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सपा प्रवक्ता के बयान पर बवाल: मायावती बोलीं- ब्राह्मण समाज से तुरंत क्षमा मांगें अखिलेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी ने प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोर्चा संभालते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा किया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अखिलेश यादव को इस अभद्र टिप्पणी के लिए तत्काल ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी से हर तरफ भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि समाज के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है। अखिलेश की चुप्पी ने मामले को बनाया गंभीर बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले पर खामोशी बेहद चिंताजनक है। मायावती के अनुसार, सपा मुखिया की चुप्पी की वजह से यह विवाद और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है और सामाजिक स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने सलाह दी कि सपा मुखिया को तत्काल इसका संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना और पश्चाताप कर लेना चाहिए। सपा का चरित्र 'ब्राह्मण विरोधी' मायावती ने सपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इस प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया है कि सपा का चरित्र नहीं बदला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों, अति-पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह सपा का 'ब्राह्मण विरोधी' चेहरा भी अब और गहरा होकर सामने आया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार (बीजेपी) पर भी निशाना साधा और कहा कि ब्राह्मण समाज में मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर भी जबरदस्त नाराजगी है, जो किसी से छिपी नहीं है। बसपा में 'यूज एंड थ्रो' की राजनीति नहीं ब्राह्मणों को अपनी ओर आकर्षित करते हुए मायावती ने बसपा के शासनकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बसपा ने हमेशा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर आदर-सम्मान दिया है। बसपा में 'यूज एंड थ्रो' (इस्तेमाल करो और फेंको) की राजनीति नहीं होती, बल्कि यहाँ सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है। गौरतलब है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती ने अकेले ही उतरने का ऐलान किया है। 2007 की तरह दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर मायावती की नजरें हैं। पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने के लिए कई ऐलान भी किए थे।

कच्चे तेल के उछाल का असर,यूपी के कई शहरों में ईंधन कीमतों में ₹3 तक बढ़ोतरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। लखनऊ, कानपुर, मेरठ और बरेली जैसे शहरों में पेट्रोल 97-98 रुपये और डीजल 90-91 रुपये के पार पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को इस उछाल की मुख्य वजह बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार की सुबह आम आदमी की जेब पर भारी पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते देश भर के साथ-साथ यूपी में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई। इस वृद्धि के बाद प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल का दाम 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। वहीं, डीजल ने 90 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। बड़ी कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद यह पहली बार है जब ईंधन की कीमतों में इतनी बड़ी एकमुश्त वृद्धि की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। भारतीय तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने बढ़ते घाटे को कम करने के लिए इस बोझ को उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। यूपी के अलग-अलग शहरों में वैट (VAT) और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क की वजह से कीमतों में थोड़ा अंतर रहता है। प्रमुख शहरों के रेट लखनऊः पेट्रोल पहले 94.69 अब 97.69, डीजल पहले 87.76 अब 90.76 नोएडाः पेट्रोल पहले 95.24 अब 98.24, डीजल पहले 88.19 अब 91.19 गाजियाबादः पेट्रोल पहले 94.89 अब 97.89, डीजल पहले 87.81 अब 90.81 प्रयागराजः पेट्रोल पहले 95.24 अब 98.24, डीजल पहले 88.15 अब 91.15 वाराणसीः पेट्रोल पहले 95.07 अब 98.07, डीजल पहले 88.17 अब 91.17 गोरखपुरः पेट्रोल पहले 95.15 अब 98.15, डीजल पहले 88.15 अब 91.15 आगरा पेट्रोल पहले 94.41 अब 97.41, डीजल पहले 87.51 अब 90.51 लखनऊः पेट्रोल पहले 94.69 अब 97.69, डीजल पहले 87.81 अब 90.81 कानपुरः पेट्रोल पहले 94.44 अब 97.44, डीजल पहले 87.51 अब 90.51 मेरठः पेट्रोल पहले 94.47 अब 97.47, डीजल पहले 87.49 अब 90.49 मुरादाबादः पेट्रोल पहले 94.95 अब 97.95, डीजल पहले 88.18 अब 91.18 बरेलीः पेट्रोल पहले 94.92 अब 97.92, डीजल पहले 88.06 अब 91.06 महंगाई की चौतरफा मार की आशंका ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा। डीजल महंगा होने से आने वाले दिनों में फल, सब्जी और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि 100 रुपये का आंकड़ा अब महज 2-3 रुपये की दूरी पर रह गया है।  

