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खेत में तालाब बनाकर बढ़ाएं आय, सिंचाई से लेकर मत्स्य पालन तक मिलेगा फायदा

लखनऊ यूपी सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सरकार 52500 रुपये का सीधा अनुदान दे रही है। इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग करानी होगी। उसी के आधार पर योजना के लिए किसानों का चयन किया जाएगा। इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा 52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर 15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है। अनुदान दो चरणों में मिलेगा 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद

गोमाता के जरिए खेती में ‘जीन क्रांति’ की तैयारी गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद योगी सरकार गो संरक्षण और खेती में करने जा रही बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग एंजाइम टेक्नोलॉजी से 10 गुना तेजी से तैयार होगी ऑर्गेनिक खाद, 5 गुना बढ़ेगा न्यूट्रिशन देश में पहली बार यूपी वाले करेंगे खेती में इस जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग लखनऊ गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक और बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। पहली बार देश में खेती किसानी में गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की खोज ने खेती में गो आधारित जीन क्रांति की नई जमीन तैयार कर दी है। इस तकनीक के जरिए तैयार होने वाली ऑर्गेनिक खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी। इतना ही नहीं, इसकी न्यूट्रिशन क्षमता लगभग 5 गुना अधिक होगी, जबकि इसे तैयार करने में लगने वाला समय भी 10 गुना तक कम हो जाएगा। योगी सरकार इसे खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल के रूप में देख रही है। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की बड़ी खोज यह तकनीक आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है। उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन, माइक्रोबियल आइसोलेशन और बायोपॉलिमर डेवलपमेंट को गोबर एवं गो मूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़कर हाई क्वालिटी ऑर्गेनिक और नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने फसल-विशिष्ट माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट तैयार किया है, जिसके जरिए केवल 1 किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक विकसित किया जा सकता है। यह तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी। 15 गुना कम मात्रा ही रहेगी पर्याप्त, लागत भी घटेगी शुरुआत में 50 किलोग्राम वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बैग तैयार करने की योजना है। खेतों में इसकी जरूरत लगभग 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है, जो पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में बेहद कम है। इससे किसानों की परिवहन, श्रम और उपयोग लागत में बड़ी कमी आएगी। तकनीक से तैयार इस उर्वरक की लागत भी कम आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पाद को इंडियन काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च द्वारा 40 से अधिक गुणवत्ता एवं पोषण मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित भी किया जा चुका है। गोबर और गो मूत्र से बनेगा साइंटिफिक फर्टिलाइजर यह उर्वरक मुख्य रूप से गोबर, गोमूत्र, कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक जैविक स्रोतों से तैयार किया जा रहा है। माइक्रोबियल प्रोसेसिंग और एंजाइम एक्सट्रैक्शन तकनीक की मदद से इसमें पोषक तत्वों की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है। अब गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन के लिए भी विशेष माइक्रोबियल तकनीकों पर काम किया जा रहा है। बायोगैस निर्माण के बाद बचने वाली स्लरी और वेस्ट बायोमास से केवल 3 से 4 दिनों के भीतर हाई क्वालिटी कस्टमाइज्ड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किए जा रहे हैं। गोशालाएं बनेंगी वेस्ट टू वेल्थ मॉडल योगी सरकार इस तकनीक को आत्म निर्भर गोशाला के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसके तहत गोशालाएं केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि जैविक खाद उत्पादन, बायोगैस निर्माण और अतिरिक्त आय का केंद्र बनेंगी। प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और स्थानीय किसानों के सहयोग से इस मॉडल को लागू किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में गोबर संग्रहण एवं माइक्रोबियल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं, जहां गोबर, गोमूत्र और कृषि अपशिष्ट को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक में बदला जाएगा। महिला रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल इस परियोजना में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार होंगे। इससे गांवों में आत्मनिर्भरता आधारित आर्थिक मॉडल मजबूत होगा। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सीएम योगी की प्राथमिकता बना गो संरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहले से ही गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। अब आईआईटी कानपुर की इस वैज्ञानिक खोज के जरिए प्रदेश में गो आधारित खेती, जैविक उर्वरक और ग्रामीण रोजगार का एक नया मॉडल तैयार होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

