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उद्योग जगत बोला, सीएम योगी के नेतृत्व में बदला प्रदेश का सिस्टम, निवेश के लिए बना भरोसेमंद मॉडल

मुख्यमंत्री योगी से मिले सीआईआई के प्रतिनिधि, राज्य में व्यापार और निवेश का बन रहा बेहतर माहौल उद्योग जगत बोला, सीएम योगी के नेतृत्व में बदला प्रदेश का सिस्टम, निवेश के लिए बना भरोसेमंद मॉडल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के कारण देशभर के उद्योगपतियों का रुख उत्तर प्रदेश की ओर बेहतर कानून व्यवस्था से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद उद्योग स्थापना को लेकर सीएम योगी के साथ उद्योगपतियों ने किया महत्वपूर्ण विचार-विमर्श उद्योगपतियों को इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में हरसंभव मदद करेगी योगी सरकार यूपी में जमीन पर काम करना अब पहले से काफी आसान, प्रोजेक्ट लगाने को लेकर देश की इंडस्ट्री उत्साहित लखनऊ  बेहतर कानून व्यवस्था और स्थिर प्रशासनिक माहौल के चलते उत्तर प्रदेश अब देशभर के उद्योग जगत की पहली पसंद बनता जा रहा है। सुरक्षा, अनुशासन और निष्पक्ष शासन ने निवेशकों का भरोसा प्रदेश में मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप बड़े, मध्यम और छोटे तीनों सेगमेंट के उद्योग तेजी से उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष श्री राजीव मेमानी, नई दिल्ली,  श्री उमाशंकर भरतिया, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, इण्डिया ग्लाइको लि०, दिल्ली / नोएडा व श्री सुनील मिश्रा ने मुलाकात कर निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश का सिस्टम और गवर्नेंस मॉडल पूरी तरह बदला है। अब जमीन पर काम करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुआ है और परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के विजन में उद्यमी सहयोग करना चाह रहे हैं। सीएम योगी के साथ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए भी विचार विमर्श किया गया। उत्तर प्रदेश में डिक्रिमिनलाइजेशन विधेयक लागू होने के बाद इंडस्ट्री का भरोसा और बढ़ा है। इसके साथ ही प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के कारण ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब से औद्योगिक इकोसिस्टम को मिली मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर प्रतिनिधिमंड ने स्पष्ट रूप से कहा कि सख्त कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश का औद्योगिक वातावरण पूरी तरह बदल दिया है। निवेश निर्णयों के लिए आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स हब तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विकास ने राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम को नई मजबूती प्रदान की है। सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल प्रक्रियाओं से उद्योग स्थापना हुई आसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुए विचार-विमर्श में यह भी सामने आया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अब केवल नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो रहा है। प्रदेश सरकार की सिंगल-विंडो सिस्टम सेवा निवेश मित्र जहां वर्तमान में 43 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं उपलब्ध है, जहा भौतिक हस्तक्षेप के बिना समयबद्ध डिजिटल स्वीकृतियों के चलते प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। राज्य सरकार की प्रो-इंडस्ट्री नीति और त्वरित निर्णय क्षमता निवेश को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में उच्चीकृत निवेश मित्र 3.0 को जल्द लांच किया जायेगा जिसमें एआई व चैटबाट जैसी सुविधाओं से निवेशकों की निवेश यात्रा और आसान होगी ।    यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर उद्यमी उत्साहित प्रतिनिधियों ने कहा कि समग्र रूप से बेहतर कानून व्यवस्था, सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रशासन और उद्योगों को मिल रहे सहयोग के चलते उत्तर प्रदेश एक विश्वसनीय और स्थिर निवेश राज्य के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपति आने वाले समय में यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि तय मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री की अपील: आत्मनिर्भर ग्राम पंचायतों से यूपी का विकास, उत्सव भवन का इस्तेमाल हो केवल मांगलिक कार्यों के लिए

आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत से ही यूपी बनेगा आत्मनिर्भर, उत्सव भवन का उपयोग बिना भेदभाव के प्राथमिकता पर मांगलिक कार्यक्रमों के लिए हो: मुख्यमंत्री   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने की पंचायती राज विभाग की समीक्षा उत्तर प्रदेश पूरे देश में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में पहले स्थान पर, वर्तमान वित्तीय वर्ष में 4.79 लाख शौचालय का हुआ निर्माण वर्तमान वित्तीय वर्ष में देश में निर्मित कुल 17.26 लाख शौचालयों में से 28 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश में हुए हैं निर्मित  मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश: उत्सव भवन के निर्माण कार्यों में सीएसआर, विधायक निधि, मातृ भूमि के अंतर्गत भी लें सहयोग ग्रामीण क्षेत्र में सीवर व ग्रे वाटर का किया जाए वैज्ञानिक विधि से निस्तारण ग्राम पंचायतों में आय के स्त्रोत बढ़ाकर बनाया जाए आत्मनिर्भर, ग्राम पंचायतों की भूमि से हटाए जाएं अतिक्रमण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार शाम को पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को उत्सव भवन के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर  तभी बन सकता है जब हमारी ग्राम पंचायतें भी आत्मनिर्भर बनें। अतः ग्राम पंचायतों की आय को बढ़ाने के लिये कार्ययोजना बनाकर कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री जी ने ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश बैठक में मुख्यमंत्री जी को अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का 9.67 लाख निर्माण का लक्ष्य दिया गया था, इसके सापेक्ष अब तक 4.79 लाख शौचालय निर्मित हो चुके हैं। इसी के साथ उत्तर प्रदेश पूरे देश में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में पहले स्थान पर है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में देश में निर्मित कुल 17.26 लाख शौचालयों में से 28 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश में निर्मित हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि 282 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था जिसके सापेक्ष 103 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन इकाइयों से 304 विकास खंड और नगरीय एमआरएफ से 515 विकास खंड आच्छादित हैं। वहीं, 132 इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने सभी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। राजस्व वसूली को लेकर अधिकारियों के कार्य को सराहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष जिला पंचायतों द्वारा राजस्व वसूली का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिला पंचायतों द्वारा 334.10 करोड़ की राजस्व वसूली प्राप्त हुई थी जो लक्ष्य के सापेक्ष 81.23 प्रतिशत थी। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष में नवंबर माह तक 271.48 करोड़ के राजस्व की वसूली हुई है जो लक्ष्य के सापेक्ष 140.89 प्रतिशत है।  मुख्यमंत्री जी ने विभागीय अधिकारियों की इस उपलब्धि के लिये सराहना की। साथ ही राजस्व वसूली के कार्यों में तेजी लाने का भी उन्होंने निर्देश दिया। उत्सव स्थलों के हो जनसमुदाय के लिए उपयोग  मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि उत्सव भवन का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर मांगलिक कार्यक्रम के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि अन्य दिनों में उत्सव भवन का उपयोग योग/वेलनेस के लिए किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि सहालग के दौरान कई मांगलिक कार्यक्रम होने पर समय तय कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को उत्सव भवन का लाभ दें। ब्लॉक स्तर पर भी योजना का विस्तार किया जाए।  मातृभूमि योजना से ज्यादा से ज्यादा उत्तर प्रदेश के प्रवासियों को जोड़ें  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने मातृभूमि योजना से उत्तर प्रदेश के प्रवासियों को जोड़ने के निर्देश दिये। उन्हाेंने कहा कि योजना के तहत अपना सहयोग देने वाले प्रवासियों के पूर्वजों के नाम पर परियोजना का नाम रखा जाए। साथ ही उन्हे प्रदेश स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किए जाए ताकि अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लें।  सीवर एवं ग्रे वाटर के ट्रीटमेंट के निस्तारण की समुचित व्यवस्था हो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि ग्राम पंचायतों में देश में विकसित व सफल पद्धति के माध्यम से सीवर और ड्रेनेज के पानी को शुद्ध किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल खेती के साथ बागवानी के लिए किया जाए। प्रदेश में 160 एफएसटीपी के निर्माण का कार्य अति शीघ्र प्रारंभ किए जाए।उन्हाेंने अधिकारियों से इस ओर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय सीमा में पूर्ण किए जाए मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि प्रदेश में 11,350 डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय सीमा में पूरे किये जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि डिजिटल लाइब्रेरी में उपयोग होने वाले कंप्यूटर, फर्नीचर की क्वालिटी उत्कृष्ट हो तथा पुस्तकें स्थानीय छात्र छात्राओं की आवश्यकता के अनुरूप हों, इसका विशेष ध्यान दिया जाए। हर ग्राम पंचायत में बनाया जाए एक इंटीग्रेटेड कैंपस, जहां मिले मूलभूत सुविधाएं  मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि हर ग्राम पंचायत में यथासंभव इंटीग्रेटेड कैंपस बनाया जाए, जहां विद्यालय, उत्सव भवन, खेल के मैदान, ओपन जिम, पार्क, मॉडल शॉप आदि की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटीग्रेटेड कैंपस के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए। इनका निर्माण ऐसे स्थान पर हो, जहां पर हर किसी की पहुंच आसान हो।  पंचायती राज एक-एक कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए तैयार करें मजबूत सिस्टम मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में खुली चौपाल व्यवस्था की जाए। इसमें सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में लोगों को बताया जाए। साथ ही लाभार्थियों का सत्यापन व नए लाभार्थियों का चयन किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में ग्राम सचिवालय और अन्य स्थानों पर 15 से 16 लोगों को सरकार द्वारा रोजगार दिया गया है। सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए सभी को माध्यम बनाया जाए। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि पंचायती राज विभाग के सभी अधिकारियों की वर्ष में एक बार लखनऊ में भौतिक रूप से विकास कार्यों की समीक्षा की जाए। इसके अलावा हर माह वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा कि जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पंचायती राज विभाग एक-एक कार्यों की मॉनिटरिंग का एक मजबूत सिस्टम बनाएं ताकि समय से योजनाएं पूरी हो सकें।

दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति

जीरो पावर्टी की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का मॉडल ले रहा आकार दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति हर पात्र परिवार को योजनाओं से जोड़कर गरीबी के दुष्चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने की तैयारी संख्या से अधिक पात्रता, पारदर्शिता और परिणाम पर ध्यान केंद्रित कर रही योगी सरकार लखनऊ के रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू को मिल रही है मूलभूत सुविधाएं लखनऊ  उत्तर प्रदेश में गरीबी उन्मूलन अब महज नीतिगत घोषणा नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘जीरो पावर्टी' मिशन ने प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीक और जमीनी सत्यापन को जोड़ते हुए एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया है। इस अभियान का उद्देश्य स्पष्ट है, हर पात्र परिवार को योजनाओं से जोड़ा जाए। दो चरणों में किए गए इस व्यापक अभ्यास से यह साफ हो गया है कि योगी सरकार संख्या से अधिक पात्रता, पारदर्शिता और परिणाम पर ध्यान केंद्रित कर रही है। लखनऊ के गोसाईगंज में रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू इसी का जीता जगता उदाहरण हैं, जिन्हें योजना के तहत मकान, पानी, सड़क, बिजली, राशन समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से लैस किया गया है।   समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम प्रदेश सरकार द्वारा जीरो पावर्टी अभियान के तहत लखनऊ के गोसाईगंज में रहने वाले रामसागर, उर्मिला और रामू को मकान, पानी, सड़क, बिजली, राशन समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनकी तरह, प्रदेश भर में वंचितों को चिन्हित कर सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। ये सभी लाभार्थी योगी सरकार की तारीफ करते नहीं थक रहे। इनका कहना है कि योगी सरकार का जीरो पावर्टी मिशन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा, जल, ऊर्जा और आजीविका से जुड़े समग्र समाधान का नाम है। यह अभियान उत्तर प्रदेश को समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। पहला चरण: 8 मूलभूत योजनाओं में डीबीटी पर फोकस जीरो पावर्टी अभियान के प्रथम चरण में 8 प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत पात्र परिवारों को शत-प्रतिशत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया। जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार राशन योजना में 97 प्रतिशत पात्र परिवारों तक लाभ पहुंच चुका है, जो खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। निराश्रित महिला पेंशन योजना में 87 प्रतिशत और दिव्यांग पेंशन में 62 प्रतिशत लाभार्थियों को आच्छादित किया गया है। वहीं पीएम/सीएम जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 63 प्रतिशत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है।वृद्धावस्था पेंशन, बीओसीडब्ल्यू श्रम कार्ड, किसान सम्मान निधि और पीएम/सीएम आवास योजना में पात्रता मानकों की जांच, डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान और डेटा शुद्धिकरण का काम तेजी से जारी है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि सभी वास्तविक जरूरतमंद हर हाल में योजनाओं से जुड़ें। दूसरा चरण: वंचित परिवारों का घर-घर सत्यापन 15 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए दूसरे चरण में 16 योजनाओं के अंतर्गत वंचित परिवारों का स्थलीय सत्यापन किया जा रहा है, जिसे 15 जनवरी तक पूरा किया जाना है। इस दौरान  पीएम उज्ज्वला योजना, शौचालय सहायता योजना, जल जीवन मिशन के अलावा विद्युत कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए पात्र लाभार्थियों के सत्यापन का कार्य पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।  महिला और शिक्षा सशक्तिकरण पर विशेष जोर सर्वे में सामने आए तथ्यों के आधार पर महिलाओं को बड़े पैमाने पर आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की तैयारी है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में करीब 11 हजार बच्चों को पुनः नामांकन के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: फीडबैक से नीति निर्माण योगी सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को योजनाओं की समीक्षा का मजबूत आधार बनाया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों और सुझावों के विश्लेषण से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नीतियां जमीनी जरूरतों के अनुरूप हों और किसी भी पात्र परिवार को वंचित न रहना पड़े।

राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री जी ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

