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राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में 75 जनपदों के 1651 प्रतिभागी लेंगे भाग

योगी सरकार के कौशल अभियान को मिलेगी गति, 12 जनवरी से होगा शुभारंभ तीन चरणों में होगी प्रतियोगिता, 20 स्किल्स में दिखेगी युवाओं की दक्षता राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रेष्ठ प्रतिभाओं का किया जाएगा चयन शंघाई, चीन में आयोजित होने वाली विश्व कौशल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का भी प्राप्त हो सकेगा अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक एवं रोजगारपरक कौशल से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता का आयोजन 12 जनवरी 2026 से किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता प्रदेश के 75 जनपदों से चयनित 1651 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ 20 विभिन्न स्किल्स में आयोजित होगी। तीन चरणों में होगी प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का युवा तकनीकी रूप से दक्ष, नवाचारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो। राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता युवाओं की प्रतिभा को पहचान देने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह प्रतियोगिता इंडिया स्किल्स कंपटीशन–2026 की चयन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता तीन चरणों में 23 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी, जबकि 24 जनवरी 2026 को एक समारोह में चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। पहले चरण में 570 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने जानकारी दी कि 12 एवं 13 जनवरी 2026 को आयोजित प्रथम चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से लगभग 570 प्रतिभागी प्रतिभाग करेंगे, जो एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, वेल्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन टेक्नोलॉजी, सीएनसी मिलिंग एवं सीएनसी टर्निंग सहित 6 स्किल्स में अपनी दक्षता का प्रदर्शन करेंगे। प्रथम दिन प्रतिभागियों को विशेषज्ञों द्वारा उनकी स्किल से संबंधित ओरिएंटेशन, वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता के प्रारूप की जानकारी तथा उन्नत मशीनों पर अभ्यास कराया जाएगा, जबकि वास्तविक प्रतियोगिता 13 जनवरी 2026 को आयोजित होगी। श्रेष्ठ प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मौका उन्होंने बताया कि प्रथम चरण की प्रतियोगिता लखनऊ स्थित आईटीआई अलीगंज, आईटीआई मोहनलालगंज, आईटीओटी, रेमंड सेंटर, राजकीय पॉलिटेक्निक, आईटीआई चारबाग, पॉलिटेक्निक (महिला) एवं सीआईपीईटी सहित विभिन्न संस्थानों में आयोजित की जाएगी। प्रत्येक चरण में प्रतिभागियों की कौशल दक्षता, नवीनता, रचनात्मक सोच एवं प्रदर्शन क्षमता का निष्पक्ष मूल्यांकन कर प्रदेश की श्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ शंघाई, चीन में आयोजित होने वाली विश्व कौशल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का अवसर प्राप्त हो सके।

निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शी प्रवेश पर ही मिलेगा छात्रवृत्ति का लाभ

पात्र विद्यार्थियों के हित में योगी सरकार का बड़ा कदम नियमावली-2023 में संशोधन, अब केवल वास्तविक पात्रों को मिलेगा फायदा मैनेजमेंट कोटा और स्पॉट एडमिशन के दुरुपयोग पर लगेगी सख्त रोक लखनऊ,  पात्र विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का वास्तविक लाभ दिलाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नियमावली-2023 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। यह संशोधन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों पर भी समान रूप से लागू होंगे। यह योजना समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। योगी सरकार का यह कदम निजी शिक्षण संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ वास्तविक पात्र विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा का प्रभावी प्रयास माना जा रहा है। योजना के दुरुपयोग पर लगेगी प्रभावी रोक समाज कल्याण उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि संशोधन का मुख्य उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया को तकनीकी रूप से पारदर्शी एवं स्पष्ट बनाना है, ताकि पात्र विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिल सके। इससे मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन तथा अन्य गैर-पारदर्शी प्रवेश प्रक्रियाओं के माध्यम से योजना के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी। अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के लिए नई व्यवस्था संशोधित नियमों के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक अथवा तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को योजना का लाभ तभी मिलेगा, जब उनका प्रवेश पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ हो। इसके तहत संस्थान द्वारा सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित करना, रैंक सूची तैयार करना, चयन सूची प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। साथ ही छात्रों से केवल सक्षम प्राधिकारी अथवा शुल्क नियामक समिति द्वारा अनुमोदित शुल्क ही लिया जाएगा। सामान्य वर्ग के छात्रों को भी मिलेगा समान लाभ संशोधित नियमों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा, बशर्ते उनका प्रवेश पारदर्शी प्रक्रिया के अंतर्गत हुआ हो और उनसे केवल अनुमोदित शुल्क ही वसूला गया हो। मैनेजमेंट कोटा और स्पॉट एडमिशन पर सख्ती उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन या किसी भी प्रकार की गैर-पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्रों को योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। साथ ही संस्था द्वारा निर्धारित से अधिक फीस वसूलने की स्थिति में भी लाभ देय नहीं होगा।