योगी सरकार का हेल्थ सेक्टर पर सख्त एक्शन, नियम तोड़ने वालों पर गिरी गाज

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से ही भ्रष्टाचारियों और लापरवाहों पर लगातार सख्त रुख अपना रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत तय मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने 200 से अधिक अस्पतालों पर अपना शिकंजा कसा है। इनको ब्लैक लिस्ट किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सौ अस्पतालों का भुगतान रोका है और सौ को निलंबित कर दिया है। ब्लैकलिस्ट किए गए इन 200 से अस्पतालों पर गरीबों के इलाज में धांधली का आरोप है। यह सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे निर्देश पर की गई है, क्योंकि इन अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं किया था। योगी आदित्यनाथ सरकार ने आयुष्मान योजना में पंजीकरण के लिए 35 मानकों का पूरा करना अनिवार्य रखा है। ऐसे में बड़ी संख्या में अस्पतालों की धांधली सामने आई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मानकों का उल्लंघन करने वाले दो सौ से अधिक अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कारवाई की गई है। सौ अस्पतालों की पैनल से निलंबन कर दिया गया, जबकि इतने ही अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों का भुगतान रोका गया है। नई नियमावली के मुताबिक अस्पतालों के लिए निर्धारित 35 मानकों को पूरा करना अनिवार्य है, जिसमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता एवं एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं। चिकित्सकों की डिग्री अथवा विवरण के अनुचित उपयोग की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचइएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। कई बार निर्देश जारी होने के बावजूद लगभग 200 निजी अस्पतालों ने मानकों को पूरा नहीं किया। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए कहा गया है। राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित आडिट और मानिटरिंग कराई जा रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू होगी। इलेक्ट्रानिक हेल्थ रिकार्ड (ईएचआर) प्रणाली से मरीजों का स्वास्थ्य रिकार्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, फोन कॉल, संदेश, प्रचार अभियान और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को लगातार सहयोग दिया गया। इसके बावजूद कई अस्पताल तय समय सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर सके। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं, लेकिन करीब 200 अस्पतालों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। ऐसे अस्पतालों को कई बार मौका भी दिया गया था।

गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया सीएम योगी आदित्यनाथ ने

गोरखपुर में बनेगा विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: मुख्यमंत्री गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया सीएम योगी आदित्यनाथ ने इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बगल में 60 एकड़ में बनेगा नया स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स हर तरह के इनडोर गेम्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में: सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करने के साथ ही खेल व खिलाड़ियों के हित में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बगल में आरक्षित कराई गई 60 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।   केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में शनिवार को गोरखपुर के ताल नदोर में करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यहां 46 एकड़ में 30 हजार दर्शकों की क्षमता का इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम तो बनेगा ही, इसके बगल की 60 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनाएंगे। इसमें हर तरह के इनडोर गेम्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी तथा हॉकी जैसे अन्य आउटडोर गेम्स भी हो सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनने से इस क्षेत्र में होटल, रेस्त्रां व मार्केट की नई श्रृंखला तैयार होगी और बड़ी संख्या में नए रोजगार भी सृजित होंगे। लोक कल्याण के लिए होना चाहिए सरकारी भूमि का उपयोग मुख्यमंत्री ने ताल नदोर क्षेत्र में हो रहे विकासपरक बदलाव की चर्चा करते हुए कहा कि कुछ साल पहले यह क्षेत्र बंजर पड़ा था। उपेक्षित था, जिसकी मर्जी होती वह कब्जा कर लेता था। अब यहां की जमीन कब्जामुक्त है। डबल इंजन सरकार इस भूमि पर नौजवानों के भविष्य को तराशने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवा रही है। इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम युवाओं और भावी पीढ़ी के सपनों को साकार करेगा। सरकारी भूमि का उपयोग लोक कल्याण तथा विकास परियोजनाओं के लिए होगा। इसी विजन से ताल नदोर में पशु चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना भी की जा रही है। जाति-क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले नहीं हो सकते जनता के हितैषी सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश को माफियामुक्त, गुंडामुक्त, दंगामुक्त, कर्फ्यूमुक्त बनाया है। इससे प्रदेश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। विकास होता है तो रोजगार का सृजन स्वतः स्फूर्त भाव से होता है। जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग जनता के हितैषी नहीं हो सकते। जब ऐसे लोगों को सत्ता मिली तो वे गुंडागर्दी, अराजकता, अव्यवस्था फैलाते रहे। जनहित के बजाय परिवार के लिए सत्ता का दुरुपयोग करते रहे। लेकिन, डबल इंजन सरकार जन कल्याण व रोजगार सृजन के लिए कार्य कर रही है। 500 खिलाड़ियों की सीधी भर्ती जल्द मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यूपी में अब तक हमने लगभग साढ़े पांच सौ पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के जरिये सरकारी नौकरी दी है। साथ ही 500 खिलाड़ियों की नई भर्ती फिर से निकाली है। इससे बहुत जल्द ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ, वर्ल्ड चैंपियनशिप आदि में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। अब तक सीधी भर्ती में ललित उपाध्याय, दीप्ति शर्मा, पारुल चौधरी, अर्जुन देशवाल, प्रवीण कुमार, राजकुमार पाल को यूपी पुलिस में सीधे डिप्टी एसपी का पद दिया गया है। विजय कुमार यादव व दिव्या काकरान को नायब तहसीलदार, अर्जुन सिंह को यात्री एवं मालकर अधिकारी, प्राची व पुनीत कुमार को जिला युवा कल्याण अधिकारी, अजीत सिंह व सिमरन को जिला पंचायत राज अधिकारी, प्रीति पाल को खंड विकास अधिकारी, रिंकू सिंह को क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं।  पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी नई खेल संस्कृति मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और सांसद खेल स्पर्धा से नई खेल संस्कृति आगे बढ़ी है। इसका परिणाम है कि ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ और विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भारत की प्रतिभागिता और मेडल की संख्या में वृद्धि हुई है। खिलाड़ियों को इंफ्रास्ट्रक्चर देना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रही है। सुविधा मिलने से खिलाड़ी पीएम मोदी के विजन को साकार कर रहे हैं। सरकार हर गांव में खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर स्टेडियम और मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज की सुविधा विकसित कर रही है। मेरठ में खेल विश्वविद्यालय बन चुका है और इसी सत्र में उसका भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित होने जा रहा है। दूरी घटाकर विकास की रफ्तार बढ़ा रही सरकार सीएम ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम जिस गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर बन रहा है, उससे होकर वाराणसी जाने में पहले चार से पांच घंटे लगते थे लेकिन अब महज ढाई घंटे लगते हैं। इसी तरह गोरखपुर से लखनऊ जाने में लगने वाला समय आठ घंटे से कम होकर साढ़े तीन घंटे हो गया है। सरकार सिर्फ दूरी ही नहीं घटा रही, बल्कि विकास की रफ्तार बढ़ाकर रोजगार सृजन भी कर रही है। पश्चिम एशिया के संकट में बेहतरीन प्रबंधन का परिचय कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का स्वागत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पूरा विश्व पश्चिम एशिया के संकट से जूझ रहा है। कई देशों में अव्यवस्था, अस्थिरता है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं। इन स्थितियों में भारत में प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हरदीप सिंह पुरी जी ने बेहतरीन प्रबंधन का परिचय दिया है। तेल कम्पनियों पर भले ही बोझ आया, लेकिन उन्होंने संकट के बीच आम जनता को लगातार राहत दिलाई है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए सीएसआर फंड से 100 करोड़ रुपये देने के लिए पेट्रोलियम मंत्री, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रति आभार व्यक्त किया।  वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने किया भूमिपूजन इससे पहले मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन किया। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद उन्होंने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सीएम ने स्टेडियम के ड्राइंग मैप व मॉडल का अवलोकन भी किया। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों … Read more