राजस्व के सभी मामलों का मेरिट के आधार पर हो निस्तारणः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री जी ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश प्रदेश के सभी जनपदों में रोवर आधारित पैमाइश की जल्द लागू हो व्यवस्था नामांतरण के वादों का ऑटो मोड पर हो निस्तारण, चकबंदी प्रक्रिया को बनाएं पारदर्शी, हो नियमित मॉनिटरिंग प्रदेश में शीतलहर को देखते हुए अलाव, रैनबसेरों तथा कंबल वितरण की प्रक्रिया को तेज करने के दिये निर्देश मुख्यमंत्री जी ने युद्ध स्तर पर और मिशन मोड में कार्यों को पूर्ण करने के दिये निर्देश लखनऊ राजस्व विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उ्न्होंने कहा कि राज्य में राजस्व के सभी मामले, चाहे वह पैमाईश से संबंधित हो, नामांतरण से संबंधित हो या फिर आबादी दर्ज करने से संबंधित हो, सभी का निपटारा मेरिट के आधार पर तय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सभी लंबित मामलों में जवाबदेही तय करते हुए इनका निर्धारित समायवधि में निस्तारण सुनिश्चित करे। साथ ही, प्रदेश के सभी जनपदों में रोवर आधारित पैमाइश प्रणाली को लागू करने के लिए निर्देश दिए।  ऑटोमोड पर कार्य करे नामांतरण प्रक्रिया मुख्यमंत्री जी ने नामांतरण व वरासत के मामलों को लेकर निर्देश दिये कि ऐसी प्रणाली विकसित की जाए जिससे यह कार्य ऑटो मोड पर हो सके। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह नागरिकों को सुगम और समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। इससे अतिरिक्त, चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, नक्शा और रोवर आधारित पैमाइश प्रणाली को लागू करने के प्रयासों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उनके अनुसार, प्रदेश के सभी जिलों में रोवर से पैमाइश के लिए रोवर की खरीद ही नहीं बल्कि ट्रेनिंग कराने तथा प्रक्रिया को धरातल पर उतारने के लिए फ्रेमवर्क को तैयार किया जाए। जनपदों में रोवर आधारित पैमाइश को पूर्ण करने के लिए ट्रेनिंग हेतु इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेनिक एवं आईटीआई का सहयोग भी लिया जा सकता है। कार्यों की प्रगति में लाएं तेजी, उन्हें शत प्रतिशत समय से पूरा करने पर करें फोकस मुख्यमंत्री जी ने समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग को निर्देश दिये कि सभी कार्यों की प्रगति में तेजी लाते हुए उन्हें शत प्रतिशत पूर्ण करने पर फोकस करें। मुख्यमंत्री जी ने निर्देशित किया कि भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में  तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूर्ण किया जाए। विभागीय निगरानी सरल हो और इसका लाभ आमजन को मिले। धारा 80 के अन्तर्गत भू-उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं के निस्तारण के लिए राजस्व परिषद के स्तर पर कॉल सेंटर जैसी प्रणाली की जाए विकसित। तकनीकी रूप से पारदर्शी व्यवस्था हो सुनिश्चित      मुख्यमन्त्री जी ने चकबंदी प्रक्रिया में तकनीकी के प्रयोग और यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान रजिस्ट्री, पैमाइश और खसरा पड़ताल से जुड़े सभी लम्बित प्रकरणों का समाधान तय समय सीमा में अनिवार्य रूप से किया जाय। उन्होंने आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र तथा निवास प्रमाण पत्र  जैसी शासकीय सेवाओं सेवा को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाए जाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, प्रदेश में शीतलहर को देखते हुए रैन बसेरों में व्यवस्थाओं का सुचारू प्रबंधन, सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था तथा कंबल वितरण को लेकर राजस्व विभाग को कार्यप्रणाली में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कार्यों को मिशन मोड में युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।  मुख्यमंत्री जी ने ग्राम पंचायतों में लगी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों/स्मारकों को सुरक्षित करने के लिए समाज कल्याण विभाग के सहयोग से बाउंड्री वॉल के निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री जी ने लेखपालों को पंचायत भवनों में अपना कार्यालय बनाकर जनसमस्याओं के निस्तारण करने के निर्देश दिये।  मुख्यमंत्री जी ने जनपद स्तर पर एकीकृत बहुमंजली कार्यालय का निर्माण हो, जहां जिलाधिकारी के साथ साथ समस्त जनपदीय कार्यालय उसमें समाहित हों।

गंगा की रेती पर बस गया तंबुओं का अस्थायी शहर, पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघमेला

संगम में प्रवाहित हो रही संयम, साधना और भक्ति की त्रिवेणी गंगा की रेती पर बस गया तंबुओं का अस्थायी शहर, पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघमेला 4 लाख से अधिक कल्पवासियों के जप-तप और संकल्प की साक्षी बनेगी संगम नगरी प्रयागराज प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला क्षेत्र में तप, साधना और संयम की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगेगी । भक्ति साधना  और संयम की यह त्रिधारा है कल्पवास जिसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शनिवार को होगी। इस बार कल्पवासियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की वजह से  योगी सरकार ने कल्पवासियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। माघमेला 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। 4 लाख से अधिक कल्पवासियों की भक्ति और साधना से प्रकाशमान होंगे गंगा के तट प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होने वाला माघ मेला धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का देश का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही ज्ञान , भक्ति और साधना की विविध धाराएं यहां प्रवाहित होने लगेंगीं। माघ मेला क्षेत्र में एक तरफ दंड धारण करने वाले दंडी संतों और  रामानंदी आचार्य संतो और मुकाम धारी खालसा के संतों की दुनिया होगी तो वहीं होगा चतुष्पीठ  के शंकराचार्यों का वैभव। अध्यात्म के इस सागर में यहां कल्पवासियों के जप, तप और संयम की त्रिवेणी अभी से प्रवाहित होने लगी है। पौष पूर्णिमा से पूरे एक महीने तक गंगा और यमुना की रेत पर तंबुओं के शिविर बनाकर ठिठुरती ठंड में साधना करने वाले इन कल्पवासियों की संख्या में इस साल अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 4 लाख कल्पवासी माघ मेले में कल्पवास करेंगे। पहली बार कल्पवासियों के लिए बनाया गया प्रयाग वाल नगर कल्पवासियों को माघ मेले का प्रथम साधक माना जाता है जिनके बिना माघ मेले के आयोजन की कल्पना भी नहीं संभव है। माघ मेला क्षेत्र में इन्हें बसाना मेला प्रशासन की प्राथमिकता होती है। एडीएम माघ मेला दयानन्द प्रसाद बताते हैं कि इस बार महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन की स्मृति और 12 साल बाद कल्पवास के संकल्प लेने की परम्परा के चलते कल्पवासियों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के लिए एक अलग से भी 950 बीघे में एक नगर बसाया गया है जिसे प्रयागवाल नाम दिया गया है। नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के साथ आपसी विचार विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। वैसे तीर्थ पुरोहितों की मांग और सहूलियत को देखते हुए विभिन्न सेक्टरों में भी कल्पवासियों के लिए तंबू लगाए गए हैं। कल्पवासी की उम्र और अवस्था को देखते हुए इन्हें बसाया जा रहा है।  मेला क्षेत्र में मूल रूप से कल्पवास करने वाले इन श्रद्धालुओं को गंगा के तटों के पास ही तंबुओं की व्यवस्था की गई थी ताकि सुबह प्रतिदिन इन्हें गंगा स्नान के लिए दूर तक न चलना पड़े। कल्पवासियों के शिविर में स्वच्छता पर प्राथमिकता योगी सरकार माघ मेला क्षेत्र  को दिव्य ,भव्य और स्वच्छ  स्वरूप दे रही है। इसके लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक विभिन्न सेक्टर में बस रहे कल्पवासियों के शिविर में भी स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है। कल्पवासियों से भी अपील की जाएगी कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल शिविर में न करें।  बुजुर्ग कल्पवासियों के लिए शीत लहरी से बचाव हो इसके लिए भी प्रशासन कई कदम उठा रहा है।  प्रशासन ने कल्पवासियों के शिविर के बाहर अलाव जलाने की व्यवस्था की थी ताकि शीत लहरी से कल्पवासियों का बचाव हो सके। माघ मेला 2026 के मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा : 3 जनवरी मकर संक्रांति :14 जनवरी मौनी अमावस्या : 18 जनवरी बसंत पंचमी : 23 जनवरी माघी पूर्णिमा : 01 फरवरी महाशिवरात्रि : 15 फरवरी

वर्ष 2024 के 17,58,930 की तुलना में वर्ष 2025 में ट्रैफिक रूल उल्लंघन के हुए 13,78,919 मामले दर्ज

