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जल संकट से स्थायी मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम : वेस्ट वॉटर बनेगा एडवांस यूपी की ताकत

आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण किया जाएगा सुनिश्चित वेस्ट वॉटर का आर्थिक संसाधन के रूप में किया जाएगा इस्तेमाल तीन चरणों में लागू की जाएगी योजना : नगरपालिका, इंडस्ट्री, कृषि के साथ किया जाएगा गैर-पेय घरेलू उपयोग वेस्ट वॉटर से बनेगा विकास का नया मॉडल, पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ेगी जल उपलब्धता लखनऊ उत्तर प्रदेश को जल सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में अग्रणी बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। योगी सरकार ने यह स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत और 2035 तक 100 प्रतिशत वेस्ट वॉटर का सुरक्षित पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। जिसके जरिए कृषि से लेकर इंडस्ट्री तक में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए व्यापक नीति, चरणबद्ध कार्ययोजना और मजबूत क्रियान्वयन तंत्र तैयार किया गया है। यह पहल न सिर्फ जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ जल प्रबंधन की मजबूत नींव भी रखेगी। वेस्ट वॉटर बनेगा विकास का संसाधन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब वेस्ट वॉटर को बोझ नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा तैयार की जा रही नीति के तहत उपचारित जल का उपयोग नगर निकायों के कार्यों, इंडस्ट्री, कृषि एवं गैर-पेय घरेलू उपयोग में किया जाएगा। इससे भूजल पर दबाव कम होगा और पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा। वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट का रोडमैप तैयार : तीन चरणों में लागू होगी योजना राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। इसी के साथ योगी सरकार ने वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। पहला चरण (2025–2030) : जहां एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और संग्रहण की सुविधा पहले से मौजूद है, वहां 50 फीसदी वेस्ट वॉटर के पुन: उपयोग का लक्ष्य तय किया गया है। दूसरा चरण (2030–2035) : इन क्षेत्रों में क्षमता विस्तार कर 100 फीसदी वेस्ट वॉटर के पुन: उपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा। तीसरा चरण (2045 तक) : जहां अभी उपचार और संग्रहण की व्यवस्था नहीं है, वहां चरणबद्ध ढंग से 30 फीसदी, फिर 50 फीसदी और अंततः 100 फीसदी वेस्ट वॉटर के उपयोग की व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रदेश के लिए दूरगामी फायदे लेकर आएगी योजना योगी सरकार की इस नीति का मूल उद्देश्य जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करना, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देना और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास सुनिश्चित करना है। यह योजना न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी राज्य के लिए दूरगामी फायदे लेकर आएगी। योगी सरकार अब वेस्ट वॉटर को विकास के संसाधन में बदलेगी राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश लगातार जल संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है। योगी सरकार अब वेस्ट वॉटर को विकास के संसाधन में बदलने जा रही है। शहरी, ग्रामीण व गैर-पेय उपयोग के लिए अलग-अलग प्लानिंग सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शहरी, ग्रामीण व गैर-पेय उपयोग के लिए अलग-अलग योजना बनाई जा रही है। जल संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जल प्रबंधन का मॉडल बनने जा रहा है।

योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई रफ्तार देगा ‘निवेश मित्र 3.0’ योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ निवेश मित्र 3.0 से निवेशकों को मिलेगा वन-स्टॉप समाधान आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से निवेश प्रक्रियाओं पर रखी जा सकेगी सीधी निगरानी एआई आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड से रीयल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित निर्णय होगा संभव व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से निवेशकों को मिलेगी हर अपडेट की जानकारी डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में योगी सरकार का एक और बड़ा कदम राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़कर यूपी बनेगा निवेशकों की पहली पसंद लखनऊ  उत्तर प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय सुगमता) को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी व निवेशक-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से प्रमुख ऑनलाइन सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम ‘निवेश मित्र 3.0’ विकसित किया जा रहा है। यह नया संस्करण वर्ष 2026 में लॉन्च किया जा सकता है, जो निवेशकों को एक सहज, एकीकृत और इंटेलिजेंट डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा। राज्य की निवेश नोडल विंग इन्वेस्ट यूपी इसके विकास को अंतिम रूप दे रही है और इसे बेहतर बनाने के लिए निवेशकों के साथ ही विशेषज्ञों की राय को भी इसमें समाहित किया जा रहा है।  राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से होगा पूर्ण एकीकरण ‘निवेश मित्र 3.0’ को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से पूरी तरह एकीकृत हो। इससे केंद्र और राज्य स्तर की सभी आवश्यक अनुमतियां, स्वीकृतियां और सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। यह प्रणाली निवेशकों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति को तेज करेगी। आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से बढ़ेगी जवाबदेही योगी सरकार की पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए ‘निवेश मित्र 3.0’ का IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम), मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (दर्पण), निवेश सारथी, OIMS और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) से समग्र एकीकरण किया जाएगा। इससे निवेशकों की शिकायतें सीधे IGRS के माध्यम से दर्ज होंगी और उनका रीयल-टाइम मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर तक संभव हो सकेगा। यही नहीं, मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर विभागवार प्रगति, लंबित मामलों और निर्णयों की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जिससे अधिकारियों की उत्तरदायित्व तय करने की व्यवस्था और मजबूत होगी। AI आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा खास आकर्षण ‘निवेश मित्र 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा। इसके माध्यम से रीयल-टाइम डेटा एनालिसिस, निवेश प्रस्तावों की प्रगति की लाइव ट्रैकिंग, विभागीय प्रदर्शन का आंकलन सुनिश्चित होगा, जिससे संभावित अड़चनों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। यह तकनीक नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक डाटा आधारित निर्णय को बढ़ावा देगी। व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से मिलेगी हर अपडेट निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल में मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है। निवेशक अपने आवेदन की स्थिति, स्वीकृति, आपत्ति या शिकायत निवारण की जानकारी व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से सीधे प्राप्त कर सकेंगे। इससे संवाद प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। योगी सरकार की निवेश नीति को मिलेगा मजबूत आधार योगी सरकार पहले ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, नीतिगत सुधारों, सरलीकृत प्रक्रियाओं और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से उत्तर प्रदेश को निवेश के मानचित्र पर अग्रणी राज्य बना चुकी है। ‘निवेश मित्र 3.0’ इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि विभागीय दक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को भी नई ऊंचाई देगा। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि ‘निवेश मित्र 3.0’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया सरल, समयबद्ध और भ्रष्टाचार मुक्त होगी। यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी और रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास व आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देगी।

