samacharsecretary.com

72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप के शुभारंभ पर बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और यूपी खेल निदेशालय के बीच एनसीओई संचालन के लिए एमओयू, युवा खिलाड़ियों को मिलेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म हर जिले में खेल सुविधाओं का विस्तार, ओलंपिक-कॉमनवेल्थ जैसे बड़े मंचों पर यूपी के खिलाड़ियों की बढ़ती उपलब्धियाँ वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश और देश में खेल को नई दृष्टि, नए संसाधन और नया आत्मविश्वास मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उभरते “न्यू स्पोर्ट्स कल्चर” ने युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और टीम-स्पिरिट को मजबूत किया है। अब खेल सिर्फ शौक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी चयन-प्रक्रिया और मिशन-मोड पर चल रही योजनाओं के चलते युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर बढ़े हैं। ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रतियोगिताओं का विस्तार किया गया है। परिणामस्वरूप यूपी के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहले से कई गुना अधिक भागीदारी और पदक ला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 72वीं सीनियर नेशनल वालीबॉल चैंपियनशिप का वर्चुअली शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयोजन स्थल डॉ. संपूर्णानंद स्पोट्र्स स्टेडियम, सिगरा में मौजूद रहे। उन्होंने यहां खिलाड़ियों व दर्शकों को संबोधित किया। सीएम की उपस्थिति में स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया व उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय के मध्य नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एनसीओई) के संचालन के लिए एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। सीएम योगी ने काशी में आई सभी 58 टीमों (30 पुरुष, 28 महिला) के खिलाड़ियों, कोच व ऑफिशियल का स्वागत किया। हर भारतवासी ने देश में नई खेल संस्कृति को पनपते देखा सीएम योगी ने कहा कि पिछले 11- साढ़े 11 वर्ष के अंदर हर भारतवासी ने देश में नई खेल संस्कृति को पनपते देखा है। पीएम मोदी ने 2014 में खेलो इंडिया खेलो के माध्यम से हर भारतवासी के मन में खेल के प्रति सम्मान का भाव पैदा किया। उन्होंने संदेश दिया कि खेल जीवन के सर्वांगीण विकास का माध्यम बने। स्वस्थ शरीर से ही सफलता के सभी आयाम प्राप्त किए जा सकते हैं। खेलो इंडिया खेलो, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद खेलकूद प्रतियोगिता और हर जनपद में बनने वाले खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से पूरा देश नई खेल संस्कृति का अनुभव कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सांसद-विधायक खेलकूद प्रतियोगिता, ग्रामीण खेलकूद की विभिन्न प्रतियोगिता आदि के माध्यम से हम लोगों ने उत्तर प्रदेश में खेल को बढ़ाया है। प्रदेश व देश में विकसित हुआ खेल का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सीएम ने कहा कि 43 वर्ष बाद सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का आयोजन यूपी के अंदर वाराणसी नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन के पीछे पीएम मोदी की प्रेरणा, मार्गदर्शन व नेतृत्व है। उन्होंने कहा कि प्रदेश-देश में खेल का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हुआ है। संपूर्णानंद स्पोट्र्स स्टेडियम में भी अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर दिख रहा है तो यह पीएम मोदी के विजन का परिणाम है। यह सुविधाएं स्मार्ट सिटी के अंतर्गत विकसित हुई हैं। अभी उप्र सरकार व साईं के बीच हुए एमओयू के अंतर्गत साई के सानिध्य और कोच के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए नया प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग के साथ ही अधिक से अधिक मेडल प्राप्त कर रहे खिलाड़ी सीएम योगी ने कहा कि यूपी में 8-साढ़े 8 वर्ष में खेलकूद प्रतियोगिता को बढ़ाने का कार्य हुआ। हर गांव में खेल मैदान, हर जनपद में स्टेडियम, हर विकास खंड स्तर पर मिनी स्टेडियम का निर्माण, नगर निकाय व ग्राम पंचायत से होने वाले कार्यों की प्राथमिकता में ओपन जिम निर्माण के साथ ही हर स्तर पर खेलकूद की गतिविधियों को बढ़ाने के प्रयास प्रारंभ हुए हैं। उसी का परिणाम है कि हमारा खिलाड़ी राष्ट्रीय, ओलंपिक, कॉमनवेल्थ व इंटरनेशनल विश्व चैंपियनिशप में प्रतिभाग करने के साथ ही पहले की तुलना में कई गुना मेडल भी प्राप्त कर रहा है। महापौर अशोक तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। शुभारंभ समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधायक नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. सुनील पटेल, त्रिभुवन राम, डॉ. अवधेश सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण, अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई भी की मुख्यमंत्री ने स्टेडियम का स्थलीय निरीक्षण भी किया। यहां जिम और इसके उपकरणों के रखरखाव को देखा। सीएम ने शूटिंग के एक बच्चे को बुलाकर उससे खेल के बारे में पूछा, इस बच्चे ने सीएम के सामने निशाना भी साधा। मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेलों में अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों की हौसला अफजाई भी की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 बजे करेंगे वर्चुअली उद्घाटन, 11 जनवरी तक चलेगा मुकाबला