सीएम योगी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री करेंगे प्रभावित परिवारों से मुलाकात

आपदा पीड़ितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत कार्यों में तेजी सीएम योगी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री करेंगे प्रभावित परिवारों से मुलाकात जिलाधिकारियों को तत्काल सहायता पहुंचाने के सख्त निर्देश लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी: मुख्यमंत्री लखनऊ उत्तर प्रदेश में आंधी, आकाशीय बिजली और अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार भी संवेदनशीलता दिखाई है। सीएम ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने और हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ी है और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। शासन स्तर से की जा रही मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारियों ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि उपलब्ध करानी शुरू कर दी है। शासन स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि जरूरतमंदों तक सहायता समय पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी डीएम को निर्देशित किया है कि प्रभावित परिवारों को जो भी सहायता आवश्यक हो, उसे बिना देरी उपलब्ध कराया जाए। सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता बरती जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु किया जाए ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि जनता की सुरक्षा और सहायता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  इन जिलों में है नुकसान की सूचना प्रदेश के बाराबंकी, बहराइच, कानपुर देहात, बस्ती, संभल, हरदोई, उन्नाव समेत 19 जिलों में जनहानि, पशुहानि और फसल नुकसान की जानकारी सामने आई है। खराब मौसम के कारण कई मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

PMJAY जांच में बड़ा खुलासा: एक ही डॉक्टर कई अस्पतालों में तैनात, सरकार ने भेजे नोटिस

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) से संबद्ध अस्पतालों का विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया। जांच में सामने आया कि 28 डॉक्टर ऐसे थे, जिनके नाम 15 से ज्यादा अस्पतालों से जुड़े हुए थे। वहीं 274 चिकित्सक ऐसे भी मिले, जिनके नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे। इस तीन दिनी सत्यापन प्रक्रिया में ऐसे सभी संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें डॉक्टर पूर्व में किसी अस्पताल से जुड़े थे और वर्तमान में कहीं और हैं। मगर डाटा अपडेट न होने के कारण उनके नाम अभी भी पूर्व अस्पतालों में ही दर्ज हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, अनियमितताओं और कर्तव्य पालन में कोताही के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए पांच डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वहीं, कई स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए थे। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और चिकित्सा कार्य से दूर रहने के आरोप में पांच चिकित्सा अधिकारियों को सेवा से हटाया गया। बर्खास्त किए गए डॉक्टरों में गोरखपुर जिला अस्पताल की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉ. रामजी भारद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल थे। अंबेडकरनगर के डॉक्टरों पर भी गिरी गाज सरकार ने अंबेडकर नगर में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं के मामले में सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा समेत 16 चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में इन अधिकारियों पर सरकारी मानकों के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग और निजी हितों के लिए फाइलों को मंजूरी देने के आरोप सही पाए गए। जांच एक अपर जिलाधिकारी समेत तीन सदस्यीय समिति ने की थी। इन डॉक्टरों की सैलरी वृद्धि पर रोक सरकार ने कुछ मामलों में वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई भी की। हमीरपुर में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई। उन पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान मरीजों से वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। इसके अलावा बलरामपुर के डॉ. संतोष सिंह की चार और झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई।

