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योगी सरकार ने दी तकनीकी शिक्षा को नई दिशा, युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त

सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) का हुआ भूमि पूजन एवं शिलान्यास टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से बनेगा अत्याधुनिक संस्थान, युवाओं को मिलेगी आधुनिक तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की दूरदर्शी सोच और विशेष प्रेरणा से बुधवार को जनपद मुजफ्फरनगर में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई। इस पहल के तहत जनपद में सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। इस पहल ने प्रदेश में रोजगारपरक शिक्षा को नई गति दी है और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त किया है। शारदेन स्कूल में हुआ भव्य आयोजन व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने “सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT)” का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुए इस धार्मिक और औपचारिक समारोह ने पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना दिया। शिलान्यास कार्यक्रम शारदेन स्कूल, मेरठ रोड, मुजफ्फरनगर में आयोजित हुआ। भूमि पूजन के बाद राज्यमंत्री और मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने वृक्षारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से बनेगा अत्याधुनिक CIIIT संस्थान कार्यक्रम में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड, पुणे के विशेषज्ञ अधिकारियों ने सीआईआईआईटी परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि यह संस्थान युवाओं को ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों में प्रशिक्षण देगा। 226.52 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संस्थान राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) मुजफ्फरनगर के पास 10,000 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित होगा। जिलाधिकारी की देखरेख में भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है और निर्माण कार्य फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगारपरक शिक्षा से आत्मनिर्भर होंगे युवा राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह संस्थान उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी शिक्षा और रोजगार शक्ति के रूप में स्थापित होगा। आईटीआई प्रशिक्षार्थियों को मिला सम्मान राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव, मण्डलायुक्त और निदेशक ने प्रदेश के 21 आईटीआई संस्थानों के श्रेष्ठ प्रशिक्षार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। युवाओं के कौशल और परिश्रम की सराहना की गई और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। समारोह में प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम (IAS), मण्डलायुक्त अटल कुमार राय (IAS), निदेशक अभिषेक सिंह (IAS), जिलाधिकारी उमेश मिश्रा (IAS), मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण (IAS) तथा टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड, पुणे से यतेन्द्र कुमार और श्री रजनीकांत उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया दक्षिण के तीन संतों की मूर्तियों का अनावरण

  योगी आदित्यनाथ ने कहा अयोध्या बन रही सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली  त्यागराज, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों से अयोध्या में बसा कर्नाटक का संगीत भाव अयोध्या, उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बुधवार को अयोध्या की पावन भूमि पर देखने को मिला। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का बृहस्पति कुंड में भव्य अनावरण किया। भक्ति और संगीत की मधुर लहरों में डूबा बृहस्पति कुंड टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड का वातावरण उस समय भक्तिरस और संगीत की पवित्र भावना से सरोबार हो उठा जब केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर अनावरण समारोह की शुरुआत की। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया। अयोध्या की परंपरा में हुआ भव्य स्वागत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय वित्त मंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक अयोध्या शैली में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बृहस्पति कुंड केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है, जहां उत्तर भारत की श्रद्धा और दक्षिण भारत की भक्ति का संगम होता है। तीनों संतों के योगदान को किया नमन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने तीनों संतों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके काव्य और रचनाओं ने समाज को प्रेम, भक्ति और एकता के सूत्र में पिरोया। कर्नाटक और अयोध्या के सांस्कृतिक रिश्ते को मिला नया आयाम सीतारमण ने बृहस्पति कुंड की भव्यता और शांति देखकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अयोध्या और कर्नाटक के सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। आज इन संतों की मूर्तियों के अनावरण के माध्यम से भारत की उत्तर-दक्षिण परंपरा एक सूत्र में बंधी है। सीएम योगी ने बोल अयोध्या बन रही सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धुरी इस अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम की नगरी अयोध्या अब केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली बन रही है। उन्होंने कहा कि निर्मला सीतारमण का यह दौरा भारत की सांस्कृतिक एकता और समरसता का सशक्त प्रतीक है। बृहस्पति कुंड की शांति में खोए सीएम योगी, मंत्रियों संग पत्थर की बेंच पर लिया सौंदर्य का आनंद बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित सुंदर पत्थर की बेंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह कुछ देर के लिए विराम लेते हुए बैठे। शांत सरोवर, मधुर वातावरण और सुव्यवस्थित परिसर को निहारते हुए तीनों जनप्रतिनिधियों ने उस पल में अयोध्या की सौंदर्य व सांस्कृतिक गरिमा का आनंद अनुभव किया। मुख्यमंत्री ने बेंचों की कलात्मक बनावट और परिसर के सौंदर्यीकरण की सराहना करते हुए कहा कि बृहस्पति कुंड अब श्रद्धा और सौंदर्य का आदर्श संगम बन चुका है।

