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योगी सरकार का स्वच्छ ऊर्जा मिशन रफ्तार पर, घर-घर पीएनजी पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन विस्तार अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हर घर तक आधुनिक गैस सुविधा पहुंचाने की है, जिसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।  24 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 43 गैस वितरण क्षेत्रों में 1,60,121 घरेलू पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 16,23,163 कनेक्शनों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 9.86 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष के दौरान लाखों नए परिवारों को पाइप्ड नेचुरल गैस से जोड़ना है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा का दायरा और अधिक बढ़ सके। राज्य सरकार का मानना है कि पीएनजी केवल एक गैस कनेक्शन नहीं बल्कि लोगों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पाइप्ड गैस सुविधा मिलने से उपभोक्ताओं को बार-बार गैस सिलेंडर भरवाने की आवश्यकता नहीं होती, गैस की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है तथा रिसाव की स्थिति में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी उपलब्ध रहती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में गैस वितरण कंपनियों ने लक्ष्य के अनुरूप तेजी से कार्य किया है। प्रयागराज, मेरठ, लखनऊ, मुरादाबाद, मथुरा, गोरखपुर, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, अलीगढ़, बुलंदशहर, औरैया, गौतम बुद्ध नगर तथा शाहजहांपुर सहित अनेक जिलों में कनेक्शन जारी करने का अभियान लगातार जारी है। विभिन्न कंपनियां जैसे आईओसी- अडानी गैस, टोरेंट गैस, ग्रीन गैस लिमिटेड, गेल गैस, गेल इंडिया, आईजीएल और एचपीसीएल अपने-अपने क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार और नए उपभोक्ताओं को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। योगी सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने के पीछे पर्यावरण संरक्षण भी एक प्रमुख उद्देश्य है। पाइप्ड नेचुरल गैस को पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षित, किफायती और निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश सरकार आने वाले महीनों में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का और विस्तार करने, नए शहरों और कॉलोनियों को जोड़ने तथा अधिक से अधिक परिवारों तक पीएनजी सुविधा पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी गैस वितरण कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में यह अभियान उत्तर प्रदेश को आधुनिक ऊर्जा अवसंरचना वाले राज्यों की श्रेणी में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए, जिससे प्रदेश में सतत विकास को नई गति मिल सके।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 36,103 युवाओं का प्रशिक्षण लक्ष्य जारी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की मुहिम तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में "प्रोजेक्ट प्रवीण" के अन्तर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (STT) के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि योगी सरकार का मुख्य ध्येय है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के जरिए हम राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत कर रहे हैं। इस योजना के तहत आईटी (आईटी-आईटीईएस), हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस और कृषि जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय की गई है। इससे बच्चों को प्रयोगात्मक और व्यावहारिक ज्ञान बेहतर ढंग से मिल सकेगा। इस वर्ष प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत प्रदेश भर में कुल 36,103 प्रशिक्षणार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों जैसे आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित राज्य के राजकीय विद्यालयों में सूची बद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रमुख सेक्टर्स में आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर शामिल हैं। पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे होगी। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को सख्त समय-सीमा का पालन करना होगा। प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर 15 जुलाई, 2026 तक हर हाल में कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। बैच शुरू होने के 07 कार्य दिवसों के भीतर सभी छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री का वितरण कर उसकी तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य आरंभ नहीं करता है या जनपद स्तर से किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी।

मिशन मोड में एआरपी, निपुण जिला समन्वयक, एसआरजी, ईसीसीई एजुकेटर एवं विशेष शिक्षकों की तैनाती

