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संभल से चंदौली तक सुरक्षा कड़ी, बकरीद को लेकर पुलिस फोर्स तैनात

 चंदौली/संभल/सहारनपुर/अयोध्या/ मुजफ्फरनगर/आजमगढ़,      उत्तर प्रदेश सरकार और जिला पुलिस-प्रशासन ने आज 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद (ईद-उल-अजहा) के त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरे राज्य में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं. संभल से लेकर चंदौली और अयोध्या से लेकर मुजफ्फरनगर तक सभी जिलों में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है. पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया है और सीसीटीवी, ड्रोन कैमरों व सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल के जरिए असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी जा रही है. शासन की स्पष्ट गाइडलाइन के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर खुले में कुर्बानी और सड़कों पर नमाज अदा करने की पूरी तरह मनाही है।  संभल में पांच जोन और 18 सेक्टर में सुरक्षा अति संवेदनशील माने जाने वाले संभल जिले में सुरक्षा का बड़ा खाका तैयार किया गया है. अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह के अनुसार, पूरे जिले को 5 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है, जहां मजिस्ट्रेट के साथ आरआरएफ, पीएसी और भारी पुलिस बल तैनात है. ढाई सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा निगरानी की जाएगी. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में रूफटॉप ड्यूटी लगाई गई है और सोशल मीडिया सेल को एक्टिव किया गया है।  मेरठ और सहारनपुर में पुलिस का पैदल मार्च मेरठ और सहारनपुर में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रखने के लिए पुलिस अधिकारियों ने भारी बल के साथ भीड़भाड़ वाले बाजारों और महत्वपूर्ण स्थानों पर पैदल मार्च किया. मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि शासन के आदेशानुसार सभी धार्मिक आयोजन होंगे. सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने नागरिकों और व्यापारियों से संवाद कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया. दोनों जिलों में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग की जा रही है और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर है।  चंदौली में संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में भी बकरीद को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है. चंदौली के एसपी आशीष पटेल ने बताया कि समस्त थाना क्षेत्रों में पीस कमेटी की बैठकें पूरी हो चुकी हैं. ईदगाहों और मस्जिदों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, जबकि थाना प्रभारी लगातार पेट्रोलिंग करेंगे. मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने वाले भड़काऊ संदेश पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  मुजफ्फरनगर में डेढ़ हजार जवानों की तैनाती मुजफ्फरनगर में जोनल-सेक्टर प्रणाली लागू कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, बुढ़ाना और खतौली जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के लिए 10 डीएसपी, 5 एएसपी, 45 इंस्पेक्टर, 200 सब इंस्पेक्टर और 889 रंगरूटों समेत लगभग डेढ़ हजार पुलिस जवान तैनात किए गए हैं. यहां भी ड्रोन और सीसीटीवी से मस्जिदों की निगरानी हो रही है ताकि सड़कों पर नमाज न हो।  अयोध्या और आजमगढ़ में चप्पे-चप्पे पर पहरा रामनगरी अयोध्या में डीआईजी सोमेन बर्मा ने स्पष्ट किया कि नमाज केवल निर्धारित ईदगाहों और मस्जिदों में तय समय पर होगी. अयोध्या रेंज के पांचों जिलों में व्यापक समीक्षा की गई है. उधर, आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि चिन्हित सामूहिक कुर्बानी और नमाज स्थलों का भौतिक निरीक्षण कर साफ-सफाई व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन परंपरागत और शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार संपन्न कराने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।  लखनऊ में भी पुलिस अलर्ट  वहीं, राजधानी लखनऊ में भी पुलिस अलर्ट पर है. बकरीद पर सुबह 10:00 बजे ईदगाह में नमाज होगी, सड़कों पर नमाज की पूरी मनाही है. मौलाना खालिद रशीदी फिरंगी महली ने 'आजतक' कहा कि लोगों से केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी करने की अपील की गई है जिन पर कानूनी बंदिश नहीं है. कुर्बानी के लिए नए स्थान तय नहीं होंगे, बल्कि पहले से निर्धारित जगहों पर ही साफ-सफाई के साथ इसे अंजाम दिया जाएगा।  वहीं, मुंबई के मामले पर निराशा जताते हुए कहा गया कि इस्लाम में प्रतिबंधित जानवर लाना गलत है और प्रशासन को ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. त्योहार पर किसी भी पक्ष की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए ताकि आपसी सौहार्द बना रहे। 

