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बिहार में सत्ता बदलने का संकेत! अखिलेश बोले—तेजस्वी की ही बनेगी सरकार

बरेली यूपी के बरेली पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, पिछले चुनाव में भाजपा ने अपने हिसाब से अधिकारियों की जगह-जगह पोस्टिंग करा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया, लोकसभा चुनाव में भाजपा के एजेंट बनकर अधिकारियों ने वोटिंग कराई थी। लाखों लोगों को वोट डालने से वंचित कर दिया था। अखिलेश यादव बरेली में बहेड़ी विधायक अताउर रहमान की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। शादी समारोह निपटाने के बाद अखिलेश ने प्रेस कान्फ्रेंस की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के रिजल्ट पर भी विस्तार से चर्चा की। एग्जिल पोल में दिख रही एनडीए की जीत को अखिलेश ने गलत बताया। उन्होंने कहा, शुक्रवार को वोटिंग की गिनती शुरू होने के साथ ही एग्जिट पोल के सभी नतीजे धराशाई हो जाएंगे।   बिहार में तेजस्वी यादव की ही सरकार बनेगी। लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव बोले, अगर अधिकारी धांधली न करते तो परिणाम कुछ और होता। अखिलेश ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। बोले-धांधली को लेकर हमने कई बार शिकायत की लेकिन चुनाव आयोग ने कोई ध्यान नहीं दिया। भाजपा सरकार हमेशा से लोगों का ध्यान असल मुद्दों से भटकाती रही है। एसआईआर को लेकर अखिलेश यादव ने कहा, उत्तर प्रदेश में एसआईआर का काम शुरू करके तीन महीने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को उलझा दिया है। प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अखिलेश ने सपा कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, पीडीए प्रहरी बनकर हर वोट की रक्षा करें। किसी का वोट बने से ना छूटने पाए। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस बार भाजपा का आयोग बनकर नहीं रहेगा। अखिलेश बोले, बरेली के लिए समाजवादी पार्टी आगामी चुनाव में अपना अलग मेनिफेस्टो खुद तैयार करेगी। सपा जिला अध्यक्ष अगम मौर्य के यहां पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आने पर कुछ देर के लिए भगदड़ मच गई। अखिलेश यादव से मिलने, हाथ मिलाने के चक्कर में जुटी भीड़ अनियंत्रित हो गई। लोगों में धक्कामुक्की होने लगी और आवास में घुसने की कोशिश के चलते अफरातफरी मच गई। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को भी पसीना छूट गया। गेट पर सीढ़ी और रैंप पर कई लोग फिसल गए। भगदड़ में एक सिपाही, सपा की कार्यकत्री समेत कई लोग गिरकर घायल हो गए।  

ट्रकों की अवैध पासिंग के नाम पर उगाही! 7000 रुपए लेते पकड़े गए RTO-खनन विभाग के अधिकारी

लखनऊ यूपी एसटीएफ (UPSTF) ने ओवरलोड ट्रकों को अवैध तरीके से पास कराने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट में परिवहन विभाग और खनन विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि बालू और मौरंग से लदे ओवरलोड ट्रकों को बिना चेकिंग के यूपी में चलाने के लिए दलाल एक ट्रक से 7000 रुपये वसूलते थे। इसमें से 5000 रुपये सीधे आरटीओ और खनन विभाग के अफसरों तक पहुंचते थे। कई जिलों में छापेमारी, एफआईआर दर्ज UPSTF ने लखनऊ, फतेहपुर, उन्नाव और रायबरेली में एक साथ छापेमारी की। जांच के बाद एआरटीओ, पीटीओ और खनन अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लखनऊ के मड़ियांव थाने में एआरटीओ राजू बंसल, पीटीओ मनोज भारद्वाज समेत 9 लोगों पर मुकदमा दर्ज। फतेहपुर के खनन अधिकारी देशराज पटेल सहित 6 लोगों पर एफआईआर। रायबरेली, एआरटीओ पुष्पांजली और एक अन्य आरोपी को नामजद किया गया है। वहीं, उन्नाव के शहर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में अफसरों के साथ उनके गनर और ड्राइवरों के नाम भी शामिल हैं, जो इस अवैध वसूली में भूमिका निभा रहे थे। ऐसे चलता था वसूली का खेल एसटीएफ की जांच में सामने आया कि बांदा-हमीरपुर से लेकर लखनऊ तक ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का पूरा नेटवर्क चल रहा था। दलाल रात में ही अधिकारियों को ट्रक नंबर और वसूली गई रकम की जानकारी भेज देते थे ताकि सुबह किसी भी चेकिंग में ट्रक को न रोका जाए। अगर कोई ट्रक पकड़ा भी जाता, तो बिना चालान के छोड़ दिया जाता था। इस कार्रवाई के बाद यूपी एसटीएफ ने पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए आगे की जांच तेज कर दी है। अधिकारी अब यह पता लगा रहे हैं कि इस सिंडिकेट से जुड़े और कौन-कौन से अफसर और कर्मचारी हैं।