‘जूते साफ कराऊंगा’ बयान पड़ा भारी, Azam Khan दोषी करार; कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा

रामपुर  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान डीएम और अन्य सरकारी अफसरों को लेकर विवादित बयान दिया था. उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसके बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट  ने आजम खान को दोषी ठहराया है. कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई है।  दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने एक रैली में सरकारी अधिकारियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था. वीडियो में आजम खान कह रहे थे- “सब डटे रहो, ये कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो… ये तनख्वाहिया हैं, तनख्वाहियों से नहीं डरते… देखे हैं मायावती जी के फोटो कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं. उन्हीं से है गठबंधन, उन्हीं के जूते साफ करवाऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा तो…” आजम खान ने दिया था ये बयान यह मामला रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज किया गया था. आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान आयोजित एक जनसभा में आजम खान ने तत्कालीन डीएम को लेकर अभद्र और विवादित टिप्पणी की थी. चुनावी सभा में उन्होंने कहा था, “सब डटे रहो, यह कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो. यह तनखैया है और तनखैयों से नहीं डरते. देखे हैं कई मायावती के फोटो, कैसे बड़े-बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं. उन्हीं से गठबंधन है, उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा।  आजम खान के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी. आरोप था कि चुनावी मंच से दिए गए बयान से प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंची और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ. इसके बाद भोट थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई गवाह पेश किए और बयान दर्ज कराए।  क्या था पूरा मामला आजम खान के इस बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी. मामला रामपुर के एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहा है. पिछली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. आजम खान वर्तमान में रामपुर जेल में बंद हैं. उनके वकील और अभियोजन पक्ष दोनों ही आज कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे. यह मामला सात साल पुराना है और लंबे समय से अदालती प्रक्रिया में चल रहा था. आजम खान पर कई अन्य मामलों में भी मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन इस विवादित बयान वाला केस खासा चर्चित रहा था।  आजम खान किस-किस मामले में दोषी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान पर कई मुकदमे दर्ज रहे हैं. अब तक उनके खिलाफ दर्ज मामलों में कई में उन्हें दोषी करार दिए गए हैं. दो पैन कार्ड फ्रॉड मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 7 साल की जेल और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. अपील में रामपुर सेशन कोर्ट ने अप्रैल 2026 में भी सजा बरकरार रखी. इसी वजह से आजम खान अभी भी जेल में हैं. 2016 के डूंगरपुर कॉलोनी में जबरन बेदखली और लूट के मामले उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में आजम खान, पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला को 7 साल की जेल हुई थी. हेट स्पीच और भड़काऊ भाषण मामले में उन्हें 2-3 साल की सजा मिल चुकी है. फर्जी हथियार लाइसेंस, सरकारी काम में बाधा डालने आदि मामलों में भी छोटी-बड़ी सजाएं मिल चुकी हैं। 

आधुनिक विज्ञान से जुड़ रहे परिषदीय बच्चे, Yogi Adityanath सरकार की नई पहल चर्चा में