संसदीय समितियों का दौरा टला, विधान परिषद ने स्थगित किया भ्रमण कार्यक्रम

विधान परिषद की संसदीय समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों में करेंगे प्रतिभाग  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सरकारों ने ईंधन बचाने, काफिला कम करने आदि की पहल को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों को फ्लीट को 50 प्रतिशत कम करने का फैसला किया है। अब इसी क्रम में विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने परिषद की संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित भ्रमण के समस्त कार्यक्रमों को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है।  यह जानकारी विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि संसदीय समितियों की बैठकों में जिला स्तरीय अधिकारी अग्रिम आदेशों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग करेंगे।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार पूलिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे विकल्प अपनाकर आत्मनिर्भरता अभियान को मजबूती देना हर नागरिक का दायित्व: सीएम

पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए निभानी होगी सामूहिक जिम्मेदारी: सीएम योगी टाइम्स ऑफ इंडिया के "9 डिफाइनिंग इयर्स ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग यूपी" कॉन्क्लेव को संबोधित किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार पूलिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे विकल्प अपनाकर आत्मनिर्भरता अभियान को मजबूती देना हर नागरिक का दायित्व: सीएम प्रधानमंत्री की अपील को पूरी गंभीरता से पढ़कर, समझकर और चिंतन-मनन के बाद ही निष्कर्ष निकालना चाहिए: मुख्यमंत्री देश रहेगा तो हम सब रहेंगे, प्रदेश सुरक्षित रहेगा तो हम सब सुरक्षित रहेंगे और देश समृद्ध होगा तो हम सब भी समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे: योगी आदित्यनाथ हजार वर्षों के आक्रमणों, अत्याचारों और शोषण के बावजूद भारत अपने अस्तित्व और संस्कृति को बचाने में सफल रहा विकास केवल लखनऊ, वाराणसी या गोरखपुर तक सीमित नहीं, सभी 75 जनपदों और 58,000 ग्राम पंचायतों में समान विकास लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस तरह कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान देशवासियों ने एकजुट होकर संकट का सामना किया था, पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच उसी सामूहिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय भावना के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। यह वैश्विक संकट है, जिसका असर ईंधन, खाद्य व उर्वरक आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे समय हर नागरिक का दायित्व बनता है कि वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे विकल्पों को अपनाकर देश के आत्मनिर्भरता अभियान को मजबूती दे। मुख्यमंत्री गुरुवार को लखनऊ के होटल ताज में टाइम्स ऑफ इंडिया के "9 डिफाइनिंग इयर्स ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग यूपी" कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। संकट के समय देशहित सर्वोपरि मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी की अपील का उल्लेख करते हुए ईंधन की बचत के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, कार पूलिंग, मेट्रो, इलेक्ट्रिक व्हीकल और शटल बस जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने 7700 से अधिक गोआश्रय स्थलों में संरक्षित 15 लाख से अधिक गोवंश के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस प्लांट आधारित सामूहिक किचन मॉडल विकसित करने की बात कही, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के समय देशहित सर्वोपरि होना चाहिए। हर नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्र के साथ खड़ा होकर अपना योगदान दे। उन्होंने अधूरी जानकारी के आधार पर नकारात्मक टिप्पणी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की अपील को पूरी गंभीरता से पढ़कर, समझकर और चिंतन-मनन के बाद ही निष्कर्ष निकालना चाहिए। देश रहेगा तो हम सब रहेंगे, प्रदेश सुरक्षित रहेगा तो हम सब सुरक्षित रहेंगे और देश समृद्ध होगा तो हम सब भी समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे। बालिग होती पीढ़ी को सही जानकारी देना आवश्यक मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिग होती पीढ़ी को उत्तर प्रदेश के बारे में सही जानकारी देना आवश्यक है। 