samacharsecretary.com

रामकथा की अमूल्य धरोहर को एक छत के नीचे लाने की पहल, दुर्लभ पांडुलिपियों पर काम शुरू

 अयोध्या  सनातन संस्कृति की अमर गाथा रामकथा अब केवल भारत की भूमि तक सीमित नहीं रही। वह सदियों पहले ही देश की सीमाओं को लांघकर संसार के कोने-कोने में पहुंच चुकी थी और विभिन्न भाषाओं, लिपियों और संस्कृतियों में अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी थी। अब उन्हीं बिखरी हुई अमूल्य धरोहरों को एक छत के नीचे लाने का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के दूसरे तल पर स्थित राम नाम मंदिर में देश और विदेश में उपलब्ध रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित कराने तथा उनके डिजिटल संस्करण से आम श्रद्धालुओं को परिचित कराने की एक ऐतिहासिक योजना पर कार्य आरंभ कर दिया है। इस योजना के अंतर्गत फिलहाल तीन ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज प्रारंभ हुई है जो न केवल धार्मिक बल्कि भाषाई, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें तमिलनाडु के तंजावुर में संरक्षित एक ऐसी विलक्षण संस्कृत पांडुलिपि है जिसके श्लोकों को एक दिशा में पढ़ने पर रामकथा और विपरीत दिशा में पढ़ने पर कृष्णकथा प्रकट होती है। इसके अलावा मुगलकाल में फारसी भाषा में रची गई रामायण की पांडुलिपि और विलुप्त होने के कगार पर खड़ी ताई जनजाति के पास संरक्षित ताई भाषा की रामायण की मूल प्रति को भी प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि राम केवल एक आस्था नहीं, वे एक वैश्विक सांस्कृतिक चेतना हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्यान्वयन इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार नृपेन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में पांडुलिपि विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी की प्रथम बैठक में विशेषज्ञों की सम्मति के अनुरूप दो अलग-अलग श्रेणियों की पांडुलिपियों को प्राप्त करने का निर्णय लिया गया है। पहली श्रेणी में अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां सम्मिलित होंगी जबकि दूसरी श्रेणी में शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण रामायण की अन्य पांडुलिपियां रखी जाएंगी। इस दिशा में अभी से दुर्लभ श्रेणी की तीन अलग-अलग पांडुलिपियों की खोज प्रारंभ हो चुकी है। तेलुगू भाषा की चित्र बंध रामायण काव्य और चित्रकला का अनूठा संगम है तेलुगू भाषा की चित्र बंध रामायण। तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित विश्वप्रसिद्ध सरस्वती महल पुस्तकालय में चित्र बंध रामायण की पांडुलिपि के चतुर्थ सर्ग तक के ही अंश उपलब्ध हैं। पांचवें सर्ग के उपरांत की शेष रचना अभी तक अप्राप्त है जो इस कृति की खोज को और भी रोमांचक और आवश्यक बनाती है। इसके रचनाकार के संदर्भ में निश्चित जानकारी का अभाव है परंतु विद्वानों की मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में कवि यज्ञराज ने ताड़ पत्र पर यह अनुपम रचना की थी। यह कृति काव्य और चित्रकला का ऐसा दुर्लभ संगम है जो भारतीय साहित्य की अद्वितीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। चित्र बंध रामायण का विलक्षण तकनीकी पक्ष यह कृति मुख्यतः संस्कृत भाषा में रचित है जिसमें रामायण की कथा को विभिन्न चित्र बंधों के माध्यम से अत्यंत कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें कवि ने शब्दों को इस प्रकार व्यवस्थित किया है कि वे कमल, रथ, धनुष अथवा तलवार जैसी सुंदर आकृतियां बनाते हैं। काव्य और दृश्य कला के इस संयोजन को देखकर आज भी विद्वान और कलाप्रेमी विस्मित हो जाते हैं। इस दुर्लभ चित्र बंध रामायण का सर्वाधिक विलक्षण तकनीकी पक्ष इसका अनुलोम-विलोम काव्य है। इस पांडुलिपि के 30 श्लोक इस प्रकार अद्भुत रूप से रचे गए हैं कि उन्हें बाएं से दाएं अर्थात अनुलोम पढ़ने पर रामायण की कथा प्रकट होती है और दाएं से बाएं अर्थात विलोम पढ़ने पर श्रीकृष्ण की कथा उभरती है। इस प्रकार इसमें कुल 60 श्लोक हैं जिनमें 30 मुख्य और 30 उनके प्रतिलोम हैं। उदाहरण के रूप में एक श्लोक श्रीराम के अयोध्या लौटने की भव्य कथा सुनाता है तो उसी श्लोक को उल्टा पढ़ने पर वह श्रीकृष्ण की मनोहर स्तुति बन जाता है। यह प्राचीन पांडुलिपियों की उस गौरवशाली विधा का हिस्सा है जिसे तंजावुर के मराठा राजा सेरफोजी द्वितीय ने अपने शासनकाल 1798 से 1832 के मध्य संरक्षित कराया था। ताड़ के पत्तों पर लिखित इस पांडुलिपि का संग्रह भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी तरह का एकमात्र उदाहरण है। फारसी में रामायण की रचना 15वीं शताब्दी में अब्दुल कादिर बदायूंनी ने भी फारसी में की रामायण की रचना। राम मंदिर के दूसरे तल पर दुर्लभतम पांडुलिपियों को स्थान देने के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में एक ऐसी अत्यंत महत्वपूर्ण पांडुलिपि की सूचना प्राप्त हुई है जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अनूठा एवं बेजोड़ ग्रंथ माना जा सकता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को यह बहुमूल्य जानकारी प्रदान की कि यदि भाषाई प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर देखा जाए तो इस पांडुलिपि को निस्संदेह दुर्लभतम श्रेणी में रखा जाना चाहिए। आचार्य शास्त्री के अनुसार इस ऐतिहासिक पांडुलिपि की रचना मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में सन 1584 से 1588 ईस्वी के मध्य हुई थी और इसके रचनाकार अब्दुल कादिर बदायूंनी थे। यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि रामकथा की व्यापकता और प्रभाव किसी एक भाषा, धर्म अथवा समुदाय की सीमाओं में कभी नहीं बंधा। यह भी बताया गया कि तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बदायूंनी ने इस अमूल्य पांडुलिपि के संरक्षण के लिए इसे जयपुर नरेश को सुपुर्द कर दिया था। जयपुर नरेश इस पांडुलिपि के प्रति इतने संवेदनशील और समर्पित थे कि उन्होंने घोषणा की थी कि यदि विकट परिस्थितियों में उन्हें राजमहल छोड़कर जाना पड़ा तो वे इस पांडुलिपि को अपने साथ लेकर ही जाएंगे। आचार्य शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पूर्व में सरकारी स्तर पर इस पांडुलिपि के संरक्षण के लिए प्रयास किए थे परंतु प्रशासनिक उदासीनता के कारण वह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसीलिए उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है जो एक राष्ट्रीय दायित्व भी है। ताई भाषा की रामायण की पांडुलिपि ताई भाषा में रचित रामायण की पांडुलिपि का पुनर्लेखन कराएगा ट्रस्ट। असम से म्यांमार होते हुए चीन के सीमांत क्षेत्रों में निवास करने वाली ताई जनजाति आज विलुप्त होने के कगार पर खड़ी है। इस … Read more

