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एमएसएमई और बड़े उद्योगों में शिक्षुता को बढ़ावा, योगी सरकार दे रही है प्रतिपूर्ति का लाभ

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। वर्ष 2025-26 में अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवा “सीखते हुए कमाएं” और उद्योगों के अनुरूप कौशल प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगारपरक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार हर युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधा उत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संबंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। योगी सरकार का मानना है कि यह मॉडल युवाओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है। नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं अप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल और औद्योगिक अनुभव भी मिल रहा है, जिससे नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरल राज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अप्रेंटिसशिप को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हुए युवाओं को उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर से जोड़ा जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ऑनलाइन पोर्टल को सुदृढ़ किया गया है और उद्योगों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा न केवल अपने लिए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल को भी मजबूती देंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर

निर्यात आधारित आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से युवाओं के लिए लगातार बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से उत्तर प्रदेश आधुनिक प्रौद्योगिकी विकास की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर है। लगातार बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से प्रदेश आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से उभरते हुए, देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हो चुका है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश के कुल आईटी निर्यात में प्रदेश की मौजूदा हिस्सेदारी को 05 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक के स्तर पर ले जाया जाए। आईटी सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के संयुक्त विकास ने उत्तर प्रदेश के निर्यात आधार को व्यापक बनाया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र और लखनऊ जैसे शहर अब आईटी सेवाओं, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और डेटा आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। प्रदेश में स्थापित हो रही असेम्बली यूनिट्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और आईटी सर्विस कंपनियों ने निर्यात क्षमता को नई मजबूती दी है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात लगभग 3,862 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार से आईटी आधारित सेवाओं का निर्यात भी 55,711 करोड़ रुपये से बढ़कर 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रदेश में विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक ढांचे और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। इस विकास का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात आधारित उद्योगों से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। तकनीकी प्रशिक्षण कौशल, विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से युवा अब केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता के वाहक बन रहे हैं। योगी सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों ने निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज को दिये गये 4,649 करोड़

मरीजों के इलाज में न हो लापरवाही, योगी सरकार आयुष्मान अस्पतालों को 30 दिन में कर रही भुगतान आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज को दिये गये 4,649 करोड़  सीएम के निर्देश पर पिछले एक वर्ष में क्लेम के पेंडेंसी मामलों को तेजी से किया गया निस्तारित  जनवरी- 25 में 10 लाख से अधिक पेंडेंसी को घटाकर किया गया 3 लाख, क्लेम जांच प्रक्रिया तेज   लखनऊ योगी सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज कराने वाले परिवारों के लिए जहां कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया गया है, वहीं योजना से जुड़े अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कर व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले एक वर्ष में आयुष्मान योजना के क्लेम निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।   नए क्लेम के साथ पुराने लंबित मामलों का भी तेजी से किया जा रहा निस्तारण स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज(साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जनवरी-25 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंच गई थी, वहीं दिसंबर-25 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गयी है। इसे भी जल्द ही निस्तारित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में योजना के तहत प्रति माह औसतन 2 लाख से अधिक क्लेम अस्पतालों से प्राप्त होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले क्लेम का समयबद्ध निस्तारण एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ नए क्लेम का भी नियमित और सुव्यवस्थित तरीके से निस्तारण हो। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सूचीबद्ध अस्पताल बिना हीलाहवाली के आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज सुनिश्चित करें।  सीएम योगी के निर्देश पर मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को किया गया सुदृढ़ साचीज की एसीईओ पूजा यादव ने बताया कि क्लेम निस्तारण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। इसी क्रम में मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है। इससे क्लेम की जांच प्रक्रिया तेज हुई है। इसके साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क (CPD) की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। योजना के तहत अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम्स का भुगतान 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा यानी टर्न अराउंड टाइम (TAT) के भीतर किया जाए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एजेंसी स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और लंबित मामलों की सतत निगरानी की जा रही है।  पिछले एक वर्ष में 4,649 करोड़ का भुगतान अस्पतालों को किया गया  साचीज की सीईओ ने बताया कि जनवरी-25 से दिसंबर-25 की अवधि के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों को क्लेम्स के सापेक्ष कुल 4,649 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योगी सरकार न सिर्फ इलाज की व्यवस्था कर रही है, बल्कि अस्पतालों के आर्थिक हितों की भी पूरी तरह से रक्षा कर रही है, ताकि वे गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। योगी सरकार की नीतियों से क्लेम पेंडेंसी में कमी, समयबद्ध भुगतान और मजबूत ऑडिट व्यवस्था ने अस्पतालों का विश्वास बढ़ाया है। इसका सीधा लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब इलाज के लिए कर्ज और संपत्ति बेचने की मजबूरी से पूरी तरह से मुक्ति मिल गई है।