7 महीने में 5 बार प्रेमी संग फरार हुई मां, पति ने 4 बच्चों के साथ नदी में कूदकर किया आत्महत्या

शामली  यूपी में शामली जिले पति ने जिस पत्नी की बेवफाई से तंग आकर चार मासूम बच्चों के साथ यमुना नदी में कूदकर जान दे दी थी उसे प्रेमी के साथ गिरफ्तार कर दिया गया है.इन दोनों की वजह से ही 38 साल के सलमान ने यह भयावह कदम उठाया था. पुलिस ने पत्नी खुशनुमा और उसके कथित प्रेमी साबिर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.यह वही खुशनुमा है, जो पिछले सात महीनों में अपने प्रेमी के साथ पांच बार घर छोड़ चुकी थी. और हर बार पति सलमान उसे बच्चों की खातिर वापस घर लाता रहा.लेकिन इस बार उसकी सहनशक्ति टूट गई और उसने अपनी जिंदगी के साथ अपने बच्चों का भी अंत कर दिया. प्यार में अंधी पत्नी, टूटा हुआ पति सलमान मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले का निवासी था, लेकिन कई वर्षों से शामली जिले के कैराना में मजदूरी कर अपना परिवार पालता था.उसकी पत्नी खुशनुमा और चार छोटे-छोटे बच्चे महक, आयान, अल्ताफ और रेहान उसकी दुनिया थे.लेकिन खुशनुमा की जिंदगी में साबिर नाम का व्यक्ति आया, जिसने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं.साबिर पास के गांव का रहने वाला था और अकसर मोहल्ले में आता-जाता रहता था.इसी दौरान उसका खुशनुमा से संपर्क हुआ, जो धीरे-धीरे अवैध संबंधों में बदल गया.शुरुआत में सलमान ने पत्नी के व्यवहार में आए बदलाव को अनदेखा किया.लेकिन जब खुशनुमा पहली बार साबिर के साथ घर छोड़कर भागी, तो मानो उसकी दुनिया उजड़ गई.कई दिनों की मशक्कत के बाद जब वह वापस आई, तो सलमान ने बच्चों की खातिर सब कुछ भुलाकर उसे माफ कर दिया. नहीं थमा सिलसिला  लेकिन ये सिलसिला यहीं नहीं थमा.सात महीनों में वह पांच बार घर छोड़कर उसी प्रेमी के पास भागी.हर बार सलमान उसे खोजकर लाता, मिन्नतें करता, घर बसाने की कोशिश करता.मगर जब पांचवीं बार वह फिर चली गई, तो सलमान अंदर से पूरी तरह टूट गया. हमारी मौत के जिम्मेदार हैं तेरी अम्मी  घटना से एक दिन पहले सलमान ने अपनी बहन को एक वीडियो भेजा था.वीडियो में वह यमुना किनारे चारों बच्चों के साथ बैठा था.उसकी आंखों में आंसू थे और आवाज में कंपकंपी.उसने कहा, हम अब जीना नहीं चाहते.हमारी मौत के लिए जिम्मेदार कौन है बेटा? तेरी अम्मी है.  यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.सलमान ने अपने चारों बच्चों के साथ यमुना नदी में छलांग लगा दी. नदी में चला दो दिन का सर्च ऑपरेशन 3 अक्टूबर की रात यह घटना हुई.स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि किसी ने नदी में कूदने से पहले वीडियो बनाया है.सूचना मिलते ही कैराना पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीमों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया.दो दिन तक यमुना के किनारों और धारा में तलाशी चली.5 अक्टूबर को बागपत जिले के टांडा क्षेत्र के पास सलमान का शव मिला.उसके साथ बड़ी बेटी महक का शव भी बरामद हुआ.बाकी तीन बच्चों की तलाश अब भी जारी है.पुलिस और परिवार को आशंका है कि बच्चों के शव नदी की तेज धारा में बह चुके होंगे.इस घटना से पूरा इलाका शोक में डूब गया.सलमान के पड़ोसी और साथी मजदूरों के अनुसार, वह बेहद शांत स्वभाव का आदमी था, जो परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करता था.किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा. पुलिस जांच में सामने आई बेवफाई की कहानी वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की.सलमान के रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि खुशनुमा का प्रेमी साबिर पिछले कई महीनों से उसके संपर्क में था.दोनों के बीच लगातार बातचीत और मुलाकातें होती थीं.कई बार मोहल्ले वालों ने भी सलमान को चेताया, लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि बच्चों की मां है, इसे संभाल लूंगा.मगर खुशनुमा की हरकतें नहीं बदलीं.कैराना के एसएचओ रवि चौहान ने बताया कि सबूतों के आधार पर खुशनुमा और साबिर दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.दोनों ने शुरू में आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में मोबाइल चैट्स और गवाहों के बयानों के सामने सच उगलना पड़ा. गिरफ्तारी और अदालत में पेशी कैराना पुलिस ने देर रात दोनों को गिरफ्तार किया.जांच में यह भी सामने आया कि खुशनुमा ने सलमान के साथ झगड़े के बाद उसे अपमानित करते हुए घर से निकाल दिया था और प्रेमी साबिर के साथ फरार हो गई थी.इसी के बाद सलमान ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला किया.पुलिस ने दोनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाना और षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया है.दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि खुशनुमा पूछताछ के दौरान बच्चों की मौत पर तो रो पड़ी, लेकिन पति सलमान की मौत को लेकर उसने कोई पछतावा नहीं जताया.वहीं साबिर ने कहा कि उसका खुशनुमा से कोई रिश्ता नहीं था, लेकिन मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और फोटो ने उसकी बात झूठी साबित कर दी.

