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नए भारत की रफ्तार का प्रतीक ‘प्रगति’, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में यूपी सबसे आगे: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

अब कैश नहीं चलेगा! इतने रुपए से अधिक की रजिस्ट्री फीस ऑनलाइन जमा करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया को और पारदर्शी व सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब 20 हजार रुपये से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन जमा कराई जाएगी। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने नया आदेश जारी कर दिया है।   सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में नकद लेनदेन को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आमजन को सहूलियत प्रदान करना है। ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था लागू होने से समय की बचत होगी और रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ कम होगी। महानिरीक्षक निबंधन ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित कार्यालय इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। नई व्यवस्था से जमीन-मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और डिजिटल होगी। यह व्यवस्था सोमवार से लागू हो गई है। पहले चरण मे आजमगढ़, बाराबंकी, रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, बरेली, अमरोहा, कानपुर नगर, फतेहपुर, देवरिया, चित्रकूट, बागपत, कासगंज, एटा, रामपुर, इटावा, महोबा, हरदोई, बस्ती, अंबेडकरनगर, जौनपुर, कौशांबी, भदोही, महाराजगंज, बहराइच और मऊ में यह व्यवस्था लागू होगी। सैनिक को आवास विकास की योजनाओं में छूट वहीं सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के सेवारत व सेवानिवृत्त कार्मिकों को नववर्ष पर बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना के तहत फ्लैट बुकिंग पर उन्हें अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है। परिषद की 274वीं बैठक में लिए गए फैसले के बाद अब सैनिकों को फ्लैट बुकिंग पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। यह सुविधा परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन मोड में शुरू कर दी गई है। वर्तमान में परिषद लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद और आगरा में रिक्त रेडी टू मूव फ्लैट्स का आवंटन कर रही है। आम नागरिकों को जहां एकमुश्त भुगतान पर 15 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं अब सशस्त्र व अर्धसैनिक बलों के कार्मिकों के लिए यह छूट बढ़ा दी गई है। आवंटन तिथि से 60 दिनों के भीतर पूर्ण भुगतान करने पर 20 प्रतिशत, 61 से 90 दिनों में भुगतान पर 15 प्रतिशत तथा 91 से 120 दिनों के भीतर भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। योजना की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित है।  

देश में सबसे ज्यादा 45 आरवीएसएफ केंद्र यूपी में संचालित, इसके बाद हरियाणा और राजस्थान

लखनऊ,  प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाहन स्क्रैपिंग में यूपी देश का नंबर एक राज्य है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राज्य में दिंसबर 2025 तक लगभग 94,094 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं जो देश में स्क्रैप वाहनों की कुल संख्या का लगभग 42 प्रतिशत है। इस मामले में यूपी के बाद हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग की नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूपी में हो रहा है सर्वाधिक आरवीएसएफ केंद्रों का संचालन डैश बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में लगभग 3.94 लाख वाहन स्क्रैप हो चुके हैं जिनमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी/व्यावसायिक वाहन हैं। देश में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसेलिटी (आरवीएसएफ) केंद्रों के मामले में भी यूपी सबसे आगे है। सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत प्रदेश में अब तक 84 आरवीएसएफ केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 45 केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनमें वाहनों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट करने से न केवल सड़कों पर प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। आरवीएसएफ केंद्रों की संख्या के मामले में हरियाणा दूसरे स्थान पर है और उसके बाद राजस्थान और गुजरात का स्थान है। पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा केंद्र सरकार की पुराने और अधिक प्रदूषण करने वाले वाहनों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने की नीति वर्तमान में देश के 21 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। लेकिन इस मामले में यूपी की सक्रियता बेजोड़ है, जहां परिवहन विभाग स्क्रैपिंग का संचालन और निगरानी सीधे तौर पर करता है। परिवहन विभाग की यह नीति पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है।

गोरक्षपीठाधीश्वर गुरुवार तड़के अर्पित करेंगे गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी

लाखों की संख्या में जुटेंगे श्रद्धालु, खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंगलवार रात से ही श्रद्धालुओं ने डाला डेरा खिचड़ी मेला की हर व्यवस्था पर खुद नजर बनाए हुए हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरुवार तड़के (15 जनवरी) को ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगे। हालांकि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात (13 जनवरी) से ही शुरू हो गया। तमाम श्रद्धालु बुधवार को भी खिचड़ी चढ़ाएंगे जबकि गुरुवार को यहां आस्था का जनसमुद्र दिखेगा। समूची प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर खिचड़ी चढ़ाने की यह अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। मान्यता है कि महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। अरुणोदय काल में मकर संक्रान्ति का महापर्व गुरुवार को मनाया जायेगा। इस दिन उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों का शंखनाद गुरुवार भोर में ही हो जाएगा। सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और जनसामान्य की आस्था, खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाएगी। मंदिर व प्रशासन की ओर से खिचड़ी महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री खुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मकर संक्रांति पर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर पूरी तरह तैयार है। समूचा मंदिर क्षेत्र सतरंगी रोशनी में नहाया हुआ है। यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया है। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। प्रशासन की तरफ से रैन बसेरों में भी पूरी व्यवस्था की गई है।

एआई से पूरी तरह बदल जाएगी गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर: डॉ. पिंकी जोवल

– उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन एआई एक्सपर्ट ने रखे अपने विचार – बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो मजबूत बनेंगी देश की स्वास्थ्य सेवाएं – एआई के जरिये शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का फर्क काफी हद तक किया जा सकता है कम   लखनऊ,  स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन मंगलवार को एआई एक्सपर्ट ने अपने विचार रखे। एक्सपर्ट बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो वह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकती है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच जो फर्क है, उसे एआई के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है। एआई का असली फायदा तब जब फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का असली फायदा तब मिलेगा, जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। अगर तकनीक इनकी मदद करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से डॉक्टरों की सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि करीब 1.80 लाख आशा कार्यकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांव और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो इनके रोजमर्रा के काम को आसान बनाएं, न की बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही इस्तेमाल कर दूरस्थ इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। एआई को सफल बनाने के लिए विभागों में तालमेल जरूरी विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों की बात हुई।  जो पहले से ही मैदान में काम कर रहे हैं, उनका मकसद है बीमारी को शुरू में ही पहचानना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही फायदा मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक जैसी और बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी। मरीज की सहमति के बिना एआई बेस्ड डाटा का न हो इस्तेमाल पैनल में शामिल एआई एक्सपर्ट ने कहा कि जब देश की करीब आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डाटा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और भरोसा ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। अगर लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे। एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहले ही पहचान सकता है। इससे आशा कार्यकर्ता समय रहते महिला को अस्पताल तक पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर जल्दी पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।     कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डॉ. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्री राम गणपति और कर्नल समीर कंवर डीजी, पाथ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।

योगी सरकार की पहल से रफ्तार पकड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में 94 नई इकाइयां स्थापित ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश, 2,586 युवाओं को मिला रोजगार 10 लाख रुपये तक बैंक ऋण और ब्याज अनुदान से बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक योजना के अंतर्गत 94 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिसके तहत ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष में योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और शेष अवधि में लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। योग्य बेरोजगार युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण इस योजना ने गांवों में उद्योग स्थापित कराकर स्थानीय युवाओं को उनके ही घर के पास रोजगार उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित एवं तकनीकी योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की बड़ी सुविधा दी है, जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4% से ऊपर का ब्याज सरकार देती है, जबकि आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार वहन करती है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से चयन योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। सामान्य वर्ग को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योगी सरकार का ग्रामीण विकास मॉडल योगी सरकार ग्रामीण विकास को केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ग्रामीण उद्योगों का नेटवर्क विकसित कर रही है। पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को सशक्त बना रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजन हो रहा है। सरकार का मानना है कि “गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा।” इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

डिजिटल शिक्षा से छात्राओं को संबल, योगी सरकार के अभियान को नई उड़ान

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए गए टैबलेट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वोदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत लखनऊ, छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हर बालिका विद्यालय को 20–20 टैबलेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके तहत कार्यक्रम में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महाराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए। प्रत्येक विद्यालय को 20–20 टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसकी सफलता के आधार पर अन्य विद्यालयों में टैबलेट वितरण का दायरा बढ़ाया जाएगा। ‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’ इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि उपस्थित रहे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ एवं डिजिटल इंडिया की भावना के अनुरूप बताया। योगी सरकार का शिक्षा व महिला सशक्तिकरण मॉडल कार्यक्रम में बताया गया कि योगी सरकार द्वारा स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, टैबलेट व डिजिटल उपकरण कौशल व करियर उन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को नई तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि बालिकाएं केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम सहित विभागीय अधिकारी एवं मदद फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।