योगी सरकार की पुलिस का यूपीकॉप एप बना आमजन का सारथी

घर बैठे आमजन एफआईआर समेत 27 सुविधाओं का उठा रहे लाभ यूपीकॉप एप से थाने के चक्कर लगाने से आमजन काे मिली मुक्ति एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में दर्ज हुई उल्लेखनीय कमी लखनऊ, योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में स्मार्ट पुलिसिंग को लेकर कई कदम उठाए हैं। योगी सरकार की यह मुहिम पुलिस से लेकर आमजन के लिए बड़ी राहत और भरोसे का माध्यम बन गयी है। योगी सरकार की यूपी पुलिस का यूपीकॉप एप और सिटीजन पोर्टल आज प्रदेशवासियों के लिए “डिजिटल पुलिस स्टेशन” की तरह काम कर रहा है। प्रदेशवासी एप के माध्यम से न सिर्फ घर बैठे एफआईआर दर्ज करा रहे हैं बल्कि 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ बिना थाने गए उठा रहे हैं। 50 लाख से अधिक लोगों ने एप को किया डाउनलोड, 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर डाउनलोड की गई डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए टेक्नोलॉजी से जोड़ा है। उनकी दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि आज यूपी पुलिस तकनीक के जरिये आम जनमानस की सेवा में नई मिसाल कायम कर रही है। यूपीकॉप एप ने थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। वहीं एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि एप के जरिए लोग ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने, एफआईआर की कॉपी डाउनलोड करने, खोये सामान (Lost Article)की रिपोर्ट दर्ज कराने, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन समेत 27 प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। अब तक 50 लाख से अधिक यूजर्स एप को डाउनलोड कर चुके हैं। वहीं एप के माध्यम से 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर डाउनलोड की जा चुकी हैं जबकि 7.3 लाख से अधिक लोगाें ने खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज करायी है। यह आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल पुलिसिंग की सोच के महत्व को दर्शाते हैं। एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में दर्ज की गई भारी कमी डीजीपी ने बताया कि यूपी कॉप एप में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसमें रीयल-टाइम नोटिफिकेशन के जरिए आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की तुरंत जानकारी मिल रही है। यह एप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर रहे हैं। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से लोकेशन ट्रैकिंग और एसओएस बटन जैसी सुविधाओं को भी अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा एप पर नजदीकी पुलिस स्टेशन को मैप पर देखने की सुविधा भी दी गई है, जो आपात स्थिति में काफी उपयोगी साबित हो रही है। एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भारी कमी आयी है। वर्तमान में चरित्र सत्यापन में लगभग 6 दिन का समय लग रहा है जबकि पहले इसमें 8 दिन लगते थे। इस तरह किरायेदार सत्यापन में करीब 8 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 24 से 25 दिन लगते थे, कर्मचारी सत्यापन में करीब 5 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 13 दिन लगते थे।इसके साथ ही योगी सरकार का पब्लिक ग्रेवांस रिव्यू पोर्टल भी आमजन के लिए प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। पोर्टल के जरिए आमजन अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिनकी नियमित समीक्षा और समयबद्ध निस्तारण भी किया जा रहा है। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ी है और शिकायतकर्ताओं को यह भरोसा मिला है कि उनकी बात सुनी जा रही है। “यूपीकॉप ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘डिजिटल पुलिस स्टेशन’ है, जो नागरिकों की शिकायतों और सेवाओं के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था देता है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम सेवा-प्रक्रियाओं का मानकीकरण कर रहे हैं—ताकि हर आवेदन पर समान गति, समान पारदर्शिता और निश्चित समय-सीमा सुनिश्चित हो। टेक्नोलॉजी-आधारित जनशिकायत निवारण से पुलिसिंग अधिक जनकेंद्रित और जवाबदेह बन रही है—यही स्मार्ट पुलिसिंग का वास्तविक अर्थ है।” राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश

यूपी में बवाल: राम मंदिर पर आपत्तिजनक पोस्ट के बाद हिंदूवादी नेताओं पर हमला, कई बाइक क्षतिग्रस्त

फिरोजाबाद यूपी के फिरोजाबाद में पुलिस के सामने ही हिंदू वादी नेताओं पर मुस्लिम समाज के लोगों ने पथराव कर दिया। हमलावरों ने बाइकों में भी तोड़फोड़ की। दरअसल कुछ दिन पहले राम मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर डौरी गांव के एक युवक ने अश्लील टिप्पणी की थी। इसको लेकर हिंदूवादी नेताओं में नाराजगी थी। इस संबंध में वह आरोपी से बातचीत करने के लिए पहुंचे थे। पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। गांव के लोगों ने पुलिस और हिंदूवादी नेताओं को चारों तरफ से घेर लिया और फिर उन पर पथराव शुरू कर दिया। किसी ने लोगेां ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। अराजक तत्वों ने हिंदूवादी नेताओं की बाइक भी तोड़फोड़ दी। पथराव में कुछ लोग चुटैल भी हुए हैं।   बताया जाता है कि नारखी के गांव डौरी निवासी राशिद नामक युवक ने अयोध्या के राममंदिर को लेकर बीत दिनों आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इसकी जानकारी जब राष्ट्रीय बजरंग दल के पदाधिकारियों को मिली तो राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष शुभम प्रताप सिंह के साथ में अन्य कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर 12 बजे वह गांव पहुंच गए। जानकारी मिलने पर थाना नारखी से एक दरोगा एवं कुछ सिपाही भी पुलिस की गाड़ी में पहुंच गए। आरोप है कि गांव में जब युवक द्वारा की गई अश्लील पोस्ट के संबंध में राष्ट्रीय बजरंग दल के पदाधिकारी बातचीत कर रहे थे। इस दौरान ही समुदाय विशेष के लोगों ने चारों तरफ से घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। पथराव होते ही यहां पर भगदड़ मच गई। हिंदूवादी संगठन से जुड़े हुए पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता खेतों की तरफ दौड़े तो मौके पर मौजूद पुलिस को भी अपना बचाव करना पड़ा। इस दौरान गांव में रह गई हिंदूवादी नेताओं की बाइक में भी कुछ अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ की। पुलिस कर्मियों ने इसकी जानकारी अफसरों को दी। पथराव की सूचना पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। वहीं सीओ टूंडला अमरीश कुमार ने भी मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की। तनावपूर्ण माहौल देखते हुए फोर्स तैनात इधर घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए थाना रजावली का पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। गांव में गलियों के बाहर पुलिस का पहरा है तो लोग घरों में छिपे हुए हैं। वहीं बताया जाता है कि कई पुरुष घटना के बाद घर से दूर चले गए हैं, ताकि कहीं पुलिस कार्रवाई में उनका नाम न शामिल हो जाए। मिश्रित आबादी वाला गांव है डौरी थाना नारखी का गांव डौरी मिश्रित आबादी वाला गांव है। एक तरफ यहां पर समुदाय विशेष की आबादी है तो दूसरी तरफ हिंदू आबादी है। यह पूरी घटना समुदाय विशेष की आबादी वाले क्षेत्र में घटी। थाने पर एकत्र हुए हिंदूवादी गांव में पथराव के बाद किसी तरह से खुद को बचाकर निकले हिंदूवादी थाना नारखी पर पहुंचे। वहीं जैसे ही लोगों को इस घटना की जानकारी मिली तो धीरे धीरे यहां पर हिंदू नेताओं की भीड़ बढ़ने लगी। पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारियों से बात कर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं।  

यूपी पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन के प्राणों की रक्षा का अभिनव प्रयोग करने वाली बनी विश्व की प्रथम पुलिस एजेंसी