उद्घाटन साराह में उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक  भी रहेंगे मौजूद चैम्पियनशिप में स्विट्जरलैंड से अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ के आब्जर्वर भी रहेंगे मौजूद   वाराणसी 72 वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का उद्घाटन 4 जनवरी को काशी के सिगरा स्टेडियम में होगा। वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 12 बजे करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्टेडियम में मौजूद रहकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएंगे। उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक  भी मौजूद रहेंगे। सिगरा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में यह प्रतियोगिता 11 जनवरी तक चलेगी। इसमें देश भर से 58 टीमें (पुरुष एवं महिला ) भाग ले रही है । चैम्पियनशिप में स्विट्जरलैंड से अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ के आब्जर्वर भी मौजूद रहेंगे।  उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल संघ के सचिव सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहली बार सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप हो रही है। इसमें 30 पुरुष और 28 महिला टीमें भाग लेंगीं। जिला वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने बताया कि रेलवे के अलावा सेना के तीनों अंगों (जल,थल, नभ ) को मिलाकर बनी टीम भी प्रतिभाग करेगी। प्रतियोगिता 11 जनवरी को समाप्त होगी। उन्होंने जानकारीदी कि उत्तर प्रदेश में कई वर्षो (1984 ) के बाद ये चैंपियनशिप होनी जा रहा है। पूर्वांचल के खेल प्रेमियों के लिए ये चैम्पियनशिप बहुत बड़ा आयोजन है। इसमें से सेलेक्ट किये हुए खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष और वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने बताया कि साई और खेल विभाग उत्तर प्रदेश के बीच सिगरा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सेण्टर ऑफ़ एक्ससिलेन्स के बीच एमओयू होना है। आयोजन समिति की ओर से खेल का शुभांकर (नंदी और डॉलफिन ) भी जारी किया जा चूका है 72 वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में देश भर के लगभग 1044 से अधिक  खिलाड़ी भाग लेंगे,जिसमें 540 पुरुष खिलाड़ी और 504 महिला ख़िलाड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस उद्घाटन समारोह में सभी खेलो के राष्ट्रीय और अन्तर्रष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ही पद्मश्री सम्मान से सम्मानित और गणमान्य लोगो को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि काशी को ‘स्पोर्ट्स टूरिज्म हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी की यह मेजबानी आने वाले वर्षों में और बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी के टाउनहॉल रैन बसेरे की देखी व्यवस्था

