदेशक के समकक्ष माना जाता है और वेतन भी उन्हीं के बराबर दिया जाता था। अप्रैल 2026 से योगी सरकार ने अनुदेशकों का वेतन बढ़ाकर 17000 कर दिया है। अनुदेशकों का वेतन बढ़ने पर भी अंशकालिक शिक्षकों को लाभ नहीं मिला था। उनके लिए अब गुड न्यूज आई है। शिक्षा मित्रों-अनुदेशकों की कितनी बढ़ी है सैलरी यूपी सरकार ने एक अप्रैल से शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का वेतन बढ़ा दिया है। इस संबंध में योगी कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। शिक्षा मित्रों को 10 हजार की जगह 18 हजार रुपये वेतन मिलेगा। वर्तमान में यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में 1 लाख 42 हजार 929 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आरटीई के तहत अनुदेशकों की तैनाती की गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर 24 हजार 717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। उन्हें 9 हजार रुपये महीने मानदेय दिया जाता था। इसे बढ़ाकर अब 17 हजार रुपये कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था। कस्तूरबा विद्यालयों की खासियत बता दें कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) मुख्य रूप से शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखंडों में वंचित और कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए शिक्षा और आवासीय सुविधा प्रदान करते हैं। पहले ये विद्यालय कक्षा 6 से 8 तक के लिए थे, लेकिन अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक उच्चीकृत किया जा रहा है। इन विद्यालयों में छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा, भोजन, और अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश में 746 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। सभी को 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया जा रहा है।

लखनऊ में मई का तापमान 2 साल के निचले स्तर पर, पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम

लखनऊ दो दिन हल्की बारिश और तेज हवाओं की वजह से दिन के साथ रात का तापमान भी नीचे आया। यूपी की राजधानी लखनऊ में मई माह के दौरान दो वर्ष बाद न्यूनतम तापमान इतना नीचे आया है। अधिकतम तापमान में भी ठीक गिरावट रही। मौसम विभाग के अनुसार अब पछुआ फिर जोर पकड़ेगी और तापमान में बढ़ोतरी होगी। इसके बाद 4 से 5 मई को एक और पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश को प्रभावित करेगा। इससे बादलों की आवाजाही, हल्की बारिश या बूंदाबांदी होगी। तेज हवा भी चलेगी। मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आए बदलाव ने न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री गिराया। न्यूनतम तापमान 21.3 डिग्री दर्ज किया गया। शुक्रवार को मई माह में दो साल बाद न्यूनतम तापमान इतना नीचे आया। 2024 में इस माह के दौरान 20.4 डिग्री न्यूनतम तापमान रहा था। पिछले वर्ष मई माह का न्यूनतम पारा 21.5 तक आया था। इस साल 0.2 डिग्री और नीचे आ गया। आईएमडी लखनऊ के अनुसार दो दिन बाद फिर मौसम बदलने के आसार हैं। वहीं आज अधिकतम तापमान सामान्य से 6.1 डिग्री कम 33.3 दर्ज किया गया। पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने से शनिवार को हल्की तपिश बढ़ेगी । दिन का पारा 40 डिग्री से नीचे रहने का पूर्वानुमान है। फिर आंधी और बारिश का अलर्ट यूपी में आंधी, बारिश, ओलों की मार का सिलसिला खत्म होने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में भी ऐसा देखना पड़ेगा। मौसम विभाग ने फिर चेतावनी जारी की है। इसके मुताबिक सोमवार से फिर बदलाव की आहट है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार तक आसमान सामान्यत: साफ रहेगा। हालांकि बादलों की आवाजाही चलती रहेगी। इससे धूप और छांव का सिलसिला भी चलेगा। तापमान में अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन तीन मई से मौसम में बदलाव की शुरुआत हो सकती है। बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी हो सकती है। जबकि चार और पांच मई को दोबारा तेज रफ्तार आंधी, तूफान, बारिश के साथ ओलावृष्टि होने की आशंका जताई गई है। इस दौरान बिजली गरजने और गिरने का खतरा भी बताया गया है। लिहाजा इस दौरान बाहर निकलने की मनाही की गई है। लोगों को सुरक्षित और पक्के स्थानों में शरण लेने की सलाह दी गई है। पेड़ों, जर्जर भवन या दीवारों, बिजली के खंभों, पुलों, होर्डिंग्स, टिनशेड के नीचे शरण लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विभाग के मुताबिक 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी आ सकती है। पश्चिम यूपी में 35.8 डिग्री रहा दिन का पारा गुरुवार को दिनभर हुई बारिश के बाद अधिकतम तापमान में कमी आई है। पश्चिम यूपी में यह 35.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.0 डिग्री कम होकर 21.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। रात का पारा कम होने के कारण शाम से रात तक नमी का एहसास हो रहा है। आर्द्रता का अधिकतम प्रतिशत 67 दर्ज किया गया। 13.7 एमएम रिकॉर्ड हुई बारिश मौसम विभाग ने गुरुवार से लेकर शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक हुई बारिश को 13.7 मिलीमीटर रिकॉर्ड किया है। दिन में कई बार तेज और मध्यम स्तर की बारिश होती रही। देर रात भी तेज रफ्तार बारिश हुई। हालांकि इससे कई स्थानों पर जलभराव हो गया। यह शुक्रवार सुबह तक भरा रहा। लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