– नई दिल्ली में आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट की अभिनव पहल के लिए वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से किया गया सम्मानित   – स्कॉच अवार्ड की दो अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत होने वाली योगी सरकार की यूपी पुलिस बनी देश की एक मात्र पुलिस बल      लखनऊ,  योगी सरकार के नाम शनिवार को एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गयी। योगी सरकार की यूपी पुलिस को नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट से संबंधित अभिनव पहल को वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से सम्मानित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम  “Governing Viksit Bharat” रही। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किया जाता है।      105वें SKOCH समिट कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण को पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे उनके द्वारा नामित अधिकारियों क्रमशः ICCC Mahakumbh–25 के तत्कालीन प्रभारी आईपीएस अमित कुमार एवं Meta Suicidal Alert का अवॉर्ड पुलिस महानिदेशक के जनसम्पर्क अधिकारी राहुल श्रीवास्तव तथा सत्या यादव, डायरेक्टर आउटरीच, साउथ एशिया फेसबुक (मेटा) द्वारा ग्रहण किया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक-समर्थ, संवेदनशील एवं जनोन्मुख पुलिसिंग के लिए लगातार दिशा-निर्देश एवं संसाधन प्रदान किये जा रहे हैं। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरुप प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पुलिसिंग में उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही यूपी पुलिस द्वारा तकनीकी नवाचारों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस वर्ष प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड-25 यूपी पुलिस को मिलना इसका जीता जागता उदाहरण है। यह सम्मान जनसुरक्षा एवं जीवन संरक्षण के क्षेत्र में यूपी पुलिस द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों, उत्कृष्ट सरकारी सेवाओं एवं प्रभावशाली कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मान्यता को दर्शाता है।      Integrated Command and Control Center(ICCC): महाकुंभ–25 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुचारू संचालन और सुरक्षा के प्रति यूपी पुलिस की गहरी प्रतिबद्धता के दृष्टिगत आईसीसीसी को एक नर्व सेंटर / नियंत्रण हब के रूप में विकसित किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा अन्य कटिंग-एज टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया ताकि मेले के दौरान जनमानस की सेवा, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, आपातकालीन सेवाएं और इंटर-एजेंसी समन्वय को सर्वोत्तम स्तर पर संचालित किया जा सके। महाकुंभ-25 में आईसीसीसी ने इस प्रकार अपना विशिष्ट योगदान दिया – AI-driven प्रणाली के माध्यम से crowd estimation, व्यक्ति-सुरक्षा और यातायात प्रबंधन। – एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC)के ज़रिए 24X7 निगरानी, शिचुएशन रूम, आपातकालीन मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय-निर्धारण। – डिजिटल-गवर्नेंस एवं स्मार्ट टेक्नोलॉजी के समावेश से श्रद्धालुओं की सहायता के लिए "चैटबॉट / मास मैसेजिंग", ऐप-आधारित सपोर्ट। – भीड़-प्रबंधन, डीजास्टर-रेडीनेस और विविध एजेंसियों (पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, अग्नि एवं आपदा प्रबंधन आदि) के बीच बेहतर तालमेल। Meta Suicidal Alert: यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेन्टर द्वारा यह पहल Meta कंपनी के सहयोग से विकसित की गई है। इसके तहत फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट किए जाने की स्थिति में Meta द्वारा तत्काल पुलिस मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल एवं फोन कॉल के माध्यम से अलर्ट भेजा जाता है। पुलिस मुख्यालय में स्थापित 24X7 समर्पित डेस्क, जो यूपी एसटीएफ सर्वर से एकीकृत है, पीड़ित की लोकेशन का त्वरित पता लगाकर संबंधित जनपद को सूचना प्रेषित करती है। इसके बाद स्थानीय पुलिस द्वारा पीड़ित एवं उसके परिजनों से संपर्क कर समय रहते सहायता, रेस्क्यू एवं काउंसिलिंग प्रदान की जाती है तथा अपने अधिकार-क्षेत्र में रहते हुए पीड़ित की समस्या के समाधान का भी प्रयास किया जाता है। 1 जनवरी-23 से 31 दिसम्बर-25 के मध्य Meta से प्राप्त 1,802 अलर्ट के माध्यम से कुल 1,805 व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इन बचाए गए 1,805 लोगों में से 1,389 पुरुष एवं 416 महिलाएं शामिल हैं। इन एज ग्रुप के लोगों को बचाया गया – 13–18 वर्ष आयु वर्ग: 623 व्यक्ति                                                                                   – 19–25 वर्ष आयु वर्ग: 905 व्यक्ति – 26–35 वर्ष आयु वर्ग: 190 व्यक्ति – 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग: 87 व्यक्ति आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में कांउसिलिंग की नवीन पहल यूपी पुलिस द्वारा त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के प्राण की रक्षा तत्समय कर ली जाती है, लेकिनभविष्य में आत्महत्या संबंधी विचारों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ऐसे व्यक्तियों को निरंतर एवं प्रभावी कांउसिलिंग की आवश्यकता रहती है। ऐसे में पुलिस महानिदेशक द्वारा नवीन पहल करते हुए आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में जनपदीय मिशन शक्ति केन्द्र एवं 1090 के टेली-कॉउंसलर के माध्यम से पीड़ित की कांउसिलिंग के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