योगी सरकार का बड़ा कदम: ‘चहक’ और ‘कलांकुर’ से निखरेगी बच्चों की शुरुआती शिक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, और 'बिग बुक' जैसी विशेष तौर पर तैयार सामग्रियों के माध्यम से अब प्रदेश के लाखों नौनिहालों को उनकी शुरुआती शिक्षा का एक नया, रचनात्मक और बेहतर माहौल मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन को मिली गति योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को बच्चों के सीखने की मुख्य बुनियाद माना गया है। उत्तर प्रदेश में अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण और बुनियादी देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है 'चहक' और 'कलांकुर' से निखरेगी बच्चों की रचनात्मकता विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 'चहक' श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा के विकास और बुनियादी दक्षताओं को बढ़ाएंगी, जबकि ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री उनकी सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता को नई उड़ान देगी। इसके साथ ही, बड़ी तस्वीरों वाली 'बिग बुक' और 'टीचर गाइड' के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। किताब वितरण ऐप' से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस अभियान के तहत सामग्री के वितरण की रीयल-टाइम निगरानी के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ लागू किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से लेकर डायट मेंटर्स और प्रधानाध्यापकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सीधे शासन स्तर पर यह ट्रैक किया जा सके कि किस बालवाटिका तक सामग्री पहुंच चुकी है। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने व्यापक पैमाने पर एक मजबूत संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। पहले जहाँ सरकारी तंत्र का पूरा ध्यान केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर केंद्रित रहता था, वहीं अब बच्चों की शुरुआती नींव को मजबूत करने पर समान प्राथमिकता दी जा रही है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' और 'निपुण भारत' जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता के बाद, प्री-प्राइमरी स्तर पर किया जा रहा यह सुधार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के शिक्षा मॉडल में सबसे आगे खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बचपन में ही आधुनिक और रचनात्मक शिक्षा का अधिकार मिल रहा है।

योगी सरकार का बड़ा मिशन, ग्रामीण यूपी को मिलेगा फ्री Wi-Fi और डिजिटल सुविधाओं का नेटवर्क

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब डिजिटल आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक तकनीकी मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार का बेहद महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द ही धरातल पर "लाइव" होने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने इस दूरगामी परियोजना से जुड़े लगभग सभी तकनीकी और प्रशासनिक माइलस्टोन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल क्रांति का रास्ता साफ हो गया है। माइलस्टोन पूरे, जुलाई 2025 से चल रही थी तैयारी इस ऐतिहासिक मिशन की रूपरेखा जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ शुरू हुई थी, जिसने दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों की रणनीतिक चर्चाओं के साथ गति पकड़ी। जनवरी 2026 में इसके कॉन्सेप्ट नोट के बाद, 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति में इसका एमओयू (MoU) साइन किया गया। फाइनल डीपीआर (DPR) तैयार होने और अप्रैल 2026 में बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट की बातचीत पूरी होने के बाद, अब यह प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर लागू होने के अंतिम पड़ाव पर है। गांवों तक पहुंचेगा वर्ल्ड-क्लास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के डिजिटल डिवाइड (तकनीकी अंतर) को हमेशा के लिए समाप्त करना है। इसके तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इस नेटवर्क के जरिए हर ग्रामीण घर तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, मुफ्त पब्लिक वाई-फाई, आईपीटीवी (IPTV) और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, गांवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी समाधान और उन्नत साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के द्वार यह परियोजना केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक बड़ा जरिया बनेगी। प्रोजेक्ट गंगा के माध्यम से गांवों के युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क (घर बैठे काम) और ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग से जोड़ा जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से छात्रों को पढ़ाई के वैश्विक अवसर मिलेंगे, जिससे गांवों में ही रहते हुए युवा डिजिटल इकोनॉमी का हिस्सा बन सकेंगे और बड़े शहरों की तरफ होने वाला पलायन थमेगा। योगी सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार है। "प्रोजेक्ट गंगा" के जरिए सरकार 'कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी' के अपने संकल्प को सिद्ध करने जा रही है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी तकनीक का पूरा अधिकार मिल सके।

