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गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंग,फास्टैग से कटेगा दूरी के हिसाब से टोल

 लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर अब सफर करने वालों को टोल टैक्स का देना होगा। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार आधी रात्रि 12 बजे से टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह वसूली अडाणी समूह द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे के 80 फीसद हिस्से में होगी। जबकि आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाए गए हिस्से में टोल टैक्स की वसूली शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 29 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। टोल टैक्स की वसूली 15 दिन बाद शुरू किए जाने का निर्णय किया गया था। सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर बिना किसी शुल्क के सफर करने का आनंद उठा रहे वाहन चालकों की जेब पर अब मार पड़ेगी। शासन द्वारा दी गई 15 दिन की फ्री राइड की समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी। 14 मई की आधी रात से इस एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया विधिवत शुरू भी कर दी गयी। इंटरचेंज सोनिक के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि टोल का शुल्क वसूलने के लिए सारी मशीनें एक्टिव कर ली गयी हैं। 16 लोगों के स्टाफ से व्यवस्थाएं सुचारू रखी जायेंगी। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर टोल दरों की सूची भी चस्पा कर दी गई है। 15 दिन तक एक्सप्रेसवे का सफर था फ्री पहले डिजिटल एक्सप्रेसवे का संचालन 30 अप्रैल से आरंभ हो चुका है। शासन ने वाहनों का संचालन आरंभ होने के साथ ही 15 दिन तक टोल वसूली नहीं करने के आदेश दिए थे। अब रात बीती रात 12 बजे टोल का संचालन शुरू कर दिया गया। वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी कार्यदाई संस्थाए जोर जुगत में लगी है। कोई असुविधा न हो इसे लेकर भी जिले से जुड़े दोनों इंटरचेंज पर काम चालू है। लाइट, ट्रामा आदि की व्यवस्थाएं भी पूरी की गई। मैनेजर के मुताबिक एक टोल पर अभी ढाई हजार से तीन हजार वाहन दर्ज हो रहे। इनकी संख्या अब बढ़ने के आसार भी जग रहे हैं। पूरी तरह ऑनलाइन, जितना सफर उतना टोल उन्नाव के सोनिक टोल के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि यह पूरी तरह से फास्टटैग आधारित ट्रांजिट सिस्टम है। जिसमें आपके द्वारा तय की गई दूरी के अनुसार ही शुल्क कटता है। प्रारंभिक निर्धारण के अनुसार कार/जीप से 2.55 प्रति किमी (पूरे सफर पर लगभग 1,515) बस और ट्रक पर 8.20 प्रति किलोमीटर (पूरे सफर का करीब 5,700 रुपये उससे अधिक) लिया जाएगा। प्रति किमी कार/जीप के लिए रुपये 2.55, हल्के कमर्शियल वाहन के लिए रुपए 4.5 रुपये, बस/ट्रक के लिए रुपये 8.20 रुपए पूरी यात्रा का है। मेरठ से प्रयागराज तक कार से लगभग रुपये 1500 से रुपये 1800 तक का टोल खर्च आ सकता है। एक्सप्रेसवे पर बैरियरलेस ऑटोमैटिक टोल सिस्टम है, जो फास्टैग से सीधे टोल काटेगा।

सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक 2962 शिकायतों का समाधान हुआ

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के संकल्प के साथ सभी वर्गों को न्याय दिला रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग लगातार शिकायतों की सुनवाई कर त्वरित निस्तारण कर रहा है। आयोग साल 2024 से अप्रैल 2026 तक आई कुल शिकायतों में से करीब 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण कर चुका है। इस तरह आयोग ने योगी सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए न केवल बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण किया है, बल्कि नई शिकायतों पर भी समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की है। 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण हुआ दरअसल योगी सरकार की प्राथमिकताओं में पिछड़ा वर्ग के लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान, शिकायतों की सुनवाई और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई शामिल है। इसी क्रम में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सक्रियता से बड़ी संख्या में लोगों को न्याय मिला है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक कुल 3394 शिकायतें आई थीं। इनमें से 2962 मामलों की सुनवाई और कार्यवाही के बाद निस्तारण किया जा चुका है। इस तरह करीब 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।  योगी सरकार पिछड़ा वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है- राजेश वर्मा छात्र-छात्राएं भी छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर आयोग से मदद मांगते हैं। साथ ही पिछड़े वर्ग में शामिल करने के लिए भी लोग आयोग में प्रत्यावेदन देते हैं। उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़े वर्गों की अनुसूची-एक में जातियों के सम्मिलन, निष्कासन और संशोधन से संबंधित कुल 324 प्रत्यावेदन प्राप्त हुए। इनमें से 307 मामलों का सुनवाई और कार्यवाही के बाद निस्तारण किया जा चुका है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतें प्राप्त करना नहीं, बल्कि पीड़ित लोगों को वास्तविक राहत पहुंचाना है।

