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प्रधानमंत्री मोदी से योगी आदित्यनाथ की मुलाकात, PM आवास पर लंबी बैठक में क्या हुआ?

नई दिल्ली/ लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक लंबी बैठक में यूपी चुनाव की रणनीति के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मोदी और योगी की ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है। क्योंकि यूपी चुनाव से पहले अक्तूबर में यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्तूबर को वोटिंग होगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि – आपका मार्गदर्शन 'नए उत्तर प्रदेश' के निर्माण हेतु मुझे सदैव नई ऊर्जा देता है। अमूल्य समय प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी। आपको बता दें बीजेपी से अरूण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं डॉ. दिनेश शर्मा अंडमान- निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद पहले ही राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। 16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। राज्यसभा की 10 सीटों में 8 भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास हैं। अभी तक किसी भी पार्टी ने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच होने वाली हर मुलाकात का अपना महत्व होता है, खासकर तब जब राज्य में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हों. ऐसे में यह बैठक भी आने वाले समय में पार्टी की दिशा और रणनीति को समझने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है. फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मुलाकात से जुड़ी कोई और जानकारी सामने आती है या नहीं।  यूपी की 11 एमएलसी सीटों पर चुनाव इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है। एमएलसी की 11 सीटों में 8 भाजपा और 3 सपा के पास हैं। भाजपा ने 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। शाह से मिले थे केशव प्रसाद मौर्य आपको बता दें इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुलाकात की थी। जिसमें यूपी चुनाव और पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी। बैठक के बाद केशव मौर्य ने कहा कि 2027 में तीसरी बार फिर से कमल खिलने जा रहा है। विपक्ष के 70 साल के शासन पर मोदी के 12 साल भारी पड़े।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट

नई दिल्ली  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। प्रधानमंत्री आवास पर हुई मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री को फिरोजाबाद के ODOP ग्लासवर्क से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट की। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा फिलहाल सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन से जुड़ी गतिविधियां लगातार चल रही हैं। हालांकि इन मुलाकातों में किन विषयों पर चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक जानकारी के बिना किसी राजनीतिक एजेंडे की पुष्टि नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री योगी इससे पहले भी दिल्ली दौरों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जेपी नड्डा समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करते रहे हैं।

बारिश ने दी बिजली विभाग को बड़ी राहत, अधिकतम मांग 6197 मेगावाट घटी

ओबरा (सोनभद्र)  प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हो रही झमाझम बारिश का सीधा असर बिजली की खपत और अधिकतम मांग पर पड़ा है। बीते 24 घंटों में प्रदेश की बिजली खपत में 125.1 मिलियन यूनिट की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही अधिकतम बिजली मांग में भी 6197 मेगावाट की कमी आई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही बिजली की मांग के बीच बारिश से आई इस गिरावट ने बिजली प्रबंधन को बड़ी राहत दी है। यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के अनुसार 24 सितंबर को प्रदेश में बिजली की खपत 501.3 मिलियन यूनिट दर्ज की गई थी। मौसम में हुए बदलाव के बाद बारिश का दौर तेज होने से 25 सितंबर को यह घटकर 376.2 मिलियन यूनिट रह गई। इस तरह एक दिन में खपत में 125.1 मिलियन यूनिट की कमी दर्ज हुई। इसी तरह बिजली की अधिकतम मांग भी तेजी से नीचे आई। 24 सितंबर को प्रदेश में अधिकतम मांग 27577 मेगावाट थी, जो 25 सितंबर को घटकर 21380 मेगावाट रह गई। यानी मांग में एक दिन में 6197 मेगावाट की गिरावट दर्ज हुई। दरअसल सितंबर के दूसरे पखवाड़े में बारिश कमजोर पड़ने के साथ उमस बढ़ने से बिजली की मांग में फिर तेजी आई थी। 23 सितंबर की रात प्रदेश में मांग 29 हजार मेगावाट के करीब पहुंच गई थी। इसके बाद 24 सितंबर को भी मांग 27577 मेगावाट रही। ऐसे में बारिश की सक्रियता बढ़ने से तापमान और उमस में कमी आई तथा पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर जैसे घरेलू विद्युत उपकरणों के इस्तेमाल में कमी का असर कुल खपत पर दिखाई दिया। दो दिन और सक्रिय रह सकता है मौसम मौसम विभाग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि 27 सितंबर को भी दोनों अंचलों में भारी से बहुत भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है। हालांकि 28 सितंबर से प्रदेश में मौसम साफ़ होने का अनुमान जताया जा रहा है। ऐसे में अगले एक-दो दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने पर बिजली की मांग अपेक्षाकृत निचले स्तर पर बनी रह सकती है। हालांकि 28 सितंबर के बाद मौसम में सुधार और तापमान बढ़ने की स्थिति में घरेलू खपत एक बार फिर बढ़ सकती है। इससे बिजली की मांग में दोबारा उछाल होने की संभावना जताई जा रही है।