CBI का बड़ा एक्शन: रिश्वतखोर बैंक मैनेजर को 5 साल की जेल, 50 हजार का जुर्माना

लखनऊ  यूपी के लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत ने अंबेडकर नगर बसखारी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रामस्वरूप मिश्रा को घूसखोरी के मामले में दोषी पाते हुए 5 साल की सश्रम कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 मार्च 2017 को एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसे बैंक ऑफ बड़ौदा, बासखरी शाखा से “कामधेनु योजना” के तहत 20 लाख 25 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था। ऋण की कुछ राशि उसके खाते में जमा भी हुई, लेकिन अचानक खाता संचालन रोक दिया गया। जब शिकायतकर्ता ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक रामस्वरूप मिश्रा से कारण पूछा, तो उन्होंने खाते को चालू करने के लिए 30 हजार रुपये की घूस मांगी। इसके बाद में बातचीत के दौरान उन्होंने 25 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार करने पर सहमति जताई। राम स्वरूप मिश्रा को सीबीआई टीम ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम के रूप में हस्ताक्षरित खाली चेक स्वीकार करते समय रंगे हाथों पकड़ लिया और चेक बरामद कर लिया था। जांच पूरी होने के बाद 31 मार्च 2017 को चार्जशीट दायर की गई। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने रामस्वरूप मिश्रा को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। पुलिस पर फायरिंग के आरोपी की जमानत मंजूर वहीं एडीजे नीलकांत मणि त्रिपाठी की कोर्ट ने पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमले के आरोपी अनुज रावत की जमानत अर्जी साक्ष्य के अभाव में मंजूर कर ली है। आरोपी को 50-50 हजार की दो जामनतें दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने जमानत आदेश में कहा है कि मामले में आरोपी द्वारा चलाई गई गोली दारोगा के करीब से निकलना बताया गया है और पुलिस पार्टी के किसी सदस्य को कोई चोट आई हो ऐसी कोई रिपोर्ट पत्रावली पर नहीं है। साथ ही इस घटना और आरोपी के पास से बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। पत्रावली के अनुसार सुशांत गोल्फ सिटी थान प्रभारी उपेंद्र सिंह रिपोर्ट दर्ज कराई थी की वह अपनी टीम के साथ छह सितंबर को क्षेत्र में चेकिंग कर रहे थे। मुखबिर की सूचना पर एक मोटरसाइकिल को रोकने का प्रयास किया तो उस पर सवार लोग भागने लगे। भागन में बाइक समेत गिर गए, जिसमें एक फरार हो गया था तथा पुलिस से घिरे अनुज रावत ने गोली चला दी। इस पर जवाबी फायर किया तो आरोपी अनुज रावत के पैर में गोली लगी।  