16 हजार किमी से अधिक लंबाई में नालों की सफाई पूरी, 300 बाढ़ परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर

लखनऊ  योगी सरकार इस वर्ष मानसून के दौरान जीरो जनहानि और कृषि भूमि को कम से कम नुकसान सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना, नालों की सफाई, तटबंधों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा समितियों के गठन समेत तमाम उपाय आगामी मानसून के दौरान बड़ी राहत साबित होंगे। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया गया है ताकि पहली जून से इन्हें संचालित किया जा सके।  सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुताबिक इस वर्ष रिकॉर्ड गति से कार्य करते हुए अब तक लगभग 4 हजार किलोमीटर लंबाई के तटबंधों को सुरक्षित किया गया है। वहीं नदियों-नालों के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि को कटान से बचाने के लिए 300 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन्हें 15 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थानों पर कटाव निरोधक कार्य पूरे किए जा रहे हैं। नदियों के किनारों पर पत्थर की पिचिंग और जियो-बैग्स का उपयोग कर सुरक्षा घेरा भी मजबूत किया जा रहा है। नालों की सफाई और जल निकासी विभाग के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मार्च 2026 तक 16 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई में नालों की सिल्ट सफाई का काम पूरा हो चुका है। बारिश शुरू होने से पहले बचे सभी संवेदनशील जगहों पर सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके जरिए भारी बारिश होने पर पानी की निर्बाध निकासी से फसलों और गांव-बस्तियों को डूबने से बचाया जा सकेगा। 18 मंडलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष किए जा रहे तैयार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की तरफ से लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज समेत प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बाढ़ और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए यह कक्ष 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। जलस्तर की रियल टाइम निगरानी और आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई इनके जरिए सुनिश्चित कराई जाएगी। सामाजिक सहभागिता से मिलेगी मदद सामाजिक स्तर पर भी विभाग अपनी तैयारियां पुख्ता कर रहा है। विभिन्न ग्रामीण इलाकों में ‘बाढ़ सुरक्षा समितियां’ तैयार की जा रहीं हैं। इनमें संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर, ग्राम प्रधान, लेखपाल समेत अन्य स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है, जिनकी जिम्मेदारी बाढ़ और आपदा की स्थिति में तत्काल सूचना पहुंचाने की होगी। साथ ही राहत से जुड़े काम में मदद करेंगे।

सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला स्टेडियम

गोरखपुर शनिवार (16 मई) की तिथि गोरखपुर की उपलब्धियों की श्रृंखला में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रही है। खेल अवस्थापना सुविधाओं के लिहाज से गोरखपुर का नाम वैश्विक स्तर पर उल्लिखित कराने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों हेतु बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के शिलान्यास समारोह में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और प्रदेश के खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे।  गोरखपुर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रशासन की तरफ से ताल नदोर में उपलब्ध कराई गई जमीन पर 24 दिसंबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। औपचारिक शिलान्यास होने से पूर्व, सरकार की तरफ से जारी परियोजना लागत की प्रथम किश्त 63.39 करोड़ रुपये से काम आगे बढ़ रहा है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड एक (भवन) के अनुसार अब तक करीब सात प्रतिशत काम हुआ है। स्टेडियम का निर्माण 23 दिसंबर 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।  गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को गोरखपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हैं। उनका कहना है कि इंटरनेशनल स्टेडियम के बन जाने से गोरखपुर आने वाले समय में विश्व स्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए भी जाना जाएगा।  30 हजार होगी दर्शक क्षमता गोरखपुर में बन रहा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम 46 एकड़ क्षेत्रफल में आकार लेगा। कुल 30 हजार दर्शक क्षमता का यह स्टेडियम ‘ग्राउंड प्लस टू फ्लोर’ के हिसाब से बनेगा। इसके मेन ग्राउंड पर खिलाड़ियों के लिए 7 प्लेइंग पिच और 4 प्रैक्टिस पिच होगी। स्टेडियम के पूर्वी और पश्चिमी स्टैंड में प्रत्येक में 14,490 दर्शक बैठ सकेंगे। नार्थ पैवेलियन 208 वीआईपी व 382 मीडियाकर्मियों और साउथ पैवेलियन 1708 वीवीआईपी व वीआईपी के लिए होगा। रात्रिकालीन मैच भी हो सकें, इसके लिए मेन स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय मानक के चार हाई मास्ट लाइट की व्यवस्था रहेगी। यहां क्रिकेट के अलावा अन्य बड़े आयोजन भी होंगे। कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहतरीन स्थान पर बन रहा अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम  ताल नदोर में बन रहा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहतरीन जगह पर है। गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग फोरलेन से जुड़ा यह स्थान, गोरखपुर एयरपोर्ट से करीब 24 किमी की दूरी पर है और रेलवे स्टेशन से करीब 20 किमी है। ऐसे में खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए यहां पहुंचना काफी सुगम होगा। पेट्रोलियम कंपनियों के सीएसआर फंड से 100 करोड़ गोरखपुर के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में देश की शीर्ष पेट्रोलियम कंपनियां अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से कुल 100 करोड़ रुपये देंगी। एमओयू के बाद धनराशि आवंटन प्रक्रिया में है। अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम निर्माण के लिए सीएसआर फंड से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड 60 करोड़ रुपये, भारत पेट्रोलियम 30 करोड़ और हिंदुस्तान पेट्रोलियम 10 करोड़ रुपये देगी।

सीएम योगी के निर्देश पर सख्त,100 अस्पतालों का भुगतान रोका गया, 100 किए गए सस्पेंड

लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले यूपी के 200 प्राइवेट अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सीएम योगी के निर्देश पर आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड 100 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया है। साथ ही 100 अस्पतालों का भुगतान भी रोका गया है। सीएम योगी की इस कार्रवाई से अन्य अस्पतालों में हड़कंप मचा है। सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश हैं कि योजना के लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार द्वारा अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (एचईएम) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के लिए 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इनमें अस्पताल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं शामिल हैं। 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप नहीं पूरी की प्रक्रिया सीईओ ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, दूरभाष, संदेश, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को हर स्तर पर सहायता दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं की। योगी सरकार की ओर से उन्हें कई बार अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद करीब 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी नहीं की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। 100 निजी अस्पतालों का रोका गया भुगतान सीएम योगी के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को केवल मानक आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही प्राप्त हों। बता दें कि योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

महराजगंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब आपका वोट सही जगह पड़ता है, तब विकास, सुरक्षा, रोजगार और सुशासन सुनिश्चित होता है, लेकिन एक गलत वोट जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद, माफियावाद, अराजकता और गरीबों की जमीनों पर कब्जे जैसी दुष्प्रवृत्तियों को जन्म देता है। डबल इंजन सरकार ने इन प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगाकर प्रदेश में सुशासन और विकास का नया वातावरण तैयार किया है। महराजगंज समेत पूरे पूर्वांचल को माफिया, दंगा व भय के माहौल से बाहर निकालकर विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मजबूत सड़क नेटवर्क, सिंचाई, रोजगार और सुरक्षा से जोड़ा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र एवं टूलकिट भी वितरित किए। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा व सहयोगी दलों के विधायक बनने के बाद विधानसभा क्षेत्रों में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और जनसुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे, जबकि अब वही धन मंदिरों में बेहतर सुविधाएं विकसित करने और आम जनता के हित में लगाया जा रहा है। महराजगंज में दिख रहा विकास सही सांसद और विधायक चुनने का परिणाम है। बनेलिया माई के नाम पर रोहिन नदी पर बैराज का निर्माण हो या गोरखपुर से सोनौली तक फोरलेन मार्ग का कायाकल्प, ये सब जनता के एक सही वोट की ताकत से संभव हुआ है।   डबल इंजन सरकार ने बदली महराजगंज की तस्वीर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले महराजगंज इंसेफेलाइटिस, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, अराजकता, माफियावाद और पलायन की त्रासदी झेल रहा था। दिमागी बुखार मासूम बच्चों की जान ले रहा था, सड़कें गड्ढों में तब्दील थीं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई थी, गरीबों की जमीनों पर कब्जे आम थे और किसान, नौजवान व बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार बनने के बाद महराजगंज की तस्वीर बदल गई। इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ, मेडिकल कॉलेज संचालित हुआ, नौतनवा, फरेंदा, चौक, सिसवा, श्यामदेउरवा, घुघली और पनियरा बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ गए तथा गोरखपुर-सोनौली फोरलेन बनने से यात्रा समय दो घंटे से घटकर 45-50 मिनट रह जाएगा। गोरखपुर के नए बाईपास, ठूठीबारी से जिला मुख्यालय तक मजबूत सड़क नेटवर्क, पुलों के निर्माण और रोहिन नदी पर बने बनेलिया माई बैराज से क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सिंचाई दोनों को नई ताकत मिली है। वनटांगिया गांवों को पट्टा, मतदाता पहचान और सरकारी योजनाओं से जोड़कर सम्मानजनक जीवन देने का काम भी डबल इंजन सरकार ने किया है। बीमारी ही नहीं, ‘बीमारू’ टैग भी खत्म हो गया मुख्यमंत्री ने कहा कि महराजगंज अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हो चुकी है, जबकि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए नए उद्योगों और बंद चीनी मिलों को नई कार्ययोजना के साथ पुनः शुरू करने की तैयारी है। महराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर से इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बीमारी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का ‘बीमारू’ टैग भी हट गया है। उत्तर प्रदेश देश के विकास इंजन के रूप में उभर रहा है, जिसे आगे बढ़ने से अब कोई नहीं रोक सकता।  प्रदेश में माफिया का आतंक समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबों की पीड़ा को कभी नहीं समझा, जबकि डबल इंजन सरकार हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उनके जीवन में बदलाव ला रही है। वनटांगिया गांवों में भी राजस्व गांवों जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर गरीब को आवास, हर घर को शौचालय, राशन और आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जबकि गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। महराजगंज के सैकड़ों नौजवान उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए हैं और किसान सिंचाई, बीज, ट्रैक्टर, उन्नत खेती तथा सरकारी क्रय केंद्रों का लाभ उठा रहे हैं। माफिया का आतंक समाप्त हो चुका है, गरीबों की जमीनों पर कब्जा नहीं हो सकता, बेटियां सुरक्षित हैं और किसी में भी गोहत्या या जबरन अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं बचा है। राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में बाधक बनी थीं सपा, कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण हुआ है। महराजगंज के हजारों नौजवान, महिलाएं, किसान, व्यापारी और बुजुर्ग भी राममंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। 492 वर्ष बाद मंदिर का शिलान्यास हुआ और 496 वर्ष बाद प्रधानमंत्री के कर-कमलों से अयोध्या में रामलला विराजमान हुए। दुनिया का सबसे भव्य राममंदिर अयोध्या में बना है और अखंड रामायण पाठ के बीच ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान राम और हनुमान जी आशीर्वाद दे रहे हों। डबल इंजन सरकार में भव्य राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम जैसे ऐतिहासिक कार्य संभव हुए, जबकि सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां इन कार्यों में हमेशा बाधा बनती रहीं। इसी बाधा को पश्चिम बंगाल की जनता ने भी हमेशा के लिए उखाड़ फेंका है। इसलिए आप सबसे यही आग्रह करने आया हूं कि इन जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़े रहिए। सीमावर्ती क्षेत्र विकास की दौड़ में कभी पीछे न रहे भारत-नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत और सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नौतनवा, फरेंदा और सोनौली जैसे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि यहां का नागरिक कभी खुद को पिछड़ा महसूस न करे। भारत और नेपाल सिर्फ दो पड़ोसी देश नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, आस्था और रोटी-बेटी के अटूट रिश्ते से जुड़े मित्र राष्ट्र हैं। बौद्ध परिपथ और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े महराजगंज, नौतनवा और फरेंदा का विकास केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। विपक्ष के नकारात्मक नैरेटिव से बचते हुए “नेशन फर्स्ट” के साथ रहे हर देशवासी मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना महामारी का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था, उसी तरह पश्चिम … Read more