योगी सरकार काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास भी सुनिश्चित करेगी, 7 माह में 51 हजार से ज्यादा गुमशुदगी के मामलों का समाधान

लखनऊ बच्चे की गुमशुदगी परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं होती, लेकिन उसकी सकुशल बरामदगी के बाद भी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। योगी सरकार ने बाल संरक्षण की व्यवस्था को इस सोच के साथ मजबूत किया है कि बच्चे को केवल परिवार तक पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार उसकी काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाए। बाल हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से संकट में फंसे बच्चों तक मदद पहुंचाने के साथ उनकी सुरक्षित वापसी और आगे की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। काउंसलिंग से सामान्य जीवन की ओर वापसी गुमशुदगी या संकट की परिस्थितियों से गुजरने वाले बच्चे कई बार मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे में जरूरत के अनुसार काउंसलिंग उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चे की स्थिति और जरूरत का आकलन कर उसे आवश्यक संरक्षण एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे परिवार में वापसी के बाद बच्चे को सामान्य जीवन में लौटने के लिए जरूरी भावनात्मक सहारा मिल सके। बरामदगी के बाद भी सुरक्षा की जिम्मेदारी 1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बाल हेल्पलाइन पर बच्चों से संबंधित कुल 55,791 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 51,402 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 19,811 मामले शामिल रहे, जबकि 18,230 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इसके अलावा बच्चों के मिलने से संबंधित 8,714 मामले हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,335 मामलों का समाधान किया गया। सरकार का जोर अब केवल बच्चे को तलाशने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी है। 1098 बनी बच्चों की समस्याओं तक पहुंचने की कड़ी बाल हेल्पलाइन 1098 को बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें संबंधित स्तर तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी के मामले ही नहीं, बल्कि बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं की सूचनाएं भी प्राप्त होती हैं। इन मामलों में संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई की जाती है। प्राप्त शिकायतों की प्रगति पर नजर रखकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षित बचपन के साथ सुरक्षित भविष्य पर फोकस महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश और सुरक्षित वापसी के साथ परिवार से पुनर्मिलन, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रसाद बोले- उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर, डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव

इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर तक, यूपी बनेगा देश का नंबर-1 टेक्नोलॉजी हब: जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बोले- उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर, डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा: जितिन प्रसाद ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर है। यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 'यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख हब बनाना है और इसके लिए राज्य में तेजी से जरूरी इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय वाली डबल इंजन सरकार इस बदलाव को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और ट्रेड देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं और उत्तर प्रदेश इनके माध्यम से नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकता है। नोएडा से आगे पूरे यूपी में टेक्नोलॉजी का विस्तार केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब प्रयास केवल नोएडा तक निवेश सीमित रखने का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी के अवसर पैदा करने का है। इसका सीधा लाभ राज्य के युवाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डाटा सेंटर्स, एआई लैब्स तथा अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर उत्तर प्रदेश में बन रहे नए इकोसिस्टम की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो। असेंबली से कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ेगा यूपी जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहल के जरिए देश कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब इसी ताकत के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण तथा उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना इस विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी मदद का लाभ लें, लेकिन आत्मनिर्भर बनें उद्योग केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी विकास को गति देने का माध्यम हैं, लेकिन उद्योगों की दीर्घकालिक सफलता उनकी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगी। सरकार जमीन, नीतियां, मंजूरियां और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उद्योगों को अंततः कॉम्पिटेटिव और सेल्फ सस्टेनिंग बनना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए सक्रिय और गुड गवर्नेंस के साथ काम कर रही है। निवेशकों को सुरक्षित और स्थिर नीतिगत वातावरण देना जरूरी है, ताकि वे लंबी अवधि के फैसले ले सकें। एआई से बढ़ेगी एमएसएमई की उत्पादकता जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई का इस्तेमाल केवल तकनीक अपनाने के लिए नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एआई के माध्यम से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम करता है या उत्पादकता बढ़ाता है तो यही तकनीक का वास्तविक लाभ होगा। उन्होंने युवाओं को एआई इनोवेटर्स, रिसचर्स और एडॉप्टर्स के रूप में तैयार करने की जरूरत बताई। साथ ही आईआईटी कानपुर  समेत शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए अवसर का यह महत्वपूर्ण दौर है। आने वाले वर्षों की योजना आज से बनानी होगी, ताकि राज्य की युवा पीढ़ी को एक ऐसा इकोसिस्टम मिल सके जो उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस के रूप में स्थापित करे। नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी बढ़ेगा जीसीसी का विस्तार: आलोक कुमार उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर विशेष फोकस किया जा रहा है। नोएडा में पहले से जीसीसी मौजूद हैं, जबकि कुछ जीसीसी ने लखनऊ में भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई जीसीसी पालिसी और आईटी पॉलिसी के जरिए अब नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में भी अधिक जीसीसी आकर्षित करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में आईबीएम समेत कई आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूद हैं। राज्य की जीसीसी और आईटी नीतियों को अन्य राज्यों की नीतियों के अनुरूप मजबूत बनाया गया है तथा आईटी और आईटी एनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस) को पहले ही इंडस्ट्री स्टेटस प्रदान किया जा चुका है।