योगी सरकार का ट्रैफिक अवेयरनेस मंत्र हिट, पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4 लाख कम हुए चालान वर्ष 2024 के 17,58,930 की तुलना में वर्ष 2025 में ट्रैफिक रूल उल्लंघन के हुए 13,78,919 मामले दर्ज  सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल निगरानी के माध्यम से वर्ष 2026 में चलाया जाएगा सघन चेकिंग और जागरूकता अभियान राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 01 जनवरी से शुरू, चल रहा है प्रदेशव्यापी सघन चेकिंग अभियान  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में परिवहन विभाग ने वर्ष भर सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता अभियान चलाये, उसी का परिणाम है कि पिछले साल की तुलना में वर्ष 2025 में लगभग चार लाख चालान कम दर्ज किए गये हैं। जो लोगों में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक रूल के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में सम्पन्न हुई समीक्षा बैठक में बताया कि विभाग ने वर्ष 2024 के 17,58,930 चालानों के मुकाबले वर्ष 2025 में 13,78,919 चालान दर्ज किये हैं। जिसके आधार पर लगभग 454.49 करोड़ रुपये वसूले किये गये हैं। इसी क्रम में परिवहन विभाग वर्ष 2026 में डिजीटल निगरानी और जागरूकता अभियान चलाएगा, जिसकी शुरूआत जनवरी माह में चलाए जा रहे राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के साथ हो रही है।   हेल्मेट न पहनने वालों के हुए सबसे ज्याद चालान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक यूपी परिवहन विभाग ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाये और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया। परिणाम स्वरूप ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के अपेक्षाकृत कम मामले दर्ज किए गये हैं। इसके बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए विभाग के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में बताया कि वर्ष 2025 में सबसे ज्याद चालान 6,32,901 हेलमेट न पहनने के मामले में दर्ज हुए। इसी तरह 14,535 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए और सीटबेल्ट उल्लंघन के मामलों में 1,33,189 चलान हुए हैं। जबकि ओवरस्पीडिंग के पिछले वर्ष के 7,77,897 मामलों की तुलना में इस वर्ष 3,30,171 मामलों में चालान के साथ उल्लेखनीय कमी भी दर्ज की गई है। वहीं ड्रिंक एंड ड्राइव के 3,611 मामले और रॉन्ग साइड चलाने वालों से 56,079 चालान वसूले गये हैं।  व्यवसायिक वाहनों में ओवरलोडिंग के 54,923 मामले हुए दर्ज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि व्यवसायिक वाहनों की प्रवर्तन कार्यवाही के मामालों में ओवरलोडिंग के 54,923 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि गलत नंबर प्लेट के 11,892 और माल वाहन से यात्री ढोने के 1,226 चालान वसूले गये। वहीं कमर्शियल वाहनों में स्पीड लिमिट डिवाइस न लगाने के 20,431 मामले दर्ज किए गये। विभाग की ओर से चलाए गये विशेष चेकिंग अभियानो  के जरिये अप्रैल माह में अपंजीकृत ई-रिक्शा के खिलाफ 36,773 और अंतर्जनपदीय ओवरलोड मालवाहकों पर 1,786 मामले दर्ज किये गये। मई माह में अनधिकृत यात्री वाहनों पर 2,218 और जून माह में निजी वाहनों के वाणिज्यिक उपयोग पर 1,821 चालान दर्ज किये गये। सितंबर में अन्य राज्यों के उल्लंघनकारी वाहनों पर 6,832 और अक्टूबर में बिना नंबर प्लेट के डम्पर-ट्रक पर 5,073 चालान दर्ज हुए हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में प्रदेशव्यापी सघन चेकिंग अभियान   परिवहन विभाग के अधिकारी ने बैठक में बताया कि वर्ष 2026 में विभाग प्रदेश में सड़क दुर्घटना में कमी लाने और ट्रैफिक रूल के पालन को सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी और जागरूकता अभियानों को और तेज करेगा। जिसकी शुरूआत 01 जनवरी से शुरू हो रहे, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के साथ की जा रही है। इसके दौरान परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा और सूचना विभाग के साथ मिलकर प्रदेशव्यापी सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के साथ सघन चेकिंग अभियान भी चलाएगा। मोटरसाइकिल चालकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे माह नो हेल्मेट नो फ्यूल का भी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के चिन्हित ब्लैक स्पॉट और हाई रिस्क जोन में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वहीं सूचना के सहयोग से सड़क सुरक्षा और जागरूकता का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है साथ ही स्कूल-कालेजों में जागरूकता अभियान चलाए जाएगें।

मोबाइल कनेक्टिविटी में उत्तर प्रदेश पूर्व और पश्चिम बने उपभोक्ता गतिविधि के प्रमुख केंद्र