वृंदावन में होगी मंदिर की तकनीकी जांच, आईआईटी रुड़की ने संभाली कमान

मथुरा  यूपी में मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर की इमारत को किसी सुधार की जरूरत है या नहीं इसके लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने गुरुवार सुबह बांके बिहारी मंदिर का सर्वे किया। गुरुवार को पहुंची आईआईटी रुड़की की टीम ने मंदिर के हर हिस्से को देखा। गौरतलब है कि बांके बिहारी मंदिर हाईपावर कमेटी ने बांके बिहारी मंदिर का स्ट्रक्चर ऑडिट कराने का निर्णय लिया था। इसी के तहत आईआईटी रुड़की की टीम गुरुवार को यहां पहुंची।   इस बारे में जानकारी देते हुए जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि हाईपावर कमेटी की टीम द्वारा लिये गये निर्णय के तहत आईआईटी रुड़की से इंजीनियरों की टीम यहां पहुंची है और उसने सर्वे किया है। उन्होंने कहा कि बांके बिहारी मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। मंदिर का स्ट्रक्चर कैसा है, इसमें सुधार की कोई जरूरत तो नहीं है, यह देखने के लिए टीम को बुलाया गया है। टीम दो दिन यहां सर्वे करेगी। आईआईटी रुड़की की टीम मंदिर में सर्वे करने के बाद इसके स्थायी समाधान भी खोजेगी ताकि भीड़ पर नियंत्रण रखा जा सके। रुड़की से आई टीम ने आज आकर अपना सर्वे शुरू किया है। टीम के द्वारा सर्वे रिपोर्ट को तैयार किया जाएगा। उसे आगामी 19 नवंबर को हाई पावर्ड कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। जिस पर कमेटी कोई ठोस फैसला ले सकती है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में सर्वे के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने प्रवेश के बाद ठाकुर श्रीबांके बिहारी जी के दर्शन किए। टीम लीडर प्रो. संजय के साथ आईआईटी रुड़की से एक सहायक, सेवायत दिनेश गोस्वामी और मंदिर के मैनेजर मुनीश शर्मा भी रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के प्रवेश करने और निकलने के सभी रास्तों दिखाया। गुरुवार को मंदिर के दोनों जगमोहन, पीछे का आंगन और चबूतरे का बारीकी से अध्यन किया है।

ऐतिहासिक निर्णय: अब यूपी में महिलाओं को नाइट शिफ्ट पर डबल पेमेंट, सुरक्षा बंदोबस्त भी पुख्ता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। इस नए फैसले के तहत अब यूपी में महिलाएं रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक फैक्ट्रियों और उद्योगों में काम कर सकेंगी। इसके लिए उन्हें अपनी सहमति देनी होगी।     डबल सैलरी और सुरक्षा का वादा योगी सरकार द्वारा जारी नए आदेश में महिलाओं की सुरक्षा और हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। रात की शिफ्ट (शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को सामान्य वेतन से डबल सैलरी दी जाएगी। ओवर टाइम की सीमा 75 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे प्रति तिमाही कर दी गई है, जिसके लिए भी सामान्य दर से डबल रेट पर भुगतान होगा। रात में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा गार्ड, CCTV निगरानी और Transport सुविधा अनिवार्य रूप से मुहैया कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने से रोकने के बजाय उन्हें सुरक्षित माहौल में काम करने की सुविधा देना है। फैक्ट्री एक्ट में भी किया संशोधन महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्योगों को लचीलापन देने के लिए Factories Act, 1948 में संशोधन किया गया है। अब काम के घंटे 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक किए जा सकते हैं, बशर्ते हफ्ते में कुल कार्य घंटे 48 से अधिक न हों। यह आदेश केवल सामान्य उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि 29 श्रेणियों के जोखिमभरे उद्योगों पर भी लागू होगा। अब इन खतरनाक उद्योगों में भी महिलाएं अपनी सहमति से काम कर सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य और सुरक्षा के विशेष प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। यूपी सरकार का यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ता है, जिससे उनकी रोजगार भागीदारी और आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा।  

योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर

मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देशों का असर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर 20 प्रमुख जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। कम हुई पराली जलाने की घटनाएं मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है। सेटेलाइट से की जा रही निगरानी सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।