15 जून से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ करने के निर्देश

लखनऊ जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के संचालन के साथ यात्रियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आवागमन के लिए प्राथमिक चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की चौथी बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि 15 जून से प्रस्तावित उड़ान संचालन से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 15.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं तथा वर्ष 2030 तक 10 हजार चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक लगभग 2500 चार्जिंग स्टेशन संचालित हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति देगी। उन्होंने भूमि अधिग्रहण और विनिमय संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 55 प्रतिशत भूमि प्राप्त की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण जून माह के अंत तक पूरा कर लिया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट स्वीकृत हो चुका है तथा भूमि अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश संबंधी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त हो चुका है। डेवलपर चयन के लिए निविदा की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 जुलाई 2026 कर दी गई है। वहीं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 200 हेक्टेयर में से 144 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो चुकी है तथा शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज को निवेश अनुकूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भवन स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि राज्य स्तर पर 136 रिक्त पदों में से 40 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा शेष 96 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। जिला एवं विकासखंड स्तर पर 360 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में बताया गया कि सीड पार्क परियोजना के संबंध में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और प्रमुख बीज कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया गया है तथा आगे की कार्यवाही पर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री ने डिफेंस कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि आइकॉन्स हिंदुस्तान एयरोस्पेस एंड डिफेंस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अलीगढ़ डिफेंस नोड में 125 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया गया है। तकनीकी मूल्यांकन समिति तथा भूमि आवंटन समिति द्वारा कंपनी के पक्ष में संस्तुति की जा चुकी है और आगे की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री ने जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब तथा उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि और मत्स्य आधारित उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएं। बैठक में बताया गया कि एग्री एक्सपोर्ट हब के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 29 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है। वहीं उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना के लिए 60 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है, जहां फिश प्रोसेसिंग, फीड प्लांट, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए आधुनिक नगरीय अवसंरचना का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में ‘सीएम समीक्षा’ में शामिल परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सेल गठित कर इन परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति की तैयारी, ब्रॉडबैंड, फ्री वाई-फाई और डिजिटल सेवाओं से बदलेगी गांवों की तस्वीर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द “लाइव” होने जा रहा है। सरकार की ओर से परियोजना से जुड़े लगभग सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रोजेक्ट गंगा का उद्देश्य गांवों और छोटे शहरों तक आधुनिक डिजिटल सेवाओं को पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र भी हाई स्पीड इंटरनेट और नई तकनीकों से सीधे जुड़ सकें। परियोजना के तहत ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, फ्री पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी, आईपीटीवी और डिजिटल सेवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जुलाई 2025 से शुरू हुआ था मिशन प्रोजेक्ट गंगा की शुरुआत जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों और स्टेकहोल्डर्स के साथ रणनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। जनवरी 2026 में कॉन्सेप्ट नोट साझा किया गया, जबकि 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की उपस्थिति में एमओयू साइन किया गया। इसके बाद मीडिया कवरेज, फाइनल डीपीआर और एमएसएमई विभाग के माध्यम से जिलाधिकारियों को पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अप्रैल 2026 तक बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट को लेकर भी रणनीतिक बातचीत शुरू कर दी गई, जिससे अब यह परियोजना “लाइव” के लिए पूरी तरह तैयार मानी जा रही है। गांवों तक पहुंचेगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा के तहत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से घर-घर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, पब्लिक वाई-फाई और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच संभव होगी। साथ ही सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा। परियोजना का लक्ष्य केवल इंटरनेट पहुंचाना नहीं, बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है। युवाओं को मिलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के अवसर प्रोजेक्ट गंगा के जरिए ग्रामीण युवाओं को डिजिटल रोजगार से जोड़ने पर विशेष फोकस किया गया है। इसके तहत फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गांवों में रहने वाले युवाओं को भी बड़े शहरों जैसी डिजिटल संभावनाओं का लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इकॉनामी को नई गति दे सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा “कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी” के विजन को मजबूत आधार देगा। सरकार की कोशिश है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर राज्य के रूप में नई पहचान बनाए।