500 से 1500 वर्ष पूर्व तक भारत की विश्व अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी, कारण था जीवन के हर क्षेत्र में सामूहिकता, समन्वय और परस्पर सहयोग। भारत के पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भूमि और जल संसाधन थे। विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की परंपरागत खेती होती थी। खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और हस्तशिल्प का भी उत्कृष्ट तंत्र विकसित था। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का जाल फैला हुआ था। भारतीय कारीगर और व्यापारी विश्व बाजार तक अपनी वस्तुओं को पहुंचाते थे। खेती, मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन की व्यापक संभावनाओं के कारण भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति बना। आक्रमणों के बावजूद भारत अस्तित्व बचाने में सफल मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में आज जो आर्थिक समृद्धि दिखाई दे रही है, उसकी जड़ें मात्र 400-500 वर्ष पुरानी हैं, जबकि भारत में यह समृद्धि इससे बहुत पहले विद्यमान थी। लेकिन जब हमने अपने संसाधनों, ज्ञान और नवाचार पर विश्वास करना छोड़ दिया, रिसर्च एवं डेवलपमेंट को उपेक्षित किया तो हम पिछड़ते गए। उस समय तीर्थयात्रा पर्यटन का प्रमुख रूप थी। केदारनाथ में जलाभिषेक के लिए रामेश्वरम का जल और रामेश्वरम में अभिषेक के लिए गंगोत्री का जल ले जाने की परंपरा उत्तर और दक्षिण को जोड़ती थी। द्वादश ज्योतिर्लिंग और चार धाम पूरे देश को एक सूत्र में बांधते थे। जीवन इस तरह व्यवस्थित था कि कोई किसी पर बोझ न बने। यही कारण था कि भारत विश्व गुरु बना। हजार वर्षों के आक्रमणों, अत्याचारों और शोषण के बावजूद भारत अपने अस्तित्व और संस्कृति को बचाए रखने में सफल रहा, जो दुनिया में कम  ही देखने को मिलता है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बना दिया था प्रश्न प्रदेश मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की स्थिति बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को प्रश्न प्रदेश बना दिया गया था। युवाओं के सामने पहचान का संकट था, व्यापारी पलायन कर रहे थे, किसान आत्महत्या कर रहे थे, त्योहारों के समय दंगे-फसाद होते थे, गुंडागर्दी और माफिया राज था। भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और सरकारी उदासीनता चरम पर थी। बिजली, सड़क, सिंचाई और बाजार की कोई व्यवस्था नहीं थी। परंपरागत उद्यम बंद हो रहे थे। इसी निराशा और अराजकता के माहौल में 2017 में जनता ने प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार को आशीर्वाद दिया। सरकार बनते ही हमने पहले एक महीने तक केवल मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ शाम छह बजे से रात बारह बजे तक बैठक की। हर विभाग का प्रेजेंटेशन लिया गया और कार्ययोजना तैयार की गई। खजाना खाली था, कर्मचारियों के वेतन के लिए भी पैसे नहीं थे, लेकिन हमने स्पष्ट नीति बनाई कि कोई भाई-भतीजावाद नहीं, कोई क्षेत्रवाद नहीं, कोई परिवारवाद नहीं। आज उत्तर प्रदेश में विकास केवल लखनऊ, वाराणसी या गोरखपुर तक सीमित नहीं है। सभी 75 जनपदों और 58,000 ग्राम पंचायतों में समान विकास हो रहा है। सभी जगह एक समान बिजली पहुंच रही है। अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति सख्ती से लागू है। भ्रष्टाचार पर भी जीरो टॉलरेंस है। बीमारू से भारत की विकास यात्रा का इंजन बना उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे में यूपी का हिस्सा देश का 60 प्रतिशत है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे बन चुके हैं। भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट जेवर (नोएडा) बनकर तैयार है और 15 जून से उड़ानें शुरू हो रही हैं। देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही है। राष्ट्रीय जल मार्ग सक्रिय हैं। फोर-लेन सड़कों और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी का जाल बिछा है। कृषि वृद्धि दर 8 से बढ़कर 18 … Read more

सीएम योगी ने दिया आपदा में मौत पर 4 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता देने का निर्देश