सीएम योगी का संकल्प: सबकी समस्या का निराकरण, जनता दर्शन में 150 लोगों की समस्याएं सुनीं

सबकी समस्या का निराकरण सरकार का संकल्प : सीएम योगी जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं सीएम ने अधिकारियों को दिए निर्देश, शीघ्रता से करें समस्याओं का निस्तारण गंभीर बीमारियों के इलाज में करेंगे भरपूर आर्थिक सहायता गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की समस्या का समाधान सरकार का संकल्प है। सीएम ने अफसरों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता और संवेदनशीलता से यह सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सबको न्याय मिले। हर पात्र को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।  गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं। कुर्सियों पर बैठे लोगों तक खुद गए। उनकी शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए कई लोगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री ने शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। सीएम योगी ने की गोसेवा, गोवंश को खिलाया गुड़ गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा के समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़ खिलाया। गुरुवार सुबह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिजनों के साथ आए बच्चों से मिल उन्हें प्यार-दुलार, आशीर्वाद और चॉकलेट दिया।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी में संपत्ति का हस्तांतरण अब होगा आसान और सस्ता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए पारिवारिक संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां भी दायरे में अब तक केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों के पारिवारिक दान विलेख (गिफ्ट डीड) पर ही स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती थी। नई व्यवस्था के तहत अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। अब परिवार के सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति दान करने पर भारी-भरकम स्टांप शुल्क के बजाय मात्र 5,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके साथ ही संपत्ति के कुल मूल्य का 1 प्रतिशत निबंधन (Registration) शुल्क देय होगा। किसे मिलेगा इसका लाभ? इस छूट का लाभ परिवार के रक्त संबंधियों जैसे- माता, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, भाई, बहन और पोते-पोतियों को मिलेगा। विशेष बात यह है कि सगे भाई की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी (भाभी) को भी अब इस छूट का पात्र माना गया है। अनावश्यक विवादों और मुकदमों से मिलेगी मुक्ति स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि पहले व्यावसायिक संपत्तियों पर सर्किल रेट का 5 से 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था, जिससे लोग कानूनी हस्तांतरण से बचते थे। इस ऐतिहासिक निर्णय से वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा, जिससे पारिवारिक विवादों और लंबी मुकदमेबाजी में कमी आएगी। साथ ही, विभाग की राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मात्र ₹5,000 होगी स्टांप ड्यूटी अब अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति परिवार के सदस्य को Gift Deed (दान विलेख) के जरिए देता है, तो उसे केवल ₹5,000 की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। पहले यह छूट सिर्फ आवासीय और कृषि संपत्ति तक सीमित थी, लेकिन अब कमर्शियल प्रॉपर्टी और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर भी यही नियम लागू होगा। इससे शहरों में दुकान, गोदाम, फैक्ट्री जैसी संपत्तियों के बंटवारे पर भारी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।  