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता आधारित परिवर्तन की दिशा में मानव संसाधनों का सबसे व्यापक अकादमिक ढांचा तैयार कर रही है। प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल विद्यालय भवनों, स्मार्ट क्लास या आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से संभव है। इसी नीति के अनुरूप एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), ईसीसीई एजुकेटर तथा विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया है। अधिकांश जनपदों में चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि कई श्रेणियों में नियुक्तियां पूरी कर विद्यालयों तक अकादमिक सहयोग तंत्र को मजबूत बनाया जा चुका है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। एआरपी बन रहे शिक्षा सुधार की नई ताकत विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एआरपी व्यवस्था को शिक्षा सुधार का प्रमुख आधार बनाया है। एआरपी अब केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे। वे शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग, कक्षा शिक्षण में सुधार, सीखने के स्तर का विश्लेषण और विद्यालयों का सतत अकादमिक मार्गदर्शन भी करेंगे। वर्तमान प्रगति के अनुसार वाराणसी ने 100 प्रतिशत एआरपी उपलब्धता हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देवरिया और हाथरस 98 प्रतिशत, बस्ती एवं कौशाम्बी 95 प्रतिशत, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94 प्रतिशत और कुशीनगर 93 प्रतिशत उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं। वहीं अधिकांश जिलों में रिक्तियां तेजी से भरी जा रही हैं, जिससे विद्यालयों का अकादमिक सपोर्ट सिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। निपुण भारत मिशन को मिलेगा मजबूत संस्थागत आधार बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिला समन्वयक (निपुण) की नियुक्तियों को तेजी से पूरा कर रही है। 39 जनपदों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष जिलों में इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन, वित्तीय मूल्यांकन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। इन अधिकारियों के माध्यम से निपुण भारत मिशन के क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डाटा आधारित अनुश्रवण, सीखने के परिणामों के मूल्यांकन तथा शैक्षणिक योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग को नई गति मिलेगी। एसआरजी और विशेष शिक्षक देंगे गुणवत्ता सुधार को नई धार राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार और अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए एसआरजी व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में एसआरजी के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर समावेशी शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि दिव्यांग बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समान रूप से पहुंच सके। ईसीसीई एजुकेटर नियुक्तियों से मजबूत होगी बुनियादी शिक्षा नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ईसीसीई एजुकेटर की नियुक्तियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पहले चरण में अनेक जनपदों में बड़ी संख्या में एजुकेटर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में कई जिलों में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। अन्य जनपदों में तकनीकी मूल्यांकन, कार्यादेश, दस्तावेज सत्यापन, मेरिट सूची, विज्ञापन और निविदा प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच शैक्षणिक समन्वय मजबूत होगा तथा बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा। मानव संसाधनों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत परिवर्तन योगी सरकार शिक्षा सुधार को अल्पकालिक कार्यक्रम न मानते हुए दीर्घकालिक संस्थागत परिवर्तन के रूप में आगे बढ़ा रही है। एआरपी, निपुण जिला समन्वयक, एसआरजी, ईसीसीई एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की व्यापक तैनाती से विद्यालयों में अकादमिक नेतृत्व मजबूत होगा, शिक्षकों की क्षमता संवर्धित होगी, सीखने के परिणामों की नियमित निगरानी होगी और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेह शैक्षणिक व्यवस्था विकसित होगी। मजबूत मानव संसाधन, डाटा आधारित अनुश्रवण, सतत प्रशिक्षण और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गुड़-रोटी खिलाकर सीएम योगी ने की गोसेवा स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने

गोरखपुर  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा। गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश के समुचित देखभाल के निर्देश दिए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर शनिवार प्रातः काल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या में शामिल रहती है।  शनिवार सुबह भी मुख्यमंत्री, मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, थपकी देखे दुलारा और अपने हाथों से उन्हें गुड़-रोटी खिलाया। गोसेवा के दौरान गोशाला परिसर में विचरण कर रहे मोरों पर भी मुख्यमंत्री ने स्नेह बरसाया।

लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने आवास के लिए जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय भरोसा देते हुए कहा कि जरूरतमंदों के इलाज और मकान की व्यवस्था सरकार कराएगी।  जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी होना चाहिए। इस अवसर पर सीएम ने लोगों से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाएं।  जनता दर्शन में एक महिला ने सीएम योगी से कहा कि उनके पास रहने के लिए अपना मकान नहीं है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की योजना के तहत आवास दिलाया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। एम्स दिल्ली में इलाज कर रही महिला को सीएम ने राहत कोष से आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। एक अन्य महिला की इलाज संबंधी समस्या सुनने के बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उनके इलाज की व्यवस्था गोरखपुर एम्स या बीआरडी मेडिकल कॉलेज में की जाए।   जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खूब दुलारा और आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए चॉकलेट दीं। मुख्यमंत्री ने परिजनों से कहा कि वे अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें।