श्रीरामलला के चरणों में शीश नवाकर सीएम योगी ने मांगी प्रदेश की सुख-शांति की कामना

अक्टूबर महीने में सीएम योगी का पहला अयोध्या दौरा, हुआ भव्य स्वागत अयोध्या, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठी, जब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर पावन धरा पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपने अयोध्या प्रवास की शुरुआत संकट मोचन हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन से की, जहां उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। हनुमानगढ़ी से निकलने के बाद मुख्यमंत्री योगी सीधे श्रीरामलला के दरबार पहुंचे। आरती उतारकर उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाया और परिक्रमा करते हुए मंदिर निर्माण कार्यों की प्रगति का गहराई से अवलोकन किया। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उन्हें मंदिर के निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगामी चरणों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के दर्शन-पूजन के उपरांत मंदिर प्रांगण से बाहर निकलते समय श्रद्धालुओं और आमजन का हाथ जोड़कर अभिवादन भी स्वीकार किया। पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इससे पूर्व, अयोध्या आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रामकथा पार्क स्थित हेलीपैड पर भव्य स्वागत किया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। गौरतलब है कि अक्टूबर माह में यह मुख्यमंत्री योगी का पहला अयोध्या दौरा रहा, जिसमें उन्होंने न केवल धार्मिक आस्था प्रकट की, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के कार्यों की प्रगति पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। हेलीपैड पर भव्य स्वागत में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह व महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, अमित सिंह चौहान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, बीजेपी जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

350 से अधिक बालिकाओं ने प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाकर दिखाया आत्मविश्वास और परिपक्वता

मिशन शक्ति 5.0: बेटियों ने थामा प्रशासन का जिम्मा, कन्याओं के जन्म से अस्पतालों में गूंजे स्वागत गीत 350 से अधिक बालिकाओं ने प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाकर दिखाया आत्मविश्वास और परिपक्वता अस्पतालों में मनाया गया कन्या जन्मोत्सव, 500 से अधिक  नवजात बालिकाओं का पूजन कर माताओं को किया गया सम्मानित – नवजात के स्वागत के साथ ही कन्या सुमंगला योजना से जोड़कल जन्म से उच्च शिक्षा तक उनके भविष्य को किया गया सुरक्षित – नवजात बालिकाओं के नाम पर हुआ पौधारोपण, कन्या जन्मोत्सव बना जन-आंदोलन – मिशन शक्ति 5.0 के तहत अब तक 14.08 लाख लोगों को किया गया जागरूक लखनऊ मिशन शक्ति 5.0 के तहत अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह में बुधवार को पूरे प्रदेश में अनूठे आयोजन हुए। कहीं बेटियाँ ‘एक दिन की जिलाधिकारी’ बनकर जिम्मेदारी निभाती दिखीं, तो कहीं अस्पतालों में ‘कन्या जन्मोत्सव’ के जरिए नवजात बालिकाओं का हर्षोल्लास से स्वागत किया गया। इन आयोजनों ने न केवल बेटियों के प्रति समाज की सोच को बदला है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सपनों को नया आयाम भी प्रदान किया है। जहाँ-जहाँ बालिकाओं ने अधिकारी बनकर का पद संभाला, वहाँ उनकी गंभीरता, परिपक्वता और नेतृत्व क्षमता देखकर सभी प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में प्रदेश भर की 350 से अधिक बालिकाओं को जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव कराना था, ताकि वे भविष्य में उच्च पदों पर निर्णयकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हों।  सुबह औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के बाद इन बालिकाओं ने विभागीय बैठकों में हिस्सा लिया, योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। कई जिलों में बालिकाओं ने महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से संवाद किया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उनकी गंभीरता और परिपक्वता ने सभी को प्रभावित किया। विधिवत पूजन के साथ हुआ नवजात बेटियों का स्वागत वहीं दूसरी ओर, कन्या जन्मोत्सव ने पूरे प्रदेश में बेटियों के स्वागत को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया। एक ही दिन में जन्मी 500 से अधिक नवजात बालिकाओं का सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में विधिवत पूजन के साथ स्वागत किया गया। नवजात बेटियों और उनकी माताओं को उपहार स्वरूप वस्त्र, फल, पौष्टिक आहार और शुभकामना कार्ड भेंट किए गए।  नवजात कन्याओं को मिला मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ कन्या जन्मोत्सव को योगी सरकार की महत्वाकांक्षी "मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना" से जोड़ा गया। इस योजना के तहत नवजात बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। कार्यक्रम में उपस्थित परिवारों को इस योजना की पात्रता और लाभों की जानकारी दी गई, ताकि हर बेटी का भविष्य सुरक्षित हो सके। प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं अस्पतालों में पहुँचकर माताओं और नवजात बेटियों का सम्मान किया। साथ ही, बेटियों के जन्म की संख्या के अनुरूप पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और बेटी बचाओ के संदेश को एक साथ आगे बढ़ाया गया। बता दें कि मिशन शक्ति के पांचवें चरण में 22 सितंबर से अब तक 14.08 लाख लोगों को जागरूक किया गया, जिसमें महिलाएं, पुरुष, बालक और बालिकाएं शामिल हैं। यह अभियान नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए एक नई क्रांति का प्रतीक बन रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जोहरी ने कहा कि मिशन शक्ति का यही उद्देश्य है कि हर बेटी को यह विश्वास मिले कि वह केवल अपने सपनों तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें साकार करने की शक्ति भी उसके भीतर है। यह अनुभव उनके जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनेगा और आने वाले समय में उन्हें समाज की दिशा बदलने की ताकत प्रदान करेगा।"