नहाने के दौरान बड़ा हादसा: चंद्रावल और यमुना नदी में डूबे मासूम, गांवों में मचा कोहराम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों में डूबने की दो अलग-अलग घटनाओं में पांच बच्चों की मौत हो गई। एक ओर जहां बांदा में मंदिर दर्शन के बाद चंद्रावल नदी में नहाने उतरे तीन भाई-बहन डूब गए। वहीं दूसरी ओर कानपुर देहात में यमुना नदी में डूब रही सहेली को बचाने की कोशिश में किशोरी और एक अन्य युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। पहला मामला बांदा का है। जहां जसपुरा थाना के गौरीकलां गांव में दादी हीरामनी पत्नी के साथ मंदिर दर्शन करने गए तीन भाई-बहन नहाते समय चंद्रावल नदी में डूब गए। सूचना मिलने गोताखोर पानी में उतरे। वहीं, ग्रामीणों की मदद से 10 वर्षीय अंश, 13 वर्षीय माधुरी और 13 वर्षीय फुफेरे भाई प्रतीक को आनन-फानन में सीएचसी जसपुरा पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, 15 वर्षीय ऋषभ नदी घाट पर खड़ा रहा,इससे उसकी जान बच गई। उधर, जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। कानपुर देहात में भी डूबे किशोर-किशोरी दूसरा मामला कानपुर देहात से सामने आया है। जहां मूसानगर थाना क्षेत्र के नयापुरवा गांव के पास यमुना नदी में डूबे किशोर व किशोरी के शव सोमवार सुबह सात बजे घटनास्थल से एक किमी दूर मूसानगर के पक्का घाट के पास से बरामद हो गए। तलाश में जुटी एसडीआरएफ टीम ने पहले किशोर का व बाद में किशोरी का शव पानी से बाहर निकाला । दोनों के शव यमुना से बाहर निकलते ही उनके परिजनों के बिलखने से कोहराम मच गया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामें की कार्रवाई शुरू की। दोस्त को बचाने के चक्कर में डूबे नयापुरवा मूसानगर के रहने वाले सुनील निषाद की बारह साल की बेटी जाह्नवी उर्फ भूरी पड़ोस में रहने वाली अपनी 15 वर्षीय सहेली ज्योति के साथ रविवार सुबह यमुना में नहाने गई थी। नहाते समय दोनों गहरे पानी में जाकर डूबने लगी। वहां मौजूद गांव के ही 16 साल के अनंतराम ने यमुना में डूब रही ज्योति को तो पानी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन जाह्नवी को बचाने के प्रयास में वह गहरे पानी में जाकर खुद भी डूब गया था। मौके पर पहुंचे गोताखोरों की तलाश के बाद भी दोनों का पता नहीं चलने पर पुलिस ने एसडीआरएफ टीम को मौके पर बुलाया था। पक्के घाट के पास मिला दोनों का शव सोमवार को उनकी तलाश कर रही एसडीआरएफ टीम ने घटना स्थल से करीब एक किमी दूर मूसानगर के पक्के घाट के पास से सुबह सात बजे के करीब अनंतराम का व उसके 15 मिनट बाद जाह्नवी का शव नदी से बाहर निकाला। दोनों के शव मिलते ही उनके परिजनों के बिलखने से कोहराम मच गया। अनंतराम का शव देख उसकी मन गीता बदहवास हो गईं, जबकि भाई संतराम, बहनें मनीषा जानकी व रवीना बिलख उठी। जबकि जाह्नवी की मौत से उसकी मां विनीता व पिता सुनील बेहाल रहे। एसओ मूसानगर अमिता वर्मा ने बताया कि दोनों शवों के पंचनामे कि कार्रवाई हो रही है, पोस्टमार्टम कराने के बाद अग्रिम कार्रवाई होगी ।