किराना घराने की विरासत से निकली सुर-तपस्या: गोंडा की बंकू बहनों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गोंड  एक तरफ किताबें, दूसरी तरफ भक्ति का दीप और बीच में दो ऐसी बेटियाँ जिन्होंने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो तो क्या, संकल्प बड़ा हो तो पहाड़ भी झुक जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले की श्रुतिका बंकू और रितिका बंकू आज देश के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जो स्कूल की पढ़ाई करते हुए भी भजन-कीर्तन के मंचों पर राष्ट्रीय स्तर की पहचान बना चुकी हैं। अवध की इस धरती से उठी इनकी भक्ति की आवाज़ आज रामनगरी अयोध्या से लेकर झारखंड, हिमाचल और राजस्थान तक गूँज रही है। किराना घराने की इन दो बेटियों ने अपने सुर, साधना और समर्पण से न केवल परिवार का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है。 रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि ने किया विशेष सम्मान बंकू बेटियों के नाम से देशभर में पहचानी जाने वाली इन दोनों बहनों की प्रतिभा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा रही है। हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि एवं राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने इन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। इससे पहले भी देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री इन्हें सम्मान से नवाज़ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मान और अयोध्या में सांस्कृतिक विभाग से जुड़ाव इनकी राष्ट्रीय पहचान को और मज़बूत करता है। पढ़ाई के साथ-साथ भजन-कीर्तन की साधना में भी अव्वल श्रुतिका बंकू इस समय कक्षा 12वीं और रितिका बंकू कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में जहाँ एक ओर वे अपनी पढ़ाई में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन और जागरण के मंचों पर उनकी निरंतर उपस्थिति यह साबित करती है कि सच्ची लगन हो तो शिक्षा और साधना साथ-साथ चल सकती हैं। राजस्थान के सीकर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अग्र गौरव पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि अयोध्या की पावन भूमि पर उन्हें जागरण शक्ति की उपाधि से विभूषित किया गया जो उनकी आध्यात्मिक निष्ठा का सबसे बड़ा प्रमाण है। तीन पीढ़ियों की संगीत विरासत से मिली भक्ति की शक्ति श्रुतिका और रितिका की यह प्रतिभा अचानक नहीं उभरी, इसके पीछे है तीन पीढ़ियों की अटूट संगीत साधना। दादी श्रीमती लक्ष्मी देवी और माँ श्रीमती नमिता बंकू स्वयं संगीत शिक्षा से जुड़ी हैं और वर्षों से न केवल अपने परिवार में, बल्कि समाज की अन्य बेटियों को भी संगीत का संस्कार दे रही हैं। गोण्डा के प्रतिष्ठित किराना घराने की इस विरासत ने श्रुतिका और रितिका को वह नींव दी है, जिस पर उनकी भक्ति, उनका सुर और उनका समर्पण टिका है। यही कारण है कि इनकी प्रस्तुति में केवल सुर-ताल नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक अनुभूति भी झलकती है। राम नगरी से पहाड़ों तक गूँजते हैं इनके भजन, नम हो जाती हैं श्रोताओं की आँखें अयोध्या की रामनगरी हो या हिमाचल की पहाड़ियाँ, झारखंड की धरती हो या राजस्थान का मरुस्थल, जहाँ भी ये दोनों बहनें मंच पर उतरती हैं, वहाँ का माहौल भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। राम नाम, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के भजन जब इनकी वाणी से निकलते हैं, तो श्रोताओं की आँखें नम हो जाती हैं और मन श्रद्धा से भर उठता है। घर-घर पहुँचा रही हैं सनातन की ज्योति, आने वाली पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा आज जब युवा पीढ़ी तेज़ी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है और परंपराएँ पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे समय में अवध की ये दो बेटियाँ सनातन धर्म की ज्योति को घर-घर पहुँचाने का बीड़ा उठाए हुए हैं। अपने भावपूर्ण और आध्यात्मिक गायन के ज़रिए वे यह संदेश दे रही हैं कि हमारी सनातन परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी दिशा हैं। श्रुतिका और रितिका बंकू निःसंदेह आने वाली पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं, जहाँ भक्ति, शिक्षा और संस्कार एकसाथ फलते-फूलते हैं।

