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सावधान यूपीवाले: सात दिन तक रहेगा घना कोहरा, उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप तेज

नई दिल्ली पूरा उत्तर भारत इन दिनों ठंड और घने कोहरे के चपेट में है। यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब समेत तमाम राज्यों में सुबह और शाम को विजिबिलिटी बहुत कम रह गई है, जबकि सर्दी भी कड़ाके की पड़ रही। इस बीच, मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के लिए अगले सात दिनों तक बहुत घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा, पूरे उत्तर भारत में अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान चार डिग्री तक कम हो जाएगा, जिसकी वजह से ठंड और बढ़ जाएगी। इसके अलावा, कई अन्य राज्यों में भी ऐसी ही स्थिति रहने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच से सात दिनों तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा में रात और सुबह के घंटों में बहुत घना कोहरा छाने वाला है। अगले पांच दिनों के दौरान, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत में भी ऐसा ही मौसम रहेगा। दो जनवरी को हिमाचल प्रदेश, चार और पांच जनवरी को बिहार में कुछ जगह पर कोल्ड डे की चेतावनी जारी की गई है। तीन और चार जनवरी को हिमाचल प्रदेश में, तीन से छह जनवरी के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, चार से छह जनवरी के दौरान पंजाब में, आठ और नौ जनवरी को राजस्थान में कुछ जगहों पर शीतलहर चलने वाली है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो जम्मू कश्मीर, लद्दाख में कुछ जगहों पर न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री से नीचे था, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 0-5 डिग्री, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर पांच से 10 डिग्री सेल्सियस, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, सौराष्ट्र और कच्छ, ओडिशा, महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर, हरियाणा और पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर 10-15 डिग्री सेल्सियस था। अगले तीन दिनों के दौरान उत्तर भारत में न्यूनतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो जाएगी यानी कि ठंड और बढ़ेगी। इसके अलावा, मध्य भारत में भी अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने वाली है। अगले दो दिनों के दौरान पूर्वी भारत में मिनिमम टेम्प्रेचर में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। अगले तीन दिनों के दौरान महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में सात तारीख तक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पांच तारीख तक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में पांच तारीख, 8 और 9 जनवरी को, ओडिश में 6 जनवरी तक घने से बहुत घना कोहरा छाया रहने वाला है। इसके अलावा, जम्मू डिविजन, उत्तरी मध्य प्रदेश में छह तारीख तक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में सात तारीख तक, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में आठ और नौ तारीख को, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6-9 तारीख के दौरान, पूर्वी उत्तर प्रदेश में छह और सात जनवरीक को घना कोहरा छाया रहने वाला है। वहीं, दो और तीन जनवरी को उत्तराखंड के कुछ इलाकों में और दो जनवरी को मेघालय में पाला पड़ने का अलर्ट जारी किया गया है।  

प्यार की खातिर सरहद पार: बादल बाबू ने पाकिस्तान जाकर अपनाया इस्लाम, वतन वापसी से मना