परिषदीय बच्चों को आधुनिक विज्ञान शिक्षा से जोड़ रही योगी सरकार गांव के बच्चों तक पहुंच रही प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा, आईआईटी गांधीनगर की साइंस किट से बदल रही परिषदीय स्कूलों की तस्वीर 38 जिलों के 9,356 विद्यालयों में पहुंचीं साइंस किट, अब परिषदीय स्कूलों में भी प्रयोग कर सीखेंगे बच्चे लखनऊ योगी सरकार अब परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रयोग और अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़कर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुट गई है। प्रदेश के 38 जिलों में 9,356 साइंस किटों की आपूर्ति कर सरकार ने सुनिश्चित कर दिया है कि अब गांव और गरीब परिवारों के बच्चों को भी वही आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जो अब तक बड़े निजी स्कूलों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। प्रदेश के 38 जिलों में साइंस किटों की आपूर्ति की जा चुकी है। गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किटें पहुंचाई गई हैं। वहीं लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 साइंस किटों की आपूर्ति की गई है। योगी सरकार पहले ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे अभियानों के माध्यम से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। अब साइंस किटों की उपलब्धता से विज्ञान शिक्षा को भी व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की कोशिश तेज हुई है। अब शिक्षा को केवल भवन और नामांकन तक सीमित न रखकर गुणवत्ता, तकनीक और प्रयोग से जोड़ा जा रहा है। प्रयोग आधारित शिक्षण को लगातार बढ़ावा मिलने से भविष्य में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार क्षमता दोनों तेजी से बढ़ेंगी। योगी सरकार की यह पहल इसी बदलाव की मजबूत नींव के रूप में देखी जा रही है। सरकार की रणनीति साफ है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला बच्चा भी संसाधनों और सीखने के अवसरों में किसी से पीछे न रहे। इस पूरी पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साइंस किटों की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। यानी अब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों के बच्चे भी प्रयोगशाला आधारित विज्ञान शिक्षा से जुड़ सकेंगे। योगी सरकार का यह कदम सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार क्षमता विकसित करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि विज्ञान शिक्षा को केवल किताबों और परिभाषाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब बच्चे स्वयं प्रयोग करते हैं, मॉडल देखते हैं और गतिविधियों के माध्यम से सीखते हैं, तभी विज्ञान उनके लिए रोचक, व्यावहारिक और आसानी से समझ में आने वाला विषय बनता है। इसी सोच के तहत परिषदीय विद्यालयों में साइंस किट उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बच्चों को कक्षा में ही प्रयोग आधारित शिक्षण का अवसर मिल सके।

कोर्ट ने सुनाया बड़ा निर्णय, Vijay Mishra और परिवार को मामले में दोषी माना

  लखनऊ भदोही के बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार को अदालत से बड़ा झटका लगा है. भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने रिश्तेदार की संपत्ति अवैध रूप से हथियाने के मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई है. वहीं इस मामले में उनकी बहू रूपा मिश्रा को 4 साल की कैद की सजा दी गई है. कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर विजय मिश्रा और उनका परिवार चर्चा में आ गया है।  कोर्ट ने विजय मिश्रा समेत पूरे परिवार को माना दोषी बताया जा रहा है कि यह मामला रिश्तेदार की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और धोखाधड़ी से जुड़ा था. लंबे समय से इस मामले की सुनवाई चल रही थी. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई दस्तावेज और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी माना. फैसले के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।  विजय मिश्रा के लिए यह लगातार दूसरा बड़ा झटका है. इससे महज दो दिन पहले प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक हत्याकांड मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अब एक और मामले में सजा मिलने से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. लगातार दो अलग-अलग मामलों में सजा सुनाए जाने के बाद विजय मिश्रा की राजनीतिक और सामाजिक छवि पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।  विजय मिश्रा का भदोही की राजनीति में रहा है प्रभाव पूर्वांचल की राजनीति में विजय मिश्रा लंबे समय तक प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं. भदोही जिले की राजनीति में उनका मजबूत दबदबा रहा है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें रंगदारी, कब्जा, मारपीट और हत्या जैसे गंभीर आरोप शामिल रहे हैं. कई मामलों में जांच एजेंसियां और पुलिस पहले से कार्रवाई करती रही हैं।  अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि लगातार मिल रही सजाओं से विजय मिश्रा और उनके परिवार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं. वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया है. फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद सभी दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   