ग्रामीणों को बड़ी राहत: दरियाबाद नहर पर नए पुल और सिंचाई व्यवस्था में सुधार को मंजूरी

बाराबंकी यूपी के बाराबंकी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए कुल 22 करोड़ 21 लाख 92 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इनमें दरियाबाद समानान्तर शाखा पर दो जर्जर कदम पुलों का पुनर्निर्माण और प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सुधार और क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण का कार्य शामिल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तीन दर्जन से अधिक गांवों की करीब डेढ़ लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। दरियाबाद समानांतर शाखा नहर पर बनेंगे दो पुल: दरियाबाद समानांतर नहर पर ग्राम बनियान के पास बना कदम पुल काफी जर्जर हो चुका है। इसी तरह इस नहर पर बना अचैचा कदम पुल भी जर्जर है। बनियाल पुल से भगौली, पलखा, गौरा, गजनी, थाल, खलीनगर, ससैलखिया आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन होता है। इसी तरह अचैचा पुल से मिठवारा, लहसी, भुंड,चक, कसियापुर, घतवापुर आदि गांवों के लोगों का आना जाना है। अनुमान के मुताबिक इन पुलों लाभ क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी को मिल रहा है। लेकिन यह दोनों पुल काफी जर्जर हो चुके है। जिससे हादसे का डर बना हुआ है। इसी नहर पर तालगांव का पुल भी जर्जर हो चुका है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने दरियाबाद समानांतर नहर पर जर्जर हो चुके बनियाल पुल व अचैचा पुल के पुर्ननिर्माण की स्वीकृति दी है। इस कार्य के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। लंबे समय से जर्जर हो चुके इन पुलों के कारण ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोनों पुलों के फाउंडेशन के निर्माण के लिए खोदाई का काम शुरू हो जाने से स्थानीय लोगों में उतसाह है। प्रतापगंज रजबहा की भी सुधरेगी दशा शासन ने प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सेक्शन सुधार, खड़ंजा निर्माण और किमी 17.250 पर स्थित क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण की मंजूरी दी है। इस कार्य पर नौ करोड़ 71 लाख 92 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसकी मंजूरी शासन से मिली चुकी है। इस परियोजना के तहत प्रतापगंज रजबहा के सिंचाई तंत्र को मजबूत किया जाएगा। जिससे पानी के प्रवाह में सुधार होगा और किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इन दोनों परियोजनाओं का लाभ दर्जनों गांवों की डेढ़ लाख से अधिक आबादी को मिलेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन भी अधिक सुरक्षित व सुगम होगा। स्थानीय किसानों के अनुसार नहरों और पुलों की जर्जर स्थिति के कारण वर्षों से समस्याएं बनी हुई थीं। अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग लखनऊ प्रखण्ड इंजी. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि नहरों पर पुल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया है। जहां पर पुल बनने हैं वहां पर खुदाई और पुराने पुलों को तोड़ने का काम चल रहा है। कुछ स्थानों पर रेगुलेटर व पटरी के मरम्मत का कार्य भी होना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में किया 926 करोड़ की 226 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