अलीगढ़ मेटा (फेसबुक) पर दोस्ती के बाद युवती के प्यार में सीमा पार करके पाकिस्तान पहुंचे अलीगढ़ के बरला के बादल बाबू ने सजा तो पूरी कर ली है, लेकिन जुर्माना न भर पाने के चलते अभी उसे कुछ दिन और जेल में रहना पड़ेगा। उसके केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता फियाज रामे ने नए साल पर वीडियो डालकर इसका खुलासा किया है।   उन्होंने कहा है कि लाहौर जेल में बंद बादल से उनकी मुलाकात हुई है। बादल ने बताया है कि उसने पूरी तरह से इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है। वह अब पाकिस्तान में ही रहना चाहता है। उसने भारत लौटने से मना कर दिया है। हालांकि नियमों के तहत वह पाकिस्तान में नहीं रह सकता है। इसलिए उसे डिपोर्ट ही किया जाएगा। बरला के गांव खिटकारी के रहने वाले बादल बाबू को 27 दिसंबर 2024 को पाकिस्तान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वीजा या दस्तावेज मांगे तो वह नहीं दे सका था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया था। 30 अप्रैल को बादल को एक साल कैद की सजा सुनाई गई। बादल के पिता कृपाल सिंह ने दिल्ली के एक मित्र के माध्यम से पाकिस्तान के कराची के अधिवक्ता फियाज रामे से संपर्क किया था, जो बादल के केस की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले वीडियो डालकर बताया था कि बादल ने सजा पूरी कर ली है। उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। एक सप्ताह में उसे भारत वापस भेज दिया जाएगा। वहीं, एक जनवरी 2026 को उन्होंने एक वीडियो डाला। इसमें कहा है कि वह वह जिला जेल, लाहौर में मौजूद हैं। बादल की सजा पूरी हो चुकी है। उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया को साझा कर रहे हैं। आज उनकी बादल से मुलाकात हुई है। इसे लेकर विस्तृत वीडियो डालने की बात कही। इसके बाद कृपाल सिंह ने अधिवक्ता से संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन, बात नहीं हो सकीं। हालांकि देररात अधिवक्ता ने एक और वीडियो डाली। इसमें बताया कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से अनुमति के बाद उन्होंने लाहौर जेल में बादल से मुलाकात की है। बादल ने सजा पूरी कर ली है। लेकिन, वह जुर्माना नहीं भर पाया है। इसलिए उसे कुछ दिन और अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। सना रानी के मिलने के सवाल उसने बताया कि जेल में सना उससे मिलने के लिए नहीं आई। इसे लेकर और कुछ बातें हैं, जिसके बारे में अधिवक्ता ने जल्द ही जानकारी साझा करने को कहा है। बादल को लेकर परिवार की चिंता बढ़ी इस खुलासे के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है। कृपाल सिंह ने बताया कि वकील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बादल बाबू से बात कराने की बात कही थी। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका है। पिता ने कहा कि कुछ समझ नहीं आ रहा है। मेरे पास तो इतने रुपये भी नहीं है कि जुर्माना भर पाऊं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करके बादल की सुरक्षित वतन वापसी कराएं। जेल में बादल ने पढ़ी नमाज, अलग बैरक में रह रहा अधिवक्ता ने बताया कि बादल ने जेल में रोजाना नमाज पढ़ी है। इसके अलावा उसने बताया कि जेल में उसकी हर जरूरतों का ख्याल रखा गया। वह अलग बैरक में रह रहा है। किसी तरीके की कोई परेशानी नहीं है। वह पाकिस्तान में ही रहना चाहता है। उसे किसी किस्म का नुकसान न पहुंचाया जाए। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि सरकार का फैसला होता है कि अगर कोई कैदी सजा पूरी कर ले तो वापस डिपोर्ट ही किया जाता है। इसे लेकर भारतीय एंबेसी से संपर्क किया जाएगा। पाक सरकार को एप्लीकेशन दी जाएगी, जिस पर सरकार की ओर से फैसला लिया जाएगा। हालांकि बादल कब तक वापस आएगा, इसका खुलासा अभी नहीं कर सकते। जल्द ही इसे लेकर जानकारी दी जाएगी।  

मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा की

मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग की समीक्षा की, सभी विभागों को बजट खर्च में तेजी लाने के दिये निर्देश   मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा की   मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का करें इस्तेमाल, न हो कोई लापरवाही  – बोले, समय से बजट व्यय के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो – मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की नई कार्ययोजना पर अभी से शुरू कर दें तैयारियां लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार सुबह वित्तीय वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा विभिन्न विभागों काे जारी बजट के व्यय काे लेकर वित्त विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभागाें के बजट प्राविधान के सापेक्ष शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों, विभागाध्यक्ष द्वारा आवंटन, व्यय आदि की अद्धयावधिक प्रगति पर अधिक बजट प्राविधान वाले प्रमुख 20 विभागों का प्रस्तुतिकरण किया गया।  जिन विभागों में बजट व्यय में प्रगति धीमी, वे लाएं तेजी, हर अधिकारी की तय हो जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रमुख 20 विभागों के प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री जी ने सभी प्रमुख विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का इस्तेमाल करें ताकि परियोजनाएं और योजनाएं समय से पूरी हो सकें और प्रदेशवासी इन योजनाअों लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बजट को समय से खर्च करने के लिए अधिकारी निर्णय लेने का सामथ्र्य विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, वह इसमें तेजी लाएं। साथ ही बजट को समय से खर्च करने के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सभी विभाग के अधिकारी तुंरत निर्णय लें। उन्हाेंने कहा कि निर्णय लेने में देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पाता है। ऐसे में निर्णय लेने में तेजी दिखाएं।  विभाग मंत्री, एसीएस और प्रमुख सचिव केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए दिल्ली जाएं और पैरवी करें मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कुछ विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है। इसमें तेजी लाने के लिए विभागीय मंत्री और अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर हर माह बैठक करें। वहीं मुख्यमंत्री जी ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि जिन विभागों के आवंटन बजट के कुछ अंश को अभी तक किंहीं कारणों से जारी नहीं किया गया है, उन विभागों को तत्काल बजट आवंटित करें। उन्होंने सभी प्रमुख 20 विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी किया जाता है। इसके लिए विभाग के मंत्री, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए पैरवी करें। इसके साथ ही केंद्र सरकार को पत्र लिखें और फोन से फालोअप करें। इसको लेकर मुख्य सचिव भी इनोसेटिव लें। मुख्यमंत्री जी ने अपने कार्यालय को निर्देश दिये कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, उनको चिन्हित करें और उनके विभाग के मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की आेर से पत्र जारी करें।  अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की नई कार्ययोजना पर अभी से शुरू कर दें तैयारियां मुख्यमंत्री जी ने बैठक में वित्त विभाग को निर्देश दिये कि आगामी अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर अभी से सभी विभागों के साथ बैठक कर बजट मांग की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि आगामी बजट को विभाग आवंटित करने से पहले उनके पिछले पांच वर्ष के खर्च के आकंलन की समीक्षा करें। उन्होंने निर्देश दिये कि वित्त विभाग नई कार्ययोजना को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दे। वहीं केंद्र सरकार से आगामी बजट आवंटन को लेकर बेहतर समन्वय बनाएं ताकि समय से केंद्र सरकार से बजट मिल सके।