भीषण गर्मी में होगी सीएम योगी की रैली, प्रशासन ने कूलर-पंखों से की विशेष व्यवस्था

 हाथरस सीएम योगी आदित्यनाथ की जनसभा रविवार की दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से शुरू होगी। मौसम विभाग की मानें तो इस वक्त गर्मी का पारा 44 के पार होगा। ऐसे में जनसभा को सफल बनाने में भाजपाइयों से लेकर प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है। सभा को करीब 20 कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को लाने का लक्ष्य दिया गया है। गर्मी से कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए ओआरएस युक्त पानी और 200 कूलर और करीब एक हजार से अधिक से पंखों का इंतजाम किया गया है। जनसभा में हर ब्लाक से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सहायक और आशा कार्यकर्ताओं को ले जाने के लिए बसों को ब्लाक स्तर पर लगा दिया गया है। हर ब्लाक से लाभार्थियों को भेजने के लिए विकास भवन के सभागार में कंट्रोल रूम खोल दिया गया है। विकास भवन के सभागार में डीएम अतुल वत्स के निर्देश पर कंट्रोल रूम खोल दिया गया जिसकी प्रभारी एसडीएम लवगीत कौर और उनके सहायक के रूप में जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेंद्र उपाध्याय की ड्यूटी लगाई गई है। करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को लैप टाप के साथ बैठाया गया है। हर कर्मचारी को जिले के ब्लाकों का दायित्व सौंपा गया है। सूत्रों का कहना है कि करीब 15 से 20 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, समूह की महिलाएं और आशा कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से लाभांवित होने वाले 39 लाभार्थियों को मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मानित करेंगे। पूरे सभा मंच के आसपास 200 कर्मी सफाई को लगा दिए हैं।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सब्सिडी से बढ़ा उत्साह, नए एक्सपोर्टर्स को मौका

 नोएडा ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में हिस्सा लेने के इच्छुक यूपी के नए निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर है। एक अप्रैल 2022 के बाद कारोबार शुरू करने वाले निर्यातकों को प्रदेश सरकार विशेष सब्सिडी के तहत बेहद रियायती दर पर स्टॉल उपलब्ध कराएगी। इसके तहत उन्हें नौ वर्गमीटर का स्टाल एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत के बजाय सिर्फ 17 हजार रुपये में मिलेगा। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद नए निर्यातकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस व्यवस्था से मुरादाबाद के करीब ढाई सौ नए निर्यातकों को लाभ मिल सकेगा। मुरादाबाद से कई देशों को मेटल के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का एक्सपोर्ट कर रहे निर्यातक मो.नाजिम का कहना है कि नए निर्यातकों को सब्सिडाइज्ड दर पर मात्र 17 हजार रुपये के स्टाल हाल संख्या 14 में उपलब्ध होना उत्साहजनक है। एक निर्यातक अधिकतम दो स्टाल प्राप्त कर सकेगा। इस प्रावधान ने कारोबार को लेकर नए निर्यातकों का हौसला फलक पर पहुंचा दिया है। हाल संख्या 15 में नियमित श्रेणी के निर्यातकों को स्टाल लगाने का मौका मिलेगा, उन्हें सीधे तौर पर सब्सिडी देय नहीं होगी। उन्हें साढ़े सात हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्टाल मिल सकेगा। इसे लेकर उद्योग के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हर साल सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहा है। नए निर्यातकों को काफी कम कीमत पर स्टाल की उपलब्धता से अपने कारोबार को काफी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। नए निर्यातकों को आगे बढ़ने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सुनहरा मौका दिया गया है। स्टालों की उपलब्धता होने पर ही एक निर्यातक को दो स्टाल मिल सकेंगे। तीसरे शो ने हजार करोड़ से अधिक का कारोबार दिया पिछले वर्ष प्रदेश सरकार के तत्वावधान में ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण आयोजित हुआ था, जिसमें मुरादाबाद के प्रतिभागियों को हाथोंहाथ छह सौ करोड़ से अधिक का कारोबार मिला था। कई निर्यातकों को विदेशी खरीदारों की तरफ से बिजनेस ऑर्डर मिले जिसके चलते मेले की वजह से कारोबार एक हजार करोड़ के पार पहुंच गया। संयुक्त निदेशक उद्योग योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कारोबार की संभावनाएं जितनी तेजी से बढ़ी हैं उन्हें देखते हुए इस बार निर्यातकों में प्रतिभाग के लिए काफी ज्यादा मारामारी देखने को मिल सकती है। भाग लेने के इच्छुक निर्यातकों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