बदला हुआ गोरखपुर बनेगा देश के लिए विकास मॉडल: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में किया 926 करोड़ की 226 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास मुख्यमंत्री ने सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का भी किया शुभारंभ, प्रदेश के 2 करोड़ बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ सीएम बोले- गोरखपुर ने विगत 9 वर्षों में बीमारी, बदहाल बुनियादी ढांचे, जलभराव, अपराध और पहचान के संकट से निकलकर विकास, सुशासन और आधुनिक सुविधाओं के नए युग में प्रवेश किया चारों दिशाओं में कहीं भी जाएं आपको गौरव और सम्मान मिलेगा, 25 करोड़ उत्तर प्रदेशवासी आज इस नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहे हैं: मुख्यमंत्री गोरखपुर  गोरखपुर को विकास का बेहतरीन मॉडल बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में शहर ने बीमारी, बदहाल बुनियादी ढांचे, जलभराव, अपराध और पहचान के संकट से निकलकर विकास, सुशासन और आधुनिक सुविधाओं के नए युग में प्रवेश किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी नई परियोजनाओं के जरिए गोरखपुर आने वाले समय में देश के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बनकर उभरेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को गोरखपुर में 926 करोड़ रुपये की लागत से 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बदला हुआ गोरखपुर, बदलते उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की नई पहचान का प्रतीक है। जब मां स्वस्थ होगी, तभी बच्चा स्वस्थ होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर महानगर की लगभग एक हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हो रहा है। यह दिन प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक भी है, क्योंकि हम प्रदेश के सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का शुभारंभ भी कर रहे हैं। इस योजना का लाभ आने वाले समय में प्रदेश के लगभग 2 करोड़ बच्चों को मिलेगा। अगर बचपन सुरक्षित है, तो भविष्य भी सुरक्षित है। इस बचपन को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या का समाधान करना आवश्यक है। जब मां स्वस्थ होगी, तभी बच्चा स्वस्थ होगा। जो भी बच्चा पैदा होता है, उसके जीवन के प्रारंभिक हजार दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन हजार दिनों में बच्चे की उचित देखभाल की जाए, तो न केवल उस परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए एक सशक्त नींव तैयार होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चा केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज का और अंततः पूरे राष्ट्र का भविष्य होता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से प्रयागराज में 'टेक होम राशन' (टीएचआर) प्रणाली शुरू की थी। इसके तहत 4000 से अधिक महिला स्वयंसेवी समूहों द्वारा प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में प्लांट स्थापित किए गए, जहां धात्री महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक रेसिपी तैयार करके अनुपूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां टीएचआर प्लांट से सीधे वितरण संभव नहीं है, वहां नेफेड के माध्यम से सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। लगभग 2 करोड़ बच्चों को अनुपूरक पौष्टिक आहार मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि जब बच्चा तीन वर्ष का हो जाए, तो उसे आंगनवाड़ी केंद्रों में छह वर्ष की आयु तक अच्छा पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वहां खेल-खेल में सीखने, अक्षर ज्ञान प्राप्त करने और समग्र विकास के लिए बाल वाटिका तथा प्री-प्राइमरी शिक्षा के कार्यक्रम को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद में प्रवेश की आयु 6 वर्ष है और तीन से छह वर्ष तक का समय बच्चों के सीखने और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व मूल्यवान है। इसी को ध्यान में रखकर बाल वाटिका और प्री-प्राइमरी शिक्षा को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश भर में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी और बाल वाटिका के कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में लगभग 2 करोड़ बच्चे अनुपूरक पौष्टिक आहार प्राप्त कर रहे हैं। वहां अक्षर ज्ञान, खेल-आधारित शिक्षा की बेहतरीन व्यवस्था भी उपलब्ध है।  अब कोई गोरखपुर से परहेज नहीं करता मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने बदले हुए गोरखपुर को देखा है। आज से मात्र 9 वर्ष पहले गोरखपुर कैसा था? बीमारी, बिजली नहीं, सड़कों पर गड्ढे, जलभराव, मच्छर, गंदगी, बाढ़, बेरोजगारी, व्यापारियों की सुरक्षा नहीं, बेटियों के लिए उत्तम शिक्षा की व्यवस्था नहीं, किसानों के लिए कोई सुविधाएं नहीं, परंपरागत उद्यमों के संरक्षण के लिए कोई कार्यक्रम नहीं और गरीबों के कल्याण के लिए कोई योजनाएं भी नहीं। 2017 से पहले गोरखपुर में बिजली मुश्किल से 5-6 घंटे ही मिल पाती थी और उसके लिए भी सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। इंसेफेलाइटिस की बीमारी किस कदर कहर ढा रही थी, सैकड़ों बच्चों की मौत हो रही थी, यह किसी से छुपा नहीं है। पूरा महानगर गंदगी के आगोश में डूबा रहता था। एक तरफ बंद पड़ा फर्टिलाइजर कारखाना हमें चिढ़ाता था, दूसरी तरफ बीमार बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर की पहचान बन चुका था। लखनऊ जाने में 6-8 घंटे लगते थे, वाराणसी जाने में 5-6 घंटे। रामगढ़ताल गंदगी का गढ़ बना हुआ था। गोरखपुर का नाम सुनते ही लोग डर जाते थे। ऐसा लगता था मानो यह आतंक का पर्याय बन गया हो। बेटियां शाम को घर से बाहर निकलने में भी डरती थीं। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। कैसे किसी शहर का कायाकल्प होता है, कैसे विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है और कैसे एक प्रदेश व एक देश गौरव के साथ सिर ऊंचा करके चलता है, अब यह स्पष्ट दिख रहा है। आज भारत का विश्व में सम्मान बढ़ा है, उत्तर प्रदेश का सम्मान बढ़ा है और गोरखपुर का भी सम्मान बढ़ा है। अब कोई गोरखपुर से परहेज नहीं करता, दूरी नहीं बनाता। एक-एक पाई का सदुपयोग और पूर्ण जवाबदेही के साथ हो रहा विकास कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में जलभराव की समस्या का समाधान हो रहा है, युवाओं के लिए नौकरियां उपलब्ध हैं, व्यापारियों को सुरक्षा के साथ अनेक योजनाओं का लाभ मिल रहा है। … Read more

अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे की कथित हेराफेरी की जांच तेज, एसआईटी पहुंची गणना कक्ष

अयोध्या अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की जांच के लिए बनी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) पहुंच गई है। एसआईटी ने राम मंदिर परिसर स्थित गणना कक्ष में पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। नोटों की गिनती के दौरान कुछ वर्षों में तैनात कर्मचारियों के नाम पते की तस्दीक सहित ट्रस्टियों की सूची मांगी गई है। इसके आधार पर अब पूछताछ होगी। बताया जा रहा है कि राम जन्मभूमि परिसर में गणना कर्मचारी बनने के बाद बदल गई माली हालात की जांच भी होगी। कर्मचारियों के आपस की रिश्तेदारी भी खोजी जा रही है। एसआईटी में शामिल वरिष्ठ अफसरों को अपनी प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट एक सप्ताह और पूरी रिपोर्ट 15 दिन में सौंपने का निर्देश शासन ने दिया है योगी सरकार ने शनिवार को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी का नेतृत्व मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। उनके साथ आईजी लखनऊ रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री से एसआईटी गठित किए जाने का अनुरोध किया था। जांच के दायरे पर सवाल बताया जाता है कि प्रारम्भिक रिपोर्ट में जांच का दायरा चढ़ावे की धनराशि में करोड़ों की चोरी और गणना की निगरानी और इसको लेकर जवाबदेह लोगों तक सीमित रहेगा या इसके आगे भी विस्तारित हो सकता है। जांच का दायरा बढ़ा तो निश्चित ही कई उच्च पदस्थ लोगों तक जांच की आंच पहुंच सकती है। उसका कारण है कि यहां हर व्यवस्था को जितना बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश की गयी, हकीकत उसके उलट थी। सूत्र बताते हैं कि इसकी प्रमुख वजह कमीशनखोरी रही। इसी तरह दर्शन व्यवस्था में नि:शुल्क सिस्टम के बाद भी धन उगाही की शिकायतें आम रहीं। इसको लेकर कुछ लोगों की धरपकड़ भी हुई लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सुरक्षा कारणों से फोटोग्राफी पर रोक के बाद भी सोशल मीडिया में आ रही तस्वीरों को लेकर किसी की जवाबदेही नहीं है। व्यवस्था से जुड़े पदाधिकारी सशंकित एसआईटी की जांच शुरू होते ही राम मंदिर की व्यवस्थाओं में लगे संघ और विहिप के पदाधिकारी सशंकित हो गये है। उन्हें भी यह आशंका सता रही है कि जांच का दायरा बढ़ा तो उन सबकी जवाबदेही तय होगी जो संगठन के दम पर मनमर्जी चला लेते थे। इस जांच से ट्रस्ट के कर्मचारी जरूर खुश दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि काम का जिम्मा हम सबका है और ऐन वक्त पर सुपरविजन के नाम पर ऊपर से लोग बैठा दिए जाते हैं जो पहले से तय व्यवस्थाओं को अपने हिसाब से कराने का दबाव बनाते हैं। इस व्यवस्था के कारण ही रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से लेकर बाकी के समारोह में अव्यवस्थाएं हुईं। इनका यह भी कहना है कि हम लोग के निर्धारित वेतन के सापेक्ष आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों के नाम पर कंपनियों को अधिक भुगतान किया जा रहा है लेकिन आश्वासन के बाद भी हम लोगों का वेतन नहीं बढ़ रहा है और मनमाफिक व्यवस्था में धन खर्च हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में गर्मी की वापसी, 5–7 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में विक्षोभ के गुजरने के बाद रविवार को ज्यादातर जिलों में तेज धूप खिली और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस बीच सोमवार को बिहार से सटे तराई व कुछ दक्षिणी जिलों में गरज चमक के आसार हैं। क्षेत्रीय माैसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बावजूद कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर समेत कुछ दक्षिणी इलाकों में हवा में माैजूद नमी की वजह से तेज हवाएं चलने और गरज चमक के संकेत हैं। सोमवार के लिए प्रदेश के13 जिलों में 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और गरज चमक की चेतावनी जारी की गई है। रविवार को 42.4 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। उरई और प्रयागराज दोनों जिलों में 41.4 डिग्री और झांसी में 40.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। रविवार से अगले पांच दिनों में प्रदेश भर में अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री की बढ़त आएगी। साथ ही तपिश भरे दिनों की फिर से वापसी होगी इन जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज चमक की चेतावनी सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर व आस पास के क्षेत्र।   राजधानी में तीखी हुई धूप, बढ़ने लगी तपिश राजधानी में रविवार को तीखी धूप खिली। तपिश बढ़ने से अधिकतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस से ज्यादा और रात के तापमान में 5.3 डिग्री का उछाल दर्ज किया गया। माैसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो चुका है। अब आगे एक हफ्ते राजधानी में माैसम शुष्क रहने वाला है। साथ ही आने वाले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़त आएगी। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि रविवार को लखनऊ में विक्षोभ का असर खत्म हो गया है। आने वाले दिनों में धूप की तल्खी बढ़ने के साथ ही तपिश भरे दिनों की वापसी होगी। रविवार को अधिकतम तापमान 3.3 डिग्री की बढ़त के साथ 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री की उछाल के साथ 26.6 डिग्री सेल्सियस रहा।  

सीएम योगी ने लाभार्थियों को सौंपे प्रमाणपत्र, विभिन्न योजनाओं की सहायता राशि भी की वितरित