सीएम योगी का बड़ा बयान: यूपी में जनजातीय संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार जनजातियों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। पहले नौकरी में उनको उचित भागीदारी नहीं मिल पाती थी। उनके कोटे की पूरी सीटें नहीं भर पाती थीं। हमने पुलिस की 60244 भर्तियां की तो इसमें आरक्षित कोटे की सभी सीटें अनुसूचित जातियों और जनजातियों से ही भरी। यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं में उनको उचित भागीदारी मिल रही है। उनकी शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है।   उन्होंने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जीवन सबके लिए प्रेरणादायी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को पूरा देश जान सके, यह अवसर जनजातीय गौरव पखवाड़ा के माध्यम से पूरे देश को उपलब्ध कराया है। मुख्यमंत्री इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में जनजातीय भागीदारी महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव के रंगों में सराबोर रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ करते हुए न सिर्फ ढोलक की थाप से कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसने हजारों वर्षों तक प्रकृति और परंपरा के संतुलन को बनाए रखा। यह विशेष उत्सव भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जो 13 से 18 नवंबर 2025 तक चलेगा। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनजातीय समूहों के लोक कलाकार, कारीगर, छात्र और प्रतिनिधि अपनी कला, संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन करेंगे।  

उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 उत्तर प्रदेश की विश्व पटल पर नई आर्थिक उड़ान उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग  आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट और मेरठ के खेल सामान जैसे राज्य के ओडीओपी उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में करेंगे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश के ग्रामीण व स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा  लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 का आयोजन भारत मंडपम, नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजित किये जा रहे अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ "साझेदार राज्य" के रूप में भाग ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश 44वें अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अपनी “लोकल टू ग्लोबल” की आर्थिक रणनीति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक व्यापर के केंद्र के तौर पर विकसित करना, साथ ही प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा इस मेले को राज्य की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना, युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता को प्रदर्शित करने के लिये भी की जाएगी।  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश एक साझीदार राज्य के रूप में शामिल हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “लोकल टू ग्लोबल” की मुहीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से राज्य के 2,750 से अधिक प्रदर्शक भागीदारी करेंगे। साथ ही इस मेले में 343 स्टॉल ओडीओपी योजना के अंतर्गत स्थापित किए जायेंगे। व्यापार मेले में राज्य की ओर से लगाये जा रहे ओडीओपी स्टॉल्स में आगरा का पेठा, बनारसी हस्तशिल्प, भदोही की कार्पेट, मेरठ के खेल सामान, कानपुर के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद के ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियों जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ पेश किए जा रहे ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। मेले के दौरान विदेशी निवेशकों एवं प्रतिनिधिमंडलों के साथ ओडीओपी उत्पादकों की बी टू बी मीटिंगस का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। यूपी सरकार विशेष तौर पर राज्य के युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दे रही है। उत्तर प्रदेश से लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में अपनी नवोन्मेषी पहल पेश करने के लिये भेजे जाएगें। ये स्टार्टअप्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक हैं, ये महिलाएं गांवों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मेले में उनके लिए विशेष वर्कशॉप्स और नेटवर्किंग सेशन आयोजित किये जाएंगे, जहां वे  निवेशकों और खरीदारों से प्रत्यक्ष जुड़ेंगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस' सेमिनार किए जाएगें साथ ही डिजिटल शोरूम भी निर्मित किये जाएगें , जो भविष्य में निर्यातकों को राज्य की ओर आकर्षित करेंगे। साथ ही ओडीओपी उत्पादों को लेकर विदेशी दूतावासों और व्यापार मंडलों के साथ समझौतों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है, जहां राज्य के स्थानीय उत्पाद वैश्विक ब्रांड बनेंगे और राज्य की ग्रामीण इकाईयां वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी।