उत्तर प्रदेश बन रहा है देश का उभरता दूरसंचार पावरहाउस  मोबाइल कनेक्टिविटी में उत्तर प्रदेश पूर्व और पश्चिम बने उपभोक्ता गतिविधि के प्रमुख केंद्र नवंबर 2025  में यूपी पूर्व में 1.97 मिलियन और उत्तर प्रदेश पश्चिम में 1.35  मिलियन पोर्टिंग अनुरोध दर्ज योगी सरकार का विकास मॉडल, त्वरित गति से हो रहा है औद्योगिक और वाणिज्यिक विकास  लखनऊ   उत्तर प्रदेश में दूरसंचार क्षेत्र की तेजी से प्रगति हो रही है। प्रदेश में मोबाइल, ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सेवाओं का विस्तार शहरी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में मजबूती से हो रहा है। इस विस्तार का सबसे बड़ा कारण सरकारी नीतिगत समर्थन और निजी निवेश है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र का त्वरित गति से दायरा बढ़ता जा रहा है। इसी का परिणाम है कि देश के अग्रणी दूरसंचार बाजारों में उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से शामिल है। योगी सरकार के विकास मॉडल से प्रदेश के डिजिटल क्षेत्र को नया आयाम मिल रहा है।  भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में देश भर में कुल वायरलेस मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या 1173.88 मिलियन रही। अक्टूबर 2025 में यह संख्या 1171.87 मिलियन था। इसमें उत्तर प्रदेश पूर्व और उत्तर प्रदेश पश्चिम दोनों लाइसेंस्ड सेवा क्षेत्रों की भागीदारी विशेष रही है। उपभोक्ता गतिविधि के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है। नवंबर 2025  तक उत्तर प्रदेश पूर्व में 1.97 मिलियन और उत्तर प्रदेश पश्चिम में 1.35  मिलियन पोर्टिंग अनुरोध दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि प्रदेश में मोबाइल सेवाओं की मांग अधिक है। फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस विशेष कर 5-जी आधारित सेवाओं में उत्तर प्रदेश की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। नवंबर 2025  के अंत तक देश में कुल 5-जी एफडब्ल्यूए उपभोक्ताओं की संख्या 10.41 मिलियन दर्ज की गई है। इसमें उत्तर प्रदेश पूर्व में 0.79 मिलियन और उत्तर प्रदेश पश्चिम में 0.62 मिलियन उपभोक्ता शामिल हैं। केवल एक महीने के भीतर इन दोनों क्षेत्रों में हजारों नए उपभोक्ताओं का जुड़ना यह संकेत देता है कि सरकार की डिजिटल कनेक्टिविटी नीति का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। दूर-दराज के गांवों में भी हाई स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खोल रही है। वायरलाइन सेवाओं के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने स्थिर वृद्धि दर्ज की है। नवंबर 2025  के अंत तक देश में कुल वायरलाइन उपभोक्ताओं की संख्या 47.05 मिलियन रही। उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और शहरी आवासीय क्षेत्रों में वायरलाइन कनेक्शन की मांग बनी हुई है। योगी सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस सेवाओं को व्यापक रूप से लागू किए जाने से विश्वसनीय और सुरक्षित कनेक्टिविटी की आवश्यकता बढ़ी है जिससे वायरलाइन नेटवर्क को मजबूती मिली है। सक्रिय मोबाइल उपभोक्ताओं के मामले में भी प्रदेश की स्थिति सशक्त बनी हुई है। अक्टूबर की तुलना में नवंबर 2025  तक में देश भर में कुल मोबाइल उपभोक्ताओं में से 1090.91 मिलियन उपभोक्ता सक्रिय पाए गए। ऑनलाइन सरकारी सेवाएं, डिजिटल भुगतान, ई-शिक्षा और टेली मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम बनाया है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार, मोबाइल टावरों की संख्या में वृद्धि और 5-जी तकनीक को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से गोदाम से दुकान तक निगरानी की मजबूत चेन

जीपीएस युक्त वाहनों के प्रयोग से यूपी में खाद्यान्न उठान में बढ़ी पारदर्शिता 5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से गोदाम से दुकान तक निगरानी की मजबूत चेन  डोर स्टेप डिलीवरी से खाद्यान्न चोरी पर निर्णायक वार, जन वितरण प्रणाली में खत्म हुई कालाबाजारी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनवितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न को चोरी, लीकेज और गड़बड़ी से मुक्त करने की दिशा में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम एक गेम चेंजर बनकर उभरा है। 5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से अनाज डिपो से उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक खाद्यान्न की आवाजाही अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी में है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था और जीपीएस ट्रैकिंग की वजह से खाद्यान्न की एक-एक बोरी पर नजर रखी जा रही है, जिससे चोरी और कालाबाजारी पर रोक लगी है।  डिजिटल निगरानी से खत्म हुई कालाबाजारी प्रदेश में खाद्यान्न के उठान कार्यों में लगे 5000 से अधिक वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टाल की जा चुकी है। इससे भारतीय खाद्य निगम के डिपो से उचित दर दुकानों तक होने वाला पूरा परिवहन रियल टाइम ट्रैक किया जा रहा है। वाहन कहां से चला, कहां रुका और तय समय में गंतव्य तक पहुंचा या नहीं, हर जानकारी कंट्रोल सिस्टम में दर्ज हो रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि रास्ते में खाद्यान्न की हेराफेरी, डायवर्जन और कालाबाजारी लगभग समाप्त हो गई है। धान और मोटे अनाज की खरीद में भी सख्त निगरानी खरीफ विपणन सत्र 2025-26 में धान खरीद के दौरान भी जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। प्रदेश के सभी जनपदों में क्रय केन्द्रों से राइस मिलों तक धान परिवहन में प्रयुक्त 3773 वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टाल की गई है। इसके अलावा मोटे अनाज मक्का, ज्वार और बाजरा के परिवहन के लिए 1428 वाहनों को भी जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे सरकारी खरीद से लेकर भंडारण डिपो तक की पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी हो गई है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी से सिस्टम हुआ मजबूत प्रदेश में ब्लॉक गोदामों की व्यवस्था समाप्त कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत भारतीय खाद्य निगम के डिपो से सीधे उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। यह पूरा कार्य ई-टेंडर के माध्यम से नियुक्त ठेकेदारों से कराया जा रहा है जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और जवाबदेही तय हुई है। जीपीएस ट्रैकिंग के साथ यह मॉडल जनवितरण प्रणाली में पारदर्शिता की रीढ़ बन गया है। निर्बाध और सुरक्षित वितरण प्रणाली का निर्माण प्रदेश में चयनित लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक कुल 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाजों का आवंटन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अंत्योदय लाभार्थियों हेतु 36850.35 मीट्रिक टन चीनी का आवंटन किया जा चुका है। जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था के कारण यह सुनिश्चित हो रहा है कि यह खाद्यान्न बिना चोरी, बिना कटौती और सही समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे। योगी आदित्यनाथ सरकार का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी खाद्यान्न अब रास्ते में गायब नहीं होगा। तकनीक के सहारे निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और स्मार्ट सिस्टम से खाद्यान्न चोरी जैसे पुराने संकट को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प, प्रीपेड या पोस्टपेड का चयन कर सकेंगे