‘आभार प्रधानमंत्री जी, डबल इंजन सरकार ने बदल दी हम महिलाओं की जिंदगी’

यूपी की एक  आम महिला ने लिखी मोदी को भावनात्मक चिट्ठी, बताया कि उज्ज्वला योजना से कैसे आया उनकी जिंदगी में बदलाव जवाब में पीएम ने जताया आभार, कहा- ‘करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद एवं नेह मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, सबसे बड़ी ताकत’ लखनऊ, हमारे प्रयासों से आपके जीवन में जो सुखद बदलाव आए हैं, उन्हें पत्र के ज़रिये मुझसे साझा करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद एवं नेह मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, सबसे बड़ी ताकत है। मुझे विश्वास है कि आप सभी का सहयोग एवं योगदान विकसित भारत के निर्माण में बहुमूल्य सिद्ध होगा। ये शब्द हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पत्र के, जो उन्होंने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में रहने वाली एक सामान्य घरेलू महिला अरुणा श्री को उनके पत्र के उत्तर में आभार व्यक्त करते हुए लिखे। प्रधानमंत्री जी का यह पत्र अरुणा श्री के उस पत्र के आभार स्वरूप लिखा गया है, जिसमें अरुणा ने विकसित भारत की असली तस्वीर रखते हुए डबल इंजन सरकार की ओर से चलाई जा रही उज्ज्वला योजना से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के संदर्भ में लिखा था। अरुणा ने पत्र में भावनात्मक अनुभव व्यक्त करते हुए लिखा कि उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी। उन दिनों रसोई गैस कनेक्शन और एलपीजी सिलेंडर मिलना आसान नहीं था। वर्षों इंतज़ार, सिफ़ारिशें, गैस बुकिंग के लिए लंबी कतारें और भरा सिलेंडर पाने के लिए एजेंसी के चक्कर आम बात थी। कई बार मजबूरी में ब्लैक में गैस ख़रीदनी पड़ती थी, जिससे आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव दोनों बढ़ जाते थे। लेकिन 2014 के बाद उज्ज्वला योजना के आने से मुफ़्त गैस कनेक्शन, मोबाइल से बुकिंग, घर पर सिलेंडर डिलीवरी और सब्सिडी के सीधे बैंक खाते में आने जैसी व्यवस्थाओं से प्रदेश की सामान्य महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अरुणा श्री ने अपने पत्र में हाल की एक छोटी-सी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख किया। एक दिन भोजन बनाते समय अचानक गैस खत्म हो गई। पहले ऐसे हालात में पूरा काम ठप हो जाता था, लेकिन उनके पति के एक फ़ोन पर मात्र 15 मिनट के भीतर भरा हुआ सिलेंडर घर पहुँच गया और भोजन समय पर तैयार हो सका। अरुणा जी ने पत्र में लिखा, भले ही यह छोटी घटना लगे, लेकिन इन छोटे-छोटे सुधारों ने आम महिलाओं के जीवन को कहीं अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक बना दिया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं, सुविधाओं और उनकी डिलीवरी ने आम लोगों के जीवन में आमूलचूल बदलाव ला दिया है। अरुणा श्री का पत्र 2014 के बाद के नए भारत की तस्वीर पेश करता है, जिसे हम अक्सर सरकारी विज्ञापनों या भाषणों में सुनते हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कम ही महसूस कर पाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी की आम महिला अरुणा श्री के पत्र के उत्तर में कहा कि ऐसे आत्मीय पत्र उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए नई ऊर्जा देते हैं। उन्होंने बिजली, पानी, शौचालय, पक्का मकान, उज्ज्वला योजना, बैंकिंग सुविधा और मुद्रा योजना जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से देश की महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ते भारत पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। अरुणा श्री का प्रधानमंत्री को धन्यवाद के लिए लिखा पत्र बताता है कि जब सरकारी नीतियां सही ढंग से आमजन तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ़ योजनाएं नहीं रह जातीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में संतोष और आत्मविश्वास लाती हैं। विकसित होते भारत की यही असली तस्वीर है।