जेवर से CM योगी का बड़ा संदेश, 75 हजार एकड़ लैंड बैंक और आसान मंजूरी के साथ निवेशकों को बुलाया उत्तर प्रदेश

 नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देश और दुनिया के निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए  आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश 75,000 एकड़ का लैंड बैंक, सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसी, इंसेंटिव और सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहा है. गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एम्बर और एसेंट-के सर्किट्स के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़ा परिवर्तन हुआ है, जिससे यह निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन गया है।  उन्होंने कहा, 'पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जेवर क्षेत्र, जो कभी पहचान के संकट से जूझ रहा था, आज पूरी तरह बदल चुका है. कानून-व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उत्तर प्रदेश आज 75,000 एकड़ के लैंड बैंक के साथ देश और दुनिया के निवेशकों का स्वागत कर रहा है.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने 36 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाई हैं, जिससे निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार क्षेत्र चुन सकते हैं और सरकार उन्हें हर संभव सहयोग दे रही है।  हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति: CM योगी योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारे पास हर सेक्टर के लिए नीति है. निवेशक यहां आकर निवेश कर सकते हैं. सरकार समय पर इंसेंटिव देती है और सिंगल-विंडो क्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध है. कोई भी निवेशक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने प्रोजेक्ट स्थापित कर सकता है और विकास की गति को तेज करने में योगदान दे सकता है.' सीएम योगी ने कहा कि एम्बर ग्रुप और दक्षिण कोरिया की एसेंट-के सर्किट्स (प्राइवेट इंडिया-कोरिया जॉइंट वेंचर) द्वारा किए जा रहे 6,045 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में और अधिक एंकर यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा।  उन्होंने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया. साथ ही केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को भी उनके मंत्रालय से समय पर मंजूरी दिलाने के लिए धन्यवाद दिया. इस कार्यक्रम में दोनों केंद्रीय मंत्रियों के साथ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।  उत्तर प्रदेश देश का MSME हब बना: CM योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हमारा उद्देश्य है कि जिन उत्पादों का आज हम आयात करते हैं, उनका निर्माण भारत में हो और उन्हें दुनिया भर में निर्यात किया जाए. भारत को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का वैश्विक हब बनना है.' उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले ही 96 लाख से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ देश का एमएसएमई हब बन चुका है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य अब भारत का मोबाइल फोन निर्माण केंद्र बन गया है, जहां देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55-60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हो रहा है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन 2047 तक भारत को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है और उस दिशा में यात्रा उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से गौतम बुद्ध नगर में, शुरू हो चुकी है. उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों की भागीदारी और उनके नागरिक कर्तव्यों का पालन बेहद आवश्यक होगा।   

मुख्यमंत्री ने किया गोरखपुर में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन, कहा- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता

सीएम फंड से जरूरतमंदों को इलाज के लिए हर साल दिए जाते हैं 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ने किया गोरखपुर में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन, कहा- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता पहले की सरकार हर जिले में पालती थी माफिया, वर्तमान सरकार हर जिले को दे रही मेडिकल कॉलेज: सीएम योगी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का उन्नयन डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता: सीएम योगी गोरखपुर,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाते हैं। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता है। वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा के विस्तार से सरकार ने प्रदेश के प्रति लोगों की धारणा को बदला है। पूर्व व वर्तमान सरकार के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि पहले हर जिले में माफिया पैदा किया गया और अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा दी जा रही है। सीएम योगी शुक्रवार को बेतियाहाता में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ दिया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन’ जैसी योजनाओं का उपहार दिया है। इन योजनाओं से प्रदेश के प्रति धारणा बदलने, नई और मजबूत पहचान बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का उन्नयन सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व की सबसे बड़ी स्कीम ‘आयुष्मान भारत’ संचालित हो रही है। इस स्कीम में जो तबके छूट गए, उन्हें यूपी सरकार ने राज्य स्तर पर कवर किया। इस योजना में लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मुफ्त मिलती है। इसके अलावा वह जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से देते हैं। बीमार थी पूर्व की सरकारों की मानसिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बिना भेदभाव सबको सुरक्षा, सम्मान और शासन की सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में एकमात्र गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज था, जो खुद ही बीमार था। वास्तव में मेडिकल कॉलेज बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की मानसिकता बीमार थी, जिन्होंने यहां की जनता को मरने के लिए छोड़ दिया था। आज वही बीआरडी मेडिकल कॉलेज बेहतरीन तरीके से संचालित हो रहा है। गोरखपुर में एम्स की भी सुविधा मिल रही है। गोरखपुर के अलावा महाराजगंज, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, आजमगढ़, गाजीपुर, रायबरेली, अमेठी, मिर्जापुर, चंदौली में मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। इन मेडिकल कॉलेज में क्लासेज के साथ हॉस्पिटल भी बेहतरीन तरीके से चल रहे हैं। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल चुकी है।  आज सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकारी अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि 2017 के पहले लखनऊ, दिल्ली, मुंबई सहित सभी बड़े शहरों में इलाज के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की लंबी कतार नजर आती थी। 2005 में गोरखपुर के जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एके गुप्ता की दुखद मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हो गई थी। तब एक भी आईसीयू बेड नहीं था। डायलिसिस की सुविधा नहीं थी, अच्छे ब्लड बैंक नहीं थे, प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं थी। आज गोरखपुर में दो दर्जन से अधिक अस्पताल ऐसे हैं, जहां आईसीयू की सुविधा है। 2007 में गोरखनाथ हॉस्पिटल में 10 बेड के साथ पहली बार आईसीयू की सुविधा शुरू हुई थी। ब्लड सेपरेटर मशीन और डायलिसिस मशीन भी पहली बार गोरखनाथ हॉस्पिटल में ही लगाई गई। आज सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं। विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा देना बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना अस्पताल और डॉक्टर की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रयास होना चाहिए हम स्वस्थ रहें। फिर भी कभी बीमारी आ गई तो उपचार का केंद्र अच्छा होना चाहिए। उपचार के अच्छे केंद्र के रूप में आज एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिए एक नई कड़ी जुड़ी है। यूपी में जो स्वास्थ्य क्षेत्र पहले की सरकारों में उपेक्षित था, आज लोगों ने उसमें निवेश करना प्रारंभ किया है।  गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे मार्कण्डेय चंद हॉस्पिटल संचालक परिवार के अभिभावक रहे पूर्व मंत्री मार्कण्डेय चंद की स्मृतियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मंत्री गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। वह किसी भी दल में रहे हों, पीठ के प्रति उनका गहरा लगाव व गहरी आस्था थी। करियर दांव पर लगाकर भी वह संबंधों को महत्व देते थे। सीएम ने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि मार्कण्डेय चंद ने बसपा सरकार में मंत्री रहते हुए भी विधानभवन में मुझे अपनी कुर्सी पर बैठने के लिए इस आशय से आग्रह किया कि उनके लिए गोरक्षपीठ सर्वोपरि है। उनके पुत्रों सीपी चंद और अरुण चंद ने एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिये उनकी स्मृतियों को जीवंत किया है। मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण किया सीएम ने हॉस्पिटल के शिलापट्ट का अनावरण करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने भ्रमण कर व्यवस्थाओं व चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिसर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया और पुष्पार्चन कर उनकी स्मृतियों को नमन किया। सीएम योगी के नेतृत्व में मिसाल बना चिकित्सा क्षेत्र: सीपी चंद उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए एमएलसी एवं हॉस्पिटल के अध्यक्ष सीपी चंद ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की मिसाल पेश कर रहा है। सीएम की प्रेरणा से वह अपने पिता स्व. मार्कण्डेय चंद के स्वप्न को साकार करने के लिए इस हॉस्पिटल का प्रोजेक्ट लेकर आए हैं। इसके संचालन में गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल का भी सहयोग मिलेगा। कार्यक्रम को सांसद रविकिशन शुक्ल ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. अरुण चंद ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, राजेश त्रिपाठी, श्रीराम चौहान, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हॉस्पिटल की चिकित्सा निदेशक डॉ. आरती चंद, कालीबाड़ी के … Read more