443 IAS अफसरों की संपत्ति जानकारी लंबित, यूपी सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश

लखनऊ योगी सरकार ने आईएएस अफसरों द्वारा संपत्तियों का ब्योरा देने में हिलाहवाली करने को गंभीरता से लिया है। जानकारी नहीं देने आईएएस अफसरों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। यूपी कॉडर के 683 आईएएस अफसरों में 240 ने संपत्तियों की जानकारी दी है ओर 443 ने स्पैरो पोर्टल पर चल-अचल संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है। नियुक्ति विभाग ने इस संबंध में गोपनीय रूप से आंतरिक अलर्ट जारी किया है।   आईएएस अधिकारियों को प्रत्येक वर्ष अर्जित की गई संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से स्पैरो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना होता है। वर्ष 2025 में अर्जित संपत्तियों की जानकारी अधिकारियों को 31 जनवरी तक पोर्टल पर अपलोड करनी है। सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि कई अधिकारी संपत्तियों का विवरण देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग की ओर से आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 443 आईएएस अधिकारियों में से 12 ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर ड्राफ्ट के रूप में भर तो दिया है, लेकिन उसे अब तक अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया है। नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद जानकारी न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। दो पीसीएस अफसरों की राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग में दो पीसीएस अधिकारियों की तैनाती की है। यह तैनाती पंचायत चुनाव की तैयारियों को देखते हुए की गई है। अविनाश गौतम एसडीएम कन्नौज और अभिषेक वर्मा एसडीएम रायबरेली को राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती दी गई है।  

गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश में निहित संभावनाओं की सिर्फ बात नहीं करते, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से संभावनाओं के अनुरूप परिणाम भी देते हैं। सरकार की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश माफियामुक्त, दंगामुक्त होकर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।   सीएम योगी मंगलवार अपराह्न गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में महोत्सव के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सरकार के प्रयासों से नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। उद्यमियों, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। बहन-बेटियों को मुस्कुराते हुए स्कूल-बाजार जाने का माहौल मिल रहा है। आज किसी ने बहन-बेटियों की राह में बाधा डालने का दुस्साहस किया तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने को तैयार मिलेंगे। यह तभी संभव हो रहा है जब सरकार में जनसेवा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत धैर्य और अनुशासन है। हमने कभी धैर्य नहीं खोया। उपेक्षा हुई तो संघर्ष का रास्ता अपनाया। इंसेफेलाइटिस की समस्या पर तत्कालीन सरकारों द्वारा की जा रही उपेक्षा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तब हमने सड़कों पर आंदोलन किया और जब सरकार में आए तो पूरी जिम्मेदारी की भावना के साथ दो वर्षों में इंसेफेलाइटिस का खात्मा कर दिखाया। विकास की नई बुलंदियों पर गोरखपुर और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर और उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलंदियों पर है। 2017 के पहले भी जब देश आगे बढ़ रहा था तो गोरखपुर पीछे छूट गया था। तुलना की जाए तो 2017 के पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश और गोरखपुर में जमीन-आसमान का अंतर दिखेगा। 2017 तक प्रदेशभर की तरह गोरखपुर भी उपद्रव, गुंडागर्दी की चपेट में था। गुंडा टैक्स वसूला जाता था। सड़कें जर्जर थीं, बिजली नहीं मिलती थी। गंदगी, बीमारी और इंसेफेलाइटिस का कहर था। मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक सीएम योगी ने कहा कि मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक होते हैं। एक शरीर को अस्वस्थ करता है तो दूसरा समाज को। जब समाज हर प्रकार की स्वच्छता शारीरिक और सामाजिक, के प्रति जागरूक नहीं होता है तो उसे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के अभियान का परिणाम धरातल पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की वर्तमान और पूर्व स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी गोरखपुर माफियाराज और गुंडाराज के लिए कुख्यात था। प्रदेश की भी यही स्थिति थी। हर दूसरे-तीसरे दिन प्रदेश में दंगा होता था। व्यापारी, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। व्यापारी गुंडा टैक्स देने को मजबूर थे। इंसेफेलाइटिस बीमारी चरम पर थी और नौनिहालों को इससे बचाने के लिए कोई पुरसाहाल नहीं था। नौजवान पलायन को मजबूर थे। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के लिए जो अभियान शुरू किया, उसके परिणाम आज जमीनी धरातल पर नजर आ रहे हैं। आठ साल बाद आने वाले पहचान नहीं पाएंगे गोरखपुर सहित यूपी के शहरों को मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ साल पहले यहां आया व्यक्ति यदि आज गोरखपुर आएगा तो यहां विकास से आए बदलाव के चलते शहर को पहचान नहीं पाएगा। ऐसी ही स्थिति अयोध्या, काशी, प्रयागराज को लेकर होगी। आठ साल बाद लखनऊ आए एक व्यक्ति द्वारा बताए गए संस्मरण को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह व्यक्ति लखनऊ को पहचान ही नहीं पाए। आठ साल पहले जब वह लखनऊ आए थे तब बहुत गंदगी थी, सड़कें संकरी थीं। और, उन्हें सूर्यास्त के बाद घर से न निकलने की सलाह दी गई थी। अब वह देर रात में भी भयमुक्त होकर निकल रहे हैं। बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार है। इसी मंत्र को अपनाते हुए आज जब भारत आगे बढ़ रहा है तो उत्तर प्रदेश और गोरखपुर भी पीछे नहीं है। आज बिना मांगे विकास की योजनाएं लोगों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोई सोचता था कि क्या गोरखपुर का खाद कारखाना चल पाएगा, क्या गोरखपुर में एम्स बन पाएगा या क्या बीआरडी मेडिकल कॉलेज फिर से चिकित्सा का बेहतरीन केंद्र बन सकेगा। पर, आज ये सारी बातें हकीकत हैं। कभी अपराध के लिए बदनाम रामगढ़ताल आज बेहतरीन पर्यटन केंद्र बन चुका है। गोरखपुर में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में शानदार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों का संजाल है। 10 वर्ष पूर्व गोरखपुर से लखनऊ जाने में 8 से 10 घण्टे, अयोध्या और काशी जाने में 6 घण्टे लग जाते थे। आज शानदार रोड कनेक्टिविटी होने से गोरखपुर से लखनऊ की दूरी साढ़े तीन घण्टे में, काशी की दूरी ढाई घण्टे में और अयोध्या की दूरी डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। 2017 के पहले गोरखपुर से सिर्फ एक वायुसेवा थी, वह भी कभी कभार ही मिलती थी। आज गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों के लिए हवाई सेवा है और दूरी एक से डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। गोरखपुर में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से 50 हजार युवाओं को मिली नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना तो पिछले 8 वर्षों में गोरखपुर में हजारों करोड़ों रुपये का निवेश हुआ और इसके जरिए 50 हजार युवाओं को नौकरी मिली। यदि यह निवेश नहीं होता तो इन युवाओं को पलायन करना पड़ता। जबकि आज उन्हें अपने क्षेत्र में ही नौकरी मिल गई है। पहले गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय था, आज चार विश्वविद्यालय हैं। गोरखपुर में प्रदेश सरकार का होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी बन गया है। अटल आवासीय विद्यालय में गरीबों के बच्चों को मुफ्त अत्याधुनिक शिक्षा प्राप्त हो रही है। उपलब्धियां विरासत के साथ विकास यात्रा का शो-केस सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश की उपलब्धियां विरासत के साथ विकास की यात्रा का शो-केस हैं। इनकी शो-केसिंग … Read more