प्रदेश की समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचेगी गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार शिक्षा सुधार को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के साथ-साथ प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। प्रदेश के समस्त को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू किया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और बालवाटिका पुस्तिका जैसी सामग्री के माध्यम से अब लाखों नौनिहालों को शुरुआती शिक्षा का नया और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को बच्चों की सीखने की बुनियाद माना गया है। अब उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं को केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आयु वर्ग के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत ‘चहक-1’, ‘चहक-2’, ‘चहक-3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बालवाटिका हस्तपुस्तिका, 12 प्रकार की बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और शिक्षण तालिकाएं वितरित की जाएंगी। प्रदेश में पहले ही बेसिक शिक्षा के अंतर्गत बड़े स्तर पर स्मार्ट स्कूल, ऑपरेशन कायाकल्प, डिजिटल मॉनिटरिंग और निपुण भारत मिशन जैसे अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी उसी व्यापक शिक्षा सुधार अभियान से जोड़ते हुए बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा पहुंचाने की दिशा में यह अभियान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।  गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी कारण गतिविधि आधारित, खेल आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘चहक’ श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा विकास, बोलने-सुनने की क्षमता और बुनियादी सीखने की दक्षताओं को विकसित करेंगी। वहीं ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री बच्चों के बौद्धिक विकास, रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही बिग बुक और टीचर गाइड के माध्यम से ईसीसीई एजुकेटर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ा जाएगा। डिजिटल मॉनिटरिंग से जुड़ी पूरी व्यवस्था योगी सरकार ने इस पूरी वितरण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की है। बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटरों को वितरण प्रक्रिया की निगरानी और स्कैनिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इस डिजिटल व्यवस्था से शासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किस बालवाटिकाओं तक सामग्री पहुंच चुकी है। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूती मिलेगी। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिल रहा संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश में पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। अभी तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था में अधिकतर फोकस प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं पर रहता था, लेकिन अब बच्चों की शुरुआती सीखने की अवस्था को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। अब शिक्षा सुधार बच्चों की सीखने की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास

मां गंगा की धारा की तरह बढ़ रही विकास यात्रा: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास मुख्यमंत्री बोले- प्रयागराज अब भय, अराजकता और माफियागिरी से मुक्त, विकास और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025 ने प्रयागराज को वैश्विक पहचान दिलाई, यूनेस्को ने कुंभ को दी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता: सीएम “चरैवेति-चरैवेति” मंत्र के साथ डबल इंजन सरकार निरंतर आगे बढ़ा रही विकास यात्रा: मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में सरकार कहीं रुकी नहीं, कहीं थमी नहीं। यह यात्रा मां गंगा की धारा की तरह अविरल आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज आज सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक गौरव और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम बन चुका है। अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले माघ मेला और कुंभ जैसे आयोजन गंदगी, भगदड़, अव्यवस्था और अराजकता के प्रतीक बन गए थे। लोग प्रयागराज आने से भी कतराते थे। लेकिन वर्ष 2019 में जब उनकी सरकार को कुंभ आयोजन का अवसर मिला, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इससे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को वैश्विक पहचान मिली। कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025, दोनों आयोजनों के दौरान डबल इंजन सरकार ने प्रयागराज में व्यापक अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया। यदि इनका बेहतर रखरखाव किया जाए तो अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी। प्रयागराज को मिल रही नई पहचान मुख्यमंत्री ने नगर निगम और महापौर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विरासत को विकास से जोड़ने का कार्य किया गया है। वर्ष 2024 की शुरुआत में जब महाकुंभ-2025 की तैयारियों के लिए प्रयागराज का निरीक्षण किया गया, तब यह तय किया गया था कि शहर को नई पहचान दी जाएगी। आज 161 वर्ष पुरानी नगर निगम इमारत भव्य स्वरूप में सामने है। पार्षदों के लिए आधुनिक सदन हॉल तैयार हुआ है और नगर निगम 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहा है। कहीं जोनल पार्क विकसित हो रहे हैं तो कहीं शिवालिक पार्क की नई श्रृंखला तैयार की जा रही है। उन्होंने शिवालिक पार्क को “वेस्ट टू वेल्थ” की सफल मिसाल बताते हुए कहा कि 400 टन वेस्ट मटेरियल से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां तैयार की गईं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ऐसे प्रयास प्रयागराज को नई पहचान देते हैं। हर वार्ड और मोहल्ले तक पहुंच रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अक्षय वट के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं थे, लेकिन वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री की प्रेरणा से अक्षय वट को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। अब श्रद्धालु वहां दर्शन कर सकते हैं और सरस्वती कूप का जल ग्रहण कर सकते हैं। महर्षि भारद्वाज का आश्रम वर्षों तक अतिक्रमण का शिकार रहा, लेकिन अब उसे मुक्त कराकर भव्य स्वरूप दिया गया है। उन्होंने महर्षि भारद्वाज को दुनिया का पहला कुलपति बताते हुए कहा कि प्रयागराज अब अपनी सांस्कृतिक गरिमा पुनः प्राप्त कर रहा है। आज प्रयागराज की सड़कें चौड़ी और स्मार्ट हो चुकी हैं तथा शहर ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकास की नई यात्रा शुरू की है। नगर निगम और जनप्रतिनिधि हर वार्ड और मोहल्ले तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा दशहरा, ज्येष्ठ मास और मंगलवार का यह संयोग विशेष पुण्य का अवसर है। नौ वर्ष पहले प्रयागराज में भय, आतंक, अराजकता, माफियागिरी और गुंडागर्दी का माहौल था। सार्वजनिक भूमि पर कब्जे होते थे और विकास पूरी तरह ठप था। लेकिन आज प्रयागराज पूरी तरह माफिया और गुंडागर्दी से मुक्त हो चुका है। अब बेटियां, व्यापारी और आम नागरिक किसी भी समय निडर होकर निकल सकते हैं। यदि कोई बेटियों से छेड़छाड़ या अपराध का दुस्साहस करेगा तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। डबल इंजन सरकार सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रयागराज वासियों का विशेष आभार जताते हुए कहा कि महाकुंभ के 45 दिनों तक यातायात और आवागमन में भारी असुविधा के बावजूद किसी ने विरोध या असंतोष नहीं जताया। पूरा शहर ऐसा लग रहा था मानो अपने घर का आयोजन मना रहा हो। किसी भी बड़े आयोजन की सफलता तब संभव होती है, जब जनता उसे अपना कार्यक्रम मानकर सहयोग करे। कई बड़े प्रोजेक्ट्स का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के आशीर्वाद और समर्थन के कारण ही सरकार रोजगार, किसान कल्याण, गरीब कल्याण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतार पा रही है। आज गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रयागराज से दिल्ली मात्र सात घंटे में पहुंचा जा सकता है। विश्वस्तरीय तकनीक से बने इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी ऐसा महसूस होता है मानो वाहन स्थिर खड़ा हो। हर्षवर्धन जी के विधानसभा क्षेत्र में गंगा नदी पर लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से फोर-लेन पुल का निर्माण कराया जा रहा है और फाफामऊ पुल का कार्य भी जल्द पूरा होगा। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण एवं शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी जी के कर-कमलों से कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में अभी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य होना बाकी है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाएगी। उन्होंने भगवान प्रयागराज, अक्षय वट, मां गंगा और भगवान वेणी माधव का स्मरण करते हुए कहा कि प्रयागराज की विकास यात्रा बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास के लिए आने वाले हर प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री एवं प्रयागराज के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी,  विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, वाचस्पति, राजमणि कोल, विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी, विधान परिषद … Read more

यूपी में गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सीएम योगी ने बच्चों-अभिभावकों के लिए लिखी पाती