DIOS ने जारी किए आदेश, आकस्मिक अनुमति के बिना शिक्षक नहीं जा सकेंगे बाहर

लखनऊ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी जून-जुलाई में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान होने वाली भर्ती परीक्षाओं के कारण शिक्षकों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। जिला स्तर पर डीआईओएस द्वारा इसके आदेश जारी किए जा रहे हैं। जून-जुलाई में लेखपाल भर्ती लिखित परीक्षा, पुलिस भर्ती, जीआईसी प्रवक्ता, बीएड परीक्षा, यूपीटेट समेत आधा दर्जन से अधिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही जनगणना का भी भौतिक काम शुरू होने वाला है। ऐसे में ये शिक्षक गर्मी की छुट्टियों का भी लाभ नहीं उठा सकेंगे। डीआईओएस की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आकस्मिक व वैध कारण होने पर ही जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से वे जिला मुख्यालय से बाहर जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें लिखित अनुमति लेनी होगी। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने कहा कि परीक्षा कराने के लिए अनुभवी शिक्षकों की जरूरत होती है। लिहाजा स्कूलों के शिक्षक व स्टाफ को ही इसमें ड्यूटी लगाई जाती है। कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या न हो।   माध्यमिक के दो अपर शिक्षा निदेशक के कार्यक्षेत्र में बदलाव माध्यमिक शिक्षा विभाग ने समूह क श्रेणी के दो अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। विभाग के संयुक्त सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी को अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी को अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) बनाया गया है। इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करके इसका प्रमाण शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।   आकांक्षी जिलों के शिक्षक तबादले के लिए पहुंचे निदेशालय प्रदेश के आकांक्षी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों ने अपने साथ दोहरा व्यवहार करने और तबादले का लाभ न देने का आरोप लगाया है। अपने तबादले के लिए कई जिलों के शिक्षक शुक्रवार को बेसिक से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें कोई प्रभावी आश्वासन नहीं मिला है। शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2018 और 2020 में इन जिलों के तबादले पर रोक लगा दी गई थी। 2023 में मात्र 10 फीसदी शिक्षकों के ही तबादले हुए। इसमें अधिक भारांक वाले शिक्षकों का ही तबादला हुआ। वरिष्ठ शिक्षक इससे वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली के तहत वरिष्ठता के आधार पर एक से दूसरे जिले में तबादला किया जाए। इसमें भारांक की भेदभावपूर्ण नीति को समाप्त किया जाए। वहीं, इन जिलों में लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाया जाए ताकि हमारे परिवार को राहत मिल सके। शिक्षकों ने इस गर्मी की छुट्टी में इस आधार पर जल्द तबादला प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई।  

योगी सरकार का बड़ा फैसला, भवन निर्माण उपविधि 2025 में संशोधन से व्यापारिक निर्माण होंगे आसान