सीएम योगी ने समीक्षा बैठक के दौरान किया माघ मेला सेवा एप का उद्घाटन

मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों पर लगाए गए क्यूआर कोड से मिलेगी मदद प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए कई तरह के नवाचार इस बार मेला प्रशासन की तरफ से किए जा रहे हैं। माघ मेला आने वाले आगंतुकों के लिए मेला सेवा एप भी उसी सूची में शामिल हो गया है।  शनिवार को प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसका उद्घाटन किया। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के आगामी स्नान पर्वो की समीक्षा करने  माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसे लेकर अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। सीएम योगी ने इस दौरान प्रयागराज में तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन देने के लिए माघ मेला सेवा एप का भी उद्घाटन किया। इस एप के जरिए मेले में आए श्रद्धालुओं को डिजिटल तरीके से सेवाएं उपलब्ध होंगी। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि इस एप को इस तरह डिजिटली डिजाइन किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में बैठा कोई भी श्रद्धालु या पर्यटक अपनी समस्या मेला प्रशासन को अवगत करा सकता है और मेला प्रशासन के कर्मचारी उसका समाधान कर सकेंगे। मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों में इसके लिए क्यूआर कोड चिपकाए गए हैं जिन्हें स्कैन करके उसमें खुलने वाले फॉर्म में अपनी समस्या बताकर प्रशासन के पास भेजा जा सकता है। मेला प्रशासन के विभिन्न विभागों की टीमें इसका संज्ञान लेते ही समस्या का निवारण कर देंगी। माघ मेला में पहली बार यह सुविधा दी गई है।

यूपी के शहरों का गंदा पानी अब बिना शोधन के गंगा-यमुना में नहीं जाएगा

प्रदेश में कुल 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, इनमें से 41 पूर्ण सीएम योगी के नेतृत्व में नदियों की स्वच्छता को मिली नई रफ्तार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 एसटीपी संचालित हैं लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना सहित प्रमुख नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपशिष्ट जल का शोधन कर नदी प्रदूषण की रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। अब प्रदेश के शहरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के नदियों में नहीं जाएगा। नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत सीवरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी स्टार्ट हुए हैं। 842 करोड़ रुपए की इस परियोजना से लगभग 25 लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं, वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी एसटीपी का संचालन किया गया है। 308 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का लाभ मिलेगा। शुक्लागंज (उन्नाव) में 65 करोड़ रुपए से 5 एमएलडी एसटीपी शुरू हुआ है। इससे 3 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी। अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन : जोगिन्दर सिंह राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। सीवेज को शुद्ध कर बना रहे पर्यावरण के अनुकूल वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, जो बड़ी मात्रा में सीवेज को शुद्ध कर नदियों में प्रवाहित होने से पहले उसे पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से गंगा-यमुना की स्वच्छता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य को भी सुरक्षित किया जा रहा है। परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की निर्मलता सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले अपशिष्ट जल का शोधन कर पूरी तरह से नदी प्रदूषण की रोकथाम करना है। इससे नदियों की निर्मलता को सुनिश्चित किया जा रहा है। गंगा स्वच्छता के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता यूपी राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। सीवर शोधन परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश गंगा स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। इन जिलों में हुआ काम सीवर शोधन की परियोजना प्रयागराज (नैनी, फाफामऊ, झूंसी), कन्नौज, नरोरा, गढ़ मुक्तेश्वर, अनूपशहर, कानपुर, बिठूर, अयोध्या, मथुरा-वृन्दावन, छाता (मथुरा), कोसीकला (मथुरा), वाराणसी, चुनार, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, कासगंज, इटावा, शुक्लागंज-उन्नाव, सुल्तानपुर, जौनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुड़ाना, लखनऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, बरेली, कैराना, फर्रुखाबाद, मेरठ, देवबंद (सहारनपुर), सहारनपुर, शामली, हापुड़, गोरखपुर, आगरा, गुलावटी (बुलंदशहर), पंडित दीन दयाल नगर (मुगलसराय-चन्दौली), भदोही, राम नगर, हाथरस, अलीगढ़, डलमऊ (रायबरेली), मानिकपुर (प्रतापगढ़) में संचालित हैं।