फसल और पशुधन नुकसान पर किसानों के साथ खड़ी योगी सरकार सीएम योगी ने दिया आपदा में मौत पर 4 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता देने का निर्देश सीएम योगी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री करेंगे प्रभावित परिवारों से मुलाकात जिलाधिकारियों को तत्काल सहायता पहुंचाने के सख्त निर्देश लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी: मुख्यमंत्री जनहानि और फसल नुकसान से प्रभावित परिवारों को तेजी से राहत पहुंचाने के निर्देश लखनऊ  उत्तर प्रदेश में आंधी, अतिवृष्टि और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि और फसल नुकसान के बीच योगी सरकार ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। सीएम योगी ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने और हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ी है और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को तत्काल 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसानों, पशुपालकों और अन्य प्रभावित परिवारों को भी तेजी से राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं। फसल का नुकसान उठाने वाले किसानों के लिए मुआवजे और पशुधन क्षति पर भी आर्थिक सहायता तय की गई है। राहत आयुक्त डाॅ0 हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों व अपर जिलाधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खराब मौसम के कारण प्राकृतिक आपदा से हुई विभिन्न क्षतियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि अधिकारी स्वयं प्रभावित परिवारों से मिलकर आवश्यक मदद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि राहत आयुक्त कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से निरंतर माॅनिटरिंग की जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी खराब मौसम की चेतावनी के उपरान्त राहत आयुक्त कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम द्वारा सचेत पोर्टल के माध्यम से आम जनमानस को 34 करोड़ 64 लाख रेड एवं ऑरेंज  चेतावनी संदेश भेजे गये हैं। कंट्रोल रूम को हाई एलर्ट पर रखते हुए प्रभावित परिवारों को दी जा रही सहायता राशि की माॅनिटरिंग करने के निर्देश दिए गये हैं।  राहत आपदा हेल्प लाइन नम्बर 1070 पर काॅल आते ही तत्काल सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को जन प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सहायता राशि का शत प्रतिशत वितरण कराने हेतु निर्देशित किया।  फसल नुकसान पर मुआवजा तय योगी सरकार प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देगी। इसके अलावा 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। यह वर्षा सिंचित क्षेत्र में 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सुनिश्चित सिंचित क्षेत्र में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा 12 माही फसलों और कृषि वानिकी के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को दी जाएगी। खेतों से गाद हटाने में भी आर्थिक मदद अतिवृष्टि के कारण खेतों में जमा गाद और मलबा हटाने के लिए भी योगी सरकार ने 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता देने का प्रावधान किया है। इससे प्रभावित किसानों को दोबारा खेती शुरू करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सर्वे कार्य तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए ताकि पात्र किसानों को समय पर राहत मिल सके। पशुपालकों को भी आर्थिक संबल योगी सरकार ने पशुपालकों को राहत देने के लिए भी व्यापक सहायता योजना लागू की है। दुधारू पशुओं जैसे गाय-भैंस की मृत्यु पर 37,500 रुपये तक सहायता दी जाएगी। बैल और घोड़े जैसे गैर दुधारू पशुओं के लिए 32 हजार रुपये तथा बछड़ा, गधा, खच्चर और टट्टू के लिए 20 हजार रुपये की सहायता तय की गई है। भेड़, बकरी और सुअर की क्षति पर भी 4 हजार रुपये प्रति पशु आर्थिक मदद दी जाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की अहम भूमिका को देखते हुए सरकार की यह पहल प्रभावित परिवारों को राहत देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राहत कार्यों की लगातार निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। शासन स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और प्रभावित जिलों में राहत वितरण की समीक्षा हो रही है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि आपदा से प्रभावित किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को समय पर सहायता मिल सके और वो जल्द सामान्य स्थिति में लौट सकें।

यूपी में AI क्रांति की शुरुआत! ‘AI For All’ पहल से युवा बनेंगे टेक्नोलॉजी में माहिर