प्रयागराज माघ मेला: रोडवेज ने शुरू की स्पेशल बस सेवा, 15 बसें नियमित चलेंगी

  प्रयागराज प्रयागराज में 1 जनवरी से शुरू हुए  माघ मेले को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां । संगम स्नान के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को सुगम परिवहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू की जा रही हैं। 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा परिवहन निगम के अनुसार गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए कुल 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा। इसके अलावा झूसी से संगम घाट तक श्रद्धालुओं को पहुंचाने के लिए चार अतिरिक्त बसें शटल सेवा के रूप में लगाई जाएंगी। यह विशेष परिवहन व्यवस्था 1 जनवरी से 17 फरवरी तक जारी रहेगी, ताकि माघ मेला अवधि में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं माघ मेले के दौरान संगम स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए परिवहन निगम ने बसों की संख्या में इजाफा किया है। 1 जनवरी से 13 जनवरी तक गाजीपुर डिपो की 10 बसें सीधे प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी, जबकि जनपद की पांच बसें वाराणसी के रास्ते झूसी तक संचालित होंगी। चार बसें लगातार शटल सेवा में चक्कर लगाती रहेंगी झूसी पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को संगम घाट तक पहुंचाने के लिए चार बसें लगातार शटल सेवा में चक्कर लगाती रहेंगी, जिससे पैदल दूरी और भीड़-भाड़ की समस्या से राहत मिलेगी। परिवहन विभाग ने बताया कि वर्तमान में गाजीपुर डिपो से 94 बसों का संचालन किया जा रहा है, जबकि माघ मेला के दौरान ग्रामीण रूटों पर भी बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि दूर-दराज के गांवों से आने वाले श्रद्धालु आसानी से बस सुविधा का लाभ उठा सकें। बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती इसके साथ ही बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती, समय-सारिणी में लचीलापन और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त फेरे लगाने की व्यवस्था की गई है। विशेष स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि को देखते हुए परिवहन निगम ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने और बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां इस प्रकार हैं:     पौष पूर्णिमा – 13 जनवरी     मकर संक्रांति – 14 जनवरी     मौनी अमावस्या – 29 जनवरी     बसंत पंचमी – 3 फरवरी     माघी पूर्णिमा – 12 फरवरी  

यूपी पुलिस ने 8 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए 48 कुख्यात अपराधियों को मारा