गड्ढामुक्त सड़कों पर CM योगी का फोकस, 27 सितंबर को PWD की बड़ी समीक्षा

लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ 27 सितंबर को लोक निर्माण विभाग (PWD) की समीक्षा बैठक बुलाई है। इसमें पीडब्ल्यूडी के कामों का हिसाब-किताब होगा। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी चीफ इंजीनियरों को तैयारी के साथ बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ बारिश के कारण टूटी सड़कों की मरम्मत, उन्हें गड्ढामुक्त किए जाने, वित्तीय वर्ष (financial year) 2023-24 से पहले स्वीकृत 50 करोड़ से अधिक के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए रिवाइज्ड ऐक्शन प्लान (पुनरीक्षित कार्ययोजना), वित्तीय वर्ष 2027-28 के नए कामों का ऐक्शन प्लान (कार्ययोजना) और 2026-27 के तहत अलॉट किए रुपयों और खर्च की समीक्षा करेंगे। इस दौरान जीएसटी और अतिरिक्त बिटुमिन्स की मांग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव के मुताबिक प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इन सूचनाओं के साथ दोपहर 12 बजे से आयोजित बैठक में हिस्सा लेंगे। छुट्टी में खुले रहेंगे पीडब्ल्यूडी के सभी कार्यालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 27 सितंबर को समीक्षा बैठक को देखते हुए शनिवार और रविवार को भी लोक निर्माण विभाग प्रमुख अभियंता कार्यालय तथा सभी क्षेत्रीय, वृत्तीय तथा खंडीय कार्यालय खुले रहेंगे। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी के मुताबिक मुख्य अभियंता मुख्याल-1 सेतु और भवन में भी सामान्य दिनों की तरह कार्य होगा। कानपुर में महापौर ने जर्जर सड़कों का ठीकरा अब पीडब्ल्यूडी पर फोड़ा उधर, कानपुर से आई एक खबर के अनुसर वहां की खराब सड़कों को लेकर जनप्रतिनिधियों को निशाने में लेने के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने अब इसका ठीकरा पीडल्यूडी के सिर फोड़ा है। शुक्रवार को हुई बैठक में उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर खतरनाक गड्ढे हैं, उनमें अधिकतर सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं। बैठक में नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय समेत जलकल, पीडब्ल्यूडी, केस्को, मेट्रो के अफसर मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने सभी अफसरों से कहा कि हर एक विभाग आपस में समन्वय बनाकर 10 अक्तूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करा दें। सड़क स्थिति की समीक्षा मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में हुई बैठक में महापौर ने प्रमुख सड़कों की स्थिति, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और अलग-अलग विभागों की ओर से सड़क खोदने के बाद उसे दोबारा ठीक कराने की स्थिति की समीक्षा की गई। महापौर ने कहा कि शहर में कहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं तो कहीं पाइपलाइन, बिजली लाइन या दूसरे विकास कार्यों की वजह से सड़क खोदने के बाद उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में बड़ी संख्या में खराब सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं, पर उनकी खराब स्थिति का दोष नगर निगम पर आता है। पीडब्ल्यूडी अफसरों को अल्टीमेटम महापौर ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से ऐसी सड़कों की जल्द मरम्मत कराने को कहा। निर्देश दिए कि जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां काम में देरी न की जाए। त्योहार सिर पर है। अब लापरवाही सहन नहीं होगी। उन्होंने सड़क मरम्मत में आ रही दिक्कतों और काम पूरा करने की समय-सीमा की भी जानकारी ली। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी विभाग की ओर से सड़क बनाने के बाद दूसरे विभाग की खोदाई के कारण वह दोबारा खराब नहीं होनी चाहिए। पैचवर्क तय लक्ष्य में पूरा हो नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़कों पर चल रहे और प्रस्तावित कामों की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य 10 अक्तूबर तय हुआ है। जिन स्थानों पर पैचवर्क प्रभावित हो रहा है, वहां मौसम साफ होते ही तेजी से काम कराया जाएगा। जिन जगहों पर नई सड़क का निर्माण होना है, वहां संबंधित विभाग अपनी कार्ययोजना के अनुसार काम करेंगे।

UPITS की कहानी: योगी के प्रयासों से बदलती उत्तर प्रदेश की तस्वीर

यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा –    नम्रता नारायण, उद्यमी, प्रबंध निदेशक, मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स, नोएडा नोएडा बशीर बद्र साहब का एक मशहूर शेर है- “ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा!” मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी। वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते। पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी व कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे। लेकिन, हकीकत यही है। यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है। यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया। एमएसएमई बना आर्थिक क्रांति का केंद्र एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया।  ओडीओपी से मिली संजीवनी उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अपनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग व वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे। स्थानीय हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे। वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'ओडीओपी' योजना की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था।  योजना का बहुआयामी कार्यान्वयन ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई। सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया। उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ। अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया। तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई। एमएसएमई सेक्टर का पुनरुद्धार और आर्थिक प्रभाव ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए। राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, जिससे युवाओं का पलायन रुका। एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे। ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया।   यूपीआईटीएस बना वैश्विक शोकेस स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।   ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल … Read more

गंडक-राप्ती समेत कई नदियां उफान पर, यूपी के जिलों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