अयोध्या में राम मंदिर के 15 किमी दायरे में मांस बिक्री पर रोक, नॉन-वेज डिलीवरी पर भी लगी पाबंदी

अयोध्या  यूपी की राम नगरी अयोध्या में अब 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. धार्मिक मर्यादाओं के पालन को सख्ती से लागू करते हुए जिला प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है.  न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन ने राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में गैर-शाकाहारी भोजन की होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. यह निर्णय ‘पंचकोसी परिक्रमा’ क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के जरिए नॉन-वेज भोजन की आपूर्ति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है. 15 किमी दायरे में नॉन-वेज डिलीवरी पर रोक  प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में यह सामने आया था कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां प्रतिबंधित क्षेत्र में भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक नॉन-वेज भोजन पहुंचा रही थीं. इसके अलावा कुछ होटल और होमस्टे द्वारा मेहमानों को न सिर्फ मांसाहारी भोजन बल्कि शराब परोसने की शिकायतें भी मिली थीं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को सख्त चेतावनी जारी की है. मई 2025 में अयोध्या नगर निगम ने अयोध्या और फैजाबाद को जोड़ने वाले 14 किलोमीटर लंबे राम पथ पर मांस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते नौ महीनों में शराब बिक्री पर रोक का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो पाया. राम पथ पर अब भी दो दर्जन से अधिक शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं. इस देरी पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि राम पथ और फैजाबाद क्षेत्र में मांस की दुकानों को हटा दिया गया है, लेकिन शराब की दुकानों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है. इसी वजह से शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि अयोध्या में यह फैसला बहुत अच्छा है. पहले से भी तीर्थ स्थलों पर इस तरह की पाबंदी लगाई गई है, जिसमें हरिद्वार, तिरुपति भी शामिल है. यहां पर मांस और शराब की बिक्री बंद है. अयोध्या वैसा ही पवित्र शहर है, इसलिए यहां पर शाकाहारी लोग रहें, यही उचित है. पर्यटन नहीं, धार्मिक नगरी है अयोध्या विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक नगरी है और विश्व की सांस्कृतिक राजधानी है. मुझे लगता है कि इस धार्मिक नगरी में लोग पर्यटन की दृष्टि से नहीं आते हैं, बल्कि धार्मिकता की दृष्टि से आते हैं. अयोध्या में अनेक मठ मंदिर हैं. सभी मठ-मंदिरों में श्रद्धालु बड़े श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं. इस भाव और श्रद्धा को जब दुख पहुंचाया जाता है, तो बहुत गलत बात है. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जो यह कदम उठाया है, इस कदम का हम स्वागत करते हैं. अयोध्या को मांस और मदिरा रहित करना चाहिए. इसका निर्णय पूर्व में ही लेना चाहिए, लेकिन पूर्व की सरकारें नहीं ले पाई. अयोध्या को धार्मिकता के आधार पर ही देखना चाहिए, ना कि पर्यटन की दृष्टि से देखना चाहिए. हम सब पहले भी मांग करते थे कि धार्मिक नगरी में इस तरह के कार्य को बंद किया जाए. बिक्री वालों को डालें जेल के अंदर संत विष्णु दास ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी अयोध्या में मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, यह बहुत अच्छी बात है. यहां पर जितने भी श्रद्धालु प्रभु राम और बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में जो रोक लगाया गया है, यह बहुत अच्छा फैसला है. साथ ही सभी तीर्थ स्थलों में मांस की बिक्री बंद होनी चाहिए. अगर कोई ऐसा करता हुआ पाया गया, तो उसको जेल की सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहिए. अयोध्या मर्यादा और संस्कृति की नगरी संत देवेशाचार्य ने बताया कि यह बहुत अच्छी बात है. अयोध्या के अंदर मांस पर प्रतिबंध करना बहुत अच्छी पहल है. अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी है. यहां पर संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु आते हैं, उनको इस तरीके का दृश्य देखने को मिलता था, तो उनके हृदय को भी पीड़ा होती थी. यह मर्यादा की नगरी है, संस्कृति की नगरी है. अब यहां पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो शासन-प्रशासन को बहुत बड़ा साधुवाद है, क्योंकि हम लोग बहुत दिनों से इसके लिए प्रयास भी करते थे. पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा इस बीच सहायक खाद्य आयुक्त मानिक चंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम से नॉन-वेज फूड डिलीवरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं. उन्होंने कहा, 'शिकायतों के बाद ऑनलाइन नॉन-वेज फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाया गया है. सभी होटल, दुकानदारों और डिलीवरी कंपनियों को इसकी सूचना दे दी गई है. नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी.' प्रशासन का कहना है कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम जरूरी हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.  