 लखनऊ साल 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एनकाउंटर में 48 कुख्यात अपराधियों को मारकर पिछले आठ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. पुलिस हेडक्वार्टर में DGP राजीव कृष्ण ने बताया कि 20 मार्च 2017 से 29 दिसंबर 2025 तक कुल 266 आरोपी एनकाउंटर में मारे गए. इस साल पुलिस ने 2,739 ऑपरेशन किए, जिसमें 3,153 आरोपी घायल हुए और एक पुलिसकर्मी शहीद हुआ.  DGP ने बताया कि पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 में 41, 2019 में 34, 2020 और 2021 में 26-26 आरोपी मारे गए थे. इस साल हुई कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत क्राइम के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी का हिस्सा थी. इसके अलावा, गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के खिलाफ 475 मामले दर्ज किए गए और 855 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इनमें 379 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई. गाय की तस्करी और गोहत्या के खिलाफ पूरे राज्य में 1,197 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 3,128 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. 958 मामलों में चार्जशीट फाइल की गई. इसी दौरान गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत 1,886 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और 7.38 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई. यूपी पुलिस ने चोरी, डकैती और सेंधमारी के मामलों में साल 2025 में 8,543 टू-व्हीलर, 911 फोर-व्हीलर, 28.69 करोड़ रुपए कैश, 52.27 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और 58.17 करोड़ रुपए की दूसरी प्रॉपर्टी जब्त की है. इसके अलावा 54,995 मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें से 49,404 फोन असली मालिकों को लौटाए गए. उन्होंने आगे बताया कि 1 जनवरी से 20 दिसंबर 2025 के बीच पुलिस ने कुल 1.16 लाख गाड़ियां, 50.97 करोड़ रुपए कैश, 76.42 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और 3.36 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक आइटम डिस्पोज़ किए. नशीले पदार्थों के साथ-साथ 39.53 करोड़ रुपए की दूसरी प्रॉपर्टी भी कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाई गई.  

संभल में बड़ा कदम! कब्रिस्तान पर कब्जा करने वालों का डाटा हो रहा तैयार

संभल  संभल में शाही जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की 4,780 वर्गमीटर भूमि पर पैमाइश के बाद बड़े एक्शन की तैयारी हो रही है। अवैध कब्जे के मामले में प्रशासन ने अगला कदम बढ़ा दिया है। सीमांकन के बाद चिन्हित किए गए 22 अवैध कब्जाधारकों का पूरा डाटा तैयार किया जा रहा है। प्रशासन एक-दो दिन के भीतर सभी को नोटिस जारी करेगा। इसके बाद अभिलेख प्रस्तुत करने और जवाब देने के लिए समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में संतोषजनक साक्ष्य न मिलने पर विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उप जिलाधिकारी सदर रामानुज सिंह ने बताया कि मंगलवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कब्रिस्तान की नॉन जेड-ए श्रेणी की भूमि की पैमाइश कराई गई थी। राजस्व अभिलेखों से मिलान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि 22 लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध रूप से मकान और दुकानें बना रखी हैं। इनमें कुछ निर्माण हाल के वर्षों के हैं, जबकि कुछ कब्जे काफी पुराने बताए जा रहे हैं। एसडीएम ने कहा कि प्रशासन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करेगा और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उनके पास भूमि से संबंधित कौन-कौन से वैध दस्तावेज हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने दावे के समर्थन में अभिलेख प्रस्तुत करता है, तो उनकी विधिवत जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कब्जाधारकों के पास वैध दस्तावेज नहीं पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत मुकदमा दर्ज कराते हुए कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर और पारदर्शिता के साथ की जाएगी। एसडीएम रामानुज सिंह ने बताया कि प्रशासन द्वारा तैयार किए जा रहे डाटा में प्रत्येक कब्जाधारक का नाम, कब्जे का रकबा, निर्माण का स्वरूप और अनुमानित अवधि का विवरण शामिल किया जा रहा है, ताकि आगे की कार्रवाई में कोई भ्रम न रहे। उन्होंने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना शासन की प्राथमिकता है। इस मामले में भी कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य किसी को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं है, बल्कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि को उसके मूल स्वरूप में सुरक्षित करना है।