यूपी की गोशालाओं में तैनात होंगी ‘कृषि सखियां’, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गो संरक्षण को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए अब तक का सबसे बड़ा 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। इस योजना के तहत गो संरक्षण को केवल सेवा भाव तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती के एक एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार, अब प्रदेश के सभी 75 जिलों की साढ़े सात हजार से अधिक गोशालाओं में 'कृषि सखियों' की तैनाती की जाएगी, जो इस अभियान को जमीनी स्तर पर नेतृत्व देंगी। आजीविका मिशन की महिलाओं को मिलेगी कमान इस महत्वाकांक्षी योजना में उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं की केंद्रीय भूमिका होगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को गो संरक्षण अभियान से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाए। इसके लिए प्रदेश स्तर पर महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में तैयार किया जाएगा। ये प्रशिक्षित महिलाएं आगे चलकर गांव-गांव में अन्य महिलाओं को इस अभियान के गुर सिखाएंगी, जिससे गोशालाएं आत्मनिर्भरता और समृद्धि के नए केंद्रों के रूप में उभरेंगी। गोबर से खाद और रोजगार का नया मॉडल उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, गोशालाओं को अब रोजगार और जैविक कृषि के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से निकलने वाले गोबर का उपयोग बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने में होगा। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित खाद निर्माण इकाइयों से न केवल गोवंश का बेहतर संरक्षण होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। यह पहल विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली है। खेती की लागत में कमी और बेहतर स्वास्थ्य का लक्ष्य योजना का दूरगामी प्रभाव खेती और स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। जैविक खाद के प्रचुर उत्पादन से किसानों की रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा। जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित खाद्यान्न मिल सकेगा। यही कारण है कि इस पूरी योजना को गांव, किसान, महिला और गोवंश को एक साथ जोड़ने वाले एक व्यापक 'गो समृद्धि अभियान' के रूप में देखा जा रहा है।  

यूपी में मेट्रो कनेक्टिविटी होगी मजबूत, 21 स्टेशनों से चलेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें

लखनऊ यूपी के लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में शासन ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में कनेक्टिविटी और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम मील संपर्क) को दूर करने के लिए लखनऊ में 29, कानपुर में 50 और आगरा में 27 नए ऑटो एवं टेम्पो सर्कुलर रूट तय किए गए हैं। इन रूटों पर नए स्टॉपेज भी बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में भटकना न पड़े। इसके अतिरिक्त, मेट्रो स्टेशनों के पास वाहनों को खड़ा करने की समस्या को हल करने के लिए लखनऊ में 71, कानपुर में 24 और आगरा में 19 नए पार्किंग स्थलों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनके लिए नगर निगम जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा। शटल बस सेवा और डिजिटल मोबिलिटी सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए प्रमुख आवासीय कॉलोनियों और कार्यालयों को नजदीकी मेट्रो स्टेशनों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से शटल बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। यूपीएमआरसी ऐप-आधारित सेवाओं जैसे यूटीयू मोबिलिटी के साथ-साथ ओला, उबर और रैपिडो के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को घर से स्टेशन तक निर्बाध परिवहन मिले। पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य बैठक में यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार ने स्पष्ट किया कि मेट्रो को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य है। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक परिवहन के लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल बोर्ड और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की सख्त हिदायत दी है। इस पहल से न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी। मेट्रो के 21 स्टेशनों के सामने से गुजरेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें वहीं लखनऊ में निजी वाहनों का लोग कम इस्तेमाल करें। ताकि ईधन की बचत की जा सकें। इसी मकसद से मेट्रो के 21 स्टेशनों को ई सिटी बसों से लिंक किया जाएगा। ताकि लखनऊ शहर में ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर सकें, इसके लिए मेट्रो के 21 स्टेशनों से एसी इलेक्ट्रिक सिटी बसों को संचालित किया जाएगा। यानी सिटी बसों का संचालन ऐसे रूटों पर किया जाए कि हर मेट्रो स्टेशन के सामने से सिटी बसों का आवागमन हो, जिससे दैनिक यात्री निजी वाहनों को छोड़कर सिटी बसें या मेट्रो से सफर कर सकें।