कभी टेंपो चलाते थे श्रवण कुमार विश्वकर्मा, अब आसमान में उड़ान भरेगी शंख एयरलाइंस

कानपुर  पिछले दिनों देश के एविएशन सेक्टर में तब हड़कंप मच गई, जब इंडिगो की बड़ी संख्या में फ्लाइट्स तमाम वजहों से कैंसल होने लगीं। आम जनता से लेकर सरकार तक को परेशानी होने लगी। जैसे-तैसे कुछ दिनों में मामला पटरी पर लौट गया, लेकिन एक बड़ा सवाल पैदा हो गया कि क्या यह दिक्कत चंद एयरलाइंस होने की वजह से आई? ऐसे में सरकार ने भी सक्रियता दिखाते हुए कुछ नई एयरलाइंस के सेक्टर में एंट्री की हरी झंडी दिखा दी। इसी में एक शंख एयरलाइंस है, जिसे पिछले दिनों एनओसी दी गई और अब जल्द ही कंपनी के विमान उड़ान भरते हुए दिख सकते हैं। शंख एयरलाइंस के बनाए जाने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल, यूपी के कानुपर का निकले एक नौजवान ने किस तरह कुछ समय तक टैंपो चलाई और फिर वहां से नई एयरलाइंस तक खड़ी कर दी।    कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा, कैसे अपने बल-बूते खड़ी की एयरलाइंस कानपुर से ताल्लुक रखने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा अभी भले ही ट्रांसपोर्ट की लाइन में बड़ा नाम हों, लेकिन कुछ समय पहले तक उन्हें अपनी फाइनेंशियल कंडीशन की वजह से टेंपो/ऑटो तक चलानी पड़ी। कानुपर में लगभग एक साल तक श्रवण कुमार ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर टेंपो चलाया। वे कहते हैं, ''मुझे यह बताने में बिल्कुल भी हिचक नहीं है कि मैंने सालभर तक टेम्पो चलाया था। फिर धीरे-धीरे समय बीता और सफलता मिलती गई।'' इसके बाद वे कानपुर से यूपी की राजधानी लखनऊ में शिफ्ट हुए और यहां उनकी जिंदगी ही बदल गई। यहां उन्होंने माइनिंग, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में जमकर सफलता मिली। 400 से ज्यादा हैं ट्रक, कैसे बदली किस्मत श्रवण कुमार बचपन में पढ़ने में काफी अच्छे नहीं थे। वे खुद बताते हैं कि स्कूलिंग कम रही उनकी। पढ़ाई में भी मन कम लगता था। टेंपो आदि चलाने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर कुछ व्यापार भी किए, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 2015 में सीमेंट का काम शुरू किया और वहां से किस्मत बदल गई। इसके बाद टीएमटी के काम में गए। फिर माइनिंग में गए और जमकर तरक्की हुई। वहां से वे ट्रांसपोर्ट में गए और अभी उनके पास 400 से ज्यादा ट्रकों की फ्लीट है। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। 'एवएिशन सेक्टर में कैशफ्लो अच्छा है' बिजनेसमैन श्रवण का मानना है कि चूंकि एविएशन सेक्टर में उधारी पर काम नहीं होता है, इसलिए कैशफ्लो काफी अच्छा है। यही वजह है कि अन्य सेक्टर्स के मुकाबले इसमें सफल होने की उम्मीद ज्यादा है। साथ ही, जैसे अन्य सेक्टर में कम्प्टीशन बहुत ज्यादा है, उसकी तुलना में एविएशन में चुनिंदा ही एयरलाइंस है और ऐसे में सफल होने की उम्मीद अधिक है। वह कहते हैं, ''मेरा मानना है कि एविएशन आने वाले समय में सबसे बड़ा सेक्टर होगा। इसमें कैशफ्लो अच्छा है। एक भी पैसे की उधारी नहीं होती है। कई बिजनेस उधारी की वजह से बंद हो जाते हैं। इस सेक्टर में कम्प्टीशन बहुत कम है, जिसके सफल होने का चांसेस बढ़ जाता है।'' श्रवण का दावा- हर समय नहीं बदलेगा किराया एयरलाइंस सेक्टर में सबसे ज्यादा दिक्कत किराए की होती है। हर समय बदलता रहता है। श्रवण का कहना है कि वह अपनी फ्लाइट्स में डायनिमिक फेयर वाला सिस्टम नहीं रखेंगे। जो किराया सुबह होगा, वही शाम में भी होगा। ऐसा नहीं होगा कि समय के साथ इसमें बढ़ोतरी होने लगे। त्योहार से लेकर तमाम डिमांड वाले समय में ट्रांसपेरेंट किराए पर फोकस रखा जाएगा। शुरुआत में एयरबस कंपनी के विमान होंगे और संख्या भी कम ही होगी। लेकिन आने वाले समय में और विमानों की खरीद होगी और फिर कुछ सालों बाद इंटरनेशनल उड़ानों की शुरुआत होगी।  

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे नहीं टिक पाया कोई दुश्मनः योगी  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  कुछ लोगों ने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी बना दिया था उपद्रव और संघर्ष का अड्डा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिकाः सीएम  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्याः मुख्यमंत्री   पहले मिलती थीं लाठी और गोली, अब देश में हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-रामः गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की दी शुभकामना, सभी के लिए मंगलकारी हो यह वर्ष अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामना देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था।  पिछली सरकारों के शासन में होते थे आतंकी हमले सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता। 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, तैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। कभी विस्मृत नहीं हो सकती तीन तिथियां  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी।    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिका  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह जी की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री जी प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है।  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्या   सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा भी नहीं थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रदधालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोरलेन की सड़कें हैं।  देश में अब हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-राम गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह जयश्रीराम और राम-राम बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी।  रामभक्तों ने नहीं की लाठी और गोली की परवाह सीएम योगी ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष करता रहा। वह रूका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ।  यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है। पीएम मोदी ने हर भारतवासी को विकसित भारत की संकल्पना दी है। देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा तो हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करके दिखाना है। देश … Read more

नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा

योगी सरकार के प्रयास से सनातन का लौटा वैभव, युवाओं में बढ़ा काशी, मथुरा और अयोध्या का क्रेज नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा सोशल मीडिया पर छाया काशी, अयोध्या, मथुरा में नए साल का जश्न मनाने का ट्रेंड सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से बढ़ी पर्यटकों की संख्या लखनऊ  नए साल का जश्न मनाने के लिए  जहां युवा पहले पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित होकर डिस्को, होटल, रेस्टोरेंट और हिल स्टेशनों का रुख करता था, इस साल इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन के पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह से  धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास हुआ है, उसका ही परिणाम है कि युवा लाखों की संख्या में काशी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या में नए साल की शुरूआत अपने इष्ट का दर्शन-पूजन से कर रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश से उठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वो लहर है, जिसमें न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के युवा, लड़के-लड़कियां नए जोश और उत्साह के साथ सम्मिलित हो रहे हैं।  काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष नए साल से कई दिन पहले से ही प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में लाखों की संख्या में युवा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इस क्रम में 29-30 दिसंबर को ही अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने 5 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं, जबकि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पिछले तीन दिनों में 10 लाख और मथुरा में 3 लाख से अधिक पर्यटकों ने दर्शन पूजन किया। इनमें युवा पर्यटकों की संख्या सर्वाधिक है। 31 दिसंबर और 01 जनवरी को और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं, साथ ही सुविधा के लिए गाइडलाइन भी जारी की है।  सोशल मीडिया पर भी छाया हैशटैग न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या नए साल का जश्न धर्म स्थलों में मनाने का युवाओं का यह रुझान सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। जहां न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या, न्यू ईयर 2026 इन काशी या स्पिरिचुअल न्यू ईयर जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवा नए साल के जश्न में इन धर्म स्थलों पर दर्शन पूजन कर, दोस्तों और परिवारजनों के साथ सेल्फी अपलोड कर रहे हैं। यही रुझान पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित हुए दिव्य-भव्य महाकुंभ में भी देखने को मिला था, जिसमें न केवल देश बल्कि विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटकों ने आकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस तरह से प्रदेश में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान हुआ है, उसने युवाओं के मन में आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अलख जगाई है। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विश्व भूषण मिश्र का कहना है- सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। लोक उत्सव प्रायः तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। मंदिरों और तीर्थस्थलों के पुनरुद्धार से बढ़ा पर्यटन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से जिस तरह से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और मथुरा-वृंदावन, तीर्थराज प्रयागराज, विंध्याचल, नैमिषारण्य, संभल, मुजफ्फरनगर में शुक्रतीर्थ (शुक्रताल) के साथ प्रदेश के पुरातन मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ है, इससे विशेष तौर पर युवाओं में सनातन संस्कृति और अपनी परंपराओं के प्रति नई को ऊर्जा का संचार हुआ। यह स्थान पहले की सरकारों में उपेक्षा का शिकार थे। प्रमुख तीर्थों और धार्मिक स्थलों तक सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ वहां रुकने ठहरने, होटल और रेस्टोरेंट गतिविधियों का विकास हुआ है। यही नहीं जिस तरह से समय-समय पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से दिव्य-भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, उसने प्रदेश के युवाओं में सनातन संस्कृति के तीर्थों और धर्म स्थलों के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के इन प्रयासों ने न केवल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिला है।