लखनऊ   नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह साफ कर दिया गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के तहत प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी है। यह अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को मिला हुआ है। तमाम उपभोक्ता इस तरह से जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए आयोग से लगातार मांग की जा रही है कि अनिवार्य तौर पर प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। यह धारा उपभोक्ताओं को अधिकार देती है कि वे अपने लिए प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का विकल्प चुनें। सोमवार को उपभोक्ता परिषद ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर उपभोक्ताओं के हक में आदेश जारी करने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्रीय व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अब नियामक आयोग को स्पष्ट आदेश जारी करने चाहिए ताकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को विकल्प ही माना जाए। टैरिफ आदेश में आयोग ने कहा था कि चूंकि इस संबंध में कई हाई कोर्ट में मामला सुना जा रहा है, इसलिए वह कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं करना चाहता। अब जबकि आयोग के पास सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं तो अब वह इसका हवाला देकर स्पष्ट आदेश जारी करे। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि तत्काल कॉस्ट डेटा बुक भी रिवाइज करे ताकि मीटर के दाम तय हो सकें। उपभोक्ताओं के पास यह अधिकार राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि कानून के अनुसार उपभोक्ता चाहें तो सिक्योरिटी राशि जमा कर पोस्टपेड कनेक्शन जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में इस प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था, लेकिन नई कास्ट डाटा बुक ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।  

उत्तर प्रदेश में सर्दी से हालात बिगड़े, 5 जनवरी तक कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ठंड और कोहरा का सितम जारी है। प्रदेश में शीत लहर चलने से शरीर कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। हालांकि गुरुवार को धूप निकलने से लोगों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन शुक्रवार को फिर से दोपहर के समय भी धूप के दीदार नहीं हुए और बदली छाई रही। इस तरह प्रदेश में भीषण ठंड के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कक्षा 12 तक के स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण शीतलहर को लेकर 12 वीं तक के स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी है। सीएम योगी ने 5 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और आईसीएससी बोर्ड के सभी स्कूलों को 5 जनवरी तक बंद करने के निर्देश दिए है। मैदान में उतरें अफसर, सुनिश्चित करें व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 'कोई भी खुले में न सोए' शीलहर को देखते हुए सीएम योगी ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो। सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो। इसके अलावा अलाव की व्यवस्था की जाए। तीन डिग्री पर ठिठुरा बाराबंकी, मेरठ में सर्द दिन प्रदेश के कई जिलों में धूप निकली लेकिन सर्द हवाओं का सितम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान बाराबंकी का तापमान 3 डिग्री दर्ज किया गया। यह प्रदेश का सबसे सर्द जिला रहा। सीजन में भी सबसे सर्द रहा। वहीं मेरठ में दिन का तापमान सबसे कम रहा। मेरठ में दिन का तापमान 14.9 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। मेरठ सहित वेस्ट यूपी में गुरुवार को दिनभर धूप गायब रही। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार बाराबंकी के अलावा गोरखपुर और हरदोई में भी गलन और ठिठुरन ने अपना असर दिखाया। गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4.7 डिग्री कम है। वहीं, हरदोई में पारा 4.5 डिग्री, अयोध्या में 5.0 डिग्री, सुलतानपुर में 5.2 डिग्री और बरेली में 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर में भी रात का तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। वहीं, पछुआ हवा के चलते दिन में भी धूप बेअसर साबित हो रही है। बस्ती में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री गिरकर 18.0 डिग्री पर आ गया। आगरा, अलीगढ़, इटावा और फतेहगढ़ जैसे शहरों में भी दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे रहा। अभी तक कक्षा 12 तक के स्कूलों में 1 जनवरी तक छुट्टी घोषित थी। लेकिन अब इसे 5 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। भीषण ठंड के प्रकोप के चलते स्कूलों में छुट्टी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। वहीं कक्षा 8 तक के स्कूल 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। इसके अलावा बढ़ती ठंड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को भी जरूरी दिशा निर्देश दे दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि शीत लहर को लेकर सभी अधिकारी क्षेत्र में भ्रमण शील रहें। साथ ही सीएम योगी ने सभी जिलों में कंबल और अलाव की व्यवस्था करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए। साथ ही कहा कि अधिकारी सभी रैन बसेरों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करे। बता दें, प्रदेश में दिन पर दिन ठंड बढ़ती जा रही है। कड़ाके की ठंड के साथ ही कोहरे का सितम भी जारी है।