208 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास,महराजगंज में बोले सीएम योगी, विकास की रफ्तार नहीं रुकेगी

 महराजगंज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। विकास की प्रक्रिया बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके व बिना झुके चलती रहेगी। 2017 के पहले प्रदेश का विकास रुका था। माफिया गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा कर रहे थे। सपा, बसपा व कांग्रेस के शासनकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर व बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता। यह पार्टियां कार्य में स्वयं बांधा बनी थी। इसी के चलते पश्चिम बंगाल की जनता ने भी इन्हें उखाड़ फेंका। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ शुक्रवार नौतनवा में 208 करोड़ रुपये से अधिक की 79 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते डीजल, पेट्रोल व एलपीली की सप्लाई पर व्यापक असर पड़ा है। प्रतिदिन भारत सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कहा कि इस समय विपक्ष के नाकारात्मक नेरेटिव से बचना है। हमें प्रधानमंत्री के साथ खड़े रहना है। छाेटे-छोटे प्रयास कर हम डीजल व पेट्रोल के दुरुपयोग को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार में तेजी से विकास हो रहा है। सड़कें बेहतर हुईं हैं। शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुए हैं। महराजगंज सहित प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों का भी कायाकल्प कराया गया है। पहले यह रुपया कब्रिस्तान के बाउंड्रीवाल के निर्माण के लिए खर्च किया जाता था। पूर्ववर्ती सरकारों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर ध्यान नहीं दिया। इंसेफलाइटिस से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नौनिहाल प्रभावित होते थे। अब डलब इंजन की सरकार में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश नहीं रह गया है। यहां के लोगों को पहचान का संकट नहीं है। देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस -वे, मैट्रो, एयरपोर्ट यूपी में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत व नेपाल दोनों मित्र देश के रूप में साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बीच बिना किसी बांधा के आवागमन होता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नौतनवा विधानसभा में भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी को पहली बार विजय मिली। उसी कर्ज को चुकाने के लिए जो भी प्रस्ताव यहां के विधायक व सांसद द्वारा दिया जाता है, उसे तत्काल स्वीकृत दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले की सरकारों ने वनटांगिया परिवारों की कभी सुधि नहीं ली, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें भूमि का मालिकाना हक दिलाने के साथ ही सभी अधिकार प्रदान किए। इससे पहले नौतनवा के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, पूर्व विधायक बजरंग बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय, जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल, पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी नौतनवा चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख राकेश मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

एडेड स्कूलों में खाली पद भरने की प्रक्रिया तेज, प्रधानाचार्य से लेकर सहायक अध्यापक तक भर्ती

लखनऊ  प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेज हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को 23,213 रिक्त पदों का अधियाचन भेज दिया है। इससे प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती का इंतजार खत्म होने की उम्मीद जगी है। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय प्रयागराज की ओर से आयोग को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के 4512 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक) और अध्यापकों के सीधी भर्ती के रिक्त पदों का विवरण उपलब्ध कराया गया है। जनपदीय अधिकारियों से निर्धारित प्रारूप पर 4479 विद्यालयों का अधियाचन प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर समेकित सूचना आयोग को भेजी गई है। अलग से हो रही ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया पत्र में यह भी कहा गया है कि एनआइसी लखनऊ द्वारा संशोधित एवं विकसित ई-अधियाचन पोर्टल पर इन रिक्त पदों को आनलाइन अपलोड करने की कार्यवाही अलग से की जा रही है। माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय संभालने पड़ रहे हैं। भर्ती होने से शिक्षकों की कमी दूर होगी, विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई मिल सकेगी और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिलेगा। यह अधियाचन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय की ओर से 14 मई को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया है। इतने पदों पर होगी भर्ती     प्रधानाचार्य : 1502 पद     प्रधानाध्यापक : 1003 पद     प्रवक्ता : 2705 पद     सहायक अध्यापक : 16,114 पद     संबद्ध प्राइमरी के सहायक अध्यापक : 1889 पद