सीएम योगी की चेतावनी: ‘हिंदू एक नहीं हुए तो सर्वनाश, बांग्लादेश जैसी स्थिति हो सकती है’

प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश में हो हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर इशारों में विपक्षी दलों पर बड़ा हमला बोला। प्रयागराज में जगदगुरु रामानंदाचार्य की जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हिंदुओं को बांटने की कोशिश हो रही है। जाति, मत, संप्रदाय के नाम पर विभाजन उसी तरह हम लोगो के लिए सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसे बांग्लादेश में हम देख रहे हैं। बांग्लादेश के अंदर जो हो रहा है, उस पर कोई बोल नहीं रहा है। सेक्यूलरिज्म के नाम पर ठेका लेकर चलने वाले लोग चुप हैं। इन लोगों ने हिंदू धर्म को तोड़ने और बांटने की पूरी ताकत लगा दी है। सीएम योगी ने कहा कि बांग्लादेश की घटना पर इनका (विपक्ष का) मुंह बंद है। ऐसा लगता है किसी ने इनके मुंह पर फेविकोल चिपका दिया है। ऐसे लगता है कोई टेप इनके मुंह पर चिपक चुका है। बांग्लादेश की घटना को लेकर इनके द्वारा कोई कैंडल मार्च नहीं निकाला जा रहा है। यह हम सब लोगों के लिए चेतावनी भी है। सीएम योगी ने कहा कि हिंदुओं को बांटने वाले और तोड़ने वाले लोगों को पनपने न दें। इन लोगों को किसी भी स्थिति में आगे नहीं बढ़ने देना है। इन सब संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे तो आने वाला समय सनातन धर्म का ही होगा। पूरी दुनिया के अंदर सनातन झंडा दिखाई देगा। तब कोई बांग्लादेश में हिंदू को काटने का दुस्साहस नहीं कर पाएगा। कहा कि हमारा संत समाज जब एक मंच पर आकर उद्घोष करता है तो परिणाम भी आता है। अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण संतों की साधना और तप का ही परिणाम है। उन्हें मौका मिला तो दंगों की आड़ में झुलसाएंगे सीएम योगी ने कहा कि मोदी जी पहले पीएम हैं जो राम मंदिर दर्शन करने के लिए गए। राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी गए। मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद सनातन धर्म की ध्वजा पताका को भी फहराया। जो लोग आज भी आपको बांट रहे हैं। ये आपके हितैषी नहीं हो सकते हैं। कभी नहीं होंगे। ये वही लोग हैं जो सत्ता में थे तो परिवार को देखते थे। आज तमाम तरह के नारे देंगे, लेकिन इनको जब भी मौका मिलेगा ये वही करेंगे जो पहले किया था। सनातन धर्म पर प्रहार करेंगे। दंगों की आड़ में फिर से लोगों को झुलसाएंगे।