प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने, 5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य

  हाई स्किल रोजगार के सृजन की ओर बढ़ रहा है प्रदेश, थमेगा प्रतिभा पलायन लखनऊ,  उत्तर प्रदेश तेजी से विकसित होती अवसंरचना के कारण वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) निवेश की दृष्टि से एक उभरता हुआ गंतव्य बन गया है। पिछले नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश नॉलेज और सर्विस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी मजबूती से अपने कदम बढ़ा रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है की आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके माध्यम से प्रदेश के पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।    उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के माध्यम से योगी सरकार ने जिस नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाया है उससे वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है। इनमें नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी सबसे प्रमुख थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने स्पष्ट ढांचा तैयार किया है, जिससे निवेशकों को शुरुआत से ही नियम शर्तें और दायित्व समझ में आ सकें। इससे भरोसे का वातावरण बना है, निर्णय लेने की गति तेज हुई है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में इस समय लगभग 90 जीसीसी हैं। भूमि आधारित प्रोत्साहन, निवेश की शुरुआती लागत को घटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार की सोच है कि जब निवेशक को शुरुआती चरण में संरचनात्मक सहयोग मिलेगा तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा। यही कारण है कि अस्थायी ऑफिस या किराए की व्यवस्था के स्थान पर स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत और स्थिर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रदेश सरकार का जोर केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है, जिससे परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकें। निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश अब परिणाम देने वाला राज्य है जहाँ पर निवेश करना फायदेमंद है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के जरिये प्रदेश में हाई वैल्यू रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त होने का रास्ता मिल रहा है। इससे न केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता सुदृढ़ होगी बल्कि प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रूप से नियंत्रण संभव होगा। विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।