योगी मंत्रिमंडल में जल्द हो सकते बदलाव, संगठन में भी हो सकती बड़ी छंटनी

लखनऊ नए साल पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कुछ फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के आवास पर ही एक मीटिंग हुई, जिसमें कई सीनियर नेता मौजूद रहे। इसके अलावा नए बने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मीटिंग में शामिल थे। इस बैठक में संगठन से लेकर सरकार तक में कुछ बदलाव किए जाने पर चर्चा होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि पहले कैबिनेट का विस्तार होगा और फिर संगठन में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होंगे। पंकज चौधरी नए प्रदेश अध्यक्ष बने हैं और वह अपने स्तर पर संगठन में कुछ बदलाव करेंगे और नई टीम तैयार करेंगे। कुछ नेताओं का समायोजन संगठन में हो सकता है तो वहीं कुछ लोगों को सरकार में हिस्सेदारी मिल सकती है। इन दोनों ही फेरबदल में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का भी पार्टी ख्याल रखना चाहेगी क्योंकि फिलहाल सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वांचल से हो गए हैं। ऐसी स्थिति में वेस्ट यूपी, अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र को अच्छा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। इस मीटिंग में संगठन महामंत्री धर्मपाल भी मौजूद थे। योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर आखिरी फैसला दिल्ली में होना है और जनवरी के पहले सप्ताह में ही इस संबंध में ऐलान हो सकता है। हालांकि शपथ समारोह मकर संक्रांति के बाद ही होगा। फिलहाल इस बात पर चर्चा हुई कि किन नामों को दिल्ली भेजा जाए। इस मीटिंग में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। संघ से भी इस संबंध में राय ली गई है। पूरे दिन योगी आदित्यनाथ लखनऊ में ही रहे और इस मीटिंग के बाद उन्होंने अलग-अलग भी कई नेताओं से बात की। बता दें कि अब तक यूपी अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी को भी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। वह जाट समुदाय से आने वाले नेता हैं और पश्चिम यूपी में इस समाज का मजबूत प्रतिनिधित्व है। ऐसी स्थिति में जाट बिरादरी के एक नेता को कैबिनेट में लेकर संदेश देने की कोशिश होगी। इसके अलावा कैबिनेट विस्तार में समाजवादी पार्टी के पीडीए वाले नैरेटिव को भी काउंटर करने की तैयारी होगी।

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का उत्सव, राजनाथ सिंह–योगी आदित्यनाथ ने टेका माथा

अयोध्या केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राम जन्मभूमि मंदिर में राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। उसके बाद राजनाथ सिंह सीएम योगी हनुमानगढ़ी के लिए रवाना हुए। राजनाथ सिंह करीब 1 बजे अंगद टीला पर संबोधित करेंगे। रामलला मंदिर में की पूजा अर्चना हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी राम मंदिर पहुंचे। दोनो नेताओं ने प्रतिष्ठा द्वादशी और राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर में राम लला की पूजा की। सीएम और रक्षा मंत्री यज्ञशाला में चल रहे अनुष्ठान में शामिल होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अन्नपूर्णा मंदिर पर ध्वजारोहण करेंगे। इधर, प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश और दुनिया के कोने-कोने से आए श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर रहे हैं। जिसको देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा एवं स्वयंसेवकों की तैनाती की है।

नया साल 2026: बरेली पुलिस ने की चेतावनी, गड़बड़ी करने वालों को थाने में मनाना पड़ेगा स्वागत

    बरेली  बरेली एसएसपी अनुराग आर्य ने 31 दिसंबर 2025 की रात के लिए नई एडवाइजरी जारी की है. पुलिस प्रशासन ने नए साल 2026 के आगमन पर शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु हुड़दंगियों, स्टंटबाजों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का खाका तैयार किया है. शहर के होटलों और रेस्टोरेंट संचालकों को भी जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं. नियम तोड़ने वालों के वाहन सीज करने और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है. सड़क पर केक काटने या यातायात बाधित करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी. सड़क पर केक काटा या स्टंट किया तो खैर नहीं नए साल के जश्न के दौरान अक्सर कुछ लोग सड़कों पर गाड़ियां रोककर नाच-गाना और तेज आवाज में म्यूजिक बजाते हैं. एसएसपी ने साफ किया है कि बीच सड़क पर केक काटना, बाइक या कार से स्टंट करना और तेज रफ्तार से वाहन चलाना अपराध माना जाएगा. ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस अलर्ट मोड पर है. यदि जश्न के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, तो पुलिस न सिर्फ वाहन जब्त करेगी, बल्कि आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगी. होटलों और आयोजकों के लिए कड़े निर्देश पुलिस ने शहर के तमाम होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को भी हिदायत दी है. एसएसपी ने बाइट के माध्यम से बताया कि आयोजकों को साफ निर्देश हैं कि वे नियमों के दायरे में रहकर ही सेलिब्रेशन कराएं. किसी भी तरह की अनुशासनहीनता या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि किसी कार्यक्रम में हुड़दंग की स्थिति बनती है, तो आयोजकों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें. थाना अध्यक्षों के माध्यम से सभी प्रोग्राम ऑर्गेनाइजर्स को पहले ही सूचित करा दिया गया है. शांति और सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता बरेली पुलिस का उद्देश्य किसी की खुशियों में खलल डालना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा और शांति बनाए रखना है. एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार, लोग दूसरों को परेशान किए बिना या यातायात को बाधित किए बिना जश्न मनाएं. किसी भी व्यक्ति को कानून से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जोश में आकर की गई एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है और नए साल की पहली सुबह हवालात में देखनी पड़ सकती है.