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी, हथकरघा तथा वस्त्र मंत्री बोलेः ‘वोकल फॉर लोकल’ का मूलमंत्र पहल के माध्यम से होगा साकार

छोटे उद्यमियों, हस्तशिल्पियों व कारीगरों के चेहरों पर प्रसन्नता लाने का माध्यम बनेगा स्वदेशी मेलाः राकेश सचान -सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी, हथकरघा तथा वस्त्र मंत्री बोलेः 'वोकल फॉर लोकल' का मूलमंत्र पहल के माध्यम से होगा साकार -'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' तथा 'आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' की परिकल्पना को साकार करने का माध्यम बनेगा प्रदेशव्यापी स्वदेशी मेलाः राकेश सचान -यूपीआईटीएस की सफलता से प्रेरित होकर अब जिला स्तर पर भी कारीगरों, उद्यमियों व हस्तशिल्पियों को उपलब्ध कराया जा रहा है मंच  -9 से 19 अक्टूबर के मध्य प्रदेश के सभी जिलों में हाई फुटफॉल वाले क्षेत्रों में स्वदेशी मेले का होगा आयोजन, दीपावली पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का  भी किया आह्वान लखनऊ उत्तर प्रदेश को 'विकसित व आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' बनाने की दिशा में प्रयासरत योगी सरकार उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के तृतीय संस्करण के सफल आयोजन के उपरांत अब एक और अभिनव प्रयास करने जा रही है। प्रदेश के 75 जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), खादी, हथकरघा व हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने और जिला स्तर पर उन्हें बड़ा मंच उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार 9 से 19 अक्टूबर के मध्य स्वदेशी मेलों का आयोजन कराने जा रही है। बुधवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी, हथकरघा तथा वस्त्र मंत्री राकेश सचान ने प्रेसवार्ता के माध्यम से इस विषय में जानकारी देते हुए दीपावली के शुभ अवसर पर लोगों से इन मेलों में आने और स्थानीय उत्पादों को खरीदकर 'वोकल फॉर लोकल' की परिकल्पना को साकार करने की अपील भी की।            उन्होंने कहा कि सीएम योगी की मंशा अनुरूप प्रदेशव्यापी स्वदेशी मेला के आयोजन के जरिए एक बड़ा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जो दीपावली पर्व के अवसर पर छोटे उद्यमियों, हस्तशिल्पियों व कारीगरों के चेहरों पर प्रसन्नता व घरों में खुशहाली लाने का माध्यम बनेगा।   अधिक फुटफॉल वाले क्षेत्रों में होगा मेले का आयोजन यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन देश में केवल उत्तर प्रदेश में ही होता है। इसी तर्ज पर इस बार स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अब प्रदेशव्यापी स्वदेशी मेलों के आयोजन की शुरुआत की जा रही है। राकेश सचान ने कहा कि जैसे यूपीआईटीएस के संस्करणों ने प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों व शिल्पियों के उत्पादों को देशी- विदेशी मंच मिला, ठीक उसी तर्ज पर अब जिलों में भी अवसर उप्लब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेश के सभी जिलों में अधिक फुटफॉल वाले क्षेत्रों में इन मेलों का आयोजन होगा जो कि टेंट आदि लगाकर किया जाएगा। इन आयोजन में गांवों से आने वाले छोटे कारीगरों को अपने उत्पाद लाने के लिए किराया व हर प्रकार की मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी उन्होंने दिया।   यूपीआईटीएस से ली प्रेरणा, जिलों में उत्पाद बेचने का साबित होगा उत्तम मंच सचान ने बताया कि 25 सितंबर से 29 सितंबर के मध्य ग्रेटर नोएडा में आयोजित हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के तृतीय संस्करण ने अपार सफलता प्राप्त की है। आयोजन में 2200 से अधिक स्टॉलों का संचालन हुआ। 