योगी सरकार की ‘एआई फॉर ऑल’ पहल से प्रदेश के युवाओं को मिलेगा भविष्य की तकनीक का ज्ञान प्रदेशभर में मुफ्त एआई प्रशिक्षण अभियान तेज, हर नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की तैयारी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन चला रहा विशेष अभियान लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा ‘एआई फॉर ऑल’ पहल को पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत हर नागरिक को निःशुल्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। यह कार्यक्रम वैश्विक आईटी संस्था ओरेकल यूनिवर्सिटी के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 अप्रैल 2026 को मुजफ्फरनगर में आयोजित वृहद रोजगार मेले के दौरान किया था। योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों तथा आम नागरिकों को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाकर उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज वैश्विक स्तर पर रोजगार, उद्योग और कार्य संस्कृति में बड़ा बदलाव ला रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा तकनीकी रूप से सक्षम बने और नई संभावनाओं का लाभ उठाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गांव, कस्बों और शहरों तक इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस निःशुल्क प्रशिक्षण से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का फोकस केवल पारंपरिक रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। यही कारण है कि कौशल विकास के क्षेत्र में प्रदेश लगातार नई पहलें कर रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत ‘एआई फॉर यू: ट्रेनिंग एंड असेसमेंट’ नामक कोर्स लगभग तीन घंटे की अवधि का है, जिसे पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रतिभागियों का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाता है तथा सफल अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जो उनके करियर विकास में सहायक होगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि इस पहल को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को अधिकतम पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘एआई फॉर ऑल’ टैब के माध्यम से सरल प्रक्रिया में निःशुल्क पंजीकरण कर घर बैठे प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

यूपी सरकार का बड़ा तोहफा! गन्ना किसानों को मिला 3.21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा भुगतान

उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को किया 3.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान  सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य है उत्तर प्रदेश, गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में भी शीर्ष पर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्यों की दरों में 30 रुपये प्रति कुंतल की ऐतिहासिक वृद्धि भी की  प्रदेश में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का आधार बना गन्ना विकास विभाग प्रदेश की चीनी मिलों में 1,28,500 टी.सी.डी. की अतिरिक्त पेराई क्षमता का हुआ सृजन, 9 वर्ष में लगभग 6,924 करोड़ का अतिरिक्त पूंजी निवेश हुआ ई-गन्ना ऐप एवं डिजिटल सेवाओं से 48 लाख गन्ना किसानों को घर बैठे सभी सुविधाएं हुईं सुलभ लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पहले दिन से ही किसानों के हित में कार्य कर रही है। अपने पहले फैसले में किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर्जमाफी करने वाली योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराया जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों, पारदर्शी व तकनीक आधारित व्यवस्था ने गन्ना किसानों को वर्ष 2017 से अब तक कुल 3,21,963 करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराकर इतिहास रचा है। भुगतान की धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई। गन्ना एवं चीनी उद्योग अब प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। योगी सरकार किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान किया गन्ना किसानों को समय से भुगतान करने में योगी सरकार की नीति पूर्व की सरकारों पर भारी पड़ी। 2007 से 2012 में गन्ना किसानों को 52,131 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2012 से 2017 में 95,215 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान किया। योगी सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है।  48 लाख गन्ना किसान परिवारों को दी आर्थिक मजबूती  योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य की दरों में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि भी की। अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये व सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति कुंतल की दर निर्धारित की गई। इस बढ़ोत्तरी से गन्ना किसानों को लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त गन्ना मूल्य भुगतान प्राप्त हुआ है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। समय से भुगतान होने से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने में गन्ना विकास विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत  यूपी के गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025-26 में 29.51 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती की गई। योगी सरकार के प्रयास से उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य बना है। उत्तर प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं। उप्र राज्य चीनी निगम की 3, उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ की 23 व निजी क्षेत्र की 95 चीनी मिलों द्वारा 877.93 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया है। पिछले पेराई सत्र में औसत चीनी परता उत्तर प्रदेश का 10.21 प्रतिशत रहा, जबकि महाराष्ट्र का चीनी परता 9.49 प्रतिशत है।  10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित  प्रदेश में बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार, नई चीनी मिलों की स्थापना तथा मिलों की पेराई क्षमता में 1,28,500 टी.सी.डी. वृद्धि से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। मिलों के आधुनिकीकरण व औद्योगिक पुनरुद्धार से 10 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। विगत 9 वर्ष से लगभग 6924 करोड़ का अतिरिक्त पूंजी निवेश किया गया है। एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 188 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।  गन्ना किसानों की समस्या के समाधान के लिए टोल फ्री 1800-121-3203 एक्टिव गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आधुनिक तकनीक एवं डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। ई-गन्ना ऐप, ऑनलाइन सर्वे, पारदर्शी पर्ची वितरण एवं शिकायत निवारण प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों को बड़ी राहत व सुविधा प्रदान की है। आज लाखों किसान मोबाइल के माध्यम से घर बैठे गन्ना संबंधी समस्त जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री कॉल सेन्टर नम्बर 1800-121-3203 की स्थापना की गयी है, जो 24 घण्टे संचालित है।