लखनऊ नेपाल के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और व्यास नदियां उफान पर हैं। बारिश के चलते गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज जिले के कई जलभराव वाले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। उफनाते नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। सीएम योगी ने जीर्ण-शीर्ण मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जरूरत के अनुसार निकटतम राहत शरणालय में पहुंचाया जाए, ताकि भारी बारिश या आकस्मिक बाढ़ की स्थिति में उनके जीवन को खतरा न हो। महाराजगंज के धानी क्षेत्र में रिगौली बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर बढ़कर 76.85 मीटर पर पहुंच गया है। सदर क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 78.48 मीटर और ठूठीबारी क्षेत्र में चंदन नदी का जलस्तर 99.65 मीटर दर्ज किया गया है। कंट्रोल रूम के अनुसार महराजगंज और नेपाल सीमा के सभी तटबंध फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं। उधर, नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के बाद बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज तेजी से बढ़ने लगा है। शुक्रवार की दोपहर वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर नदी का डिस्चार्ज 79 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया, जो शाम तक बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक पर पहुंच गया। नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज धारा को लेकर कुशीनगर में रेता क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। छितौनी तटबंध के भैसहा गेज पर नदी चेतावनी बिंदु 95 मीटर के सापेक्ष 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे तटबंध पर पुनर्स्थापित किए गए स्परों पर नदी का दबाव सीधे पड़ रहा है। वहीं, छितौनी तटबंध के ठोकर नंबर दो और भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन पर कटान का खतरा बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के एसडीओ संजय गौंड टीम के साथ तटबंध और संवेदनशील बिंदुओं का निरीक्षण कर रहे हैं। करीब दो हफ्ते तक शांत रहने वाली बड़ी गंडक नदी नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश के बाद एक बार फिर उफान पर आ गई है। लगातार बारिश से उफनाईं नदियां, जलस्तर में बढ़ोतरी शुक्रवार की शाम पांच बजे जारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष से जारी रिपोर्ट के अनुसार गंडक बैराज वाल्मीकिनगर से डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 29 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने महाराजगंज में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी करते हुए नदी-नालों से दूरी बनाने की अपील की है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे तक जिले में 53 मिमी और बी-गैप क्षेत्र में 79 मिमी भारी बारिश दर्ज की गई। 24 घंटे के भीतर नदियों के जलस्तर और डिस्चार्ज में भारी उछाल आया है। वाल्मीकिनगर बैराज का डिस्चार्ज गुरुवार को जहां 56 हजार क्यूसेक था वह शुक्रवार सुबह आठ बजे 79 हजार 700 क्यूसेक, सायं चार बजे बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक व सायं पांच बजे 1.29 लाख क्यूसेक पहुंच गया। गंडक नदी में लगातार पानी बढ़ रहा है। दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश गोरखपुर मंडल में पिछले दो-तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं बारिश से सूख रहे खेतों को संजीवनी मिली है, तो कहीं तेज हवा के कारण पककर तैयार धान और खड़ी गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। निचले और चंवर क्षेत्र के खेतों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित होने लगी है। नदी पार क्षेत्र में केले की खेती पर भी मौसम की मार पड़ी है। लगातार बारिश के कारण किसानों के सामने गिरी फसल को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। तेज हवा-बारिश से धान और गन्ने की फसलें गिरीं कुशीनगर के सोहसा मठिया प्रतिनिधि के अुनुसार क्षेत्र में बारिश के साथ चली तेज हवा से कई खेतों में गन्ने और धान की फसल गिर गई। वहीं, पानी पहुंचने में दिक्कत वाले खेतों में महंगे डीजल से सिंचाई कर रहे किसानों को बारिश से राहत मिली है। क्षेत्र के सोहसा, कुरमौटा, मंझरिया, नरकटिया, महुई बुजुर्ग, परवरपार, पिपरी, मदरहा आदि गांवों में बारिश से धान की फसल को पानी मिला है। किसान महंथ यादव, जितेंद्र राव, ब्रजेश सिंह, सोमनाथ तिवारी, प्रमोद शर्मा, बबलू मल्ल, शशिकांत ओझा, दिग्विजय शर्मा आदि ने बताया कि बारिश से गन्ने और धान की फसल को पानी मिला है, जिससे फायदा हुआ है, लेकिन तेज हवा के कारण कई खेतों में फसल गिर गई है। इससे फसल को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। बरवा रतनपुर प्रतिनिधि के अनुसार नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में बारिश से धूस भूमि के खेतों में लगी धान की फसल को राहत मिली है, जबकि चंवर और निचले क्षेत्रों में पानी भरने से फसल प्रभावित हुई है। बरवा रतनपुर, कोहरगड्डी, नौगांवा आदि गांवों में खेतों में पानी लगा है। मेहंदीगंज प्रनिनिधि के अनुसार रामकोला क्षेत्र में बारिश और तेज हवा से गन्ने की खड़ी फसल प्रभावित हुई है। दो दिन में 10 एमएम हुई बारिश, ठंडक की दस्तक पश्चिमी बंगाल में उठे चक्रवात लानीलों के चलते जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुककर हुई बारिश से जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली, वहीं मौसम में यकायक ठंडक महसूस होने लगी। मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि आगामी तीन तक रिमझिम बारिश होने की संभावना है। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और रिमझिम बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर और शाम तक रुक-रुककर बारिश होती रही। इसके चलते तापमान में गिरावट महसूस हुई। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि लानीनो के प्रभाव से अगले तीन दिन तक कभी कभार तेज हवा के साथ रिमझिम बारिश होगी। दो दिन में जिले में 10 एमएम बारिश हुई है। वहीं शुक्रवार को कुशीनगर का अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा। रिमझिम बारिश से किसानों को फायदा हुआ है। तेज हवा चलने पर … Read more