सीएम योगी ने दिया इको फ्रेंडली पर्यटन का मंत्र यूपी में गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सीएम योगी ने बच्चों-अभिभावकों के लिए लिखी पाती बच्चों को दुधवा, चूका बीच, कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार के जरिए प्रकृति से जोड़ने की अपील संस्कारों और परंपराओं को जानने के लिए बच्चों को दादा-दादी व नाना-नानी के पास ले जाएं: सीएम योगी किशोर और युवा इन छुट्टियों में नया कौशल और भाषा सीखें, यह समय रुचियों को पूरा करने का भी लखनऊ, उत्तर प्रदेश के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के बच्चों और अभिभावकों के नाम पाती (पत्र) लिखी है। इसमें उन्होंने बच्चों को न सिर्फ छुट्टियों का सदुपयोग करने की राह दिखाई है, बल्कि 'इको-फ्रेंडली पर्यटन' और जिम्मेदार जीवनशैली को अपनाने की सीख भी दी है। सीएम योगी ने लिखा है कि गर्मी की छुट्टियां आप सभी के लिए आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं। स्कूल की व्यस्त दिनचर्या से थोड़ी राहत मिलते ही मन कुछ नया सीखने, नए स्थान देखने और अपनों के साथ समय बिताने को उत्सुक हो उठता है। यही अवसर है, जब आप अपनी रुचियों को पहचानें, नई आदतें विकसित करें एवं जीवन के ऐसे अनुभव प्राप्त करें, जो आगे चलकर आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हो। किशोर एवं युवा इन छुट्टियों में नई भाषा या नया कौशल सीख सकते हैं। यह समय अच्छी पुस्तकों से मित्रता, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला, संगीत एवं बागवानी जैसी रुचियों को पूरा करने का हो सकता है। अभिभावक बच्चों को ननिहाल-ददिहाल में समय बिताने दें सीएम योगी ने अभिभावकों के लिए भी कई जरूरी बातें लिखीं। उन्होंने लिखा कि हममें से अधिकतर लोगों ने बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी से नैतिक शिक्षा की कहानियां सुनीं। आज बच्चे इन अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं। आपसे आग्रह है कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं। उन्हें परिवार के साथ समय बिताने दें, ताकि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को निकट से जान सकें। बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की सलाह दी सीएम योगी ने बच्चों को प्रकृति और इको-फ्रेंडली पर्यटन से भी परिचित कराने की अभिभावकों को सलाह दी। उन्होंने लिखा कि बच्चों को ऐसे स्थानों पर लेकर जाएं, जहां वे प्रकृति के निकट आ सकें और जैव विविधता को अनुभव कर सकें। इसके लिए उन्होंने दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार जैसे स्थलों का सुझाव दिया। इन छुट्टियों में बच्चों को प्रकृति, संस्कृति और स्वास्थ्य से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अपील करते हुए इन छुट्टियों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का भी संकल्प लेने के लिए कहा। उन्होंने लिखा कि यात्रा हो या पिकनिक, कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करें, प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैलाएं और बच्चों को भी स्वच्छ एवं जिम्मेदार जीवनशैली का संदेश दें। छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य के बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। बच्चों को समझाएं मिट्टी, वृक्ष और जल का महत्व सीएम योगी ने पाती में बच्चों को मिट्टी, जल और वृक्ष से जोड़ने के लिखा है। अभिभावकों से कहा कि बच्चों के साथ पौधे लगाएं, उनकी देखभाल का दायित्व उन्हें दें तथा आस-पास स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करें। जब बच्चे मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझते हैं, तभी उनके अंदर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है।

फिश मंडी से लेकर एक्वा पार्क तक: यूपी सरकार की नई योजना से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन और कारोबार

 लखनऊ प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को नई गति देने के लिए सरकार ने स्टेट आफ आर्ट होल सेल फिश मंडी, एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर स्थापना की योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत पहले चरण में गोरखपुर और मुरादाबाद में होल सेल मत्स्य मंडी स्थापित की जाएंगी। वहीं गोरखपुर में एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर भी बनाया जाएगा। मत्स्य विभाग ने योजना के संचालन के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत मुरादाबाद में 4.84 एकड़ भूमि होलसेल फिश मंडी का निर्माण किया जाएगा। वहीं गोरखपुर में मंडी के साथ एक्वा पार्क व प्रसंस्करण इकाई के लिए 27 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इनमें मत्स्य उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही जल पर्यटन, मनोरंजन और जलीय कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत फिश मंडी निर्माण को 24-24 करोड़ रुपये, एक्वा पार्क के लिए 40 करोड़ और मत्स्य प्रसंस्करण इकाई के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। इनका संचालन निजी सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) मोड पर किया जाएग। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों-संस्थाओं से अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआइ) आमंत्रित किए जाएंगे। योजना के संचालन के लिए अपर मुख्य सचिव-प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। विभाग के अनुसार, योजना मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी। मत्स्य पालकों को आधुनिक बाजार, बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी। अभी किसानों और कारोबारियों को संगठित बाजार और आधुनिक सुविधाओं के अभाव में नुकसान उठाना पड़ता है। नई व्यवस्था से उन्हें बेहतर कीमत मिल सकेगी और बिचौलियाें पर भी अंकुश लगेगा। मत्स्य पालन से जुड़े युवाओं, व्यापारियों और उद्यमियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।  