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भीषण शीतलहरी में टाउनहॉल रैन बसेरा पहुंचे और यहाँ रह रहे लोगों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने ठंड से ठिठुरते लोगों को राहत पहुंचाते हुए कंबल एवं भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए। उन्होंने सभी का कुशलक्षेम जाना। छोटे बच्चों को उन्होंने चॉकलेट भी दी। उन्होंने लोगों से कहा कि ठंड में बाहर सड़क पर खुले आसमान के नीचे कत्तई न सोएं। रैनबसेरा आप लोगों के लिए ही बनवाया गया है। उन्होंने रैनबसेरा में शरण लिए लोगों से व्यवस्थाओं के बाबत जानकारी ली और पूछा कि कोई कमी तो नहीं है? लोगों ने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। लोगों ने बताया कि सब कुछ दुरुस्त है। बिछाने के लिए बिस्तर और ओढ़ने के लिये कंबल तथा तापने के लिये अलाव आदि की भी समुचित व्यवस्था है।        मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अत्यधिक ठंड के दृष्टिगत यह सुनिश्चित किया जाय कि कोई भी व्यक्ति रात्रि में सड़क के किनारे अथवा खुले आसमान में न रहे, गरीब एवं असहाय लोगों को रैनबसेरा में रहने के लिए कहा जाय। रैनबसेरों में समुचित साफ-सफाई, शौचालयों, प्रकाश, बिस्तर, अलाव आदि की व्यवस्था हर हालत में सुनिश्चित की जाए।       इस दौरान प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु', एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेन्द्र राय, विधायक नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाज़िरी, ‘काशी कोतवाल’ के दर पर भी झुकाया शीश

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए साल के तीसरे दिन वाराणसी पहुंचे। दो दिवसीय दौरे के पहले दिन शनिवार को उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आदि योगी के दर्शन किए। बाबा के गर्भगृह में जाकर उन्होंने विधिविधान से पूजा कर लोककल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने काशी कोतवाल के चरणों में भी लगाई हाजिरी समीक्षा बैठक के उपरांत सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने ‘काशी कोतवाल’ बाबा काल भैरव का विधि विधान से पूजा कर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के सुखी-समृद्ध जीवन की कामना की। सीएम ने बाबा के भक्तों का किया अभिवादन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर बाबा के भक्तों ने हर-हर महादेव का जयकारा लगा उनका अभिनंदन किया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

पारो की कहानी: माघ मेला में दातुन बेचने वाली लड़की हुई वायरल, सुंदरता से ज्यादा दिल छूने वाली है उसकी कहानी

प्रयागराज  आपको पिछले साल का महाकुंभ (Maha Kumbh Mela 2025) याद होगा किस तरह लोगों ने काफी पैसे कमाए थे. अब उसी तर्ज पर माघ मेला (Magh Mela 2026) में भी लोग अलग-अलग तरह के बिजनेस करके अपनी जेबों को भरने के लिए तैयार हो गए हैं. कुंभ में काफी पॉपुलर हुए एक लड़के की तरह ही इस बार एक लड़की दातुन बेचकर कमाई कर रही है. (Woman sell neem sticks in Magh Mela 2026) उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल (Viral News) हो रहा है. मगर, वह दातुन बेचने की वजह से वायरल नहीं हुई है, बल्कि अपनी मुस्कान और सुंदरता के कारण सुर्खियों में छा गई है. एक लड़की इधर से उधर माघ मेला में घूमती दिखी. उसके हाथ में दातुन थे. वह लोगों से कह रही थी दातुन ले लीजिए, दातुन. तभी उसके चेहरे पर नजर पड़ी… काली आंखे, चेहरे पर मुस्कान, माथे पर तिलक और पीठ पर बैग लटकाए… सुंदर इतनी मानों कोई हिरोइन हो. मगर, इस लड़की की कहानी कोई सामान्य नहीं है. उसके दातुन बेचने के पीछे का दुख तब सामने आया. लड़की का नाम पारो कुमारी है. वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली है. वह गाजीपुर से प्रयागराज सिर्फ अपने परिवार के लिए आई है. उसके पिता बीमार हैं और घर में कोई कमाने वाला नहीं है. जब उसे पता लगा कि माघ मेला लगने वाला है तो कमर कस ली की अब घर वालों का बेड़ा वहीं उठाएगी. पारो ने कहा कि पापा बहुत बीमार हैं. इसलिए मैं दातुन बेचने आई हूं. इसे बेचकर उनका इलाज कराऊंगी. बता दें, नए साल के साथ ही साल 2026 को लेकर लोगों में धार्मिक और ज्योतिषीय उत्साह देखने को मिल रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह वर्ष सूर्य का वर्ष माना जा रहा है, इसलिए इसका असर धर्म, आस्था, तप और अच्छे कर्मों पर खास रूप से पड़ने वाला है. इसी शुभ अवसर पर साल की शुरुआत के साथ ही सनातन परंपरा का बड़ा धार्मिक आयोजन माघ मेला  शुरू हो गया है. माघ मेला करीब 40 दिनों से अधिक समय तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम पवित्र स्नान के साथ होगा. इस पूरे समय के दौरान देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु, संत और कल्पवासी प्रयागराज पहुंचकर संगम तट पर निवास करेंगे और पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे.

एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम

लखनऊ में एआई  सिटी उत्तर प्रदेश को बनाएगी वैश्विक टेक हब एआई सिटी  दो हिस्सों में होगी विकसित, लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में किया जायेगा विकसित एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम  प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और निवेश के नए अवसर खोलेगी एआई सिटी लखनऊ   उत्तर प्रदेश देश के बड़े तकनीकी और डिजिटल केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा जिस दूरदर्शी विकास मॉडल को अपनाया गया है उसका अगला बड़ा गंतव्य लखनऊ में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) सिटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के नाम अपने पत्र में भी एआई सिटी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया था। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा को नई गति देने के साथ-साथ प्रदेश को वैश्विक टेक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाने का भी काम करेगा। एआई सिटी को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा जहां एआई इनोवेशन सेंटर, टेक पार्क और रिसर्च सुविधाएं होंगी। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में रेजिडेंशियल, कमर्शियल और सामाजिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।  योगी सरकार का लक्ष्य, अगले पांच  सालों में उत्तर प्रदेश को एक  ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए आईटी-आईटीईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित और स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसी सोच के अंतर्गत लखनऊ में एआई सिटी को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और सरकारी सहयोग का संतुलित ढांचा तैयार हो सके। लखनऊ की एआई सिटी को एक समर्पित व आत्मनिर्भर टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए आधुनिक वर्क प्लेस उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारतीय और वैश्विक एआई कंपनियों को एक ही स्थान पर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे कि वे त्वरित गति से अपनी परियोजनाओं को विकसित और विस्तारित कर सकें। यह परियोजना लखनऊ को टॉप-20 ग्लोबल एआई हब्स में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। राजधानी होने के साथ-साथ लखनऊ की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता इस दिशा में एक बड़ी ताकत है। आईआईएम लखनऊ और आईआईआईटी लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पहले से ही यहां मौजूद हैं, जो रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट में विशेष भूमिका निभाने का काम कर रहे हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिटी इन संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करेगी। एआई सिटी के माध्यम से रोजगार के हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन के अवसर बनेंगे। आईटी प्रोफेशनल्स, डेटा साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को जॉब के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें यहीं पर उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के मार्ग खुलेंगे। एआई सिटी ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