योगी सरकार का बड़ा कदम, लॉन्च हुआ ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन’ पोर्टल

योगी सरकार ने लॉन्च किया ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन’ का आधिकारिक पोर्टल 75 जिलों के पारंपरिक स्वाद को मिलेगा वैश्विक मंच, पाक विरासत को पर्यटन, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने की पहल ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश की समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने और स्थानीय स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन’ (ODOC) के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल www.odoc-up.in का शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल प्रदेश के सभी 75 जनपदों की विशिष्ट पाक परंपराओं, स्थानीय व्यंजनों, खाद्य उत्पादों और इससे जुड़े उद्यमियों को एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराएगा। योगी सरकार की ‘स्थानीय से वैश्विक’ की सोच के अनुरूप तैयार किए गए इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की खान-पान की विविधता को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित न रखते हुए उसे पर्यटन, उद्यमिता, रोजगार, खाद्य प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार विस्तार से जोड़ना है। इससे प्रदेश के स्थानीय खाद्य उद्यमियों, फूड वेंडर्स, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। ओडीओपी की सफलता के बाद पाक विरासत को नई पहचान योगी सरकार की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए ओडीओसी के माध्यम से अब प्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को भी व्यवस्थित पहचान और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट खान-पान परंपरा है। ब्रज, अवध, बुंदेलखंड, पूर्वांचल, रुहेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पाक विविधता प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है। ओडीओसी इन स्थानीय स्वादों को डिजिटल माध्यम से व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का काम करेगा। 75 जिलों के स्वाद की बनेगी डिजिटल पहचान ओडीओसी पोर्टल पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों की विशिष्ट पाक परंपराओं और व्यंजनों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। नागरिकों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटक, खाद्य प्रेमी, खरीदार और कारोबारी भी इस मंच के माध्यम से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक स्वाद से परिचित हो सकेंगे। पोर्टल पर डिस्ट्रिक्ट कुज़ीन, स्टेकहोल्डर डायरेक्टरी, स्कीम्स एंड पॉलिसीज, इवेंट्स, गैलरी, वीडियो, सक्सेस स्टोरीज, प्रोडक्ट वीडियो और प्रोडक्ट डीएसआर जैसे विभिन्न सेक्शन उपलब्ध हैं। इसके माध्यम से ओडीओसी से जुड़े उद्यमियों और अन्य हितधारकों को एकीकृत डिजिटल मंच प्रदान किया गया है। स्थानीय स्वाद से वैश्विक बाजार तक योगी सरकार का जोर प्रदेश की पारंपरिक क्षमताओं को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने पर है। इसी क्रम में ओडीओसी के तहत पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों के ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता, मूल्यवर्धन और बाजार विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है। पाक विरासत को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने से स्थानीय स्तर पर खाद्य उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की संभावना है। वहीं पर्यटकों के लिए भी स्थानीय व्यंजन प्रदेश के पर्यटन अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। संस्कृति, पर्यटन और कारोबार का संगम उत्तर प्रदेश की पाक परंपरा यहां के इतिहास, संस्कृति, कृषि, स्थानीय संसाधनों और सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी है। ओडीओसी इसी विरासत को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नई पीढ़ी और वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास है। पोर्टल पर उपलब्ध सफलता की कहानियां, उत्पाद संबंधी वीडियो और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी स्थानीय खाद्य उद्यमियों को प्रेरित करने के साथ संभावित खरीदारों और निवेशकों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से एक मंच पर आएगी जानकारी www.odoc-up.in को उत्तर प्रदेश की पाक विरासत के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। पोर्टल पर ओडीओसी से संबंधित जानकारी, गतिविधियां, कार्यक्रम, सफलता की कहानियां और अन्य संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश के स्थानीय स्वाद, पारंपरिक ज्ञान और खाद्य उद्यमिता को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ओडीओपी के बाद ओडीओसी के माध्यम से अब प्रदेश के उत्पादों के साथ-साथ उसके स्वाद की भी ब्रांडिंग करने की कोशिश की जा रही है।