80 से अधिक देशों के 500 से अधिक क्रेताओं ने इसमें रुचि दर्शायी। इस पांच दिनी कार्यक्रम में 5 लाख से अधिक फुटफॉल हुआ तथा 12500 करोड़ के व्यवसायिक पूछताछ भी हुई। इसी सफलता को ध्यान में रखते हुए अब जीएसटी सुधारों व स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 9 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के मध्य 75 जनपदों में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। स्वदेशी मेले के जरिए जिला स्तर पर उद्यमियों, कारीगरों व हस्तशिल्पियों को अपने उत्पाद बेचने का उत्तम मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेलों में सांस्कृतिक विभाग व संस्थाओं के माध्यम से तमाम प्रकार की कलाओं का भी प्रदर्शन होगा। इन कार्यक्रमों के उद्घाटन के लिए प्रभारी मंत्री, विधायक व अध्यक्षों को सूचित कर दिया गया है। उनके अनुसार, प्रदेश में 9 अक्टूबर से अधिकतर क्षेत्रों में  मेलों का आयोजन शुरू होगा जो कि 18 तक चलेगा। वहीं, जिन क्षेत्रों में 10 अक्टूबर को मेले का शुभारंभ होगा वहां 19 अक्टूबर को समापन होगा। उन्होंने जानकारी दी कि 10 अक्टूबर को गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ मेले का शुभारंभ कर सकते हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने का बड़ा माध्यम साबित होगा प्रयास राकेश सचान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जीएसटी की घटी दरों के रूप में दीपावली के पहले जो उपहार देश को दिया गया इसी के अंतर्गत माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश को बढ़ावा देने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। इसी कड़ी में प्रदेशव्यापी स्वदेशी मेला का आयोजन मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में वैश्विक आर्थिक परिवेश के अनुरूप उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने की दिशा में हस्तशिल्पी, उद्यमी और कारीगरों को बड़ा संबल मिलेगा। मेले में उद्यमियों को निःशुल्क दुकाने लगाने के लिए स्थान दिया जाएगा तथा हर प्रकार की मदद की जाएगी। छोटे उद्यमियों व कारीगरों की आर्थिक सहायता भी एमएसएमई विभाग के माध्यम से की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा 75 जनपदों में मेले के आयोजन के लिए आदेश जारी किया गया है तथा पहली बार जनपद स्तर पर इस प्रकार के मेले का आयोजन किया जा रहा है। प्रक्रिया के अंतर्गत, लखनऊ में स्वदेशी मेला का आयोजन यूनिवर्सिटी कैंपस में होगा।  96 लाख इकाइयों के उत्पादों के जिले स्तर पर प्रदर्शन का मार्ग होगा सुनिश्चित राकेश सचान के अनुसार, यह पहल आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सफल होगी जिसमें एमएसएमई की 96 लाख इकाइयों का जिले स्तर पर प्रदर्शन का मार्ग सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि हमें अपने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्पियों व कारीगरों को प्रोत्साहित करना है। ऐसे में, मेले के माध्यम से दीपावली के पूर्व होने वाली खरीदारी में लोग आएं और माटीकला बोर्ड द्वारा तैयार किए गए दीये व कलाकृतियों, सीएम युवा मुहिम के अंतर्गत झालर आदि बनाने वाले कलाकारों, विश्वकर्मा श्रम सम्मान के माध्यम से ओडीओपी के हस्तशिल्पी कारीगर, खादी ग्रामोद्योग से जुड़े जो लोग हैं इनके उत्पाद अगर प्रदेशवासी खरीदेंगे तो गांवों के कारीगर लाभान्वित होंगे। यह आपके घरों में समृद्धि तो लाएगी ही विदेशी उत्पादों पर … Read more

पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के मिशन से काशी ने बनाया कीर्तिमान