केंद्र व राज्य की 98 जनकल्याणकारी योजनाएं फैमिली आईडी से जुड़ीं

व्यवस्था और पारदर्शी, फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाएगी फैमिली आईडी केंद्र व राज्य की 98 जनकल्याणकारी योजनाएं फैमिली आईडी से जुड़ीं 15.07 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहीं सुविधाएं, 44 लाख लोगों ने किया आवेदन अब तक 19 लाख से अधिक फैमिली आईडी कार्ड किया गया वितरित लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसी दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा फैमिली आईडी कार्ड के माध्यम से डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभार्थियों को जोड़ने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इससे व्यवस्था न सिर्फ और पारदर्शी हुई है, बल्कि फर्जी लाभार्थियों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।  98 योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा गया प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 जनकल्याणकारी योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इसका सीधा लाभ प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिल रहा है। फैमिली आईडी पोर्टल पर 44 लाख नागरिकों ने अब तक आवेदन किया है। शहरी क्षेत्र में लेखपाल और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से बनाया जाता है। इस फैमिली आईडी प्रणाली के तहत एक ही पहचान संख्या से पूरे परिवार का विवरण उपलब्ध रहता है, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और त्वरित तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है। 12 अंकों की फैमिली आईडी बनेगी योजनाओं की चाबी फैमिली आईडी कार्ड 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर होता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी दर्ज होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस व्यवस्था का उद्देश्य “एक परिवार–एक पहचान” के सिद्धांत को लागू करना है, ताकि पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दोहराव से बचा जा सके। भागदौड़ से मिल रही राहत फैमिली आईडी कार्ड लागू होने से नागरिकों को आय, जाति, निवास सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। एक बार फैमिली आईडी पंजीकरण होने के बाद, विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यक जानकारियां इसी डेटाबेस से स्वतः उपलब्ध हो जा रही हैं। इससे समय, धन और श्रम—तीनों की बचत हो रही है। राशन कार्ड से वंचित परिवारों को भी मिलेगा लाभ योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो परिवार किसी कारणवश राशन कार्ड से वंचित हैं, वे भी फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें। इसके लिए विशेष पंजीकरण व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी सहायता से बाहर न रहे। आधार और मोबाइल लिंक अनिवार्य फैमिली आईडी के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर होना अनिवार्य है। साथ ही आधार का मोबाइल नंबर से लिंक होना भी जरूरी है, ताकि ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जा सके। यदि किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे आधार से नया और सही नंबर लिंक कराना आवश्यक होगा। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों तक सीधी पहुंच योगी सरकार का लक्ष्य है कि हर गरीब, श्रमिक, किसान, महिला, बुजुर्ग और दिव्यांग को उसका हक समय पर मिले। फैमिली आईडी के माध्यम से सरकार की योजनाएं अब सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिली है। फैमिली आईडी: एक नजर में ▪️फैमिली आईडी प्रणाली के तहत नागरिक आधार आधारित लॉगिन और ई-केवाईसी के माध्यम से स्व-पंजीकरण कर सकते हैं, जिसमें यूआईडीएआई से परिवार के सदस्यों का विवरण स्वतः प्राप्त होता है। ▪️आवेदक को परिवार के सदस्यों को जोड़ने की सुविधा दी गई है, जबकि लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाता है।  ▪️फैमिली आईडी DigiLocker पर उपलब्ध कराई जा रही है और अब तक 19 लाख से अधिक भौतिक फैमिली आईडी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।  ▪️यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है, जिस पर प्रति कार्ड लगभग 8 रुपये का खर्च सरकार स्वयं वहन कर रही है।  ▪️वर्तमान में फैमिली आईडी से कुल 98 योजनाएं जोड़ी जा चुकी हैं, जिनमें केंद्र सरकार की 13 और उत्तर प्रदेश सरकार की 85 योजनाएं शामिल हैं।  ▪️फैमिली आईडी डाटाबेस में अब तक 15.7 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हैं, जिनमें 14.7 करोड़ राशन कार्ड आधारित और 1.03 करोड़ स्व-पंजीकरण के माध्यम से जुड़े हैं।  ▪️डाटाबेस में कुल फील्ड सैचुरेशन 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसमें पता विवरण 100 प्रतिशत, मोबाइल नंबर 85 प्रतिशत, वैवाहिक स्थिति 54 प्रतिशत दर्ज किया गया है। ▪️फैमिली आईडी को योजनाओं से जोड़ने के लिए पांच-स्तरीय तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसके अंतर्गत आधार अधिसूचना, डाटाबेस डिजिटलीकरण, आधार प्रमाणीकरण, योजना पोर्टल पर फैमिली आईडी फील्ड निर्माण और विभागीय डाटाबेस का एकीकरण शामिल है, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

प्रयागराज में माघ मेले की पौष पूर्णिमा पर 21 लाख श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