राम मंदिर में 29 मई को होगा बड़ा आयोजन, 2000 महिलाओं की मौजूदगी से बनेगा खास माहौल

अयोध्या अयोध्या में स्थित राम मंदिर एक बार फिर ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है. आगामी 29 मई को राम मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा. इसमें देशभर से करीब 2000 महिलाएं भाग लेने आएंगी. इस विशेष आयोजन में प्रमुख रूप से साध्वी ऋतंभरा शामिल होंगी, जो राम मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित दुर्गा मंदिर पर विधिवत ध्वजारोहण करेंगी. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया जाएगा।  राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी महिलाओं, संतों और विभिन्न संगठनों की प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है. कार्यक्रम में शामिल होने वाली महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा के रूप में मंदिर परिसर पहुंचेंगी, जिससे पूरे आयोजन को सांस्कृतिक भव्यता भी मिलेगी. राम मंदिर ट्रस्ट इस आयोजन की तैयारियों में पूरी तरह जुटा हुआ है. सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं के स्वागत, भोजन, आवास और मंदिर परिसर की सजावट तक की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।  ट्रस्ट की ओर से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों और संत समाज को निमंत्रण भेजा जा रहा है. जानकारी के अनुसार राम मंदिर परिसर में बने 18 मंदिरों में क्रमश ध्वजारोहण कार्यक्रम चल रहा है. इसी श्रृंखला में परकोटे के भीतर स्थित दुर्गा मंदिर पर 29 मई को ध्वजारोहण किया जाएगा.धार्मिक मान्यता के अनुसार ध्वजारोहण को शक्ति, आस्था और विजय का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में साध्वी ऋतंभरा की मौजूदगी इस आयोजन को और अधिक विशेष बना रही है.रामनगरी अयोध्या में होने वाला यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक वातावरण को और मजबूत करेगा बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका और शक्ति को भी नई पहचान देने का प्रयास करेगा।  राम मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी और विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि राम मंदिर परिसर में स्थित परकोटे के मंदिरों पर ध्वजारोहण का कार्य चल रहा है. 29 मई को मां दुर्गा के मंदिर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न होगा. इसकी तैयारी में राम मंदिर ट्रस्ट जुट चुका है. इस पूरे कार्यक्रम 2000 महिला शामिल होंगी. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी साध्वी ऋतंभरा होगी।  राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर के मुख्य शिखर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में ध्वजारोहण किया था. उसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया. फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. अब राम मंदिर परिसर में राम मंदिर आंदोलन में अग्रिम भूमिका निभाने वाली साध्वी ऋतंभरा 29 तारीख को ध्वजारोहण करने आ रही हैं. 2000 महिलाओं को बैठने के लिए कुर्सियां लगाई जा रही हैं. एक भव्य मंच भी तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही राम भक्त अब राम मंदिर परिसर में स्थित सभी मठ मंदिरों में दर्शन पूजन कर रहे हैं. राम भक्तों को किसी प्रकार कोई दिक्कत ना हो इसको लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।