नीट पीजी 2025 यूपी काउंसलिंग अपडेट: राउंड 3 के लिए आवेदन 2 जनवरी से

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट (MD/MS/DNB/Diploma) सीटों पर एडमिशन का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। महानिदेशालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (DGME), उत्तर प्रदेश ने UP NEET PG काउंसलिंग 2025 के राउंड 3 का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। इस चरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 2 जनवरी 2026 से शुरू होने जा रही है। तीसरे राउंड का पूरा शेड्यूल – ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: 2 जनवरी (सुबह 11:00 बजे) से 9 जनवरी 2026 (दोपहर 2:00 बजे तक)। रजिस्ट्रेशन शुल्क और सुरक्षा राशि जमा करना: 2 जनवरी से 9 जनवरी 2026 (शाम 5:00 बजे तक)। मेरिट लिस्ट की घोषणा: 5 जनवरी 2026। चॉइस फिलिंग और लॉकिंग: 6 जनवरी (सुबह 11:00 बजे) से 9 जनवरी 2026 (दोपहर 2:00 बजे तक)। सीट अलॉटमेंट रिजल्ट: 12 जनवरी 2026। अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड और एडमिशन प्रक्रिया: 13 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक। रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग की शर्तें इस राउंड में वे सभी अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं जिन्होंने NEET PG 2025 परीक्षा उत्तीर्ण की है। उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट upneet.gov.in या dgme.up.gov.in पर जाकर पंजीकरण करना होगा। विशेष रूप से ध्यान दें कि केवल वे ही उम्मीदवार चॉइस फिलिंग (कॉलेज और कोर्स का चयन) कर पाएंगे, जिन्होंने निर्धारित समय के भीतर रजिस्ट्रेशन शुल्क और सुरक्षा राशि जमा कर दी होगी। एक बार चॉइस लॉक होने के बाद, उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होगा, इसलिए उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकताएं बहुत सोच-समझकर भरनी चाहिए। आवश्यक डॉक्यूमेंट और रिपोर्टिंग सीट आवंटित होने के बाद, उम्मीदवारों को 13 से 17 जनवरी के बीच अपने आवंटित कॉलेजों में रिपोर्ट करना होगा। इस दौरान उन्हें अपने ओरिजनल डॉक्यूमेंट जैसे NEET PG एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड, एमबीबीएस डिग्री, इंटर्नशिप प्रमाणपत्र और पहचान पत्र साथ ले जाने होंगे। यदि कोई उम्मीदवार दी गई समय सीमा के भीतर कॉलेज में रिपोर्ट नहीं करता है, तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। यह तीसरा राउंड उन छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो पिछले दो राउंड में सीट पाने से चूक गए थे या अपने कॉलेज/कोर्स को अपग्रेड करना चाहते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तकनीकी समस्या से बचने के लिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय पर अपनी प्रक्रिया पूरी करें।

IIT कानपुर के पूर्व छात्रों ने सिल्वर जुबली पर दी ₹100 करोड़ की मदद, संस्थान को मिली ऐतिहासिक सौगात

 कानपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के वर्ष 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने सिल्वर जुबली पुनर्मिलन समारोह के दौरान संस्थान को 100 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व 'महा गुरुदक्षिणा' देने की घोषणा की. यह पहली बार हुआ है कि किसी एक बैच ने एक ही वर्ष में इतना बड़ा योगदान दिया है.  इस राशि का उपयोग संस्थान में 'मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी' (MSTAS) की स्थापना के लिए किया जाएगा. इनमोबी और ग्लांस के संस्थापक नवीन तिवारी जैसे प्रमुख दानदाताओं के सहयोग से यह पहल भविष्य की पीढ़ी को उन्नत तकनीकी शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करने हेतु शुरू की गई है. संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस दान को पूर्व छात्रों और संस्थान के अटूट संबंध का प्रमाण बताया है. यह सहयोग शैक्षणिक और शोध परितंत्र को मजबूत करते हुए तकनीकी विकास के नए रास्ते खोलेगा. पिछले वर्ष भी IIT कानपुर को दाताओं से 265.24 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी स्कूल को अब तक लगभग 500 करोड़ रुपये का दान मिल चुका है. इसमें इंडिगो के संस्थापक राकेश गंगवाल का 108.7 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत योगदान भी शामिल है. अन्य संस्थानों में भी दान की परंपरा मजबूत पूर्व छात्रों द्वारा सहयोग की यह लहर सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है. इसी साल 21 दिसंबर को IIT कानपुर के 1986 बैच ने मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं के लिए 11 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा, IIT BHU को पिछले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान मिला है, जिससे लाइब्रेरी और शोध केंद्र जैसे प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं. वहीं, MNNIT प्रयागराज में 1998 बैच के सहयोग से अत्याधुनिक स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का निर्माण हो रहा है.