प्रयागराज प्रयागराज महाकुंभ के बाद पहला माघ मेला आज से शुरू हो गया है। पहले दिन पौष पूर्णिमा पर अब तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालु स्नान-दान के बाद लेटे हनुमानजी के दर्शन कर रहे हैं। मेला प्राधिकरण का अनुमान है।  इधर, पुलिस ने दो फर्जी बाबा पकड़े हैं। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट मिले हैं। महाकुंभ में ‘दातून बॉय’ के नाम से मशहूर हुए आकाश थार से प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने मेले में दातून का कैंप लगाने का ऐलान किया है। इस बीच सपा कार्यकर्ता ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ गंगा में डुबकी लगाई। माघ मेला 2026 का शुभारंभ आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सैलाब के साथ हुआ। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर उमड़ पड़े। पुण्य की कामना के साथ पवित्र स्नान किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर हर-हर गंगे के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए शहर से संगम तक फोर्स तैनात दिखी। व्यापक पुलिस बल, एनडीआरएफ, जल पुलिस, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पल-पल की निगरानी की गई। माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।  सीएम योगी ने अफसरों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेले की निगरानी AI तकनीक से लैस CCTV कैमरों से की जा रही है। ATS-NIA के कमांडो भी तैनात हैं। योगी सरकार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है। मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और 15 फरवरी तक चलेगा। मेले को 7 सेक्टरों में बांटा गया है। 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। 2 जनवरी की रात 8 बजे से मेले में वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है। संगम नोज पर सिर्फ प्रशासकीय और चिकित्सीय वाहनों को ही जाने की अनुमति है। यह व्यवस्था 4 जनवरी की सुबह तक लागू रहेगी। आज से कल्पवास भी शुरू हो गया है। कल्पवासी 45 दिनों तक गंगा तट पर रहकर पूजा-अर्चना करेंगे। माघ मेला होने के कारण इसमें अखाड़े शामिल नहीं होते और न ही पेशवाई निकाली जाती है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। पहले स्नान पर्व पर देश के कोने-कोने आए लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आधी रात के बाद से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और ठिठुरन के बावजूद आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच स्नान किया। प्रशासन ने इस बड़े आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। संगम क्षेत्र को कई जोन और सेक्टर में बांटा गया। प्रमुख स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे ट्रैफिक प्लान लागू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए लगातार गश्त करती रहीं। ड्रोन से की जाती रही निगरानी पौष पूर्णिमा पर सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त रहा। पुलिस और फोर्स की निगरानी चप्पे-चप्पे  पर दिखी। मेले में दोपहिया वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ड्रोन कैमरे से पूरे माघ मेला और घाटों की निगरानी की जाती रही। संगम पर बने वॉच टॉवर के माध्यम से पुलिस संगम नोज और सभी घाटों पर नजर बनाए रखी।  स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क रहा। संगम क्षेत्र और मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें तैनात की गईं। ठंड को देखते हुए अलाव, गर्म पानी और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई। नगर निगम और स्वच्छता कर्मियों ने सुबह से ही सफाई अभियान चलाया ताकि घाटों पर स्वच्छता बनी रहे। 