सीएम योगी ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को वितरित किए प्रमाणपत्र और सहायता राशि सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का किया शुभारंभ, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को वितरित किया नवीन अनुपूरक पुष्टाहार गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोरखपुर में 926 करोड़ रुपये की लागत से 226 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र, सहायता राशि, आवास की चाबी, आयुष्मान कार्ड तथा नवीन अनुपूरक पुष्टाहार वितरित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का शुभारंभ करते हुए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को नवीन टेक होम राशन (टीएचआर) रेसिपी एवं अनुपूरक पुष्टाहार वितरित किया। उन्होंने शेजल, सिद्धि, आंशी, सानवी और श्री जैसी नन्हीं बच्चियों को तथा सोनी देवी और अमृत देवी जैसी गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट प्रदान कर उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना की लाभार्थी रवीना मधेशिया को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सुनीता देवी और चैता देवी को आवास की चाबी एवं स्वीकृति प्रमाण पत्र सौंपे गए। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शकुंतला देवी को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया, जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। कृषि विभाग की योजनाओं के अंतर्गत कौड़ीराम क्षेत्र के बुनेल प्रजापति को कृषि परियोजना के लिए अनुदान स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया। वहीं बेलघाट क्षेत्र के जयप्रकाश मिश्रा को भी कृषि विकास से संबंधित सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों को भी सम्मानित किया। एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान के पवेलियन का शुभारंभ इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने गोरखपुर स्थित वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में नव निर्मित एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान के पवेलियन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने हॉकी प्रतियोगिता में भाग ले रहे नन्हें खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं भी हॉकी स्टिक थामकर मैदान पर स्ट्रोक लगाया और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी तथा विभिन्न उत्पादों से सुसज्जित स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने अन्नप्राशन संस्कार कार्यक्रम में शामिल छोटे बच्चों को अन्न ग्रहण कराया तथा उनकी माताओं को उपहार भेंट कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। लोकार्पण होने वाली परियोजनाएं 112 करोड़ से जिला कारागार में मेन वॉल का विस्तार कर 30 कैदियों की क्षमता वाली 4 नग बैरक एनक्लोजर वॉल का निर्माण ₹10 करोड़ से अधिक धनराशि से वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज मैं बहुउद्देश्यीय क्रीड़ा हॉल 27 करोड़ से बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम का जीर्णोद्धार ₹5 करोड़ से परिक्षेत्रीय साइबर थाने का प्रशासनिक भवन शिलान्यास होने वाली परियोजनाएं ₹49 करोड़ से अधिक धनराशि से बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों हेतु टाइप-2 के 100 आवासों का निर्माण कार्य ₹48 करोड़ से गुलहरिया में कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स कम एंटरटेनमेंट जोन का निर्माण कार्य ₹35 करोड़ से नगर निगम गोरखपुर में साहित्य पार्क का निर्माण कार्य

समाज कल्याण विभाग की नई पहल, सर्वोदय विद्यालयों और छात्रावासों में हर पेड़ को मिलेगी डिजिटल पहचान

समाज कल्याण विभाग की पहल, सर्वोदय विद्यालयों और छात्रावासों में हर पेड़ की होगी डिजिटल पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हरित विकास संकल्प को मिला नया आयाम पेड़ों को मिलेगा संस्थान की संपत्ति का दर्जा, पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेंगे संस्थान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के विजन को आगे बढ़ाते हुए समाज कल्याण विभाग ने एक अभिनव पहल की शुरुआत की है। विभाग ने अपने सभी जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों, आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों एवं अन्य संस्थानों में मौजूद पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक पेड़ को एक यूनिक पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हर पेड़ का तैयार होगा डिजिटल डाटा बैंक नई व्यवस्था के अंतर्गत विभागीय संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। प्रत्येक पेड़ को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी प्रजाति, स्थान, अनुमानित आयु तथा वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण वृक्ष परिसंपत्ति पंजिका में दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही सभी पेड़ों की फोटो लेकर उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे समय-समय पर उनकी स्थिति का आकलन करने और आवश्यक संरक्षण उपाय करने में सुविधा मिलेगी। पेड़ों को मिलेगा संस्थान की संपत्ति का दर्जा समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों को अब परिसंपत्ति के रूप में दर्ज किया जाएगा। किसी भी पेड़ की कटाई अथवा बड़े स्तर पर छंटाई बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकेगी। साथ ही प्रत्येक वर्ष इन पेड़ों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। यह व्यवस्था हरित संपदा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेंगे संस्थान समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि पेड़ हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। इसी कड़ी में विभागीय संस्थानों में वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे न केवल पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि विद्यार्थियों और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। समाज कल्याण विभाग का प्रयास है कि उसके विद्यालय, छात्रावास और अन्य संस्थान शिक्षा व सामाजिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के भी आदर्श केंद्र बनें। यह पहल प्रदेश में हरित धरोहर के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम साबित होगी।