517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी

जनजातीय गौरव को नई पहचान, योगी सरकार ने बदली वंचित समाज की तस्वीर 517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी थारू, बुक्सा और अन्य जनजातियों के लिए योगी सरकार का सुरक्षा कवच, आवास से आजीविका तक बड़ा विस्तार थारू हस्तशिल्प कंपनी ने खोले राष्ट्रीय बाजार के दरवाजे, 371 समूहों को मिला आर्थिक संबल एकलव्य मॉडल स्कूलों और सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा बनी नई ताकत पीएम जनमन से वन क्षेत्रों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल की सीधी पहुंच, बुक्सा जनजाति के 815 परिवार हुए संतृप्त परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से युवाओं को बड़ा लाभ, सैकड़ों की प्रशासनिक सेवाओं में एंट्री विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए योगी सरकार का बड़ा हस्तक्षेप, शिक्षा और निवास योजनाओं से जीवन में आया स्थायित्व लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जनजातीय समाज के जीवन में जो बदलाव आया है, वह सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्य धारा में जगह दिलाई बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और अंत्योदय से सर्वोदय का रास्ता खुले। प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने योजनाएं जमीन पर उतारीं। वनाधिकार अधिनियम के तहत आवासीय अधिकार दिए गए, मुख्यमंत्री आवास योजना से वनवासियों को पक्के घर मिले और पीएम जनमन योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया गया। खास तौर पर बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर एक नई मिसाल पेश की गई। 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'धरती आबा जनभागीदारी अभियान' ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदली। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन कराया। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी भरपूर जोर दिया गया। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय स्थापित हुआ और मिर्जापुर, सोनभद्र, महराजगंज में नए संग्रहालयों पर तेजी से काम चल रहा है। थारू समुदाय की कला और कौशल को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई। इसमें जुड़े 371 समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई। शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है। ये पहलें साफ बताती हैं कि योगी सरकार जनजातीय बच्चों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है। पुलिस भर्ती में आरक्षित सभी सीटें पूरी तरह भरना इसी परिवर्तन का संकेत है। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन, साढ़े 06 हजार युवाओं को प्रशिक्षण और आठ उच्चस्तरीय केंद्रों की स्थापना ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। विमुक्त और घुमंतू समुदायों को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया। नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया जैसे समुदायों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक सुरक्षा, आवास और आजीविका से जोड़कर सरकार ने उन्हें सम्मानजनक जीवन की राह दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया

भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे भगवान बिरसा मुंडाः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया भगवान बिरसा मुंडा ने दिया नारा, देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करेः मुख्यमंत्री उत्सव में उत्तर प्रदेश आकर 22 राज्यों के कलाकार बन रहे सहभागी बोले सीएम- जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने विकास कार्यों को भी गिनाया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे। इसके लिए उन्होंने अभियान चलाया, जिस पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने रांची की जेल में अंतिम सांस ली। उन्होंने जनजाति समुदाय को नारा दिया कि अपना देश-अपना राज। देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करे। धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी ने 15 नवंबर को जनजाति दिवस के रूप में आयोजित करने की प्रेरणा दी। सीएम योगी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया। सीएम ने यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मेजबान उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के जनजाति कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति भी दी। सीएम योगी ने इस वर्ष की विशेषता बताते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहली से 15 नवंबर तक देश में जनजाति गौरव पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। सरकार द्वारा जनजाति समुदाय को समाज व राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने व सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। 22 राज्यों के कलाकार उत्तर प्रदेश आकर बन रहे सहभागी सीएम योगी ने कहा कि सांस्कृतिक समागम में 22 राज्यों के कलाकारों को जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कलाकार सहभागिता की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश पार्टनर स्टेट है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, सिक्किम, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मिजोरम, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड व पंजाब के कलाकार उत्तर प्रदेश में आकर जनजाति भागीदारी उत्सव में सहभागी बन रहे हैं। यहां हस्तशिल्प व कला प्रदर्शनी, व्यंजन मेला और जनजाति साहित्य को समर्पित साहित्यिक व विकास मंच भी है। जनजाति समुदाय की शिक्षा का बढ़ा स्तर, मिल रहा शासन की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि जनजातीय समुदाय की आबादी यूपी में कम है। पहले सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकालते थे तो अनुसूचित जाति की पूरी सीटें नहीं भरी पाती थीं। अभी हाल में 60,244 पुलिस की भर्ती की गई तो इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें उसी समाज के युवाओं से भरी गईं। यह चीजें दिखाती हैं कि उनके शिक्षा का स्तर, भागीदारी बढ़ी है। शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने तय किया कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी जनजातियां हैं, उन्हें अधिकार प्राप्त हो और उन्हें सेचुरेशन के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो। थारू, मुसहर, चेरो, बुक्सा, सहरिया, कोल, गौड़ आदि जनजातियों को शासन की सभी योजनाओं से आच्छादित करने के लिए सरकार ने मिशन मोड पर अभियान चलाया। परिणामस्वरूप ज्यादातर जनजातियों को विकास की योजनाओं (कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत) का लाभ दिया जा रहा है। सीएम ने की प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाभियान की चर्चा सीएम ने कहाकि जनजाति समुदाय के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के माध्यम से अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। बिजनौर में बुक्सा जनजाति को सूची में श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके तहत 815 परिवारों को, इसमें बुक्सा जनजाति के 145 पीएम आवास व समस्त घरों के विद्युतीकरण, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आंगनबाड़ी सेंटर, पांच बसावटों में मोबाइल टावर, पांच मल्टीपर्पज सेंटर व पांच वनधन केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों को सभी योजनाओं से जोड़ने का किया गया कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जितनी भी अनुसूचित जनजाति की बस्तियां हैं, धरतीआबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत उन्हें सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है। इसके लिए 26 जनपदों के 47 ब्लॉक व 517 ग्रामों को चिह्नित किया है। इनमें सोनभद्र में सर्वाधिक 176 गांव, बलिया के 61, ललितपुर के 36, देवरिया, लखीमपुर खीरी व कुशीनगर के 34-34, गाजीपुर के 26, मीरजापुर के 20, गोरखपुर के 18, चंदौली के 17, बलरामपुर के 16, पीलीभीत, प्रयागराज व सिद्धार्थनगर के 7-7, बिजनौर के 5, बहराइच व बस्ती के तीन-तीन, बाराबंकी, भदोही, महराजगंज, श्रावस्ती के दो-दो, अंबडेकरनगर, महोबा, संतकबीरनगर, जौनपुर, सीतापुर के एक-एक गांव को आच्छादित करने का कार्य किया गया है। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों की कनेक्टिविटी से लेकर सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इनका आधार, आयुष्मान कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना, जाति-निवास प्रमाण पत्र, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा योजना, राशन कार्ड आदि की व्यवस्था के साथ ही यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को डबल इंजन सरकार ने आच्छादित करने की स्वीकृति दी। जनजाति गौरव की पुनर्स्थापना के साथ ही समाज को बढ़ा रही डबल इंजन सरकार सीएम योगी ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का जिक्र किया। कहा कि हम लोगों ने अब तक 1.50 लाख छात्रों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया है। 9 आश्रम पद्धति विद्यालय लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, बहराइच, महराजगंज, श्रावस्ती, बिजनौर में संचालित हैं। इनके माध्यम से 2026 जनजाति छात्र-छात्राओं को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। जनजाति छात्रों के लिए दो निःशुल्क छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। 8 छात्रावास (लखीमपुर खीरी, चंदौली में दो-दो, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर, सोनभद्र में एक-एक) निर्माणाधीन हैं। जनजाति छात्रों के लिए लखीमपुर खीरी, बहराइच व सोनभद्र में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित है और ललितपुर में निर्माणाधीन है। कक्षा छह, 9 व 11 की वे छात्राएं, जो आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत नहीं हैं, उन्हें यूनिफॉर्म, साइकिल योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। सीएम ने वनाधिकार अधिनियम की … Read more