यूपी की इकोनॉमी को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने दिया सवा लाख करोड़ का बूस्टअप डोज पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के मिशन से काशी ने बनाया कीर्तिमान 25 करोड़ 28 लाख लोगों ने नवीनीकृत कॉरिडोर के लोकार्पण से 30 सितंबर तक किए काशी विश्वनाथ के दर्शन दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकार्पण के बाद से नित नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा कॉरिडोर सुरक्षा का माहौल, बेहतर सुविधाएं और शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया ‘मोदी-योगी मॉडल’ से दौड़ रहा पूर्वांचल के विकास का चक्का,  मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बुलंदियों पर उत्तर प्रदेश का धार्मिक पर्यटन देशी विदेशी पर्यटकों के उत्साह से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर लोगों को मिल रहा रोजगार प्रति व्यक्ति औसतन 04 से 05 हजार रुपए तक खर्च के हिसाब से साढ़े तीन साल में प्रदेश को सवा लाख करोड़ की सौगात मुख्यमंत्री योगी के मिशन से काशी और आसपास के लाखों लोगों के लिए रोजगार की पैदा हुईं अपार संभावनाएं लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से श्री काशी विश्वनाथ धाम ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद से अब तक लगभग 25 करोड़ 28 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को अनुमानित सवा लाख करोड़ रुपये का बूस्टअप डोज मिला है। व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण ने न केवल काशी की छवि को बदला है, बल्कि पूरे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों में भी अप्रत्याशित वृद्धि की है। देश के विभिन्न प्रांतों से लेकर दुनिया के तमाम देशों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लगातार बढ़ते आगमन से स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों, ठेले वालों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के मॉडल ने यूपी की छवि को दी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण और एयरपोर्ट से लेकर गंगा घाट तक शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। धार्मिक पर्यटन के इस मॉडल ने यूपी की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। सिर्फ काशी नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति हो रही तेज संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर राजनाथ के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम में आने वाला पर्यटक औसतन 05 हजार रुपये से अधिक ही खर्च करता है। फिर भी न्यूनतम अनुमानित जीडीपी ग्रोथ के लिए यदि 04 हजार से 05 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के आंकड़े से जोड़ें तो इन साढ़े तीन वर्षों में करीब सवा लाख करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह प्रदेश की अर्थव्यवस्था में हुआ है। यह राशि न केवल काशी बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति को तेज कर रही है। यूपी में रिपलिंग इफेक्ट से पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि काशी विश्वनाथ महादेव के धाम पधारने वाले 70 प्रतिशत श्रद्धालु दक्षिण भारत से तथा लगभग 15 प्रतिशत श्रद्धालु अन्य राज्यों एवं जनपदों से होते हैं। यह श्रद्धालु काशी दर्शन के पश्चात् प्रायः विंध्यवासिनी धाम, तीर्थराज प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिष इत्यादि तीर्थों पर भी जाते हैं। इस प्रकार अर्थव्यवस्था में रिपलिंग इफेक्ट भी उत्पन्न होता है और पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि होती है। पूरे देश के लिए विकास का मॉडल बन गई है अपनी काशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से काशी और आसपास के क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी ने विकास की नई मिसाल पेश की है, वह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल का डेवलपमेंट तेज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य के विकास का सशक्त साधन बना रही है। अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल जैसे स्थलों का विकास भी तेज गति से किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अब पूरे प्रदेश में धार्मिक नगरों का विकास किया जा रहा है।

कानूनी पच में फंसा मौलाना तौकीर: 10 मुकदमे और कोर्ट सुनवाई तय

बरेली फतेहगढ़ जेल में बंद आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां कानूनी दांवपेंच के चक्रव्यूह में फंस गया है। फिलहाल उसका जेल से निकलना मुश्किल नजर आ रहा है। कोतवाली के अलावा बवाल के दिन दर्ज नौ अन्य मुकदमों में साजिशकर्ता के रूप में तौकीर को नामजद किया गया है। इन मुकदमों के विवेचकों ने तौकीर का वारंट बी फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया है। मौलाना की तलबी 14 अक्तूबर को की जानी है। दंगा कराने में 2010 से मौलाना तौकीर का नाम कई बार उछलता रहा है, लेकिन मौलाना पर कभी बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। कभी सत्ताधारियों का करीबी होने का मौलाना को फायदा मिला तो कभी सरकारों ने दरगाह परिवार से जुड़ाव के मद्देनजर तौकीर को रियायत बख्श दी। इस बार 26 सितंबर को प्रदर्शन का आह्वान करके मौलाना तौकीर ने मुसीबत मोल ले ली। मौलाना फतेहगढ़ जेल में और उसके खास गुर्गे बरेली जेल में बंद हैं। पांच थानों में दर्ज हैं दस मुकदमे 26 सितंबर को शहर में हुए बवाल के बाद पुलिस ने पांच थानों में दस मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें से कोतवाली के पांच मुकदमों समेत सात में मौलाना तौकीर का नाम शामिल था। चूंकि आयोजन तौकीर रजा के ही बुलावे पर होना था, इसलिए बाकी मामलों में भी साजिशकर्ता के तौर पर तौकीर का नाम जोड़ा गया है। इस तरह हालिया नौ मुकदमों में तौकीर को आरोपी बनाया गया है। इन नौ मामलों में बी वारंट फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2019 में सीएए एनआरसी मामले में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का मामला अभी तक कोतवाली में प्रचलित था, इसके विवेचक ने भी मौलाना को अपने मामले में आरोपी बताकर बी वारंट दाखिल किया है। सोमवार को टली सुनवाई, अब 14 अक्तूबर को होगी शुरू में सात मामलों में मौलाना को तलब कराने के लिए बी वारंट दाखिल किया गया था। इसके लिए सोमवार को सुनवाई होनी थी। बताते हैं कि फतेहगढ़ जेल प्रशासन ने स्टाफ की कमी की मजबूरी जताई तो सुनवाई टल गई। अब 14 अक्तूबर की तारीख सुनवाई के लिए लगी है। तौकीर को इस दिन फतेहगढ़ जेल से लाकर बरेली कोर्ट में पेश किया जा सकता है। चूंकि जल्द ही दीपावली है, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होने के आसार ज्यादा हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मौलाना तौकीर रजा से संबंधित सभी मुकदमों में विवेचना से लेकर गिरफ्तारी तक उच्च अधिकारियों की देखरेख में चल रही है। निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जा रही है। मौलाना को दी जा रहीं ज्ञानवर्धक पुस्तकें मौलाना तौकीर रजा 27 सितंबर से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल की तन्हाई बैरक में बंद है। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी शासन स्तर से की जा रही है। मौलाना की गतिविधियों से लेकर उससे मुलाकात करने वालों तक का पूरा ब्योरा अपडेट रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जेल प्रशासन ने मौलाना को ज्ञानवर्धक पुस्तकें मुहैया कराई हैं। उसे इच्छा के मुताबिक हिंदी व उर्दू साहित्य की पुस्तकें दी जा रही हैं।  