सरकार ने स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान पर भारी शुल्क खत्म कर दिया गया है। अब किसी भी प्रकार की संपत्ति के ट्रांसफर पर केवल नाममात्र की राशि में रजिस्ट्री हो सकेगी। नई व्यवस्था के अनुसार, परिवार के भीतर संपत्ति के दान पर ₹5,000 स्टांप ड्यूटी और संपत्ति मूल्य का केवल 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क देनी होगी। इससे पहले शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक संपत्ति पर 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था, जो आम लोगों के लिए काफी महंगा था। यही कारण था कि लोग कानूनी प्रक्रिया से बचते थे और बाद में विवाद खड़े हो जाते थे। पारिवारिक सदस्यों को मिलेगा लाभ, किराया रजिस्ट्रेशन भी हुआ सस्ता इस नई छूट का फायदा पुत्र, पुत्री, माता, पिता, पति, पत्नी, भाई, बहन, पुत्रवधु, दामाद, नाती-नातिन, भतीजा-भतीजी सहित कई रिश्तों को मिलेगा। खास बात यह है कि अब सगे भाई के निधन की स्थिति में उसकी पत्नी को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। यानी अधिकतर नजदीकी रिश्तों में संपत्ति ट्रांसफर बेहद आसान हो जाएगा। योगी सरकार ने सिर्फ संपत्ति बंटवारे ही नहीं, बल्कि किराया समझौते के रजिस्ट्रेशन को भी बेहद सस्ता बना दिया है।  अब किराए के समझौते पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। पहले अधिक शुल्क के कारण लोग रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराते थे, जिससे बाद में मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद होते थे। नई व्यवस्था में किराया अवधि और वार्षिक किराए के आधार पर बहुत कम शुल्क तय किया गया है। इससे अब आम नागरिक बिना डर के अपना किराया समझौता कानूनी रूप से पंजीकृत करा सकेगा। इससे न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य के झगड़ों से भी बचाव होगा। पैतृक संपत्ति का बंटवारा अब सिर्फ 10 हजार में योगी सरकार के एक और फैसले के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री मात्र ₹10,000 में कराई जा सकेगी। पहले इस प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब कम खर्च में कानूनी बंटवारा संभव होगा, जिससे पारिवारिक विवादों में भारी कमी आएगी। इन सभी सुधारों से उत्तर प्रदेश में कानूनी पारदर्शिता और संपत्ति से जुड़े मामलों में भरोसा बढ़ेगा। लोग बिना डर और भारी खर्च के अपनी संपत्ति को सही तरीके से ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का लक्ष्य कम खर्च, कम विवाद और ज्यादा पारदर्शिता है। योगी सरकार का यह फैसला न केवल आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति व्यवस्था को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। बता दें कि वर्ष 2022 तक पारिवारिक दान पर पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होती थी। 2023 में पहली बार आवासीय और कृषि संपत्तियों पर राहत दी गई थी। अब सरकार ने यह छूट कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल प्रॉपर्टी तक बढ़ा दी है। इससे उत्तर प्रदेश में संपत्ति के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अवैध या कच्चे दस्तावेजों की संख्या कम होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति से जुड़े विवाद, कोर्ट केस और पारिवारिक झगड़े काफी हद तक कम होंगे। जब संपत्ति का हस्तांतरण आसान और सस्ता होगा, तो लोग कानूनी रास्ता अपनाएंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था में भी सुधार होगा। सरकार जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद यह सुविधा पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी।  

पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम निर्माण

राम मंदिर की सुरक्षा को तैयार हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम निर्माण 1128.75 लाख की लागत से तैयार हुआ है प्रशासनिक भवन दिसंबर 2023 में सीएंडडीएस ने शुरू कराया था निर्माण आधुनिक कंट्रोल रूम का जल्द होगा लोकार्पण,योगी सरकार के अहम निर्णय के बाद हुआ निर्माण अयोध्या राम मंदिर की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ठीक बाहर पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर एक आधुनिक प्रशासनिक भवन और कंट्रोल रूम का निर्माण पूरा हो चुका है। यह भवन 1128.75 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट को गृह विभाग द्वारा संचालित किया गया है। निर्माण कार्य दिसंबर 2023 में निर्माण संस्था सीएंडडीएस के माध्यम से शुरू हुआ था। जी प्लस वन मंजिला इस भवन में बेसमेंट में मुख्य कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। यह कंट्रोल रूम अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा, जहां से सीसीटीवी फुटेज, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। यह सुविधाये हैं भवन में वेद मंदिर के निकट बने भवन में आंतरिक स्थल विकास कार्य के अंतर्गत कई आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें सीसी रोड (सीमेंट कंक्रीट रोड), रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, वाह्य जलमल निकासी व्यवस्था, वातानुकूलित (एयर-कंडीशन्ड) तंत्र, सबमर्सिबल पम्प के साथ बोरिंग, हाई-स्पीड लिफ्ट, पूर्ण विद्युतीकरण, मजबूत बाउंड्रीवाल, एमएस गेट और 160 केवीए का डीजल जनरेटर सेट प्रमुख है। ये सभी सुविधाएं भवन को पर्यावरण-अनुकूल, ऊर्जा-कुशल और आपात स्थिति में आत्मनिर्भर बनाती हैं।  हर गतिविधियों पर रखी जाएगी पैनी नजर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि 98 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। बाउंड्रीवाल का कार्य प्रगति पर है। यह भवन जल्द ही लोकार्पण के लिए तैयार है। लोकार्पण के बाद इसे पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा। यह नया भवन विशेष रूप से पुलिस विभाग द्वारा संचालित होगा और राम जन्मभूमि परिसर के आसपास की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख सकेगा।

यूपी में स्कूलों में AI का प्रयोग, तकनीकी प्रशिक्षण को किया अनिवार्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में अब 'चॉक और डस्टर' के साथ-साथ 'एआई और मशीन लर्निंग' का दौर शुरू होने वाला है। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी (iGOT) पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पाठ्यक्रमों को सभी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार ने बताया अपना लक्ष्य इस पहल का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में नवाचार लाना और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। वर्तमान में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने की रैंकिंग में प्रदेश चौथे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक यूपी को इस श्रेणी में भी नंबर वन बनाना है। इसके लिए विभाग ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मार्च तक इन कोर्सों में नामांकन कर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करें। इसका मकसद शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार, दक्षता और तकनीकी समझ को बढ़ाना है। विभाग ने एआई आधारित प्रमुख कोर्सों की सूची भी सभी संबंधित कार्यालयों को भेज दी है, ताकि प्रशिक्षण में कोई दिक्कत न हो। पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने में प्रदेश चौथे स्थान पर है। अब सरकार का लक्ष्य इस श्रेणी में भी यूपी को नंबर वन बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे प्राथमिकता में लें। साथ ही यह भी तय किया गया है कि पोर्टल पर उपलब्ध 57 सुझाए गए प्रशिक्षण कोर्सों में से हर कर्मचारी को हर महीने कम से कम एक कोर्स करना होगा। इस तरह 31 मार्च तक कुल 12 कोर्स पूरे करना अनिवार्य होगा।  

योगी सरकार का कड़ा कदम, असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम निर्णय लेते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर एसटीएफ यूपी को सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। जांच के दौरान एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों- महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ थाना विभूतिखंड, लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ की गहन विवेचना और डेटा विश्लेषण से उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई। जांच के दौरान अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों और व्यक्तियों के नाम भी सामने आए। आयोग से प्राप्त डाटा के मिलान में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा सुनिश्चित किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

दालमंडी क्षेत्र में ध्वस्तीकरण अभियान शुरू, कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट

वाराणसी यूपी के वाराणसी में बुधवार को दालमंडी में दोपहर बाद ध्‍वस्‍तीकरण की कार्रवाई हुई। इस दौरान मौके पर भारी पुल‍िस बल की तैनाती की गई थी। इसके पूर्व दालमंडी चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन ने भवनों और दुकानदारों को चेतावनी देते हुए खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। कार्रवाई का दौर कुछ द‍िनों तक थमने के बाद अब दोबारा ध्‍वस्‍तीकरण का क्रम शुरू हो चुका है।   आपको बता दें कि महीने भर बाद दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण के लिए भवनों का ध्वस्तीकरण बुधवार से शुरू हुआ। भारी फोर्स के साथ जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की टीम ने नरेली बाजार तिराहे की ओर से भवन तोड़ने का कार्य शुरू किया। इस दौरान चारों तरफ रास्ता रोक दिया गया था। इससे पहले अधिग्रहीत भवन स्वामियों और दुकानदारों को चेतावनी देते हुए मकान खाली करने को कहा गया। इसमें भवन संख्या सीके 39/5, सीके 43/113 और सीके 50/207 (सत्तार कटरा) शामिल है। हालांकि तीसरे भवन सत्तार मार्केट को स्वामी खुद तोड़वा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान के मौके जिले के आला अधिकारी समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दालमंडी क्षेत्र में चौड़ीकरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। चौड़ीकरण की कार्रवाई से यातायात बेहतर होगा। प्रशासन ने सभी दुकानदारों और भवन स्वामियों को चेतावनी दी है कि वे अपने भवनों और दुकानों को समय पर खाली करें, ताकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। वहीं स्थानीय निवासियों और दुकानदारों मी मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोग प्रशासन के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला मानते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रक्रियाएं कानूनी रूप से और उचित तरीके से की जाएंगी।  

निर्माणाधीन गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया निरीक्षण

  गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देशित किया कि गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाएं ताकि तय समयसीमा में यह मार्ग जनता को समर्पित कर दिया जाए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने खजांची चौराहा फ्लाईओवर, जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण की प्रगति की भी जानकारी ली और जरूरी दिशानिर्देश दिए। विकास कार्यों का जायजा लेने के क्रम में सीएम योगी बुधवार अपराह्न गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग के विकास भारती स्कूल मोड के आगे पहुंचे। यहां उन्होंने सड़क परियोजना के ले आउट, ड्राइंग मैप का अवलोकन करने के साथ कार्य प्रगति की जानकारी ली। 19.485 किमी लंबाई वाले गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का निर्माण 942.44 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड तीन ने 11 फरवरी 2025 को कार्य प्रारंभ किया था। निर्माण 31 अगस्त 2026 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही कार्य में तेजी लाते हुए इसे अगस्त 2026 तक पूर्ण किया जाना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने फोरलेन सड़क पर पानी की लेवलिंग जांचने के भी निर्देश दिए ताकि सड़क पर जलजमाव की कोई समस्या न रहे। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का भी काम देखा सीएम ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन का निर्माण कार्य देखने के दौरान मुख्यमंत्री ने जंगल-कौड़िया रिंग रोड के कार्यों का भी अवलोकन और निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण में और तेजी लाते हुए इस रिंग रोड को सितंबर माह तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस रोड पर बिशुनपुर अंडरपास की चौड़ाई को भी परख लिया जाए। चौड़ाई इतनी होनी चाहिए कि जनता को कोई दिक्कत न हो। जल्द पूरा करें खजांची बाजार फ्लाईओवर का निर्माण निरीक्षण की श्रृंखला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खजांची चौराहे पर 96.50 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे फ्लाईओवर का भी जायजा लिया। फ्लाईओवर के पास रुककर उन्होंने निर्माण की अब तक की प्रगति जानी और ड्राइंग मैप को भी देखा। इस फ्लाई ओवर का निर्माण 99 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गया है। कार्यदायी संस्था की तरफ से बताया गया कि करीब तीन दिन का ही काम शेष है। इस पर सीएम योगी ने जल्द से जल्द फ्लाईओवर का निर्माण शत प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी भी उपस्थित रहे।