ईद-उल-अजहा पर मुरादाबाद में 500 पुलिसकर्मी और ड्रोन से होगी निगरानी

 मुरादाबाद बकरीद को लेकर मुरादाबाद नगर निगम ने पूरे महानगर को चार जोन में बांटा है। दस क्यूआरटी टीमों का भी गठन किया गया है। सूचना मिलते ही टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगी। हर तीस मिनट के भीतर ओज उठाए जाने के भी व्यवस्था की गई है। नगरायुक्त दिव्यांशु पटेल ने मंगलवार को अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। गलशहीद स्थित ईदगाह और मस्जिदों के आसपास जल का छिड़काव, चूना-फॉगिंग और नियमित सफाई की जाएगी। ईदगाह के आसपास अतिक्रमण के खिलाफ भी अभियान चलेगा। ईदगाह के आसपास चला सफाई अभियान, पकड़े आवारा डॉग बकरीद के त्योहार को लेकर मंगलवार को नगर निगम टीम द्वारा ईदगाह व आसपास के इलाकों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा आवारा कुत्तों को भी पकड़ने की कार्रवाई की गई। सुरक्षा को लेकर ईदगाह क्षेत्र को 11 सेक्टरों में बांटा ईद-उल-अजहा(बकरीद) की नमाज शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ईदगाह और उसके आसपास के इलाके को 11 सेक्टर में बांट कर पुलिस ड्यूटी लगाई गई है। पूरे शहर को बीस सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा के मद्देनजर पांच सौ से अधिक पुलिसकर्मियों और दो कंपनी पीएसी जवानों की लगाई गई है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि व्यवस्था बनाने के लिए ईदगाह और उसके आसपास के इलाके को 11 सेक्टरों में बांटा गया है। हर सेक्टर की जिम्मेदारी सीओ और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को दी गई है। दस सीओ के नेतृत्व में करीब 500 पुलिसकर्मियों और दो कंपनी पीएसी जवानों की लगाई गई है। निगरानी के लिए वॉच टावर और रूफ टॉप ड्यूटी भी लगी है। ईदगाह और उसके आसपास 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ईदगाह के सामने स्थित बिल्डिंग में कंट्रोल रूम मनाया गया है, जहां से नियमित निगरानी की जाएगी। ड्रोन से भी निगरानी होगी। ईदगाह रोड नमाज के दौरान बंद रहेगी बकरीद के दिन नमाज सकुशल संपन्न कराने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सुबह के छह घंटे ईदगाह के आसपास डायवर्जन प्लान लागू रहेगा। ट्रैफिक पुलिस द्वारा तैयार प्लान के अनुसार 28 मई को छह बजे से दोपहर 12 बजे तक ईदगाह के आसपास वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान शहर में भारी वाहन और बसों को भी नहीं घुसने दिया जाएगा। एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि यह डायवर्जन प्लान सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक के लिए लागू किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसका समय बढ़ाया और घटनाया जाएगा। ट्रैफिक प्लान को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए जगह-जगह बैरियर लगाकर ट्रैफिक पुलसकर्मियों की तैनाती की गई है। बकरीद को लेकर प्रशासन ने भी जारी की गाइडलाइन बकरीद को लेकर प्रशासनिक मशीनरी तैयार हो चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी ने महानगर और एडीएम प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्र में व्यवस्थाओं की कमान संभाल ली है। ऑन लाइन मीटिंग में सभी तहसीलों और निकायों को अफसरों ने बताया कि किस तरह कार्य करना है। आगामी 28 मई को बकरीद का पर्व मनाया जा रहा है। जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया और एसएसपी सतपाल अंतिल ने एक दिन पूर्व पीस कमेटी की बैठक में भी स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि कैसे कार्य करना है। कुर्बानी खुले में न हो ओज खुले में न जाए इसपर फोकस है। एडीएम सिटी अंकुर श्रीवास्तव ने बकरीद की तैयारियों पर स्थिति का जायजा लिया। वहीं एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने ऑन लाइन मीटिंग में सभी निकायों के ईओ और संबंधित एसडीएम व तहसीलदार को पर्व पर जिम्मेदारी सौंपी।