श्री राम जन्मभूमि परिसर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर रक्षा मंत्री ने की धर्मध्वजा की स्थापना

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर अयोध्या पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  श्री राम जन्मभूमि परिसर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर रक्षा मंत्री ने की धर्मध्वजा की स्थापना भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा, भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा है- राजनाथ सिंह गगन में जब तक चंद्र और दिवाकर विद्यमान हैं, तब तक सनातन आस्था की ये धर्मध्वजा लहराती रहे – राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर में हमने भगवान राम की युद्ध में भी मर्यादा न छोड़ने की शिक्षा का पालन किया- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के विराजमान होने के प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के द्वितीय वार्षिकोत्सव में शामिल होने, आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अयोध्या धाम पहुंचे। इस पावन अवसर पर उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में हनुमान जी का दर्शन पूजन कर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के दर्शन किये। इसके बाद उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में बने में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा को स्थापित किया।इस दौरान अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने अपने मनोभावों को व्यक्त करते हुए कहा कि “नाथ आजु मैं कहा न पावा”। ऐसा लग रहा है कि जीवन में मैं जो पाना चाहता था, वह सब कुछ मुझे मिल गया। राघवेंद्र सरकार ने इस दिन के लिए स्वयं मुझे चुना था, इसलिए आज यह अवसर मुझे मिल रहा है।  अयोध्या की हर गली, हर चौराहा क्या पूरा भारतवर्ष आज राममय है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली दिन बताते हुए कहा, "आज से दो वर्ष पूर्व जब प्रभु श्रीराम यहां पुनर्प्रतिष्ठित हुए, वो समस्त भारतवासियों के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण था। प्रभु श्रीराम अपनी कीर्ति से आज केवल भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को विभूषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की हर गली-हर चौराहा राममय हो गया हो। कनक भवन, दशरथ महल, हनुमानगढ़ी, संपूर्ण अयोध्या मां सरयु की गोद में शोभायमान हो रही है। यह आभा केवल अयोध्या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण अवध और भारतवर्ष आज राममय है। उन्होंने इस दिन को गौरवपूर्ण बताते हुए याद दिलाया कि यह वही भूमि है, जिसने वर्षों तक भगवान राम के लिए असहनीय बलिदान दिया, अपमान सहा, लेकिन आस्था को कभी डिगने नहीं होने दिया। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को राजनाथ सिंह ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा कहा। उन्होंने कहा, हम सभी पिछले अनेक पीढ़ियों की तुलना में अत्यतं सौभाग्यशाली हैं कि हमने वह क्षण अपनी आंखों से देखा।  राम मंदिर आंदोलन, दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव है राम मंदिर आंदोलन को उन्होंने दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव बताते हुए कहा कि यह आंदोलन भूगोल और समय दोनों के हिसाब से अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारत से लेकर पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे अनेकों देश जहां हिंदुओं के अलावा अन्य समुदायों के लोग भी प्रभु राम से खुद को जुड़ा हुआ मानते हैं, यह उन सब राम को मानने वालों का आंदोलन था। 500 वर्षों के लम्बें अहिंसक संघर्ष से चलने वाला ऐसा आंदोलन इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में केवल श्रीराम मंदिर का ही निर्माण नहीं हुआ है बल्कि हवाई अड्डा, रेल नेटवर्क, रोड कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, व्यापार का सभी क्षेत्रों में अयोध्या विकास के नये आयाम रच रही है। विकास की यह धारा केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अवध प्रांत से लेकर देश के कोने-कोने तक पहुंच रही है। अवधपुरी की इस विकास यात्रा के लिए उन्होंने डबल इंजन सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और सफल प्रयास की सराहना की और बधाई दी। ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों को उनके ठिकानों में घुस कर सबक सिखाया रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए प्रभु श्रीराम की मर्यादा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने युद्ध में मर्यादा न छोड़ने की शिक्षा हम सबको दी है, उसी प्रकार हमारी सेना ने भी सीमित, नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकियों को सबक सिखाना था, हमने उनके ठिकाने में घुस कर सबक सिखाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि जिस तरह भगवान राम का दिव्य-भव्य मंदिर आयोध्या धाम में प्रतिष्ठित है, उसी तरह पुनौराधाम में मां जानकी की जन्मस्थली में भव्य मंदिर का भी निर्माण हो रहा है। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने प्रार्थना की, "जब तक गगन में चंद्र और दिवाकर विद्यमान हैं, तब तक सनातन आस्था की ये धर्मध्वजा लहराती रहे। प्रभु राम हम सबको कर्तव्य का मार्ग दिखाएं।"

अयोध्या को संघर्ष का अड्डा बनाने वालों पर CM योगी का बड़ा हमला

अयोध्या  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था। सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता? 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, वैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री प्रतिष्ठा द्वादशी पर मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है। सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी और सुरक्षा भी नहीं थी। 'जय श्री राम' बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोर लेन की सड़कें हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह ‘जय श्री राम’ और 'राम-राम' बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष कर रहे थे। वह रुका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की, बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है।