उड़ान के साथ उछले रियल एस्टेट के दाम, नोएडा एयरपोर्ट ने बदल दी जेवर की तस्वीर

नोएडा  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आज से कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो रहा है, जो दिल्ली-एनसीआर और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. आज वो 175 किसान भी सफर करेंगे, जिनकी जमीनों का इस भव्य एयरपोर्ट के निर्माण के लिए अधिग्रहण किया गया था. इस शुरुआत के साथ ही अब जेवर और उसके आस-पास के इलाकों का न सिर्फ नक्शा, बल्कि भाग्य भी पूरी तरह बदलने जा रहा है।  नोएडा एयरपोर्ट बनने के ऐलान के बाद से ही इस इलाके में प्रॉपर्टी के दामों में तेजी आने लगी थी, और अब एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यहां रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी दोनों की डिमांड और तेजी से बढ़ने की संभावना है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले पांच सालों में यहां अपार्टमेंट के दामों में तीन गुना और प्लॉट की कीमत में 1.5 गुना बढ़ोतरी हुई है. अब जब रनवे से विमानों ने उड़ान भरना शुरू कर दिया है, तो यह क्रेडिबिलिटी रियल एस्टेट बाजार को एक नए स्तर पर ले जाएगी. आने वाले दिनों में यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और जेवर के आस-पास निवेश की एक नई लहर देखने को मिलेगी।  रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या असर हवाई अड्डे का चालू होना सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. एयरपोर्ट के चलते होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल और ऑफिस स्पेस की मांग में भारी इजाफा होगा. विदेशी और राष्ट्रीय कंपनियां इस इलाके में अपने ऑफिस खोलने को प्राथमिकता देंगी।  इसके साथ ही, जेवर एयरपोर्ट के पास 'कार्गो टर्मिनल' होने की वजह से यह पूरा बेल्ट एक ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब में तब्दील हो रहा है. इससे इंडस्ट्रियल प्लॉट्स की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के कामकाजी लोग और हाई-नेट-वर्थ इंडिजुअल्स अब यमुना एक्सप्रेसवे के आस-पास विला और प्रीमियम अपार्टमेंट्स में निवेश कर रहे हैं, जिससे रेजिडेंशियल मार्केट को भी नए पंख मिल गए हैं।  इस इलाके के रियल एस्टेट में उछाल आने की एक बड़ी वजह इसकी बेजोड़ कनेक्टिविटी योजनाएं हैं. एयरपोर्ट को फिल्म सिटी और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने के लिए पोड टैक्सी और मेट्रो नेटवर्क पर तेजी से काम चल रहा है, जिससे भविष्य में यात्रियों की राह आसान होगी और आस-पास के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की वैल्यू बढ़ेगी।  इसके अलावा, यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली, आगरा और मथुरा को सीधे जोड़ता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म दोनों को भारी बढ़ावा मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर, दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक स्टॉप जेवर एयरपोर्ट पर होने की वजह से इस पूरे बेल्ट की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की कीमत कई गुना बढ़ने का अनुमान है। 

योगी सरकार का उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी क्रम में मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, परास्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभ्यर्थी 10 जुलाई तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह पहल प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है। बीएससी योग और एमएससी योग में प्रवेश शुरू इस वर्ष से विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस) और बीएससी योग पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही दो वर्षीय एमएससी योग कार्यक्रम में भी दाखिले होंगे। खेल क्षेत्र में नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया है। विवि में बीपीईएस कोर्स 2025-26 से शुरू हो चुका है। प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत प्रॉस्पेक्टस वेबसाइट https://sportsuniup.com/ पर उपलब्ध कर दिया गया है। खिलाड़ियों और छात्रों को आवेदन के लिए लगभग एक महीने का समय दिया गया है। कई खेलों में पीजी डिप्लोमा कोर्स भी हो रहा शुरू अगर सीटों की बात करें तो बीपीईएस में 50, बीएससी योग में 40, एमएससी योग में 20 और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में 15 सीटों पर प्रवेश होंगे। इसके अलावा इस सत्र से स्कूल ऑफ कोचिंग के अंतर्गत एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, हॉकी, कबड्डी, कुश्ती और योग जैसे खेलों में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू हो रहा है। इन सभी में पीजी डिप्लोमा के लिए 15-15 सीट पर प्रवेश होगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा प्रदान की गई है। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा खेलो इंडिया, एसजीएफआई राष्ट्रीय खेल, सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विशेष अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। ये सीटें स्वीकृत क्षमता के अतिरिक्त होंगी। कुल 12 कोर्सों में होगा प्रवेश मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय में 9 डिप्लोमा, 2 स्नातक और 1 परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कुल 12 नए कोर्सों में प्रवेश फिटनेस टेस्ट के आधार पर होगा। कक्षा 12वीं के अंकों और फिटनेस टेस्ट के प्रदर्शन को मिलाकर मेरिट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा दी जाएगी। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों का समग्र विकास करना है। साथ ही इसका विजन उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाना है।