यूपी चुनावी तैयारी तेज: 6 मार्च को संशोधित मतदाता सूची जारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने अहम कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की तिथियों में संशोधन कर दिया है। आयोग के इस निर्णय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार कराने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन छह जनवरी 2026 को होगा, जबकि अंतिम प्रकाशन छह मार्च 2026 को किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि एक जनवरी 2026 के आधार पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की समय-सारिणी में यह बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित कार्यक्रम के तहत 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इस अवधि में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और नाम, पता या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। इसके साथ ही 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय तथा प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का विधिवत निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी सभी आवेदनों की जांच कर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करेंगे। समस्त प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश की अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। निर्वाचन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। निर्वाचन आयोग के इस संशोधित कार्यक्रम से मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत आधार मिलेगा। 

यूपी में 75 साल में 21 मुख्यमंत्री बने, ब्राह्मणों का 6 बार शासन, 32 साल से सियासी वनवास में कौन?

लखनऊ    उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथों में रही है. नारायण दत्त तिवारी के बाद यूपी में कोई भी ब्राह्मण समाज से मुख्यमंत्री नहीं बन सका. सूबे में पिछले 3 दशकों से राजनीतिक पार्टियों के लिए ब्राह्मण समाज महज एक वोटबैंक बनकर रह गया है. ऐसे में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक ने इस कड़ाके के ठंड में सियासी गर्मी बढ़ा दी है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 23 दिसंबर को लखनऊ में कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के सरकारी आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक की, जिसमें 40 से ज्यादा ब्राह्मण समाज के विधायकों ने शिरकत किया था. इसके बाद सूबे में ब्राह्मण पॉलिटिक्स की फिर से चर्चा तेज हो गई. ब्राह्मण विधायकों को बैठक करने पर यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नसीहत और चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठकें बीजेपी के संविधान में नहीं हैं. इसके बाद पीएन पाठक ने सोमवार देर शाम एक ट्वीट कर जवाब दिया. उन्होंने साफ कहा कि ब्राह्मण हमेंशा से समाज और सनातन धर्म का नेतृत्व करता रहा है. इस तरह से यूपी की जातीय गोलबंदी के बीचसवाल उठता है कि आखिर यूपी में किस-किस जाति के मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में किस जाति के कितने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की सियासत में अब के बने मुख्यमंत्रियों पर नजर डालें तो आजादी के बाद से लेकर अभी तक कुल 21 मुख्यमंत्री हुए, इसमें सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री (6) ब्राह्मण समाज से रहे. इसके अलावा पांच ठाकुर मुख्यमंत्री बने हैं. ब्राह्मण और ठाकुर के बाद यूपी में तीन यादव मुख्यमंत्री रहे और तीन ही वैश्य समाज से सीएम बने. इसके अलावा एक लोधी समाज से मुख्यमंत्री रहे तो दलित समाज से मायावती एकलौती सीएम रहीं. इसके अलावा जाट और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में 6 ब्राह्मण सीएम और 23 साल राज आजादी के बाद यूपी की सियासत में 1989 तक ब्राह्मण का सियासी वर्चस्व रहा. इस दौरान ब्राह्मण समाज से 6 मुख्यमंत्री बने. गोविंद वल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, श्रीपति मिश्र और नारायण दत्त तिवारी बने. ये सभी कांग्रेस से थे. ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा नारायण दत्त तिवारी तीन बार यूपी के सीएम रहे तो गोविंद वल्लभ पंत दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला. इन छह मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को देखें तो करीब 23 साल तक प्रदेश की सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथ में रही है. इतना लंबे समय तक किसी दूसरे समाज के सीएम सूबे में नहीं रहे, जिसके चलते 1950 से 1989 तक के समय को ब्राह्मण काल भी कहा जाता रहा है. ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के सीएम बने ब्राह्मण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा सीएम ठाकुर समाज से बने. ठाकुर समाज से पांच सीएम बने, जिसमें सबसे पहले त्रिभुवन नारायण सिंह और उसके बाद विश्‍वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह कांग्रेस के सीएम रहे. इसके अलावा बीजेपी के राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ठाकुर समाज से सीएम बने. इसके योगी आदित्यनाथ दूसरी बार सीएम हैं जबकि बाकी सभी एक-एक बार सीएम रहे. सूबे में करीब 17 साल तक ठाकुर समाज के सीएम रहे. यूपी में यादव समाज से तीन सीएम बने, जिसमें सबसे पहले राम नरेश यादव जनता पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री थे. इसके बाद मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सीएम बने. 13 साल तक यूपी में सत्ता की कमान यादव समाज के हाथों में रही. इसी तरह से वैश्य समाज से तीन सीएम बने. वैश्य समाज से चंद्र भान गुप्ता, बाबू बनारसी दास और राम प्रकाश गुप्ता सीएम बने. चंद्र भान गुप्ता दो बार सीएम रहे और बाकी दोनों नेता एक-एक बार. राम प्रकाश गुप्ता बीजेपी सरकार में सीएम रहे जबकि दोनों कांग्रेस से थे. जाट-लोध-दलित और कायस्थ 1-1 सीएम बने यूपी में ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के अलावा जाट, लोध, दलित और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री रहे हैं. कायस्थ समाज से डॉ सम्‍पूर्णानन्‍द 1954 से लेकर 1960 तक दो बार सीएम बने. जाट समदाय से चौधरी चरण सिंह यूपी में दो बार मुख्यमंत्री रहे. चरण सिंह पहली बार अप्रैल 1967 मे सीएम बने और उसके बाद 1970 में बने थे. दलित समाज से मायावती एकलौती नेता हैं, जो यूपी की मु्ख्यमंत्री बनी हैं. मायावती चार बार सीएम रही. पहली बार 1995 में सीएम बनी और उसके बाद 1997, 2002 और 2007 में मुख्यमंत्री का पद संभाला. मायावती ने लगभग पौने सात साल सीएम रही हैं. लोध समाज से कल्याण सिंह दो बार यूपी के सीएम बने. पहली बार 1991 और दूसरी बार 1997 में सीएम बने. 32 साल से ब्राह्मण समाज का वनवास उत्तर प्रदेश में मंडल और कमंडल की राजनीति ने ब्राह्मण समाज को हाशिए पर धकेल किया. हालांकि, बीजेपी में अटल विहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी से लेकर कलराज मिश्रा जैसे ब्राह्मण नेता चेहरा हुआ करते थे, पर सूबे की सत्ता में कांग्रेस की तरह उनकी हनक नहीं रही. मंडल की राजनीति ने यूपी की सियासत को ओबीसी के इर्द-गिर्द समेटकर रख दिया. 1989 के बाद से कांग्रेस सत्ता में नहीं आई है जबकि पिछले दिनों से सपा से लेकर बसपा और बीजेपी की उत्तर प्रदेश में कई बार सरकारें बनी, लेकिन सूबे को ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं मिला. इस तह पिछले 32 सालों में ब्राह्मण समाज से कोई मुख्यमंत्री नहीं बना. साल 1989 के बाद अब तक कुल सात मुख्यमंत्री बने, चार बीजेपी, दो सपा और एक बसपा से. बीजेपी ने 1989 के बाद से अब तक प्रदेश में चार बार सरकार बनाई है, इसमें उसने दो ठाकुर और एक बनिया और एक लोधी राजपूत को मौका दिया. ऐसे में ब्राह्मण समाज सत्ता की बागडोर संभालने को बेचैन दिख रहा है. यही वजह है कि ब्राह्मण समाज बैठक कर अपने प्रतिनिधित्व के लिए चिंता जता रहा है.