यूपी का लौटा सांस्कृतिक वैभव, नये साल का जश्न मनाने तीर्थस्थल पहुंच रहे युवा

काशी के पर्यटन में रिकार्ड वृद्धि, वर्ष 2025 में पहुंचे 7 करोड़ 26 लाख श्रद्धालु, जिसमें 80 फीसदी युवा  यूपी का लौटा सांस्कृतिक वैभव, नये साल का जश्न मनाने तीर्थस्थल पहुंच रहे युवा  सांस्कृति पुनर्जागरण की लहर, नये साल पर काशी विश्वनाथ का दर्शन करने पहुंचे 30 लाख से अधिक युवा  वाराणसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन ने वाराणसी को न केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में पुनर्स्थापित किया है, बल्कि वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के साथ गंगा घाटों, प्राचीन मंदिरों, सड़कों और चौराहों का जिस तरह से सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है, इसका प्रमाण वर्ष 2025 में रिकार्ड 7 करोड़ 26 लाख से अधिक पर्यटकों ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किये। इसमें महाकुम्भ के पलट प्रवाह और महाशिवरात्रि के अवसर पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सर्वधिक रही। वहीं नये साल का जश्न मनाने भी लाखों की संख्या में युवा काशी पहुंचे।   काशी में वर्ष 2025 में पहुंचे रिकार्ड संख्या में पर्यटक वाराणसी में भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और गंगा जी के घाटों और मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष 2025 में काशी में 7,26,76,780 पर्यटकों ने काशी के मनोरम घाटों और मंदिरों का दर्शन किया। इस आंकड़े में प्रयागराज महाकुंभ के 'पलट प्रवाह' के दौरान आए 2 करोड़ 87 लाख श्रद्धालुओं की संख्या भी शामिल है। जिन्होंने महाकुम्भ में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के बाद काशी विश्वनाथ के भी दर्शन किये। साथ ही महाशिवरात्रि पर्व और पवित्र सावन माह में काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने वालों की संख्या सर्वाधिक रही, जिसके लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी और काशी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये थे।  नये साल का जश्न मानाने 30 लाख से अधिक युवा पहुंचे काशी   सीएम योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में उठी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी में धार्मिक स्थलों और तीर्थों के प्रति श्रद्धा में भी बढ़ोतरी की है। इसका जीवंत प्रमाण हमें नये साल के जश्न के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर उमड़ी अपार भीड़ के रूप में देखने को मिला। जहां 24 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 के दौरान 3075769 श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विश्व भूषण मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। उत्सवों में प्रायः लोक तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। साथ ही सीएम योगी के प्रयासों से काशी, प्रयागराज और अयोध्या को जिस सैक्रेड ट्रायएंगल के रूप में विकसित किया जा रहा है, उससे इन तीर्थों में पर्यटकों की सख्यां में भारी मात्रा में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल, 27 लाख बेटियों का भविष्य हुआ सशक्त

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल सरकार की इस पहल से 27 लाख बेटियों का भविष्य हो रहा सशक्त  आर्थिक सहायता से बदली सामाजिक सोच, लाखों परिवारों का सरकार पर बढ़ा भरोसा लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि समाज की ताकत हैं। इस योजना के द्वारा लगभग 27 लाख बेटियों का भविष्य सशक्त हो रहा है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में लैंगिक समानता स्थापित करना, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। लाखों बालिकाओं तक पहुंची योजना मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 27 लाख पात्र बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। इस पर राज्य सरकार द्वारा कुल 647.21 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक सहायता पहुंचना सरकार की प्रशासनिक प्रतिबद्धता और पारदर्शी व्यवस्था को दर्शाता है।  बालिकाओं का कल्याण सरकार की प्राथमिकता सरकार ने योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया है। इस वर्ष 3.28 लाख लाभार्थियों को 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि योजना के अंतर्गत दी गई है। यह दर्शाता है कि योगी सरकार बालिकाओं के कल्याण को दीर्घकालिक नीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आज प्रदेश में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और शैक्षिक सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी है और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लैंगिक समानता की दिशा में सरकार का ठोस कदम वर्ष 2019 में शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत ऐसे परिवारों की बालिकाओं को लाभ दिया जा रहा है, जिनके परिवार उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। पात्रता की शर्तों के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 3.00 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और परिवार में अधिकतम 2 बच्चे होने चाहिए। योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी भी बालिका की शिक्षा या विकास बाधित न हो और परिवारों को बेटियों के पालन पोषण में सहयोग मिल सके। सहायता राशि में बढ़ोतरी से मजबूत हुआ भरोसा वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार ने योजना के अंतर्गत दी जाने वाली कुल सहायता राशि को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया। यह सहायता 6 चरणों में प्रदान की जाती है। जन्म के समय 5,000 रुपये, 2 वर्ष की आयु पर टीकाकरण पूर्ण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा 1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा कक्षा 10 या 12 की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्लोमा या स्नातक अथवा उससे अधिक अवधि के डिग्री कोर्स में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता दी जाती है। यह व्यवस्था बालिकाओं को हर शैक्षिक पड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।