पीलीभीत के गांव रसिया खानपुर में बुखार का प्रकोप, 7 मौतें, स्वास्थ्य व्यवस्था में चिंता

पीलीभीत पीलीभीत के बीसलपुर तहसील के रसिया खानपुर गांव में बीते 24 घंटों में बुखार से तीन लोगों की मौत से गांव में हड़कंप मचा हुआ है। दो सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिनका उपचार चल रहा है। लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि सिस्टम मौतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसका नतीजा गांव के लोग भुगत रहे हैं। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने मंगलवार को दोपहर गांव रसिया खानपुर पहुंचकर स्थिति को परखा तो वहां स्वास्थ्य शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जताई। कुछ देर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने गांव में शिविर लगा दिया। बाढ़ की चपेट में आया था गांव पिछले दिनों जिले में हुई भारी बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बीसलपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों भी बाढ़ की जद में आए थे। इसमें रसिया खानपुर गांव भी शामिल था। गांव में जलभराव की स्थिति बनी थी। बाढ़ के बाद जलभराव की स्थिति तो सामान्य हो गई, लेकिन संक्रमण तेजी के साथ पनपने लगा और बीमार फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार पिछले 10 दिनों में सैकड़ों लोग बुखार से ग्रस्त हो गए। स्थिति गंभीर होने पर बरेली और शाहजहांपुर में ले जाकर मरीजों को भर्ती कराया गया। गांव में झोलाछापों के क्लीनिक भी मरीजों से भरने लगे। ग्रामीणों के अनुसार यही वजह रही कि पिछले 10 दिनों में सात लोगों की मौत बुखार से हुई है। निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट में भी बुखार की पुष्टि हुई लेकिन पूर्व में हुई चार मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के नाम पर बुखार की बात को नकारते हुए अलग-अलग बीमारियों से मौत होने का दावा किया गया। मंगलवार को गांव के अल्लू खान की पुत्री सकीना, 60 वर्षीय पूती बेगम व रेहान हुसैन (22) पुत्र एजाज हुसैन की बुखार से मौत हो गई। मंगलवार को ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के विरोध में प्रदर्शन किया। एसडीएम को निरीक्षण में नहीं लगा मिला स्वास्थ्य शिविर गांव रसिया खानपुर में मंगलवार को तेज बुखार से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी मिलने पर एसडीएम, कोतवाल संजीव शुक्ला के साथ गांव में पहुंचे। जहां मृतकों के घर जाकर अफसरों ने जानकारी की। घर वालों ने बताया कि उनके परिजनों की तेज बुखार से ही मौत हुई है। इसके बाद एसडीएम स्वास्थ्य शिविर की स्थिति परखने को उच्च प्राथमिक विद्यालय गए, लेकिन मौके पर शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जाहिर की तो दोपहर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने आयुष्मान केंद्र में स्वास्थ्य शिविर लगाया। आयुष्मान केंद्र के द्वार पर ग्रामीणों ने रोष जताया। लोगों का आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जांच में रिपोर्ट नेगेटिव दिखा देते हैं। जबकि बरेली के निजी अस्पतालों में उन्हीं मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। प्रदर्शनकारियों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति काफी रोष दिखा। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि रसिया खानपुर गांव में तीन और लोगों की मौत की सूचना मिली है। स्थलीय निरीक्षण कर जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य कैंप लगाकर भी लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। तीन हफ्ते पहले मौतों को गंभीरता से लेते तो नहीं जातीं और जानें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव रसिया खानपुर में तेज बुखार से पहले हुई मौतों को गंभीरता से लिया होता तो अब तीन और लोगों की जान नहीं जातीं। गांव रसिया खानपुर में करीब तीन सप्ताह पूर्व तेज बुखार फैला था। पिछले सप्ताह तेज बुखार से इस गांव में चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब दो सौ लोग तेज बुखार की चपेट में आ गए थे। मामला जानकारी में आने पर स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर से बीमारी का उपचार शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले हुईं मौतों को हल्केपन से लिया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यदि पहले हुई ग्रामीणों की मौतों को गंभीरता से लिया होता और उसी हिसाब से बीमार लोगों का उपचार किया होता तो बाद वाली मौत नहीं होती। ग्रामीणों ने जताया रोष मोहम्मद हुसैल ने बताया कि गांव में आने वाली बीसलपुर के स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह से निष्क्रिय है। टीम की निष्क्रियता के कारण ही स्थिति बदतर हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के लोगों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। समीम खान ने कहा कि गांव के जितने बीमार हैं उनका घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपचार करना चाहिए। जब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर अपने बीमारी का उपचार नहीं करेगी तब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। इदरीश खान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम बीमारों का कायदे से उपचार करने के बजाय अपना बचाव करती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लापरवाही की वजह से स्थिति खराब हुई है।  