 लखनऊ विकास के साथ अन्य निर्माण कार्य में आने वाली विसंगति को योगी आदित्यनाथ सरकार ने दूर करके बड़े वर्ग को राहत प्रदान की है। उत्तर प्रदेश भवन निर्माण उपविधि तथा जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 के संशोधन से अब तमाम निर्माण कार्य की राह आसान हो गई है। आवास विभाग से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रदेश में अब सात मीटर चौड़ी सड़क पर वेयरहाउस व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण कराया जा सकेगा। इसी तरह सात मीटर चौड़ी सड़क पर राजमार्ग सुविधा जोन विकसित किए जा सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 में संशोधन किया है। विसंगतियां दूर करने के लिए किए संशोधन के तहत अब शापिंग माल के अलावा दुकानों अन्य व्यावसायिक निर्माण भी 18 मीटर चौड़ी सड़क पर किए जा सकेंगे। प्रमुख सचिव आवास पी गुरू प्रसाद के कार्यालय से जारी अधिसूचना के मुताबिक सात मीटर चौड़ी सड़क पर औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दिए जाने के बावजूद अब तक वेयरहाउसिंग व लाजिस्टिक पार्क का निर्माण 18 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने अनुमति थी जिसे अब संधोशन के जरिए सात मीटर किया गया है। इसी तरह अब तक शापिंग माल तो 18 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाया जा सकता था लेकिन दुकान व अन्य व्यावसायिक निर्माण केवल 24 मीटर चौड़ी सड़क पर ही करने की अनुमति थी। संशोधन के जरिए अब 18 मीटर पर दुकान आदि का भी निर्माण किया जा सकेगा। अभी तक राजमार्ग सुविधा जोन (हाईवे फैसिलिटी जोन) के लिए सड़क की चौड़ाई से लेकर एफएआर के प्रविधान स्पष्ट नहीं थे इसलिए अब संशोधन कर सरकार ने कृषि उपयोग क्षेत्र के समकक्ष राजमार्ग सुविधा जोन को माना है। ऐसे में अब राजमार्ग सुविधा जोन की सड़क की चौड़ाई न्यूनतम सात मीटर रहेगी। विदित हो कि चार जुलाई 2025 से लागू उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों-2025 और जोनिंग रेगुलेशन्स को लेकर हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कठिनाई निवारण समिति बनी हुई है। समिति, सुझाव के आधार पर उपविधि को संशोधन करती रहती है। नियमों और सुविधाओं से जुड़ी मुख्य बातें सड़क की चौड़ाई: वेयरहाउस व लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए 7 मीटर चौड़ी सड़क (ब्लैक टॉप रोड) और कम से कम 1.5 मीटर फुटपाथ की अनिवार्यता तय की गई है। प्लेज पार्क पॉलिसी: औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्लेज पार्क को भी 7 मीटर चौड़ी सड़क पर बनाने की अनुमति दी गई है, जबकि पहले 12 मीटर की सड़क अनिवार्य थी श्रेणी (Category): सात मीटर चौड़े संपर्क मार्ग पर केवल ग्रीन व ऑरेंज (गैर-प्रदूषणकारी और कम प्रदूषणकारी) श्रेणी के उद्योगों/गोदामों की ही अनुमति होगी। व्यावसायिक निर्माण: वेयरहाउस या प्लेज पार्क के कुल क्षेत्रफल में अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्से पर व्यापारिक व वाणिज्यिक सुविधाएं (शॉपिंग, दुकानें आदि) बनाई जा सकती हैं।  

आंधी-बारिश के बाद आम किसानों की उम्मीद बैगिंग तकनीक पर टिकी, उद्यान विभाग कर रहा मदद

लखनऊ प्रदेश में आंधी- बारिश और कीटों की मार के बाद बागों में बची 40 से 50 फीसदी आम की फसल को सुरिक्षत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए बैगिंग प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम की भरपूर कीमत मिल सके। किसानों को बेहतर फायदा देने के लिए उद्यान विभाग के कर्मचारी उन्हें बैग बांधने के तरीके बता रहे हैं। आम की स्थिति जानने के लिए हम शुक्रवार सुबह काकोरी के रास्ते सहिलामऊ पहुंचे। यहां एक बाग में मिले शंकर सिंह आसमान की तरफ देखकर कहते हैं कि ये बादल और टिप टिप गिरती बूंदें आम के लिए जहर जैसी हैं। बैग ( कागज, पालीथीन थैला) को दिखाकर कहते हैं कि इससे कुछ उम्मीद है। वह थैला बांधने में लगे मजदूरों को समझाते हैं कि सिर्फ लंगड़ा और चौसा में ही बांधना है। दशहरी को उसके हाल पर छोड़ दो। ताकीद भी करते हैं कि जो फल मजबूत दिख रहा है सिर्फ उसी में बांधना है। यहां से आगे बढ़े तो कनार गांव की बाग में उद्यान विभाग के कर्मचारी मिले। वे किसानों को बैग बांधने का तरीका सिखा रहे थे। बस्ती के बागवान संदीप मौर्य बताते हैं कि पिछले वर्ष तीन हजार फलों में बैग बंधवाया था। सामान्य आम 20 से 25 रुपये प्रति किलो तो बैग वाला 35 से 45 रुपये किलो बिका था। यह आम ज्यादा बड़ा, चमकदार और टिकाऊ था। फलों को तोड़ने के बाद सुरक्षित रखे गए बैग इस बार भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आम्रपाली और चौसा के लिए पांच हजार नए बैग मंगवाये हैं। बाराबंकी, उन्नाव, बुलंदशहर और अमरोहा के हसनगंज के बागवान भी इस प्रणाली से आम को निर्यात लायकबनाने में जुटे हैं।