क्षति का तुरंत आकलन करें, पीड़ित परिवारों को मिले हरसंभव सहायता: CM

क्षति का आकलन कर प्रभावित परिवारों को 24 घंटे के भीतर हर संभव सहायता कराएं उपलब्ध: मुख्यमंत्री मौसम को लेकर योगी सरकार सतर्क, रेड अलर्ट-आकस्मिक बाढ़ की आशंका वाले जिलों में स्कूल बंद रखने के निर्देश सीएम की आमजन से अपील, आकाशीय बिजली एवं अतिवृष्टि के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें डीएम व अधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहने के निर्देश, 27 सितंबर तक मौसम को लेकर यूपी में विशेष सतर्कता मौसम की हर चेतावनी पर होगी त्वरित कार्रवाई, रेड-ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में बढ़ाई सतर्कता लखनऊ,  उत्तर प्रदेश प्रदेश में बदलते मौसम, भारी बारिश और आंधी-वज्रपात की चेतावनी को देखते हुए योगी सरकार पूरी तरह अलर्ट हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में भारी बारिश और आकस्मिक बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और क्षेत्र में जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रेड अलर्ट और आकस्मिक बाढ़ की आशंका वाले जिलों में स्कूल बंद रखने को कहा है। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने व आकाशीय बिजली एवं अतिवृष्टि से हुई क्षति का तत्काल आकलन कर प्रभावित परिवारों को 24 घंटे के भीतर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सभी से अपील की गई है कि आकाशीय बिजली एवं अतिवृष्टि के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। नदियों एवं जलाशयों में स्नान करने से बचें और विशेष सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश वासियों के साथ खड़ी है। इसके अतिरिक्त अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जनमानस की सुरक्षा के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी कदम उठाएं और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जाए। लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं अधिकारी मुख्यमंत्री ने जीर्ण-शीर्ण मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे लोगों को आवश्यकता के अनुसार निकटतम राहत शरणालय में पहुंचाया जाए, ताकि भारी बारिश या आकस्मिक बाढ़ की स्थिति में उनके जीवन को खतरा न हो। राहत आयुक्त ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक वहीं इससे पहले राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर मौसम की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में 27 सितंबर तक मौसम प्रभावित रहने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश तथा 27 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। राहत आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जान-माल की सुरक्षा प्रशासन का दायित्व है। जिलाधिकारी स्वयं फील्ड में रहकर स्थिति का निरीक्षण करें और आमजन से लगातार संवाद बनाए रखें। मौसम संबंधी चेतावनियों और जरूरी सावधानियों की जानकारी पब्लिक एड्रेस सिस्टम, स्थानीय संचार माध्यमों और अन्य उपलब्ध संसाधनों के जरिए व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। रेड अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में रेड अलर्ट को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, महाराजगंज, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, हरदोई, लखनऊ, बाराबंकी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत अन्य क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए अधिकारी सक्रिय रहेंगे। बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में तैयारी आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट के कुछ वाटरशेड क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा और राहत एजेंसियों को आवश्यकतानुसार तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। आंधी-वज्रपात से बचाव पर जोर राहत आयुक्त ने निर्देश दिए कि तेज आंधी और वज्रपात के दौरान लोगों को खुले स्थान, पेड़, बाग और पार्क में जाने से रोका जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई व्यक्ति खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर न हो। राहत और बचाव से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सक्रिय रखी जाएं तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।