सहारा शहर को सील करने के फैसले पर रोक के लिए कंपनी पहुंची हाईकोर्ट

लखनऊ  सहारा ने नगर निगम द्वारा सहारा शहर में लीज पर दी गई जमीनों और उन पर बनी संपत्तियों में हस्तक्षेप को चुनौती दी है। याचिका 8 अक्तूबर को न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। याचिका में नगर निगम द्वारा 8 और 11 सितंबर 2025 को जारी किए गए आदेशों को रद्द करने का आग्रह किया गया है। सहारा ने याचिका में कहा है कि इस मामले में सिविल कोर्ट में पहले से ही स्थगन आदेश लागू है। इसके अलावा, आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में भी नगर निगम को सहारा के पक्ष में लीज एग्रीमेंट बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नगर निगम ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। कंपनी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई करने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका के अनुसार, नगर निगम ने 22 अक्टूबर 1994 और 23 जून 1995 को गोमती नगर में सहारा को जमीन पट्टे पर दी थी। सहारा ने इन जमीनों पर 2480 करोड़ रुपए की लागत से 87 आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित की हैं। दशकों से विवादों में है यह जगह, बन सकती है विधानसभा? सहारा शहर शुरू से ही विवादों में रहा। नगर निगम से लीज मिलने के तीन साल बाद ही कानूनी विवाद शुरू हो गया था, जो 27 साल तक चलता रहा। ऐसे में आवासीय योजना कभी परवान नहीं चढ़ सकी और करोड़ों का लीज रेंट भी नगर निगम को नहीं मिला। नगर निगम ने सहारा हाउसिंग कंपनी को 130 एकड़ जमीन आवासीय योजना और 40 एकड़ ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए 30 साल की लीज पर दी थी। यह अनुबंध महज 100 रुपये के स्टांप पेपर पर किया गया था, लेकिन तीन साल बाद लीज शर्तों के उल्लंघन पर तत्कालीन नगर आयुक्त दिवाकर त्रिपाठी ने इसे निरस्त करने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद मामला अदालत में चला और साल तक अटका रहा। करीब 10 साल पहले जब सहारा की स्थिति सुधरी तो लीज रजिस्टर्ड की गई और संशोधन भी हुआ। एलडीए में मानचित्र भी पास करने के लिए भेजा गया। सहारा ने 15 आवंटियों की सूची भी दी, ताकि यह साबित कर सके कि योजना पर काम चल रहा है, लेकिन वे आवंटी कभी सामने नहीं आए और उनके नाम पर लीज डीड भी नहीं हो सकी। सेबी के दखल और कानूनी उलझनों के चलते योजना ठप पड़ गई। लीज की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम ने जमीन पर कब्जा ले लिया है। सहारा सिटी की जमीन पर अब क्या बनेगा, इसे लेकर कई अटकलें हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार नई विधानसभा भवन के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश लंबे समय से कर रही है। ऐसे में नगर निगम की 170 एकड़ और एलडीए की 75 एकड़ जमीन को मिलाकर करीब 245 एकड़ क्षेत्र यहां उपलब्ध है। यह जगह लोकेशन और आवागमन दोनों के लिहाज से उपयुक्त मानी जा रही है।