योगी सरकार श्रमिकों के साथ-साथ हर वर्ग के लिए कर रही काम: असीम अरुण

लखनऊ   योगी सरकार ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लाखों आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। यह जानकारी समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने शुक्रवार को 'अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस' के मौके पर दी। उन्होंने लखनऊ में आयोजित श्रमिक संवाद 2026 में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रमिकों के साथ-साथ हर वर्ग के लिए काम कर रहे हैं। यूपी की जीडीपी बढ़ाने में श्रमिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। जैसे-जैसे आर्थिक विकास होगा, उसी क्रम में सामाजिक विकास भी होगा। असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नए लेबर कोड्स और 'आउटसोर्स सेवा निगम' के गठन के माध्यम से सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए छुट्टियों, काम के घंटों और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनिवार्य बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कर्मचारियों का शोषण संभव नहीं होगा और उनके अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 दिन के अंदर आईडी कार्ड जारी करने के लिए कहा। इसके साथ बेहतर काम करने वालों को वार्षिक प्रमाणपत्र और इनाम देने की व्यवस्था करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि हमें श्रम कानून लागू करने का संकल्प लेना होगा।  श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य 'अंत्योदय' है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी हमारी व्यवस्था की रीढ़ हैं, और उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देना हमारी प्राथमिकता है। आज श्रमिक दिवस पर यह सुधार उन्हीं के पसीने की कीमत और उनके अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्रमिकों के बच्चों का रखा ध्यान इस दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने कहा कि देश-प्रदेश को अग्रणी बनाने में श्रमिकों का योगदान है। योगी सरकार उन्हें श्रम कार्ड, वेतन वृद्धि जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध करा रही है। 18 जिलों में अटल आवासीय विद्यालय बन चुके हैं, जिनमें हजारों श्रमिकों के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं यूपी सिडको चेयरमैन वाईपी सिंह ने कहा कि योगी सरकार में श्रमिकों का आज ही नहीं, बल्कि हर दिन सम्मान होगा। इस सरकार में उनका भविष्य पहले से बेहतर रहेगा। कार्यक्रम के दौरान श्रमिक और आउटसोर्स कर्मियों ने मंच से अपनी बातें भी साझा कीं। वहीं कार्यक्रम में चार नए श्रम कानूनों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए छुट्टियों के नियमों में व्यापक सुधार किया गया है। भारत सरकार के नए लेबर कोड्स के अनुरूप उत्तर प्रदेश में वेतन ढांचे को बनाया गया है।  'आउटसोर्स सेवा निगम' का प्रभाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए इस निगम के माध्यम से बिचौलियों के शोषण को जड़ से समाप्त किया जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी अकुशल श्रमिकों के लिए 11,000 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 13,500 रुपये से शुरू होने वाली नई दरें निर्धारित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, कहा, प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी न हो; पाइप्ड योजनाओं के साथ टैंकर आदि वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखी जाएं

लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी और इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और राहत प्रबंधन में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी तथा सभी विभाग परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाकर अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करें। शुक्रवार को कृषि, जलशक्ति, पशुधन, समाज कल्याण एवं उद्यान विभाग के मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पूर्व में सूखा प्रभावित रहे 18 जनपदों में विशेष निगरानी रखने, 15 जून से 30 जुलाई के बीच निर्धारित मानकों के अनुसार स्थिति का समयबद्ध आकलन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ से सहायता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शासन से लेकर जनपद स्तर तक कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश दिए और कहा कि आवश्यक जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और डीजीपी को उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग करने और जल संरक्षण को गति देने के लिए 30 मई तक नहरों, तालाबों एवं पोखरों की डी-सिल्टिंग पूर्ण कराने को कहा। साथ ही तालाबों से निकली मिट्टी प्रजापति समाज एवं पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराने तथा इस संबंध में जिलाधिकारियों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि राहत कार्यों के साथ आजीविका के अवसर भी सृजित हो सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ वैकल्पिक व्यवस्थाएं, जैसे टैंकर आदि, पूरी तरह तैयार रखी जाएं। वन विभाग को अभ्यारण्यों एवं पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में जल, चारा एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सभी नलकूपों को क्रियाशील रखने, समय से मरम्मत सुनिश्चित करने तथा सिंचाई हेतु निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने जल के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में जल की कमी न हो और दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। फसल सुरक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने अनुदानित बीज वितरण तथा कृषि परामर्श के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए उन्होंने नुकसान की स्थिति में समयबद्ध आकलन एवं क्लेम निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। खाद्यान्न सुरक्षा के संबंध में उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र लाभार्थियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने, पर्याप्त भंडारण बनाए रखने तथा आवश्यकतानुसार केंद्र सरकार से अतिरिक्त आवंटन प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही जमाखोरी एवं कालाबाजारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने हीट स्ट्रोक, लू एवं गर्मी जनित बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों में समुचित व्यवस्थाएं सुदृढ़ रखने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही, पशुधन की सुरक्षा हेतु निराश्रित गो-आश्रय स्थलों में पेयजल उपलब्ध कराने और पशु चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने पर भी उन्होंने बल दिया। अर्ली वेदर वार्निंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाते हुए मौसम संबंधी सूचनाएं समय पर आमजन एवं किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही 19 हजार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं आवश्यकता अनुसार लेने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हाल के आंधी-तूफान में हुई जनहानि पर दुःख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। कृषि तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद की उपलब्धता की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए, साथ ही सहकारिता विभाग को भी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। खाद वितरण में पारदर्शिता हेतु फॉर्मर रजिस्ट्री व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लागत में कमी के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। खरीफ फसल वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने नहर प्रणालियों के प्रभावी संचालन, टेल फीडिंग के माध्यम से अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने तथा जल संसाधनों के समुचित उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि नहरों का संचालन केवल हेड रीच तक सीमित न रहे, बल्कि टेल एंड तक समान रूप से पानी पहुंचे। इसके लिए फील्ड स्तर पर कड़ी निगरानी, जवाबदेही निर्धारण एवं नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए। जल की सीमित उपलब्धता की स्थिति में वैज्ञानिक एवं संतुलित प्रबंधन अपनाते हुए हेड रीच पर अनावश्यक खपत को नियंत्रित कर टेल क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। बैठक में जानकारी दी गई कि खरीफ 1434 फसली वर्ष में 11,375 टेलों के सापेक्ष 10,487 टेलों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तालाबों को भरने के अभियान में 24,153 लक्षित तालाबों में से 17,961 से अधिक को भरा जा चुका है, जो 70 प्रतिशत से अधिक प्रगति को दर्शाता है। जलाशयों में जल की उपलब्धता भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। मुख्यमंत्री ने नहरों की सिल्ट सफाई एवं रखरखाव कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि सिंचाई तंत्र की दक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना है और इसके लिए टेल फीडिंग अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ लागू किया जाए, ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।